Category: Political News

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  • धनवान क्यों छोड़ रहे हैं भारत? असुरक्षा और नफरत की राजनीति ने खड़ा किया बड़ा सवाल

    धनवान क्यों छोड़ रहे हैं भारत? असुरक्षा और नफरत की राजनीति ने खड़ा किया बड़ा सवाल

    भारत में अमीर लोग क्यों छोड़ रहे हैं देश? सुरक्षा, राजनीति और नफरत के माहौल पर उठ रहे गंभीर सवाल। क्या गांधी और गोडसे की विचारधारा के बीच बंट रहा है भारत?


    आजादी के 75 साल बाद भी भारत एक नए तरह के बंटवारे से गुजर रहा है। 1947 में जहां सीमा रेखाओं ने भारत और पाकिस्तान को अलग किया था, वहीं अब विचारधाराओं ने भारत को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक हिस्सा गांधी के सत्य-अहिंसा के रास्ते पर है और दूसरा गोडसे की नफरत और हिंसा की सोच पर।


    आज का भारत – दो विचारधाराओं में बंटा

    भारत में एक तरफ गांधी के अनुयायी हैं जो शांति, भाईचारे और अहिंसा की राह पर भरोसा करते हैं, तो दूसरी तरफ गोडसे को आदर्श मानने वाली सोच है, जो नफरत और हिंसा की राजनीति को बढ़ावा देती है। आज हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद का मुद्दा उसी नीतिगत राजनीति का हिस्सा बन गया है।

    अमीर लोग क्यों छोड़ रहे हैं भारत?

    1947 के बंटवारे में धनवान लोग सुरक्षा के डर से देश छोड़ गए थे। ठीक उसी तरह आज के हालात में करोड़पति और अमीर व्यापारी भारत छोड़कर विदेशों में बस रहे हैं। खासकर गुजरात और मुंबई के कई बड़े बिजनेसमैन मुस्लिम देशों या यूरोप-अमेरिका में जाकर खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।


    सत्ता और नफरत की राजनीति

    इतिहास गवाह है कि हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार बनाई थी। आज वही सोच अलग-अलग रूप में सामने आ रही है। विपक्ष को “मुस्लिम परस्त” बताकर सत्ता में बने रहने का खेल जारी है। नतीजा यह है कि समाज में डर, असुरक्षा और नफरत का माहौल तैयार कर दिया गया है।


    सुरक्षा का भ्रम और असलियत

    अगर हिंदू राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री, गवर्नर, सेना और पुलिस विभाग में बहुसंख्यक होने के बावजूद खुद को असुरक्षित मानने लगे तो सवाल यह उठता है कि आखिर असुरक्षित कौन है? हकीकत यह है कि डर और असुरक्षा का माहौल जानबूझकर फैलाया जा रहा है ताकि सत्ता मजबूत बनी रहे।


    कोहली ने भी छोड़ा भारत?

    ताज़ा खबरों में दावा किया जा रहा है कि भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली ने भी नागरिकता छोड़ इंग्लैंड शिफ्ट कर लिया। उनका कहना है कि भारत उनके परिवार के लिए सुरक्षित जगह नहीं रहा। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की बात नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सोच को झकझोर देने वाला सवाल है।


    समाज पर असर

    जातिगत और धार्मिक तनाव ने समाज को खोखला कर दिया है। पत्रकारों, वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सच बोलने पर जेल भेजा जा रहा है। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है। यही वजह है कि करोड़पति और पढ़े-लिखे भारतीय विदेशों में बसना पसंद कर रहे हैं।


    ❓ FAQ

    Q1. भारत के अमीर लोग विदेश क्यों जा रहे हैं?
    👉 असुरक्षा, राजनीतिक माहौल, टैक्स का बोझ और बच्चों के भविष्य की चिंता इसकी बड़ी वजहें हैं।

    Q2. क्या भारत गांधी और गोडसे की विचारधारा में बंट गया है?
    👉 हाँ, एक ओर गांधी का अहिंसा मार्ग है तो दूसरी ओर गोडसे की नफरत की राजनीति।

    Q3. क्या सच में विराट कोहली ने भारत छोड़ दिया?
    👉 रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।

    Q4. क्या भारत में हिंदू असुरक्षित हैं?
    👉 बहुसंख्यक होते हुए भी असुरक्षा का डर फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविक खतरा सामाजिक विभाजन और नफरत की राजनीति से है।

  • महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: अब दुकानें, मॉल और रेस्टोरेंट्स रहेंगे 24×7 खुले, कारोबारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

    महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: अब दुकानें, मॉल और रेस्टोरेंट्स रहेंगे 24×7 खुले, कारोबारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

    महाराष्ट्र सरकार ने दुकानों, मॉल्स और रेस्टोरेंट्स को हफ्ते के सातों दिन 24×7 खोलने की इजाज़त दी है। कुछ कारोबारी इसे रोजगार और नाइट इकॉनमी के लिए गेमचेंजर बता रहे हैं, तो कुछ ने सुरक्षा और खर्च बढ़ने की आशंका जताई।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को नया सर्कुलर जारी किया जिसमें दुकानों, रेस्टोरेंट्स, मॉल्स, मल्टीप्लेक्स और दूसरे कमर्शियल प्रतिष्ठानों को 24 घंटे खुले रखने की अनुमति दी गई है। हालांकि शराब बेचने वाले या परोसने वाले बार और वाइन शॉप्स को इससे बाहर रखा गया है।

    सरकार का मानना है कि इससे नाइट-टाइम इकॉनमी (Night-time Economy) को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के मौके बढ़ेंगे और मुंबई को असली ग्लोबल सिटी बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

    खुश कारोबारियों ने फैसले को बताया गेमचेंजर

    मुंबई की कई बड़ी एसोसिएशनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

    • Retailers Association of India (RAI) के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा – “हम लंबे समय से इस पर जोर दे रहे थे। इससे ग्राहकों को जब चाहें खरीदारी की सुविधा मिलेगी और रिटेलर्स भी बेहतर सर्विस दे पाएंगे।”
    • Hotel and Restaurant Association Western India (HRAWI) के प्रवक्ता प्रदीप शेट्टी ने इसे “ऐतिहासिक और मुंबई को ग्लोबल सिटी बनाने वाला कदम” बताया। उनका कहना है कि यह फैसला युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगा और टूरिज़्म सेक्टर को मजबूत करेगा।

    छोटे कारोबारियों ने उठाई सुरक्षा और खर्च की चिंता

    जहां बड़े बिज़नेस हब और मॉल मालिक इस फैसले को सराह रहे हैं, वहीं छोटे व्यापारी और होटल मालिक इससे चिंतित हैं।

    • विजय शेट्टी (चेंबूर के होटल मालिक) ने कहा – “हर जगह 24 घंटे दुकानें खुली रखना प्रैक्टिकल नहीं है। खर्च बढ़ेगा लेकिन ग्राहक हर समय नहीं आएंगे। सिर्फ एयरपोर्ट और बड़े हब्स पर ही फायदा होगा।”
    • दादर व्यापारी संघ के सचिव दीपक देवरुखकर ने कहा – “रात में सुरक्षा सबसे बड़ी समस्या है। कोई भी आधी रात को कपड़े खरीदने नहीं आएगा। यहां तक कि अमेरिका में भी ज्यादातर सुपरमार्केट्स आधी रात तक ही बंद हो जाते हैं।”

    ज्वेलरी और बुलियन कारोबारियों की नाराज़गी

    Bombay Bullions Association ने भी चिंता जताई है।

    • एसोसिएशन के प्रवक्ता कुमार जैन ने कहा – “यह कदम सराहनीय है लेकिन ज्वेलरी और बुलियन कारोबारियों के लिए इसका कोई बड़ा फायदा नहीं है। छोटे ज्वेलरी शॉप्स रात में खुले रखना बेहद खतरनाक हो सकता है।”

    उनका कहना है कि केवल मॉल्स में मौजूद ज्वेलरी शॉप्स को ही इसका फायदा मिलेगा, जबकि लोकल दुकानों के लिए यह कदम नुकसानदायक साबित होगा।

    किसको होगा फायदा और किसको नुकसान?

    • फायदा: रेस्टोरेंट्स, मूवी थिएटर, मॉल्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर।
    • नुकसान या कोई बड़ा असर नहीं: छोटे व्यापारी, कपड़े/ज्वेलरी शॉप्स और पारंपरिक बिज़नेस।

    FAQ Section

    Q1. महाराष्ट्र सरकार का नया नियम क्या है?
    Ans: दुकानों, मॉल्स, रेस्टोरेंट्स और मल्टीप्लेक्स को 24×7 खुले रखने की इजाज़त दी गई है।

    Q2. क्या शराब बेचने वाले बार और वाइन शॉप्स भी खुल सकेंगे?
    Ans: नहीं, शराब बेचने या परोसने वाले प्रतिष्ठान इसमें शामिल नहीं हैं।

    Q3. इस फैसले से किसे फायदा होगा?
    Ans: रेस्टोरेंट्स, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म और मॉल्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

    Q4. छोटे कारोबारियों की चिंता क्या है?
    Ans: बढ़ते खर्च, सुरक्षा की कमी और ग्राहकों की कमी।

    Q5. क्या इससे रोजगार बढ़ेगा?
    Ans: हाँ, खासकर हॉस्पिटैलिटी और नाइट-टाइम इकॉनमी में युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे।

  • Mumbai News: मंत्रालय के बाहर 70 वर्षीय बुजुर्ग ने लगाई आत्मदाह की कोशिश, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

    Mumbai News: मंत्रालय के बाहर 70 वर्षीय बुजुर्ग ने लगाई आत्मदाह की कोशिश, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

    मुंबई मंत्रालय के बाहर 70 वर्षीय बुजुर्ग ने आत्मदाह की कोशिश की। नवी मुंबई में काजू फैक्ट्री से हो रही आवाज़ की समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। घटना से प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: मंगलवार शाम मंत्रालय (Mantralaya) के बाहर एक नाटकीय घटना ने सभी को हिला कर रख दिया। नवी मुंबई के कोपारखैराने इलाके में रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग ने प्रशासन की लापरवाही से परेशान होकर आत्मदाह करने की कोशिश की। बुजुर्ग का आरोप है कि उनके घर के पास 24 घंटे चलने वाली काजू पॉलिशिंग फैक्ट्री की मशीनों से लगातार शोर होता है, जिसकी वजह से वे और आसपास के लोग काफी समय से परेशान हैं।

    उन्होंने कई बार नवी मुंबई महानगरपालिका (Navi Mumbai Municipal Corporation – NMMC) और स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। थक-हार कर उन्होंने मंत्रालय के बाहर खुद को आग लगाने का प्रयास किया। हालांकि वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तुरंत रोक लिया और पुलिस को सौंप दिया।

    मंत्रालय के बाहर शाम 4:55 बजे हुई घटना

    पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार शाम करीब 4:55 बजे की है। बुजुर्ग ने मंत्रालय के गेट के पास खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालने की कोशिश की। सुरक्षा गार्ड्स ने तुरंत उन्हें पकड़ लिया और आत्मदाह की कोशिश नाकाम कर दी।

    बाद में उन्हें मरीन ड्राइव पुलिस (Marine Drive Police) के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने पूछताछ के बाद बुजुर्ग को चेतावनी देते हुए नोटिस के साथ छोड़ दिया।

    नवी मुंबई की फैक्ट्री से परेशान थे बुजुर्ग

    बुजुर्ग का कहना है कि कोपारखैराने (Koparkhairane) इलाके में उनके घर के पास कई काजू पॉलिशिंग फैक्ट्रियां चल रही हैं। ये फैक्ट्रियां 24 घंटे काम करती हैं और लगातार मशीनों का शोर होता रहता है।

    उनका आरोप है कि लगातार इस शोर से उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है और नींद तक पूरी नहीं हो पाती। उन्होंने कई बार नवी मुंबई नगर निगम और स्थानीय अधिकारियों से लिखित व मौखिक शिकायत की, लेकिन किसी ने उनकी परेशानी पर ध्यान नहीं दिया।

    प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

    यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नवी मुंबई जैसे विकसित शहर में अगर एक बुजुर्ग को अपनी समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय जाकर आत्मदाह की कोशिश करनी पड़े, तो यह स्थानीय शासन की नाकामी को दर्शाता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ एक बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके के नागरिक इन फैक्ट्रियों से परेशान हैं। लेकिन उद्योग और व्यापार से जुड़े दबाव के कारण अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

    पुलिस और प्रशासन की सफाई

    मरीन ड्राइव पुलिस का कहना है कि बुजुर्ग ने सिर्फ विरोध दर्ज कराने के लिए ऐसा कदम उठाया। उन्हें समझाया गया है कि इस तरह का तरीका खतरनाक है और किसी भी स्थिति में कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।

    दूसरी ओर नवी मुंबई प्रशासन का कहना है कि शिकायतें मिली थीं, लेकिन फैक्ट्री मालिकों को नोटिस देकर भी कोई असर नहीं हुआ। अब नई कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    नागरिकों की प्रतिक्रिया

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि फैक्ट्रियों के लगातार शोर और प्रदूषण से जीना मुश्किल हो गया है। कई लोग नींद की समस्या और मानसिक तनाव की शिकायत कर चुके हैं।

    नागरिकों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक राजनीतिक रसूखदार हैं, इसलिए उन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती।

    सोशल मीडिया पर बहस

    जैसे ही मंत्रालय आत्मदाह की कोशिश की खबर फैली, सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ देना शुरू कर दीं। कई लोगों ने इसे प्रशासन की असंवेदनशीलता बताया, तो कुछ ने कहा कि बुजुर्ग की आवाज़ को गंभीरता से लेना चाहिए।

    ट्विटर (X) पर कई यूज़र्स ने लिखा कि अगर एक आम आदमी की शिकायत को महीनों तक नजरअंदाज किया जाएगा, तो लोग मजबूरी में ऐसे कदम उठाने पर मजबूर हो जाएंगे।

    एक्सपर्ट की राय

    सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं है। यह सिस्टम की उस कमजोरी को दिखाती है, जहां आम नागरिक की आवाज़ सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती है।

    एनवायरनमेंट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फैक्ट्री एरिया को रिहायशी इलाकों के पास चलाना गलत है। इससे लोगों की सेहत और पर्यावरण दोनों पर असर पड़ता है।

    समाधान क्या हो सकता है?

    1. नवी मुंबई प्रशासन को तुरंत फैक्ट्री मालिकों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
    2. उद्योगों को रिहायशी इलाके से बाहर शिफ्ट किया जाए।
    3. पर्यावरण और शोर प्रदूषण के नियमों को सख्ती से लागू करना होगा।
    4. नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए तेज शिकायत निवारण तंत्र बनाना होगा।

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मंत्रालय के बाहर आत्मदाह की कोशिश किसने की?
    Ans: नवी मुंबई के कोपारखैराने निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग ने यह कदम उठाया।

    Q2. बुजुर्ग ने आत्मदाह की कोशिश क्यों की?
    Ans: उनके घर के पास 24 घंटे चलने वाली काजू फैक्ट्रियों से होने वाले शोर और प्रशासन की लापरवाही के कारण।

    Q3. पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
    Ans: मरीन ड्राइव पुलिस ने बुजुर्ग को पकड़कर पूछताछ की और नोटिस देकर छोड़ दिया।

    Q4. नवी मुंबई प्रशासन ने क्या कहा?
    Ans: प्रशासन का कहना है कि फैक्ट्रियों को नोटिस भेजा गया था, लेकिन अब और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    Q5. क्या इलाके के अन्य लोग भी परेशान हैं?
    Ans: हाँ, कई स्थानीय निवासियों ने भी शोर प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की है।

  • राहुल गांधी को लाइव टीवी डिबेट में गोली मारने की धमकी, बीजेपी प्रवक्ता के बयान से मचा बवाल

    राहुल गांधी को लाइव टीवी डिबेट में गोली मारने की धमकी, बीजेपी प्रवक्ता के बयान से मचा बवाल

    केरल में एक टीवी लाइव डिबेट के दौरान बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी दे दी। इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया जबकि विपक्ष ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।

    नेशनल डेस्क
    मुंबई: केरल के एक टीवी चैनल पर डिबेट के दौरान बीजेपी के प्रवक्ता ने खुलेआम कहा कि राहुल गांधी के सीने में गोली मार देनी चाहिए। इस धमकी के बाद विपक्ष आगबबूला हो गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह वही विचारधारा है, जिसने महात्मा गांधी की हत्या करवाई थी।

    आरएसएस और नाथूराम गोडसे का जिक्र

    कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस विचारधारा से ही दूसरा गोडसे पैदा हुआ है। इतिहास गवाह है कि जब महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, तब आरएसएस से जुड़े लोग मिठाई बांटते नजर आए थे। अब वही मानसिकता आज भी राहुल गांधी जैसे नेताओं के खिलाफ जहर उगल रही है।

    Rahul-Gandhi-threatened-with-shooting-during-a-live-TV-debate-BJP-spokesperson'-statement-sparks-uproar

    मोदी सरकार और नफरत की राजनीति के आरोप

    विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार और बीजेपी आईटी सेल पूरे देश में नफरत का माहौल फैला रहे हैं। राहुल गांधी लगातार “भारत जोड़ो यात्रा” और “भारत न्याय यात्रा” के जरिए मोहब्बत की बात कर रहे हैं, जबकि बीजेपी के नेता खुलेआम हिंसा की धमकी दे रहे हैं।

    राहुल गांधी क्यों बीजेपी के निशाने पर?

    कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने संसद और चुनाव आयोग में वोट चोरी के सबूत रखे। यही वजह है कि बीजेपी उनसे डर गई है और अब उन्हें चुप कराने के लिए धमकियों का सहारा लिया जा रहा है।

    लद्दाख से लेकर यूपी तक विपक्ष पर हमले

    लेख में यह भी जिक्र आया है कि सरकार विरोधियों पर लगातार शिकंजा कस रही है। छात्रों से लेकर कार्यकर्ताओं तक, हर उस आवाज को दबाया जा रहा है जो सत्ता से सवाल पूछती है। वहीं, बीजेपी नेताओं और समर्थकों को धमकी और हिंसा फैलाने की खुली छूट मिली हुई है।

    कांग्रेस का ऐक्शन प्लान

    अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सुझाव दिया गया है कि वे गैर-बीजेपी शासित राज्यों में हर पुलिस थाने में इस धमकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। उनका कहना है कि जैसे राहुल गांधी के खिलाफ झूठे केस दर्ज होते हैं, वैसे ही यह केस भी दर्ज होना चाहिए।


    ⚡ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: राहुल गांधी को किसने धमकी दी?
    Ans: केरल के एक टीवी डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता ने यह धमकी दी।

    Q2: क्या बीजेपी ने इस प्रवक्ता पर ऐक्शन लिया?
    Ans: खबर लिखे जाने तक बीजेपी की तरफ से कोई आधिकारिक ऐक्शन सामने नहीं आया है।

    Q3: कांग्रेस का क्या रुख है?
    Ans: कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज पर हमला बताया है।

    Q4: क्या पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है?
    Ans: अब तक केरल पुलिस या सरकार की तरफ से कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।

    Q5: लोग सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं?
    Ans: सोशल मीडिया पर यूजर्स बीजेपी और केंद्र सरकार पर भड़ास निकाल रहे हैं और कह रहे हैं कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

  • प्रशासन की उदासीनता पर भड़के विधायक सुनील प्रभु, विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी

    प्रशासन की उदासीनता पर भड़के विधायक सुनील प्रभु, विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी

    महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक सुनील प्रभु ने कपात सुझाव दिए थे, जिनका समय पर जवाब न मिलने पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर प्रशासन की उदासीनता पर नाराज़गी जताई।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के पावसाली (मानसून) अधिवेशन में शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने नियम 256 के तहत नगरविकास विभाग से जुड़े कुल 8 कटौती सुझाव पेश किए थे। ये सुझाव मालाड पूर्व दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर आधारित थे और सार्वजनिक जनहित के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे थे।

    संसदीय प्रथा के अनुसार, ऐसे सुझावों पर एक महीने के भीतर सरकार की तरफ से लिखित जवाब मिलना ज़रूरी होता है। लेकिन अधिवेशन खत्म हुए पूरे दो महीने बीत जाने के बाद भी नगरविकास विभाग ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

    विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी

    सुनील प्रभु ने इस लापरवाही पर विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि अगर समय पर जवाब मिलता, तो सदस्य संबंधित मुद्दों पर फॉलो-अप कर जनता को न्याय दिला सकते।

    विधानसभा अध्यक्ष ने पहले भी कई बार इस पर निर्देश दिए हैं कि कटौती सुझावों के जवाब समय पर दिए जाएं, लेकिन प्रशासन की तरफ से इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

    कटौती सुझावों का महत्व

    • ये सुझाव नगरविकास विभाग की योजनाओं और कामों से सीधे जुड़े हुए हैं।
    • दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दे इसमें शामिल हैं।
    • समय पर कार्रवाई होती तो स्थानीय जनता को राहत और पारदर्शिता मिल सकती थी।

    सुनील प्रभु का बयान

    प्रभु का कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और इससे जनता का विश्वास भी कमजोर होता है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि संबंधित विभाग को सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. कटौती सुझाव क्या होते हैं?
    👉 विधानसभा में विपक्षी सदस्यों को बजट की विभिन्न मांगों में कटौती सुझाने का अधिकार होता है, जिन्हें कटौती सुझाव कहा जाता है।

    Q2. इन सुझावों पर सरकार को जवाब कब देना होता है?
    👉 संसदीय प्रथा के अनुसार, एक महीने के भीतर संबंधित विभाग की ओर से लिखित जवाब मिलना अनिवार्य है।

    Q3. सुनील प्रभु ने कितने कटौती सुझाव पेश किए थे?
    👉 कुल 8 कटौती सुझाव, जो नगरविकास विभाग और दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े थे।

    Q4. अब तक प्रशासन का रुख कैसा रहा है?
    👉 दो महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई लिखित जवाब नहीं दिया गया है।

  • महाराष्ट्र से CM योगी को मौत की धमकी — सभा का वीडियो वायरल, पुलिस ने की तुरंत जांच

    महाराष्ट्र से CM योगी को मौत की धमकी — सभा का वीडियो वायरल, पुलिस ने की तुरंत जांच

    महाराष्ट्र के बीड जिले में एक सार्वजनिक सभा के दौरान उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ; बीड पुलिस ने जांच शुरू कर जल्द FIR दर्ज करने का ऐलान किया है। जानिए पूरी घटना, राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    बीड के एक लोकल सभागार में आयोजित धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी गयी। कार्यक्रम के दौरान मंच पर खड़े एक वक्ता ने माइक्रोफोन पर कहा — “हिम्मत है तो इधर आओ, गाड़ देंगे…” — और उसी दौरान मंच व आसपास के हिस्सों में ‘I Love Mohammad’ के पोस्टर भी देखे गए। धमकी देने वाले बयान पर कई बार तालियाँ भी बजती दिखीं।

    (नोट: यह रिपोर्ट घटना के उसी वीडियो और स्थानीय पुलिस के बयानों पर आधारित है।)

    वीडियो कैसे वायरल हुआ और पुलिस की प्रतिक्रिया

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक और पुलिसिया हलकों में हलचल पैदा हो गयी। बीड पुलिस-सुप्रिंटेंडेंट ने कहा कि वीडियो की सत्यता जांची जा रही है और दोषियों की पहचान होने पर FIR दर्ज की जाएगी। पुलिस ने बताया कि आयोजकों और वीडियो अपलोड करने वालों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।

    कौन-कौन प्राथमिक जांच का हिस्सा हैं?

    • सभा के आयोजक और मंच पर मौजूद वक्ताओं से पूछताछ।
    • सोशल मीडिया पोस्ट/वीडियो अपलोड करने वालों का डिजिटल-ट्रैकिंग।
    • भीड़ में मौजूद लोगों की पहचान के लिए फुटेज-रिव्यू।
      पुलिस ने कहा कि कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि किसी भी नेता के ख़िलाफ़ खुले आम जान से मारने की धमकी गंभीर अपराध है।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ — BJP ने क्या कहा?

    घटना पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के नेताओं ने कहा कि ऐसी भाषा व व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून अपना काम करेगा। प्रदेश/केंद्र स्तर पर भी इस मामले पर टिप्पणी की जा सकती है — अभी तक स्थानीय नेताओं ने मामले की निंदा और कड़े कदम उठाने की मांग की है।

    सोशल मीडिया और कानून — क्या जोखिम हैं?

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज़ का सन्दर्भ अक्सर तेज़ी से फैलता है और माहौल गरमा सकता है। इस तरह की धमकियाँ सार्वजनिक शांति भंग कर सकती हैं और तुरंत जांच-पकड़ की मांग पैदा करती हैं। कानून के हिसाब से किसी को जान से मारने की धमकी देना, उकसाना या हिंसा के लिये भड़काना दंडनीय गतिविधियाँ हैं।

    आगे क्या होगा?

    बीड पुलिस ने बताया है कि पहचान होते ही FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक रूप से यह मामला गर्म रहेगा और आगे जांच रिपोर्ट पर ही असली तस्वीर साफ होगी।


    FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. यह घटना कब और कहां हुई?
    A: यह घटना बीड जिले के एक स्थानीय सभागार में हुई; वीडियो हाल-फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। (घटना की सही तारीख स्थानीय रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।)

    Q2. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    A: बीड पुलिस ने वीडियो की सत्यता की जांच शुरू की है, आयोजकों और पोस्ट करने वालों की पहचान की जा रही है और जल्द FIR दर्ज करने का ऐलान किया गया है।

    Q3. क्या आरोपियों की पहचान हो चुकी है?
    A: जांच जारी है; पुलिस ने कहा है कि पहचान होते ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

    Q4. ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है?
    A: किसी को जान से मारने की धमकी, उकसाना और सार्वजनिक शांति भंग करना दंडनीय अपराध है; अभियोजन के तहत FIR और जरूरी चालान/हिरासत हो सकती है।

    Q5. राजनीतिक मतभेदों में किस तरह की सावधानी रखी जानी चाहिए?
    A: सार्वजनिक कार्यक्रमों में संयम, नफरत भाषण से बचाव और कानून का सम्मान जरूरी है; सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता की जांच के बाद साझा करें।

  • मुंबई में जल्द आएगी पॉड टैक्सी: ट्रैफिक कम करेगी और देगी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, CM फडणवीस का बड़ा ऐलान

    मुंबई में जल्द आएगी पॉड टैक्सी: ट्रैफिक कम करेगी और देगी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, CM फडणवीस का बड़ा ऐलान

    मुंबई में ट्रैफिक कम करने और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। CM देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि कुरला से बांद्रा-BKC तक ये सेवा शुरू होगी। जानें कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट और क्या होंगे फायदे।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में जल्द ही लोगों को पॉड टैक्सी (Pod Taxi) की सुविधा मिलने वाली है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समीक्षा बैठक में कहा कि यह सेवा शहर में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देने और बढ़ते ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी।

    कुर्ला और बांद्रा रेलवे स्टेशन से लेकर BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) तक ये पॉड टैक्सी नेटवर्क बनाया जाएगा।

    Pod-taxis-will-soon-arrive-in-Mumbai-CM-Fadnavis-makes-a-major-announcement-to-reduce-traffic-and-provide-connectivity
    समीक्षा बैठक की तस्वीर

    🚆 प्रोजेक्ट की अहम बातें

    • कुल लागत: ₹1,016.34 करोड़
    • लोकेशन: कुर्ला – बांद्रा – BKC
    • समयसीमा: 3 से 4 साल में पूरा होने की उम्मीद
    • उद्देश्य: ट्रैफिक कम करना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देना

    🏙️ क्यों जरूरी है पॉड टैक्सी?

    CM फडणवीस ने कहा कि आने वाले समय में बुलेट ट्रेन स्टेशन और नया बॉम्बे हाई कोर्ट बनने से इस इलाके में ट्रैफिक काफी बढ़ जाएगा। मौजूदा ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर बोझ बढ़ने से लोगों को परेशानी होगी।

    ऐसे में पॉड टैक्सी एक तेज, आरामदायक और पर्यावरण-फ्रेंडली विकल्प बनेगी।

    🚖 पॉड टैक्सी क्या है?

    • पॉड टैक्सी Personal Rapid Transit (PRT) सिस्टम का हिस्सा है।
    • ये छोटी-छोटी ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक गाड़ियां होती हैं।
    • ऊँचे ट्रैक (Elevated Track) पर चलती हैं।
    • हर पॉड में सीमित लोग बैठ सकते हैं, जिससे सफर तेज और सुविधाजनक होता है।

    🛣️ कुर्ला पुलिस क्वार्टर्स का होगा रिलोकेशन

    इस प्रोजेक्ट के लिए कुर्ला पुलिस क्वार्टर्स को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा ताकि वहां की जमीन का इस्तेमाल पॉड टैक्सी नेटवर्क के लिए हो सके।

    💳 सभी ट्रांसपोर्ट के लिए सिंगल कार्ड सिस्टम

    मुंबई में एक यूनिफाइड कार्ड सिस्टम लाने की तैयारी भी चल रही है। इस कार्ड से लोकल ट्रेन, मेट्रो, बस और आने वाली पॉड टैक्सी – सबका किराया चुकाया जा सकेगा।

    🌉 स्टेशन और BKC को मिलेगा बेहतर कनेक्शन

    • कुर्ला और बांद्रा स्टेशन एरिया को पॉड टैक्सी से जोड़ने की तैयारी।
    • BKC के बड़े ऑफिस बिल्डिंग्स को भी इस सेवा से डायरेक्ट कनेक्ट किया जाएगा।
    • मौजूदा स्काईवॉक का भी स्मार्ट इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।

    📊 बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?

    यह हाई-लेवल मीटिंग सह्याद्री गेस्ट हाउस, मलबार हिल पर हुई।
    शामिल अधिकारी:

    • मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती
    • MMRDA चीफ संजय मुखर्जी
    • ट्रांसपोर्ट, अर्बन डेवलपमेंट और होम डिपार्टमेंट के सीनियर IAS अफसर

    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. मुंबई पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
    👉 3 से 4 साल में इसके पूरा होने की उम्मीद है।

    Q2. पॉड टैक्सी किन जगहों को जोड़ेगी?
    👉 कुरला, बांद्रा और बांद्रा-कुरला कॉम्प्लेक्स (BKC)।

    Q3. पॉड टैक्सी का खर्च कितना है?
    👉 प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹1,016.34 करोड़ है।

    Q4. इसमें सफर कैसे होगा?
    👉 पॉड टैक्सी ड्राइवरलेस, इलेक्ट्रिक व्हीकल होगी जो ऊँचे ट्रैक पर चलेगी।

    Q5. क्या एक ही कार्ड से सफर करना संभव होगा?
    👉 हां, मुंबई में सभी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के लिए एक यूनिफाइड कार्ड सिस्टम लाया जाएगा।

  • हर साल 51 बच्चे जाएंगे NASA, जानिए क्या है “मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी” योजना

    हर साल 51 बच्चे जाएंगे NASA, जानिए क्या है “मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी” योजना

    महाराष्ट्र सरकार ने नई योजना “मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी” का ऐलान किया है। इसके तहत हर साल राज्य के 51 बच्चों को NASA की सैर कराई जाएगी। जानिए योजना की पूरी जानकारी और इसका उद्देश्य।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा विभाग ने छात्रों के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। अब विज्ञान प्रदर्शन सिर्फ प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विजेता छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव भी मिलेगा। इस योजना के तहत हर साल राज्य के 51 बच्चों को NASA (नासा) ले जाया जाएगा।

    विज्ञान प्रदर्शन का नया स्वरूप

    अब तक होने वाले विज्ञान प्रदर्शन में केवल नकद इनाम दिया जाता था। राज्यस्तर पर पहला इनाम 5 हजार रुपये, दूसरा और तीसरा इनाम ढाई हजार रुपये था। लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव हुआ है।

    • पहले स्थान वाले प्रयोग को अब 51 हजार रुपये मिलेंगे।
    • राज्य स्तर पर चुने गए पहले 51 बच्चों को NASA विज़िट का मौका मिलेगा।
    • उनके साथ 4 शिक्षक भी जाएंगे। कुल 55 लोगों के इस दौरे पर करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

    NASA के साथ ISRO और साइंस सेंटर की भी सैर

    योजना सिर्फ NASA तक सीमित नहीं है।

    • तालुका स्तर पर चुने गए 21 बच्चों को नजदीकी साइंस सेंटर की सैर कराई जाएगी।
    • जिला स्तर पर चुने गए 51 बच्चों को ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) विज़िट कराया जाएगा।
    • इसके सारे खर्च का वहन राज्य सरकार करेगी।

    ग्रामीण बच्चों को मिलेगा फायदा

    इस योजना का खास उद्देश्य ग्रामीण और जिला परिषद स्कूलों के बच्चों में वैज्ञानिक सोच बढ़ाना है। बच्चों में विज्ञान और गणित की रुचि बढ़े, उनकी नींव मजबूत हो और भविष्य में वे वैज्ञानिक बन सकें – यही मकसद है।
    शालेय शिक्षा राज्यमंत्री पंकज भोयर ने कहा कि,

    > “गांवों से पढ़ने वाले बच्चों को भी NASA जैसी बड़ी संस्था देखने और सीखने का मौका मिलेगा। अगले साल से योजना लागू होगी।”

    योजना के उद्देश्य

    • बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास।
    • विज्ञान और गणित में रुचि पैदा करना।
    • ग्रामीण बच्चों को वैश्विक स्तर का अनुभव देना।
    • भविष्य में बच्चों को वैज्ञानिक और नवप्रवर्तनकर्ता बनने के लिए प्रेरित करना।

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी योजना कब से शुरू होगी?
    ➡️ यह योजना अगले साल से लागू होगी।

    Q2. कितने छात्रों को NASA जाने का मौका मिलेगा?
    ➡️ हर साल 51 छात्रों को NASA की सैर कराई जाएगी।

    Q3. क्या सिर्फ NASA ही विजिट होगा?
    ➡️ नहीं, तालुका स्तर पर साइंस सेंटर और जिला स्तर पर ISRO की विजिट भी होगी।

    Q4. योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    ➡️ बच्चों में विज्ञान और गणित के प्रति रुचि बढ़ाना और ग्रामीण छात्रों को अंतरराष्ट्रीय exposure देना।

    Q5. खर्च कौन उठाएगा?
    ➡️ पूरा खर्च महाराष्ट्र सरकार उठाएगी।

  • मुंबई में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत, महिलाओं की सेहत और सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

    मुंबई में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत, महिलाओं की सेहत और सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

    पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के दहिसर में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत की। जानिए कैसे यह योजना महिलाओं को सेहतमंद और परिवारों को सशक्त बनाएगी।

    मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के खास मौके पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के दहिसर ईस्ट स्थित रावलपाड़ा पॉलिक्लिनिक में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुंबई में महिला स्वास्थ्य और पोषण पर जोर देते हुए एक नई दिशा में कदम बढ़ाया गया।

    🎯 मुख्य उद्देश्य: महिला स्वास्थ्य और परिवार का सशक्तिकरण

    इस अभियान का मुख्य फोकस महिलाओं की सेहत सुधारने और परिवार को मजबूत बनाने पर है। इस मौके पर पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्यप्रदेश के धार जिले से इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्घाटन किया और महिलाओं से अपील की कि वो स्वास्थ्य जांच शिविरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

    🏥 मुंबई में खास आयोजन और सेवाएं

    इस खास अवसर पर मुंबई में बीजेपी विधायक मनीषा चौधरी, बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी, और कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों ने हिस्सा लिया।

    👉 मेडिकल कैंप और पोषण किट वितरण:

    • गर्भवती महिलाओं को लगभग 20 किलो की पोषण किट दी गई।
    • खास ध्यान कुपोषित गर्भवती महिलाओं पर दिया गया।
    • स्लम इलाकों में निःशुल्क मेडिकल कैंप्स लगाए गए।

    👉 सैनिटरी पैड वितरण:

    • मनपा स्कूलों की छात्राओं को सैनिटरी पैड दिए गए।
    • यह योजना पूरे मुंबई नगर निगम स्कूलों में चलाई जा रही है।

    🗣️ क्या बोले पीयूष गोयल?

    प्रधानमंत्री जी ने पिछले 50 सालों से देश की सेवा की है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य मिले। इस अवसर पर पूरे उत्तर मुंबई में 100 से ज्यादा सेवा कार्य चल रहे हैं – सफाई, हेल्थ कैंप्स, शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम और बहुत कुछ।

    उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों और कॉलेजों में ‘स्टैंडर्ड क्लब’ शुरू किया जा रहा है जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलेगी।

    🗣️ विधायक मनीषा चौधरी का बयान:

    यह सिर्फ हेल्थ कैंप नहीं है, बल्कि महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। जो महिलाएं गर्भावस्था में कुपोषित हैं, उन्हें विशेष पोषण किट दी जा रही है।

  • गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ट्रेन से मुंबई पहुंचे, महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे

    गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ट्रेन से मुंबई पहुंचे, महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे

    गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ट्रेन से मुंबई पहुंचे। सोमवार को वे महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने किया स्वागत।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत रविवार दोपहर अहमदाबाद से तेजस एक्सप्रेस से मुंबई पहुंचे। उन्हें महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके साथ उनकी पत्नी दर्शनादेवी भी मौजूद थीं।

    मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री मंगल प्रभात लोढा, राज्य के मुख्य सचिव राजेश कुमार और DGP रश्मि शुक्ला ने उनका स्वागत किया।

    रेलवे स्टेशन पर खास स्वागत

    मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर आचार्य देवव्रत का स्वागत रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर किया। बाद में जब वे राजभवन पहुंचे तो मुंबई पुलिस ने उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

    सोमवार को शपथ ग्रहण

    आचार्य देवव्रत सोमवार सुबह 11 बजे महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली जब मौजूदा राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद इस्तीफा दिया।

    आचार्य देवव्रत का परिचय

    • जन्म: 18 जनवरी 1959, समालखा, हरियाणा
    • शिक्षा: गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रिंसिपल रहे और भारतीय पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को आगे बढ़ाया।
    • 2015 से 2019 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे।
    • गुजरात में राज्यपाल रहते हुए शिक्षा, समाज और पर्यावरण से जुड़े कई अभियान चलाए।
    • 180 एकड़ ज़मीन पर प्राकृतिक खेती का सफल प्रयोग किया और 10 लाख से ज्यादा किसानों को प्रेरित किया।
    • पद्मश्री सुभाष पालेकर के साथ मिलकर ‘जीवामृत’ खाद का प्रचार-प्रसार किया।
    • आर्य समाज के प्रवक्ता के रूप में सामाजिक सुधार, गौ संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता पर खास योगदान दिया।

    क्यों है यह नियुक्ति अहम?

    महाराष्ट्र देश का एक अहम राजनीतिक और औद्योगिक राज्य है। यहां का राज्यपाल केंद्र और राज्य सरकार के बीच सेतु का काम करता है।
    आचार्य देवव्रत की पृष्ठभूमि उन्हें न सिर्फ एक अनुभवी प्रशासक बल्कि सामाजिक सुधारक के तौर पर भी स्थापित करती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे महाराष्ट्र में अपनी जिम्मेदारियों को कैसे निभाते हैं।