कुरार के प्राचीन वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मांग पर वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए।
मुंबई: मलाड (पूर्व) कुरार गांव स्थित प्राचीन वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के आधिकारिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मांग को लेकर बुधवार को मंत्रालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। शिवसेना विधायक सुनील प्रभु की मांग पर हुई इस बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते में सुधार और श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
विधायक सुनील प्रभु ने इस संबंध में 26 जून 2026 को वन मंत्री को लिखित पत्र दिया था। उनका कहना है कि कुरार गांव की ग्रामदेवता के रूप में प्रसिद्ध वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अन्य पर्यटन स्थलों की तरह आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में स्थान मिलना चाहिए। मंदिर ट्रस्ट की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता बाबूभाई भवानजी ने भी वन मंत्री को निवेदन दिया था।
मंदिर तक पहुंच और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर
बैठक में मंदिर तक जाने वाले रास्ते को बेहतर और सुगम बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। नवरात्रि सहित वर्षभर यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच मंदिर में ओटी भरने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।
वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की संख्या और भीड़ को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था की जाए। इसमें मंदिर तक पहुंच की सुविधा और भीड़ के समय आने वाली संभावित परेशानियों को दूर करने पर ध्यान देने की बात कही गई।
हालांकि, बैठक के बाद वाघेश्वरी मंदिर को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का आधिकारिक पर्यटन स्थल घोषित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला मांग, बैठक और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के स्तर पर है।
एसजीएनपी में पहले से बढ़ रहा है पर्यटन ढांचा
वाघेश्वरी मंदिर को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने की व्यापक योजना पर काम चल रहा है। मार्च 2026 में वन मंत्री गणेश नाईक ने उद्यान के लिए करीब 775 करोड़ रुपये के प्रस्तावित विकास खाके की जानकारी दी थी। इसमें तेंदुआ सफारी, नौकायन सुविधाओं में सुधार, पदयात्रा मार्ग और पर्यटकों के लिए नई व्यवस्थाएं शामिल हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने इसी वर्ष संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय मास्टर प्लान को भी मंजूरी दी है। इसमें नियंत्रित और टिकाऊ पर्यटन के साथ पर्यटक सुविधाओं, प्रकृति मार्गों, जानकारी केंद्रों तथा सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया है।
वर्तमान में महाराष्ट्र पर्यटन विभाग की संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संबंधी जानकारी में कान्हेरी गुफाएं, वन्यजीव और प्रकृति आधारित पर्यटन प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। मुंबई उपनगर जिला प्रशासन की पर्यटन सूची में भी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और कान्हेरी गुफाओं सहित कई प्रमुख स्थल दर्ज हैं, जबकि वाघेश्वरी मंदिर अलग आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में सूचीबद्ध नहीं है।
विकास के साथ पर्यावरणीय नियम भी महत्वपूर्ण
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यहां किसी भी नए निर्माण या विकास कार्य को सामान्य शहरी परियोजना की तरह नहीं देखा जा सकता। उद्यान के आसपास का क्षेत्र पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत आता है और विकास गतिविधियों पर पर्यावरणीय नियंत्रण लागू हैं।
इसके अलावा उद्यान से जुड़े अतिक्रमण और संरक्षण के मामलों में न्यायालय के निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं। सितंबर 2026 में वन विभाग ने उद्यान के अतिक्रमण, पात्र परिवारों के पुनर्वास और सीमा सुरक्षा को लेकर समीक्षा की है।
ऐसे में वाघेश्वरी मंदिर तक रास्ता सुधारने या पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने की कोई भी योजना पर्यावरणीय नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ानी होगी। यही वजह है कि वन मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से न्यायालय के आदेशों के अधीन आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है।
बढ़ते पर्यटन के साथ भीड़ और पर्यावरण का सवाल
यदि भविष्य में वाघेश्वरी मंदिर को आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाता है, तो श्रद्धालुओं के साथ अन्य पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना होगी। इसके लिए रास्ते, पैदल आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा, आपातकालीन पहुंच और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में मानवीय गतिविधियों के विस्तार का असर वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर न पड़े, यह भी महत्वपूर्ण होगा। सितंबर 2026 में उद्यान में धार्मिक आयोजनों और पर्यावरणीय नियमों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
इसलिए वाघेश्वरी मंदिर के विकास का अगला चरण केवल सुशोभीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का निर्णय होता है तो उसके साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और उद्यान के पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल वन विभाग की बैठक के बाद अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाघेश्वरी मंदिर को आधिकारिक पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की मांग पर सरकार आगे क्या निर्णय लेती है और मंदिर तक पहुंच तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार के लिए कौन से कार्य मंजूर किए जाते हैं।
