क्या ऐसे ही कामचोर और अयोग्य व्यक्तियों को जनसंपर्क अधिकारी के नौकरी के पद पर रेलवे प्रशासन रखता है। जिससे पत्रकारों के प्रश्नों को उनसे दूर रखा जा सके।
वी बी माणिक
मुंबई- मध्यरेल के सीनियर जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार जैन अयोग्य, अज्ञानी और एक भी डिक्टेशन न देने वाला जनसंपर्क अधिकारी साबित हो गया है। जिसको कुछ भी नही आता, अपने चेंबर में नई-नई महिला पत्रकारों को बैठाकर गप्पे मारने और अपने को ईमानदार घोषित करने वाला अधिकारी बन रहा है। जिसको कहते है ‘अपने मुँह मिट्ठू मियां’ वाली कहावत साबित हो रही है।

कुछ पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करता है। मध्यरेल में कई जगहों पर जनसंपर्क अधिकारी की जगह खाली है। फिर भी इसका ट्रांसफर नही हो रहा है। कई वर्षों से एक ही जगह पर फेविकॉल की तरह कुर्सी से चिपका हुआ है। रेलवे बोर्ड से पत्रकारों के नाम पर आने वाले पैसों में भी घपला करता है। आजकल ये प्रिंट मीडिया का कामकाज देख रहे है। इनका रिटायरमेंट करीब है फिर भी सुधरने को तैयार नही है।
फोकटिया जनसंपर्क अधिकारी..
अनिल जैन से किसी भी प्रकार की जानकारी मांगने पर आरटीआई डालने को बोलते है। जिस पीआरओ को जानकारी नही है तो उसको किस आधार पर रेलवे पगार देती है और किस आधार पर इनको नौकरी पर रखा गया है। यह एक विचारणीय प्रश्न है ? क्या ऐसे ही कामचोर और अयोग्य व्यक्तियों को नौकरी पर रेलवे प्रशासन रखता है। जिससे पत्रकारों के प्रश्नों को उनसे दूर रखा जा सके।
