कर्नाटक के बेलगावी में 12 दिनों से जारी गन्ना किसान आंदोलन ₹3,600 प्रति टन के समझौते के बाद खत्म हो गया है। जानिए खेतों में सूखती फसल की इनसाइड स्टोरी।
बेलगावी: कर्नाटक के बेलगावी जिले में पिछले 12 दिनों से चल रहा गन्ना किसानों का उग्र आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली की मध्यस्थता में चीनी मिल मालिकों और किसान संगठनों के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद यह गतिरोध दूर हुआ। समझौते के तहत प्रति टन गन्ने के लिए ₹3,600 का दाम (FRP) तय किया गया है, जिसे किसानों ने स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद 6 नवंबर से जिले की सभी शुगर फैक्ट्रियों में गन्ने की पेराई का काम दोबारा शुरू कर दिया गया है।
₹5,500 की मांग करने वाले किसान ₹3,600 पर क्यों माने?
आंदोलन की शुरुआत में किसान संगठन प्रति टन गन्ने के लिए ₹5,500 की मांग पर अड़े हुए थे, जिसमें चीनी मिलों से ₹4,500 और राज्य सरकार से ₹1,000 का प्रोत्साहन बोनस शामिल था। हालांकि, 12 दिनों के कड़े गतिरोध के बाद किसानों को ₹3,600 के रेट पर समझौता करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, इस समझौते के पीछे खेतों में खड़ी फसल का सूखना सबसे बड़ा कारण रहा।

पिछले दो महीनों से कटाई न होने के कारण गन्ने की फसल सूख रही थी, जिससे उसके वजन और इलियारी (Yield) में भारी नुकसान होने का डर था। किसानों को आशंका थी कि यदि मिलें जल्दी शुरू नहीं हुईं तो उनकी पूरी लागत डूब जाएगी। वजन के इस बड़े नुकसान से बचने के लिए किसान नेताओं ने मिलों को तुरंत चालू कराने की सहमति दी।
इसके अलावा, किसानों को उम्मीद है कि चीनी के सह-उत्पादों (इथेनॉल, मोलासेस और बगास) से होने वाले मुनाफे में भी उन्हें आने वाले समय में उचित हिस्सा मिलेगा।
सरकार को मिली बड़ी चेतावनी: शीतकालीन सत्र रोकने की धमकी

भले ही मिलें चालू हो गई हों और हाईवे से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया हो, लेकिन किसान संगठनों ने साफ किया है कि यह केवल एक तात्कालिक राहत है। राज्य सरकार से प्रति टन ₹1,000 प्रोत्साहन राशि देने की मूल मांग अभी भी लंबित है।
किसान नेता चूनप्पा पुजारी ने चेतावनी दी है कि जब तक मुख्यमंत्री इस अतिरिक्त बोनस राशि की घोषणा नहीं करते, तब तक उनका आंदोलन अलग रूप में जारी रहेगा। किसानों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि सरकार ने शीतकालीन सत्र से पहले इस पर फैसला नहीं लिया, तो बेलगावी में होने वाले आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र को चलने नहीं दिया जाएगा और विधानमंडल का घेराव किया जाएगा।

यातायात हुआ बहाल
किसानों के आंदोलन के कारण पिछले कई दिनों से पुणे-बंगलूरू और हुबली-अंकोला समेत चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर चक्काजाम की स्थिति बनी हुई थी, जिसके चलते धारवाड़ जिला प्रशासन को धारा 163 लागू करनी पड़ी थी। अब गतिरोध समाप्त होने के बाद हाईवे से अवरोध पूरी तरह हटा लिए गए हैं और वाहनों का आवागमन सामान्य हो गया है। किसान अगले कदम की रणनीति बनाने के लिए गुर्लापुर में एक और बैठक करने जा रहे हैं।
