Category: Mumbai News

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  • बिना किसी शिकायत के 54000 गड्ढे भर देने का मुंबई मनपा का दावा

    बिना किसी शिकायत के 54000 गड्ढे भर देने का मुंबई मनपा का दावा

    • अधिकारियों ने किया मुंबईकरों पर बहुत बड़ा एहसान।
    • किसी अजूबे से कम नहीं बृहन्मुंबई महानगर पालिका..

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    कमाल की बात है। 15 दिनों में 54000 गड्ढे भरना। किसी अजूबे से कम नहीं है। मुंबई  महानगर पालिका का दावा है, कि उसने मात्र 15 दिनों में ही महानगर के तीन एक्सप्रेस हाईवे सहित कुल 54000 गड्ढे भर दिए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने दावे किए थे कि मानसून के पूर्व ही उसने पहले ही छः हजार गड्ढे भर दिए थे।

    ऐसे में बृहन्मुंबई महानगर पालिका का दावा है, कि इससे अब कम गड्ढे पड़ेंगे लेकिन 54 हजार छोटे बड़े गड्ढे उभरना सारे दावे की पोल खोल देते हैं। मनपा यह भी दावा करती है, कि इस बार उसने जनता की शिकायतों का इंतजार नहीं किया। यानी वह कहना चाहती है, कि “अब मुंबईकरों को शिकायत कर जगाने की जरूरत ही नहीं है।” यानी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बिना मुंबईकरों के जगाए जागती नहीं थी। सोई रहती थी। इस बार नींद से अपने आप जाग गई। सौ बार शिकायतें करने के बाद भी सोई रहने वाली बृहन्मुंबई महानगर पालिका प्रशासन अब जगाए जाने का इंतजार नहीं की। खुद जग गई और रिकार्ड समय में 54000 हजार गड्ढे भर कर मुंबईकरों पर एहसान कर दिया।

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    रास्तों की मरम्मत करते मनपा अधिकारी की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    क्या है सवाल..? बृहन्मुंबई महानगर पालिका

    इतनी जल्दी और भारी मात्रा में गड्ढे भरने के दावे पर भी सवाल उठेंगे ही। जैसा कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका बहाना करती है, कि भारी वर्षा और ट्रैफिक के कारण गड्ढे भारी मात्रा में पड़ते हैं। तो सवाल यह है कि आरसीसी (RCC) की सड़कों में भी गड्ढे क्यों पड़ते हैं? साधारण सी बात है डांबर का शत्रु है पानी और जल भराव से गड्ढे पड़ेंगे ही, लेकिन सड़क बनाने की विधि में प्लास्टिक के उपयोग तक विज्ञान पहुंच गया है। लेकिन मनपा अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग क्यों नहीं करती। हर बार वही गिट्टी डालकर कोरम पूर्ति करना क्या उचित है? चलो इस बार शायद चुनावी वर्ष में बृहन्मुंबई महानगर पालिका अपने आप जागी।मुंबईकरों को जगाना नहीं पड़ा। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका बधाई की पात्र है।

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  • बोगस लाॅटरी माफिया व कुछ भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रतिमाह करोड़ों का राजस्व घोटाला

    बोगस लाॅटरी माफिया व कुछ भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रतिमाह करोड़ों का राजस्व घोटाला

    • महाराष्ट्र पुलिस का ढुलमुल रवैया, कई घर उध्वस्त की कगार पर
    • लोटस, यूनिक व इलेवन डॉट, खेलो इंडिया खेलो लाॅटरी से महाराष्ट्र राज्य और केंद्र के जीएसटी की खुली लूट..

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    भारत में डिजिटल क्रांति का दौर विकसित होता जा रहा है और हम तेजी से इस तकनीक का उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में कर रहे हैं तथा यह तकनीक सर्वसामान्य जनों के लिए वरदान साबित हो रही है। किंतु इसी तकनीक का उपयोग असामाजिक तत्व धड़ल्ले से कर न सिर्फ आम जनता को ठग रहे हैं, बल्कि सरकार को भी हर महीने करोड़ों के राजस्व का आर्थिक नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।

    सूत्रों से प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार लोटस, यूनिक व इलेवन डॉट, खेलो इंडिया खेलो लाॅटरी द्वारा राजस्व की खुलेआम लूट का गोरखधन्धा मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में भी चल रहा है। जहां धड़ल्ले से लाटरी माफिया प्रतिबंधित राजश्री लॉटरी के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाते आ रहे हैं। लेकिन सरकारी नियमों को ताख़ पर रखकर कुछ भ्रष्ट नौकरशाह कतिपय भ्रष्ट लोगों के सहारे लाटरी माफिया, सायबर उपकरणों का उपयोग कर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

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    राजस्व, जीएसटी,
    अवैध लॉटरी कारोबार की ताजा तस्वीर

    राजस्व की लूट, गलता समाज पैसे बटोरते कारोबारी

    बतादें कि महाराष्ट्र राज्य में राजश्री लाटरी पर प्रतिबंध है, लेकिन बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है। लाटरी माफिया सरकार को करोड़ों का चूना रोज लगा रहे हैं। क्योंकि एक तो यह प्रतिबंधित है और दूसरा फर्जी ऐप का उपयोग कर धड़ल्ले से इसे चलाया जा रहा है। लाटरी व्यवसायी और लॉटरी माफिया सरकार को कोई भी जीएसटी या टैक्स नहीं भरते हैं, जिसकी वजह से सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। सबसे बड़ी बात यह है की इस पूरे खेल मे लॉटरी माफियाओं के साथ कहीं न कहीं सरकारी महकमे के कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी शामिल हैं। इसलिये कोई कार्रवाई नहीं होती है। अवैध लॉटरी का गैरकानूनी व्यवसाय जोरों से फल-फूल रहा है।उपलब्ध विवरणों के अनुसार अवैध लाटरी का यह व्यवसाय वैसे तो मुंबई सिटी और महाराष्ट्र के हर प्रमुख शहर में शुरू है लेकिन हमने, जब जांच पड़ताल की तो देखा कि लॉटरी माफिया मुंबई के झुग्गी बस्तियों को टारगेट कर अपने काले साम्राज्य की नींव खड़ी कर अपने गैरकानूनी कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। मलाड पश्चिम के मालवानी इलाके में लगभग 20 से अधिक लॉटरी सेंटर चलाए जा रहे हैं। ठीक वैसे ही कांदिवली पूर्व समता नगर पुलिस थाने के अंतर्गत लगभग 40 से 45 लॉटरी सेंटर चलाए जा रहे हैं। चारकोप पुलिस थाना अंतर्गत कुछ दिनों पहले मुंबई पुलिस की समाज सेवा शाखा ने प्रतिबंधित लॉटरी के कारोबार पर कार्यवाही की थी अब कुछ दिनों बाद यहां पर फिर से चोरी चुपके लॉटरी का गोरख धंधा चालू कर दिया गया है।

    जबकि कांदिवली पुलिस थाने अंतर्गत लगभग 10 से 12 लॉटरी सेंटर चलाए जा रहे हैं। गोरेगांव पूर्व एसवी रोड पर तो खुले आम लॉटरी का धंधा चलाया जा रहा है यहां सबसे ज्यादा लॉटरी सेंटर चलाने का मामला सामने आया है। मुंबई के अंधेरी से लेकर दहिसर तक के बीच कुकुरमुत्ते की तरह अवैध लॉटरी का सेंटर खोलकर सरकार को हर 15 मिनट के भीतर करोड़ों का चुना लगाया जा रहा है। मुलुंड परिसर में जब पता करने की कोशिश की तो वहां बाहर राजश्री लॉटरी का बोर्ड लगा मिला और अंदर लकी कूपन लॉटरी का साफ्टवेयर लगाया गया है, जो राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त राजश्री लॉटरी की नकल है। ऐसा देखने को मिला है कि 2016 में जीएसटी लागू होने के बाद कई लॉटरी कंपनियों में ताले लग गए थे। राजश्री लॉटरी भी उन्ही में शामिल रही है।

    मुंबई के उपनगरों में विशेष कर अंधेरी से दहिसर तक के सभी उपनगरों में बोगस ऑनलाइन लॉटरी जो राज्य द्वारा संचालित लॉटरी की नकल कर के अन्य नामों से चलाई जा रही है। सरकारी नियमों के अनुसार ऑनलाइन लॉटरी पर 28% जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है। किंतु इस अवैध कारोबार पर ना तो जीएसटी का भुगतान किया जाता है और ना ही सरकारी अनुमति ली जाती हैं। सरकारी खजाने में सेंध लगाने का काम ऑनलाइन लॉटरी से हो रहा है। अवैध ऑनलाइन लॉटरी पर एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जाता है। ऑपरेटिंग के लिए इंजीनियर को हर महीने तनख्वाह दी जाती है। अवैध सॉफ्टवेयर के हर शख्स को फ्रेंचाइजी दी जाती है। यह पूरा मामला टैक्स चोरी का है। ऐसे अवैध सॉफ्टवेयर पर ना तो साइबर की नजर पड़ती है ना ही जीएसटी अधिकारियों को कोई पता चल पाता है।यह भी बताया जाता है कि लॉटरी को रोजाना हजारों लोग खेलते हैं। यही कारण है, कि इसमें लगने वाला पैसा भी लाखों में होता है। इसी बात का फायदा उठाकर फर्जी लॉटरी एप्लीकेशन के माध्यम से गरीब जनता को अमीर बनने का झांसा देकर लाखों रुपए की हेराफेरी की जाती है। इस लॉटरी में 15 मिनट के भीतर विजेता के नाम की घोषणा हो जाती है और राज्य या केंद्र सरकार को कोई कर अदा नहीं किया जाता है। इस गैर कानूनी तरीके से चल रहे इस पूरे व्यवसाय में पैसे का जो लेनदेन कैश में किया जाता है। जिससे काली कमाई का हिसाब सरकार को नहीं देना पड़ता है।ध्यान देने योग्य है, कि साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि राजश्री कंपनी महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी से अपना लॉटरी बेचने का काम कर रही थी। वह फिलहाल बंद है। राजश्री लॉटरी बंद होने के बाद उसके डिस्ट्रीब्यूटरों ने मिलकर अपने कई ऐसी दुकानों की शुरुआत की है। सभी ने एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है जिसके द्वारा लाॅटरी माफिया कुछ भी धोखाधड़ी कर सकते हैं।

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    लोगों का कहना है, कि ऐसे मामले पर पुलिस ही नहीं बल्कि जीएसटी के इंटेलिजेंस विंग को भी जांच करनी चाहिए।। जहां-जहां ऐसे सॉफ्टवेयर के नाम का यूज कर लॉटरी का कारोबार किया जा रहा है ऐसे जगहों पर उन्हें काफी सारा डाटा मिल सकता है। उनके सर्वर पर कितने टिकट का लेनदेन हुआ है और कितने का उन्होंने अब तक व्यापार किया है।इसकी पूरी जानकारी इनके साफ्टवेयर पर उपलब्ध होगी। गैंबलिंग एक्ट, फोर्जरी, 420, और जीएसटी के विभिन्न धाराओं के तहत हो सकती है कार्रवाई। किंतु राज्य सरकार इन लाॅटरी माफियाओं के विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नही कर पा रही है? इसकी चर्चा पूरे मुंबई में चर्चा का विषय बनी हुई है ।

  • अवैध निर्माण में संलिप्त पूरा पी/ दक्षिण वार्ड

    अवैध निर्माण में संलिप्त पूरा पी/ दक्षिण वार्ड

    • आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।
    • मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल।
    • नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    गोरेगांव पी/ दक्षिण वार्ड को सर्वाधिक भ्रष्टाचारी होने का तमगा दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इस वार्ड के सभी आला अफसर भ्रष्टाचार के पंक में पूरी तरह डूबे हैं। इन्हें किसी भी तरह का भय नहीं। चाहे जितना न्यूज लिखे, आरटीआई डाली जाए। इनकी कानों में जूं नहीं रेंगती।

    फरियाद तो सुने मनपा आयुक्त ..

    खुद ही बांधकाम कराते हैं। तोड़ने की नोटिस भेजते हैं और फिर नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण कर्ता से लाखों रुपए वसूलकर उसे स्टे आर्डर लेने की सलाह देते हैं और कोर्ट में बीएमसी विधि विभाग के अधिकारी वकील मौन साध लेता है। स्टे के खिलाफ नहीं बोलता, जिससे तुरंत ही गैरकानूनी बांधकम करने वाले को कोर्ट से स्टे मिल जाता है।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/07/statements-of-more-than-100-people-were-recorded-jaipur-mumbai-train-firing-news-rpf-had-expressed-his-desire-to-deboard-the-train-at-valsad-called-even-after-the-incident
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    नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।

    ताजा मामला गोरेगांव (पूर्व) शौर्य कंपाउंड, नियर बंजारा पाड़ा, इन बिटवीन शेटेलाइट गार्डन फेस -।।, अरुण कुमार वैद्य मार्ग, का है।जहां गैरकानूनी ढंग से 6000 चौरस फूट के जी + १ (दो मंजिला) के व्यापारिक गाले का निर्माण बना लिया जिसकी एवज में कथित रूप से लाखों की रिश्वत दी गई। जिससे वार्ड ऑफिसर(प्रभारी) राजेश आक्रे, उपायुक्त विश्वास शंकरवार ने आपस में बांट लिया। दिखाने के लिए 354 (ए) की नोटिस दे दिया। बता दे कि मनपा अधिनियम 1888 के तहत 354 (ए) कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर तोड़क कार्रवाई जरूरी है। लेकिन अवैध व्यापारिक गाले का बांधकाम जी+१ (दो मंजिला) कुल 6000 वर्गफुट का गैरकानूनी निर्माण करने वाले ठेकेदार आशिफ फतेह मोहम्मद खान को तुरंत कोर्ट से स्टे लेने की मौखिक सलाह दी ताकि तोड़क कार्रवाई न करनी पड़े।

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    सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे यानी तोड़क कार्रवाई न होने से गैरकानूनी निर्माण बच जाए।
    मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल से हमारी मांग है की पी/ दक्षिण वार्ड के सभी बड़े अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर कर इनके भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।

  • पी/दक्षिण में चल रहे अवैध 3 स्टूडियोज, प्रतिमाह 2 करोड़ 70 लाख राजस्व की चोरी

    पी/दक्षिण में चल रहे अवैध 3 स्टूडियोज, प्रतिमाह 2 करोड़ 70 लाख राजस्व की चोरी

    • आयुक्त के आदेश के बावजूद पी/दक्षिण के अधिकारियों द्वारा स्टूडियोज को नही हटाकर दे रहे हैं अर्हपूर्ण संरक्षण।
    • रिश्वत की ताल पर नाच रहा, मनपा का पी/दक्षिण विभाग।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    बॉलीवुड फिल्मों व सीरियलों की शूटिंग हेतु बृहन्मुंबई महानगर पालिका के पी/दक्षिण वार्ड के कार्यक्षेत्र में बनाए गए अस्थाई स्टूडियो के मालिकों ने मनपा द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत भी पी/ दक्षिण वार्ड के जिम्मेदार अधिकारियों से अर्थपूर्ण सेटिंग कर निःसंकोच चलाए जा रहे हैं। जबकि मनपा ने उन्हें तत्काल हटाने की नोटिस महीनो पहले जारी कर दी थी। मगर मनपा अधिकारियों की आदत के अनुसार उक्त तीन स्टूडियोज को अर्थपूर्ण संरक्षण देकर न ही तोड़क कार्रवाई की गई है और ना ही स्टूडियो मालिकों के विरुद्ध भूमि पर अतिक्रमण करने का अपराध मनपा प्रशासन द्वारा कराया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) आरे कॉलोनी, रॉयल पॉम हॉटल के पास रूबी बिल्डिंग के पीछे स्थित मनपा द्वारा शूटिंग के लिए तीन स्टूडियो बनाने की अस्थायी परमिशन ली गई थी, जो काफी पहले ही मनपा आयुक्त द्वारा रद्द कर दी गई थी। तीनों में प्रत्येक स्टूडियो 20, हजार वर्गफिट क्षेत्र पर बनाया गया है। प्रत्येक स्टूडियो का मासिक भाड़ा 90 लाख रुपए है, जिसे परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत अब निजी तौर पर मनपा के अधिकारियों द्वारा वसूला जाता है, जो मनपा के कोष में नहीं जाता है। ऐसा मनपा सूत्रों ने बताया है।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/12/for-canceling-the-contract-without-paying-global-music-pvt-ltd-kidnapping-of-ceo-rajkumar-singh
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    रिश्वत, मनपा,
    मनपा पी/दक्षिण विभाग के भ्रष्टाचार की तस्वीर

    रिश्वत का खेल क्या कहता है?

    उक्त संबंध में मनपा के सहाय्यक आयुक्त राजेश आक्रे, परिमंडल -4 के उपायुक्त (डीएमसी) विश्वास शंकरवार पत्रकारों व शिकायत कर्ताओं को बताने या लिखित जवाब देने में टालमटोल करते हैं। इसकी शिकायत एक शिकायत कर्ता द्वारा दिनांक:13/06/2023 को किए जाने के बाद मनपा पी/दक्षिण के सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहाय्यक अभियंता ने एक पत्रक क्र.सआ पीद/ बी -53/7855 के माध्यम से शिकायतकर्ता को बतलाया है, कि आयुक्त के आदेश के साथ ही साथ दो स्टूडियो के मालिकों ने अदालत से स्टे – ऑर्डर ले लिया है।

    बताया जा रहा है, कि मनपा प्रशासन द्वारा मनपा के विधि विभाग को स्टे-ऑर्डर शीघ्र हटवाने का आदेश दिया था। किंतु विधि विभाग (legal department) की कार्रवाई का कोई भी ले आउट नही आया है। यह भी बताया गया है, कि स्टूडियो की परमिशन रद्द किए जाने के बाद से ही स्टूडियो का भाड़ा आधिकारिक तौर पर नही वसूला जाता हैं। यानि कि 90 लाख × 3 = 2,70,00,000 (दो करोड़ 70 लाख मात्र) का भाड़ा, क्या मनपा के कोष में जमा किया जा रहा है? या मनपा के प्रशासनिक अधिकारियों की जेब में पहुंच रहा है? यह सवाल सर्व जागरूक नागरिकों का है। जिसका जवाब देने में मनपा अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं।

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    जबकि आयुक्त द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत सभी स्टूडियोज को हटवा देना या डिमोलिशन कर देना चाहिए था। दो स्टूडियोज का स्टे – ऑर्डर जनहित के परिप्रेक्ष्य में निश्चित ही, मा. न्यायालय द्वारा हटा दिया गया होता, यदि मनपा प्रशासन विधिवत अपना पक्ष प्रस्तुत किया होता? किंतु मनपा पी/दक्षिण के अधिकारियों को तो प्रतिमाह 4 करोड़ 50 लाख की मलाई चाभनी थी ! शिकायत कर्ताओं ने भी स्टूडियो और मालिको व भ्रष्ट मनपा अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय जाने का मन बनाया है।

  • उड़ रही है आपके आदेश की धज्जियां…..हो रहें हैं धड़ल्ले से अवैध निर्माण। रोकिये।

    उड़ रही है आपके आदेश की धज्जियां…..हो रहें हैं धड़ल्ले से अवैध निर्माण। रोकिये।

    • आर/दक्षिण विभाग के सक्षम अधिकारी है भ्रष्टाचार में लिप्त।
    • कर रहें हैं मोटी कमाई…
    • अवैध निर्माण को दे रहें हैं संरक्षण..
    • उड़ रही मुख्यमंत्री के आदेशों की धज्जियां..

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    महाराष्ट्र सरकार के मुखिया ने आदेश दिया है, कि मुंबई में अब और अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए। झोपड़ों की भरमार से जीवनोपयोगी सुविधाओं से मुंबईकर वंचित होते हैं। किंतु कौन सुनता – मानता है मुख्यमंत्री का आदेश?
    भ्रष्ट मनपा अधिकारी दौलत कमाने के लिए अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे है और उसके बदले हो रही लाखों रुपयों की वसूली। जी हां!आइए चन्द गैरकानूनी बांधकाम का जायजा लेते हैं।

    हम कांदिवली (पूर्व) आकुर्ली रोड़ स्थित गोविंद सेठ चाल, जूना खदान, अटल बिहारी वाजपेई हॉल के पास, वडार पाड़ा रोड क्रमांक -१, वार्ड क्रमांक २९, में विगत कई वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड (open plot) पर ४ रूम का अवैध बांधकाम हो रहा है। बताया जा रहा है, कि उक्त अवैध बांधकाम को दो बार तोड़ा जा चुका है। किसी तरह की घाही नहीं दिख पड़ती आश्वस्त से लग रहें मजदूर मिस्त्री और भूमाफिया। उसने बताया कि लाखों रुपए गैरकानूनी बांधकाम करने की एवज में आर/दक्षिण वार्ड को वे दे चुके हैं।

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    भ्रष्ट अधिकारियों की फाइल तस्वीर

    दुसरा है कांदिवली (पश्चिम) देवबाई चाल, कांदिवली गांवठान, कांदिवली गांवठन रोड स्थित रिक्त भूखंड (open plot) पर ५ मकान के आवासीय परिसर का गैरकानूनी निर्माण कार्य बिना किसी वैध अनुमति के इमारत विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से किया जा रहा है। स्थानीय जनता की माने तो सहाय्यक अभियंता प्रमोद ब्राम्हणकर स्वंय इस गैरकानूनी बांधकाम को पहले होने दिया। अब ऐसे में ५ (पांच) मकान के आवासीय परिसर का जमीनी सतह से पूर्ण हो चुके बांधकाम को दिनांक: 24/05/2023 को 354(A) की नोटिस जारी कर अभियंता ने स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त होने का अपना परिचय दिया है।

    नोटिस देकर तीन महीने हो गए हैं, लेकिन कार्रवाई जीरो! जरा रुको गैरकानूनी बांधकाम का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 354(A) की नोटिस के तुरंत बाद ही ठीक उसी बांधकाम को ग्राउंड +1 (दो मंजिला) के शक्ल में गैरकानूनी निर्माण कार्य को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। ताकि नोटिस धारक उक्त नोटिस के आधार पर बकायदा कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने में सफल हो सके और वह बड़ी आसानी से कोर्ट का स्टे ऑर्डर ला सके। यहां भी वही कहानी दोहराई गई।

    तीसरा है कांदिवली (पश्चिम) ईरानी वाड़ी,रोड नंबर – ४, नियर शिवशंभु मंदिर स्थित रामनारायण पांडे चाल में रिक्त भूखंड (open plot) पर 200 वर्गफिट के अंतर्गत एक व्यापारिक गाले का गैर कानूनी तरीके से निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस गैरकानूनी बांधकाम का ठेकेदार है अजय पांडे। जिसके चेहरे पर जंग जीतने की खुशी झलक रही है।
    सहाय्यक अभियंता ने बताया कि परिमंडल -७ की उपायुक्त, भाग्यश्री कापसे बेहद प्रभावशाली महिला अधिकारी है। जिनका संबंध राज्य के नेताओं से है। उनका संरक्षण भी। यह भी ज्ञात हुआ कि अपने पद और पॉवर का नाजायज फायदा उठाते हुए मैडम ने सहाय्यक आयुक्त ललित तलेकर, डीओ अभय जगताप पर दबाव बनाकर गैरकानूनी बांधकाम कराती और संरक्षण देती हैं। लाखों में खेलती है।

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    मुख्यमंत्री,
    कांदिवली के अवैध निर्माण की तस्वीर

    राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अपील ..

    इस काले कारोबार में सहाय्यक आयुक्त और डीओ लिप्त है। ये दोनो भी भ्रष्टाचार के माध्यम से खुद भी मालामाल हो रहे हैं।
    अब ऐसे में ठेकेदार और अवैध निर्माण कर्ता, भूमाफिया मूंछों पर ताव देते हुए कहता है, कि यहां का वार्ड और नेता उसके साथ है कोई कितनी भी कंप्लेंन करें! मेरा कुछ भी नही उखड़ेगा।
    वाह मानना होगा गैरकानूनी बांधकाम करने वाले ठेकेदार और भूमाफिया की हेकड़ी को जिसके सामने आर/दक्षिण, वार्ड के जिम्मेदार अधिकारी या तो विवश है या उनकी जेबें गर्म हो चुकी हैं।
    राज्य के मुखिया से हमारी मांग है कि निष्पक्ष पारदर्शी जांच पूरे मुंबई शहर में कराएं। अवैध बांधकाम की सूची बनवाएं। अवैध निर्माण तोड़ने, उसका वीडियो बनवाकर शिकायत कर्ताओं को भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें। साथ ही भूमाफियाओं और ठेकेदारों को कानूनी ढंग से दंडित करने की पहल करें।

  • कल्याण पोलिस बदतमीजी में अव्वल | Indian fasttrack news

    कल्याण पोलिस बदतमीजी में अव्वल | Indian fasttrack news

    वी बी माणिक
    कल्याण
    – पिछले वर्ष नवंबर 2022 में मध्यरेल के सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ का एक फर्जी लोकोपायलट उमाशंकर बर्मा उर्फ नटवरलाल को कोलसे वाड़ी पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और अन्य धाराओं के तहत गिफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस केस की जाँच उपनिरीक्षक सचिन सालवी को दिया गया था। (Indian fasttrack)

    इस केस के सिलसिले में आपको जानकारी देते हुए बता दें कि सालवी ने नटवरलाल से मिलकर केस को पूरी तरह बिगाड़ दिया और चार्जशीट भी 60 दिनों में कोर्ट में नही डाला। जिसके कारण नटवरलाल को कोर्ट से डिफॉल्ट जामिन मिल गया। उसके बाद नटवरलाल का आतंक फिर से बढ़ गया और नटवरलाल के विरुद्ध कुर्ला में शिकायत भी दर्ज हो गयी। वही दूसरी ओर कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक देशमुख ने इसकी रिपोर्ट डीसीपी सचिन गुंजाल से कर दिया।

    Indian fasttrack

    https://indian-fasttrack.com/2023/05/24/the-terror-of-thug-natwarlal-who-got-job-in-railway-increased-again
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    पुलिस उपायुक्त सचिन गुंजाल ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक सालवी को वहाँ से हटाकर कंट्रोल रूम में तबादला कर दिया। आपको यह भी बता दें कि उपनिरीक्षक सचिन सालवी को बात करने की तमीज नही है। अपराध को खत्म करने के बजाय आरोपियों को बचाने का काम करता है। आरोपियों के जरिए आम नागरिकों को अपने नाम से धमकी भी दिलवाता है। कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में इसकी काफी शिकायत है।
                    फोन करने पर कल अधिकारी फोन ही नही उठाते ये बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। अब लोग ठग नटवरलाल से निजात पाने के लिए पुलिस पर भरोसा किया। लेकिन आम नागरिकों के भरोसे पर पानी फिर गया। क्योंकि सचिन सालवी जैसे भ्र्ष्ट ऑफिसर के हाथ मे ये केस चला गया।

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  • बिना पैसा दिए करार रद्द कराने के लिए ग्लोबल म्यूजिक प्रा. लि. के सीईओ राजकुमार सिंह का अपहरण

    बिना पैसा दिए करार रद्द कराने के लिए ग्लोबल म्यूजिक प्रा. लि. के सीईओ राजकुमार सिंह का अपहरण

    • शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी ..
    • स्टैंप पेपर पर दस्तखत कराकर जानलेवा धमकी देकर छोड़ा विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे ने।
    • ली थी मनोज मिश्रा से अपहरण की सुपारी।

    इस्माइल शेख
    मुंबई-
    नेता हो या अभिनेता, सबको आवश्यक है। किंतु यदि वे अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए, अपनी संतानों को अच्छे संस्कार नहीं देते हैं तो उनकी संताने शॉर्ट कट का रास्ता अपनाकर असामाजिक व अनैतिक कार्य करने लगती है। ऐसा ही एक मामला विधायक प्रकाश सुर्वे के साथ भी घटित हुआ है, जहां उनके बेटे राज सुर्वे, उसके साथी विक्की शेट्टी सुपारी देने वाले मनोज मिश्रा व उनके 10,12 अज्ञात गुंडे टाइप साथियों के विरुद्ध म्यूजिक कंपनी के मालिक राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस थाने में प्राथमिकी नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

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    पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) में चिंतामणि क्लासिक बिल्डिंग इको हाउस के पास, विश्वेश्वर नगर रोड़ के फ्लैट नंबर 302, 303, 403 तीसरा व चौथे मजले पर’ ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन प्रा. लि. नाम की कंपनी का कार्यालय है। वहीं आरोपी मनोज मिश्रा (30) वर्ष वाय – 503, एग्जीबिशन रोड़, गन अपार्टमेंट चौक के समीप ही पटना, बिहार की भी आदिशक्ति प्रा. लि. नाम की म्यूजिक कंपनी है। मनोज मिश्रा ने उसके 1.5 करोड़ फॉलोअर्स बताया है। उसे पैसे की आवश्यकता थी अपनी आदिशक्ति कंपनी को बढ़ाने के लिए, इसलिए उसने ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन के सीईओ राजकुमार सिंह से अपनी कंपनी ‘ आदिशक्ति प्रा. लि. डिजिटल लाइसेंस पर वर्ष 2019 में ओटीटी प्लेटफार्म के संबंध में आवश्यक करार पत्र लेकर राजकुमार सिंह ने एक वर्ष का ही करार किया था।

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    विधायक प्रकाश सुर्वे की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ फाइल तस्वीर

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    किंतु कंपनी का व्यवहार अच्छा रहा। इसी कारण वर्ष – 2021 में मनोज मिश्रा ने यूट्यूब चैनल के लिए 8 करोड़ रुपए एडवांस में लिया और 5 वर्ष का करारनामा लिखा, जिसका लॉकिंग पीरियड 3 वर्ष का था। यह करारनामा वर्ष – 2026 में अपने पांच वर्ष पूर्ण करता। चैनल डेवलपमेंट के लिए मनोज मिश्रा ने कंटेंट न बनाकर उक्त पैसे को अन्यत्र खर्च किया, जिससे राजकुमार सिंह को मिलने वाले नियमित लाभ में कमी आने लगी। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

    शिकायत के मुताबिक यूट्यूब चैनल का कंटेंट बनाने के लिए मनोज मिश्रा ने और पैसे की मांग की, जिसे राजकुमार सिंह ने इनकार कर दिया। किंतु मनोज मिश्रा ने वर्ष -2022 से करारनामा रद्द करने के लिए राजकुमार सिंह पर दबाव डालने लगा। राजकुमार सिंह ने समझौते के लिए उससे कहा कि वह उसे जून व जुलाई 2023, में एक करोड़ रुपए उसकी कंपनी के बैंक खाते में दे चुका है। वह उसका पैसा वापस करके करार रद्द कर सकता है।किंतु मनोज मिश्रा ने ऐसा न करते हुए, पद्माकर, राज सुर्वे को करार रद्द कराने की सुपारी दे दी। दिनांक – 09/08/2023 को 10 – 15 लोग राजकुमार सिंह के कार्यालय में आए और उसे विधायक प्रकाश सुर्वे के कार्यालय में ले गए, फिर कुछ दूर स्थित एक अन्य बिल्डिंग में ले गए, जहां उसके मोबाइल पर वनराई पुलिस का फोन आया, किंतु अपहरण कर्ताओं के दबाव के कारण राजकुमार सिंह ने पुलिस को जवाब नहीं दे पाया। फिर अपहरण कर्ताओं ने राजकुमार सिंह को दहिसर स्थित एक कार्यालय में लाया गया। जहां पद्माकर, राज सुर्वे पहले से ही मौजूद था। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

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    उसने जानलेवा धमकियां दी। उसके साथी विकी शेट्टी ने मनोज मिश्रा द्वारा लाए गए 100 / – के स्टैंप पेपर पर राजकुमार सिंह से जबरन करारनामा रद्द करने के लिए दस्तखत कराया और राजकुमार सिंह को जानलेवा धमकियां देते हुए, पुलिस में न जाने की ताकीद कर छोड़ दिया। फिर राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस स्टेशन जाकर मनोज मिश्रा, पद्माकर, राज सुर्वे, विकी शेट्टी व 10,12 अज्ञात लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुंबई एयरपोर्ट से फरार होने की कोशिश कर रहे मनोज मिश्रा व उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब देखना यह है कि पुलिस विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे को भी गिरफ्तार करती है या नहीं? (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

  • निरीक्षक ए के पांडेय को मिली टिटवाला में नियुक्ति

    निरीक्षक ए के पांडेय को मिली टिटवाला में नियुक्ति

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    मध्यरेल के टिटवाला स्टेशन पर रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक अरुण कुमार पांडेय ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया कई वर्षों से पांडेय जी ट्रेनिंग सेंटर नाशिक और इसके पूर्व विजिलेंस विभाग में अपना सिक्का जमा रखा था। अपने अच्छे कार्यो के कारण विजिलेंस विभाग में बड़े बड़े दलालो को दबोचा है। इसके अलावा आरपीएफ के कई थानों पर कार्य किया है। (Indian Railway)

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    Indian Railway..

    व्यक्तित्व के धनी व्यवहार कुशल और कफ़न में दबंग है। इसके पूर्व टिटवाला थाने पर नियुक्त निरीक्षक श्रीमती ए बाबर ने बड़े बड़े अपराधियो और तस्करों के नाक में नकेल डाल दिया था। बाबर के डर से तस्करों के पसीने छूट जाते थे। इसी को देखते हुए प्रशासन ने श्रीमती बाबर को पनवेल का चार्ज सौप दिया है। बाबर के चार्ज लेते ही पनवेल के पूरे आरपीएफ स्टाफ में खलबली मच गई है। पनवेल में हॉकरों दलालो और तस्करों मे पनवेल से भागने की तैयारी धुर हो गयी है। (Indian Railway)

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  • RPF गिरफ्तारी के मामले में पुलिस ने किया नया खुलासा

    RPF गिरफ्तारी के मामले में पुलिस ने किया नया खुलासा

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    • 100 से अधिक लोगों के हुए बयान दर्ज।
    • Jaipur Mumbai Train Firing news RPF
    • वलसाड में ट्रेन से उतरने की इच्छा जाहिर की थी।
    • घटना के बाद भी किया था कॉल..

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में चार लोगों की गोली मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने नया खुलासा किया है। पुलिस ने कहा, जांच से पता चला है कि मामले में गिरफ्तार आरोपी RPF कांस्टेबल चेतन सिंह ने अपराध के बाद अपनी पत्नी से फोन पर बात किया। उसने अपनी पत्नी से फोन पर कहा था कि अब उसे अपने बच्चों का पालन-पोषण खुद करना होगा। (Jaipur Mumbai Train Firing news)

    खबर के मुताबिक, शनिवार को चेतन की पत्नी रेनू और उसकी मां मथुरा से मुंबई आईं और बोरीवली जीआरपी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। रेनू ने चेतन के पिछले चिकित्सा उपचारों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए, इसमें मथुरा के एक न्यूरोलॉजिकल अस्पताल की रिपोर्ट भी शामिल थी। पुलिस दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करेगी और रिपोर्ट के बिंदुओं पर सरकारी डॉक्टरों से चेतन की जांच भी करा सकती है। (Jaipur Mumbai Train Firing news)

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    हत्या के आरोपी आरपीएफ जवान चेतन बच्चू सिंह की तस्वीर

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    31 जुलाई की शुरुआत में चेतन ने अपने वरिष्ठ एएसआई टीकाराम मीणा को अस्वस्थ महसूस करने और वलसाड में ट्रेन से उतरने की इच्छा जाहिर की। लेकिन ट्रेन को वहां रोका नहीं जा सकता था। इसलिए टीकाराम मीणा ने सुझाव दिया था कि वह ट्रेन में आराम करें। चेतन ने रेनू को फोन करके बताया था कि अस्वस्थ महसूस करने के बावजूद उसे ट्रेन से उतरने नहीं दिया जा रहा है। फोन पर उनकी अगली बातचीत के दौरान उसने बेहतर महसूस करने की बात भी कही थी। (Jaipur Mumbai Train Firing news)

    घटना के बाद भी किया था कॉल..

    मीरा रोड पर ट्रेन से उतरने के बाद उसने उसे आखिरी बार कॉल किया था। इस बार उसने रेनू से कहा कि अब उनके बच्चों की परवरिश करना अब अकेले उसी की जिम्मेदारी है। पुलिस ने बताया कि चेतन से शुक्रवार को सात घंटे तक पूछताछ की गई। रेनू से भी काफी देर तक पूछताछ की गई। उसने पुलिस को बताया कि चेतन कुछ साल पहले एक सीढ़ी से गिर गया था, जिसके बाद उसे न्यूरोलॉजिकल संबंधी समस्याएं हो गईं और इलाज के लिए उसे मथुरा में विभिन्न डॉक्टरों के पास ले जाया गया। (Jaipur Mumbai Train Firing news)

    पुलिस ने गोलीबारी के प्रमुख गवाहों सहित, 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं। कुछ गवाह दूसरे राज्यों में रहते हैं और उन्होंने ईमेल पर बयान दर्ज कराए हैं। चेतन अब तक कई बार अपने ही बयानों से पलट चुका है। मिली जानकारी के मुताबिक, चेतन को सोमवार सवेरे बोरीवली में एक मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पेश किया जाएगा। इस दौरान जीआरपी पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है। (Jaipur Mumbai Train Firing news)

  • बसों में यात्री कब होंगे सुरक्षित | Mumbai BEST Strike

    बसों में यात्री कब होंगे सुरक्षित | Mumbai BEST Strike

    Mumbai BEST Strike : बसों की हड़ताल को लेकर मुंबईकर काफी परेशान हो गए हैं। प्राइवेट कर्मियों की हड़ताल ने मुंबई के कामकाज को प्रभावित कर दिया है।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    प्राइवेट बस कर्मियों द्वारा हड़ताल पर जाने से मुंबई करों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के मुताबिक, मुंबई (Mumbai) में बेस्ट (BEST) की प्राइवेट बस ड्राइवरों की मांग है, कि उनको भी परमानेंट नौकरी दी जाय। जैसे बेस्ट के ड्राइवर और कंडक्टरो के वेतन के बराबर इनको भी वेतन और सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए। पर निजी कंपनियों द्वारा बेस्ट प्रशासन के साथ पहले से ही एग्रीमेंट हो चुका है, कि इनको बेस्ट विभाग में नही लिया जाएगा। तो फिर ये प्राइवेट कर्मी मुंबई में जगह-जगह तोड़फोड़ और बेस्ट बसों के ड्राइवरों के साथ मारपिट, गाली गलौज कैसे कर सकते हैं?

    Mumbai BEST Strike हड़ताल..

    हड़ताल (Strike) से मुंबईकर परेशान है, क्योंकि इनको यात्रा करने के लिए बसे नही मिल रही है। एसी बसें रूटों पर नही चल रही है। यहां तक कि डिपो से बसे बाहर नही निकल रही है। इस पर बेस्ट प्रशासन ने पुलिस में शिकायत भी किया है। फिर भी पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। मालवणी पुलिस ने दिखावे के लिए केवल दो पुलिस की गाड़ी सुरक्षा के लिए दिया है। पर कार्रवाई के लिए नही।

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    कांदिवली स्टेशन स्थित BEST बस की तस्वीर

    बृहन्मुंबई (Mumbai) विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST)  से संबंधित निजी बस चालकों का रविवार को पांचवें दिन भी हड़ताल (Strike) जारी रहा। इसमें परिचालकों की कमी के कारण लगभग 704 बसें सड़कों से नदारद रहीं। हड़ताल के कारण शहर के 18 बस डेपो पर प्रभाव देखा गया जबकि शहर में बेस्ट 27 डिपो से बसों का संचालन करती है। बड़ी शर्मनाक स्थिति पुलिस और नेताओं ने बना रखा है इस पर सारी बेस्ट की सारी यूनियन कान में तेल डालकर सो रही है। क्या राज्य सरकार इस पर जल्दी फरमान देगी या मुंबईकरों को आग में झोंकने के लिए तैयार है। आपको जानकारी देते हुए बता दे कि ये पूरा विभाग मनपा (BMC) के अंतर्गत ही आता है।

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