महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने नागपुर में कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ऋषि-मुनियों में रुचि बढ़ गई है और अब उनका वानप्रस्थ का समय आ गया है। साथ ही बिहार की राजनीति पर भी बड़ा बयान दिया।
नागपुर: महात्मा गांधी के परपोते और सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी ने नागपुर में ऐसा बयान दिया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधते हुए कहा कि, “अब उनका वानप्रस्थ का समय आ गया है।” The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi
दरअसल कुछ दिनों पहले मोहन भागवत ने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह काम ऋषि-मुनियों ने पहले ही कर दिया था। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तुषार गांधी ने व्यंग्य किया और कहा कि भागवत जी की ऋषि-मुनियों में रुचि बढ़ गई है, इसलिए अब उन्हें वानप्रस्थ की ओर बढ़ना चाहिए।
गांधी परिवार और संघ की खींचतान
यह पहली बार नहीं है जब तुषार गांधी ने संघ या उसके नेताओं को लेकर बयान दिया हो। लंबे समय से गांधी परिवार और संघ विचारधारा के बीच टकराव की स्थिति रही है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद से ही आरएसएस और गांधी परिवार के रिश्ते तल्ख़ रहे हैं। नागपुर में दिए गए इस बयान ने एक बार फिर इस विवाद को हवा दे दी है।
बिहार राजनीति पर तुषार गांधी का बड़ा बयान
नागपुर दौरे पर तुषार गांधी सिर्फ मोहन भागवत तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने बिहार में चल रही राहुल गांधी की यात्रा और वहां उठ रहे मुद्दों पर भी बात की।
उन्होंने कहा – “बिहार के गांवों में बच्चों और आम लोगों के मुंह से एक ही नारा सुनाई दे रहा है – ‘वोट चोर गद्दी छोड़।’ ये नारा सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हिंदुस्तान में गूंजेगा।”
तुषार गांधी के मुताबिक, बिहार के लोग इस बार बदलाव चाहते हैं। वहां के माहौल में एक बेचैनी है और लोग वोट चोरी के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। उन्होंने इसे एक बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi
वानप्रस्थ टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय परंपरा में वानप्रस्थ का मतलब जीवन के तीसरे चरण से है, जब इंसान सांसारिक मोह-माया से दूर होकर आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ता है। तुषार गांधी ने जब मोहन भागवत के लिए वानप्रस्थ का जिक्र किया, तो इसे सिर्फ धार्मिक व्याख्या नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह टिप्पणी संघ की भूमिका और भागवत की सक्रियता पर सवाल उठाती है। यह कहना कि “अब उनका वानप्रस्थ का समय है” सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि उन्हें अब सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक बयानों से दूरी बना लेनी चाहिए। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi
बिहार से हिंदुस्तान तक जाएगा मुद्दा
तुषार गांधी ने आगे कहा कि बिहार में लोगों का गुस्सा अब साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की यात्रा में उन्होंने खुद यह अनुभव किया कि गांव-गांव के लोग वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा –
“हमने एक दिन की यात्रा में यह देखा कि बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी के मुंह से एक ही आवाज आ रही थी। यह नारा इतना बड़ा होगा कि बिहार से निकलकर पूरे हिंदुस्तान में फैलेगा।”
परिवर्तन की उम्मीद
तुषार गांधी ने कहा कि जनता के मन में बदलाव की उम्मीद है। उन्होंने इसे गांधीवादी आंदोलन की तर्ज पर जनभावनाओं की अभिव्यक्ति बताया। उनके अनुसार, बिहार का यह मुद्दा धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है और 2025 के राजनीतिक समीकरण पर बड़ा असर डाल सकता है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi
नागपुर क्यों खास?
तुषार गांधी का यह बयान नागपुर से आया, जो संघ (आरएसएस) का मुख्यालय है। इस वजह से यह और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। नागपुर से दिया गया हर बयान राजनीतिक और वैचारिक दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर पर गूंजता है।
महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का यह बयान आने वाले समय में बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।
एक तरफ उन्होंने मोहन भागवत पर तंज कसा कि “अब उनका वानप्रस्थ का समय है”, वहीं दूसरी ओर बिहार की राजनीति में उठ रही वोट चोरी की गूंज को देशव्यापी मुद्दा बताया।
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि इस बयान के पीछे गहरा राजनीतिक संदेश छिपा है। यह न सिर्फ संघ और गांधी परिवार की पुरानी खींचतान को सामने लाता है, बल्कि देश की राजनीति में बढ़ते असंतोष और बदलाव की मांग को भी रेखांकित करता है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi
