मुंबई के गोरेगांव में पैर कुचलने का आरोप लगाकर एक कार चालक से 1,000 रुपये लेने का मामला सामने आया। जानें पुलिस की सलाह और बचाव के तरीके।
मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में सड़क हादसे के नाम पर पैसे वसूलने का संदिग्ध मामला सामने आया है। स्कूल से अपने दो बच्चों को लेकर घर लौट रहे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दोपहिया सवार ने उसका रास्ता रोककर पैर कुचलने का दावा किया और इलाज के नाम पर पैसे मांगे। विवाद खत्म करने के लिए व्यक्ति ने कथित तौर पर 1,000 रुपये ऑनलाइन दे दिए। घटना के बाद गोरेगांव पुलिस ने वाहन चालकों को दबाव में पैसे न देने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेने की सलाह दी है।
यह घटना अनमोल फॉर्च्यून इमारत के पास की बताई गई है। कार चला रहे शुक्ला के मुताबिक, वह हाल ही में दोपहर करीब 4:15 बजे अपने बच्चों को स्कूल से लेकर घर जा रहे थे। इसी दौरान एक दोपहिया सवार ने उनकी कार के पीछे के शीशे पर हाथ मारा और उन्हें रुकने के लिए कहा।
पैर कुचलने का आरोप लगाकर मांगे पैसे
शुक्ला ने बताया कि दोपहिया सवार ने उन पर गाड़ी से अपना पैर कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने इस आरोप को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें न तो किसी टक्कर का एहसास हुआ था और न ही दोपहिया वाहन के कार से टकराने का।

शुक्ला के अनुसार, बाइक सवार ने इलाज के खर्च के नाम पर पैसे मांगे। जब उन्होंने नकद पैसे नहीं होने की बात कही, तो उसने ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड दिखा दिया। इस दौरान कार में बैठे दोनों बच्चे डर गए थे।
शुक्ला ने बताया कि विवाद बढ़ने और बच्चों को और परेशानी से बचाने के लिए उन्होंने आखिरकार 1,000 रुपये का भुगतान कर दिया। उनके अनुसार, पैसे मिलने के बाद बाइक सवार ने भुगतान का स्क्रीनशॉट भी मांगा और कहा कि क्यूआर कोड उसके एक दोस्त का है।
पुलिस की गश्ती गाड़ी पहुंची, फिर भी विवाद खत्म करने की मांग
शुक्ला के मुताबिक, घटना के दौरान पुलिस की गश्ती गाड़ी वहां से गुजरी और पुलिसकर्मियों ने रुककर दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने दोनों को विवाद सुलझाने के लिए पुलिस थाने चलने को कहा।
शुक्ला का आरोप है कि बाद में दोपहिया सवार ने पुलिस के सामने मामला सुलझाने के बजाय आपस में विवाद खत्म करने पर जोर दिया। बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने पैसे देने का फैसला किया।
घटना के बाद शुक्ला ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया, ताकि दूसरे वाहन चालक भी सावधान रहें। उनकी पोस्ट पर कई लोगों ने इसी तरह के कथित अनुभव बताए।
बांद्रा, जोगेश्वरी और चेंबूर से भी आए ऐसे अनुभव
शुक्ला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जॉन सी. ने बताया कि पिछले साल उनके चालक को दो लोगों ने रोककर आरोप लगाया था कि उसकी गाड़ी से उनकी एसयूवी पर खरोंच आई है। चालक ने इस आरोप पर सवाल उठाया, क्योंकि दूसरी गाड़ी उसकी गाड़ी से आगे खड़ी थी। इसके बाद उसने दोनों से बातचीत बंद कर दी और पास के सांताक्रूज पुलिस थाने चलने को कहा। जॉन सी. के मुताबिक, पुलिस थाने चलने की बात सुनकर दोनों वहां से चले गए।
एस. ए. थेवर ने बताया कि उनके साथ भी कई बार इसी तरह की घटना हुई। उनके मुताबिक, पहली बार एक वाहन चालक ने बीमार बच्चे के इलाज का हवाला देकर उनसे पैसे लिए थे। बाद में जब इसी तरह की कहानी दोबारा सुनाई गई, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उन्होंने कम से कम छह बार ऐसी बातें सुनीं।

निमेश दवे ने बताया कि जोगेश्वरी से एक दोपहिया सवार उनका पीछा कर रहा था। फ्लाईओवर पर पहुंचने के बाद उसने वाहन रोककर टक्कर मारने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह गाड़ी चलाते समय फोन पर बात कर रहे थे। दवे के अनुसार, जब उन्होंने सवार से नीचे चलकर बात करने को कहा और उसने उनकी गाड़ी पर मीडिया का स्टिकर देखा, तो वह वहां से चला गया।
दवे ने बताया कि बाद में पुलिस से बातचीत करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि कथित तौर पर पैसे वसूलने वाले लोग फ्लाईओवर जैसी जगहों को चुन सकते हैं, जहां आसपास पैदल चलने वाले लोग या पुलिसकर्मी कम दिखाई देते हैं।
गोरेगांव पुलिस ने क्या सलाह दी?
गोरेगांव पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक सतीश उमारे ने वाहन चालकों से कहा कि विवाद होने पर दबाव में आकर किसी को पैसे न दें। ऐसी स्थिति में नजदीकी पुलिस थाने जाएं या रास्ते में पुलिसकर्मी अथवा यातायात पुलिस दिखाई देने पर उनसे मदद लें।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को खतरा महसूस हो रहा है, तो उसे जरूरी स्थिति को छोड़कर वाहन से बाहर निकलने से बचना चाहिए। दुर्घटना होने या किसी के घायल होने पर चिकित्सा सहायता देना जरूरी है।
उमारे के अनुसार, वाहन चालक पुलिस से मदद लेने के लिए 100 या 112 पर फोन कर सकते हैं अथवा नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी।
अगर कोई हादसे का आरोप लगाकर पैसे मांगे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी और वाहन में बैठे यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखें। किसी के आरोप पर तुरंत पैसे देने के बजाय पुलिस की मदद लें और घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी दें।
अगर वास्तव में दुर्घटना हुई है या कोई घायल है, तो चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं। विवाद के दौरान वाहन का नंबर, घटना का समय और जगह, गवाहों की जानकारी तथा सुरक्षित तरीके से उपलब्ध तस्वीरें या कैमरे की रिकॉर्डिंग संभालकर रखें।
अगर आपने ऑनलाइन भुगतान कर दिया है, तो लेनदेन की पहचान संख्या, भुगतान का समय और प्राप्तकर्ता की जानकारी सुरक्षित रखें। संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में बैंक या भुगतान सेवा को सूचित करें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। धमकी या तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर संपर्क करें।
वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि वास्तविक दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करें, लेकिन किसी विवादित मांग के दबाव में आने के बजाय पुलिस को सूचना दें।
