Category: Maharashtra

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  • 2000 रुपये का झटपट लोन और लड़की की अश्लील फोटो हो गई वायरल

    2000 रुपये का झटपट लोन और लड़की की अश्लील फोटो हो गई वायरल

    ऑनलाइन मोबाइल एप्लीकेशन से सिर्फ 2000 रुपये का लोन लेना 25 वर्षीय लड़की को महंगा पड़ गया। जबकि पीड़िता के मुताबिक उसने लोन का भुगतान कर दिया था। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    मुंबई: जोगेश्वरी की रहने वाली एक 25 वर्षीय लड़की के साथ बहोत बुरा हुआ है। ऑनलाइन लोन देने वाली कंपनी ने उसके अंतरंग तस्वीरों को उसी की कॉन्टेक्ट लिस्ट हैक कर उसके रिश्तेदारों को फॉरवर्ड कर दिया। गनीमत रही की लड़की ने समझदारी दिखाते हुए अपने पिता को सारी हकीकत बता दी। लड़की ने दावा किया कि उसने लोन के पैसे चुका दिए, हालांकि उसमें देरी हुई। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    पुलिस के अनुसार, पीड़िता जोगेश्वरी की रहने वाली है। उसने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखा जिसमें एक ऐप के बारे में बताया गया था जो तुरंत नकद लोन प्रदान करता है। उसने 20 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे अपने फोन पर ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद उसने छह दिनों के लिए 2000 रुपये लोन के लिए अप्लाई किया। ऐप पर अपना बैंक खाता नंबर सहित व्यक्तिगत जानकारी अपलोड कर दी। साथ ही, आधार कार्ड की एक प्रति भी अपलोड जोड़ दी। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    तस्वीरें वायरल करने की धमकी

    शिकायत के मुताबिक, इसके कुछ देर बाद ही लड़की के बैंक खाते में 1300 रुपये लोन के पैसे जमा हो गए। छह दिन बाद, लड़की को मैसेज मिला, जिसमें लोन चुकाने के लिए कहा गया। उसने जवाब दिया कि उसके पास इस समय पैसे नहीं है। उसे कुछ दिन और चाहिए लेकिन मैसेज भेजने वाले ने उसको तुरंत भुगतान करने को कहा। उसने धमकाते हुए कहा, कि ऐसा नहीं करने पर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दी जाएगी। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    पैसे चुकाने के बाद भी वायरल कर दी तस्वीर

    पीड़िता का दावा है कि वह इस मैसेज को पढ़कर डर गई। उसको 31 जुलाई को एक क्यूआर कोड भेजा गया, जिसमें तुरंत पैसों के भुगतान करने के लिए कहा गया था। पीड़िता ने उसी दिन क्यूआर कोड के माध्यम से 2000 रुपये चुका दिए। लेकिन उसी दिन शाम करीब 7 बजे पीड़िता की चाची को एक अज्ञात नंबर से उसकी मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें मिलीं। इसके बाद, उसके एक पुरुष मित्र को भी इसी तरह की तस्वीरें मिली। इससे लड़की डर गई और उसने अपने पिता को इस बारे में बताया, जिसके बाद दोनों ओशिवारा पुलिस का रुख किया। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    लोन एप की ठगी से कैसे बचें?

    • लोन लेने से पहले सभी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
    • ब्याज दर, पेमेंट साइकल और पेनाल्टी आदि की जानकारी ले लें।
    • लोन ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल ऐप प्लेस्टोर से ही डाउनलोड करें।
    • अनजान लिंक या वाट्सएप से आए डॉट एपीके फाइल्स से बचें।
    • ऐप्स को अनावश्यक अनुमतियां जैसे कॉन्टैक्ट्स, गैलरी या कैमरा) नहीं दें।
    • ठगी का शिकार बनने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
    • लोन से संबंधित कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और स्क्रीनशॉट्स को सेव करके रखें।

    मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज साइबर अपराध जनवरी 2024 से मार्च 2025

    सालदर्ज केसहल केस धोखाधड़ी राशिजब्त राशि
    202450871253846.71 करोड़ रु82.49 करोड़ रु
    20251106188 279.83 करोड़ रु40.29 करोड़ रु

    झटपट लोन देने वाले ऐप्लिकेशन संचालक करते क्या है?

    लोन ऐप्स के जरिए पैसे देने वाली कंपनियां अक्सर अर्जदार की गोपनीय जानकारियां चुरा लेती है और उन्हीं के कॉन्टेक्ट डिटेल्स की मदद से धमकाया और परेशान किया जाता है। यहां तक की उनके रिश्तेदारों और परिवार वालों को लगातार कॉल कर परेशान किया जाता है। ऐसे में कर्जदारों के कॉन्टैक्ट्स नंबरों पर धमकी भरे मैसेज भेजने से सामाजिक अपमान का डर बढ़ जाता है। ब्लैकमेलिंग कर लोगों को इतना परेशान किया जाता है कि लोग आत्महत्या को ही अंतिम रास्ता मान लेते हैं।

    सरकार को ध्यान देने की जरुरत

    लोन ऐप्स की ब्लैकमेलिंग और उच्च ब्याज दरों के कारण कई लोग मानसिक रोगी बन जाते हैं। कुछ लोग तनाव में आत्महत्या तक कर लेते हैं। वहीं, मुंबई पुलिस के अनुसार, साइबर जागरूकता की कमी के कारण लोग अपनी समस्याएं खुलकर साझा नहीं करते, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग भी कम होने के कारण केस सामने आ नहीं पाता है। साइबर दक्ष में पुलिसकर्मियों की कमी भी है, जो साइबर अपराध को बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए, साइबर डिटेक्टशन रेट दो से तीन फीसदी रही है, जबकि साइबर केस बढ़कर 243 फीसदी तक मुंबई जैसे शहर में पहुंच चुकी है। इस ओर सरकार और प्रशासन को ध्यान देने की जरुरत है।

  • धुलिया में स्कूल निर्माण के नाम पर मुंबई में पैसों की ठगी

    धुलिया में स्कूल निर्माण के नाम पर मुंबई में पैसों की ठगी

    महाराष्ट्र के धुलिया में स्कूल निर्माण के नाम पर ठगी के आरोप में बोरीवली के रहनेवाले एक बिल्डर और उसकी पत्नी के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज कर पूछताछ कर रही है। पीड़ित कांदीवली पश्चिम के चारकोप के रहने वाले एक टीचर है। जिनके साथ कथित 42 लाख की ठगी हुई है।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम के चारकोप इलाके में एक टीचर के साथ 42 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि यह पैसे स्कूल की नई इमारत निर्माण के लिए दी गई थी, लेकिन आरोपी बिल्डर और उसकी पत्नी ने रकम हड़प ली। इस मामले में बोरीवली पुलिस ने बिल्डर और उसकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। हालांकि, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya

    5 करोड़ रुपये का खर्च

    पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ईश्वर खैरनार चारकोप स्थित प्रियदर्शनी विद्यालय में सहायक शिक्षक हैं। वह मूल रूप से धुलिया जिले के निवासी हैं। नासिका जिले के करीब वह अपने मूल गांव धुलिया में स्कूल बनवाना चाहते थे। इस संबंध में उनकी मुलाकात बोरिवली के रहने वाले एक बिल्डर से हुई। बिल्डर ने टीचर के प्रोजेक्ट में अपना इंट्रेस्ट दिखाया, जिसके बाद उसने साइट का विजिट किया और करीब 5 करोड़ रुपये का खर्च बताया। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya

    ट्रस्टियों में भी ले ली जगह

    शिकायत के मुताबिक, बिल्डर ने प्रस्ताव दिया कि इमारत को पूरा करने के लिए वह अपने पहचान वालों से उन्हें आर्थिक मदद करवा देगा। लेकिन, इसके बदले में उसे और उसके पहचान वालों को स्कूल ट्रस्ट की नई कमिटी में जगह देनी होगी। एफआईआर के अनुसार, इस शर्त पर सहमति बनने के बाद खैरनार ने बिल्डर को अध्यक्ष और उसकी पत्नी को सेक्रेटरी बना दिया। इसके साथ ही बिल्डर के पहचान वाले 2 लोगों को सदस्य बनाकर सभी कागजात चैरिटी कमिशन कार्यालय में जमा करवा दिया। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya

    न प्रोजेक्ट शुरू किया और न दिया पैसे

    आरोप है कि इमारत के निर्माण कार्य शुरू करने के नाम पर बिल्डर ने खैरनार से 50 लाख रुपये मांगे। खैरनार और उनकी बेटी करिश्मा ने बिल्डर को 42 लाख रुपये दिए। लेकिन, पैसा मिलने के बाद बिल्डर ने न तो इमारत का निर्माण कार्य शुरू किया और न ही खैरनार को उसके पैसे वापस किए। इसके बाद खैरनार ने बोरीवली पुलिस का रुख किया, जहां केस दर्ज कर पुलिस आरोपियों से पूछताछ करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya

  • मुंबई में अब WhatsApp के जरिए होगा ट्रेन की बुकिंग

    मुंबई में अब WhatsApp के जरिए होगा ट्रेन की बुकिंग

    ट्रेन में टिकट के लिए अब आपको लाईन में खड़े रहने की जरुरत नही होगी। अब आप अपने मोबाइल फोन पर WhatsApp एप्लीकेशन के भीतर ही एक क्लिक से ट्रेन की टिकट बुकिंग कर सकेंगे। रेलवे स्थानीय टिकट प्रणाली में सुधार लाने के प्रयास कर रहा है। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    अब आम लोगों की सुविधा के लिए रेलवे बोर्ड नई टिकट बुकिंग प्रणाली लाने की तैयारी कर रहा है। मेट्रो में ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली को मिल रहे लोकप्रियता को देखते हुए रेल प्रशासन ने फैसला किया है। इसके लिए निविदाएं मांगी गई है। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    रेलवे ने क्या कहा?

    रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, रेलवे स्थानीय टिकट प्रणाली की सुविधा में सुधार लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है और व्हाट्सएप जैसे चैट-आधारित ऐप के माध्यम से टिकट प्रणाली शुरू करने की संभावना तलाश रहा है। हाल ही में, इस मामले में रुचि रखने वाले संगठनों के साथ एक बैठक हुई। अधिकारियों ने बताया कि सभी विवरण तय होने के बाद निविदा प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    डिजिटल इंडिया की पहल

    डिजिटल इंडिया पहल के तहत, भारतीय रेलवे डिजिटल माध्यमों से टिकट प्रणाली में बदलाव लाने पर ज़ोर दे रहा है। इसके परिणामस्वरूप, यात्रियों को कैशलेस तेज़ टिकट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। देखा गया कि डिजिटल की ओर बदलाव होता जा रहा है। वर्तमान में, 25 प्रतिशत यात्री डिजिटल माध्यमों से टिकट बुक कर रहे हैं, और इसे अपनाने की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    WhatsApp का इस्तेमाल

    मौजूदा डिजिटल टिकटिंग सिस्टम के अलावा, रेलवे टिकट बुकिंग की सुविधा बढ़ाने के लिए चैट-आधारित टिकटिंग समाधान पर भी काम कर रहा है। मेट्रो में टिकट बुकिंग के लिए यात्री WhatsApp का इस्तेमाल ज़्यादा पसंद करते हैं। टिकट खिड़की पर क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक चैट इंटरफ़ेस दिखाई देता है। “हाय” मैसेज भेजने पर आपको टिकट बुकिंग के विकल्प दिखाई देंगे और फिर भुगतान करके डिजिटल टिकट प्राप्त किए जा सकेंगे। 67 प्रतिशत मेट्रो किराया इसी तरह बुक किया जा रहा है।

    क्या हैं मुश्किलें?

    रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक कहा गया, कि व्हाट्सएप टिकटिंग सिस्टम के निर्माण के दौरान कई कारकों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यूटीएस के माध्यम से क्यूआर-आधारित टिकटिंग प्रणाली के वर्तमान दुरुपयोग को देखते हुए, इसी तरह की कमज़ोरियों से बचने के लिए नई प्रणाली विकसित करते समय सावधानी बरतनी होगी। हमारा लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली बनाना है जो यात्रियों के लिए आसान हो। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

  • मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितम्बर 2008 को हुए बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार 7 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इसमें जांच एजंसियों की चूक प्रकाश में आते ही हाईकोर्ट के वकील नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है। अदालत ने यह भी कहा, “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।”

    मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।

    अगर हेमंत करकरे होते तो, ..

    शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।”

    आरोपी बन गई सांसद

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    उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”

    क्या था मालेगांव बम धमाके का मामला?

    29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

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    मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।

    इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    सबूत ही नहीं मिला

    अदालत ने कहा, कि आरोप लगाया गया था, कि विस्फोट पुरोहित ने कश्मीर से हासिल किया था। लेकिन इसका कोई सबूत नही दिया और यह भी प्रमाणित नहीं किया कि किसी भी अभियुक्त के घर बम तैयार किया गया था। जिस मोटरसाइकिल पर विस्फोट रखा गया था, उसका साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से ठोस सबूतों के साथ संबंध सिद्ध नहीं हो सका। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    कहां हुई थी साज़िश?

    जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ।

    सबूतों के साथ छेड़छाड़

    अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।

    जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद

    उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

  • 12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

    बेसिक से एडवांस

    इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें।

    किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?

    फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए।

    कोर्स में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

    इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?

    इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।

    योजना के प्रमुख लाभ

    योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें।

    किन राज्यों में शुरू हुई यह योजना?

    यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।

    युवाओं को रोजगार में लाभ

    इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास

    कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है।

  • 17 हजार करोड़ की हेराफेरी, ED ने जारी किया अनिल अंबानी के खिलाफ समन

    17 हजार करोड़ की हेराफेरी, ED ने जारी किया अनिल अंबानी के खिलाफ समन

    रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 17 हजार करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने समन जारी कर दिया है। अंबानी को सुनवाई के लिए 5 अगस्त नई दिल्ली ईडी मुख्यालय मे हाज़िर होना होगा।

    न्यूज़ डेस्क
    नई दिल्ली:
    रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में समन जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में ईडी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani

    35 ठिकानों पर छापेमारी

    दरअसल, पिछले हफ्ते, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे। यह छापेमारी 24 जुलाई को कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस के अलावा कुछ कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के कई अन्य आरोपों के तहत की गई थी।

    10 हजार करोड़ का अनडिस्क्लोज्ड

    इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ईडी और दो अन्य एजेंसियों को एक रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10 हजार करोड़ के कथित डायवर्जन की जांच से जुड़ी है। सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने इंटरकॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) के रूप में एक बड़ी रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को भेजी। यह रकम CLE Pvt Ltd के जरिए भेजी गई जो एक अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी कंपनी है।

    मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी

    जांच के दौरान CLE कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी के बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही थीं। यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। इसका ऑफिस नेहरू रोड, वाकोला, सांताक्रूज (पूर्व), मुंबई में है। रिलायंस ग्रुप के एक करीबी व्यक्ति ने सेबी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।

    उन्होंने कहा कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मामले को 9 फरवरी को सार्वजनिक किया था। सेबी ने कोई नई खोज नहीं की है। रिलायंस इन्फ्रा का एक्सपोजर 6,500 करोड़ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार करोड़ डाइवर्ट किए गए। यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि जब एक्सपोजर 6,500 करोड़ था, तो डायवर्जन 10,000 करोड़ कैसे हो सकता है? रिलायंस इन्फ्रा ने इस मामले में अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूरी कोशिश की। रिलायंस इन्फ्रा के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कंपनी ने 6,500 करोड़ की पूरी राशि वसूलने के लिए समझौता किया है। यह समझौता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा कराई गई मध्यस्थता के जरिए हुआ। इस समझौते को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश किया गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani

  • Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी भरे ई- मेल भेजकर फिरौती मांगने वाले मुख्य आरोपी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई इंटरपोल की मदद से सफल हो पाई है। आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार किया गया है।

    Mumbai: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जीशान सिद्दीकी को धमकी देने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुंबई पुलिस और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है।

    कहां है त्रिनिदाद और टोबैगो ?

    पूरे वेस्टइंडीज में त्रिनिदाद छठे स्थान का सबसे बड़ा आईलैंड है। त्रिनिदाद और टोबैगो जो कैरिबियन सागर में स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्व में वेनेजुएला के तट के पास है। यहीं से मुंबई पुलिस ने इंटरपोल की मदद से बिहार के दरभंगा का रहने वाला आरोपी को डिटेंड कर गिरफ्तार किया है।

    ईमेल से मिली थी धमकी

    पुलिस के अनुसार, धमकी देने वाला बिहार के दरभंगा का रहने वाले आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद नावेद खुद को डी-कंपनी का सदस्य बताते हुए अप्रैल में जीशान को जान से मारने की धमकी दी थी और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी भरे ईमेल 19, 20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे।

    बांद्रा पुलिस का एक्शन

    इस मामले में जीशान सिद्दीकी ने बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया, कि आरोपी ने कई ईमेल भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी, जैसा कि उनके पिता बाबा सिद्दीकी के साथ करने की बात कही गई थी।

    भारत के बाहर से मिली थी धमकी

    पुलिस ने शिकायत के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी थी और अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 23 अप्रैल को यह केस मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी भारत से बाहर है, जिसके बाद 28 अप्रैल को उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और फिर इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।

    फिरौती का था मामला

    इंटरपोल की मदद से आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो में गिरफ्तार किया गया और फिर बुधवार को भारत डिपोर्ट कर मुंबई लाया गया है। अब आरोपी से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने धमकी देकर फिरौती वसूलने की मंशा से यह साजिश रची थी।

    हो सकते हैं कई खुलासे

    क्राइम ब्रांच का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद देश में दहशत का माहौल बन गया था। उसी वक्त उनके बेटे को मिली धमकी में उनके पिता की हत्या का जिक्र किया गया था। फिलहाल, जांच जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पीछे कोई और गिरोह या नेटवर्क तो नहीं है।

  • मुंबई स्वर्णकार संघ ने किया सीपीआरओ का अपमान

    मुंबई स्वर्णकार संघ ने किया सीपीआरओ का अपमान

    स्वर्णकारो की सबसे पुरानी संस्था अपने संस्थापक के विचारों को पीछे छोड़ कर जाने कौन से आदर्शों का पालन कर रही है। गुरूवार को हुए एक कार्यक्रम में खुद बुलाकर मुख्य अतिथि को ही अपमानित कर दिया। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO

    वी बी माणिक
    मुंबई:
    आज गुरुवार 31 जुलाई 2025 स्वर्गीय नाना शंकर शेठ के 160वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मध्यरेल मुख्यालय में नाना शंकर शेठ के चित्र पर माल्यार्पण कर उनकों श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम के अवसर पर मुंबई स्वर्णकार संघ के पदाधिकारी एवं उनके सदस्य उपस्थित थे। जिसमें मुख्य अथिति के स्थान पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला का इन स्वर्णकारों ने स्वागत ही नही किया। एक तरिके से मुख्य अतिथि को कार्यक्रम का न्योता देकर मौके पर उन्हें अपमानित किया गया। मौके पर कुछ लोगों ने बोला, कि ये लोग कौन से अहम में थे? इसका पता नही। लेकिन ऐसा नही करना चाहिए था।

    मुंबई स्वर्णकार संघ क्या काम करता है?

    आप को बता दें कि “मुंबई स्वर्णकार संघ” मुंबई शहर में सोने के दागीने बनाने वाले कारीगरों की एक पुरानी संस्था है। ये संस्था केवल उन स्वजातीय कारीगरों की है जो जाति से सोनार है। स्वर्गीय नाना ने कारीगरों के ऊपर होने वाले उत्पीड़न और उनके सुरक्षा संरक्षण हेतु इस संस्था की नीव रखी थी। लेकिन उनके स्वर्गवास हो जाने के बाद से अब उसका उल्टा हो रहा है। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO

    ट्रस्टियों की मनमानी

    सूत्रों के अनुसार अब मुस्लिमो और बंगालियों के अलावा न जाने किन-किन लोगों को सदस्य बनाकर आईडी दिया जाने लगा है। पहले केवल मराठी, राजस्थानी, गुजराती और उत्तर भारतीय काफ़िगरो के उत्थान हेतु कार्य किया जाता था। अब ये सब बंद होता दिखाई पड़ रहा है। इसके ट्रस्टियों में ज्ञान का अभाव है संस्था के नियम का पालन क्या होता है? इनको मालूम ही नही है। पर अब ऐसा प्रतीत होने लगा है कि वर्तमान में यहां के ट्रस्टी गण दिन पर दिन स्वर्गीय नाना के नाम को भी ये डूबाने पर उतारू है।

    ज़वेरी बाजार के स्वर्णकार कारीगर इनसे विमुख होते जा रहे है। नाना के छठवीं पीढ़ी के वंशज श्रीरंग शेठ ने माल्यार्पण कर उनको श्रधंजलि अर्पित किया। इनके साथ ज़वेरी बाजार के अन्य कारीगर एवं ट्रस्टी शामिल थे। लेकिन उनके विचारों को पीछे छोड़ दिया जा रहा है। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO

  • Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    महाराष्ट्र की सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त कानून पास कर दिया है। इसके तहत नियम का पालन नही किए जाने पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों के तहत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने महाराष्ट्र के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम तय किए हैं। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    सोशल मीडिया पोस्ट पर लगी रोक

    महाराष्ट्र की महायुति सरकार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के जानकारी दायक सोशल मीडिया पोस्ट कभी कभार लोगों में भ्रम या गलत संदेश भी फैला सकता है। इसकी जिम्मेदारी को लेकर सरकार अब सख्त हो गई है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक नही लगाया गया है। सिर्फ पोस्ट करते समय ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    क्या करें क्या ना करें ?

    सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार को एक सरकारी आदेश जारी कर यह नियम सार्वजनिक रुप से प्रसारित कर दिया है। इसमें बताया गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट कर सकते हैं? और क्या नहीं? आदेश में यह भी कहा गया है कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1979 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    सोशल मीडिया से होगी समस्या

    आदेश में जानकारी देते हुए, कहा गया है, कि “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आसान उपयोग से पलक झपकते ही दुनिया के किसी भी कोने में जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इसकी अदभुत क्षमता और एक क्लिक में कई लोगों तक बात पहुंचा देने की सुविधा के साथ कुछ खतरे भी सामने आए हैं—जैसे गोपनीय जानकारी का लीक होना, झूठी या भ्रामक जानकारी फैलना और इसके साथ ही बड़ी दिक्कत वाली बात यह है कि एक बार पोस्ट की गई जानकारी को हटाने के लिए कई नियमों का पालन करना पडता है इसकी सीमाएं तय की गई है। सरकारी विभाग के लिए दिक्कत हो सकती है।”

    आदेश में आगे कहा गया, कि “यह भी देखा गया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकार की नीतियों, राजनीतिक घटनाओं या कुछ व्यक्तियों की आलोचना के लिए किया जा रहा है, जो सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।” Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    नए नियमों की जानकारी

    सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वे राज्य सरकार या देश से जुड़ी किसी भी नीति की आलोचना करने से बचें और सोशल मीडिया का उपयोग “सावधानी और जिम्मेदारी” के साथ करें। उन्हें कोई आपत्तिजनक या मानहानि करने वाली सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा गया है।

    खुद का प्रचार

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी यह ज़रूर बता सकते हैं, कि किसी योजना या प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने या उनके विभाग ने क्या प्रयास किए हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि वे खुद का प्रचार न करें। सरकार की किसी योजना या प्रोजेक्ट से जुड़ी पहले से स्वीकृत जानकारी केवल वही व्यक्ति साझा कर सकता है जिसे इसके लिए अधिकृत किया गया है। इसका मकसद आम जनता की भागीदारी को बढ़ाना है।

    सरकारी महकमों का इस्तेमाल

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारी अपने निजी और आधिकारिक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट बना सकते हैं। इसके अलावा, जब किसी अधिकारी का ट्रांसफर हो जाए, तो उन्हें अपने आधिकारिक अकाउंट को तुरंत संबंधित विभाग के प्रभारी को सौंप देना होगा। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है, कि अधिकारी और कर्मचारी अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी आधिकारिक पदनाम, सरकारी प्रतीक (लोगो), यूनिफॉर्म, सरकारी गाड़ी या निवास जैसी संपत्तियों से जुड़ी फोटो, वीडियो या रील न डालें।

    अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय समन्वय के लिए व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे सोशल मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें बिना अनुमति के कोई भी गोपनीय दस्तावेज़, चाहे वह पूरा हो या आंशिक, अपलोड, फॉरवर्ड या साझा करने से बचने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन ऐप्स या प्लेटफॉर्म्स को सरकार ने बैन किया है, उनका उपयोग बिल्कुल न किया जाए।

    यह आदेश सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा — चाहे वे स्थायी हों, अनुबंध पर हों या सरकार के बाहर से नियुक्त किए गए हों। यह नियम उन सभी कर्मचारियों पर भी लागू होंगे जो सरकारी कंपनियों, उपक्रमों, अतिथि सेवाओं या स्थानीय निकायों में काम कर रहे हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

  • Mumbai: गूगल मैप के चक्कर में ऑडी कार चला रही महिला खाड़ी में गिरी सुरक्षा कर्मियों ने बचाया

    Mumbai: गूगल मैप के चक्कर में ऑडी कार चला रही महिला खाड़ी में गिरी सुरक्षा कर्मियों ने बचाया

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    बेलापुर में गूगल मैप के चलते गलत रास्ते पर ऑडी कार चला रही महिला खाड़ी में गिर गई। घटना शुक्रवार और शनिवार रात करीब 1 बजे की है। सुरक्षाकर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद महिला को बचाया।

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई:
    नवी मुंबई के बेलापुर में गूगल मैप ने महिला को पुल के नीचे का रास्ता बता दिया। महिला ने मैप देखते हुए पुल के ऊपर जाने की बजाय नीचे का रास्ता पकड़ लिया। नतीजतन, उसकी कार सीधे ध्रुवतारा जेट्टी से खाड़ी में गिर गई। गनीमत रही, कि समुद्री सुरक्षा बल के पुलिस कर्मियों ने कार को खाड़ी में गिरते हुए देख लिया। वे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि महिला पानी में बह रही थी। इसके बाद रेस्क्यू बोट और गश्ती टीम की मदद से महिला को बचाया गया। Mumbai: A woman driving an Audi car while using Google Maps fell into the bay and was rescued by security

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    गूगल मैप के कारण पहले भी कई हादसे हुए-

    इसे भी पढ़ें :- ‘चौकीदार चोर है’ राहुल गांधी ने खेद जताया

    9 जून, 2025: यूपी के महाराजगंज में फ्लाईओवर से लटक गई कार
    उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में गूगल मैप के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने के कारण एक कार अधूरे फ्लाईओवर से नीचे लटक गई थी। इस हादसे में कार में सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए। हादसा महाराजगंज जिले के गोरखपुर-सोनौली नेशनल हाईवे स्थित भैया फरेंदा में निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर हुआ। फ्लाईओवर का काम अधूरा था, लेकिन गूगल मैप में पूरा रास्ता दिख रहा था।

    Google maps accident

    4 मार्च, 2025: ग्रेटर नोएडा में 30 फीट गहरे नाले​​​​ में कार गिरी, स्टेशन मास्टर की मौत
    उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में गूगल मैप के गलत नेविगेशन डायरेक्शन के कारण एक 31 साल के स्टेशन मास्टर भरत सिंह कार सहित 30 फीट गहरे नाले में गिर गए थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। अधिकारियों को नाले से कार को बासर निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल करना पड़ा था। घटना के वक्त एक डिलीवरी बॉय घटनास्थल पर मौजूद था, जिसने पुलिस को जानकारी दी थी।

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    25 नवंबर 2024: गूगल मैप अधूरे पुल पर ले गया, कार नीचे गिरने से 3 की मौत
    यूपी के बरेली में गूगल मैप की वजह से एक कार आधे-अधूरे पुल से नीचे गिर गई थी। हादसे में कार में सवार 2 भाइयों समेत 3 युवकों की मौत हो गई थी। तीनों गूगल मैप के सहारे कार से बरेली आ रहे थे। लोकेशन के हिसाब से चल रहे युवक पुल पर पहुंच गए। कोहरे के कारण आगे दिखाई नहीं दिया और कार रामगंगा नदी में गिर गई।