मुंबई में कॉलेज के नाम को लेकर बवाल! गुजराती बोर्ड को लेकर ठाकरे गुट की चेतावनी

कांदिवली के बालभारती कॉलेज के गुजराती साइनबोर्ड पर बवाल। मराठी अनिवार्य नियम की अनदेखी का आरोप, युवा सेना ने प्रशासन को दी सीधी चेतावनी। जानिए पूरा मामला।

मुंबई: कांदिवली इलाके में एक कॉलेज के नाम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांदिवली (पश्चिम) स्थित बालभारती कॉलेज ऑफ कॉमर्स का नामफलक पूरी तरह गुजराती भाषा में होने का मामला सामने आते ही राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में हलचल मच गई है। मराठी भाषा अनिवार्य होने के बावजूद कॉलेज ने अब तक मराठी में साइनबोर्ड नहीं लगाया, जिस पर ठाकरे गुट की युवा सेना ने आक्रामक रुख अपनाया है।

क्या है पूरा साइनबोर्ड विवाद?

राज्य सरकार के नियम के अनुसार महाराष्ट्र में सभी शैक्षणिक और व्यावसायिक संस्थानों को सबसे पहले मराठी भाषा में नामफलक लगाना अनिवार्य है।

इसके बावजूद कांदिवली (पश्चिम) के इस कॉलेज का बोर्ड पूरी तरह गुजराती में लिखा हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह मराठी भाषा कानून (Marathi Language Law Maharashtra) का सीधा उल्लंघन है।

मुंबई विश्वविद्यालय के आदेश का हवाला

ठाकरे गुट की युवा सेना का कहना है कि मुंबई विद्यापीठ के परिपत्र क्र. संलग्नता/आय सी सी/(2021-22)/2022 के अनुसार महाविद्यालयों के नाम मराठी में होना अनिवार्य है।

सवाल यह उठ रहा है कि जब विश्वविद्यालय का स्पष्ट आदेश है, तो फिर कॉलेज प्रशासन ने अब तक मराठी नामफलक क्यों नहीं लगाया?

युवा सेना की आक्रामक एंट्री

मामले ने तूल पकड़ा तो युवा सेना के पदाधिकारी सीधे कॉलेज पहुंच गए।

युवा सेना के सिनेेट सदस्य प्रदीप सावंत, शशिकांत झोरे, पूर्व सिनेेट सदस्य राजन कोळंबेकर और कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक शिर्के ने कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात की और तुरंत मराठी में साइनबोर्ड लगाने की मांग की।

उनका कहना था कि “राज्य में मराठी भाषा को प्राथमिकता देना कानूनन अनिवार्य है। संस्थान का यह रवैया अस्वीकार्य है।”

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विश्वविद्यालय प्रशासन से भी मुलाकात

युवा सेना के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. अजय भामरे (प्र-कुलगुरु) और डॉ. प्रसाद कारंडे (कुलसचिव) से भी मुलाकात की।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि संबंधित कॉलेज को तत्काल मराठी नामफलक लगाने का निर्देश दिया जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी

कांदिवली इलाके के कई स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब राज्य सरकार ने स्पष्ट कानून बनाया है, तो उसका पालन हर संस्था को करना चाहिए।

सिर्फ गुजराती भाषा में बोर्ड रखना कानून का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है।

कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?

सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने जल्द ही मराठी में नामफलक लगाने को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, अभी तक जमीनी स्तर पर कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया है।

युवा सेना ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मराठी साइनबोर्ड नहीं लगाया गया, तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

मराठी भाषा कानून क्या कहता है?

महाराष्ट्र शासन के नियमों के अनुसार:

  • सभी स्कूल, कॉलेज और संस्थानों को सबसे पहले मराठी भाषा में नामफलक लगाना अनिवार्य है।
  • मराठी को प्राथमिकता देना कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
  • उल्लंघन की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।

इसी आधार पर इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है।


FAQ

Q1. विवाद किस कॉलेज को लेकर है?
कांदिवली (पश्चिम) स्थित बालभारती कॉलेज ऑफ कॉमर्स।

Q2. विवाद की वजह क्या है?
कॉलेज का नामफलक पूरी तरह गुजराती भाषा में है, जबकि मराठी अनिवार्य है।

Q3. किस संगठन ने विरोध किया?
ठाकरे गुट की युवा सेना ने विरोध जताया और कार्रवाई की मांग की।

Q4. विश्वविद्यालय का क्या आदेश है?
मुंबई विश्वविद्यालय के परिपत्र के अनुसार कॉलेज का नाम मराठी में होना चाहिए।

Q5. आगे क्या हो सकता है?
अगर मराठी नामफलक नहीं लगाया गया तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

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