Mumbai Boss Scam: WhatsApp से 10.40 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

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Mumbai Boss Scam में फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से कंपनी के अधिकारी को फंसाकर 10.40 करोड़ रुपये ठगे गए। पुलिस ने 5.63 करोड़ रुपये फ्रीज किए।

मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने कथित WhatsApp इम्पर्सोनेशन से जुड़े एक बड़े ‘Boss Scam’ का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर वाले फर्जी WhatsApp अकाउंट से निर्देश भेजे गए, जिसके बाद 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।

मुंबई में साइबर ठगी का तरीका लगातार बदल रहा है। अब हर फ्रॉड में OTP, बैंकिंग पासवर्ड या फिशिंग लिंक की जरूरत नहीं पड़ती। मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने आए इस मामले में कथित तौर पर ठगों ने तकनीकी हैकिंग के बजाय कंपनी के अंदर मौजूद भरोसे और वरिष्ठ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया। इसी वजह से इस तरह की ठगी को ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है।

WhatsApp पर बॉस बनकर भेजे गए भुगतान के निर्देश

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी से WhatsApp के जरिए संपर्क किया और खुद को कंपनी के डायरेक्टर के रूप में पेश किया। फर्जी प्रोफाइल पर वरिष्ठ अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।

कथित तौर पर आरोपी ने अधिकारी को बताया कि डायरेक्टर एक महत्वपूर्ण मीटिंग में व्यस्त हैं और कुछ जरूरी कारोबारी भुगतान तत्काल करने हैं। संदेशों को वास्तविक समझकर अधिकारी ने कंपनी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।

जांच के अनुसार, इस तरह कुल 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। बाद में जब अधिकारी ने वास्तविक डायरेक्टर से संपर्क किया, तब कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

इस मामले की खास बात यह है कि उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, ठगी का मुख्य तरीका किसी OTP या बैंकिंग क्रेडेंशियल को हासिल करना नहीं था। ठगों ने कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारी की पहचान और कारोबारी भरोसे का इस्तेमाल कर भुगतान के निर्देश मनवाए।

5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज

शिकायत मिलने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने बैंकिंग ट्रेल और पैसों के लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजे जाने का पता चला।

पुलिस की कार्रवाई के बाद 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की और छह लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस कथित मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

ठगी की रकम से खरीदा जाता था सोना

जांच में कथित तौर पर ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजने और उसके बाद सोना खरीदने का तरीका सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों के डिजिटल ट्रेल को जटिल बनाना और रकम की सीधी पहचान मुश्किल करना था।

रिपोर्टों के मुताबिक, कथित तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र में अलग-अलग ज्वेलरी शोरूम से सोना खरीदा गया। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस प्रक्रिया में किन लोगों और खातों का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर कथित मनी ट्रेल और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।

बॉस स्कैम से कंपनियों को क्यों है बड़ा खतरा?

इस तरह के साइबर फ्रॉड में अपराधी किसी CEO, Director या Senior Executive की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं। कारोबारी माहौल में वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले तत्काल भुगतान निर्देशों पर कर्मचारी कई बार बिना अतिरिक्त पुष्टि के भरोसा कर लेते हैं।

इसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित ठग:

  • वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं
  • अलग WhatsApp नंबर को “Personal” या “Private Number” बता सकते हैं
  • तत्काल भुगतान का दबाव बना सकते हैं
  • कर्मचारी को निर्देश किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करने को कह सकते हैं
  • रकम को कई बैंक खातों में भेजकर ट्रेल को जटिल बना सकते हैं

मुंबई के इस मामले की जांच से यह संकेत मिलता है कि कंपनियों को केवल OTP और पासवर्ड आधारित साइबर सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय Payment Verification Protocol भी मजबूत करना होगा।

मुंबई पुलिस की कंपनियों से अपील

ऐसे मामलों से बचने के लिए किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आए बड़े या असामान्य भुगतान निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। केवल WhatsApp मैसेज, प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

कंपनियां बड़े भुगतान के लिए:

  • Two-Person Approval System लागू कर सकती हैं
  • भुगतान से पहले Voice या Video Call Verification कर सकती हैं
  • नए बैंक अकाउंट पर भुगतान के लिए अतिरिक्त मंजूरी ले सकती हैं
  • अचानक आए “Urgent” Payment Requests को दोबारा Verify कर सकती हैं
  • कर्मचारियों को Executive Impersonation और Boss Scam के बारे में प्रशिक्षित कर सकती हैं

यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए। त्वरित रिपोर्टिंग से बैंकिंग चैनल के जरिए रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।

जांच जारी, मास्टरमाइंड की तलाश

मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले में कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी तरह के WhatsApp इम्पर्सोनेशन मॉडल से अन्य कंपनियों या वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया था।

मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने तक आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

मुंबई का यह कथित Boss Scam इस बात का संकेत है कि साइबर ठगी अब केवल OTP या फिशिंग लिंक तक सीमित नहीं रही। वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर भरोसे के जरिए किए जाने वाले फर्जी भुगतान से बचने के लिए कंपनियों को हर बड़े वित्तीय निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।

Official Sources

  • Mumbai Police – Official Website — मुंबई पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट और साइबर क्राइम विभाग की जानकारी।
  • National Cyber Crime Reporting Portal — भारत सरकार का आधिकारिक साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल।
  • Cyber Crime Helpline 1930 — वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन जानकारी।

FAQ

Boss Scam क्या होता है?

Boss Scam में साइबर अपराधी CEO, Director या किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी से भुगतान या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

इस मुंबई साइबर फ्रॉड में कितनी रकम की ठगी हुई?

पुलिस जांच से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, कंपनी के खाते से 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम 63 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर हुई।

क्या इस मामले में कोई रकम फ्रीज हुई है?

हां। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।


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