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यात्रियों के टिकट ऑनलाइन बुक हो जाएंगे और क्लिक करने के बाद वेटिंग टाइम नहीं लगेगा। इसके साथ ही यात्री को थोड़े समय के भीतर ही टिकट मिल भी जाएगा। (Indian Railway IRCTC Ticket Booking News)
indian fasttrack (न्यूज़ डेस्क) मुंबई- भारतीय रेल यात्रियों के लिए टिकट की बुकिंग सुविधा को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। मार्च 2025 तक रेलवे यात्री तेज स्पीड के साथ ट्रेन की टिकट बुक कर सकेंगे। भारतीय रेल की इकाई इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी (IRCTC) जल्द ही टिकट बुक करने वाले यात्रियों को प्रतीक्षा अवधि में परेशान न होने के लिए टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ाने जा रहा है। खबर के मुताबिक, यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ने से आम यात्रियों को काफी सहूलियत मिलने वाली है। (Indian Railway IRCTC Ticket Booking News)
खबर के मुताबिक, आईआरसीटीसी (IRCTC) के इस कदम के बाद से यात्रियों के टिकट ऑनलाइन बुक हो जाएंगे और क्लिक करने के बाद वेटिंग भी नहीं करना पडेगा। इस पहल के साथ ही अब टिकट बुकिंग के लिए होने वाले वेटिंग टाइम का झंझट भी खत्म हो गया है। साथ ही आईआरसीटीसी से मिली जानकारी के मुताबिक यात्रियों को पैसे कटने के बाद टिकट जारी न होने की समस्या का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। अब जल्द ही यात्रियों को टिकट बुकिंग करते समय कोई परेशानी नहीं होगी। (Indian Railway IRCTC Ticket Booking News)
वर्तमान में बुकिंग की क्षमता है कम..
आईआरसीटीसी (IRCTC) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संजय जैन से टिकट बुकिंग की समस्याओं के सवाल पर जैसे बुकिंग के समय पैसे कट जाने और भुगतान विफल होने या कन्फर्म टिकट के लिए प्रतीक्षा जैसी समस्याओं पर उन्होंने बताया, कि “टिकट बुकिंग की कम क्षमता के कारण ऐसी समस्याऐं देखने को मिलती है। कभी-कभी लंबा समय भी लगता है। यानी ऑनलाइन टिकट बुकिंग की प्रक्रिया करने वालों की संख्या की तुलना में बुकिंग क्षमता कम है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।” (Indian Railway IRCTC Ticket Booking News)
इसके पहले भी हुआ था अपग्रेड ..
साल 2023 में टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को अपग्रेड करते हुए भारतीय रेल ने टिकट बुकिंग की क्षमता को मौजूदा 25, 000 से बढ़ाकर 2. 25 लाख प्रति मिनट करने का फैसला किया था। खबर के मुताबिक, देशभर में आईआरसीटीसी (IRCTC) के तीन करोड़ यूजर्स हैं। हर दिन नौ लाख से अधिक टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। इनमें यात्रियों द्वारा ऑनलाइन बुकिंग के साथ-साथ एजेंट बुकिंग भी शामिल है। एक जानकारी के मुताबिक भारतीय रेल से हर दिन दो करोड़ से ज्यादा यात्री ट्रेन से यात्रा करते हैं। (Indian Railway IRCTC Ticket Booking News)
NEET PG Result Date and Time How to Really look at Neet PG Result Direct Connection at natboard-edu.in: A legitimacy rundown will likewise be delivered for half of all India standard seats, it will be arranged in view of the imprints got by the competitor.
NEET PG Result 2024 Live Updates: Consideration competitors! The outcomes for NEET PG 2024 tests are supposed to be pronounced by the Public Leading body of Assessments in Clinical Sciences (NBEMS) at any point in the near future. It is guessed that the outcomes will be out before the current week’s over. Be that as it may, there is no affirmation on the date and time yet. When the outcomes are out, up-and-comers can really take a look at their scores at true sites – natboard.edu.in and nbe.edu.in. The cut-off marks for NEET PG 2024 will be delivered alongside the outcomes. Up-and-comers who will score the base most reduced cut-off just will be announced as effectively qualified.
The most effective method to Actually look at NEET PG Result Direct Connect to Check -Applicants should visit the authority site at natboard.edu.in to check the NEET PG result PDF.
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The NEET PG 2024 assessment was directed on August 11, 2024. Around 2,28,540 applicants showed up for the assessment which was held in two movements around the same time. For all the inclusion encompassing NEET PG Results 2024, applicants can follow our live updates here:
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वी बी माणिक मुंबई- महाराष्ट्र के पुलिस प्रशासन पर राज्य के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पकड़ एकदम खत्म हो गयी है। उसका कारण ये है कि डीसीपी के साथ पुलिस निरीक्षक पार्टी करते है। कोई भी पुलिस निरीक्षक अपने सीनियर अधिकारियों की बात या आदेश का पालन नही करता है। यहाँ तक कि पुलिस आयुक्त गृहमंत्री के कंट्रोल में नही है। आज फिर मिली बोरे से भरी महिला की लाश, मुंबई पुलिस ने शुरू की आरोपी की तलाश। अगर यही हाल रहा तो आने वाले विधानसभा चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ेगा। (Increase in incidents of crimes against women in Maharashtra. Home Minister Devendra Fadnavis loses control over police)
जिस तरह महाराष्ट्र में पुलिस का रवैया चल रहा है। ऐसा लगता है, कि बिहार का जंगल राज चल रहा है। हर दिन नाबालिक बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटना घटित हो रही है और पुलिस मूक दर्शक बनी है। शिकायत लेने से घबराती है। या नेताओ के दबाव में कार्रवाई नही करती है। या कोई और बात हो सकती है। पिछले 6 दिनों से दुष्कर्म की घटना में काफी बृद्धि हुई है। अब पुलिस की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है। जिस तरह अन्य राज्यो में बुलडोजर प्रथा चलाई जा रही है। ऐसी प्रथा महाराष्ट्र में क्यों नही चलाई जाती? (Increase in incidents of crimes against women in Maharashtra. Home Minister Devendra Fadnavis loses control over police)
वही स्कूलों कालेजो में बैठे शिक्षक के नाम पर नरपिशाच बने हुए है। इनके ऊपर कार्रवाई क्यों नही की जाती? जो विद्वान होता है वह चरित्रवान नही होता। अब अभिभावकों को डर लग रहा है, कि कही हमारे बच्चों के साथ कोई अप्रिय घटना घटित न हो जाय। प्राइवेट स्कूल किसी नेता या मंत्री का होता है। शिक्षा व्यवस्था में काफी बदलाव करने की आवश्यकता है। (Increase in incidents of crimes against women in Maharashtra. Home Minister Devendra Fadnavis loses control over police)
ताज़ा मामला मानखुर्द इलाके का है। आज शुक्रवार 23 अगस्त को मानखुर्द में एक महिला की हत्या कर बोरे में लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ऐसा ही अप्रैल महीने मे एक और महिला की लाश बोरे में बरामद हुई थी। दूसरी ओर ठाणे जिले के बदलापुर के स्कूल में छोटी बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न और पुलिस प्रशासन का ढीला रवैया गृहमंत्री फडणवीस का कंट्रोल पुलिस पर न होने का साफ तौर पर सबूत पेश करता है। आम जनों के बीच सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों ने आम जनता में भाजपा के विरुद्ध आवाज उठने शुरू हो गए हैं। यह भारतीय जनता पार्टी के लिए अच्छे संकेत नही है। महिला और बच्चियों की सुरक्षा मे नाकाम प्रशासन के चलते मुख्यमंत्री का “लाडली बहिण योजना” पर भी थू-थू होने लगी है। (Increase in incidents of crimes against women in Maharashtra. Home Minister Devendra Fadnavis loses control over police)
आईपीएस अधिकारी ने ऐसे समय में जम्मू-कश्मीर में अपना पद संभाला है जब जंगल युद्ध में प्रशिक्षित उग्रवादियों के बढ़ते हमलों के मद्देनजर आतंकवाद एक बड़ी चुनौती बन रहा है। (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
विशेष संवाददाता नई दिल्ली– गृह मंत्रालय (MHA) ने गुरुवार (15 अगस्त, 2024) को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी नलिन प्रभात को जम्मू-कश्मीर पुलिस का विशेष महानिदेशक (एसडीजी) नियुक्त किया। श्री प्रभात इस वर्ष अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पदभार संभालेंगे। (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गुरुवार (15 अगस्त, 2024) को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी नलिन प्रभात को जम्मू-कश्मीर पुलिस का विशेष महानिदेशक (एसडीजी) नियुक्त किया। श्री प्रभात इस वर्ष अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पदभार संभालेंगे। (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
क्या है सरकारी आदेश?
गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, कि “आंध्र प्रदेश कैडर से अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर में शामिल होने के परिणामस्वरूप, श्री. नलिन प्रभात, आईपीएस (एपी: 1992) को तत्काल प्रभाव से 30.09.2024 तक जम्मू और कश्मीर पुलिस के विशेष महानिदेशक (एसडीजी) के रूप में जम्मू और कश्मीर में तैनात किया जाता है।” (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
आदेश में कहा गया है कि श्री प्रभात को 1 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर के डीजीपी के रूप में भी नियुक्त किया गया है। वह आरआर स्वैन (आईपीएस) का स्थान लेंगे। जो इस साल 30 सितंबर को सेवानिवृत्ति प्राप्त करने पर सेवानिवृत्त होंगे। केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद, श्री स्वैन को 2020 में जम्मू-कश्मीर में पुलिस आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) का अतिरिक्त महानिदेशक नियुक्त किया गया था। श्री स्वैन ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक का पद भी संभाला था। (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
कौन है ips Officer नलिन प्रभात?
श्री प्रभात ने ऐसे समय में जम्मू-कश्मीर में अपना पद संभाला है जब जंगल युद्ध में प्रशिक्षित उग्रवादियों के बढ़ते हमलों के मद्देनजर आतंकवाद एक बड़ी चुनौती बन रहा है। इस साल जून से अब तक जम्मू-कश्मीर में 18 से अधिक गोलीबारी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
श्री प्रभात को कश्मीर में विद्रोह में पुराना हाथ माना जाता है, और अतीत में जम्मू-कश्मीर में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों के भीतर सद्भावना अर्जित की थी। वह पहले ही दक्षिण कश्मीर, ऑप्स रेंज और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के श्रीनगर सेक्टर में उप महानिरीक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने महानिरीक्षक, कश्मीर, ऑप्स सेक्टर, सीआरपीएफ के रूप में भी कार्य किया है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने उनकी सराहना की थी। उनके काम ने उन्हें आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक, और जम्मू-कश्मीर में पुलिस (विशेष कर्तव्य) पदक और बार अर्जित किया है। (IPS Officer Nalin Prabhat, Jammu and Kashmir News)
भारत 1947 से आज तक कट्टरपंथी विचारों को भोग रहा है। देखिये – भारत-पाकिस्तान, रूस-यूक्रेन, इजराइल-फिलिस्तीन-गांजा और अब बांग्लादेश में कट्टरपंथी जो आतंकवादी हैं। बांग्लादेश का आपस में मरना मारने की शुरुआत हों गई हैं।
The world History (संपादकीय) भारत- सोचने समझने की बात है। कट्टरपंथी सोच क्या है? कट्टरपंथी कोई समाज या कोई धर्म नहीं है। कट्टरपंथी कोई भी हों सकता है जैसे देखा जाए, तो दुनिया में 197 देश हैं सभी देशों में अलग-अलग भाषा, अलग-अलग धर्म के नाम पर लोज जाने जाते हैं और पहचाने जाते हैं। 197 देश में लगभग 5600 से अधिक भाषाएं है और अनेक छोटे-बड़े संख्या के रूप में धर्म के आधार पर लोग अपने जीवन जीते हैं। धर्म क्या है? कैसा है? अपने-अपने स्थान पर स्थित है। धर्म के चलने वाले धर्म गुरु कैसे होनें चाहिए? किन सोच विचार से बने हुए धर्मगुरु हैं? उसी प्रकार से उनको मानने वाले को चाहने वाले उनके शिष्य इस प्रकार से ढल जाते हैं।
बांग्लादेश और पाकिस्तान का कट्टरपंथी सोच क्या है?
बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों दक्षिण एशियाई मुस्लिम बहुल देश हैं। भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बाद, दोनों देशों ने 24 वर्षों तक एक ही राज्य का गठन किया। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान का पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ बांग्लादेश के रूप में अलगाव हुआ। भारत देश से 1947 में पाकिस्तान बना 1971 में बांग्लादेश बना। धर्म के आधार पर दो देश बनाने के उद्देश्य से पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश का गठन हुआ। जबकि धर्म की मानवता एक होनी चाहिए। दुनिया में मनुष्य का एक ही माता – पिता से सभी संसार के मानवों का जन्म हुआ है।
धर्म गुरु किस प्रकार होनें चाहिए?
दुनिया का सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म है, यहूदी धर्म, पारसी धर्म, जैन पंथ, बुद्ध पंथ ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म, सिख पंथ, इसी प्रकार से दुनिया में ईश्वर परमात्मा भगवान धर्म गुरु को मान कर लोग अपने जीवन जीते हैं। धर्मगुरु का कार्य क्या है? धर्म गुरु को कैसा होना चाहिए? किसी भी धर्म में कोई भी व्यक्ति बड़ा हो या कट्टरपंथी हो उसे एक व्यक्ति या अनेक व्यक्तियों के कारण उसे धर्म पर लोग उंगली उठने लगते हैं। धर्म के लोग उन अधर्मियों के प्रति उंगली नहीं उठाते। क्योंकि अधर्मियों द्वारा कट्टरपंथियों के द्वारा अनेक धर्म को नुकसान पहुंचाना उन लोगों के लिए प्रेरणा दायक हो जाते हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्या कट्टरपंथियों के कारण आम जनता दुखी है?
पाकिस्तान हो या बांग्लादेश या भारत जैसा दुनिया का एशियाई देश, कृषि देश, वैधकीय देश, शिक्षा से संबंधित देश सदियों से जाना जाता और माना जाता रहा है। मगर भारत देश में शिक्षित लोग भी अशिक्षित बन बैठे हैं। जिस देश में शिक्षा होता है वहां मानवता जाति धर्म से बढ़कर एक सच्चा इंसान का देश कहा जाता है। कुछ अनपढ़, गवार, नशेड़ी, चरसूल्ले, चिलम बाज जैसे लोगों को भाड़े के ट्ट्टू जैसे नेताओं, उसकी अनपढ़ गवारों को अपराधी बनाने में पीछे नहीं हटते। यही कारण है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान का आज जो अनपढ़ गवार के रूप में कट्टरपंथी बन बैठे हैं। इस धर्म के लोग शर्मिंदा है दुखी हैं। इसका कारण दो कौड़ी के कट्टरपंथियों की देन हैं। इसी कट्टरपंथियों के कारण चाहे बांगलादेशी चाहे पाकिस्तानी जो अच्छे पढ़े-लिखे लोग हैं स्वयं से दुखी है और शर्मिंदा भी हैं।
जैसे नेहरू और जिन्ना, वैसे इंदिरा और फिरोज गांधी, शेख मुजीबर रहमान..
सनातन भारत के इतिहास दुनिया के पन्नों में आज भी दर्ज है। 1945 के बाद 1947 तक नेहरू और जिन्ना दोनों मिलकर एक प्लान बनाया। दो देश बना दो प्रधानमंत्री बनो और धर्म के नाम पर हिंदू और मुसलमान को लड़ा दो। 1947 में शुरुआती दौर से लेकर अगस्त महीने तक हिंदू मुस्लिम में इन दोनों नेताओं के खेल-खेलकर लाखों हिंदू मुसलमान आपस में मर कट रहे थे। नेहरू और जिन्ना तमाशा देख रहे थे। इसका कारण है, कि दो प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा हो रहा था।
वैसे ही 1971 से लेकर 1972 तक नेहरू की बेटी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनकी बहुत करीबी शेख मुजीबुर रहमान, दोनों मिलकर भारत और बांग्लादेश बनाने में जुड़े हुए थे। भारत का राज्य बंगाल में कुछ कट्टरपंथी मुसलमान को उकसाया गया जिससे दंगा फसाद करते रहे। हजारों लाखों की संख्या में हिंदू मुसलमान मरते रहे। इंदिरा गांधी और शेख रहमान बैठकर तमाशा देखते रहे। सपना यह था वह प्रधानमंत्री थी। शेख हसीना के पिता शेख मुजीबर रहमान को भारत के कई राज्य के टुकड़े करके उन्हें राष्ट्रपति बनने का सपना पूरा किया जा रहा था। नेहरू ने जो कार्य किया वहीं उनकी बेटी इंदिरा गांधी ने भी किया। हजारों लाखों की संख्या में महिला, बच्चे, जवान, बुजुर्ग मारे गए, काटे गए। धन दौलत संपत्ति जलाए गए। नुकसान आम जनता का हुआ फायदा इन दोनों नेताओं को होता रहा।
किसी भी देश में मंत्री, नेता और उनका परिवार क्यों नहीं मरते?
आम जनता जिस दिन यूरोप जैसे देश या विदेशियों की तरह शिक्षित और ज्ञानी बुद्धिमान बन जाएंगे। भाड़े के टट्टू की तरह भारत देश में या पाकिस्तान, बांग्लादेश में अनपढ़, गवार, नशेड़ियों को नेता के नाम पर कट्टरपंथी सोच बनाने वाले नेताओं ने खूब फायदा उठाते हैं। देश की जनसंख्या बढ़ाते हुए बेरोजगारी और धर्म के नाम पर अधर्मी लोगों ने अनपढ़, गवारों को अपराधी, आतंकवादी बनाने की कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। आज यही कारण है, कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की आम जनता को सोचने की बात है, कि नेता या मंत्री क्यों नहीं मरते और आम जनता ही क्यों मरती हैं। मगर यह नेतागिरी के कट्टरपंथी होते हैं। ऐसे पार्टी के नेता मंत्र फूंक दे और वहां पर दंगे फसाद होना शुरू हो जाता है। मरता कौन है? जैसे आम इंसान मरता है, महिलाएं मरती है, बच्चे मरते हैं, यहां तक कि जानवर भी मरते हैं। मगर कोई मंत्री, नेता और उसका परिवार नहीं मरता। क्योंकि वह देश-विदेश में मौज मस्ती में मस्त हैं और आम जनता भेड़ बकरी की तरह आपस में लड़ मर रहे हैं।
यह कमियां दूर करने के लिए धर्म के सत्य धर्म गुरुओं को उन व्यक्तियों को शिक्षा देने की जरुरत है। ज्ञान दे की आपस में न लड़ें। यह नेता अपने स्वार्थ के लिए देश के साथ भी गद्दारी कर देते हैं आम जनता के साथ क्या नहीं कर सकते हैं। इसलिए हर एक व्यक्ति को जागरूकता लाने की जरूरत है। किसी भी मनुष्य का जन्म हुआ तो उसकी मृत्यु भी होगी। मगर आपस में लड़ना एक दूसरे को मार-काट करके मारना ठीक नहीं है। यह मानवता का घोर हनन हैं। आज की दुनिया में अब मानव की मानवता खत्म होती जा रही हैं।
दुनिया के कट्टरपंथियों के साथ क्या करना चाहिए?
दुनिया में कोई जाती या धर्म नहीं होता। कट्टरपंथी एक गिरी हुई सोच है। आज भी जिससे सनातन धर्म हो इसाई धर्म हो इस्लाम धर्म हो पारसी धर्म हो, यह सभी धर्म आपस में भाईचारा के संबंध से बनाया गया है। अब कुछ-कुछ धर्म से निकलकर कट्टरपंथी विचारधारा बनाकर एक दूसरे पर हमला करना मार-काट करना, लूटपाट करना, एक व्यापार बन गया है। मगर सोचने वाली बात है, जहां लाखों करोड़ों की संख्या होती है। उस देश की, उस राज्य की सरकार क्या करती हैं? क्या सरकार चलने वाले चंद गुंडे और कट्टरपंथ्यों का खात्मा नहीं कर सकते हैं? यही दुनिया की राजनीति है लडो-लडाओ और सत्ता पर शासन करो। मरता कौन है बेगुनाह इंसान जानवर पंछी, इसकी जिम्मेदार कौन आम जनता या अशिक्षित शहर या देश। आज अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार बनाकर बेच रहा है। यह अभी तक व्यापार है। हथियार खरीदो, लड़ो, मरो। अगर देखा जाए तो शर्म की बात है। चंद कागज़ के टुकड़े के लिए इंसान इंसान के टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हैं। इंसान से ज्यादा दुनियाँ में कोई गिरा हुआ जानवर भी नहीं हैं।
आने वाले समय के लिए मानवता को जागाना होगा। मानव-मानव एक समान करना होगा। इसी में दुनिया की भलाई हैं।
भारत का पड़ोसी बना बांग्लादेश 1971 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत से अलग करके बांग्लादेश बनाया। भारत के कई राज्य को मिलाकर बांगलादेश की स्थापना।
The world History (न्यूज़ डेस्क) भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश का एक अजब कहानी है जो धर्म के नाम पर दोनों देश बने। भारत देश से हिंदू और मुस्लिम के नाम पर बांग्लादेश और पाकिस्तान को बनाया गया था। 1947 में पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू और जिन्ना की मिलीभगत से दो देश बनाए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के दो अलग-अलग प्रधानमंत्री हो सकें। 1947 में भारत और पाकिस्तान अलग होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने और जिन्ना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने से पहले, उनकी मृत्यु हो गई।
The world History
16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना के भारत के सामने आत्मसमर्पण करने के साथ ही ये संघर्ष खत्म हुआ। 16 दिसंबर को बांग्लादेश में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली तो इसके दो टुकड़े भी हुए। मोहम्मद अली जिन्ना की मांग के मुताबिक मुस्लिम बहुल आबादी के लिए अलग राष्ट्र पाकिस्तान बना 1947 के समय में भी बंगाल राज्य में मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा बंगाल खाड़ी स्थित कई गांवों को मिलाकर अलग से बंगाल देश बनाने की मांग की थी मगर उस समय बंगाल भारत का राज्य हुआ करता था।
भारत के बंगाल राज्य को अलग करने के लिए बांग्लादेशी कट्टरपंथियों ने भी मांग उठाई। उस समय मांग में कहा जा रहा था, कि जिस राज्य में ज्यादा मुसलमान है उसे मुस्लिम देश घोषित कर देना चाहिए। उसी समय भारत और पाकिस्तान का बटवारा हुआ था। उसके कुछ साल बाद 1971 में इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश को एक अलग देश बना दिया।
बांग्लादेश भारत से अलग क्यों हुआ?
बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम 1971 में हुआ था। इसे ‘मुक्ति संग्राम’ भी कहते हैं। यह युद्ध वर्ष 1971 में 25 मार्च से 16 दिसम्बर तक चला था। इस रक्तरंजित युद्ध के माध्यम सेे बांलादेश ने पाकिस्तान से स्वाधीनता प्राप्त की। 16 दिसम्बर सन् 1971 को बांग्लादेश बना।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनने के बाद बांग्लादेश को भारत से आर्थिक मदद भी दे रही थी। भारत में आम जनता से पैसे की टैक्स वसूली करके बांग्लादेश को इंदिरा गांधी मदद करती रही जो आज भी मदद किया जा रहा है।
बांग्लादेश के कट्टरपंथी की क्या देन हैं?
1971 में भारत और बांग्लादेश बनने के बाद में लाखों हिंदू बांग्लादेश से भारत चले आए। कुछ हिंदू वहां पर रह गए थे जिन्होंने अपना जमीन घर मकान नहीं छोड़ा उसी बांग्लादेश में रह गए।
बांग्लादेश बनने के बाद वहां सबसे ज्यादा माफियागिरी, गुंडागर्दी होता रहा। वहां के रह रहे हिंदुओं को हमेशा धर्म बदलने की हेतु धमकी देना मारपीट करना यही बांग्लादेशियों का कारण रहा है। वहां की आम जनता में इसी प्रकार से उतार-चढ़ाव चल रहा हैं।
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में क्या हुआ?
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी इस्तीफा दे दी उसके बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क उठा मिडिया ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कई मासूम लोगों की हत्याऐं हुई। उसमें सबसे ज्यादा हिंदुओं को मारा गया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी नेता भी मारे गए। उसके बाद बांग्लादेश में काफी हिंसा भड़क गई लगभग 240 लोग मारे गए।
बांग्लादेश के राजधानी ढाका में क्या हुआ?
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद उनके कार्यालय को जला दिया गया। तोड़फोड़ किया गया। शेख हसीना वहां से कैसे भी भाग कर भारत में अपनी प्राण बचाई ली है। बांग्लादेशी कट्टर उग्रवादी आतंकवादियों ने पूरे बांग्लादेश के सैकड़ो, हजारों हिंदुओं की दुकान जला दिए, लूट लिया। सैकड़ो हिंदू महिलाओं की हत्या करना मौलाना की धमकी हिंदू देश छोड़े याँ इस्लाम धर्म अपना लें। कट्टरपंथी बांग्लादेशियों ने हिंदुओं को धमकी दे रहे हैं। आज भी बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की हाहाकार और आगजनी जैसी हालत है। बांग्लादेश कट्टरपंथी आतंकवादियों के विरोध में बांग्लादेश की कट्टरपंथियों पर सख्त कार्रवाई के लिए अब तक दुनिया के किसी भी देश ने कोई कदम नहीं उठाया।
भारत बांग्लादेश बटवारे में शेख हसीना के पिता..
बांग्लादेश में कट्टरपंथी विचार धारा पूर्व व प्रथम राष्ट्रपति शेख मुजीबर रहमान की देन है। शेख हसीना के पिता मुजीबर रहमान ने 1971 में पूर्व इंदिरा गांधी से मिलकर बांग्लादेश का स्थापना किया था। आज शेख हसीना उसी कदम पर अपने स्वार्थ के लिए राजनैतिक बदलाव करते हुए विरोध का शिकार हुई है। इस समय बांगलादेश के लोग प्रधानमंत्री शेख हसीना को मारने के लिए गली गली ढूंढ रहे हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शेख हसीना अपनी प्राण बचाने के लिए भारत में शरण ले रखी है।
The world History
शेख हसीना के पिता कट्टरपंथी थे। आज वही कट्टरपंथी लोगों ने शेख हसीना को मार भगाया। जैसा को तैसा। शेख हसीना के पिता भारत से विद्रोह करके भारत से अलग होकर बांग्लादेश बनाया था और आज वही कट्टरपंथी बने वहां के लोगों ने आज उसी की बेटी को मार भगाया। बांग्लादेश भारत की जमीन है। मगर बांग्लादेश में रह रहे कट्टरपंथी वह उनकी सोच है मगर भारत की संपत्ति थी। और आज वही कट्टरपंथी सोच बांग्लादेश के और भी लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है।
लोगों पर अन्याय कर रहे हैं, बलात्कार कर रहे हैं, दुकान लूट रहे हैं, घर लूट रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने पाकिस्तान बनाया। नेहरू की बेटी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनाया। कट्टरपंथियों के कारण दो देश बने जो धर्म का नाम हिंदू और मुस्लिम देश। मगर इतिहास यही रही है, कि इतिहास के सच्चाई को कोई बताते नहीं हैं। शेख हसीना के पिता बांग्लादेश का प्रथम पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबर रहमान व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा भारत अलग बांग्लादेश बनाया गया था। अब आज बांग्लादेश में उन्हीं कट्टरपंथियों की देन है जो आज कट्टरपंथी बांग्लादेश को जला रहे हैं। लोगों पर अन्याय कर रहे हैं, बलात्कार कर रहे हैं, दुकान लूट रहे हैं, घर लूट रहे हैं। किसी भी देश का धर्म, जाति या समाज के नाम पर कट्टरपंथी चरम सीमा पर पहुँच जाए, तो उसका खात्मा किया जाना चाहिए ना कि देश छोड़ कर भाग जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा मुम्बई के कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है।
मुम्बई- सुप्रीम कोर्ट ने मुम्बई कॉलेज बुर्का मामले में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को कक्षा में बुर्का पहनने और परिसर में कोई भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
मामले में मुम्बई कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुम्बई के एक कॉलेज के उस आदेश पर आंशिक रोक लगाई जिसमें परिसर में ‘हिजाब, बुर्का, टोपी और नकाब’ पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके साथ ही कॉलेज में ‘हिजाब’, ‘बुर्का’ पहनने पर प्रतिबंध संबंधी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुम्बई की ‘एजुकेशनल सोसाइटी’ से जवाब मांगा।
क्या है मामला?
बता दें कि मुम्बई के एक निजी कॉलेज में छात्रों के कैंपस में हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी आदि पहनने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई।
यह मामला मुम्बई के एन. जी. आचार्य और डी. के. मराठे. कॉलेज का है, जहां के कॉलेज प्रशासन ने “हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल और टोपी” पहनने पर बैन लगाया हुआ था। इसके खिलाफ 9 लड़कियों ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।
कॉलेज प्रशासन का भेदभाव ..
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कॉलेज प्रशासन से कहा, “छात्रों को यह चुनने की आजादी होनी चाहिए कि वे क्या पहन सकती हैं। कॉलेज उन पर दबाव नहीं डाल सकता… यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको अचानक पता चलता है कि देश में कई धर्म हैं।” कोर्ट ने पूछा, कि “क्या आप यह कह सकते हैं कि किसी शख्स को तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी?”
उपायुक्त डॉ. भाग्यश्री कापसे के आदेश की उड़ रही धज्जियां।
डी. ओ. अभय जगताप की रिश्वतखोरी
के चलते पोइसर के अवैध निर्माण बरकरार।
अभियंता प्रमोद ब्रम्हानकर ने वार्ड क्रमांक:२३, के अवैध निर्माणों को बचाने का लिया ठेका।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महानगर पालिका आर/ दक्षिण विभाग के कार्यक्षेत्र कांदिवली (पूर्व) वार्ड क्रमांक:२३, पोइसर, गांवदेवी रोड, पूजा मेडिकल के बगल में आपो. मस्जिद स्थित ठेकेदार प्रदीप चौधरी द्वारा भूतल संरचना (व्यापारिक दुकान) के ऊपर पहली मंजिल की संरचना का अनधिकृत निर्माण कार्य किया गया है। इसी क्रमानुसार वार्ड क्रमांक:२३, पोइसर, गांवदेवी रोड, पूजा मेडिकल क्रॉस रोड, इंद्रा चौक, अपोजिट सत्तार चाल स्थित अवैध निर्माणकर्ता शुक्ला द्वारा भूतल संरचना (दो व्यापारिक दुकानों) के ऊपर पहली मंजिल की संरचना का अनधिकृत निर्माण कार्य किया गया है। इसी तर्ज पर ठेकेदार शंकर झा द्वारा वार्ड क्रमांक:२३, रामधनी राजभर, चाल नं.२, पोइसर, गांवदेवी रोड स्थित भूतल संरचना (व्यापारिक दुकान) के ऊपर पहली मंजिल की संरचना का अनधिकृत निर्माण कार्य किया गया है।
मनपा कानून क्या कहता है?
उक्त अनधिकृत निर्माण कार्यो पर बृहन्मुंबई महानगर पालिका अधिनियम, १८८८ की धारा ३५१(१A) के मुताबिक नोटिस देने का प्रावधान है, लेकिन डी. ओ. अभय जगताप ने नोटिस न देकर परिमंडल- ७, की उपायुक्त, डॉ. भाग्यश्री कापसे और वार्ड ऑफिसर ललित तलेकर के नाम पर उक्त अवैध निर्माणकर्ता व ठेकेदारों से लाखों रुपयों की वसूली करके उक्त तीनों अनधिकृत निर्माण कार्यों को अभी तक बरकरार रखा है।
कांदीवली बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारी
वर्तमान सहाय्यक आयुक्त (प्रभारी) ने उक्त अवैध निर्माणों को लेकर कार्यवाही का आदेश सहाय्यक अभियंता (प्रभारी) प्रमोद ब्रह्मणकर को दिया है। अब ऐसे में कार्यवाही करने की बजाय सहाय्यक अभियंता ने उक्त अवैध निर्माणों को बचाने का ठेका ले लिया है। अवैध निर्माणों को जिस तरह डी.ओ. अभय जगताप और प्रमोद ब्रम्हानकर जैसे अभियंता खुले आम संरक्षण दे रहे है, तो क्या इनके ऊपर भी कार्यवाही की जानी चाहिए? भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अवैध निर्माण का दंश झेल रहे लोगों का सवाल खड़ा हो रहा है।
सहायक आयुक्त की क्या है जिम्मेदारी?
हालांकि बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त भूषण गगरानी की छवि को धूमिल होने से बचाने की जिम्मेदारी इस समय के सहाय्यक आयुक्त की होती है। यह जिम्मेदारी निभाने में ये कितने सफल होते हैं, यह उक्त अवैध निर्माणों पर की जाने वाली कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। मनपा आर/ दक्षिण के इस इमारत बांधकाम विभाग का आलम यह है कि यहाँ गरीब कोई भी व्यक्ति या कोई विधवा महिला अपने मकान की रिपेरिंग भी करता या करती है, तो उस पर मनपा का हथौड़ा अगले ही दिन चल जाता है। जबकि बड़े ठेकेदारों के वहाँ मनपाकर्मी जी हुजूरी करते नजर आते हैं। कार्यवाही के नाम पर नोटिस तो निकाल दी जाती है, पर कार्यवाही नहीं होती है। मनपा कर्मियों का यह दोगला पन मनपा की इज़्ज़त तार तार कर रहा है। पर इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इनकी जेबे गर्म होने से मतलब है।
In a recent statement, South African cricket sensation Kagiso Rabada has called upon Test teams outside the Big Three – England, Australia, and India – to focus on playing good cricket and providing entertainment to the fans. Rabada, known for his fiery pace and exceptional bowling skills, believes that all teams, regardless of their cricketing stature, have a responsibility to showcase their talent and contribute to the overall growth of the sport.
In a cricketing landscape dominated by the Big Three, Rabada’s plea comes as a reminder that every team has the potential to make a significant impact. The young speedster emphasized that it is essential for teams to break free from the shadow of the established powerhouses and create their own legacy.
“Cricket is a game loved by millions of fans worldwide. It is our duty as players to give them the best possible experience. We need to play fearless cricket, take risks, and entertain the crowd,” Rabada stated during a press conference.
Rabada’s call for action comes at a time when the cricketing world is witnessing a growing disparity between the Big Three and the rest. While teams like England, Australia, and India enjoy extensive resources, exposure, and fan support, others often struggle to compete on an equal footing. Rabada believes that by playing good cricket and captivating the audience, these teams can bridge the gap and make their mark.
“We have seen examples of teams outside the Big Three achieving great success. Look at the recent performances of New Zealand and West Indies. They have shown the world that talent knows no boundaries,” Rabada added.
The South African pacer urged cricket boards and administrators to invest in the development of talent and provide opportunities for players from non-traditional cricketing nations. He emphasized the importance of nurturing young talent, improving infrastructure, and creating a sustainable pathway for aspiring cricketers.
“We need to ensure that cricket grows beyond the traditional powerhouses. It is crucial to identify and support talent from all corners of the world. Only then can we truly globalize the sport and create a level playing field,” Rabada emphasized.
Rabada’s statement has garnered support from cricketing enthusiasts and players alike. Many believe that his call to action will encourage teams outside the Big Three to strive for excellence and inspire future generations of cricketers.
As the cricketing world evolves, Rabada’s words serve as a reminder that the spirit of the game should prevail above all else. Regardless of a team’s ranking or resources, the focus should always be on playing good cricket and providing fans with an unforgettable experience.
In conclusion, Kagiso Rabada’s plea to Test teams outside the Big Three to play good cricket and give fans entertainment resonates with the cricketing community. It is a call for unity, growth, and inclusivity in the sport. As teams embrace this vision, the world of cricket can look forward to a more vibrant and diverse future.
पंतनगर पुलिस ने किया केस दर्ज। राज्य सरकार क्या दोषियों को हटाती है, या पुरस्कृत किया जाता है? मनपा ने नोटिस देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जबाब जीआरपी को देना है।
वी बी माणिक मुंबई- दो दिन पूर्व घाटकोपर में गिरी होर्डिंग पर जीआरपी संदेह के घेरे में दिखाई पड़ रही है। जीआरपी में 6 सहायक पुलिस आयुक्त है जो स्टेशनों पर तैनात है वही दूसरी ओर एक पुलिस निरीक्षक शहाजी निकम को सहायक पुलिस आयुक्त का चार्ज देकर किस नियम के आधार पर आयुक्त कार्यालय में बैठाया गया है? इस पर संदेह जताया जा रहा है। ये वही निकम है जिसने होर्डिंग को परमिशन दिया है।
किसी जूनियर अधिकारी को वरिष्ठ अधिकारी के पद पर बैठाने के लिए पुलिस महासंचालक भी जवाबदार है। पुलिस आयुक्त रेलवे रविन्द्र शिस्वे ने इस पर ध्यान क्यों नही दिया? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जो होर्डिंग पेट्रोलपंप पर गिरा है। करीब 7 महीने पूर्व ही उसका निर्माण किया गया है। जो पूरी तरह अवैध है। ये राज्य सरकार की जगह है जो जीआरपी के तांबे में था। शहाजी निकम एक वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के पद पर कई वर्षों से तैनात है। वह सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर कैसे बिठाए गए थे ? ये बड़ा प्रश्न है।
दुर्घटना की तस्वीर
जीआरपी क्या करेंगे नागरिकों की सुरक्षा?
वहीं 6 एसीपी जो पहले से नियुक्त है इनको चार्ज क्यों नही दिया गया। निरीह लोगो के जान से खेलने का शौक किसको है? जीआरपी आजकल अपनी सुरक्षा में लगी हुई है। यात्रियों और नागरिकों की सुरक्षा क्या करेंगे? करीब 14 लोगो की मौत और सैकड़ो लोग घायल हो गए। पंतनगर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। राज्य सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है? दोषियों को हटाती है, या पुरस्कृत किया जाता है? मनपा ने नोटिस देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। जबाब जीआरपी को देना है।