Palghar Hospital Violence: रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तार, 22 को पुलिस हिरासत; हाईकोर्ट की जांच पर नजर

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पालघर अस्पताल हिंसा में रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तारियां हुईं। 22 आरोपियों की पुलिस हिरासत, CCTV जांच और हाईकोर्ट की निगरानी पर पूरी जानकारी।

पालघर: मुंबई से सटे पालघर जिले के रिलीफ हॉस्पिटल में दही-हांडी के बाद हुई हिंसा के मामले में जांच अब गिरफ्तारी से आगे बढ़कर डिजिटल सबूत और पुलिस जांच की निगरानी तक पहुंच गई है। विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक कुल 23 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

मामले में पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और कथित तौर पर उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुरुआती जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

पालघर अस्पताल में विवाद कैसे शुरू हुआ?

यह मामला 5 सितंबर की रात और 6 सितंबर की शुरुआती घंटों में पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में हुआ। दही-हांडी समारोह के दौरान घायल हुए कुछ गोविंदा अस्पताल में भर्ती थे। उपचार, जांच, डिस्चार्ज और अस्पताल के बिल को लेकर विवाद के बाद शिवसेना से जुड़े लोगों के अस्पताल पहुंचने का आरोप है।

पुलिस और अस्पताल की शिकायत के अनुसार, अस्पताल में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई, डॉक्टरों को धमकाया गया और कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई। एक घायल व्यक्ति को ICU से जबरन बाहर ले जाने का आरोप भी मामले का हिस्सा है। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान किए जाने की बात कही है।

शुरुआती रिपोर्टों में पांच घायल गोविंदाओं के इलाज और करीब 19,866 रुपये के बिल को लेकर विवाद सामने आया था। एक घायल गोविंदा को आगे की जांच के लिए स्कैन कराने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई। बाद में घायल गोविंदा केशव ठाकुर को वर्टिब्रल कंप्रेशन फ्रैक्चर पाए जाने और D10-D12 कशेरुकाओं की स्थिरीकरण सर्जरी किए जाने की जानकारी दी गई।

23 गिरफ्तारियां कैसे हुईं?

शुरुआत में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात और तत्कालीन जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित आरोपी शामिल थे। 7 सितंबर को राहुल घरात की गिरफ्तारी हुई।

इसके बाद 11 सितंबर को विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और 12 गोविंदा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। रोहित गावित को मीरा रोड से पकड़े जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई। पुलिस के अनुसार, उनके पुराने मोबाइल में नया SIM इस्तेमाल किए जाने के बाद तकनीकी निगरानी के जरिए उनका पता लगाने में मदद मिली

इसके बाद फरार बताए जा रहे आरोपियों पर कार्रवाई तेज हुई। 13-14 सितंबर को आठ शिवसेना पदाधिकारी पुलिस के सामने पेश हुए, जबकि साईराज पाटील के चालक साहिल राउत को भी गिरफ्तार किया गया। इससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 23 तक पहुंच गई।

पुलिस के सामने पेश होने वालों में कुंदन सांखे, साईराज पाटील, मनीष उर्फ विक्की सांखे, राहुल सांखे, ऋषभ वारे, नगरसेविका नीलम सांखे और मनोज घरात के नाम सामने आए हैं।

22 या 23 गिरफ्तार? आंकड़े में अंतर क्यों दिख रहा है?

मामले में 22 और 23 दोनों आंकड़े दिखाई दे रहे हैं। 14 सितंबर को 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसी रिपोर्ट में पुलिस द्वारा CCTV के आधार पर 22 लोगों की पहचान किए जाने का उल्लेख है।

इसके बाद आठ आरोपियों के surrender और साईराज पाटील के चालक साहिल राउत की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तारियां 23 बताई गईं। इसलिए 22 का आंकड़ा पुलिस हिरासत में भेजे गए आरोपियों से और 23 का आंकड़ा कुल गिरफ्तारियों से जुड़ा दिखाई देता है।

रोहित गावित और कुंदन सांखे पर क्या आरोप हैं?

रोहित गावित, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत दी गई। उनके बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि घटनास्थल पर उनकी भूमिका को लेकर आरोपों की जांच जरूरी है और उन्होंने किसी गैरकानूनी इरादे से अस्पताल जाने से इनकार किया। दूसरी ओर पुलिस ने उनकी भूमिका और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जांच के लिए हिरासत की जरूरत बताई।

कुंदन सांखे, जो शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख रहे हैं, बाद में पुलिस के सामने पेश हुए। पुलिस के मुताबिक वह उन आरोपियों में शामिल हैं जिनकी भूमिका की जांच CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

पुलिस को आरोपियों की हिरासत क्यों चाहिए थी?

पुलिस ने अदालत से पांच दिन की हिरासत मांगते हुए जांच के कई कारण बताए। इनमें आरोपियों के voice samples लेना, मोबाइल डिवाइस जब्त करना और CCTV के cloud storage में मौजूद फुटेज को सुरक्षित करना शामिल था। पुलिस ने अदालत को बताया कि CCTV से संबंधित cloud data बेंगलुरु स्थित सर्वर पर होने की जानकारी है।

आरोपियों के बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि वे घायल दोस्त से मिलने अस्पताल गए थे और उनके पीछे कोई गैरकानूनी इरादा नहीं था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मजिस्ट्रेट योगेश एच. गजभिये ने अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए पुलिस हिरासत मंजूर की।

किन धाराओं में मामला दर्ज है?

मामले में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान या हानि की रोकथाम) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

मिली जानकारी के अनुसार आरोपों में दंगा, मारपीट, आपराधिक धमकी, बिना अनुमति प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य संबंधित अपराध शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर क्यों सवाल उठाए?

इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण developments में से एक बॉम्बे हाईकोर्ट की दखल है। अदालत ने पालघर पुलिस की शुरुआती जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई और जांच को पर्याप्त तरीके से आगे नहीं बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए।

अदालत ने पंचनामा, गवाहों के बयान और घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूतों के संग्रह को लेकर सवाल उठाए। अस्पताल में मौजूद सलाइन बोतल जैसे संभावित सबूत को जब्त नहीं किए जाने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।

हाईकोर्ट ने कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा 17 सितंबर बताई गई है।

जांच अधिकारी भी बदले गए

मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों में बदलाव भी हुआ। शुरुआती जांच PSI विनायक केसरकर के पास थी। इसके बाद पालघर SDPO उमेश गावली और फिर डहाणू SDPO निशा जाधव को जांच की जिम्मेदारी दी गई। 14 सितंबर की रिपोर्ट में निशा जाधव को पुलिस की ओर से अदालत में आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए पेश होने की जानकारी दी गई है।

हाईकोर्ट की निगरानी में अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिवसेना ने क्या कार्रवाई की?

मामले में नाम सामने आने के बाद शिवसेना ने अपने कई पदाधिकारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की। जिसमें राहुल घरात, कुंदन सांखे, साईराज पाटील समेत सात पदाधिकारियों के निलंबित कर दिया गया है।

अब आगे क्या होगा?

16 सितंबर तक दी गई पुलिस हिरासत के बाद यानी कल 17 सितंबर आरोपियों को अदालत के सामने फिर पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए या पुलिस हिरासत बढ़ाई जाए या किसी आरोपी को जमानत संबंधी राहत मिले।

साथ ही पुलिस के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल फोन, voice samples और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक की निगरानी रिपोर्ट भी अगले चरण में महत्वपूर्ण होगी।

मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस जांच और अदालत की निगरानी दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।

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