Construction Safety को लेकर कल्याण-डोंबिवली के बिल्डरों ने 16 फीट ऊंचे टीन शेड का नियम बदलने की मांग की। तेज बारिश और आंधी में कई शेड गिरने से बढ़ी चिंता।
कल्याण। ठाणे, मुंबई, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली में पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश और आंधी के बीच निर्माण स्थलों पर लगाए जाने वाले 16 फीट ऊंचे टीन के सुरक्षा घेरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कई जगह तेज हवा के कारण ये भारी टीन शेड गिर गए, जिससे पैदल चलने वाले लोग घायल हुए और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। अब कल्याण-डोंबिवली के बिल्डरों ने राज्य सरकार से इस नियम में बदलाव की मांग की है।
निर्माण स्थल पर 16 फीट ऊंचा घेरा लगाना है अनिवार्य
वर्तमान निर्माण नियमों के अनुसार, किसी भी इमारत का काम शुरू करने से पहले पूरे भूखंड के चारों ओर करीब 16 फीट ऊंचा टीन का सुरक्षा घेरा लगाना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थल से उड़ने वाली धूल, मिट्टी और निर्माण सामग्री को बाहर फैलने से रोकना तथा आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यदि बिल्डर इस नियम का पालन नहीं करता तो स्थानीय नगर निगम या नगर नियोजन प्राधिकरण निर्माण अनुमति देने से इनकार कर सकता है या कार्रवाई कर सकता है।
तेज हवा में नहीं टिक पा रहे भारी टीन शेड
बिल्डरों का कहना है कि पिछले दो दिनों में तेज हवा और मूसलाधार बारिश के कारण कल्याण, डोंबिवली, ठाणे, मुंबई और नवी मुंबई के कई निर्माण स्थलों पर लगे 16 फीट ऊंचे टीन शेड गिर गए। कुछ स्थानों पर राहगीर घायल हुए, जबकि कई वाहनों को नुकसान पहुंचा।
उनका कहना है कि भारी लोहे के ढांचे और मोटे टीन से बने ये सुरक्षा घेरे सामान्य परिस्थितियों में उपयोगी हैं, लेकिन तेज हवा के दौरान यही लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं।
सरकार से नियम में बदलाव की मांग
बिल्डरों ने राज्य सरकार और संबंधित निर्माण प्राधिकरणों से मांग की है कि 16 फीट ऊंचे टीन शेड की अनिवार्यता समाप्त कर छह से आठ फीट ऊंचा टीन लगाया जाए। इसके ऊपर हरे रंग की मजबूत जाली लगाने की अनुमति दी जाए, जिससे सुरक्षा भी बनी रहे और तेज हवा में बड़े हादसों का खतरा भी कम हो।
उनका कहना है कि इससे निर्माण स्थल भी सुरक्षित रहेगा और आसपास रहने वाले लोगों तथा राहगीरों की जान को भी कम खतरा होगा।
निर्माण अनुमति के लिए जरूरी है वर्तमान नियम
बिल्डरों के अनुसार, निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए उन्हें पहले पूरे भूखंड के चारों ओर 16 फीट ऊंचा टीन और लोहे का ढांचा लगाना पड़ता है। नियम का पालन नहीं करने पर निर्माण अनुमति मिलने में परेशानी आती है। इसलिए मजबूरी में यह व्यवस्था करनी पड़ती है, जबकि खराब मौसम में यही ढांचा जोखिम पैदा कर देता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
निर्माण सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा घेरा जरूरी है, लेकिन उसका डिजाइन स्थानीय मौसम और हवा की गति को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए। अत्यधिक ऊंचे और भारी ढांचे की जगह ऐसे सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए जो लोगों की सुरक्षा के साथ तेज हवा का दबाव भी सहन कर सकें।
क्या सरकार बदलेगी नियम?
फिलहाल सरकार या संबंधित निर्माण प्राधिकरण की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि इस प्रस्ताव पर विचार होता है तो निर्माण सुरक्षा नियमों में बदलाव की संभावना बन सकती है।
तेज बारिश और आंधी के दौरान कई निर्माण स्थलों पर सुरक्षा घेरा गिरने की घटनाओं के बाद निर्माण सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बिल्डरों ने 16 फीट ऊंचे टीन शेड की अनिवार्यता में बदलाव की मांग की है। अब निगाहें राज्य सरकार और निर्माण प्राधिकरणों के फैसले पर टिकी हैं कि सुरक्षा और व्यावहारिक जरूरतों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।
FAQ
प्रश्न: 16 फीट टीन शेड क्यों लगाया जाता है?
उत्तर: निर्माण स्थल से धूल, मलबा और अन्य सामग्री बाहर न फैले तथा राहगीरों की सुरक्षा बनी रहे, इसके लिए।
प्रश्न: बिल्डर क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: 16 फीट की जगह 6 से 8 फीट ऊंचा टीन और उसके ऊपर सुरक्षा जाली लगाने की अनुमति।
प्रश्न: किन इलाकों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं?
उत्तर: कल्याण, डोंबिवली, ठाणे, मुंबई और नवी मुंबई के कई निर्माण स्थलों पर।
प्रश्न: क्या सरकार ने नियम बदल दिया है?
उत्तर: नहीं। फिलहाल केवल मांग की गई है, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।
Official / Relevant Links
- महाराष्ट्र सरकार: https://www.maharashtra.gov.in
- महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (महारेरा): https://maharera.maharashtra.gov.in
- नगर रचना विभाग, महाराष्ट्र: https://udp.maharashtra.gov.in

