महाराष्ट्र के धुलिया में स्कूल निर्माण के नाम पर ठगी के आरोप में बोरीवली के रहनेवाले एक बिल्डर और उसकी पत्नी के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज कर पूछताछ कर रही है। पीड़ित कांदीवली पश्चिम के चारकोप के रहने वाले एक टीचर है। जिनके साथ कथित 42 लाख की ठगी हुई है। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya
मुंबई: कांदिवली पश्चिम के चारकोप इलाके में एक टीचर के साथ 42 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि यह पैसे स्कूल की नई इमारत निर्माण के लिए दी गई थी, लेकिन आरोपी बिल्डर और उसकी पत्नी ने रकम हड़प ली। इस मामले में बोरीवली पुलिस ने बिल्डर और उसकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। हालांकि, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya
5 करोड़ रुपये का खर्च
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ईश्वर खैरनार चारकोप स्थित प्रियदर्शनी विद्यालय में सहायक शिक्षक हैं। वह मूल रूप से धुलिया जिले के निवासी हैं। नासिका जिले के करीब वह अपने मूल गांव धुलिया में स्कूल बनवाना चाहते थे। इस संबंध में उनकी मुलाकात बोरिवली के रहने वाले एक बिल्डर से हुई। बिल्डर ने टीचर के प्रोजेक्ट में अपना इंट्रेस्ट दिखाया, जिसके बाद उसने साइट का विजिट किया और करीब 5 करोड़ रुपये का खर्च बताया। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya
ट्रस्टियों में भी ले ली जगह
शिकायत के मुताबिक, बिल्डर ने प्रस्ताव दिया कि इमारत को पूरा करने के लिए वह अपने पहचान वालों से उन्हें आर्थिक मदद करवा देगा। लेकिन, इसके बदले में उसे और उसके पहचान वालों को स्कूल ट्रस्ट की नई कमिटी में जगह देनी होगी। एफआईआर के अनुसार, इस शर्त पर सहमति बनने के बाद खैरनार ने बिल्डर को अध्यक्ष और उसकी पत्नी को सेक्रेटरी बना दिया। इसके साथ ही बिल्डर के पहचान वाले 2 लोगों को सदस्य बनाकर सभी कागजात चैरिटी कमिशन कार्यालय में जमा करवा दिया। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya
आरोप है कि इमारत के निर्माण कार्य शुरू करने के नाम पर बिल्डर ने खैरनार से 50 लाख रुपये मांगे। खैरनार और उनकी बेटी करिश्मा ने बिल्डर को 42 लाख रुपये दिए। लेकिन, पैसा मिलने के बाद बिल्डर ने न तो इमारत का निर्माण कार्य शुरू किया और न ही खैरनार को उसके पैसे वापस किए। इसके बाद खैरनार ने बोरीवली पुलिस का रुख किया, जहां केस दर्ज कर पुलिस आरोपियों से पूछताछ करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। Money fraud in Mumbai in the name of school construction in Dhuliya
मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।
अगर हेमंत करकरे होते तो, ..
शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।” How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
आरोपी बन गई सांसद
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”
29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।
मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।
इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
सबूतों के साथ छेड़छाड़
अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद
उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 17 हजार करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने समन जारी कर दिया है। अंबानी को सुनवाई के लिए 5 अगस्त नई दिल्ली ईडी मुख्यालय मे हाज़िर होना होगा। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में समन जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में ईडी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
35 ठिकानों पर छापेमारी
दरअसल, पिछले हफ्ते, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे। यह छापेमारी 24 जुलाई को कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस के अलावा कुछ कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के कई अन्य आरोपों के तहत की गई थी।
10 हजार करोड़ का अनडिस्क्लोज्ड
इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ईडी और दो अन्य एजेंसियों को एक रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10 हजार करोड़ के कथित डायवर्जन की जांच से जुड़ी है। सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने इंटरकॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) के रूप में एक बड़ी रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को भेजी। यह रकम CLE Pvt Ltd के जरिए भेजी गई जो एक अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी कंपनी है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
जांच के दौरान CLE कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी के बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही थीं। यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। इसका ऑफिस नेहरू रोड, वाकोला, सांताक्रूज (पूर्व), मुंबई में है। रिलायंस ग्रुप के एक करीबी व्यक्ति ने सेबी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
उन्होंने कहा कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मामले को 9 फरवरी को सार्वजनिक किया था। सेबी ने कोई नई खोज नहीं की है। रिलायंस इन्फ्रा का एक्सपोजर 6,500 करोड़ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार करोड़ डाइवर्ट किए गए। यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
उन्होंने कहा कि जब एक्सपोजर 6,500 करोड़ था, तो डायवर्जन 10,000 करोड़ कैसे हो सकता है? रिलायंस इन्फ्रा ने इस मामले में अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूरी कोशिश की। रिलायंस इन्फ्रा के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कंपनी ने 6,500 करोड़ की पूरी राशि वसूलने के लिए समझौता किया है। यह समझौता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा कराई गई मध्यस्थता के जरिए हुआ। इस समझौते को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश किया गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
Mumbai: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जीशान सिद्दीकी को धमकी देने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुंबई पुलिस और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है।
कहां है त्रिनिदाद और टोबैगो ?
पूरे वेस्टइंडीज में त्रिनिदाद छठे स्थान का सबसे बड़ा आईलैंड है। त्रिनिदाद और टोबैगो जो कैरिबियन सागर में स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्व में वेनेजुएला के तट के पास है। यहीं से मुंबई पुलिस ने इंटरपोल की मदद से बिहार के दरभंगा का रहने वाला आरोपी को डिटेंड कर गिरफ्तार किया है।
ईमेल से मिली थी धमकी
पुलिस के अनुसार, धमकी देने वाला बिहार के दरभंगा का रहने वाले आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद नावेद खुद को डी-कंपनी का सदस्य बताते हुए अप्रैल में जीशान को जान से मारने की धमकी दी थी और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी भरे ईमेल 19, 20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे।
बांद्रा पुलिस का एक्शन
इस मामले में जीशान सिद्दीकी ने बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया, कि आरोपी ने कई ईमेल भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी, जैसा कि उनके पिता बाबा सिद्दीकी के साथ करने की बात कही गई थी।
इंटरपोल की मदद से आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो में गिरफ्तार किया गया और फिर बुधवार को भारत डिपोर्ट कर मुंबई लाया गया है। अब आरोपी से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने धमकी देकर फिरौती वसूलने की मंशा से यह साजिश रची थी।
स्वर्णकारो की सबसे पुरानी संस्था अपने संस्थापक के विचारों को पीछे छोड़ कर जाने कौन से आदर्शों का पालन कर रही है। गुरूवार को हुए एक कार्यक्रम में खुद बुलाकर मुख्य अतिथि को ही अपमानित कर दिया।Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO
वी बी माणिक मुंबई: आज गुरुवार 31 जुलाई 2025 स्वर्गीय नाना शंकर शेठ के 160वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मध्यरेल मुख्यालय में नाना शंकर शेठ के चित्र पर माल्यार्पण कर उनकों श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम के अवसर पर मुंबई स्वर्णकार संघ के पदाधिकारी एवं उनके सदस्य उपस्थित थे। जिसमें मुख्य अथिति के स्थान पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला का इन स्वर्णकारों ने स्वागत ही नही किया। एक तरिके से मुख्य अतिथि को कार्यक्रम का न्योता देकर मौके पर उन्हें अपमानित किया गया। मौके पर कुछ लोगों ने बोला, कि ये लोग कौन से अहम में थे? इसका पता नही। लेकिन ऐसा नही करना चाहिए था।
मुंबई स्वर्णकार संघ क्या काम करता है?
आप को बता दें कि “मुंबई स्वर्णकार संघ” मुंबई शहर में सोने के दागीने बनाने वाले कारीगरों की एक पुरानी संस्था है। ये संस्था केवल उन स्वजातीय कारीगरों की है जो जाति से सोनार है। स्वर्गीय नाना ने कारीगरों के ऊपर होने वाले उत्पीड़न और उनके सुरक्षा संरक्षण हेतु इस संस्था की नीव रखी थी। लेकिन उनके स्वर्गवास हो जाने के बाद से अब उसका उल्टा हो रहा है। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO
ट्रस्टियों की मनमानी
सूत्रों के अनुसार अब मुस्लिमो और बंगालियों के अलावा न जाने किन-किन लोगों को सदस्य बनाकर आईडी दिया जाने लगा है। पहले केवल मराठी, राजस्थानी, गुजराती और उत्तर भारतीय काफ़िगरो के उत्थान हेतु कार्य किया जाता था। अब ये सब बंद होता दिखाई पड़ रहा है। इसके ट्रस्टियों में ज्ञान का अभाव है संस्था के नियम का पालन क्या होता है? इनको मालूम ही नही है। पर अब ऐसा प्रतीत होने लगा है कि वर्तमान में यहां के ट्रस्टी गण दिन पर दिन स्वर्गीय नाना के नाम को भी ये डूबाने पर उतारू है।
ज़वेरी बाजार के स्वर्णकार कारीगर इनसे विमुख होते जा रहे है। नाना के छठवीं पीढ़ी के वंशज श्रीरंग शेठ ने माल्यार्पण कर उनको श्रधंजलि अर्पित किया। इनके साथ ज़वेरी बाजार के अन्य कारीगर एवं ट्रस्टी शामिल थे। लेकिन उनके विचारों को पीछे छोड़ दिया जा रहा है। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO
मुंबई:2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इन धमाकों में 187 लोगों की जान गई, 800 से ज़्यादा घायल हुए। इस भयानक घटना के 19 साल बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 लोगों को बरी कर दिया, जिन्हें इन धमाकों का दोषी ठहराया गया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि बरी किए गए लोगों को वापस जेल नहीं भेजा जाएगा। अब सवाल है, कि इन 12 मुसलमानों को फंसाने का काम किसने किया था। जिसकी वजह से एक विशेष समुदाय को टार्गेट किया गया। ये सवाल हैं उन 12 लोगों में से एक मोहम्मद अली का, जिन्हें इसी मामले में बरी कर दिया गया है।
गिरफ्तार 12 लोगों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी बेगुनाही की अपील की थी। हाईकोर्ट में 10 साल केस चला फिर फैसला आया कि ये सब बेकसूर हैं। इस पूरे मामले में एक ऐसा शख्स भी था जिसने अपनी बेगुनाही की खबर सुनने से पहले ही दुनिया छोड़ दिया। बिहार के मधुबनी जिले के बसोपट्टी के रहने वाले कमाल अहमद मोहम्मद वकील अंसारी की 2021 में कोविड के दौरान जेल में ही मौत हो गई थी। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?
मजदूर को किया था गिरफ्तार
जब कमाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया तब उनके बेटे अब्दुल्ला अंसारी सिर्फ छह साल के थे। अब्दुल्ला कहा, ATS ने कमाल अंसारी पर पाकिस्तान में हथियारों का ट्रेनिंग लेने, भारत-नेपाल बॉर्डर के रास्ते आतंकवादियों को लाने और मुंबई के माटुंगा स्टेशन पर विस्फोटक रखने का इल्जाम लगाया था। लेकिन अब्दुल्ला बताते हैं कि उनके पिता एक मजदूर थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?
क्या अब सरकारें, पुलिस, मीडिया कमाल के परिवार से माफी मांगेगे? उसकी बदनामी के दाग को कौन धोएगा?
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को फंसाने के लिए कई हथकंडे अपनाए, जिनकी पोल RTI ने खोल दी।
गवाह नंबर 74 की झूठी गवाही: अभियोजन पक्ष के गवाह नंबर 74 ने विशेष मकोका अदालत में बताया था कि उसने एहतेशाम सिद्दीकी को चर्चगेट रेलवे स्टेशन पर एक काले बैग के साथ देखा था। इसी गवाही के आधार पर एहतेशाम को बम लगाने वाला बताया गया। लेकिन RTI से मिली जानकारी ने इस गवाह की पोल खोल दी। गवाह ने जिस अस्पताल में किसी से मिलने की बात कही थी, वहां उस नाम का कोई व्यक्ति था ही नहीं और जिस बैंक में मिलने का दावा किया था, वह व्यक्ति भी वहां नहीं था। अदालत ने इस गवाह को पुलिस का ‘स्टॉक गवाह’ करार दिया, यानी एक ऐसा गवाह जिसे पुलिस हर केस में इस्तेमाल करती है। RTI से यह भी सामने आया कि यही गवाह पुलिस के लिए चार और मामलों में भी पेश हुआ था।
पहचान में देरी पर सवाल: पुलिस ने कुछ ऐसे गवाह भी पेश किए जिन्होंने ब्लास्ट के 100 दिनों बाद आरोपियों को पहचानने की बात कही। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि कोई इतने लंबे समय बाद किसी व्यक्ति का चेहरा कैसे याद रख सकता है? यह दर्शाता है कि पुलिस असली गुनहगारों को ढूंढने के बजाय आम लोगों को बलि का बकरा बना रही थी।
स्केच गवाह का अनुपस्थित होना: आरोपी के स्केच बनाने में मदद करने वाले गवाह को ट्रायल के लिए नहीं बुलाया गया और न ही उसे अदालत में आरोपी की पहचान करने के लिए कहा गया। मामले का यह एक सबसे बड़ा लूप-होल था।
कॉपी-पेस्ट के कबूलनामे: पुलिस का केस ज़्यादातर कबूलनामों पर आधारित था, जो पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिए थे। MCOCA की धारा 18 के तहत पुलिस के सामने दिए गए कबूलनामों को कोर्ट में मान्यता देता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन कबूलनामों के आधार पर सजा देने से इंकार कर दिया, क्योंकि कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने यह भी पाया कि कई आरोपियों ने दो अलग-अलग अधिकारियों के सामने जुर्म कबूल किया था, लेकिन दोनों कबूलनामों में घटना का विवरण, यहां तक कि फुल स्टॉप और कॉमा भी हूबहू कॉपी-पेस्ट थे। कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय माना।
2015 में इसी केस में बरी हुएम अब्दुल वाहिद शेख बताते हैं कि उन्होंने “हर दिन 20-25 आरटीआई एप्लीकेशन” दायर किए, जिनमें पुलिस स्टेशनों की लॉगबुक से लेकर अस्पताल के रिकॉर्ड और हर जरूरी जानकारी मांगी गई।
19 सालों बाद सामने आया पीड़ितों का दर्द
मोहम्मद साजिद अंसारी, जो इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से थे, बताते हैं, “मेरा इलेक्ट्रॉनिक्स का बैकग्राउंड था, इसलिए इन लोगों के लिए आसान था कहना कि ये टाइमर बम बनाने के लायक है। इसी वजह से मुझे टारगेट किया गया, इन्होंने रिकवरी के तौर पर मेरे मोबाइल रिपेयरिंग इंस्टीट्यूट के जो सामान थे और जो रिपेयरिंग की इलेक्ट्रॉनिक्स की चीजें थी उसे रिकवरी में दिखाया गया। हालांकि एफएसएल रिपोर्ट के अंदर क्लियर हुआ कि कुछ भी एक्सप्लोसिव मेरे पास नहीं मिला।”
19 सालों तक इन लोगों के परिवार के साथ पुलिस, समाज, मीडिया, सरकारें, अदालत नाइंसाफी करती रहीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि इन 12 लोगों और इनके परिवार के 19 साल के दर्द का जिम्मेदार कौन है? क्या उन लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने इन 12 लोगों को फंसाया था?
न्यूज़ डेस्क पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावाला की एक पहाड़ी कस्बे में 23 वर्षीय एक महिला का कथित तौर पर अपहरण कर उसके साथ चलती कार में बलात्कार की घटना प्रकाश में आ रही है। बलात्कार करने के बाद पीड़ित महिला को सड़क किनारे फेंक दिया गया। रातभर चलती रही इस बलात्कार की घटना में पुलिस ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया, कि घटना शुक्रवार और शनिवार के दरमियानी रात की है। जब महिला अपने घर जाने के लिए सड़क पर चल रही थी।
लोकप्रिय पर्यटक स्थल
मिली जानकारी के मुताबिक, मुंबई से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित लोनावला के मावला इलाके में तुंगरली एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहां एक राह चलती महिला का अपहर कर बलात्कार की घटना से इलाके में घबराहट और सनसनी फैल गई है। पुलिस ने बताया, कि घटना के सिलसिले में तुंगरली के निवासी 35 वर्षीय एक व्यक्ति को पकड़ लिया गया है। महिला की शिकायत के मुताबिक, पीड़ित महिला उसी इलाके में रहती है और शुक्रवार रात को वह अपने घर जा रही थी।
घटना की जानकारी क्या है?
अधिकारी ने बताया, कि एक कार उसके पास रुकी और एक आदमी ने उसे जबरन अंदर खींच लिया। इसके बाद आरोपी उसे एक सुनसान जगह पर ले गया, जहां चलती कार में उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया। उन्होंने बताया कि पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे तुंगरली में विभिन्न स्थानों पर ले जाया गया और बार-बार यौन हमला करने के बाद उसे शनिवार तड़के सड़क किनारे फेंक दिया गया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद महिला ने लोनावाला सिटी पुलिस थाने में जाकर उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एम) (बलात्कार) और 138 (अपहरण) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को पकड़ लिया गया है। 23-year-old woman kidnapped, raped overnight in a moving car and thrown on the road
क्या है हकीकत?
पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया, कि पीड़िता के दावों की पुष्टि की जा रही है। महिला ने शुरू में दावा किया था कि तीन अज्ञात लोगों ने उसे जबरन कार में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया, लेकिन जांच के दौरान पता चला कि कार में केवल एक ही व्यक्ति था। उन्होंने बताया कि जांच से यह भी पता चला है कि आरोपी और महिला एक दूसरे को जानते थे। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने एक बार फिर अवैध निर्माण पर जबरदस्त तोड़क कार्रवाई कर अवैध निर्माणकर्ताओं मे हडकंप मचा दिया है। बोरीवली मनपा आर/मध्य बिल्डिंग एन्ड फैक्ट्री डिपार्टमेंट द्वारा गोराई बीच में बने अवैध होटलों को ध्वस्त कर दिया है। बोरीवली पश्चिम के गोराई बीच के पास सर्वे क्रमांक 41 में बीच रिसॉर्ट नामक 40 कमरों का अवैध निर्माण तैयार किया गया था। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali
छुटभैये नेता हुए गायब
इसकी कार्रवाई में इलाके के छुटभैये नेताओं के हंगामे के बाद अवैध निर्माणकर्ताओं ने कोर्ट का दामन थाम लिया था। लेकिन कोर्ट ने भी उन्हें खदेड़ दिया। जिसके बाद दम खम के साथ बुलडोजर लेकर बीएमसी ने पूरे स्ट्रक्चर को जमीदोंस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से इलाके के अवैध निर्माणकर्ताओं में खलबली मच गई है। इसके साथ ही जो छुटभैया नेताओं का समूह इन अवैध निर्माणों को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा था, नदारद हो गया है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali
शहर में अवैध निर्माणों का खतरा
मनपा नियमों को अनदेखी कर शहर भर में अवैध निर्माण कराना अब आम हो गया है। लोगों को पता नहीं, कि यह अवैध निर्माण सिर्फ सरकारी कर व्यवस्था के साथ ही धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इन्हीं अवैध निर्माणों के निचे दबने से निर्दोष लोगों की मौत हो जाती है। कहीं अवैध निर्माण के ढह जाने पर प्रशासन को कोसा जाता है। सरकारी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही भी होती है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali
लेकिन जब लोगों के नजरों के सामने निर्माण कार्य हो रहा हो, तो रोका नही जाता। ऐसे ही इस अवैध निर्मित “बीच रिसोर्ट” के खिलाफ आरटीआइ कार्यकर्ता चन्द्रकान्त गुप्ता ने शिकायत की थी। लेकिन उसे धमकाया गया। एक्ट्रोशन और जान से मारने की धमकी दी गई। छुटभैये नेताओं का उन अवैध निर्माणकर्ताओं को साथ मिला। सारा खेल पैसों पर चलता रहा। लेकिन मनपा आर/मध्य विभाग ने तोड़क कार्यवाही कर ही दी। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali
BMC ने क्या कहा?
बृहन्मुंबई महानगर पालिका परिमंडल-7 के मनपा उपायुक्त संजय कुर्हाडे ने बताया, कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के सख्त आदेश जारी किए गए है। माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसको लेकर निर्देश दिये हुए हैं। एसआईटी के तहत अवैध निर्माणों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसकी कार्रवाई के पीछे भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए हमें सख्ती बरतनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा, कि अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए एमआरटीपी कानून के तहत पुलिसिया कार्रवाई भी हो सकती है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali
खर्च की वसूली
मनपा आर/मध्य विभाग की सहायक आयुक्त संध्या नांदेड़कर ने बताया, कि तोड़क दस्ते में वार्ड के इमारत कारखाना विभाग से अभियंता शिवराज, अभियंता बाघमारे, दुय्यम अभियंता राजाराम जगताप, कनिष्ठ अभियंता सुरज पावले और बाकी कर्मचारी ने भरपूर तत्परता दिखाई। मौके पर पुलिस बंदोबस्त के साथ बुलडोजर का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस तोड़क कार्रवाई का खर्च अवैध निर्माणकर्ताओं से वसूला जाना अभी बाकी है।जिसे फिलहाल ध्वस्त कर दिया गया है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali
इसके बाद से गोराई गांव के अवैध बंगले, अवैध मकान, अवैध हुक्का पार्लर, अवैध गेस्ट हाउस, रो हाउस काफी सारे बने हुए हैं। इनके खिलाफ भी तोड़क कार्रवाई होने वाली है। इन अवैध निर्माणों के मालिकों मे हडकंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि अपने अवैध निर्माणों को बचाने के लिए छुटभैया नेताओं और माननीय कोर्ट का सहारा लेने के लिए भगदड़ मची हुई है। लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर एसआईटी की टीम काम कर रही है। सदन में मौजूदा विधायकों ने इसको लेकर मुद्दा उठाया था। तब से मनपा आयुक्त भुषण गगरानी ने सभी 26, वार्ड में जांच शुरू कर अवैध निर्माण कार्य को ध्वस्त कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
मुंबई: राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को अपने बातों में फंसा कर उनके कीमती गहने उड़ा ले जाने वाले 50 वर्षीय मनव्वर उर्फ अब्दुल हमीद शेख को आखिरकार अंधेरी पुलिस ने इगतपुरी रेलवे स्टेशन पर नाशिक पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया है। जैसे ही आरोपी को पता चला कि पुलिस उसे ढूंढ रही है वह पश्चिम बंगाल के लिए फरार हो चुका था। खास बात यह रही कि आरोपी अपने पास कोई मोबाइल फोन भी इस्तेमाल नही करता। लेकिन मुंबई पुलिस की तकनीकी टीम एक बार फिर अनसुलझे केस को सुलझाने में कामयाब हो गई।
कैसे बनता था शिकार ?
अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उमेश मचिंदर ने बताया, कि आए दिन राह चलते बुजुर्गों को टार्गेट करते हुए, उन्हें बातों में उलझा कर उनके किमती सामानों को लेकर फरार होने की कई शिकायतें मिल रही थी। आखरी घटना 15 जुलाई 2025 की है। बुजुर्ग महिला की शिकायत के मुताबिक लगभग 11:50 को वह अंधेरी पूर्व के तेली गली क्रॉस रोड़ पर पैदल चल रही थी, कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे बातों में फंसाकर उसके 28 ग्राम वजनी सोने की चैन उसके गले से निकलवा लिया और जांच का बहाना बनाते हुए उसे बातों में उलझा कर वहां से फरार हो गया। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो वह व्यक्ति बरसात की छतरी लिए हुए था। जिसके कारण उसका चेहरा नजर नही आ रहा था।
कैसे हुई आरोपी की पहचान ?
क्राईम डिटेक्शन के जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक किशोर परकाळे ने बताया, कि छतरी के पीछे आरोपी वहां से खिसकने में कामयाब हो गया। लेकिन अगले 5 दिनों तक हमारी टीम आरोपी की शिनाख्त करते हुए बहोत सारे सीसीटीवी कैमरों की जांच की, तो पता चला कि आरोपी पुराना शातिर है। जिसके खिलाफ पहले से लगभग 40 मामले दर्ज हैं। कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है। जब उसके पते पर गए तो पता चला कि वह एक जगह नही कुर्ला पूर्व के कुरेशी नगर के सोनाजी चाल, नेहरू नगर के साहेबा बिल्डिंग और संगम सोसायटी इन तीनों कुर्ला पूर्व के इलाके में रहता है लेकिन जब पुलिस इसकी तलाश कर रही थी तो उसे भनक लग गई और वो फरार हो गया।
क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक विनोद पाटील ने बताया, कि आरोपी के खिलाफ पहले से बोरीवली, घाटकोपर, दिंडोशी, जोगेश्वरी, गांवदेवी, बांद्रा, मालाड़, समता नगर, मुंबई सेंट्रल, पंतनगर, भोइवाडा, सांताक्रूज़, दहिसर, नया नगर, ख़ार, नागपाडा और अंधेरी इलाके के पुलिस स्टेशनों और रेलवे पुलिस थानों मे 36 मामले दर्ज हैं। जिसमें मुंबई सेन्ट्रल और बांद्रा कोर्ट से कई मामलों मे गिरफ्तारी के वारंट जारी हो चुके हैं। ऐसे में इसका पता लगाना बहुत जरूरी हो गया था। पुलिस की टीम लगातार मुखबिरों और सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल कर रही थी। हमें पता चला कि आरोपी पश्चिम बंगाल के लिए ट्रेन पकड़ चुका है। जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और उनकी निगरानी मे नाशिक पुलिस से मदद ली गई।
नासिका पुलिस ने ट्रेन का पता लगाकर इगतपुरी से आरोपी को हिरासत में लिया और फिर अंधेरी पुलिस को सौंप दिया गया। अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ने बताया कि चोरी के जेवरात हस्तगत कर लिए गए हैं और उसके साथ ही कुल 6 अपराध का खुलासा हुआ है। जो अंधेरी, वाकोला, सायन, बोरीवली पूर्व के कस्तूरबा पुलिस स्टेशन, वसई रेलवे स्टेशन और दादर रेलवे स्टेशन पर इसने घटना को अंजाम देकर फरार हो गया था। Mumbai: Andheri police caught a rogue who used to target elderly women walking on the road.
मुंबई: एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक उड़ान में उस वक्त एक भावुक और अद्भुत क्षण सामने आया, जब मस्कट से मुंबई आ रही एक फ्लाइट में एक महिला यात्री ने बच्चे को जन्म दिया। यह घटना फ्लाइट में मौजूद यात्रियों और क्रू मेंबर्स के लिए बेहद खास बन गई, क्योंकि यह बच्चा हवा में, 30,000 फीट की ऊंचाई पर जन्मा। खास बात यह रही कि पैसेंजर में एक नर्स भी मौजूद थी।
जैसे ही थाईलैंड की एक महिला यात्री को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, कैबिन क्रू ने तुरंत अपनी ट्रेनिंग के अनुसार स्थिति को संभाला। फ्लाइट में मौजूद एक नर्स ने भी महिला की सहायता की। पेशेवर तरीके से काम करते हुए क्रू ने नतो केवल सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया, बल्कि महिला को भावनात्मक सहयोग भी दिया। फ्लाइट के अंदर जन्मे बच्चे और मां को तुरंत देखभाल मिली।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने कराई लैंडिंग
पायलटों ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना दी और मुंबई एयरपोर्ट पर प्राथमिक लैंडिंग की अनुमति मांगी। जैसे ही विमान ने लैंड किया, पहले से तैनात मेडिकल टीम और एम्बुलेंस ने मां और नवजात बच्चे को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। एयरलाइंस की एक महिला कर्मचारी उनके साथ गई ताकि उन्हें हर संभव मदद मिल सके।
टीमवर्क ने बचाई जान
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने इस घटना को संकट में सेवा का प्रतीक बताया। क्रू मेंबर्स की सूझबूझ, ट्रेनिंग और इंसानियत ने मिलकर एक संभावित आपात स्थिति को सफलतापूर्वक संभाल लिया। केबिन और कॉकपिट क्रू, ग्राउंड स्टाफ, एयरपोर्ट प्रशासन और इमरजेंसी सेवाओं के बीच समन्वय ने यह सुनिश्चित किया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहें।
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने बताया कि वह मुंबई स्थित थाईलैंड के कॉन्सुलेट जनरल से संपर्क में है ताकि महिला को उसके देश वापस भेजने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया जा सके। फ्लाइट की कमान कैप्टन आशीष वाघानी और कैप्टन फराज अहमद के हाथों में थी, जबकि केबिन क्रू मेंबर्स स्नेहा नागा, ऐश्वर्या शिर्के, आसिया खालिद और मुस्कान चौहान ने अद्भुत संयम और सेवा भाव दिखाया। A baby was born on board an Air India flight, the plane was at an altitude of 30 thousand feet
एयर इंडिया की सफलता
यह घटना सिर्फ एक सुरक्षित डिलीवरी भर नहीं थी, बल्कि इसने यह भी दिखा दिया कि जब सेवा भावना, पेशेवरता और टीमवर्क एक साथ होते हैं, तो आकाश में भी जीवन के चमत्कार संभव हो सकते हैं। एअर इंडिया एक्सप्रेस ने एक बार फिर साबित किया कि आपात स्थिति में वह अपने यात्रियों की सुरक्षा और सेवा के लिए पूरी तरह तैयार है।