Riya Baliyan के तिरंगा विवाद पर माफी के बाद सवाल: क्या वायरल होने की कोशिश में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान सही है और क्या सिर्फ माफीनामा पर्याप्त है?
मुजफ्फरनगर: सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत आज कई लोगों को ऐसे कंटेंट की तरफ ले जा रही है, जो कुछ ही घंटों में उन्हें चर्चा में ला देता है। लेकिन जब यह वायरल होने की कोशिश देश के राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ जाए, तो सवाल सिर्फ views और followers का नहीं रह जाता। सवाल यह बन जाता है कि वायरल होने के लिए तिरंगे के सम्मान से समझौता आखिर कहां तक सही है?
मुजफ्फरनगर की Instagram influencer Riya Baliyan से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ। वीडियो में तिरंगे को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद Riya ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और संबंधित वीडियो को हटा दिया।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या माफीनामा इस विवाद को खत्म करने के लिए पर्याप्त है?
गलती थी या वायरल होने की कोशिश?
Riya ने अपनी सफाई में इसे अनजाने में हुई गलती बताया है। ऐसे में बिना ठोस सबूत यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने जानबूझकर तिरंगे का गलत इस्तेमाल सिर्फ views या followers बढ़ाने के लिए किया।
लेकिन सोशल मीडिया का मौजूदा सिस्टम एक दूसरी बहस जरूर खड़ी करता है।
किसी विवादित वीडियो पर लोग नाराज होते हैं, उसे शेयर करते हैं, स्क्रीन रिकॉर्ड करते हैं, दूसरे pages पर पोस्ट करते हैं और creator का account खोजते हैं। यानी जिस content का विरोध किया जा रहा है, वही content कई बार creator को अतिरिक्त exposure भी दे सकता है।
यही वजह है कि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वीडियो क्यों बनाया गया था?
सवाल यह भी है कि उस विवाद से किसे क्या मिला?
वीडियो डिलीट हुआ, लेकिन क्या Viral Traffic भी खत्म हो गया?
यह मान लेना आसान है कि वीडियो delete होने के बाद विवाद खत्म हो गया।
लेकिन डिजिटल दुनिया में ऐसा जरूरी नहीं है।
एक बार कोई Reel viral हो जाए तो उसके screenshots, screen recordings, reposts और reaction videos अलग-अलग platforms पर घूम सकते हैं। लोग original creator का नाम search कर सकते हैं और उसके दूसरे content तक पहुंच सकते हैं।
यानी:
वीडियो delete हो सकता है, लेकिन उससे पैदा हुई पहचान और digital reach जरूरी नहीं कि delete हो जाए।
क्या गुस्सा भी किसी Creator की Reach बढ़ा सकता है?
सोशल मीडिया पर “rage bait” शब्द इसी phenomenon से जुड़ा है—ऐसा provocative content जो लोगों में गुस्सा पैदा करके engagement और traffic हासिल करता है। Oxford University Press ने “rage bait” को 2025 का Word of the Year चुना था और बताया था कि इस term का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि Riya का वीडियो rage bait था।
लेकिन यह जरूर समझने की जरूरत है कि सोशल मीडिया पर outrage खुद engagement पैदा कर सकता है।
यानी कभी-कभी audience सोचती है—
“हम इसका विरोध करके इसे सबक सिखा रहे हैं।”
लेकिन platform की नजर से वही activity हो सकती है—
Comment + Share + Profile Visit + Reaction = More Attention
यही social media की सबसे बड़ी विडंबना है।
क्या माफी मांगने के बाद भी जवाबदेही जरूरी है?
माफी मांगना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम है।
अगर कोई व्यक्ति गलती स्वीकार करता है, उसे हटाता है और सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है, तो उसे सुनना भी जरूरी है।
लेकिन राष्ट्रीय ध्वज जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतीक के मामले में सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ “गलती हो गई” कहना पर्याप्त है?
कानून और Flag Code National Flag के सम्मानजनक प्रदर्शन और handling से जुड़े नियम निर्धारित करते हैं। National Flag के प्रति disrespect को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत भी संबोधित किया गया है।
इसलिए किसी मामले में गलती, लापरवाही और जानबूझकर किए गए अपमान के बीच अंतर करना जरूरी है।
तिरंगे से जुड़े विवाद सिर्फ Riya Baliyan तक सीमित नहीं
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में National Flag से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं।
हाल ही में Fatehpur में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पांच युवकों के खिलाफ तिरंगे के कथित अपमान को लेकर मामला दर्ज किया गया।
वहीं दूसरी तरफ Nitin Nabin को लेकर वायरल हुई एक तस्वीर को BJP ने fake बताया और उसके खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। यानी तिरंगे से जुड़ा हर वायरल दावा वास्तविक घटना हो, यह भी जरूरी नहीं है।
इसलिए सोशल मीडिया users के लिए दोहरी जिम्मेदारी बनती है—
गलत तरीके से तिरंगे के इस्तेमाल का विरोध करें, लेकिन किसी unverified तस्वीर या वीडियो को बिना जांचे viral भी न करें।
असली सवाल: देशभक्ति या सिर्फ Social Media Outrage?
तिरंगे का सम्मान किसी भी भारतीय के लिए बेहद संवेदनशील विषय है।
लेकिन देशभक्ति का मतलब सिर्फ किसी वायरल वीडियो पर गुस्सा करना नहीं है।
अगर कोई गलती करता है तो सवाल उठना चाहिए। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन बिना सबूत किसी व्यक्ति को देशद्रोही कहना, लगातार गाली देना या उसके हर पुराने content को खंगालकर उसे viral करना भी समाधान नहीं है।
क्योंकि हो सकता है कि जिस account को आप “सबक सिखाने” के लिए search कर रहे हैं, उसी account की reach आप खुद बढ़ा रहे हों।
Riya Baliyan की माफी के बाद अब क्या?
Riya ने विवादित वीडियो हटाया है और माफी भी मांगी है।
अब इस मामले में तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—
पहला: क्या यह वास्तव में अनजाने में हुई गलती थी?
दूसरा: क्या National Flag के display से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ?
तीसरा: क्या ऐसी गलती के बाद सार्वजनिक माफी पर्याप्त मानी जानी चाहिए या परिस्थितियों के अनुसार आगे भी कोई जवाबदेही बनती है?
इन सवालों का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्य और कानून के आधार पर होना चाहिए।
क्योंकि तिरंगा कोई Viral Content नहीं है
सोशल मीडिया पर views कुछ घंटों में मिल सकते हैं, followers कुछ दिनों में बढ़ सकते हैं और controversy कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है।
लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किसी algorithm का हिस्सा नहीं है।
इसलिए सवाल Riya Baliyan से भी बड़ा है—
“वायरल होने के चक्कर में तिरंगे का अपमान आखिर कहां तक सही है? और अगर गलती हो भी जाए, तो क्या सिर्फ एक माफीनामा उस गलती की पूरी कीमत चुका देता है?”
इस विवाद का जवाब सिर्फ Riya Baliyan को नहीं, बल्कि उस पूरी सोशल मीडिया culture को देना होगा जहां attention के लिए outrage और outrage के लिए attention—दोनों एक-दूसरे को viral बनाते हैं।
