मुंबई बोरीवली फ्लाईओवर: ₹341.59 करोड़ का प्रोजेक्ट, 3 जंक्शनों से मिलेगी राहत

mumbai-borivali-cable-stayed-flyover

मुंबई के बोरीवली में 880 मीटर लंबा केबल-स्टेड फ्लाईओवर मई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। जानिए रूट, लागत, निर्माण की प्रगति और कनेक्टिविटी।

मुंबई: बोरीवली में ₹341.59 करोड़ की लागत से बन रहा 880 मीटर लंबा केबल-स्टेड फ्लाईओवर तीन प्रमुख जंक्शनों को बायपास करने में मदद करेगा। इससे दत्तपाड़ा रोड, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और लिंक रोड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट को मई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बीच, बोरीवली कनेक्टर पर कॉस्टल रोड नॉर्थ से जुड़े निर्माण कार्य के तहत 30 संरचनाएं हटाने की कार्रवाई भी हुई है।

बोरीवली फ्लाईओवर की खास बात यह है कि इसका उद्देश्य सिर्फ सड़क की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि उन जंक्शनों से गुजरने की जरूरत कम करना है जहां वाहनों के दबाव के कारण अक्सर देरी होती है। हालांकि, इससे यात्रियों का कितना समय बचेगा, इसका कोई प्रमाणित आंकड़ा सामने नहीं आया है।

कहां से कहां तक बनेगा बोरीवली फ्लाईओवर?

इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लाईओवर जनरल करियप्पा रेल ओवरब्रिज (ROB) के पूर्वी हिस्से की अप्रोच रोड से शुरू होगा। इसका दूसरा सिरा बोरीवली पूर्व में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से करीब 70 मीटर पहले उतरेगा।

पुल की कुल लंबाई 880 मीटर और चौड़ाई 15.3 से 21.5 मीटर के बीच होगी। इसमें लगभग 500 मीटर हिस्सा केबल-स्टेड संरचना के रूप में बनाया जाएगा। इस तकनीक में केबल की मदद से पुल के डेक को सहारा दिया जाता है।

mumbai-borivali-cable-stayed-flyover-news

इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को आगे कोरा केंद्र फ्लाईओवर और लिंक रोड की ओर जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम लेन व्यवस्था और सभी कनेक्टिंग रास्तों के डिजाइन अभी उपलब्ध नहीं है।

इन तीन जंक्शनों पर कम हो सकता है ट्रैफिक का दबाव

फिलहाल बोरीवली पश्चिम से दत्तपाड़ा रोड के रास्ते वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पहुंचने वाले वाहन चालकों को तीन प्रमुख जंक्शनों से गुजरना पड़ता है:

  • राजेंद्र नगर जंक्शन
  • दत्तपाड़ा क्रॉस रोड जंक्शन
  • सुस्वागत होटल के पास टी-जंक्शन

इन स्थानों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से पीक आवर्स में यात्रा धीमी होती है। नया फ्लाईओवर इन जंक्शनों को बायपास करने का विकल्प देगा, जिससे संबंधित कॉरिडोर पर रुकावट कम होने की उम्मीद है।

हालांकि, इसका वास्तविक फायदा ट्रैफिक की मात्रा, फ्लाईओवर की अंतिम डिजाइन, एंट्री-एग्जिट व्यवस्था और आसपास की सड़कों की क्षमता पर निर्भर करेगा। अभी यह कहना संभव नहीं है कि रोजाना कितने वाहन चालकों को फायदा होगा या औसतन कितने मिनट बचेंगे।

मई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, निर्माण की स्थिति क्या है?

प्रोजेक्ट की निर्धारित समयसीमा मई 2028 है। निर्माण की प्रगति को लेकर उपलब्ध जानकारी में नींव और सब-स्ट्रक्चर का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया गया है, जबकि सुपर-स्ट्रक्चर का काम जारी है।

यह आंकड़ा पूरे फ्लाईओवर के 70 प्रतिशत तैयार होने का प्रमाण नहीं है। नींव और सब-स्ट्रक्चर की प्रगति तथा पूरे प्रोजेक्ट की कुल भौतिक प्रगति अलग-अलग माप हैं।

18 जून 2026 को दत्तपाड़ा रोड पर केबल-स्टेड हिस्से के पाइलन बॉक्स लगाए जाने की तस्वीरें भी सामने आई थीं। पाइलन और उससे जुड़ी केबल व्यवस्था इस तरह के पुल के महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्से होते हैं।

कॉस्टल रोड नॉर्थ से जुड़े निर्माण में भी गतिविधियां तेज

बोरीवली में फ्लाईओवर के अलावा कॉस्टल रोड नॉर्थ परियोजना से जुड़ा काम भी चल रहा है। 9 अक्टूबर 2026 को BMC ने बोरीवली कनेक्टर के पश्चिमी हिस्से में 30 संरचनाएं हटाने की कार्रवाई की। यह काम कॉस्टल रोड नॉर्थ के पैकेज F से जुड़ा है, न कि ₹341.59 करोड़ वाले केबल-स्टेड फ्लाईओवर का हिस्सा।

mumbai-borivali-flyover

इस पैकेज में गोराई और दहिसर इंटरचेंज के बीच लगभग 3.47 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित है। इससे क्षेत्र में भविष्य की सड़क कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है।

कॉस्टल रोड नॉर्थ को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य पहले बताया गया था। लेकिन इस समयसीमा को बोरीवली फ्लाईओवर की समयसीमा से नहीं जोड़ना चाहिए, क्योंकि दोनों परियोजनाओं का निर्माण और कार्यक्षेत्र अलग है।

ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल से भी जुड़ सकती है भविष्य की कनेक्टिविटी

बोरीवली फ्लाईओवर को भविष्य की बड़ी सड़क परियोजनाओं के साथ जोड़ने की योजना भी सामने आई है। इनमें मुंबई कॉस्टल रोड नॉर्थ और ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल शामिल हैं। प्रस्तावित कनेक्टिविटी में मागाठाणे बस डिपो के पास जुड़ाव का भी उल्लेख है।

MMRDA के आधिकारिक प्रोजेक्ट अपडेट के अनुसार, अगस्त 2026 तक ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल की भौतिक प्रगति 13.73 प्रतिशत थी। ठाणे की ओर टनल बोरिंग का काम जारी था, जबकि बोरीवली की तरफ लॉन्चिंग शाफ्ट और पाइलिंग से जुड़े काम चल रहे थे।

इस ट्विन टनल का उद्देश्य ठाणे और बोरीवली के बीच सड़क यात्रा को अधिक सीधा बनाना है। लेकिन फ्लाईओवर, ट्विन टनल और कॉस्टल रोड नॉर्थ के सभी कनेक्शन कब उपलब्ध होंगे, इसकी निश्चित तारीख अभी स्पष्ट नहीं है।

यात्रियों को क्या फायदा और किन बातों का इंतजार?

फ्लाईओवर शुरू होने के बाद संबंधित मार्ग पर तीन जंक्शनों को बायपास करने का विकल्प मिलेगा। इससे यात्रा में रुकावट कम होने और ईंधन की खपत घटने की संभावना है। ट्रैफिक के कारण होने वाले प्रदूषण पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, इन संभावित लाभों का वास्तविक आकलन फ्लाईओवर शुरू होने के बाद ट्रैफिक डेटा के आधार पर ही किया जा सकेगा। अभी यात्रियों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि निर्माण के दौरान कौन-से रास्ते प्रभावित होंगे, पुल पर कितनी लेन होंगी और आसपास के जंक्शनों पर यातायात का प्रबंधन कैसे किया जाएगा।

फिलहाल प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य मई 2028 तक निर्माण पूरा करना है। इसकी वास्तविक प्रगति, अंतिम डिजाइन और भविष्य की सड़क परियोजनाओं से जुड़ाव की स्थिति पर आगे के आधिकारिक अपडेट महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

Ismail Shaikh Avatar
Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading