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हर साल पुणे का गणेशोत्सव देश-विदेश से आए भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहता है। रोज़ाना लाखों लोग मंडपों और पंडालों में गणपति बाप्पा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस बार पुलिस ने सुरक्षा के लिए हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरे शहर में तैनात किया है।
AI कैमरों से स्मार्ट निगरानी
शहर के प्रमुख चौक, मंडप, रेलवे स्टेशन, एसटी स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 2,886 हाई डेफिनेशन AI कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा पहले से मौजूद 1,341 कैमरों को अपग्रेड किया गया है। ये कैमरे नाइट विज़न, फेस रिकग्निशन और एडवांस वीडियो एनालिटिक्स तकनीक से लैस हैं, जिससे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान तुरंत संभव होगी। Ganeshotsav 2025 Pune: Hi-tech police arrangements, surveillance with AI cameras, drones and IP speakers
शहर में लगाए गए 200 IP स्पीकर्स पुलिस और नागरिकों के बीच त्वरित संवाद का माध्यम बनेंगे। अचानक किसी भी स्थिति—जैसे भगदड़, ट्रैफिक जाम या आपातकाल—में पुलिस इन स्पीकर्स से जनता को तुरंत गाइड कर सकेगी।
ड्रोन से आसमान से सुरक्षा
इस साल का एक और बड़ा आकर्षण होगा ड्रोन गश्त। गणेश जुलूस के रूट्स और भीड़ वाले इलाकों पर ड्रोन कैमरे तैनात रहेंगे। ड्रोन से ली गई तस्वीरें सीधे पुलिस कंट्रोल रूम में पहुंचेंगी, जिससे संदिग्ध हरकतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
महाराष्ट्र के साथ-साथ तेलंगाना के नगरपालिकाओं ने 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मांस की दुकानें और बूचड़खानों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। इसको लेकर देशभर में विपक्षी नेता हंगामा कर रहे हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट ने तो नगर पालिका प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।
डिजिटल डेस्क मुंबई: 15 अगस्त को सरकार द्वारा मांस की दुकानों को बंद करने को लेकर जारी फैसले के खिलाफ देशभर में हंगामा हो रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और कल्याण-डोंबिवली के साथ-साथ तेलंगाना के नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के बूचड़खानों और मांस की दुकानों को 15 अगस्त के दिन बंद रखने का निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं के हंगामे के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद आश्चर्य जता रहे हैं। राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया, कि सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। हम देश की स्वतंत्रता का पर्व मना रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August
मनसे का विरोध
गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कुछ नगर पालिका द्वारा मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों का खान-पान नहीं निर्धारित करना चाहिए। राज ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि नगर पालिकाओं को इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘गोश्त खाने और स्वतंत्रता दिवस में क्या रिश्ता है। तेलंगाना में 99 प्रतिशत लोग गोश्त खाते हैं। ओवैसी ने इस फैसले को लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकारों का उल्लंघन करने वाला फैसला बताया है।’
तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
तेलंगाना में यह मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने ग्रेटर हैदराबाद महानगर पालिका (जीएचएमसी) से स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के उसके आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। तेलंगाना सरकार के इस आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश मनमाना है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजयसेन रेड्डी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “मैंने टीवी पर खबर देखी, श्रद्धा का प्रश्न होता है तो इस तरह बंदी लगाई जाती है। आषाढ़ी एकादशी, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर यह निर्णय लिया जा सकता है। अगर हम कोकण में जाएं तो वहां हर सब्जी में सूखी मछली डालकर पकाया जाता है। ऐसी बिना कारण के खाने पीने की चीजों पर रोक लगाना ठीक नहीं है। अगर भावनात्मक मुद्दा हो तो उस समय के लिए बंदी लगाई जाए तो लोग समझ सकते हैं। लेकिन, 15 अगस्त को महाराष्ट्र में बंदी लगाना उचित नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा।
दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।
लोकतंत्र का हिस्सा
संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?
संसद में होती है गुंडो की भाषा
पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।
मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।
कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा
अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।
यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?
सरकार ने दिया सेना को धोखा
इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”
आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।
टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार
दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।
सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।
विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?
दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?
ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?
दुनिया की निगाहों में भारत?
भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।
मुंबई के पक्षी प्रेमियों को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहत की खबर सुनाईं है। कबूतरों को दाना डालने के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। मुख्यमंत्री के इस पहल से कबूतरों के संरक्षण की मांग कर रहे कबूतरप्रेमियों को बड़ी राहत मिली है।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: शहर में कबूतरखानों को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद अब थमता हुआ नजर आ रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद कबूतरखानों के खिलाफ मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा शुरू की गई कार्रवाई अब थम सकती है। दरअसल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक की और उन्होंने शहर में कबूतरखानों को अचानक बंद करने के कदम को उचित नहीं माना।
मंत्रालय में हुए उच्चस्तरीय बैठक
मंत्रालय में मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीएम फडणवीस ने कहा, कि “कबूतर-खानों यानी पक्षियों को दाना डालने की जगह को अचानक बंद करना कोई समस्या का समाधान नहीं है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि यदि कबूतरों के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं, तो उन पर वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है, न कि सीधे प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया, कि “कबूतरों को दाना डालने के लिए एक निर्धारित समय तय किया जा सकता है।”
सीएम फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, वन मंत्री गणेश नाइक, मंत्री गिरीश महाजन और मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा भी उपस्थित थे। बैठक के दौरान फडणवीस ने कहा कि कबूतरों की विष्ठा से होने वाली गंदगी की सफाई के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। कबूतरखानों से नागरिकों को कोई परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। Pigeon houses will open again in Mumbai! CM Fadnavis gave instructions
बीजेपी विधायक एवं मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, कि सरकार कबूतरखानों को अचानक बंद करने के पक्ष में नहीं है और बॉम्बे हाईकोर्ट में सरकार पक्ष रखेगी। जो कबूतरखाने प्लास्टिक शीट से ढंककर बंद किए गए है, उन्हें जल्द ही फिर से खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि कबूतरों को अब नियंत्रित ढंग से ही दाना दिया जाएगा, जिससे नागरिकों को कोई असुविधा न हो। कबूतरों की विष्ठा की सफाई के लिए ‘टाटा’ कंपनी द्वारा निर्मित एक विशेष मशीन का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया जाएगा।
FIR दर्ज करने का दिया था आदेश
मुंबई शहर में 51 ‘कबूतर खाने’ यानी पक्षियों को दाना डालने की जगह हैं। कुछ दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों के झुंड को दाना डालने को ‘सार्वजनिक उपद्रव’ करार देते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) को ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था। बीएमसी ने दादर का मशहूर ‘कबूतर खाना’ बंद कर दिया और उसे प्लास्टिक के तिरपाल से ढक दिया। इसके बाद शहर के कुछ हिस्सों में पक्षी प्रेमियों और जैन समुदाय के लोगों ने नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन भी किए। हालांकि अब सीएम फडणवीस की इस पहल से कबूतरप्रेमियों को बड़ी राहत मिली है।
महाराष्ट्र सरकार की “लाडकी बहन योजना” के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के लिए रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशखबरी है। जुलाई महीने की 13वीं किस्त यानी 1500 रुपये बैंक खातों में 9 अगस्त 2025 से पहले जमा किए जाएंगे। हालांकि की देरी हुई है लेकिन योजना को फिर एकबार जारी रखा गया है।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की “लाडकी बहन योजना” के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के लिए रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशी की खबर है। जुलाई महीने की 13वीं किस्त 1500 रुपये की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 9 अगस्त 2025 से पहले जमा कर दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने हाल ही में इसको लेकर जानकारी साझा करते हुए बताया कि रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर महिलाओं के खातों में पैसे जमा कर दिए जाएंगे। एक जानकारी के मुताबिक किस्तों के पैसे जारी करने में देरी हुई है। यह देरी इसलिए हुई क्यों कि योजना का लाभ उठाने के लिए लाखों लोगों ने फर्जी तरीके से लाभ उठा लिया था। उसकी जांच मे देरी के कारण पात्र महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
योजना में पात्रता और लाभ
महाराष्ट्र सरकार की ओर से “माझी लाडकी बहन योजना” 21 से 65 वर्षीय महिलाओं के लिए चलाई जा रही है। योजना की शुरुआत से अब तक पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह की दर से अबतक 12 किस्तें दी जा चुकी हैं। सरकारी घोषणा के मुताबिक, अब 13वीं किस्त की राशि जारी किए जायेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने जरूरतों के खर्चों को आत्मनिर्भरता से पूरा कर सकें।
Ladki Bahin Yojana में मिले फर्जी खाते
हालांकि, इस बार सभी महिलाओं को किस्त नहीं मिलेगी। सरकार की जांच में सामने आया है कि 26.34 लाख लोगों ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ उठाया है। जिनमें से करीब 14,000 पुरुष भी शामिल थे। ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों को लाभार्थी सूची से हटा दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया, कि आगे से केवल योग्य और सत्यापित महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर इस योजना का लाभ लेता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
जिन महिलाओं को किस्त मिलने वाली है, वे अपना खाता बैलेंस निम्नलिखित तरीकों से जांच सकते हैं:
ATM मशीन के जरिए पता कर सकते हैं।
बैंक शाखा कार्यालय जाकर पूछताछ की जा सकती है।
मोबाइल बैंकिंग ऐप से बेलेंस चेक कर सकते हैं।
कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके भी पता कर सकते हैं।
आपको जानकारी देते हुए बता दें, कि लाडकी बहन योजना की राशि DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
करोड़ों महिलाओं को मिल रहा है योजना का लाभ
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी “माझी लाडकी बहन योजना” के तहत पहले करीब 2.5 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था, लेकिन जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद आंकड़ा करीब सवा दो करोड़ हो गया। लेकिन इसके बाद एक बार फिर 26.34 लाख फर्जी नामों को हटाया गया, जिससे यह आंकड़ा अब घटकर करीब 2 करोड़ होने की जानकारी मिल रही है। हालांकि सरकार का लक्ष्य है कि हर पात्र महिला तक यह सहायता समय पर पहुंचे, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला इस योजना से वंचित न रह जाए। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितम्बर 2008 को हुए बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार 7 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इसमें जांच एजंसियों की चूक प्रकाश में आते ही हाईकोर्ट के वकील नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है। अदालत ने यह भी कहा, “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।”
मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।
अगर हेमंत करकरे होते तो, ..
शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।”
आरोपी बन गई सांसद
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”
29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।
मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।
इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ।
सबूतों के साथ छेड़छाड़
अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।
जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद
उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में अपराधियों का खात्मा हो गया है? या अपराधों का राज्य स्थापित हो गया है? या हंटर सिर्फ विरोधियों पर चला?
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: सत्ता जब मदान्ध हो जाती है तो वह जनसरोकार से दूर हो जाती है। भले ही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार लाख दावे करती रहे कि उसने माफिया राज खत्म कर दिया है। अब अपराधी गुंडे गले में तख्ती लगाए कि वे सरेंडर करने आ रहे। गोली मत मारिए कहा जाए लेकिन सच तो यह है कि जाति विशेष के माफियाओं के ऊपर हाथ ही नहीं डाला गया कभी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
जनता के पैसों की बर्बादी
हां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरुद्ध सारे आपराधिक मामले वापस जरूर ले लिए। शासन का हंटर केवल विरोधियों पर चला। घर बुलडोजर से केवल विरोधियों के गिराए गए। उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन का अपराधियों में तनिक भी भय नहीं है, क्योंकि सत्ता चुनावी फायदे के लिए कांवड़ यात्रियों पर जनता के पैसे बर्बाद करके हेलीकॉप्टर से फूल बरसा रही है। जिसमे प्रशासन भी शामिल है।
कांवड़ियों के द्वारा उत्पात मचाए गए। ऑटो तोड़े, कार तोड़े, ड्राइवरों को पीटा, ढाबे में खाना खाकर पैसे देने के बदले तोड़फोड़ की गई। पुलिस मूक दर्शक बनी रही। शायद ऊपर से आदेश आया था। यहां तक कि खाकी वर्दी में पुलिस अधिकारी कांवड़ उठाते देखे गए। आईएएस भी अपनी आस्था का प्रदर्शन करते दिखाई दिए ताकि मुख्यमंत्री की कृपा बनी रहे।
महिलाओं के बाथरूम मे लगे कैमरे
शासन प्रशासन की जन उपेक्षा का ही परिणाम हुआ कि यूपी में अपराधों में वृद्धि देखी गई।यहां तक कि योगी जी के चुनाव क्षेत्र गृह जिले गोरखपुर में ही तीन सौ की जगह छः सौ पुलिस ट्रेनी महिलाओं को नरकीय स्थिति में रहने को बाध्य किया गया। उनके बाथरूम में सीसीटीवी कैमरे लगाकर वीडियो बनाए जाते रहे जिस कारण ट्रेनी लड़कियों को विरोध करने को वाद्य होना पड़ा। नीचता की हद तो तब हो गई जब कुंवारी लड़कियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए गए। गोरखपुर में ही अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया कि पुलिस वाले को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया।
अराजकता की हद
इसी में चंद अपराधों की फेहरिस्त देखिए। लखनऊ में एक लाडले को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। मृत समझ कर मरने के लिए छोड़ दिया गया। तहसील के अंदर ही पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। संत कबीर नगर में सात साल की बेटी के सामने मां की हत्या हुई। महिला की अंतड़िया निकालने वाले का हाफ एनकाउंटर किया गया। दरोगा की पिस्टल छीनकर आरोपी ने फायरिंग की।
कानपुर पिटाई के डर से छठी के छात्र ने खुद को फांसी लगा ली। कानपुर के टीचर ने उसकी चेन छीन ली थी। धर्मपरिवर्तन करने वाले छांगुर ने कहा जब्त की गई संपत्ति उसकी नहीं नसरीन से पूछो। लखनऊ के अंटास मॉल में पुलिस के संरक्षण में रेस्टोरेंट के लाइसेंस पर चलाया जाता है हुक्का बार। पुलिस नीचे बैठी रहती है। सीसीटीवी से 24 घंटे होती रहती है निगरानी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
अराजकता की दूसरी तस्वीर
बाराबंकी में 28 साल की महिला सिपाही की हत्या कर दी गई। चेहरा जलाया गया। कौवे नोच रहे थे शव। आधी रात को घर में घुसकर किसान की लखनऊ में ही गला रेत कर हत्या की गई। डिम्पल के ड्रेस पर बोलने वाले मौलाना को अखिलेश के योद्धाओं ने कूट दिया। बीजेपी पोस्टर लगवा कर पूछ चुकी थी कि जो अपनी पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका दूसरे की इज्जत कैसे बचाएगा?
पुलिस का आम जनता में खौफ
बीजेपी के संगीत सोम ने मंदिर का गेट तुड़वा दिया। अब दारोगा हेलीकॉप्टर में बैठकर की एंट्री पुलिस ने धड़पकड़ की शूटिंग की। देवरिया में नौ साल के बच्चे की तंत्र मंत्र के चक्कर में हत्या कर बगीचे में दफन किया गया इस मामले में पुलिस कांस्टेबल सहित तीन हुए गिरफ्तार। पति के साथ झगड़े के बाद पत्नी ने बुलाई पुलिस तो पति तीन मंजिले से कूद गया। पुलिस के हाथ पांव फूले। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने पैर पकड़ कर मांगी माफी
बुलंदशहर हिंसा में बीजेपी विधायक सहित 38 लोगों को दोषी ठहराया गया। इंस्पेक्टर की हत्या कर चौकी फूंक दी गई थी। मुकदमा रामवीर पर सजा राजवीर को। मैनपुरी में दरोगा ने पैर पकड़कर मांगी माफी क्यों कि 17 साल बाद बेगुनाह छुटे थे राजवीर। यह है यूपी की पुलिस। बेकसूरों को भेजती है जेल और यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार कहतीं है अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
भारतीय प्रधानमंत्री की चुप्पी आज धमकियों का सामना कर रही है। जनता के अरबों डॉलर टैक्स का पैसा खर्च कर दो सौ विदेशी दौरों और 79 राष्ट्रों के दौरों का परिणाम क्या निकला जब पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक भी राष्ट्र भारत के साथ खुलकर नहीं आया।
नेशनल डेस्क नई दिल्ली: भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप बार बार धमकी देते रहते हैं कि भारत पर हम बहुत अधिक टैरिफ लगाएंगे। भारत चुप रहता है। ट्रंप ने बारह बार कहा था उसने भारत और पाकिस्तान को ट्रेड की धमकी देकर सीज फायर कराया। 22 अरब रूपये जनता के टैक्स का खर्च कर दो सौ विदेशी दौरों और 79 राष्ट्रों के दौरों का परिणाम क्या निकला जब पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक भी राष्ट्र भारत के साथ खुलकर नहीं आया। जबकि अमेरिका चीन तुर्की और अज़रबैजान खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े रहे। अमेरिका के चक्कर में भारत रूस का साथ भी छोड़ता दिख रहा है।
भारत को खुली चुनौती
ट्रंप भारत चीन ब्राजील को रूस के साथ संबंध रखने के कारण हमेशा धमकी देता है। रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर रूस के विदेशमंत्री ने स्पष्ट जवाब दिया हम तैयार हैं। चीन ने तो अमेरिकी ट्रंप को खुली धमकी दे डाली चाहे ट्रेड वॉर हो या सचमुच का युद्ध हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब अमेरिकी पिट्ठू नाटो के अध्यक्ष ने रूस यूक्रेन युद्ध के कारण भारत को रूस का साथ छोड़ने अन्यथा बैन झेलने की खुली चुनौती दे डाली है। लेकिन भारत है कि जवाब ही नहीं देता। अमेरिका हड़काया करता है तो मोदी हंसते हैं। बार बार भारत का अपमान करता है फिर भी मोदी की हिम्मत नहीं पड़ती कि पलट कर जवाब दें।
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनायझेशन (NATO) यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 32 सदस्य देशों का एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को उत्तरी अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इन 32 सदस्य देशों में से 30 यूरोप में और दो उत्तरी अमेरिका में स्थित हैं। नाटो के अध्यक्ष (महासचिव) मार्क रूट ने हालही में भारत को रुस का साथ छोडने अन्यथा बैन झेलने की चुनौती दी है।
क्या रुस को है भारत पर भरोसा?
छोटे से राष्ट्र ब्राजील ने ट्रंप को टका सा जवाब दिया तुम्हे टैरिफ लगाना हो लगाओ हम नहीं झुकेंगे। रूस प्रतिद्वंद्वी है। चाइना के सामने अमेरिका की दाल गलती नहीं वह हमेशा अमेरिका को मुंह तोड़ जवाब देता रहता है। रूस यूक्रेन युद्ध में नाटो भी शामिल है यूक्रेन को हथियारों की मदद करता हुआ अमेरिका तो है ही। रूस को शायद भारत पर भरोसा ही नहीं रहा इसीलिए पाकिस्तान के साथ ट्रेड कर रहा है।
भारत और मोदी कहीं है ही नही ..
बंद पड़ी स्टील कंपनी चालू करने और रेल संपर्क बढ़ाने में इन्वेस्ट कर रहा है और भारत ऊहापोह की स्थिति में है। पुरानी विदेशनीति भारत छोड़ चुका है। मोदी भले खुद को विश्वगुरू कहलाने की चेष्टा करते रहते हैं। गोदी मीडिया और अंधभक्त विश्वगुरू ही मानते हैं। लेकिन सच तो यह है कि भारत और मोदी कहीं है ही नहीं। ईरान ब्रिक्स में नया नया शामिल होकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करा लेता है जबकि भारत को कोई पूछता तक नहीं।
तमाम संगठनों में भारत शामिल होने के बावजूद कोई अहमियत हो देखा नहीं जाता।रूस भारत का हर विपदा में पक्का साथी रहा है पर लगता है अमेरिकी धमकियों के आगे घुटने टेक कर रूस दूर जा रहा हैं। अमेरिका भारत के 140 करोड़ लोगों के बड़े बाजार पर कब्जा कर अपने माल को खपाना चाहता है। ट्रेड की धमकी इसीलिए देता है। अमेरिका भारत को जीरो टैरिफ पर अपना खाद्यान्न बेचना चाहता है। साथ ही अपने देश की देशी गायों का दूध जिसमें सुअर मछली मुर्गे की चर्बी मिली हुई होती है।
भारत की खामोशी
कहने को तो भारत ने अमेरिका को मना कर दिया है कि तुम्हारा मांसाहार वाला दूध हम नहीं लेंगे। ऐसा इसलिए कि भारत के हिंदुओं को भरोसा हो जाए कि मोदी सनातन की रक्षा कर रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि अमेरिकी गायों के मांसाहार वाले दूध आयात को स्वीकृत कर दिया गया है। अमेरिका शाकाहारी दूध बेचेगा या मांसाहारी इसकी गारंटी कहने को भारत की ओर से ले ली जाएगी। भारत चीन दोनों रूस से तेल खरीदने वाले बड़े ग्राहक हैं।रूस को अमेरिकी धमकियों का कोई भय नहीं। चीन भी खुला जवाब देता है लेकिन भारत की खामोशी कायरता बताती है।
अमेरिका से वहां के कृषि उपज खरीदने पर चोरी छुपे सहमति बन चुकी है क्योंकि मोदी के परम मित्र अडानी ने कई वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अनाज के सीमेंटेड गोदाम बनाए हुए हैं। अडानी के फायदे के लिए ही मोदी सरकार ने किसान संविरोधी तीन कानून बना लिए थे। जिससे किसानों की जमीन छीनकर अडानी को दी जा सके और किसान अपने ही खेतों में मजदूर बनकर रह जाएं। लेकिन किसानों के व्यापक विरोध के चलते मोदी ने तीनों बिल वापस लेने की घोषणा कर दी थी। फिर भी अब जीरो टैरिफ पर अमेरिकी किसानों के खाद्य पदार्थ भारत आयत कर अडानी के भंडार भरा जाएगा।
सस्ता होगा अनाज
अमेरिकी अनाज बेहद सस्ता होगा क्योंकि अमेरिका अपने किसानों को सौ प्रतिशत सब्सिडी देता है। जबकि भारत में बीज खाद डीजल कीटनाशक आदि बेहद महंगे हैं। किसान कर्ज के बोझ तले दबा आत्महत्या कर रहा है। उसकी लागत भी नहीं मिलती। अमेरिकी अनाज की जीरो टैरिफ पर भारत में आयात करने में सस्ता पड़ेगा तो अडानी सस्ता अनाज खुले मार्केट में डाल देंगे तो भारत के किसानों का मंहगा खाद्यान्न कौन लेगा? NATO chief openly threatens India. Said, will ban it
नतीजा होगा लाखों किसान आत्महत्या कर लेंगे तब मोदी कहेंगे मेरे लिए थोड़े मरे हैं। मरता है किसान तो मरे, मोदी को केवल अडानी का फायदा दिखता है। ट्रंप भारतीय नजरों में अपने प्रोडक्ट लाना चाहता है। मोदी सरकार में हिम्मत नहीं कि वह ट्रंप को जवाब दे दे। सच तो यह है जैसा बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्वामी कहते हैं अडानी को बचाने के लिए मोदी देश भी बेच देगा। NATO chief openly threatens India. Said, will ban it
Maharashtra News: ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में एक ब्रिज को समर्पित किया। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ‘सिंदूर ब्रिज’ का उद्घाटन कर इसकी जानकारी दी।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर एक ब्रिज का नाम रखा गया है। आज गुरुवार से ही आम जनता के लिए इसका आगाज कर दिया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को ‘सिंदूर ब्रिज’ का उद्घाटन किया। इसके पहले यह ब्रिज कार्नैक ब्रिज के नाम से जाना जाता था। इस ब्रिज के उद्घाटन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ‘सिंदूर ब्रिज’ के उद्घाटन के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, ‘आज बहुत खुशी की बात है कि मुंबई में ‘सिंदूर ब्रिज’ का उद्घाटन हो रहा है। हम सभी जानते हैं कि पुराना कार्नैक ब्रिज बहुत जर्जर हो गया था, इसलिए उसे तोड़ कर वहां एक नया ब्रिज बनाया गया है। ऐसे में उसे उसी पुराने नाम से उद्घाटन करना हमें गलत लगा। क्यों कि पुराना नाम ब्रिटिश शासन के गवर्नर को समर्पित किया गया था।’Chief Minister inaugurated ‘Sindoor Bridge’ and said that the symbol of slavery has been removed.
हिन्दुस्तानियों पर अत्याचार
उन्होंने कहा, ‘ब्रिटिश गवर्नर जिसने हिंदुस्तानियों पर बहुत अत्याचार किया था, खासकर सतारा के प्रताप सिंह राजे और नागपुर के उद्धव राजे को अलग-अलग षड्यंत्र में फंसाने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं, कई लोगों को जान से मारने का काम किया, इसलिए हमने अत्याचारी गवर्नर का नाम बदलकर सिंदूर का नाम देने का निर्णय लिया।’ उन्होंने आगे कहा, कि “हम सभी जानते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतवासियों के मन में बस गया है। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पहली बार अपनी ताकत को दिखाया और पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को खत्म करने का काम किया।”
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के बयानों को भी दोहराया, उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी ने बार-बार यह कहा है कि स्वतंत्रता के अमृतकाल में गुलामियों की निशानी को मिटाकर हमें अपनी निशानियों को तरजीह देनी है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए ये निर्णय लिया गया है।’ बता दें कि यह पुल दक्षिण मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ता है। इस ब्रिज का नाम बंबई प्रांत के पूर्व गवर्नर जेम्स रिवेट कार्नैक के नाम पर रखा गया था, जिसने 1839 से 1841 तक इस पद पर रहा। अब इस पुल का नाम बदलकर ‘सिंदूर ब्रिज’ कर दिया गया है।
एक्स ने आईटी मंत्रालय के बयान का खंडन करते हुए कहा कि सरकार ने रॉयटर्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। इन अवरुद्ध आदेशों के कारण भारत में चल रही प्रेस सेंसरशिप के बारे में गहराई से चिंतित है।
ब्रिटिश न्यूज़वायर एजेंसी के दो एक्स हैंडल 5 जुलाई की देर रात ब्लॉक कर दिए गए थे; आईटी मंत्रालय ने कहा था कि इसके लिए “कोई ज़रूरत नहीं” थी। एक्स ने कहा कि उसे 3 जुलाई को हैंडल ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था।
केंद्र सरकार के बयान का खंडन करते हुए, एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने मंगलवार (8 जुलाई, 2025) को एक बयान में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने वास्तव में फर्म से 2,000 से अधिक अन्य खातों के अलावा, समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हैंडल तक पहुंच को अवरुद्ध करने का अनुरोध किया था।
कानूनी चुनौती
एक्स ने कहा कि वह “इन कार्यकारी आदेशों के खिलाफ कानूनी चुनौतियां लाने की अपनी क्षमता में भारतीय कानून द्वारा प्रतिबंधित है” और “इन अवरुद्ध आदेशों के कारण भारत में चल रही प्रेस सेंसरशिप के बारे में गहराई से चिंतित है”।
लेकिन, आईटी मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने जवाब दिया कि सरकार ने 3 जुलाई, 2025 को कोई नया अवरोधन आदेश जारी नहीं किया है, और इसका रॉयटर्स और रॉयटर्सवर्ल्ड सहित किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को अवरुद्ध करने का कोई इरादा नहीं है।
एक घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग
एक्स का कहना है, कि 2,355 अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश 3 जुलाई, 2025 को जारी किया गया था, जिसमें “एक घंटे के भीतर” कार्रवाई करने की मांग की गई थी। घटना में, ऐसा प्रतीत हुआ कि प्लेटफ़ॉर्म ने शनिवार (5 जुलाई, 2025) की देर शाम को ही अनुरोध पर कार्रवाई की। ब्लॉक किए गए हैंडल में @Reuters और @ReutersWorld शामिल थे, जो प्लेटफ़ॉर्म पर ब्रिटिश न्यूज़वायर एजेंसी के लेखों को क्यूरेट करते हैं। रॉयटर्स और विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय के प्रवक्ताओं ने उस समय द हिंदू की टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
On July 3, 2025, the Indian government ordered X to block 2,355 accounts in India, including international news outlets like @Reuters and @ReutersWorld, under Section 69A of the IT Act. Non-compliance risked criminal liability. The Ministry of Electronics and Information…
— Global Government Affairs (@GlobalAffairs) July 8, 2025
एक्स ने यह भी कहा, कि “जनता के आक्रोश के बाद सरकार ने एक्स से @Reuters और @ReutersWorld को अनब्लॉक करने का अनुरोध किया।”
आईटी मंत्रालय ने क्या कहा?
आईटी मंत्रालय ने रविवार (6 जुलाई, 2025) दोपहर को एक बयान जारी कर कहा, “भारत सरकार को रॉयटर्स हैंडल को बंद करने की कोई आवश्यकता नहीं है,” और यह “समस्या को हल करने के लिए एक्स के साथ लगातार काम कर रहा है।” बाद में उसी दिन, हैंडल को अनब्लॉक कर दिया गया।
“सरकार ने 3 जुलाई, 2025 को कोई नया ब्लॉकिंग आदेश जारी नहीं किया है और रॉयटर्स और रॉयटर्सवर्ल्ड सहित किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को ब्लॉक करने का कोई इरादा नहीं है,” आईटी मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स की पोस्ट के बाद मंगलवार (8 जुलाई, 2025) को एक नए बयान में कहा।
सरकारी गतिविधि क्या रही?
“जैसे ही भारत में रॉयटर्स और रॉयटर्सवर्ल्ड को एक्स प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक किया गया, सरकार ने तुरंत ‘एक्स’ को उन्हें अनब्लॉक करने के लिए लिखा। सरकार ने 5 जुलाई 2025 की देर रात से लगातार ‘एक्स’ के साथ बातचीत की और सख्ती से प्रयास किया। ‘एक्स’ ने अनावश्यक रूप से प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी बातों का फायदा उठाया और यूआरएल को अनब्लॉक नहीं किया। हालांकि, हर घंटे के आधार पर बहुत सारे फॉलोअप के बाद, एक्स ने आखिरकार 6 जुलाई 2025 को रात 9 बजे के बाद रॉयटर्स और अन्य यूआरएल को अनब्लॉक कर दिया। रॉयटर्स को अनब्लॉक करने में उन्हें 21 घंटे से अधिक का समय लगा।”
एक्स ने कहा, “अनुपालन न करने पर आपराधिक दायित्व का जोखिम था [और आदेशों के अनुसार] खातों को अगली सूचना तक अवरुद्ध रखा जाना आवश्यक था।”