नेपाल में फ्लैश बाढ़ के बाद 320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर हैं। करीब 3 हजार लोग लापता हैं। जानिए rescue operation, मौतों और नए खतरे का ताजा अपडेट आज यहां भी।
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनसे हादसे के बाद संपर्क नहीं हो पाया। इनमें कम से कम 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। दूसरी तरफ नेपाल और Tibet को मिलाकर करीब 3 हजार लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में rescue operation तेज होने के बावजूद कई परिवारों को अपने लोगों की खबर का इंतजार है।
नेपाल बाढ़ में 320 भारतीयों का क्या हुआ?
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में आई बाढ़ के बाद करीब 320 Indian nationals अब भी contact में नहीं हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा Indian-origin लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
इसमें कई लोग Kailash Mansarovar Yatra पर गए भारतीय यात्री हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और landslide के बाद कई यात्रियों से संपर्क टूट गया। परिवार अब हेल्पलाइन, अस्पतालों और स्थानीय authorities के जरिए अपने लोगों की जानकारी तलाश रहे हैं।
एक जरूरी बात यह है कि 320 भारतीयों का मतलब 320 मौतें नहीं है। ये वे लोग हैं जिनसे फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। Rescue और identification operation आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बदल सकता है।
चीन की तरफ फंसे भारतीयों का क्या हुआ?
नेपाल के साथ China side पर भी कई भारतीय यात्री फंसे हुए थे। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 400 भारतीय वहां सुरक्षित और संपर्क में थे। इनमें से 96 लोग जमीन के रास्ते Nepal पहुंच चुके थे, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित Delhi लाया गया।
इसके अलावा Nepal में एक hydropower project से जुड़े भारतीयों को भी rescue किया गया है। अलग-अलग rescue operations में भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकलने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
करीब 3 हजार लोग अब भी Missing
यह disaster सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है। Nepal और Tibet में करीब 3 हजार लोग अब भी missing बताए जा रहे हैं। Reuters के मुताबिक Nepal में 669 और Tibet में 7 लोगों की मौत दर्ज की गई है, यानी कुल मौतों का आंकड़ा 676 तक पहुंच गया है।
ताजा जानकारी के मुताबिक 3,700 से ज्यादा लोगों को Nepal में rescue किया जा चुका है। लेकिन पहाड़ी इलाकों में मलबा, टूटे रास्ते और संकरी घाटियां search operation को मुश्किल बना रही हैं।
सबसे मुश्किल तलाश hydropower projects के आसपास चल रही है
बाढ़ ने Trishuli River corridor में मौजूद hydropower projects को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। Upper Trishuli-1 project के आसपास mud और debris से भरे इलाकों में workers की तलाश की जा रही है। कुछ लोगों के tunnel में फंसे होने की आशंका के चलते rescue teams का फोकस इन जगहों पर भी है।
इसी वजह से Nepal में rescue operation अब सिर्फ सड़क और गांवों तक सीमित नहीं है। नदी किनारे, मलबे में दबे इलाकों और hydropower tunnels तक search operation बढ़ाया गया है।
आखिर इतनी खतरनाक बाढ़ आई कैसे?
26 अगस्त को Nepal-Tibet border के पास अचानक आई flash flood ने कुछ ही समय में बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तेज पानी के साथ भारी मात्रा में rock, ice और debris नीचे आया, जिससे bridges, roads, buildings और infrastructure को भारी नुकसान हुआ।
खबर के मुताबिक glacier collapse से शुरू हुए debris flow ने इस disaster को और खतरनाक बना दिया। बाढ़ का असर Bhote Koshi और Trishuli river corridor तक पहुंचा और कई settlements तथा infrastructure इसकी चपेट में आए।
Kailash Mansarovar यात्रियों पर क्यों पड़ा बड़ा असर?
इस पूरी घटना में Kailash Mansarovar Yatra का angle सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है। Nepal और Tibet के रास्ते इस समय बड़ी संख्या में भारतीय यात्री यात्रा कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ ने कई border routes और access points को प्रभावित कर दिया।
इसी वजह से कई परिवारों को अपने रिश्तेदारों की आखिरी location तक पता लगाने में भी मुश्किल हुई। कुछ परिवार Nepal पहुंचकर खुद अपने लोगों की तलाश कर रहे हैं।
क्या rescue operation अब तेज हुआ है?
खराब मौसम की वजह से rescue operation में रुकावट आई थी, लेकिन अब search and rescue activities फिर से शुरू हो गई हैं। Nepal की तरफ से remote और मुश्किल इलाकों में technical assistance की जरूरत भी बताई गई है।
India समेत कई देशों से relief material और rescue support पहुंचाया जा रहा है। Helicopters के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी चल रहा है।
लेकिन एक और खतरा सामने है
बाढ़ के बाद Himalayan region में एक नई lake बनने से भी authorities की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल इसके water level में कमी आने की बात सामने आई है, लेकिन इसे लगातार monitor किया जा रहा है।
अगर पानी का दबाव फिर बढ़ता है तो आसपास के इलाकों में दोबारा flood risk पैदा हो सकता है। इसलिए rescue operation के साथ-साथ secondary flood threat पर भी नजर रखी जा रही है।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल उन करीब 320 भारतीयों को लेकर है जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इनके अलावा Nepal और Tibet में हजारों दूसरे लोग भी missing हैं।
Rescue teams मलबे, नदी किनारे, remote villages और hydropower sites पर लगातार search कर रही हैं। जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक पहुंच बढ़ेगी, missing लोगों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
फिलहाल परिवारों की नजर एक ही चीज पर है—कहीं से भी फोन आए और पता चले कि उनका अपना इंसान सुरक्षित है।
