मुंबई में BEST बस हादसे में छात्रा की मौत, मां को ₹31.08 लाख मुआवजा

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मुंबई के मलाड में BEST बस हादसे में Farheen Rizwi Khan की मौत पर MACT ने मां को ₹31.08 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। जानें गणना और केस की स्थिति।

मुंबई: मलाड वेस्ट में BEST बस की टक्कर से 20 वर्षीय बायोटेक्नोलॉजी छात्रा Farheen Rizwi Khan की मौत के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने उनकी मां को ₹31,08,700 मुआवजा देने का आदेश दिया है। 9 अक्टूबर 2026 को दिए गए फैसले में ट्रिब्यूनल ने छात्रा की औपचारिक आय का पर्याप्त प्रमाण नहीं होने के बावजूद उनकी शिक्षा, शैक्षणिक प्रदर्शन और भविष्य में कमाई की क्षमता को ध्यान में रखते हुए ₹20,000 मासिक अनुमानित आय तय की।

आदेश में 7.5% सालाना ब्याज और भुगतान की समयसीमा से संबंधित निर्देश भी दिए गए हैं। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मुआवजे की गणना में छात्रा की तत्काल कमाई के साथ भविष्य की संभावित आय को भी शामिल किया गया।

मालवणी डिपो के पास कैसे हुआ था हादसा?

यह दुर्घटना 16 सितंबर 2023 को सुबह करीब 7 बजे मलाड वेस्ट में मालवणी डिपो के पास हुई थी। Farheen उस समय पैदल जा रही थीं, जब BEST बस की टक्कर से उनकी मौत हो गई। हादसे में शामिल बस का रजिस्ट्रेशन नंबर MH-01-LA-6908 बताया गया है।

BEST ने चालक की लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि एक ऑटो-रिक्शा के कारण चालक का ध्यान भटका था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने चालक की सफाई को पर्याप्त नहीं माना। चालक यह संतोषजनक ढंग से नहीं समझा सका कि मोड़ लेते समय Farheen बस के नीचे कैसे आ गईं। अधिकरण ने केवल बस की धीमी गति को सावधानी बरतने का पर्याप्त प्रमाण नहीं माना और मृतका को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराने वाली BEST की दलील खारिज कर दी।

छात्रा की कमाई को लेकर मां ने क्या बताया?

Farheen बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रही थीं और एक NGO की स्कूल में पढ़ाने का काम भी करती थीं। उनकी मां ने शुरुआत में बताया था कि बेटी हर महीने ₹7,000 कमाती थी। बाद में उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया कि Farheen की मासिक आय ₹15,000 थी और पोस्टग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उनकी कमाई ₹30,000 प्रति माह तक पहुंच सकती थी।

आय का पूरा औपचारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं होने के बावजूद ट्रिब्यूनल ने उनकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता और पढ़ाई में प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए ₹20,000 मासिक अनुमानित आय निर्धारित की।

₹31.08 लाख मुआवजे की गणना कैसे हुई?

ट्रिब्यूनल ने Farheen की अनुमानित मासिक आय ₹20,000 मानकर सालाना आय ₹2.40 लाख निकाली। इसमें भविष्य की संभावनाओं के लिए 40% यानी ₹96,000 जोड़े गए। इस तरह सालाना आय ₹3.36 लाख हुई।

इसके बाद व्यक्तिगत खर्च के लिए 50% राशि घटाई गई। परिवार के लिए अनुमानित सालाना योगदान ₹1.68 लाख माना गया। 18 का गुणक लगाने पर आर्थिक निर्भरता के नुकसान की रकम ₹30.24 लाख निकली।

मुआवजे का पूरा ब्योरा इस प्रकार है:

मुआवजे का मदराशि
आर्थिक निर्भरता का नुकसान₹30,24,000
संतान की मृत्यु से मां को भावनात्मक क्षति (Filial Consortium)₹48,400
संपत्ति का नुकसान (Loss of Estate)₹18,150
अंतिम संस्कार का खर्च₹18,150
कुल मुआवजा₹31,08,700

ट्रिब्यूनल ने एम्बुलेंस खर्च देने से इनकार कर दिया क्योंकि इस खर्च के समर्थन में रसीदें पेश नहीं की गई थीं।

छात्रों की संभावित आय पर अदालतों का रुख

29 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने S. Mohammed Hakkim v. National Insurance Co. Ltd. मामले में एक इंजीनियरिंग छात्र की मोटर दुर्घटना से जुड़ी अपील पर फैसला दिया था। उस मामले में भी छात्र की अनुमानित मासिक आय ₹20,000 निर्धारित की गई थी और 40% भविष्य की संभावनाओं की वृद्धि तथा 18 का गुणक अपनाया गया था।

हालांकि, वह मामला गंभीर शारीरिक विकलांगता के कारण आय की क्षति से जुड़ा था, जबकि Farheen का मामला मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाले मुआवजे का है। इसलिए दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट के 14 मई 2026 के Oriental Insurance Co. Ltd. v. Manorama Singh मामले में भी छात्रों की संभावित आय के मूल्यांकन पर विचार किया गया। ये फैसले बताते हैं कि औपचारिक आय का पूरा प्रमाण नहीं होने पर भी अदालतें परिस्थितियों के आधार पर भविष्य की कमाई का अनुमान लगा सकती हैं। हालांकि, हर मामले में आय का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

मुआवजे का आदेश और आपराधिक मुकदमा अलग

यह दावा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत तय किया गया। ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल दुर्घटना और लापरवाही से जुड़े तथ्यों का आकलन संभावनाओं की प्रधानता के आधार पर करता है। आपराधिक मुकदमे में दोष साबित करने का मानक इससे अलग होता है।

Farheen के मामले में चालक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा मजिस्ट्रेट की अदालत में अलग से चल रहा है। BEST के Traffic Department को भी जरूरत के अनुसार आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार करना है।

BEST के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि MACT का आदेश मिलने के बाद Claims Department अपने रिटेनर वकील के साथ उसकी जांच करता है। इसके बाद फाइल Traffic, Legal, Audit और Accounts विभागों से गुजरती है और जरूरत के अनुसार General Manager की मंजूरी ली जाती है। आवश्यक होने पर वकील ट्रिब्यूनल से समय बढ़ाने का अनुरोध भी कर सकता है।

अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस विशेष मामले की फाइल BEST तक पहुंचने की स्थिति की जानकारी नहीं थी।

परिवार को फैसले की जानकारी नहीं थी

Farheen के भाई Sahil ने बताया कि उन्हें MACT के आदेश की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि घटना को तीन साल हो चुके हैं और अब उनकी बहन के बारे में पूछताछ क्यों की जा रही है। फैसले की जानकारी दिए जाने और परिवार के मालवणी स्थित घर आने की बात कहे जाने पर उन्होंने बाद में संपर्क करने को कहा, लेकिन इसके बाद कोई जवाब नहीं मिला।

फिलहाल, BEST ने आदेश के खिलाफ अपील की है या मुआवजे का भुगतान कर दिया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। आदेश के अनुसार, निर्धारित शर्तों के तहत 7.5% सालाना ब्याज दावा दाखिल होने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक देय होगा।

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