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  • MHADA: किराया मांगने गये तो पुलिस की कर दी पिटाई, म्हाडा कार्यालय में हंगामा

    MHADA: किराया मांगने गये तो पुलिस की कर दी पिटाई, म्हाडा कार्यालय में हंगामा

    रिडेवलपमेंट के तहत निर्माण किए जा रहे म्हाडा के प्रोजेक्ट में मकान मालिक को किराये का पैसा देने की जगह म्हाडा के अधिकारी द्वारा मार पीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जबकि पीड़ित एक पूर्व पुलिस अधिकारी है। ऐसे में आम नागरिकों के साथ कैसा सलुक किया जाता होगा? इसपर सवाल खड़े हो रहे हैं। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    खेरवाड़ी पुलिस ने म्हाडा के उपाध्यक्ष संजीव जायसवाल और 12 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक पूर्व पुलिस अधिकारी (शिकायतकर्ता) पर शारीरिक हमला करने और गैरकानूनी तरीके से लोगों को इकट्ठा करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। कथित तौर पर जायसवाल ने म्हाडा कार्यालय में शिकायतकर्ता को थप्पड़ मारा, जिसके बाद सुरक्षा कर्मचारियों और अधिकारियों ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ मारपीट की। इसके साथ ही जायसवाल ने कथित तौर पर उसे जान से मारने की धमकी दी। मामला 26 दिसंबर को दर्ज हुआ। लेकिन, पुलिस ने अभी तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

    क्या है मामला?

    खेरवाड़ी पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता, 60 वर्षीय विजय चालके, अंधेरी पश्चिम में रहने वाले एक सेवानिवृत्त सहायक पुलिस अधिकारी हैं। जो पहले डीएन नगर में स्थित म्हाडा (महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण) के तहत मंगलमूर्ति सोसाइटी नामक एक इमारत में रहते थे। इमारत का म्हाडा द्वारा पुनर्विकास किया जा रहा है। 2016 से चालके और 12 अन्य परिवारों को म्हाडा से उनका किराया नहीं मिला है। चालके ने इसको लेकर म्हाडा में शिकायत दर्ज कराई थी। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

    शिकायत करने का नतीजा

    26 दिसंबर को चालके और बाकी परिवार के अन्य सदस्य पिछला किराया के बारे में पूछताछ करने म्हाडा कार्यालय गए हुए थे। विजिटिंग रूम में प्रतीक्षा करते समय, जायसवाल शाम करीब 5 बजे पहुंचे और चालके से कहा, कि वह फिर से कार्यालय नहीं आएंगे और अन्य लोगों से बाद में आने के लिए कहा। जब चालके ने इस पर सवाल उठाया, तो कथित तौर पर जायसवाल नाराज हो गए और उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके तुरंत बाद, लगभग 10 से 12 सुरक्षा कर्मचारी और अन्य कर्मचारी विजिटिंग रूम में पहुंचे। वे चालके को दूसरे कमरे (कमरा नंबर 520) में ले गए और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। कथित तौर पर कुछ सुरक्षा गार्डों ने चालके के हाथ और पैर पकड़ लिए, जबकि जायसवाल और अन्य ने उन्हें मुक्कों और लात-घूंसों से पीटा। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

    पुलिस ने लिया जायज़ा

    जायसवाल ने चालके को कथित तौर पर धमकाया और कहा कि वह पुलिस आयुक्त को सूचित करेंगे, उन्हें मुठभेड़ में मार देंगे और उनकी पेंशन बंद कर देंगे। कथित तौर पर आरोपियों ने चालके की सोने की चेन और ईयरफोन भी तोड़ दिए। पुलिस जल्द ही घटनास्थल पर पहुंची और चालके को इलाज के लिए सांताक्रूज ईस्ट के वी.एन. देसाई अस्पताल ले गई। इसके बाद चालके ने जायसवाल और 12 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

  • Mumbai: सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी ने की ECG, अस्पताल को मिला लिगल नोटिस

    Mumbai: सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी ने की ECG, अस्पताल को मिला लिगल नोटिस

    मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी द्वारा इकोकार्डियोग्राम (ECG) किए जाने के सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पता चला है कि सफाई कर्मचारी ने 29 दिसंबर को एक मरीज पर ईसीजी किया था। इसी सिलसिले में अस्पताल को लिगल नोटिस दिया गया है। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    सरकारी अस्पताल में गड़बड़ी और लापरवाही की खबर तो हमेशा आती रहती है। लेकिन एक सफाई कर्मचारी डाक्टर बनकर मरीजों का इलाज करने का सनसनीखेज मामला पहली बार सामने आया है। मुंबई के गोवंडी स्थित शताब्दी अस्पताल को एक कानूनी नोटिस मिला है। जिसमें अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी ने कथित तौर पर इकोकार्डियोग्राम (ईसीजी) किया है। पता चला है कि सफाई कर्मचारी ने 29 दिसंबर को एक मरीज पर ईसीजी किया था। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    कैसे मिली जानकारी?

    इस घटना की जानकारी तब प्रकाश में आई जब शहर के वकील आबिद अब्बास सैय्यद ने मुख्यमंत्री और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न राज्य अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। खबर के मुताबिक, एडवोकेट सैय्यद ने इस घटना को मेडिकल प्रोटोकॉल और मरीज सुरक्षा का घोर उल्लंघन बताया है। हालांकि अस्पताल ने इस घटना से इनकार नहीं किया, लेकिन उन्होंने कर्मचारी की हरकत का बचाव करते हुए कहा, कि सफाई कर्मचारी “प्रक्रिया करने के लिए पर्याप्त शिक्षित और योग्य था।” (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    बताया गलतफहमी

    अस्पताल प्रशासन के एक सदस्य ने कहा, “ईसीजी मशीनें सिर्फ़ एक बटन दबाने से काम करती हैं। कर्मचारियों ने सिर्फ़ ईसीजी किया था और उचित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पेशेवर डॉक्टरों ने रिपोर्ट ली थी।” पहले इसी सदस्य ने इस घटना को “गलतफ़हमी” भी बताया। अस्पताल ने आगे कहा कि मरीज़ नियमित जांच के लिए अस्पताल आया था और उसकी हालत गंभीर नहीं थी। हालांकि, अपने नोटिस में अधिवक्ता सैय्यद ने कहा कि इस घटना ने अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रशासन की ज़िम्मेदारी पर भी सवाल उठाया है। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में तत्काल सुधार

    एड्वोकेट सैय्यद ने अधिकारियों से घटना की जांच करने का आग्रह किया है और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग की है। सैय्यद ने अपने नोटिस में कहा, “मरीजों को उम्मीद है कि उन्हें योग्य स्वास्थ्य सेवा पेशेवर डॉक्टरों द्वारा इलाज किया जाएगा। लेकिन इस तरह की घटनाएं लापरवाही की चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करती हैं।” (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि खबरों से पता चला है कि शताब्दी अस्पताल और अन्य सरकारी सुविधाओं के कुछ डॉक्टर निजी क्लीनिक चला रहे हैं, जो उन नियमों का उल्लंघन है, जो उन्हें निजी प्रैक्टिस करने से रोकते हैं। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

  • Shirpur News : चौंकाने वाला.. राशन के चावल में मिला प्लास्टिक मिश्रित चावल

    Shirpur News : चौंकाने वाला.. राशन के चावल में मिला प्लास्टिक मिश्रित चावल

    धुले समाचार: चावल खाने से ग्रामीणों के पेट में दर्द हो रहा है। महाराष्ट्र के धुले जिले के शिपुर में एक राशन दुकानदार ने प्लास्टिक के अनाज के साथ चावल का वितरण किया। (Shirpur News, Shocking, plastic mixed rice found in ration rice)

    महाराष्ट्र न्यूज़ डेस्क
    धुले- सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने के लिए सस्ते अनाज की दुकानों से राशन कार्ड धारकों को गेहूं और चावल वितरित किया जाता है। लेकिन, राशन में अनाज अच्छी गुणवत्ता का नहीं होने से यह बात एक बार फिर सामने आई है। खबर के मुताबिक, शिरपुर तालुका के थालनेर में राशन के चावल में प्लास्टिक से मिश्रित चावल का चौंकाने वाला मामला सामने आया। (Shirpur News, Shocking, plastic mixed rice found in ration rice)

    जानकारी के मुताबिक, नासिक से नजदीक, धुले जिले के शिरपुर, थालनेर में सरकारी राशन की दुकान से प्लास्टिक के दानों के साथ चावल का वितरण किया गया है। नागरिकों द्वारा इसकी जानकारी गांव के सरपंच के संज्ञान में लाने के बाद, सरपंच ने संबंधित राशन की दुकान पर जाकर स्वयं निरीक्षण किया और इसके बाद जानकारी उजागर किया गया। (Shirpur News, Shocking, plastic mixed rice found in ration rice)

    ग्रामीणों ने की जांच की मांग..

    जब उत्त चावल को जलाया गया तो चावल प्लास्टिक की तरह एक-दूसरे से चिपक गये और कोयले में तब्दील हो गये। सरपंच ने यह भी आरोप लगाया है कि नागरिकों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। सम्बंधित (राशन दुकान) यह चावल राशन दुकान में कैसे आया और इस प्लास्टिक चावल में मिलावट किसने की ? थालनेर के सरपंच सहित ग्रामीणों ने इन सभी मामलों की गहन जांच की मांग की है। (Shirpur News, Shocking, plastic mixed rice found in ration rice)

  • Mumbai: जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज

    Mumbai: जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज

    राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी के आंकड़े चौका देने वाले प्रकाश में आ रहे हैं। इस साल सिर्फ जनवरी से अगस्त के बीच कुल 499 केस दर्ज हुए हैं। जो राज्य में सरकारी महकमों मे भ्रष्टाचार चरम सीमा पर होने का सबूत पेश कर रहा है। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    – राज्य में सिर्फ 9 महिनों के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज मुकदमे, यहां के सरकारी महकमों के काली कमाई का खुलासा कर रहा है। महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Maharashtra Anti Corruption Bureau) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पता चला है कि ज्यादातर रिश्वतखोरी के मामले राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों से संबंधित हैं, इसके बाद पुलिस, पंचायत समिति और जिला परिषद के अधिकारी शामिल हैं। इस साल जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज किए गए हैं। जिनमें 472 रिश्वतखोरी, 22 आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े पांच अन्य मामले शामिल हैं। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन ..

    सबसे ज्यादा 134 मामले राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। इसके बाद पुलिस 88, पंचायत समिति 42, जिला परिषद 32, महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) 27 और शिक्षा विभाग के खिलाफ 24 केस दर्ज किए गए हैं। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    कौन सा विभाग सबसे ज्यादा है भ्रष्ट ?

    महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) ने खुलासा करते हुए बताया कि रिश्वतखोरी के मामलों में शामिल ज्यादातर 345 अधिकारी तृतीय श्रेणी के सरकारी अधिकारी हैं। इसके बाद 71 द्वितीय श्रेणी के अधिकारी, 46 प्रथम श्रेणी के अधिकारी और 28 चतुर्थ श्रेणी के अधिकारी हैं। 186 रिश्वतखोरी के मामलों में शामिल रिश्वत की रकम 1.49 करोड़ रुपये है। रिश्वत की सबसे अधिक 41.24 लाख रुपये की राशि पुलिस के अधिकारियों से संबंधित है। उसके बाद राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग 21.13 लाख रुपये, जिला परिषद 14.57 लाख रुपये और पंचायत समिति 9.6 लाख रुपये का जब्त किए गए है। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

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  • मनपा जनसंपर्क विभाग बना भ्रष्टाचार का अड्डा

    मनपा जनसंपर्क विभाग बना भ्रष्टाचार का अड्डा

    • अपात्र अखबारों को विज्ञापन का आशीर्वाद
    • देर रात तक प्रेस रूम का अवैध इस्तेमाल
    • बाकि अखबारों से दोगलापन
    • भ्रष्ट कारोबार में मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल
    • Mumbai BMC Public Relations Department Office Corruption News

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    महानगर पालिका का जनसंपर्क विभाग पूरी तरह भ्रष्टाचारियों का अड्डा बन गया है। जनसंपर्क अधिकारी अब बिना टेंडर के अखबारों को विज्ञापन भी जारी नही कर रहे है। कुछ अखबार वाले दैनिक अखबार के नाम पर मनपा से विज्ञापन ले रहे है जिनका अखबार डेली आता ही नहीं है और तो और अखबार मुंबई में नही महराष्ट्र के बाहर छपता है। (Mumbai BMC Public Relations Department Office Corruption News)

    भ्रष्ट कारोबार में मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल

    यही नहीं मंत्रालय के कुछ अधिकारी भी इस धोखाधड़ी में शामिल है। जो डीजीपीआर में अपात्र अखबारों को लिस्टेड कर रहे है। क्या राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी इस पर ध्यान देते है? इसमें केंद्र सरकार के लोग भी शामिल है। सबसे बड़ी बात ये है कि ऐसे फर्जी अखबार मालिकों पर कार्रवाई क्यों नही की जाती है? मनपा का जनसंपर्क अधिकारी ऐसे भ्रष्ट कार्यो में पूरी तरह लिप्त है। लेकिन ईमानदारी के साथ केवल लूट और अवैध लेनदेन करने में व्यस्त रहता है। वही मनपा मुख्यालय स्थित पत्रकार रूम में अवैध तरीके से रात 11 बजे तक कुछ कथित पत्रकार अपना अड्डा बनाकर बैठते है। जिस पर जनसंपर्क अधिकारी का पूरा आशीर्वाद है। (Mumbai BMC Public Relations Department Office Corruption News)

    देर रात तक प्रेस रूम का अवैध इस्तेमाल

    मनपा मुख्यालय शाम 6 बजे बंद हो जाता है। पर कथित पत्रकार रात के 11 बजे तक यहां बैठकर क्या करते हैं? कौन सी खबर का आधी रात में विशलेषण किया जाता है? ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं। ये तो पत्रकार और जनसंपर्क अधिकारी ही बता सकते है। जिम्मेदार जनसंपर्क अधिकारी दोपहर को आते है और शाम को 7 बजे के आसपास चले जाते है। ऐसे अवैध कार्यो पर मनपा आयुक्त लगाम लगाएंगे या इनको लूट पाट करने का आशीर्वाद देंगे। (Mumbai BMC Public Relations Department Office Corruption News)

  • अंधेरी ईस्ट BMC का डी.ओ. मंदार तारी के दो निजी सहायक 75, लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार: डी.ओ. फरार

    अंधेरी ईस्ट BMC का डी.ओ. मंदार तारी के दो निजी सहायक 75, लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार: डी.ओ. फरार

    अंधेरी ईस्ट के चार मंजिला अवैध इमारत को संरक्षण देने की मंदार तारी ने मांगी दो करोड़ की रिश्वत। 75 लाख की पहली किश्त लेते उसके दो निजी सहायक गिरफ्तार..

    सुरेंद्र राजभर
    मुम्बई-
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के शीर्ष अधिकारी भले ही दावा करते फिरें, कि मनपा में हर कार्य न्याय संगत व विधि विधान से होता है। किंतु समय-समय पर अधिकारियों, कर्मचारियों का भ्रष्टाचार उजागर हो ही जाता है। जब कि वे रिश्वत लेते हुए पकड़े जाते हैं। तभी यह पता चल जाता है, कि आरोपी अधिकारी के द्वारा ली जाने वाली रिश्वत के पैसों में कितने शीर्ष अधिकारियों का कितना हिस्सा होता है। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

    ऐसी ही एक घटना अंधेरी ईस्ट BMC के/पूर्व, वार्ड में कार्यरत कार्यकारी अभियंता (D.O) मंदार अशोक तारी द्वारा एक अवैध निर्माण कर्ता से 2 करोड़ रुपयों की रिश्वत की पहली किश्त-75 लाख रुपये लेते हुए पकड़े जाने के उपरांत उजागर हुई है। जिसे कि भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते (ACB) ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

    क्या है मामला?

    प्राप्त सुचनाओं के अनुसार जे. बी. नगर अंधेरी ईस्ट में शहीद भगत सिंह कॉलोनी अंतर्गत प्लॉट नं.191, 192 के भूखंड पर एक चार मंजिला इमारत है। जिसकी दो मंजिले अवैध रूप से निर्मित की गई है। उसी अवैध दो मंजिलों को बचाने के लिए उक्त कार्यकारी अभियंता एवं पदनिर्देशित अधिकारी (DO) मंदार अशोक तारी ने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। बताया जाता है, कि मंदार तारी की जब से डी.ओ. के पद पर नियुक्ति हुई है, तभी से अंधेरी व विलेपार्ले के क्षेत्रों में अंधाधुंध अवैध निर्माण किये जा रहे हैं। जिन्हे कि कार्यकारी अभियंता मंदार तारी का संरक्षण प्राप्त है। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

    2 करोड़ रुपये की रिश्वत ..

    किंतु उक्त जे.बी. नगर की इमारत की दो अवैध मंजिलों को संरक्षण देने के लिए नियुक्त डी.ओ. मंदार तारी का 2 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग करना अवैध निर्माणकर्ता को रास नहीं आया और उसने 31 जुलाई 2024 को इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से कर दी। मामले की गंभीरतानुसार ए.सी.बी. ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए, 6 अगस्त 2024, को मंदार तारी के दो निजी वसूली कर्ताओं मोहम्मद यासीन शहा और ड्राईवर प्रतिक पिसे को दो करोड़ की तय रिश्वत की रकम की पहली किश्त 75 लाख रुपये नकद लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

    दो की गिरफ्तारी ..

    गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि उक्त रकम वे अंधेरी ईस्ट BMC के/पूर्व, वार्ड मे इमारत व कारखाना विभाग के कार्यकारी अभियंता एवं पदनिर्देशित अधिकारी मंदार अशोक तारी के लिए उनके ही दिशा निर्देश पर रिश्वत के पैसे ली है। ए.सी.बी. के अधिकारी उक्त दोनों से सख्ती से पूछताछ कर रहे हैं। जबकि कार्यकारी अभियंता मंदार तारी फरार बताया जाता है। ए.सी.बी. अधिकारी मंदार तारी के अन्य ठिकानों पर छापे मारी कर रहे हैं। जहां, उन्हें जांच के दौरान उसकी अवैध संम्पतियाँ (चल/अचल) मिली है। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

    पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी ..

    जानकारों का कहना है कि उसी के/पूर्व, वार्ड से लगभग दो साल पहले भी कार्यकारी अभियंता सतीश पोवार को ए.सी.बी. ने 50 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जबकि सतीश पोवार की गिरफ्तारी से कार्यकारी अभियंता मंदार तारी को सबक लेना चाहिए था। उक्त कारवाई अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संदीप दीवान व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेंद्र सांगले के मार्ग दर्शन में पुलिस निरीक्षिका सुप्रिया नाटे, अपराध अन्वेषण अधिकारी गणेश पिंगुवाले ने उक्त दोनों अधिकारियों ने अपने संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया है। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

    पूर्व कार्यकारी अभियंता सतीश पोवार की तरह ही ए.सी.बी. ने छापामारी की कारवाई कर कार्यकारी अभियंता मंदार तारी की करोड़ों की चल-अचल संम्पति बरामद की है। मनपा प्रशासन कब अपने अधिकारियों पर ध्यान देगा? या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को ही संपूर्ण मनपा अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर मुसल्लत कर देना चाहिए। (Mumbai Andheri K/East BMC, Corruption News, BMC Corruption News)

  • कांदीवली बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों के चलते बढ़ता अवैध निर्माण का ग्राफ।

    कांदीवली बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों के चलते बढ़ता अवैध निर्माण का ग्राफ।

    • उपायुक्त डॉ. भाग्यश्री कापसे के आदेश की उड़ रही धज्जियां।
    • डी. ओ. अभय जगताप की रिश्वतखोरी
    • के चलते पोइसर के अवैध निर्माण बरकरार।
    • अभियंता प्रमोद ब्रम्हानकर ने वार्ड क्रमांक:२३, के अवैध निर्माणों को बचाने का लिया ठेका।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    महानगर पालिका आर/ दक्षिण विभाग के कार्यक्षेत्र कांदिवली (पूर्व) वार्ड क्रमांक:२३, पोइसर, गांवदेवी रोड, पूजा मेडिकल के बगल में आपो. मस्जिद स्थित ठेकेदार प्रदीप चौधरी द्वारा भूतल संरचना (व्यापारिक दुकान) के ऊपर पहली मंजिल की संरचना का अनधिकृत निर्माण कार्य किया गया है। इसी क्रमानुसार वार्ड क्रमांक:२३, पोइसर, गांवदेवी रोड, पूजा मेडिकल क्रॉस रोड, इंद्रा चौक, अपोजिट सत्तार चाल स्थित अवैध निर्माणकर्ता शुक्ला द्वारा भूतल संरचना (दो व्यापारिक दुकानों) के ऊपर पहली मंजिल की संरचना का अनधिकृत निर्माण कार्य किया गया है।
    इसी तर्ज पर ठेकेदार शंकर झा द्वारा वार्ड क्रमांक:२३, रामधनी राजभर, चाल नं.२, पोइसर, गांवदेवी रोड स्थित भूतल संरचना (व्यापारिक दुकान) के ऊपर पहली मंजिल की संरचना का अनधिकृत निर्माण कार्य किया गया है।

    मनपा कानून क्या कहता है?

    उक्त अनधिकृत निर्माण कार्यो पर बृहन्मुंबई महानगर पालिका अधिनियम, १८८८ की धारा ३५१(१A) के मुताबिक नोटिस देने का प्रावधान है, लेकिन डी. ओ. अभय जगताप ने नोटिस न देकर परिमंडल- ७, की उपायुक्त, डॉ. भाग्यश्री कापसे और वार्ड ऑफिसर ललित तलेकर के नाम पर उक्त अवैध निर्माणकर्ता व ठेकेदारों से लाखों रुपयों की वसूली करके उक्त तीनों अनधिकृत निर्माण कार्यों को अभी तक बरकरार रखा है।

    कांदीवली बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारी

    वर्तमान सहाय्यक आयुक्त (प्रभारी) ने उक्त अवैध निर्माणों को लेकर कार्यवाही का आदेश सहाय्यक अभियंता (प्रभारी) प्रमोद ब्रह्मणकर को दिया है। अब ऐसे में कार्यवाही करने की बजाय सहाय्यक अभियंता ने उक्त अवैध निर्माणों को बचाने का ठेका ले लिया है। अवैध निर्माणों को जिस तरह डी.ओ. अभय जगताप और प्रमोद ब्रम्हानकर जैसे अभियंता खुले आम संरक्षण दे रहे है, तो क्या इनके ऊपर भी कार्यवाही की जानी चाहिए? भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अवैध निर्माण का दंश झेल रहे लोगों का सवाल खड़ा हो रहा है।

    सहायक आयुक्त की क्या है जिम्मेदारी?

    हालांकि बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त भूषण गगरानी की छवि को धूमिल होने से बचाने की जिम्मेदारी इस समय के सहाय्यक आयुक्त की होती है। यह जिम्मेदारी निभाने में ये कितने सफल होते हैं, यह उक्त अवैध निर्माणों पर की जाने वाली कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। मनपा आर/ दक्षिण के इस इमारत बांधकाम विभाग का आलम यह है कि यहाँ गरीब कोई भी व्यक्ति या कोई विधवा महिला अपने मकान की रिपेरिंग भी करता या करती है, तो उस पर मनपा का हथौड़ा अगले ही दिन चल जाता है। जबकि बड़े ठेकेदारों के वहाँ मनपाकर्मी जी हुजूरी करते नजर आते हैं। कार्यवाही के नाम पर नोटिस तो निकाल दी जाती है, पर कार्यवाही नहीं होती है। मनपा कर्मियों का यह दोगला पन मनपा की इज़्ज़त तार तार कर रहा है। पर इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इनकी जेबे गर्म होने से मतलब है।

  • जीआरपी वेलफेयर में भारी घपला, सेंट्रल एजेंसी से जांच की मांग

    जीआरपी वेलफेयर में भारी घपला, सेंट्रल एजेंसी से जांच की मांग

    • जीआरपी के जवानों के पगार से प्रति माह 100 रुपये सोसायटी में रहने वालों से 50 रुपये काटे जाते है।
    • पुलिस सोसायटी में अधिकांश इमारतों की हालत काफी भयावह हो गयी है। वो कभी भी गिर सकती है।
    • Mumbai GRP Corruption News

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    जब से होर्डिंग कांड हुआ है, तब से जीआरपी के नए नए घपले खुलने लगे है। जीआरपी के जवानों के पगार से प्रति माह 100 रुपये वेलफेयर के नाम पर काटे जाते है और जो उस सोसायटी में रहता है उसके पगार से 50 रुपये कट जाते है। इसके अलावा पतपेढ़ी से भी करीब बीसो लाख का घपला है। पेट्रोलपंप मैदान और हॉल से भी बड़े पैमाने पर भाड़ा लिया जाता है। ये सब पैसे किधर गायब हुए कितने पुलिस कर्मियों को वेलफेयर का लाभ मिला है? इनके परिवार को कितनी सहायता दिया गया है? (Mumbai GRP Corruption News)

    Indian fasttrack News Network

    पुलिस सोसायटी में अधिकांश इमारतों की हालत काफी भयावह हो गयी है। वो कभी भी गिर सकती है। उसमें रहने वाले पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की हालत काफी डरी हुई है। इसकी शिकायत बार बार पुलिस आयुक्त से किया गया है। फिर भी अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई है। पुलिस महासंचालक प्रज्ञा सरोदे और पुलिस आयुक्त रविन्द्र शिस्वे ने क्या किया है? कौन सी ईमानदारी दिखा रहे है? सहायक आयुक्त (प्रभारी) शहाजी निकम भी इसके लिए दोषी है। इन पर कार्रवाई कब होगी? ये पुलिसकर्मी जानकारी प्राप्त करना चाहते है। (Mumbai GRP Corruption News)

    जीआरपी,
    पुलिस आयुक्त रविन्द्र शिस्वे की फाइल तस्वीर

    जीआरपी में घपले को लेकर जांच की मांग ..

    यहां अधिकारी, पुलिसकर्मियों के जानमाल से खिलवाड़ कर रहे है। घाटकोपर स्थित पुलिस वसाहत की हालत काफी खस्ता है।पुलिसकर्मियों में इसकी चर्चा जोरों पर है, कि हमारी पगार से पैसा भी कटता है और सुविधा भी नही मिलती है। जो हाल पेट्रोलपंप का हुआ वही हाल हमारी बिल्डिंग का भी न हो जाय। अधिकारियों की मनमानी काफी बढ़ गयी है। ईमानदारी का ढोंग बंद करके सही काम होना चाहिए। कितने करोड़ का घपला हुआ है। इसकी जांच किसी सेंट्रल एजेंसी से करवानी चाहिए, जिससे ये लूट का खेल बंद होना चाहिए। (Mumbai GRP Corruption News)

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  • Global Warming: धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं है–सुप्रीमकोर्ट

    Global Warming: धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं है–सुप्रीमकोर्ट

    • जंगल बचाने केवल आदिवासी ही क्यों? पुरा देश क्यों नहीं?
    • Global Warming पर सरकारों में सकारात्मक दृष्टिकोण कहाँ ?
    • अवैध निर्माण के लिए शासन प्रशासन ही है जिम्मेदार..
    • क्या हर बात के लिए न्यायालयों पर ही आश्रित रहें?
    • शासन प्रशासन का कोई दायित्व नहीं ?

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    Global Warming आज धरती, पर्यावरण खतरे में है।ग्लोबल वार्मिंग के खतरे वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद जंगल काटे जा रहे हैं। हसदेव जंगल बचाने केवल आदिवासी ही क्यों आंदोलित हैं। पूरा देश क्यों नहीं? हसदेव के लाखों पेड़ मात्र एक व्यक्ति के लिए काटे जा रहे हैं, जो पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है। मुंबई में समुद्र तट से 500 मीटर दूर ही निर्माण का कानून बना है, लेकिन महानगर पालिका के भ्रष्ट अधिकारियों को मुंबई और मुंबईकरों की तनिक भी चिंता नहीं है। बीएमसी के उच्च जिम्मेदार अधिकारी और राज्य सरकार आंखें मूंदे हुए हैं।

    मुंबई में मनपा की खाली जमीनों का अधिकारी और नेता सौदा कर अपनी जेबें भर रहे हैं। चुनाव का पर्व भूमाफियाओं और बीएमसी अधिकारियों के लिए अवैध निर्माण का सुनहरा मौका देता है कालाधन अर्जित करने का। पत्रकार अपनी भूमिका निभाते हैं। फोटो सहित गैरकानूनी निर्माण की घटना प्रकाशित करते हैं। बीएमसी आयुक्त, शहरी विकास मंत्री सहित सभी जिम्मेदार चुप रहते हैं। कोई कार्रवाई नहीं होती। अवैध निर्माण में पुलिस, विधायक, सांसद और कार्पोरेटरों का भी सहयोग होता है। सभी अपने हिस्से का कमीशन लेकर अनदेखा अनसुना कर देते हैं। Global Warming

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    Global Warming News

    अहमदाबाद से लेकर सुदूर साउथ में भी अवैध रूप से जंगल, सरकारी जमीन, चारागाह, तालाब सब पर कब्जा किया जाता है। कुछ समय पूर्व रामटेक की घटना का स्मरण होगा ही। उत्तराखंड में खुद सरकार प्रकृति के विरुद्ध निर्माण कर रही है, जिससे जोशी मठ को खतरा हो गया है। उसका अस्तित्व मिटने की कगार पर है। उत्तराखंड की त्रासदी याद होगी जब नदी की सीमा में चार चार महल के होटल ताश के पत्तों की तरह ढहकर नदी की धार में बह गए थे। Global Warming

    अवैध निर्माण मात्र ग्रामप्रधानों, विधायकों, सांसदों और पुलिस जवाबदेह होती है। उत्तर प्रदेश में जिन माफियाओं के होटल रेस्टोरेंट भव्य अट्टालिकाएं योगी ने बुलडोज कराई उसके गैर कानूनी तरीके से निर्माण के समय कौन कौन अधिकारी, विधायक, सांसद थे उनका पता लगाकर साथ में उनके घर भी बुलडोजर से गिराना चाहिए था लेकिन सरकारें ऐसा नहीं करेंगी। जब कोई संपत्ति ढहाई या तोड़ी जाती है तो देश की संपत्ति का नुकसान होता है। Global Warming

    गैरकानूनी निर्माण ढहाने या तोड़ने की जगह गरीबों का आशियाना और सरकारी दफ्तर बैंक को दे देना चाहिए। सारे बैंक की अपनी बिल्डिंग नहीं है। उनसे भाड़ा सरकार ले सकती थी। यह सकारात्मकता होती लेकिन हमारी सरकारों में सकारात्मक दृष्टिकोण कहां? अवैध निर्माण के लिए शासन प्रशासन ही जिम्मेदार होता है। अवैध निर्माण न गिराकर अधिकारियों विधायकों सांसदों के शीश महल जब्त कर सरकारी उपक्रमों और निर्धन बिना पक्की छत वाले गरीबों को दे देना ही सकारात्मक कदम होगा। Global Warming

    Global Warming,

    धरती के पर्यावरण की रक्षा वृक्ष ही करते हैं।अब अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए वहां झोपड़ियां बनाकर सदियों से रहने और जंगल से ही अपनी रोजी रोटी कमाने वाले गरीबों को क्यों उजाड़ा जाए, एक धनवान के लिए जैसा कि हसदेव जंगल के लाखों पेड़ों को काटकर खत्म किया जा रहा है। याद रहे सुप्रीमकोर्ट ने सही कहा, धरती सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं हैं। यहां विभिन्न तरह के पशु पक्षी और अन्य जीव भी रहते हैं। वे जंगल और खाली जमीन पर ही आश्रित रहते हैं। पहले लोग अपने धोर लेकर सुबह जंगल जाते थे। पशुओं को जंगल में चारा मिलता है। चारागाह खत्म पशुओं का चारा खत्म। Global Warming

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    क्या हर बात के लिए हम न्यायालयों पर ही आश्रित रहें? शासन प्रशासन का कोई दायित्व नहीं है। अवैध निर्माण के लिए राजनीति का वोट बैंक प्रमुख होता है। इसीलिए जासंबिखकार अवैध निर्माण कराए जाते हैं।जैसे लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही बीएमसी के जिम्मेदार भूमाफियाओं से साठ गांठ कर उनसे करोड़ों रुपए वसूली कर अपने सरकारी आकाओं तक पहुंचाते रहते हैं जिससे कभी अवैध बांधकाम नहीं टूटते। Global Warming

  • कैसे होंगे देश के सांसद ..? Election 2024

    कैसे होंगे देश के सांसद ..? Election 2024

    • ए.डी.आर. की रिपोर्ट…!
    • कैसी राजनीति बना दी गयी है भारत की..!
    • अधिकांश विधायक और सांसद अपराधी प्रवृत्ति के…!
    • दुर्भाग्य ही है यह..! कौन कहेगा भारत…

    सुरेंद्र राजभर/ मंसूर शेख
    मुंबई-
    ए.डी.आर. की रिपोर्ट पढ़ने पर सिंगापुर के प्रधानमंत्री का संसद में दिया गया भाषण अक्षरशः सत्य प्रमाणित होता है। उन्होंने कहा था, नेहरू के देश में संसद अपराधियों का गढ़ बन गया है। कैसी राजनीति बना दी गई है भारत की जिसमें अधिकांश विधायक और सांसद अपराधी प्रवृत्ति के होते चले आ रहे हैं। देश का दुर्भाग्य ही है यह। कौन कहेगा भारत राम, कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर जैन और सिख गुरुओं का है? कौन कहेगा संतों, ऋषियों, महर्षियों, ज्ञानियों, विज्ञानियों का देश है यह भारत? स्वार्थलिप सत्तासुख भोग करने, देश को लूटने वाले राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल अपराधियों को टिकट देंगे। कौन कह सकता है यह वही देश है जहां वेद, शास्त्र, उपनिषद, पुराण लिखे गए? कौन कहेगा कि दुनिया को अशिक्षा के अंधकार से निकालने के लिए ज्ञान विज्ञान का परिचय देने वाला देश है भारत? कौन कहेगा कि यही वह पवित्र भारत की भूमि है जहां गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन का व्यामोह दूर कर कर्तव्य पथ पर लाने के लिए ज्ञान दिया था? कौन कहेगा कि आज का भारत ही सीता, सावित्री, अनुसूया, गार्गी जैसी सती नारियों का देश है? कौन कहेगा आजादी के लिए आंदोलन करने वाले सत्य, अहिंसा के पुजारी गांधी जैसे महात्मा का यह देश है? कौन कहेगा यह अमर क्रांतिकारियों सुभाषचंद्र बोस, शहीदे आजम भगत सिंह, लाहिरी, चंद्रशेखर आजाद, रोशन सिंह, असफाक उलाह खान और सरहदी गांधी का यह देश है? कौन कहेगा रामायण के अमर गायक महर्षि बाल्मीकि, रामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास, रघुवंशम महाकाव्य के महाकवि कालीदास, मीरा, सुर जायसी, कबीर, रहीम, संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम की धरती है यह? कौन कहेगा आजादी की मशाल जलाने वाले, अंग्रेज की छाती में बंदूक की गोलियां उतारने वाले मंगल पांडेय का भारत है यह? कौन कहेगा गुरूदेव रवींद्र नाथ टैगोर और वंदे मातरम के गायक बंकिम चंद्र की तपोभूमि है भारत?

    शर्म आती है आधुनिक राजनीति में…!

    आधुनिक राजनीति में अपराधियों के राजनीतीकरण करने पर शर्म आती है। उन्हें माननीय बनाने पर, कोफ्त होती है देश की नासमझ जनता की सोच पर जो सच्चे और झूठे, साधु और शैतान, सज्जन और दुर्जन में अंतर न कर पाने की मूढ़ स्थिति पर। कौन कहता है भारत का लोकतंत्र परिपक्व हो चुका है? देश की जनता जागरूक हो चुकी है? वह अपना हित अहित सोच ही नहीं सकती!

    गलती जनता की है जो मुट्ठीभर अन्न और चंद सिक्कों के बदले अपना अमूल्य वोट बेच देती है…! अनपढ़ जनता भेड़ की तरह झुंड, विवेकहीन होती है। तभी अपात्र नेता चुनती और भोगती है। दरअसल पार्टियों में इतना अधिक सत्तामोह है कि कोई भी दागी प्रत्याशी को खड़ा करने में परहेज नहीं करता। ऐसे में जनता का दायित्व है दलबदलु अपराधी और धनवान लोगों को वोट ही न दें।

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    ए डी आर की रिपोर्ट..

    पहले फेज का चुनाव 19 अप्रैल को है जिसमें 19 राज्यों के 102 सीटों पर चुनाव होंगे।
    ए डी आर की रिपोर्ट के अनुसार कुल 102 सीटों के लिए 1618 उम्मीदवार खड़े हैं। जिनमें 16% यानी 252 प्रत्याशियों पर गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं। जिसमें हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे संगीन मामले हैं। 19 ऐसे हैं जिन पर हत्या की कोशिश। 15 पर महिलाओं के साथ रेप और 35 पर भड़काऊ भाषण देकर देश में दंगे फैलाने की कोशिश के मामले दर्ज हैं। अपराधी मानसिकता के लोगों को टिकट देने में कोई भी दल पीछे नहीं है। क्योंकि उनकी जीत 200% पक्की मानी जाती है। जिनमे ए आई डी एम के ने 36% , बी एस पी ने 13% , आर एल डी ने 100% , टी एम सी ने 40% , कांग्रेस ने 34% , डी एम के ने 59% , एस पी ने 43% , बी जे पी ने 36% अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को टिकट दिए हैं। ऐसे कुल केवल एक फेज में 1625 लोग हैं जिनमें 28% धनवान भी शामिल हैं। 10% लोगों पर गंभीर अपराध, और 42 सीटें तो ऐसी हैं जहां तीन और इससे अधिक दागी उम्मीदवार खड़े हैं। 7 हत्या के मामले 19 हत्या की कोशिश और 15 तो ऐसे हैं जिन्हें कोर्ट दोषी करार दे चुका है।

    सांसद,

    याद हो कि सुप्रीमकोर्ट ने दागी या आपराधिक मामलों में लिप्त उम्मीदवार बनाए जाने पर रोक लगाने के लिए संसद से कानून बनाने को कहा था, लेकिन सत्ता लोलूप दलों ने कानून नहीं बनाया। जनता को सोचना और निर्णय करना होगा कि पहले फेज में जब इतने अपराधी उम्मीदवार खड़े हैं तो शेष छः में कितने होंगे और अगर ये चुनकर सांसद के तौर पर संसद में पहुंचे तो कैसा और किसके भले का कानून बनाएंगे? याद रहे कि अपराधी और धनवान जनता की समस्याओं पर सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें डर लगता रहेगा कि सवाल पूछा तो एन आई ए, आई टी, सी बी आई और ई डी जैसी सरकारी एजेंसियां उनके पीछे लगा दी जाएगी। जिससे उनकी काली कमाई का कच्चा चिट्ठा खुल जायेगा और वे संसद की जगह जेल में होंगे।

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    कैसे करें जनता अपने सांसद का चयन ?

    इन्हीं अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के माननीय बनने से ही उनसे संबंधित गुर्गों सहित लाखों केस कोर्ट में पेंडिंग पड़े रहते हैं। जिसमें दोष न्यायालयों का दिया जाता है। कारण चुनाव जीत कर वह जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला माननीय सांसद बन चुका होगा।
    आप लोगों से हम कहना चाहते हैं, कि “हे जनता जनार्दन अपना और अपने देश का भविष्य तुम्हें अपने एक वोट से लिखना है। ऐसे दागी और धनवान लोग ही नहीं दलबदलुओं की जमानत जब्त कराकर उन्हें उनकी सही जगह जेल में भेजें। इसी में जनता और राष्ट्र का भला होगा।”