Category: Political News

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  • इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    मुंबई एयरपोर्ट पर इंडिगो एयरलाइंस की सर्विस ठप होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सांसद वर्षा गायकवाड ने एयरपोर्ट पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया और सरकार व एयरलाइंस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    मुंबई: पिछले तीन दिनों से देशभर में IndiGo Airlines की फ्लाइट ऑपरेशन में बड़ा बवाल देखने को मिला। इस गड़बड़ी की वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे, जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    न पानी, न सही जानकारी और न स्टाफ की मदद, ऐसा माहौल बना रहा जैसे यात्री “ओलीस” बना दिए गए हों।
    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद प्रा. वर्षा एकनाथ गायकवाड ने इस स्थिति को सरकार की नाकामी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    🔹 सरकार और सिस्टम की बड़ी नाकामी: गायकवाड

    सांसद वर्षा गायकवाड ने मुंबई एयरपोर्ट का दौरा कर यात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा:

    “तीन दिन तक देशभर में फ्लाइट सर्विस ठप रही लेकिन सरकार की तरफ से एक भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यात्रियों को छोड़ दिया गया जैसे उनकी कोई सुनने वाला नहीं। यह नागरी विमानन मंत्रालय की सीधी नाकामी है।”

    🔹 टिकटों के दाम 5 हजार से 60 हजार तक

    इसी दौरान कई यात्रियों ने शिकायत की कि कुछ एयरलाइंस ने हालात का फायदा उठाते हुए टिकटों के दामों में भारी बढ़ोतरी की।

    • जो टिकट पहले ₹5,000 में मिल रहा था
    • वही टिकट ₹50,000 से ₹60,000 तक बेचा गया।

    सांसद गायकवाड ने इसे “यात्रियों की खुली लूट” बताया।

    🔹 यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं

    एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति बेहद खराब रही। कई घंटों तक इंतज़ार के बावजूद:

    • कोई जानकारी नहीं
    • पानी नहीं
    • फूड सप्लाई नहीं
    • हेल्प डेस्क नदारद

    यात्रियों का कहना था कि एयरलाइंस स्टाफ गायब था और कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था।

    🔹 इंडिगो और केंद्र सरकार कैसे भरेंगी भरपाई?

    सांसद वर्षा गायकवाड ने सवाल उठाया:

    “जो बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस अव्यवस्था में फंसे रहे, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? नुकसान की भरपाई सरकार और इंडिगो कैसे करेगी?”

    🔹 जांच, एक्शन और सुधार की मांग

    उन्होंने कहा कि यह केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि ऑपरेशनल फेल्योर है और इसकी:

    • सख्त जांच
    • जिम्मेदारी तय
    • और भविष्य में रोकथाम के लिए सिस्टम सुधार

    जरूरी है।


    ❓ FAQ Section


    Q1. इंडिगो फ्लाइट में समस्या क्यों आई?
    ✔ अभी आधिकारिक कारण अस्पष्ट बताया जा रहा है, लेकिन यह बड़ा ऑपरेशनल और मैनेजमेंट फेल्योर माना जा रहा है।


    Q2. क्या यात्रियों को रिफंड या मुआवज़ा मिलेगा?
    ✔ सांसद वर्षा गायकवाड ने इसकी मांग की है, लेकिन अब तक एयरलाइंस की तरफ से कोई ठोस घोषणा नहीं।


    Q3. क्या सरकार जांच करेगी?
    ✔ मांग की गई है, लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक इन्वेस्टिगेशन आदेश नहीं दिया गया है।


    Q4. क्या टिकटों की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी हुई?
    ✔ हां, यात्रियों ने बताया कि 5 हजार के टिकट 50–60 हजार में बेचे गए।

  • गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    मुंबई के गोरेगांव स्थित विवेक कॉलेज में कथित हिजाब प्रतिबंध को लेकर छात्रों और AIMIM कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन। कॉलेज प्रशासन ने जारी किया लिखित स्पष्टीकरण—”हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं”। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर तीन छात्रों पर FIR दर्ज की।

    मुंबई: गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक विद्याालय एंड जूनियर कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद ने गुरुवार को तूल पकड़ लिया। कुछ छात्राओं और AIMIM मुंबई यूनिट के सदस्यों ने कॉलेज प्रशासन पर हिजाब पहनने पर रोक लगाने का आरोप लगाते हुए कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मामला बढ़ने पर पुलिस ने तीन छात्रों के खिलाफ बिना अनुमति प्रदर्शन और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में FIR दर्ज की। वहीं कॉलेज प्रबंधन ने लिखित बयान जारी कर स्पष्ट किया कि हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं है और पूरा मामला “गलतफहमी” के कारण हुआ।

    कैसे शुरू हुआ विवाद?

    सूत्रों के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने AIMIM से शिकायत की कि कॉलेज में उन्हें कक्षा में प्रवेश करने से पहले हिजाब उतारने के लिए कहा गया। छात्राओं ने इसे धार्मिक आस्था का उल्लंघन बताते हुए आपत्ति जताई।

    इसके बाद AIMIM मुंबई अध्यक्ष फ़ारूक मक़बूल शबदी छात्रों के साथ कॉलेज आए और उन्होंने कॉलेज गेट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला सुर्खियों में आ गया।

    कॉलेज प्रबंधन का स्पष्टीकरण

    विवाद बढ़ता देख कॉलेज की प्रिंसिपल शीजा मेनन ने लिखित बयान जारी करते हुए कहा:

    “हमारे संस्थान में छात्राओं के हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसा कोई आदेश कॉलेज की तरफ से जारी नहीं किया गया है। शायद कुछ गलतफहमी के कारण यह विवाद खड़ा हुआ, जिसकी आवश्यकता नहीं थी।”

    कॉलेज प्रशासन ने यह भी कहा कि वे विविध समुदायों का सम्मान करते हैं और संस्थान में सभी छात्रों के लिए समान और सुरक्षित माहौल बनाए रखना उनका उद्देश्य है।

    पुलिस की कार्रवाई

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    गोरेगांव पुलिस स्टेशन ने बताया कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए तीन छात्रों के खिलाफ BNSS की धारा 35(3) के तहत FIR दर्ज की गई। हालांकि किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।

    बाद में पुलिस स्टेशन में बैठक हुई, जिसमें:

    • प्रबंधन का लिखित स्पष्टीकरण पढ़ा गया
    • AIMIM प्रतिनिधियों और छात्राओं को जानकारी दी गई
    • सभी पक्ष सहमत हुए कि मामला समझौते के साथ शांतिपूर्वक समाप्त किया जाए

    पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में कोई तनाव या सांप्रदायिक असहमति नहीं है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    विवाद की जानकारी मिलते ही पूर्व बीजेपी पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा अपने कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उन्हें स्थिति समझाई, जिसके बाद वे वापस लौट गए।

    सोशल मीडिया में बहस

    यह मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे “धार्मिक आज़ादी का मामला” बताया, जबकि कुछ ने छात्रों द्वारा बिना परमिशन प्रदर्शन करने पर सवाल उठाए।

    जमीनी हकीकत

    जबकि प्रदर्शन से पहले जिसमें बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोका जाता हुआ वीडियो सामने आया। वीडियो में छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच बहस होती भी दिखाई दी। कुछ छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाया, तो कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर नियम पसंद नहीं है, तो प्रवेश रद्द करा दें।

    1 दिसंबर को एआईएमआईएम की एडवोकेट जाहानारा शेख के साथ कई छात्राएं गोरगांव वेस्ट के टीन डोंगरी स्थित गोरेगांव पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

    एडवोकेट जाहानारा शेख के मुताबिक, “हमने नियम वापस लेने की मांग रखी है, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि वह प्रबंधन से बात करने के बाद ही फैसला लेंगी।” इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नही किया गया। उसके बाद ही छात्रों ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।


    FAQs

    Q1: विवाद किस कॉलेज में हुआ?
    ➡ गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक कॉलेज में।

    Q2: FIR क्यों दर्ज की गई?
    ➡ बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सरकारी आदेश की अवहेलना के आरोप में।

    Q3: क्या कॉलेज ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाया था?
    ➡ कॉलेज ने लिखित में स्पष्ट किया—हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं।

    Q4: क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है?
    ➡ नहीं, सिर्फ नोटिस देकर मामला शांतिपूर्वक सुलझाया गया।

    Q5: प्रदर्शन कौन आयोजित कर रहा था?
    ➡ AIMIM कार्यकर्ताओं और कुछ छात्राओं ने भाग लिया।

  • मुंबई के कॉलेज में बुर्का बैन पर हंगामा

    मुंबई के कॉलेज में बुर्का बैन पर हंगामा

    गोरगांव के विवेक विद्यालय जूनियर कॉलेज में कक्षा के अंदर बुर्का पहनने पर पाबंदी लगाने के फैसले के बाद छात्रों ने कड़ा विरोध जताया। AIMIM की मदद के बाद मामला पुलिस स्टेशन पहुंचा।

    मुंबई: गोरगांव स्थित विवेक विद्यालय जूनियर कॉलेज में कक्षाओं के अंदर बुर्का पहनने पर नया नियम लागू होने के बाद विवाद बढ़ गया है। पहले जहां इस कॉलेज में बुर्का पहनकर कक्षाओं में प्रवेश की अनुमति थी, वहीं अब अचानक इस ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है। इस निर्णय के खिलाफ कई छात्राओं ने आपत्ति जताई है और विरोध के लिए आवाज भी उठाई है।

    विरोध क्यों शुरू हुआ?

    कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार अब छात्राएं क्लास रुम के अंदर बुर्का नहीं पहन सकेंगी। प्रशासन का कहना है कि किसी भी धार्मिक पहचान को दर्शाने वाली पोशाक कॉलेज के माहौल और ड्रेस कोड के खिलाफ है। हालांकि, हिजाब और सिर पर दुपट्टा पहनने की अनुमति अब भी जारी है।

    कुछ छात्राओं ने बताया कि उन्हें कॉलेज आने पर पहले बुर्का उतारना पड़ता है और क्लास खत्म होने के बाद फिर से पहनना पड़ता है। इससे वे खुद को असहज और असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ा

    स्थानीय न्यूज़ पोर्टल द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोका जाता हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच बहस होती भी दिखाई देती है।

    कुछ छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाया, तो कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर नियम पसंद नहीं है, तो प्रवेश रद्द करा दें।

    मामला अब पुलिस स्टेशन पहुंचा

    1 दिसंबर को AIMIM की एडवोकेट जाहानारा शेख के साथ कई छात्राएं गोरगांव वेस्ट के टीन डोंगरी पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

    एडवोकेट जाहानारा शेख के मुताबिक:

    “हमने नियम वापस लेने की मांग रखी है, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि वह प्रबंधन से बात करने के बाद ही फैसला लेंगी।”

    इस मामले पर कॉलेज प्रबंधन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    सिर्फ जूनियर कॉलेज सेक्शन को नियम लागू

    ध्यान देने योग्य बात यह है कि बुर्का बैन का यह नियम सिर्फ जूनियर कॉलेज पर लागू किया गया है, जबकि सीनियर कॉलेज की छात्राओं पर इसका कोई असर नहीं होगा।
    इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इस फैसले पर सामाजिक बहस

    मुंबई में सामान्य तौर पर कॉलेज ड्रेस कोड जींस, शॉर्ट्स या ट्रेंडी फैंशन तक सीमित होते हैं, लेकिन धार्मिक पहचान पर प्रतिबंध का यह मामला अब ड्रेस कोड बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बड़ी बहस में बदल चुका है।


    FAQ

    1- क्या कॉलेज में पूरी तरह बुर्का पहनना बंद है?
    नहीं, कॉलेज कैंपस में आने पर बुर्का पहनने पर प्रतिबंध नहीं है। पाबंदी सिर्फ कक्षाओं के अंदर है।

    2- हिजाब पहनने की अनुमति है?
    हाँ, कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिजाब और साधारण हेडस्कार्फ की अनुमति दी जाएगी।

    3- क्या मामला कानूनी स्तर पर गया है?
    फिलहाल मामला पुलिस स्टेशन पहुंचा है, पर कोई कानूनी कार्रवाई दर्ज नहीं हुई है।

    4- क्या नियम पूरे कॉलेज में लागू है?
    नहीं, अभी नियम सिर्फ जूनियर कॉलेज पर लागू किया गया है।

  • शिवधाम संकुल में नागरिक समस्याओं का दौरा, MLA सुनील प्रभु ने दिए निर्देश

    शिवधाम संकुल में नागरिक समस्याओं का दौरा, MLA सुनील प्रभु ने दिए निर्देश

    मालाड पूर्व — शिवधाम संकुल में सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीर्वेज लाइन और भटकते कुत्तों जैसी नागरिक समस्याओं को लेकर MLA सुनील प्रभु ने स्थल निरीक्षण किया। मरम्मत और सुधार कार्यों के लिए नगरपालिका अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

    मुंबई: मालाड (पूर्व) के प्रभाग क्रमांक 44 स्थित शिवधाम संकुल में नागरिकों की बढ़ती समस्याओं को लेकर स्थानीय विधायक सुनील प्रभु ने मंगलवार दोपहर मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मलनिस्सारण लाइन, सड़कों के कंक्रीटीकरण, स्ट्रीट लाइट, भटकते कुत्तों और फायर ब्रिगेड के पीछे बने कबूतरखाने सहित कई मुद्दों पर नागरिकों से चर्चा की और तुरंत समाधान के निर्देश दिए।

    🔹 सड़क और सीवरेज की खराब स्थिति पर MLA का फोकस

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि शिवधाम संकुल के कई अंदरूनी रास्ते टूटे हुए हैं और बरसात के बाद से स्थिति और बिगड़ गई है।
    सीवरेज लाइन की सफाई और मरम्मत पर भी नागरिकों ने शिकायत की।

    👉 इस पर MLA सुनील प्रभु ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि

    • सड़क का कंक्रीटीकरण जल्द पूरा करें
    • सीवरेज लाइन की तुरंत सफाई और मरम्मत शुरू करें
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    🔹 स्ट्रीट लाइट बंद — दो बड़े हॉलोजन लगाने का आदेश

    स्ट्रीट लाइट बंद होने से रात में अंधेरा और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।
    जब तक सड़क का काम पूरा नहीं होता तब तक MLA ने निर्देश दिया कि
    ✔ दो बड़े हॉलोजन लाइट तुरंत लगाई जाएं।

    🔹 बैरिकेड्स हटाने के निर्देश — नागरिकों को आराम

    ओबेरॉय मॉल के सामने लगे बैरिकेड्स के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही थी।
    नागरिकों ने यह मुद्दा उठाया तो MLA ने संबंधित अधिकारियों को आज के आज बैरिकेड्स हटाने का आदेश दिया।

    🔹 म्हाडा पार्क की बदहाल स्थिति पर चर्चा

    संकुल में म्हाडा के अंतर्गत बने उद्यान की देखभाल न होने पर नागरिकों ने नाराज़गी जताई।
    सुनील प्रभु ने आश्वासन दिया कि
    👉 म्हाडा प्रशासन से बात कर उद्यान का नवीनीकरण जल्द करवाया जाएगा।

    🔹 निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे

    इस निरीक्षण के दौरान शिवसेना के कई स्थानीय पदाधिकारी और संकुल की विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधि मौजूद थे —
    शाखा प्रमुख सुभाष धनुका, उपशाखाप्रमुख शैलेश जाधव, अशोक दैने, युवासेना उपशाखाधिकारी आर्यन जाधव, मंगेश चव्हाण, शिवधाम सेवा मंडल के अध्यक्ष रविंद बोभाटे, सचिव जितेंद्र पराडकर ऐसे ही विभिन्न गृहनिर्माण सोसायटी के पदाधिकारी संतोष नाझरे, रामचंद्र म्हापणकर, अरुण वाघ, कुंदन गोस्वामी, सुरेश गोसवी, अनंत ठाकरे, सुनील मोरे, प्रथमेश वेंगुर्लेकर समेत बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल थे।


    ❓ FAQ — शिवधाम संकुल नागरिक समस्या दौरे पर

    प्रश्नउत्तर
    दौरा किसने किया?स्थानीय MLA सुनील प्रभु ने।
    मुख्य समस्याएं क्या थीं?टूटी सड़कें, बंद स्ट्रीट लाइट, सीवेज लाइन, भटके कुत्ते, बैरिकेड्स और पार्क की स्थिति।
    क्या अधिकारियों को निर्देश दिए गए?हां, तुरंत मरम्मत और कार्रवाई शुरू करने को कहा गया।
    बैरिकेड हटाने की मांग पर क्या आदेश दिया गया?आज ही हटाने और नागरिकों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के निर्देश।
    म्हाडा पार्क को लेकर क्या निर्णय लिया गया?नवीनीकरण के लिए म्हाडा के साथ फॉलो-अप करने का आश्वासन।
  • मालाड पूर्व के विजय सालसकर उद्यान का नवीनीकरण तेज़, जल्द खुलेगा नागरिकों के लिए

    मालाड पूर्व के विजय सालसकर उद्यान का नवीनीकरण तेज़, जल्द खुलेगा नागरिकों के लिए

    मालाड पूर्व के रहेजा कॉम्प्लेक्स में स्थित विजय सालसकर उद्यान का नवीनीकरण तेज़ी से पूरा हो रहा है। विधायक सुनील प्रभू ने निरीक्षण कर जल्द शुरू करने का आश्वासन दिया।

    मुंबई: मालाड पूर्व में रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास स्थित स्वर्गीय विजय सालसकर उद्यान अब नई चमक के साथ तैयार हो रहा है। स्थानीय नागरिकों की लंबे समय से चल रही मांग और विधायक सुनील प्रभू के लगातार प्रयासों के बाद उद्यान का नवीनीकरण अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। बुधवार को विधायक प्रभू ने मौके पर जाकर काम की प्रगति का निरीक्षण किया और भरोसा दिलाया कि यह उद्यान जल्द ही आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

    ⭐ उद्यान की स्थिति और नवीनीकरण का सारांश

    मालाड पूर्व के वॉर्ड 36 में स्थित यह उद्यान कई सालों से जर्जर अवस्था में था। न मॉर्निंग वॉक के लिए पर्याप्त जगह, न बच्चों के खेलने की कोई सुविधा—स्थानीय लोग लगातार परेशान थे। विधायक सुनील प्रभू ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) से बजट मंजूरी के लिए लगातार फॉलो-अप किया और अब 6,500 वर्गमीटर के इस उद्यान को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।

    🏞️ उद्यान में क्या-क्या बदलेगा? — नवीनीकरण की प्रमुख बातें

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    1️⃣ 6500 वर्ग मीटर में आधुनिक सुविधाओं की नई लिस्ट

    विजय सालसकर उद्यान को पूरी तरह से रीडिज़ाइन किया जा रहा है, जिसमें नागरिकों की हर उम्र को ध्यान में रखा गया है।

    ✔ लिटिल किड्स प्ले ज़ोन

    • बच्चों के लिए सुरक्षित रॉक क्लाइम्बिंग गेम
    • नई प्ले-स्ट्रक्चर और ओपन एरिया

    ✔ फिटनेस कॉर्नर

    • आधुनिक व्यायाम उपकरण
    • ओपन जिम जैसा अनुभव देने वाली मशीनें

    ✔ वॉकिंग ट्रैक

    • मॉर्निंग वॉकर्स के लिए मजबूत और चौड़ा वॉकवे
    • एंटी-स्किड सरफेस

    ✔ सीनियर सिटिजन कॉर्नर

    • आरामदायक आसन व्यवस्था
    • शांत बैठने और मिलने-जुलने की जगह

    ✔ व्यूइंग गैलरी

    • कॉलोनी को देखते हुए डिजाइन की गई गैलरी
    • परिवारों और बच्चों के लिए आकर्षण

    ✔ हरियाली और साफ-सुथरापन

    • पूरे उद्यान में नई प्राकृतिक घास
    • उद्यान की दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग्स और रंगरंगोटी

    🧑‍⚖️ निरीक्षण के दौरान कौन-कौन मौजूद रहा?

    निरीक्षण दौरे में विधायक एवं विभाग प्रमुख सुनील प्रभू के साथ कई पदाधिकारी मौजूद थे, जिनमें शामिल हैं:

    • शिवसेना महिला विधानसभा संघटक रीनाताई सुर्वे
    • वॉर्ड 36 के पूर्व नगरसेवक सुनील गुजर
    • रुचिता आरोसकर
    • कृष्णा सुर्वे
    • अशोक राणे
    • अल्पेश चव्हाण
    • बाळा शिरोडकर
    • वामन तिरोडकर
    • सुरेश करपे
    • सुशांत पांचाळ
    • सुशांत पारकर
    • अतुल पाखरे
      …और अन्य शिवसेना पदाधिकारी व कार्यकर्ता।

    विधायक ने अधिकारियों अमोल हितापे और ज्योती तुडस के साथ उद्यान का पूरा निरीक्षण किया और आवश्यक सुझाव भी दिए।


    ❓ FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    1. विजय सालसकर उद्यान कब तक खुलेगा?

    निरीक्षण के दौरान विधायक सुनील प्रभू ने बताया कि नवीनीकरण लगभग पूरा है और उद्यान जल्द ही नागरिकों के लिए खुल जाएगा।

    2. उद्यान में कौन-कौन सी नई सुविधाएँ मिलेंगी?

    यहाँ बच्चों के लिए रॉक क्लाइम्बिंग, वॉकिंग ट्रैक, एक्सरसाइज उपकरण, सीनियर सिटिजन बैठने की जगह, व्यूइंग गैलरी और नई हरियाली जोड़ी जा रही है।

    3. उद्यान कितनी बड़ी जगह में फैला है?

    पूरा उद्यान करीब 6,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है।

    4. यह उद्यान किस इलाके में स्थित है?

    यह मालाड पूर्व के रहेजा कॉम्प्लेक्स, वॉर्ड 36 में स्थित है।

  • गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    शिवसेना नेता और पूर्व महापौर सुनील प्रभु ने गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण कार्य का बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधाओं और भविष्य में होने वाली ट्रैफिक समस्याओं पर तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर चल रहे विकास कार्यों का शिवसेना नेता और विधायक सुनील प्रभु ने सोमवार को बीएमसी अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने नागरिकों को हो रही समस्याओं का जायजा लिया और संबंधित विभागों को कई सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

    🏗️ स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश

    विधायक सुनील प्रभु ने बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण से श्रमसाफल्य सोसायटी, श्रीकृष्ण नगर, जयभीम नगर और दिंडोशी महानगरपालिका वसाहत जैसे इलाकों के नागरिकों को असुविधा हो रही है।
    उन्होंने बीएमसी के रस्ता विभाग, पूल विभाग और परिरक्षण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि

    • श्रीकृष्ण नगर के नागरिकों के लिए संतोष नगर बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए अंडरपास (भुयारी मार्ग) बनाया जाए।
    • पर्जन्य जल वाहिनी (ड्रेनेज लाइन) को सड़क के एक ओर स्थानांतरित कर नया निर्माण किया जाए।
    • गणेश मंदिर-इंदिरा विकास केंद्र मार्ग पर नागरिकों और वाहनों को सुगम आवागमन की सुविधा दी जाए।
    • बीएसटी बसों के लिए टर्मिनल पॉइंट तैयार किया जाए ताकि यातायात में बाधा न आए।

    🚧 आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधा के लिए भी निर्देश

    निरीक्षण के दौरान सुनील प्रभु ने यह भी बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के टनल निर्माण कार्य के चलते बालासाहेब फालके चित्रनगरी के हबाले आदिवासी पाड़ा में लोगों का मुख्य मार्ग बंद हो गया था, जिससे उन्हें आवाजाही में भारी दिक्कतें हो रही थीं।
    अब बीएमसी ने इस “मिसिंग लिंक रोड” का काम शुरू कर दिया है, जिसका शुभारंभ स्वयं सुनील प्रभु ने किया।

    🚦 भविष्य की ट्रैफिक समस्या पर भी होगी बैठक

    दादासाहेब फालके चित्रनगरी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास उड्डाणपुल का एग्जिट पॉइंट बनने वाला है।
    विधायक ने बताया कि इस क्षेत्र में भविष्य में वाहन जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
    इसलिए उन्होंने बीएमसी के पूल विभाग, रस्ते विभाग और परिरक्षण विभाग को नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए ताकि पहले से योजना बनाई जा सके।

    👥 अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

    निरीक्षण के दौरान विधायक सुनील प्रभु के साथ
    ** पूर्व उपमहापौर सुहास वाडकर**,
    *पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे*,
    ** उद्धव ठाकरे गुट के शाखाप्रमुख संपत मोरे**,
    तथा बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    💬 सुनील प्रभु ने क्या कहा

    “हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़क और पुल नहीं बनाना है, बल्कि आसपास के नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बीएमसी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों की जरूरतें पूरी हों और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रहे।”
    — सुनील प्रभु, विधायक (शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट)


    ❓ FAQ सेक्शन:

    Q1. गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड का निरीक्षण किसने किया?
    विधायक और शिवसेना नेता सुनील प्रभु ने बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।
    Q2. निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को समझना, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना और निर्माण कार्य में आवश्यक बदलाव के निर्देश देना।
    Q3. कौन-कौन से इलाके प्रभावित हैं?
    श्रीकृष्ण नगर, दिंडोशी, जयभीम नगर और हबाले आदिवासी पाड़ा जैसे इलाके इस परियोजना से प्रभावित हैं।
    Q4. ट्रैफिक को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
    फालके चित्रनगरी के पास संभावित ट्रैफिक जाम को रोकने के लिए नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
    Q5. इस मौके पर और कौन मौजूद थे?
    उपमहापौर सुहास वाडकर, पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे और बीएमसी अधिकारी।

  • दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दहिसर टोल प्लाजा का निरीक्षण कर अधिकारियों को 13 नवंबर तक टोल हटाने की अंतिम चेतावनी दी। कहा – “समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल उखाड़ दूंगा।”

    मुंबई: दहिसर टोल प्लाजा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शनिवार को टोल प्लाजा का निरीक्षण करते हुए 13 नवंबर तक इसे हटाने की डेडलाइन दी।
    उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी —

    “अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं खुद जाकर टोल प्लाजा उखाड़ दूंगा।”

    इस बीच भाजपा ने टोल को हाईवे पर शिफ्ट करने का विरोध किया है, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    टोल प्लाजा हटाने पर विवाद क्यों?

    दहिसर टोल प्लाजा पर लगातार ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है। इसी वजह से टोल को स्थानांतरित करने की मांग उठ रही थी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अधिकारियों को यह टोल हटाने और इसे वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज पार शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।

    लेकिन इस प्रस्ताव का भाजपा और मंत्री गणेश नाईक ने खुलकर विरोध किया। इससे सरकार के अंदर ही मतभेद उभर आए हैं।

    निरीक्षण में भड़के सरनाईक

    शनिवार सुबह प्रताप सरनाईक दहिसर टोल प्लाजा पहुंचे। निरीक्षण के दौरान मुंबई पुलिस, MSRDC, मनपा, टोल कंपनी और परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
    लेकिन सरनाईक ने देखा कि एक तरफ से फ्रेम हटाने के अलावा कोई ठोस काम नहीं हुआ। जब अधिकारियों ने और वक्त मांगा, तो मंत्री नाराज़ हो गए और कहा —

    “13 नवंबर को मैं फिर आऊंगा। अगर तब भी यही हाल रहा, तो खुद टोल बूथ तोड़ दूंगा।”

    निरीक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन

    सरनाईक जब टोल को वर्सोवा क्रीक ब्रिज के पार स्थानांतरित करने का निरीक्षण करने पहुंचे, तो कांग्रेस नेता विजय पाटिल और उनके समर्थकों ने विरोध जताया।
    विरोधियों ने कहा —

    “मुंबई का टोल प्लाजा वसई क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता। यहां पहले से सड़कों की हालत खराब है, ट्रैफिक भी है। यह स्वीकार्य नहीं होगा।”

    सड़क साफ करने और डिवाइडर हटाने के आदेश

    निरीक्षण के बाद मंत्री सरनाईक ने मुंबई की ओर आने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर हटाने और
    वाहनों के लिए रास्ता खोलने का आदेश दिया।
    उन्होंने कहा कि

    • क्रेन, बेंच और अन्य बाधाएं हटाई जाएं।
    • अनावश्यक होर्डिंग, लोहे के खंभे और अतिरिक्त बूथ तोड़े जाएं।
    • केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए जरूरी बूथ ही रहें।

    साथ ही, मीरा-भायंदर की ओर आने वाले टोल बूथ को भी शिफ्ट करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।


    FAQ

    1. दहिसर टोल हटाने की आखिरी तारीख क्या है?
    → परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 13 नवंबर तक की डेडलाइन दी है।
    2. उन्होंने क्या चेतावनी दी?
    → सरनाईक ने कहा, “अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल तोड़ दूंगा।”
    3. टोल को कहां शिफ्ट करने का प्रस्ताव है?
    → वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज के पार स्थानांतरित करने की बात चल रही है।
    4. किसने विरोध किया है?
    → भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने प्रस्तावित शिफ्टिंग का विरोध किया है।

  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 2018 के रेल रोको मामले में मुंबई की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने बरी कर दिया। अदालत ने कहा — सबूतों में संदेह है, CCTV फुटेज स्पष्ट नहीं है।

    मुंबई: विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी कर दिया है। यह मामला 10 सितंबर 2018 का है, जब निरुपम ने कांग्रेस मुंबई अध्यक्ष के रूप में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ देशव्यापी बंद का हिस्सा बनकर अंधेरी स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया था।

    🚉 क्या था मामला?

    पुलिस के अनुसार, संजय निरुपम सुबह 9:30 बजे अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। वे 50–60 पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे थे और विरोध के दौरान वे प्लेटफॉर्म 3 और 4 के बीच ट्रैक पर बैठ गए। रेलवे स्टाफ ने रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके चलते बोरीवली स्लो लोकल को 7 मिनट की देरी हुई।
    अंधेरी पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज कर ली और घटना की तस्वीरें व सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश किए।

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    🧾 अदालत ने सबूतों पर उठाए सवाल

    न्यायाधीश वी.यू. मिसाल ने कहा कि पुलिस द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं और इनसे यह साबित नहीं होता कि निरुपम ने ही ट्रैक पर बैठकर ट्रेन रोकी थी।
    उन्होंने कहा —

    “केवल CCTV के प्रिंटआउट पेश करने से सबूत साबित नहीं होते। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के प्रावधान पूरे न होने तक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्य नहीं माना जा सकता।”

    इसके अलावा, अदालत ने कहा कि ट्रेन में देरी को लेकर पुलिस के दावे पर भी उचित सबूत नहीं दिए गए हैं।

    “यह साबित नहीं किया जा सका कि बोरीवली स्लो लोकल की देरी सीधे तौर पर संजय निरुपम की वजह से हुई थी,” न्यायाधीश ने कहा।

    🧩 ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाए जाने का संकेत

    अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब उस दिन विरोध प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेता, जिनमें अशोक चव्हाण (अब बीजेपी में) भी मौजूद थे, तो सिर्फ निरुपम के खिलाफ ही केस क्यों दर्ज किया गया?
    न्यायाधीश ने कहा —

    “ऐसा प्रतीत होता है कि निरुपम को इस मामले में एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाकर फंसाया गया था।”

    🗣️ संजय निरुपम ने दी प्रतिक्रिया

    फैसले के बाद संजय निरुपम ने कहा —

    “सात साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच्चाई की जीत हुई। मैंने जनता की आवाज़ उठाई थी, कोई अपराध नहीं किया था।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. संजय निरुपम को किस मामले में बरी किया गया है?
    👉 उन्हें 2018 के रेल रोको आंदोलन के मामले में बरी किया गया है, जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुआ था।
    Q2. घटना कहां हुई थी?
    👉 यह घटना अंधेरी रेलवे स्टेशन, मुंबई पर हुई थी।
    Q3. पुलिस ने क्या आरोप लगाए थे?
    👉 पुलिस ने कहा था कि निरुपम ने ट्रैक पर बैठकर लोकल ट्रेन को सात मिनट रोका था।
    Q4. कोर्ट ने क्या कहा?
    👉 कोर्ट ने कहा कि सबूत अस्पष्ट हैं और CCTV फुटेज से निरुपम की उपस्थिति साबित नहीं होती।
    Q5. निरुपम ने क्या प्रतिक्रिया दी?
    👉 उन्होंने कहा कि यह फैसला न्याय की जीत है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया था।

  • उपपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मालवणी के सरकारी जमीन अतिक्रमणमुक्त!

    उपपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मालवणी के सरकारी जमीन अतिक्रमणमुक्त!

    मुंबई के मालाड-मालवणी इलाके में बीएमसी और कलेक्टर विभाग ने मिलकर बड़ी कार्रवाई की। 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन से अवैध झोपड़ियां हटाई गईं। कार्रवाई पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के आदेश पर की गई।

    मुंबई: मालाड (पश्चिम) के मालवणी इलाके में बृहन्मुंबई महानगर पालिका और कलेक्टर विभाग की सरकारी यंत्रणाओं ने मिलकर बड़ी अतिक्रमणविरोधी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में करीब 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त किया गया। यह कार्रवाई बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के अतिक्रमण की शिकायतों के बाद की गई।

    इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उपपालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया, जिन्होंने इस पर तीन बार — 17 अक्टूबर, 27 अक्टूबर और 6 नवंबर को लगातार बैठकें लेकर स्थिति की समीक्षा की थी। लोढ़ा ने साफ शब्दों में कहा कि “सरकारी जमीन पर कोई भी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

    🏗️ पहले चरण में मिली बड़ी सफलता

    बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में मालवणी और मालाड के आसपास स्थित सरकारी जमीन से झोपड़पट्टियों को हटाया गया है। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बने घरों, झोपड़ियों और टीन के शेड को जेसीबी मशीन की मदद से तोड़ा गया। प्रशासन का कहना है कि आगे भी इस तरह की अतिक्रमणविरोधी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि किसी को भी दोबारा अवैध निर्माण करने का मौका न मिले।

    🧱 लोढ़ा ने दिए नए निर्देश: संरक्षक दिवार और अंगणवाड़ी के लिए निधी

    कार्रवाई के बाद पालक मंत्री लोढ़ा ने अधिकारियों को आदेश दिया कि जहाँ जमीन खाली कराई गई है, वहाँ तुरंत “संरक्षक दिवार” (बाउंड्री वॉल) का निर्माण किया जाए, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
    साथ ही, स्थानीय बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोढ़ा ने अंगणवाड़ी केंद्रों के लिए निधी जारी करने के निर्देश भी दिए।

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    सैकड़ों परिवार हुए बेघर

    इस तोड़क कार्रवाई से प्रभावित परिवारों पर अगर नजर डालें, तो अली तलाव गावदेवी मंदिर के पास, राठोडी और चिकूवाडी मे हुए तोड़क कार्रवाई से सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं। पीड़ितों का कहना है कि सरकार को अगर इस जमीन की इतनी ज्यादा जरूरत थी तो हमारे लिए भी पर्याय व्यवस्था की जानी चाहिए थी। ये रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर हमारे उपर ज़ुल्म किया गया है। बांगलादेशी और रोहिंग्या के नाम पर हमारी जांच तो करते, लेकिन इन्होंने जांच नही की। कुछ लोगों ने प्रशासन की सख्ती को लेकर बददुआएं भी दी।


    ❓FAQ सेक्शन

    Q1. मालवणी में कितनी जमीन अतिक्रमणमुक्त की गई?
    👉 करीब 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन बीएमसी और कलेक्टर प्रशासन ने खाली कराई।
    Q2. यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?
    👉 कार्रवाई उपपालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के आदेशानुसार हुई।
    Q3. क्या कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी?
    👉 हाँ, अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
    Q4. खाली जमीन का क्या उपयोग होगा?
    👉 वहाँ संरक्षक दिवार और अंगणवाड़ी केंद्र बनाए जाने की योजना है।