Category: Mumbai News

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  • आरपीएफ की खुली गुंडागर्दी प्लेटफार्म बना अखाड़ा

    आरपीएफ की खुली गुंडागर्दी प्लेटफार्म बना अखाड़ा

    कल्याण रेलवे स्टेशन इन दिनों गुंडागर्दी का अखाड़ा बन गया है। यहां RPF के कर्मचारी भी सुरक्षा के मद्देनजर निष्क्रिय साबित हो रहे हैं।

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – मध्यरेल के कल्याण रेलवे स्टेशन बन गया अखाड़ा। यहां जनरल यात्री पैंट्रीकार में घुसने के लिए कर्मचारियों से गाली-गलौज और मार पीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं और आरपीएफ जब नज़र आई तो वो भी पैंट्रीकार के कर्मचारियों पर ही अपना बल का प्रयोग करते हुए दिखाई दिए। ऐसे में पैंट्रीकार में यात्रा के लिए महंगे दाम देकर प्रतिक्षा के साथ सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    क्या है मामला?

    छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से लखनऊ जाने वाली 12534 पुष्पक एक्सप्रेस गाड़ी जब कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 4 पर आई, तो लखनऊ की ओर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ थी और यहां सुरक्षा के नाम पर केवल आरपीएफ दिखाई पड़ी। लेकिन पैंट्रीकार पर एक भी जवान नही दिखाई पड़ा। जिसमे जनरल टिकट के यात्री भारी संख्या में पैंट्रीकार में घुसने लगे। तभी पैंट्रीकार के कर्मचारी ने अंदर आने के लिए मना किया। इस पर यात्रीयो ने विरोध किया और पैंट्रीकार वालो को गाली गलौज देते हुए मारपीट पर उतारू हो गए तभी पैंट्रीकार वालो ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

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    RPF,
    कल्याण रेलवे स्टेशन पर मार पीट की तस्वीर
    कल्याण रेलवे स्टेशन पर मार पीट की तस्वीर

    RPF की गुंडागर्दी..

    इसके बाद भी यात्री गाली दे रहे थे। इस वजह से पैंट्रीकार के स्टाफ ने दरवाजा खोला और वो भी गली देने लगे तभी यात्रियों ने मारपीट शुरू कर दिया। इसके बाद तो प्लेटफार्म पूरी तरह अखाड़ा बन गया तब भी कोई आरपीएफ नही आया। कुछ देर के बाद आरपीएफ  और एमएसएफ के जवान आ गए और पैंट्रीकार के स्टाफ को मारने लगे। इसको देखकर यात्री और उग्र हो गए। उन लोगों ने भी आरपीएफ के साथ मिलकर मारपीट में सहयोग दिया।

    इतना अत्यचार आरपीएफ का बढ़ गया है, कि जब यात्री मारपीट कर रहे थे तो उन यात्रियों पर कार्रवाई क्यो नही किया गया? उन पर केस क्यो नही बनाया? सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि कल्याण में तैनात चेकिंग स्टाफ, टीसी क्या रहे थे? ये केवल रेलवे का रेवेन्यू बढाने में लगे रहते है और जनरल टिकट वालो से पेनाल्टी रसीद बनाकर आरक्षण बोगी में यात्रा करने की छूट दे देते है। कुछ तो वसूली में व्यस्त रहते है। पेनाल्टी रसीद के आधार पर किस नियम के तहत आरक्षण बोगी में यात्रा करने का अधिकार है? यात्रियों की सुरक्षा करने की ताकत इनके पास नही रह गयी है।

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    छठ पूजा के कारण हर वर्ष दीवाली के समय उत्तर भारत की ओर जाने वाली गाड़ियों में भीड़ होती है। इस पर न तो रेल प्रशासन ठीक से ध्यान देता है और न ही रेल विभाग की सुरक्षा व्यवस्था दिखाई पड़ती है। केवल आरपीएफ नारे लगाती है, कि हम ये व्यवस्था कर रहे है हम वो व्यवस्था कर रहे है। आरपीएफ में संख्या बल की भी भारी कमी है। इसके कारण निरीक्षक भी लाचार होते है। पर कल्याण स्टेशन की स्थिति काफी दयनीय है। मध्यरेल के आईजी को इस पर गहन ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा भी बिना सीजन के भी आरपीएफ की व्यवस्था ठीक नही है। आजकल रेल प्रशासन खोखले दावे के अलावा और कुछ नही कर रहा है।

  • यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीएसटी में जीआरपी चौकी का उद्घाटन

    यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीएसटी में जीआरपी चौकी का उद्घाटन

    यात्रियों की सुरक्षा को लेकर मध्यरेल की जीआरपी कटिबद्ध। कहा, किसी भी प्रकार की कोई घटना घटित नही होने देंगे। मुंबई मंडल में पंद्रह चौकिया होगा निर्माण।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    मध्यरेल के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के प्लेटफार्म क्रमांक 18 के ठीक बाहर लौहमार्ग पुलिस की चौकी का पुलिस आयुक्त रविन्द्र शिसवे के कर कमलों द्वारा आज उद्घाटन किया गया।

    मौके पर पुलिस उपायुक्त मनोज नवले पाटील, सहायक आयुक्त सुनील गांवकर, यातायात निरीक्षक विजय खेड़कर, निरीक्षक विजय तायड़े, निरीक्षक अरशद शेख, निरीक्षक प्रदीप सालुंखे, रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक प्रताप भान सिंह अपने दल बल के साथ उपस्थित थे।

    मुंबई,

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    मुंबई मंडल में पंद्रह चौकिया का निर्माण ..

    साथ ही जीपी मीना वरिष्ठ स्टेशन प्रबंधक भी उपस्थित थे सभी पुलिस आधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा के कटिबद्धता दिखाया। कहा कि किसी भी प्रकार की कोई घटना घटित नही होने देंगे इसीलिए इस चौकी का स्थापना किया है। मिली जानकारी के मुताबिक पूरे मुंबई मंडल में पंद्रह चौकिया बनाई जाएगी।

    इसके बाद लोकमान्य तिलक मार्ग रेलवे स्टेशन पर भी चौकी का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसकी जानकारी उपायुक्त पाटील ने मौखिक रूप से दी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, निरीक्षक विजय तायड़े के अथक प्रयासों से इस चौकी का काम किया गया है। इसके साथ ही आरपीएफ ने भी पूरा सहयोग देने का निर्णय लिया है।

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  • RPF और GRP की संयुक्त कार्रवाई, चोर को दबोचा बड़े केस का खुलासा

    RPF और GRP की संयुक्त कार्रवाई, चोर को दबोचा बड़े केस का खुलासा

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    गुरूवार, मध्यरेल की CPDS ‘A’ टीम ने 272 ग्राम सोने की चोरी मामले में अंबरनाथ के 62 वर्षीय रिक्शा चालक एवं आरोपी अख्तर हुसैन मुस्तफा हुसैन शेख को गैवानशाह बाबा दरगाह के सामने, कमलानगर की झुग्गी बस्ती से हिरासत में लेकर जीआरपी के हवाले किया।

    मिली जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के साथ सहायक सुरक्षा आयुक्त मुंबई प्रथम के मार्गदर्शन में गठित सीपीडीएस (CPDS) टीम में कार्यरत सहायक पुलिस निरीक्षक एकनाथ गदाधे और प्रदीप गीते, सतीश पावरा, डी के यादव एडीएम पोस्ट पर एकत्र होकर सीएसएमटी के जीआरपी पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया। जिसकी एफआईआर क्र.926/2023 धारा 379 आईपीसी के अनुसार 03.11.2023 को 00:00 बजे दर्ज की गई थी। दिनांक 08.11.2023 को जीआरपी थाने के डीबी स्टॉफ के साथ समन्वय कर उक्त अपराध की जांच शुरू की CPDS टीम के साथ उपनिरीक्षक अर्जुन सांगले, नाइक/2249 अव्हाड, पोशी/576 भरुद, पोशी/1124 रणवारे, पोशी/1526 चव्हाण द्वारा संयुक्त टीम गठित कर उपरोक्त दर्ज अपराध के तथ्यों को समझाते हुए कहा कि उक्त अपराध के अनुसार, हमें गुप्त मुखबिर के माध्यम से आरोपी के बारे में सूचना मिली।

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    तुरंत टीम के साथ दिनांक 08.11.2023 को 00.41 बजे सरकारी वाहन में मुखबीर को लेकर अंबरनाथ के लिऐ रवाना हुए। बाद में जब हम लोग अंबरनाथ के कमलानगर झुग्गी में पहुंचे तो गैबनशाह दरगाह के नीचे बाई ओर मुखबीर ने एक दरवाजे की ओर इशारा किया। इसके बाद हम लोग घर के अंदर घुसे और उसे कब्जे में ले लिया।’ और जब हमने उसे अपराध के तथ्य बताकर, एक पुलिसकर्मी के रूप में पहचानकर उससे पूछताछ की, तो उसने हमें अस्पष्ट उत्तर दिए। वहीं से उसे हिरासत में ले लिया गया. 08.11.2023 को प्रातः 07.15 बजे। थाने के अमलदार कक्ष में पेश किया गया।

    आप को यह भी बता दें, कि 62 वर्षीय आरोपी ने अब तक अपना आधार कार्ड बनाया ही नहीं है। जब उससे आधार कार्ड के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि उसके पास आधार कार्ड नहीं है। साथ ही दो पंचों की मौजूदगी में उनसे अपराध की सामग्री के बारे में पूछताछ की गई तो उसने कहा कि, 02.11.2023 को मुझे अप सीएसएमटी फास्ट लोकल ट्रेन में एक बैग मिला, जिसके बारे में बताया कि मैंने इसे उठाया लिया। और अपने लाभ के लिए इसे चुरा लिया। आरोपी द्वारा दी गई जानकारी से, उक्त अपराध में उसकी संलिप्तता देखी जा सकती है। तो जीआरपी सीएसटी द्वारा उसे दिनांक 08.11.2023 को 09.00 बजे गिरफ्तार कर लिया है।

    जब तलाशी ली तो पैसे या नोट जैसी कोई भी कीमती चीज़ नहीं मिली। जांच में यह पाया गया कि उक्त अपराध उसके द्वारा किया गया था, इसलिए निम्नलिखित कारणों से सीएसएमटी, जीआरपी में केस रिकॉर्ड संख्या 926/2023 आपराधिक संहिता की धारा 379 के तहत उसे गिरफ्तार किया गया और माननीय रेलवे कोर्ट में पेश करने पर 02 दिन की पुलिस कस्टडी मिली। दिनांक 9/11/2023 को उक्त आरोपी से बुद्धिकौशल्य से अधिक पूछताछ करने पर उसने अपना गुनाह कबूल किया और बताया कि मैंने चोरी की बैग मेरे घर पर रखी है बाद उक्त आरोपी के निवेदन पर संयुक्त टीम उसके अंबरनाथ के घर पर दो पंचों को ले गईं और दो पंचों के समक्ष उक्त बैग का पंचनामा किया गया उक्त बैग में निम्न प्रकार का सामान मिला उसका विवरण निम्न प्रकार से है।

    02 कान की बालियाँ 1.520 ग्राम, 70%,6,500/—- 03 कान के टॉप्स चेन के साथ 02 नग, 2.400 ग्राम, 72%, 10,500/—-

    04 लगड 03 नग, 104.190 ग्राम, 99.9%, 6,34,000/- एशियन गोल्ड बुलियन डीओसी नंबर डीडब्ल्यूएसजीए23004727 और विक्टोरिया गोल्ड एंड डायमंड्स 21652

    05 चेन 01 नग,13.360gm, 91.6%,74,200/-2025

    06 अंगूठी 01 नग, कान के टॉप्स 02 नग, 5.920 ग्राम, 75%, 27,000/-KLY/5381 KLY/4731 07 चूड़ियाँ 02 नग, 26.520 ग्राम, 91.6%, 1,47,000/-1833

    08 चेन 01 नग, 5.350 ग्राम, 75%, 24, 300/-केएलवाई/233/22-23

    कुल 159.760 ग्राम 9,25,800 यानी कुल 272.020 ग्राम 15,16,800 रूपये किमत के विषय वस्तु पर जीआरपी द्वारा दो पंचायतों के समक्ष उक्त पीली धातु की जांच के बाद उक्त आरोपी के साथ सही सलामत अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी के सुपूर्द किया।

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  • मिठाई, मावा, पनीर व दूध में मिलावट है या नहीं, 2 मिनट में करें पहचान, अपनाए ये तरीके

    मिठाई, मावा, पनीर व दूध में मिलावट है या नहीं, 2 मिनट में करें पहचान, अपनाए ये तरीके

    मिलावट खोर मावा की मिठाई, दही, पनीर यहां तक की किराने के आइटमों में भी मिलावट करने से नहीं चूकते है। जिसका उपयोग करने से शरीर पर प्रभाव पड़ता है। मिलावटी पदार्थ से बचने के लिए खाद्य मिश्रण की पहचान के लिए जागरूक होना अति आवश्यक है। आपकी दीपावली शुभ हो ..

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    त्यौहारी सीजन के नजदीक आते ही दूध से बने कई उत्पादों में मिलावट खोर मिलावट करने लगते हैं। जिनकी शिकायत खाद्य विभाग के पास पहुंचती है। मिलावट खोर मावा की मिठाई, दही, पनीर यहां तक की किराने के आइटमों में भी मिलावट करने से नहीं चूकते हैं। जिसका उपयोग करने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मिलावटी पदार्थ से बचने के लिए खाद्य मिश्रण की पहचान के लिए जागरूक होना अति आवश्यक है। ऐसे में हम आपको कुछ तरीके बताएंगे जिन्हे अपना कर आप भी मिलावटी चीजों की स्वंय ही जांच कर सकते है।

    एफडीए (FDA) के एक अधिकारी ने बताया कि त्यौहार आते ही मिलावट खोर सक्रिय हो जाते हैं और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट कर देते हैं। जिससे शरीर को नुकसान होता है। ऐसे में मिठाई, मावा की दूध, दही, पनीर में अगर मिलावट है या नहीं। उसे पहचानने के लिए कुछ आयोडीन या टिंचर आयोडीन की बूंदे डालने पर उसका रंग नीला या बैंगनी हो जाएगा तो आप समझ जाए कि वह मिलावटी वस्तु है, उसे  मत खरीदे। इसके साथ ही, मिठाइयों पर लगाने वाला चांदी का वर्क एल्युमिनियम का फॉयल भी हो सकता है अगर पहचान करनी है तो उसे उंगलियों से मसले फॉयल के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाएंगे तो वह मिलावटी है।

    दीपावली,
    प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

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    दीपावली के शुभ अवसर पर मिठाई की जांच..

    मिठाई खरीदने जाएं तो उसका कलर देखें, मिठाई का कलर ज्यादा गहरा है तो उसे ना ले। खाद्य विभाग के अनुसार फूड सेफ्टी के अंतर्गत अगर कोई भी वस्तु खरीदें तो तीन चीज देखी जाती है जिसका खास तौर से ध्यान रखें। पहले मिठाई को अच्छे से देखकर, दूसरा सूंघकर और तीसरा उसे खाकर उसका पता लगा सकते हैं. कि इसमें मिलावट है या नहीं।

    नकली और मिलावटी मावा..

    मावे की पहचान कैसे करें कि वह असली है या नकली, तो मावे को थोड़ा सा हाथ के उंगलियों पर ले और उसे अपनी उंगलियों पर मसले अगर मावे में चिकनाहट है तो वह सही है। या फिर दूसरा आयोडीन की एक-दो बूंद मावे में डालने पर मावे का बैंगनी कलर हो जाता है तो मावे में मिलावट है तो उसे ना खरीदें।

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    दूध की शुद्धता…

    दूध अगर खरीदना है तो उसे पहले हीलाकर देखें अगर उसमें झाग आ रहे हैं तो ऐसे दूध को भी ना खरीदें। पनीर है उसमें भी टिंचर आयोडीन की एक-दो बूंद डालकर देखें, अगर उसका कलर भी बैंगनी हो जाता है तो उसे भी ना खरीदें उसमें भी मिलावट हो सकती है। इस तरह से बाजार की खाद्य सामग्रियों में मिलावट होने से हम बच सकते हैं।

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  • भुसावल के डीएससी एच श्रीनिवास राव ने दिया इस्तीफा

    भुसावल के डीएससी एच श्रीनिवास राव ने दिया इस्तीफा

    रेल अधिकारी की पत्नी ने जो रौब दिखाया। शर्मसार करने के लिए काफी है। बाकी अधिकारियों को सिखाने लगी शिष्टाचार। पत्नी की हरकत पर हुई कार्रवाई की मांग।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    मध्यरेल के नाशिक ट्रेनिग सेंटर में आयोजित रेल सुरक्षा बल के खेल प्रतियोगिता में फाइनल के दौरान भुसावल मंडल की डीआरएम इति पांडेय को मंच पर पहली लाइन में बैठने के लिए स्थान न मिलने पर मिसेज पांडेय काफी नाराज हो गयीं और डीएससी एच श्रींनिवास राव को अपना रौब दिखाते हुए वहीं पर कड़ी फटकार लगाने लगी। कहा कि तुम को थोड़ा भी अक्कल नही है, कि डीआरएम को कहा बैठाया जाता है और व्यवस्था कैसे की जाती है। इसके साथ ही और भी खरी-खोटी सुनाई जिससे राव नाराज होकर अपना त्यागपत्र दे दिया। 

    रेल अधिकारी की पत्नी की धौंस..

    वैसे भी जून 24 में राव का रिटायरमेंट का समह है। इस कार्यक्रम में मध्यरेल के जीएम नरेश लालवानी और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। मिली जानकारी के अनुसार डीआरएम पांडेय का रिकार्ड पहले से भी ठीक नही है। आजकल भुसावल मंडल के आरपीएफ अधिकारियों की लापरवाही काफी बढ़ गई है। अब उनकी पत्नी का उनके सरकारी कामों में दखलअंदाजी को क्या कहा जाएगा यह सोचने का विषय है।

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    रेल अधिकारी,
    इस्तीफा पत्र

    फिलहाल राव छुट्टी पर चले गए है राव ने मांग किया है, कि जब तक डीआरएम को नही हटाया जाएगा तब तक वो ड्यूटी पर नई आएंगे। अगर ऐसे ही रेल सुरक्षा बल और रेल प्रशासन में पहलवानी चलती रही तो आने वाले दिनों के भविष्य खराब दिखाई दे रहे है। कहा जाता है एक तो पहले से ही आरपीएफ, जीआरपी और रेल अधिकारियों में तालमेल नही है। ये ऐसा लगता है, कि मानो जैसे मजबूरी में नौकरी कर रहे है।

    कितनी भी खबर लग जाये ये सुधरने वाले नही है अब देखना है कि राव क्या करते हैं। बीच बचाव करने के लिए आईजी सादानी और जीएम ने समझौता करवाया तब जाकर डीएससी राव ड्यूटी करने के लिए तैयार हो गए है। पर कोई भी आरपीएफ अधिकारी अपना मुँह खोलने को तैयार नही है, घटना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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  • प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं की शह पर किया जा रहा गैरकानूनी बांधकाम

    प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं की शह पर किया जा रहा गैरकानूनी बांधकाम

    • करोड़ों की हेरा-फेरी न हो तो महानगर पालिका कैसी?
    • आदिवासी के रिक्त भूखंड पर भूमाफियाओं का कब्जा।
    • मीरा-भायंदर आदिवासियों की जमीन की बिना रजिस्ट्री किए ही झोपड़ा धारकों का एग्रीमेंट बनाकर बेची जा रही जमीन।

    सुरेन्द्र राय
    मिरा/भायंदर-
    यहां तो होड़ लगी रहती है, कि कौन सा प्रभाग अधिकारी अपने पाले हुए गुर्गे या स्थानीय भूमाफियाओं के माध्यम से कितनी बड़ी जमीन कब्जा कराकर, उस पर गैरकानूनी तरीके से निर्माण कराकर प्रॉपर्टी बनाता है और वही उच्च अधिकारियों को खिलाता हुआ चमचागिरी करके प्रमोशन पा जाता है।

    मीरा-भायंदर महानगरपालिका का भ्रष्टाचार ..

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे मीरा-भायंदर महानगर पालिका में अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार का खेल बखूबी चलता रहता है। यहां पर अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार के कीर्तिमान बनते और टूटते रहते हैं। लेकिन मजाल क्या है, कि कोई बड़े से बड़ा पालिका अधिकारी उनकी गिरेबां पकड़कर कानून के हवाले करे और सजा दिलाए। क्योंकि बड़े अधिकारियों तक अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार की काली कमाई के कमीशन पहुंचते रहते हैं।

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    वैसे तो मीरा-भायंदर महानगर पालिका के अधिकांश प्रभाग  भ्रष्टाचार में लिप्त है। कहीं प्रभाग अधिकारी अपनी काली कमाई को स्थानीय भूमाफियाओं और ठेकेदारों के साथ मिलकर खपाता है अवैध निर्माण में, तो कहीं प्रभाग अधिकारी के साथ मिलकर प्रभाग अभियंता गैरकानूनी बांधकाम कराते हुए संरक्षण देकर मोटी कमाई करते हुए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करते हैं। वह भी बिना रजिस्ट्री के!
    एक ऐसे ही अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार का मामला मीरा – भायंदर महानगर पालिका, प्रभाग- 6 के अंतर्गत प्रकाश में आया है।

    जहां पर स्थानीय भूमाफिया मंगल गांधी, बाबू म्हात्रे और अवेश कुरेशी द्वारा मीरा रोड(पूर्व)  काशिमीरा स्थित काशिगांव, मीनाक्षी नगर के डचकूल पाड़ा, महाराष्ट्र – ४०११०७ स्थित विगत वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड, आदिवासी की जमीन पर प्रभाग -6 के भ्रष्ट अधिकारियों से साठगांठ कर पतरे के रूम का स्ट्रक्चर निर्माण कर उसे मेहनत कश गरीब जरूरत मंद लोगो को अंधेरे में रखकर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।

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    बता दें, कि जब संवाददाता ने खुद इस मामले की जांच पड़ताल की तो पता चला कि मीरा-भायंदर, महानगरपालिका, प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं ने उक्त भूमाफियाओं से भारी धनराशि लेकर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले प्रभाग -6 में आदिवासी की जमीन पर अवैध ढंग से पतरे रूपी स्ट्रक्चर का निर्माण कराकर गैरकानूनी तरीके से बेचा जा रहा है। फिर उसी पतरे रूपी स्ट्रक्चर को पक्के बांधकाम कराकर लाखों रुपए में बेचकर मालामाल होने की साजिश के तहत भूमाफिया मंगल गांधी, बाबू म्हात्रे और अवेश कुरेशी से मिलीभगत कर प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं द्वारा महानतम भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

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    हालांकि संवाददाता ने उक्त मामले की जानकारी प्रभाग -6 के प्रभाग अधिकारी, प्रभाकर म्हात्रे को दी जिसे संज्ञान में लेते हुए प्रभाग अधिकारी प्रभाकर म्हात्रे ने  संवाददाता को बताया कि आदिवासी की जमीन पर किए गए अनाधिकृत निर्माण कार्य को लेकर प्रभाग – 6 द्वारा तोड़क कारवाई की जा चुकी है।उक्त जमीन पर यदि पुनः कोई भी भूमाफिया चाहे वह मंगल गांधी ,बाबू म्हात्रे या अवेश कुरेशी ही क्यों न हो उस पर एमआरटीपी के तहत एफआईआर दर्ज करवाएंगे, इतना कहकर प्रभाग – 6 के प्रभाग अधिकारी,प्रभाकर म्हात्रे ने अपनी वाणी को विराम दिया। अब ऐसे में जिसकी उच्च स्तरीय जांच कर तोडक कार्रवाई जरूरी है।

    मीरा-भायंदर महानगर पालिका, प्रभाग – 6 के प्रभाग अधिकारी प्रभाकर म्हात्रे से हमारी मांग है कि जवाबदेह अभियंताओं के भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई कराए और साथ ही तोड़क कारवाई कर आदिवासियों को अपने जमीन से वंचित होने से बचाएं अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा!

  • सहायक आयुक्तों की भर्ती में बड़े पैमाने हुआ है भ्रष्टाचार: आयुक्त चहल निकले रक्त चूसक जोंक

    सहायक आयुक्तों की भर्ती में बड़े पैमाने हुआ है भ्रष्टाचार: आयुक्त चहल निकले रक्त चूसक जोंक

    • मनपा आयुक्त के रूप में सबसे ज्यादा अयोग्य अभ्यर्थी नियुक्त करने का चहल का रिकार्ड
    • मनपा आयुक्त चहल के कैरेक्टर रोल की जांच सीबीआई व ईडी से कराने की मुंबईकरों की मांग।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त  इकबाल सिंह चहल को एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। किंतु किसी को क्या मालूम था की इकबाल सिंह चहल अपने निजी लाभ के लिए सहायक आयुक्तों की होने वाली नई भर्ती पर ध्यान नहीं देंगे तथा वह कभी भी राज्य संघ लोक सेवा आयोग से सहायक आयुक्त की भर्ती के लिए कोई मांग नहीं करेंगे। इन दोनों ने ऐसा किया है जिसके कारण मनपा में सहायक आयुक्त का कार्य भी प्रभारी सहायक आयुक्त से लिया जा रहा है। सहायक आयुक्त की जगह अपेक्षित काम ना कर पाने के कारण प्रभारी सहायक आयुक्त जनता की अनेक समस्याएं दूर नहीं कर पा रहे हैं।

    मनपा आयुक्त द्वारा प्रभारी सहायक आयुक्तों की नियुक्ति ..

    सूत्रों का कहना है, कि कितनों को तो आयुक्त चहल ने योग्यता न होने के बावजूद भी नियुक्त किया है, जिसे उनका निंदनीय भ्रष्टाचार माना जा रहा है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के कारण बृहन्मुंबई महानगर पालिका में सहायक आयुक्तों की भर्ती बंद होने से निगम के 10 से 15 विभाग कार्यालयों का प्रभार सहायक आयुक्तों के पास है। इसके कारण विभाग में कई नागरिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं और देखा जा रहा है कि प्रभारी सहायक आयुक्त कभी-कभी उनका समाधान करने में विफल हो रहे हैं।

    मनपा आयुक्त,
    मुंबई मनपा आयुक्त मुख्यालय की फाइल तस्वीर

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    मुंबई महानगर में 24 नगरपालिका प्रभाग कार्यालय हैं। इनमें से प्रत्येक संभागीय कार्यालय का प्रबंधन एक अलग एमपीएससी से चयनित एक सहायक आयुक्त द्वारा किया जाता है। लेकिन चूंकि एमपीएससी द्वारा पिछले दो वर्षों से सहायक आयुक्त की भर्ती प्रक्रिया नहीं की गई है, इसलिए मनपा प्रशासन ने उन अधिकारियों को प्रभारी सहायक आयुक्त का प्रभार दिया है जो कुछ विभागीय कार्यालयों में घनकचरा व्यवस्थापन व परिरक्षण विभाग के कार्यकारी अभियंता हैं।

    ऐसे में उनके लिए वार्ड का कार्यभार पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसके कारण वार्ड में कूड़ा-कचरा, सड़क, अनाधिकृत निर्माण, रेहड़ी, फेरीवाले और प्रतिष्ठानों का आस्थापना विभाग सहित अन्य समस्याओं का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। नतीजा, इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। गत वर्ष से मुंबई नगर निगम में नगरसेवकों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण वे नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

    नागरिकों को सीवरेज, फुटपाथ मरम्मत, जलापूर्ति, मलिन बस्तियों में सफाई जैसे बुनियादी कार्यों के लिए नगरसेवकों के कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। चूंकि नगरसेवकों का कार्यालय भी बंद है, इसलिए उनके कार्यालय जाने पर भी नागरिकों का काम नहीं हो पाता है। नागरिकों की यह भी शिकायत है कि नगर निगम सहायक आयुक्त द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे दिन-ब-दिन शहर में नागरिक समस्याएं बढ़ती जा रही है।

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    मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल के कार्यकाल में फर्जी वार्ड ऑफिसर से मोटी रकम लेकर नियुक्ति की है ऐसा कहा जाता है। स्थानीय विधायक और सांसद की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए इन वार्ड ऑफिसरों की मनपा आयुक्त से सांठ-गांठ कर नियुक्ति की है ऐसा भी कहा जाता है। जिसमे आयुक्त की प्रति माह ५०० करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय है। क्या इसकी जांच राज्य सरकार और केंद्र सरकार करेगी या ईडी सीबीआई करेगी।

  • आरपीएफ निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह पूरी तरह निष्क्रिय लापरवाह

    आरपीएफ निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह पूरी तरह निष्क्रिय लापरवाह

    मुंबई मध्यरेल के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर रात होते यात्रियों की सुरक्षा और रक्षा राम भरोसे, यात्रियों को रेलवे प्रशासन से मदद मांगने पर भरोसा करने में सावधानी बरतने की अपील …

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    कुर्ला स्थित, मध्यरेल के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) पर रात्रि 8 के बाद कोई भी रेल सुरक्षा बल का अधिकारी और सिपाही ड्यूटी पर दिखाई नही पड़ता है और प्लेटफार्म 2/3 पर स्टाल धारक यात्रियों से जमकर लूटपाट करते है और सामान लेने के बाद बिल मांगने पर देते भी नही है। इसके गुंडागर्दी मारपीट के लिए उतारू हो जाते है आरपीएफ से फोन पर शिकायत करने पर निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह सीधे कहते है। ट्वीट करिये। कार्रवाई करने से सीधा मना कर देते है।

    इस स्टेशन पर स्टेशन मास्टर, सीसीआई आरपीएफ सभी मिले हुए हैं। एक मोटी रकम की वसूली की जाती है। इस पर जीएम और डीआरएम किसी का भी ध्यान नही है। यात्रियों की कोई सुरक्षा नही है सारे डकैत स्टाल खोलकर खुलेआम यात्रियों की जेब पर डाका डाल रहे है। लेकिन जीएम नरेश लालवानी ईमानदारी का नारा लगा रहे है। जिसको ट्वीट करना नही आता, उसकी शिकायत नही ली जाती है।

    रेलवे प्रशासन,
    मुंबई का कुर्ला स्थित लोकमान्य तिलक टर्मिनस की फाइल तस्वीर

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    रेलवे प्रशासन का लोकमान्य तिलक टर्मिनस

    क्या रेलवे प्रशासन सुधरेगा या केवल लूटने का ही काम करेगा? मुंबई के कंट्रोल रूम में फोन किया गया, तो पहले कांबले ने फोन उठाया और टीसी को शिकायत करने के लिए कहा गया। फिर कंट्रोल में ड्यूटी पर तैनात दिनेश ने कहा, कि आप टीसी से शिकायत पुस्तिका में शिकायत करिये। गाड़ी छूटने पर टीसी क्या करेगा ? शिकायत के मुताबिक, गाड़ी संख्या 18029 शालीमार एक्सप्रेस के एसी बोगी में अवैध पानी।

    मुंबई से सटे ठाणा स्टेशन का अवैध वेंडर राजा अपने पालतू गुर्गो से 20 रुपये में पानी की बोतल बिकवाता है। इस गोरखधंधे में रेलवे सुरक्षा बल पर तैनात सुरक्षारक्षक इनका साथ देते हैं। इसी तरह रेल सुरक्षा बल रेलवे की सुरक्षा करती रही तो रेलवे बिकने में ज्यादा समय नही लगेगा। आरपीएफ जवानों को इतनी पगार मिलती है जिससे उनका परिवार अच्छी तरह से भरण पोषण किया जा सकता है। फिर भी रेल कर्मी और अधिकारियों का बिना वसूली के काम नही चलता है।

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    मुंबई के मध्यरेल के कंट्रोल रूम में रात में लगता है फर्जी लोग बिठाए गए है। ट्रेन में कोई भी अप्रिय घटना घट जाए, इनसे कोई मतलब नही होता। सूत्रों से पता चला है, कि कंट्रोल में लगातार शिकायतों के चलते अब वहां भी इन अवैध वेंडरों ने रिश्वत का नजराना पेश करना शुरू कर दिया है। अब कंट्रोल रूम में तैनात सरकारी कर्मचारियों द्वारा भी अवैध वेंडरों से हफ्ता उगाही की जाती है इसीलिए शिकायत नही लिया जाता है।

  • दूसरी मंजिल से धड़ाम, टूटे दांत पैर फ्रैक्कर। Spider-man का क्राईम खुलासा

    दूसरी मंजिल से धड़ाम, टूटे दांत पैर फ्रैक्कर। Spider-man का क्राईम खुलासा

    टूटे हुए दो दांतों से पुलिस को मिला सुराग, 4 महीने बाद हुआ गिरफ्तार। Spider-man thief क्राईम का हआ खुलासा

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    बोरीवली के इलाके में एक चोर अपने दो दूटे दांतों की वजह से चोरी की घटना के 4 महीने बाद पकड़ा गया। दरअसल, यहां स्पाइडर-मैन नाम से चर्चित अज्ञात चोर चोरी करने के बाद भागते समय दूसरी मंजिल से गिर गया। इसके चलते उसके दो दांत दूट गए और एक पैर में फैक्चर हो गया। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

    पुलिस को घटना स्थल की जांच से मिले इन्हीं दो टूटे दांतों की मदद से उसे बोरीवली पुलिस ने चार महीने बाद गिरफ्तार कर लिया। चोर की पहचान 29 साल के रोहित राठौड के रूप में हुई। खबरों के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने बताया, कि रोहित राठौड़ आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ चोरी के 19 मामले दर्ज हैं। पुलिस ने रोहित की पहचान करने के लिए बोरीवली और उसके आस पास के 400 से अधिक अस्पतालों में पूछताछ की थी। इसके बाद उसे दहिसर से गिरफ्तार किया गया। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

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    राठौड़ की गिरफ्तारी से पुलिस को दो मामले सुलझाने में मदद मिली है। रोहित राठौड़ को इससे पहले डीएन नगर, कांदिवली, बोरीवली, वकोला, सांताक्रूज, दहिसर, कस्तूरबा मार्ग
    और समेत अन्य कई पुलिस स्टेशनों द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। वह एक साल तक वकोला पुलिस स्टेशन से तड़ीपार भी रहा है। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

    कैसे की थी चोरी, कैसे हुआ इसका खुलासा ?

    बताया जा रहा है, कि रोहित 22 जून को दहिसर पश्चिम के महात्रेवाड़ी में राजाराम तावड़े रोड पर स्थित अर्पिता अपार्टमेंट में चोरी करने पहुंचा था। यहां उसने दूसरे मंजिल पर बने एक फ्लैट में चोरी की। शिकायत के मुताबिक, जब घर में मौजूद एक 32 वर्षीय सदस्य ने चोरी होते देखा, तो उसने घर के अन्य सदस्यों को बुलाया। हालाकि, तब तक रोहित रसोई की खिड़की से कूदकर भाग गया। इसकेबाद चोरी की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद एक टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने जब जांच की तो घटनास्थल पर दो दात मिले।

    मुंबई परिमंडल 11 के डीसीपी अजयकुमार बंसल और बोरीवली पश्चिम के एमएचबी पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक सुधीर कुडालकर के मार्गदर्शन में एपीआई सूर्यकांत पवार और पीएसआई अखिलेश भोम्बे के साथ जांच शुरू की गई। इमारत परिसर में दो टूटे हुए दांत और खून के धब्बे पाए गए। सीसीटीवी फुटेज की जांच में पुलिस ने देखा तो उसमें चोर कूदते वक्त गिरता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने कैमरे में देखा, कि इसमें उसके दो दात दूंट गए और उसके पैर में भी फैक्चर हो गया। हालाकि, अंधेरे की वजह से फुटेज में उसका चेहरा नहीं दिख सका। चोर चोट के बावजूद एक दीवार कूदकर भागने में सपफल रहा। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

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    Spider-man thief

    पुलिस को यह पता था कि आरोपी चोर को काफी बोच लगी है, ऐसे में वह अस्पताल जरूर जाएगा। पुलिस ने आसपास के अस्पतालों में जाकर चेक किया। हालांकि, वह नहीं मिला। इसके बाद एक पुलिसकर्मी को रोज अलग-अलग अस्पतालों में जाकर चेक करने की ड्यूटी पर लगा दिया गया। पिछले हफ्ते पुलिसकर्मी ने देखा कि चोर वकोला में एक अस्पताल में इलाज करा रहा है। इसके बाद पुलिस ने उसके डिस्वार्ज होने का इंतजार किया जैसे ही वह घर पहुंचा, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। #Spiderman का क्राईम खुलासा..

  • निवासियों को भुगतना पड़ रहा है एसआरए की बिल्डिंगों के घटिया निर्माण का खामियाजा

    निवासियों को भुगतना पड़ रहा है एसआरए की बिल्डिंगों के घटिया निर्माण का खामियाजा

    • SRA व मनपा के अधिकारी सहित बिल्डर मालामाल: निवासी बेचारे बेहाल।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई
    : महानगर मुंबई में ऐसा चलन रहा है, कि जो भी उपयोगी काम जनता के लिए किए जाते हैं, उन्हें या तो कोई विभाग संभालता है या फिर ठेकेदारों को दे दिया जाता है। जनोपयोगी कार्य या निर्माण चाहे जैसे भी कराया जाता हो किंतु उसके निर्माण में निर्माण कर्ता अधिक से अधिक पैसे बचाने की कोशिश करता है, जिसका असर यह पड़ता है कि कार्य या निर्माण अत्यंत घटिया किस्म का और घटिया निर्माण सामग्री वाला होता है। यही हाल है झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) का, जो बिल्डरों को पुनर्वसन हेतु घर बनाने का ठेका दे देता है, जिसमें बिल्डर मनमानी काफी कुछ काम करते हैं।

    SRA की योजना में घटिया बिल्डिंग निर्माण ..

    काम भले ही घटिया हो लेकिन वह बिल्डर या सारे अधिकारियों को समय-समय पर आर्थिक भेंट और अनेक उपहारों से खुश करते रहते हैं। महानगर मुंबई में भी झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) योजना के तहत बनाई गई घटिया इमारतों के कई मामले प्रकाश में आये हैं।

    जानकारी के अनुसार एसआरए ने गोरेगांव झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के तहत इमारत की पार्किंग में आग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स को नए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, जब तक कि सहकारी आवास सोसायटी द्वारा उन इमारतों के लिए आवश्यक देखभाल नहीं की जाती हैं तथा जो पूरी हो चुकी हैं, उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी डेवलपर की होती है। इसके बाद भवन महापालिका को सौंप दिया जाता है।

    Sra,
    गोरेगांव से SRA इमारत के नीचे लगी आग जानी की तस्वीर

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    बता दें, कि झोपड़पट्टी पुनर्वसन में अब तक ढाई लाख फ्लैटों को रहने योग्य प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। अधिकांश इमारतों की त्रिवर्षीय अवधि समाप्त हो गई है, इसलिए रखरखाव की जिम्मेदारी अब संबंधित सहकारी आवास समितियों की है। लेकिन यह पाया गया है, कि इन आवास संगठनों द्वारा उचित सावधानी नहीं बरती जा रही है। इसलिए अब प्राधिकरण द्वारा इसकी दोबारा समीक्षा की जाएगी। स्लम पुनर्वास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश लोखंडे ने कहा, कि सभी पुनर्वास भवनों के डेवलपर्स और वास्तुकारों को दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे और दावा किया गया है कि फायर ब्रिगेड द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ जारी करने के बाद ही रहने योग्य प्रमाण पत्र जारी किया गया था। उसके बाद तीन साल की अवधि के लिए बिल्डरों की जिम्मेदारी व देनदारी को लागू करने के आग्रह की ओर से एसआरए ने अपनी आंखें बंद कर ली हैं।

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    गोरेगांव की जिस इमारत में आग लगी वह सात मंजिला इमारत थी। जबकि झोपड़पट्टी पुनर्वास में 42 मंजिला टावर खड़े हैं। ऐसे टावरों को रहने योग्य प्रमाण पत्र देने के बाद डेवलपर की जिम्मेदारी केवल तीन साल तक होती है, तो असली परीक्षा इन टावरों में रहने वाले निवासियों के लिए होती है। सवाल यह है कि ऐसे टावरों के रखरखाव की देखभाल संबंधित सहकारी आवास सोसायटी द्वारा कैसे की जाएगी इसका कोई प्रारूप एसआरए ने नहीं पेश किया है। महापालिका के पी/उत्तर विभाग कार्यालय में बार-बार की शिकायतों कि गोरेगांव में दुर्घटना ग्रस्त इमारत में पार्किंग स्थल और सड़क पर बाधाएं डाली जा रही हैं। इस पर मनपा अधिकारी भी चुप बैठे हैं।

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