मुंबई पुलिस ने लोकभवन के फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों के जरिए रेलवे के इमरजेंसी कोटे से टिकट दिलाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जांच में देशभर में फैले 200 एजेंटों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने रेलवे के वीआईपी और इमरजेंसी कोटे के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के लोकभवन के नाम पर फर्जी लेटरहेड, नकली मुहर और राज्यपाल कार्यालय के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर यात्रियों के वेटिंग टिकट कन्फर्म कराए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले करीब 200 एजेंटों के जरिए संचालित किया जा रहा था। ये एजेंट यात्रियों को तत्काल और कन्फर्म टिकट दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
कैसे चलता था पूरा खेल?
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सबसे पहले यात्रियों के नाम पर वेटिंग टिकट बुक करते थे। इसके बाद महाराष्ट्र लोकभवन के नाम से तैयार किए गए फर्जी पत्र रेलवे अधिकारियों तक पहुंचाए जाते थे। इन पत्रों में राज्यपाल के निजी सहायक के कथित नकली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया जाता था।
इमरजेंसी कोटे के जरिए सीट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते थे।
रेलवे सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
फरवरी 2026 में मध्य रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय ने लोकभवन से कुछ संदिग्ध पत्रों का सत्यापन मांगा था। जांच के दौरान पता चला कि पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर और मुहर फर्जी थे।
लोकभवन प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद मलबार हिल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पांच आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप (34) समेत चार दलाल शामिल हैं। वहीं, अमरीश ठक्कर को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने फर्जी पत्र तैयार किए गए और कितने यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराए गए।
किन ट्रेनों में कन्फर्म कराए गए टिकट?
प्रारंभिक जांच में एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रेलवे को इस घोटाले से कितना आर्थिक नुकसान हुआ।
यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री केवल अधिकृत रेलवे प्लेटफॉर्म और लाइसेंस प्राप्त एजेंटों के माध्यम से ही टिकट बुक करें। सोशल मीडिया या निजी एजेंटों के जरिए “गारंटीड कन्फर्म टिकट” के दावों से बचें।
फिलहाल पुलिस कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Official Sources
- मलबार हिल पुलिस स्टेशन (मुंबई पुलिस)
मलबार हिल पुलिस स्टेशन की आधिकारिक वेबसाइट - मध्य रेलवे – चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय
मध्य रेलवे (कॉमर्शियल विभाग) संपर्क पेज - महाराष्ट्र लोकभवन (राजभवन)
महाराष्ट्र लोकभवन की आधिकारिक वेबसाइट
FAQ
सवाल: इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
सवाल: घोटाला कैसे किया जाता था?
फर्जी सरकारी पत्रों और नकली हस्ताक्षरों के जरिए इमरजेंसी कोटे से टिकट कन्फर्म कराए जाते थे।
सवाल: कितने एजेंट इस नेटवर्क से जुड़े थे?
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, देशभर में करीब 200 एजेंट सक्रिय थे।
सवाल: किन ट्रेनों में टिकट कन्फर्म कराए गए?
एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं।

