एक नाबालिग बच्ची के शोषण के आरोप में जब फरार 55 वर्षीय आरोपी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपी दरवाजा बंद कर आत्महत्या की धमकी देता रहा। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तबतक आरोपी फंदे से लटक चुका था। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
मुंबई: मंगलवार की रात को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस समय दरवाजा बंद कर आत्महत्या करने का प्रयास किया जब मुंबई पुलिस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गई थी। पुलिस उसे एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी। लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति के देखभाल के लिए उसे नियुक्त किया गया था। उसी दौरान पीड़ित की नाबालिग बच्ची पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
पुलिस ने क्या कहा?
नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि “व्यक्ति को तुरंत पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग 36 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में उसे होश आया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।” Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
नाबालिग बच्ची का यौन शोषण
नाबालिग लड़की के पिता को पिछले साल लकवा का दौरा पड़ा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी जिसे मई महीने में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नाबालिग लड़की के पिता की देखभाल के लिए रखा गया था। शिकायत के मुताबिक नाबालिग की मां जब काम पर चले जाती थी तब हर रोज बच्ची का यौन शोषण और अश्लील टिप्पणियां करता था। यहां तक कि लड़की की शिकायत पर उसकी मां ने आरोपी को चेतावनी भी दी उसके बावजूद आरोपी उसे परेशान करता रहा।
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को आरोपी ने लड़की के बेडरूम में घुसकर कथित तौर पर परेशान किया। जिसके बाद लड़की की मां ने पुलिस मे शिकायत करने का फैसला लिया। पुलिस ने 29 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही, आरोपी मुंबई से फरार हो गया। पहले उत्तर प्रदेश और बाद में कर्नाटक भाग गया। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
आत्महत्या की कोशिश
मंगलवार को पुलिस को जब पता चला कि आरोपी बदलापुर में है तो दो सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन से चार कांस्टेबल की एक टीम वहां पहुंची। रात करीब 10 बजे, आरोपी ने अपने घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। हालांकि, पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
मुंबईः गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी में एक ऐसा दर्दनाक वाक्या पेश आया है। जिसमें कथित तौर से 35 वर्षीय तीन बच्चों की मां ने अपने ही पति को अपने प्रेमी की मदद से मौत के घाट उतार दिया। हालांकि पति इलाज के दौरान तडपते हुए भी पत्नी की खोफ से हकीकत छुपाता रहा। लेकिन जब पिता की मौत ही हो गई तो नाबालिग बेटी ने पुलिस को सारी कहानी बयां कर दी। इस पुरे केस में आरे पुलिस की मुख्य भुमिका रही। जवाबों पर संदेह जताते हुए उसने पूछताछ करना जारी रखा। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
पुलिस ने क्या कहा?
आरे पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रवींद्र पाटील ने बताया, कि आरे मिल्क कॉलोनी में एक मेकअप आर्टिस्ट भरत लक्षमण अहिरे की इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है। मामले में मृतक की 35 वर्षीय पत्नी राजश्री अहिरे को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि राजश्री ने षडयंत्र रचकर अपने प्रेमी चंद्रशेखर पडायाची और उसका साथी रंगा के हाथों अपने ही पति की हत्या करवा दी। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
गिरफ्तार राजश्री और मृतक भरत अहिरे की फाइल तस्वीर
पत्नी ने खेला पति के साथ खेल
पुलिस के मुताबिक, पत्नी के अवैध संबंध के चलते भरत की हत्या हुई है। पिछले महीने जब भरत ने अपनी पत्नी से इस बारे में पूछा, तो उसने भोली बनते हुए चंद्रशेखर द्वारा उस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके बाद भरत ने चंद्रशेखर को फोन किया, जिसने उसे गोरेगांव पूर्व के आरे मिल्क कॉलोनी स्थित एकतानगर, यूनिट नंबर 31 में एक सार्वजनिक शौचालय के पास मिलने के लिए बुलाया। इस दौरान राजश्री भी अपने पति के साथ मिलने वाली जगह पर भी गई। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
15 जुलाई की रात जब चंद्रशेखर और रंगा भरत से मिले तो उन्होंने उसके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। चंद्रशेखर ने उसकी छाती, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर बेतहाशा मुक्का मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखर का साथी रंगा हमले के दौरान भरत को पीछे से पकड़ रखा था। हमले के वक्त राजश्री बगल में खड़े होकर तमाशा देखती रही। न तो उसने हस्तक्षेप किया और न ही आवाज़ लगा कर मदद मांगी। इसके बाद जैसे ही स्थानीय लोग घटनास्थल पर इकट्ठा होने लगे, दोनों हमलावर भाग गए। यहां राजश्री का और एक गुनाह सामने आया। राजश्री अपने पति को अस्पताल ले जाने के बजाय, अपने घर ले गई और तीन दिनों तक बिना किसी इलाज के उसे तड़पता हुआ छोड़ दिया।
नाबालिग बेटियों ने मांगी मदद
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक भरत के दो बेटियां 13 और 5 साल की हैं और एक 3 साल का बेटा है। 13 वर्षीय नाबालिग अपने पिता की बिगड़ती हालत देख सहमी हुई थी। लेकिन जब उसने देखा कि पिता को खून की उल्टियां होने लगीं तो उसने ने रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी। सूचना पाकर भरत की भाभी घर आईं, जहां राजश्री ने दावा किया कि भरत एक बाइक दुर्घटना में घायल हो गया है। आखिरकार उसे मलाड पूर्व के पठानवाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में राजश्री ने वही एक्सिडेंट वाली झूठी कहानी दोहराई, इसपर भरत भी पत्नी के दबाव और डर के कारण उसी के हां में हां मिलाया। जबकि इसकी जानकारी डॉक्टरों ने मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के तहत पुलिस को रिपोर्ट भेजी। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
हालांकि पुलिस को बयान में बहुत सी गड़बड़ियां नजर आ रही थी। इसलिए उन्होंने डिटेल में पूछताछ की और भरत के दिए गए बयान के आधार पर बेटी से भी बात की। क्यों कि रिशतेदारों को पहली सूचना बेटी ने दी थी। इसलिए पुलिस को शक हुआ और पूछताछ में बेटी ने बताया कि उसने मार पीट के समय छुपकर सारी घटना देख ली थी। पुलिस ने बताया कि बेटी के बयान के वक्त उसकी मां चुपचाप खड़ी देख रही थी। राजश्री अपने पति को अस्पताल ले जाने के बजाय घर ले आई और उसका इलाज भी नहीं कराया आखिरकार 5 अगस्त को इलाज के दौरान भरत की मृत्यु हो गई। बेटी के दिए गए बयान के आधार पर यह पूरा मामला सामने आया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य दो फरार आरोपियों की तलाश चल रही है।
मुंबई: कॉटन ग्रीन रेलवे स्टेशन के पास से मुंबई क्राइम ब्रांच की हफ्ता वसूली विरोधी सेल ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार सभी आरोपी शूटर बताए जा रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि ये सभी लोग हरियाणा से मुंबई आए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के पुलिस अधिकारी आरोपियों के पास से 50 जिंदा कारतूस और 4 पिस्तौल भी बरामद कर इस बात का पता लगाने में जुटी है कि ये लोग क्या किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए थे? 5 sharp shooters from Haryana arrested in Mumbai and many weapons recovered
किसने भेजा हत्यारों को मुंबई?
घटना स्थल कालाचौकी पुलिस स्टेशन अंतर्गत होने की वजह से मुंबई क्राईम ब्रांच की टीम ने उन्हें पुलिस स्टेशन लेजाकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सन्नी नरेशकुमार, रवि अंग्रेज, राहुल पृथ्वीसिंह, अनुज कुलदीप कुमार और आदित्य योगेश कौशिक के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच को मिली खूफिया जानकारी के आधार पर यह धरपकड़ हुई। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है, कि आखिर इन्हें मुंबई में हथियार लेकर किसने भेजा था और उनका इरादा क्या था?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने जब इन्हें मौके से पकड़ा तब अधिकारी ने पूछा, “क्या तुम्हारे पास जो पिस्तौल और कारतूस बरामद किया गया उसका लाइसेंस है?” तब गिरफ्तार आरोपियों ने कहा, “नहीं।” पूछा गया, कि “अगर लाइसेंस नहीं है, तो तुम हथियार किस काम से और कहां से लाए हो?” पूछने पर एक आरोपी ने बताया कि वह इसे बेचने के लिए लाया था।हालांकि, किसको बेचने के लिए लाया गया था? वो बता नही रहे हैं। इनके बयान तो सुन रहे हैं लेकिन अपने स्तर पर मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी जांच पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि कहीं किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए हों?
पुलिस के अनुसार, मोतियाबिंद से पीड़ित एक 67 साल के शख्स ने अस्पताल से संपर्क किया था और दो नेत्र रोग विशेषज्ञों ने मार्च में उसकी सर्जरी की थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि उनके अलावा, दिसंबर 2024 से वहां सर्जरी कराने वाले चार अन्य लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। मामला सिविल सर्जन के ध्यान में लाया गया, जिनकी हालिया रिपोर्ट ने शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि की गई। रिपोर्ट हाल ही में वाशी पुलिस को भेजी गई और मामला दर्ज किया गया।
वाशी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय धूमल ने कहा, “हम जांच कर रहे हैं कि क्या डॉक्टरों को 87 साल की उम्र में सर्जरी करने की अनुमति है।” वरिष्ठ निरीक्षक ने कहा कि पुलिस ने यह भी पाया कि डॉक्टरों ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के साथ अपने लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं कराया था।
मुकदमा हुआ दर्ज
डॉक्टर्स पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125 (ए), 125 (बी) (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य) और 3 (5) (सामान्य इरादा) के साथ-साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। A father-son duo of eye doctors together took away the eyesight of 5 people. Case registered…
मुंबई: गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी के यूनिट क्रमांक 30 का सार्वजनिक शौचालय कब्जा हो चुका है। साल 2017 में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने यहां दो सार्वजानिक शौचालयों का उद्घाटन किया था। जिसमें से एक जो फिल्म सिटी के पिछले गेट के पास यूनिट क्रमांक 30 में स्थित है उसकी हालत खस्ता हो गई है। इस सार्वजनिक शौचालय के एक हिस्से पर एक परिवार ने अतिक्रमण कर लिया है, जिसका दावा है कि उसे शौचालय की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
जमीनी हकीकत
जब पत्रकार ने घटनास्थल का दौरा किया, तो ललिता राणे नामक एक महिला यहां कपड़े धोती हुई दिखाई दीं, जबकि उनकी एक और रिश्तेदार जानकी नामक वृद्ध महिला शौचालय के महिला खंड में सो रही थीं, जिसे रहने के लिए जगह और सामान रखने के लिए स्टोरेज रुम में बदल दिया गया है। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
कब्ज़ेदारों ने क्या कहा?
ललिता ने पत्रकार से बात करते हुए बताया, कि “मेरा जन्म यहीं आरे मिल्क कॉलोनी में हुआ है, और मेरी सास, कमलदेवी राणे, जो पहले शौचालय का रखरखाव संभालती थीं, वह भी इसी इलाके में जन्मी और पली-बढ़ी थीं। दो साल पहले उनका निधन हो गया। बीएमसी ने सालों पहले इस शौचालय का निर्माण कराया था, उसे तोड़ दिया और फिर से बनवाया। सलमान खान भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। अब सालों से बीएमसी ने इसका रखरखाव नहीं किया है। इसलिए इसकी हालत खस्ता हो गई है। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
रखरखाव की समस्या
उसने ये भी कहा, कि इसमें पानी का कनेक्शन नहीं है और इसे चालू रखने के लिए कोई धनराशि भी नहीं दी गई है। इस इलाके में अक्सर नशेड़ी देखे जाते हैं, जो हमारी जान के लिए खतरा बने रहते हैं। हमने पास में ही एक छोटा सा कुआँ खोदा है, जिसका इस्तेमाल हम नहाने और बर्तन धोने के लिए करते हैं। अगर बीएमसी पानी और रखरखाव के लिए धनराशि उपलब्ध करा दे, तो यह शौचालय फिर से लोगों की सेवा के लिए चालू किया जा सकता है।”
टूट गये हैं सभी दरवाजे
उनकी मौसी ने आगे कहा, “हम शौचालय के इस हिस्से का इस्तेमाल सोने और सामान रखने के लिए करते हैं। यहाँ बिजली या पानी का कनेक्शन नहीं है। महिलाओं का सेक्शन असुरक्षित है – सभी दरवाजे टूटे हुए हैं, इसलिए हमें इसे हमेशा के लिए बंद करना पड़ा। हम बीएमसी और सलमान खान से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को देखें और हमारी मदद करें।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
शौचालय ब्लॉक का वह हिस्सा, जिस पर अतिक्रमण नहीं हुआ था, बेहद खराब हालत में था, जहाँ बुनियादी स्वच्छता, पानी की आपूर्ति और यहाँ तक कि दरवाज़े भी नहीं थे। परिसर में गुटखे के पैकेट, शराब की बोतलें और सिगरेट के टुकड़ों से भरा पड़ा था। इसके अलावा, उद्घाटन और उसमें शामिल लोगों का विवरण देने वाली स्मारक टाइल भी गायब था। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
प्रशासन से मरम्मत की मांग
आरे मिल्क कॉलोनी के शिवसेना (यूबीटी) शाखा प्रमुख संदीप गढ़वे ने कहा, “सलमान खान ने छह रूमों वाले दो सार्वजनिक शौचालयों का उद्घाटन किया था – एक मद्रासपाड़ा में और दूसरा यूनिट 30 में। दुर्भाग्य से, अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यूनिट 30 की हालत बेहद खराब हो गई है। एक तरफ एक परिवार ने अतिक्रमण कर उसे घर बना लिया है। पानी, दरवाज़ों और रखरखाव की कमी के कारण दूसरा आधा हिस्सा अनुपयोगी है, जिससे लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आरे के सीईओ और बीएमसी को तत्काल इस शौचालय की मरम्मत करानी चाहिए।”
रहिवासियों ने क्या कहा ?
एक निवासी ने कहा, “रात में, फिल्म सिटी गेट के पास के इलाके में नशेड़ी और असामाजिक तत्व अक्सर आते हैं। कोई भी वहाँ जाना नहीं चाहता। एक परिवार ने शौचालय के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है। लेकिन बीएमसी, आरे के सीईओ और पुलिस इसपर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करती।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
एक स्थानीय निवासी विनोद एकनाथ कांबले ने कहा, “शौचालय की सुविधा न होने के कारण हमें सड़क पर या जंगल में पेशाब करने को मजबूर होना पड़ता है। नशेड़ी रात में घूमते रहते हैं। यह हमारे परिवारों के लिए जोखिम भरा है, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम लाचार हैं और अपने घरों से दूर स्थित शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं।”
बीएमसी अधिकारी ने क्या कहा?
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) उपआयुक्त किरण दिघावकर ने कहा, “आरे मिल्क कॉलोनी और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के अंतर्गत आते हैं और इसका प्रशासन आरे के सीईओ द्वारा किया जाता है। मरम्मत या रखरखाव के लिए, सीईओ कार्यालय और ईएसजेड निगरानी समिति से अनुमति लेना आवश्यक होता है। 2017 में जब हमने सार्वजनिक उपयोग के लिए शौचालय ब्लॉक का विकास किया था, तब हमने आरे मिल्क कॉलोनी के सीईओ से अनुमति ली थी। सीईओ की स्वीकृति मिलने के बाद हम सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत और रखरखाव कर पाएंगे।”
शौचालय के बाहर ट्यूबवेल की व्यवस्था
इस बीच, आई लव मुंबई फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सदस्य राहुल कनाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान देंगे और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगे। आरे सीईओ कार्यालय और वन विभाग से अनुमति संबंधी समस्याओं के कारण, बीएमसी पानी का कनेक्शन नहीं दे पा रही है। इस पर हमने सार्वजनिक शौचालय के बाहर एक ट्यूबवेल की व्यवस्था की थी।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
मुंबई: अब शहर में पुलिस नहीं कर रही है आपकी शिकायत पर कार्रवाई, तो बिना अपॉइंटमेंट आप मुंबई पुलिस कमिश्नर से मिल सकेंगे। हर मंगलवार को दोपहर 3:30 बजे, मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती खुद आम नागरिकों से मिलकर उनकी परेशानी और समस्याओं को सुनने का फैसला किया है ताकि आम नागरिकों और पुलिस प्रशासन के बीच सीधा संवाद हो सके। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
Every Tuesday at 3:30 PM, I look forward to hearing your grievances at the Mumbai Police Headquarters.
— Commissioner of Police, Greater Mumbai (@CPMumbaiPolice) August 5, 2025
बिना अपॉइंटमेंट मुंबई पुलिस कमिश्नर से मुलाकात
इस अनोखी पहल की सबसे खास बात यह है कि आम नागरिकों को किसी भी अपॉइंटमेंट की आवश्यकता नहीं है। कोई भी नागरिक, जिसकी कोई शिकायत या सुझाव है, वो सीधे मुंबई पुलिस मुख्यालय पहुंचकर पुलिस कमिश्नर से मिल सकता है। इसका उद्देश्य लोगों की समस्याएं प्राथमिकता के आधार पर सुनना और उनका त्वरित समाधान निकालना है। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
मुंबई पुलिस कमिश्नर की अनोखा पहल
मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा, “हर मंगलवार दोपहर 3:30 बजे, मैं मुंबई पुलिस मुख्यालय में आपके साथ सीधे संवाद के लिए मौजूद रहता हूं। किसी अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं। बस आइए और अपनी बात कहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक, महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम या अन्य किसी विषय पर वे खुलकर अपनी बात रख सकते हैं।
इस अभियान को सोशल मीडिया पर #MeetCPonTuesday नाम से प्रचारित किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ें और इसका लाभ उठा सकें। मुंबई जैसे महानगर में, जहां दिन-प्रतिदिन शिकायतों का ढेर लगता है, वहां इस तरह की पहल जनता के विश्वास को मजबूत कर रही है। इस पहल को लेकर लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई नागरिकों ने कहा कि अब उन्हें यह भरोसा है कि उनकी आवाज़ Mumbai Police Higher Authority तक पहुंचेगी और समाधान भी मिलेगा। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
पुलिस और जनता के बीच बढ़ा भरोसा
विशेषज्ञों की माने तो यह पहल पुलिस और जनता के बीच भरोसे की खाई को पाटने में मदद करेगी। इससे न केवल शिकायतों का निपटारा होगा, बल्कि लोगों को यह भी महसूस होगा कि पुलिस उनके साथ है और उनकी बात सुनी जा रही है। मुंबई पुलिस की यह पहल ‘Meet CP on Tuesday’ न केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था है, बल्कि जनता के साथ संवाद का एक नया मंच भी है। जब कोई उच्च अधिकारी खुद जनता से मिलने को तैयार हो, तो यह प्रशासन की संवेदनशीलता और पारदर्शिता का परिचायक है। अगर आपके पास कोई शिकायत है, तो अगला मंगलवार आपका हो सकता है – मुंबई पुलिस मुख्यालय, दोपहर 3:30 बजे, बिना किसी अपॉइंटमेंट के। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
मुंबई के पक्षी प्रेमियों को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहत की खबर सुनाईं है। कबूतरों को दाना डालने के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। मुख्यमंत्री के इस पहल से कबूतरों के संरक्षण की मांग कर रहे कबूतरप्रेमियों को बड़ी राहत मिली है। Pigeon houses will open again in Mumbai! CM Fadnavis gave instructions
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: शहर में कबूतरखानों को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद अब थमता हुआ नजर आ रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद कबूतरखानों के खिलाफ मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा शुरू की गई कार्रवाई अब थम सकती है। दरअसल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक की और उन्होंने शहर में कबूतरखानों को अचानक बंद करने के कदम को उचित नहीं माना।
मंत्रालय में हुए उच्चस्तरीय बैठक
मंत्रालय में मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीएम फडणवीस ने कहा, कि “कबूतर-खानों यानी पक्षियों को दाना डालने की जगह को अचानक बंद करना कोई समस्या का समाधान नहीं है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि यदि कबूतरों के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं, तो उन पर वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है, न कि सीधे प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया, कि “कबूतरों को दाना डालने के लिए एक निर्धारित समय तय किया जा सकता है।”
मुख्यमंत्री ने दिया सुझाव
सीएम फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, वन मंत्री गणेश नाइक, मंत्री गिरीश महाजन और मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा भी उपस्थित थे। बैठक के दौरान फडणवीस ने कहा कि कबूतरों की विष्ठा से होने वाली गंदगी की सफाई के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। कबूतरखानों से नागरिकों को कोई परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। Pigeon houses will open again in Mumbai! CM Fadnavis gave instructions
बीजेपी विधायक एवं मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, कि सरकार कबूतरखानों को अचानक बंद करने के पक्ष में नहीं है और बॉम्बे हाईकोर्ट में सरकार पक्ष रखेगी। जो कबूतरखाने प्लास्टिक शीट से ढंककर बंद किए गए है, उन्हें जल्द ही फिर से खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि कबूतरों को अब नियंत्रित ढंग से ही दाना दिया जाएगा, जिससे नागरिकों को कोई असुविधा न हो। कबूतरों की विष्ठा की सफाई के लिए ‘टाटा’ कंपनी द्वारा निर्मित एक विशेष मशीन का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया जाएगा।
FIR दर्ज करने का दिया था आदेश
मुंबई शहर में 51 ‘कबूतर खाने’ यानी पक्षियों को दाना डालने की जगह हैं। कुछ दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों के झुंड को दाना डालने को ‘सार्वजनिक उपद्रव’ करार देते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) को ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था। बीएमसी ने दादर का मशहूर ‘कबूतर खाना’ बंद कर दिया और उसे प्लास्टिक के तिरपाल से ढक दिया। इसके बाद शहर के कुछ हिस्सों में पक्षी प्रेमियों और जैन समुदाय के लोगों ने नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन भी किए। हालांकि अब सीएम फडणवीस की इस पहल से कबूतरप्रेमियों को बड़ी राहत मिली है।
कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपये की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। इसमें डी-कंपनी की फंडिग सोर्स का अनुमान लगाया जा रहा है। मैसूर से बेंगलूर और फिर मुंबई होती थी ड्रग्स की तस्करी। मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया कि ड्रग्स की तस्करी के लिए ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company
मुंबई: कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपए की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। यह ड्रग तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। केस की जांच शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुंबई की साकीनाका पुलिस ने जांच के दौरान खुलासा किया कि किस तरह ड्रग्स की तस्करी का रैकेट काम करता था। कर्नाटक से महाराष्ट्र तक ड्रग्स की तस्करी और इंटरनेशनल स्तर तक इसकी सप्लाई होती थी। ड्रग्स सप्लायर इसके लिए अनोखा और बेहद गुप्त तरीका अपनाते थे। इस मामले को लेकर जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के डी-कंपनी का पैसा लगा हो सकता है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company
कौन है मास्टरमाइंड?
मुंबई पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जांच में सामने आया कि ड्रग्स की सप्लाई और प्रोडक्शन की प्रक्रिया दो अलग-अलग गिरोह करते थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों ही गैंग के सदस्यों को एक-दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं होता था। मुंबई पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company
पुलिस के लिए मुश्किलें
यह ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री और इसके सप्लाई की चैन पूरे ऑपरेशन की सबसे खतरनाक और शातिर ‘मॉडस ओपेरेंडी’ अपनाती थी। पुलिस ने बताया कि इस तरह की व्यवस्था से नेटवर्क की परतें खोलना बेहद मुश्किल हो गया था। हालांकि मुंबई पुलिस की हाईटेक टीम ने इसकी पर्तें खोल ही लीं। लेकिन अब भी बहोत सारे राज खुलने की आशंका जताई जा रही है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company
अंधेरी पूर्व की साकीनाका पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मैसूर की फैक्ट्री में एमडी नामक ड्रग्स तैयार होती थी। यहां काम करने वालों को नहीं पता होता था कि गाड़ी में लोड करने के बाद ड्रग्स को कहां लेकर जाया जाएगा। खेप को एक दूसरे गैंग के जरिए सबसे पहले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुंचाया जाता था। बेंगलुरु में मुंबई के गैंग का एक मेंबर पहले से मौजूद होता था। ड्रग्स सप्लाई करने और उसे लेने आने वालों को एक दूसरे को एक कोड दिखाना होता था।
कैसे होती थी ड्रग्स की डिलीवरी?
पुलिस ने बताया यह कोड एक टीशर्ट होती थी। जो हर बार सप्लाई के लिए अलग-अलग यूज की जाती थी। दोनों के पास सेम टीशर्ट का फोटो वॉट्सऐप किया जाता था। फिर वे एक दूसरे को वह दिखाकर खेप की सप्लाई करते थे। इस तरह खेप को बेंगलुरु से मुंबई तक लाया जाता था। मुंबई लाने के बाद इसे मुंबई के विभिन्न इलाकों में स्थानीय सप्लायर्स के जरिए सप्लाई होती थी। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company
कैसे होता था ट्रांसपोर्टेशन?
पुलिस ने बताया कि ड्रग्स का पूरा ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम सड़क मार्ग पर आधारित था। तस्कर हवाई या ट्रेन मार्गों में होने वाली जांच से बचने के लिए रोड का इस्तेमाल करते थे। पुलिस जांच में सामने आया, कि यह नेटवर्क ड्रग्स को बसों और निजी वाहनों के माध्यम से ट्रांसपोर्ट करता था। मैसूर से बेंगलुरु और फिर मुंबई तक का सफर तय कर ड्रग्स को लगेज के भीतर छिपाकर पहुंचाया जाता था। इस तरह की रणनीति से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में तस्वीरों को काफी हद तक सफलता भी मिली।
आईबी के अधिकारी कर रहे हैं पूछताछ
इस मामले में अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की भी एंट्री कर चुकी है। सोमवार को आईबी अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसियों को शक है कि यह ड्रग्स फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि इसका लिंक अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से भी हो सकता है। साकीनाका पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company
एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी एटीएस ने यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज को गिरफ्तार किया है। दोनों ‘Reviving Islam’ नामक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे इस ग्रुप के 3 एडमिन सहित 400 पाकिस्तानी सदस्य बताए जा रहे हैं। 2 terrorists arrested in Pakistani connection
न्यूज़ डेस्क मुंबई: एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी ATS ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये दोनों ‘Reviving Islam‘ नामक एक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे, जिसमें 400 से ज्यादा पाकिस्तानी मेंबरों में 3 एडमिन शामिल हैं। इस ग्रुप के जरिए दोनों युवक राष्ट्र विरोधी बातें और गैर-मुस्लिमों के खिलाफ कट्टरपंथी सोच फैलाते थे।
एटीएस कर रही है जांच
एटीएस की जांच में पता चला है कि ये युवक पाकिस्तान के नागरिकों से सोशल मीडिया के जरिए लगातार कॉन्टैक्ट में थे। इस ग्रुप में चुनी हुई सरकार को गिराने और देश में शरिया कानून लागू करने जैसी बातें होती थीं। फिलहाल, एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। 2 terrorists arrested in Pakistani connection
इससे पहले एटीएस ने 2 जून को ठाणे के पडघा और बोरीवली में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। ATS ने मुंबई, ठाणे, भिवंडी और अन्य जिलों में 15 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन सिमी (SIMI) के पूर्व पदाधिकारी और ISIS महाराष्ट्र मॉड्यूल केस के मेन एक्यूज्ड साकिब नाचन के ठिकानों समेत उसके कॉन्टैक्ट में रहे कई अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। छापेमारी सिर्फ साकिब नाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कॉन्टैक्ट में रहे या उससे जुड़े अन्य संदिग्धों पर भी एजेंसी की नजर है।
तिहाड़ जेल में कैद
नाचन कुख्यात आतंकी अबू सुलेमान, अबू सुल्तान और मोहम्मद भाई जैसे दहशतगर्दों के सीधे कॉन्टैक्ट में था। रिपोर्ट के मुताबिक, नाचन ने ही अन्य सदस्यों को बाकी आतंकियों को शपथ दिलाई और साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई थी। फिलहाल, साकिब नाचन तिहाड़ जेल में कैद है। 2 terrorists arrested in Pakistani connection
मुंबई: जोगेश्वरी की रहने वाली एक 25 वर्षीय लड़की के साथ बहोत बुरा हुआ है। ऑनलाइन लोन देने वाली कंपनी ने उसके अंतरंग तस्वीरों को उसी की कॉन्टेक्ट लिस्ट हैक कर उसके रिश्तेदारों को फॉरवर्ड कर दिया। गनीमत रही की लड़की ने समझदारी दिखाते हुए अपने पिता को सारी हकीकत बता दी। लड़की ने दावा किया कि उसने लोन के पैसे चुका दिए, हालांकि उसमें देरी हुई। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral
पुलिस के अनुसार, पीड़िता जोगेश्वरी की रहने वाली है। उसने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखा जिसमें एक ऐप के बारे में बताया गया था जो तुरंत नकद लोन प्रदान करता है। उसने 20 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे अपने फोन पर ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद उसने छह दिनों के लिए 2000 रुपये लोन के लिए अप्लाई किया। ऐप पर अपना बैंक खाता नंबर सहित व्यक्तिगत जानकारी अपलोड कर दी। साथ ही, आधार कार्ड की एक प्रति भी अपलोड जोड़ दी। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral
तस्वीरें वायरल करने की धमकी
शिकायत के मुताबिक, इसके कुछ देर बाद ही लड़की के बैंक खाते में 1300 रुपये लोन के पैसे जमा हो गए। छह दिन बाद, लड़की को मैसेज मिला, जिसमें लोन चुकाने के लिए कहा गया। उसने जवाब दिया कि उसके पास इस समय पैसे नहीं है। उसे कुछ दिन और चाहिए लेकिन मैसेज भेजने वाले ने उसको तुरंत भुगतान करने को कहा। उसने धमकाते हुए कहा, कि ऐसा नहीं करने पर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दी जाएगी। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral
पीड़िता का दावा है कि वह इस मैसेज को पढ़कर डर गई। उसको 31 जुलाई को एक क्यूआर कोड भेजा गया, जिसमें तुरंत पैसों के भुगतान करने के लिए कहा गया था। पीड़िता ने उसी दिन क्यूआर कोड के माध्यम से 2000 रुपये चुका दिए। लेकिन उसी दिन शाम करीब 7 बजे पीड़िता की चाची को एक अज्ञात नंबर से उसकी मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें मिलीं। इसके बाद, उसके एक पुरुष मित्र को भी इसी तरह की तस्वीरें मिली। इससे लड़की डर गई और उसने अपने पिता को इस बारे में बताया, जिसके बाद दोनों ओशिवारा पुलिस का रुख किया। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral
लोन एप की ठगी से कैसे बचें?
लोन लेने से पहले सभी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
ब्याज दर, पेमेंट साइकल और पेनाल्टी आदि की जानकारी ले लें।
लोन ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल ऐप प्लेस्टोर से ही डाउनलोड करें।
अनजान लिंक या वाट्सएप से आए डॉट एपीके फाइल्स से बचें।
ऐप्स को अनावश्यक अनुमतियां जैसे कॉन्टैक्ट्स, गैलरी या कैमरा) नहीं दें।
ठगी का शिकार बनने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
लोन से संबंधित कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और स्क्रीनशॉट्स को सेव करके रखें।
मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज साइबर अपराध जनवरी 2024 से मार्च 2025
साल
दर्ज केस
हल केस
धोखाधड़ी राशि
जब्त राशि
2024
5087
1253
846.71 करोड़ रु
82.49 करोड़ रु
2025
1106
188
279.83 करोड़ रु
40.29 करोड़ रु
झटपट लोन देने वाले ऐप्लिकेशन संचालक करते क्या है?
लोन ऐप्स के जरिए पैसे देने वाली कंपनियां अक्सर अर्जदार की गोपनीय जानकारियां चुरा लेती है और उन्हीं के कॉन्टेक्ट डिटेल्स की मदद से धमकाया और परेशान किया जाता है। यहां तक की उनके रिश्तेदारों और परिवार वालों को लगातार कॉल कर परेशान किया जाता है। ऐसे में कर्जदारों के कॉन्टैक्ट्स नंबरों पर धमकी भरे मैसेज भेजने से सामाजिक अपमान का डर बढ़ जाता है। ब्लैकमेलिंग कर लोगों को इतना परेशान किया जाता है कि लोग आत्महत्या को ही अंतिम रास्ता मान लेते हैं।
लोन ऐप्स की ब्लैकमेलिंग और उच्च ब्याज दरों के कारण कई लोग मानसिक रोगी बन जाते हैं। कुछ लोग तनाव में आत्महत्या तक कर लेते हैं। वहीं, मुंबई पुलिस के अनुसार, साइबर जागरूकता की कमी के कारण लोग अपनी समस्याएं खुलकर साझा नहीं करते, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग भी कम होने के कारण केस सामने आ नहीं पाता है। साइबर दक्ष में पुलिसकर्मियों की कमी भी है, जो साइबर अपराध को बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए, साइबर डिटेक्टशन रेट दो से तीन फीसदी रही है, जबकि साइबर केस बढ़कर 243 फीसदी तक मुंबई जैसे शहर में पहुंच चुकी है। इस ओर सरकार और प्रशासन को ध्यान देने की जरुरत है।