महाराष्ट्र सरकार ने फैक्ट्री और दुकानों में कामकाजी घंटों को 12 तक बढ़ाने की मंजूरी दी। कर्मचारियों को अब दोगुना ओवरटाइम और बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई:महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला। महाराष्ट्र कैबिनेट ने एक अहम श्रम सुधार (Labour Reform) को मंजूरी दी है। अब फैक्ट्रियों और दुकानों में कर्मचारियों की दैनिक कामकाजी समय सीमा 9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दी गई है। इसके साथ ही कामगारों को ओवरटाइम के बदले दोगुना वेतन मिलेगा।
🏭 फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए नए नियम
पहले फैक्ट्रियों में काम का समय 9 घंटे प्रतिदिन था, जिसे अब बढ़ाकर 12 घंटे किया गया है।
6 घंटे काम करने के बाद अनिवार्य ब्रेक मिलेगा (पहले 5 घंटे बाद ब्रेक था)।
क्वार्टर में ओवरटाइम सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है।
हर कर्मचारी की लिखित सहमति के बाद ही ओवरटाइम करवाया जा सकेगा।
🏢 दुकानों और प्रतिष्ठानों पर असर
दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वालों का समय 9 से बढ़ाकर 10 घंटे प्रतिदिन कर दिया गया है।
जिन दुकानों में 20 से अधिक कर्मचारी हैं, वहां भी ओवरटाइम की सीमा अब 144 घंटे प्रति क्वार्टर होगी।
छोटे व्यापार (20 से कम कर्मचारी) को अब रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ साधारण सूचना देनी होगी।
🌍 निवेश और रोजगार पर असर
सरकार का कहना है कि इन सुधारों से Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा। इससे महाराष्ट्र में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह फैसला कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों की तरह है, जिन्होंने पहले ही ऐसे बदलाव किए हैं।
श्रम विभाग का कहना है कि इन सुधारों से महिला कर्मचारियों को भी लाभ होगा। क्योंकि अब उनके लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद होगा और ओवरटाइम का भुगतान सुरक्षित रूप से मिलेगा।
🛡️ सुरक्षा और अधिकार सुरक्षित
सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से सुरक्षा मानकों में कोई कमी नहीं की जाएगी। बल्कि अब जब भी कर्मचारी अतिरिक्त समय तक काम करेंगे, तो उन्हें लिखित सहमति + दोगुना वेतन मिलना अनिवार्य होगा।
🗣️ सरकार का बयान
“महाराष्ट्र की निवेश क्षमता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बदलाव ज़रूरी है। यह सुधार उद्योगों और कामगारों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे,” – महाराष्ट्र सरकार के प्रवक्ता।
आरबीआई ने ₹500 के नोट को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। नोट बंद होने की अफवाह गलत है, नए नियम और गाइडलाइंस जानना सभी के लिए जरूरी है।
मुंबई: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और आम बातचीत में यह चर्चा तेजी से चल रही है कि ₹500 के नोट बंद होने वाले हैं। कई लोग तो अब ₹500 के नोट लेने से भी कतराने लगे हैं। लेकिन इन सब अफवाहों पर अब रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने साफ-साफ बयान दिया है। RBI’s big update on ₹ 500 note, know the new rule
🚫 ₹500 नोट बंद नहीं होंगे
आरबीआई ने कहा है कि ₹500 का नोट चलन में बना रहेगा और इसे लेकर किसी भी तरह की बंदी की अफवाह पूरी तरह गलत है। कुछ समय पहले ₹2000 के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे, जिसके बाद से ही बाजार में ₹500 के नोट की सबसे ज्यादा मांग है। चूंकि एटीएम और बैंकों से ₹500 के नोट की उपलब्धता कम हो रही है, इस वजह से लोगों ने कयास लगाना शुरू कर दिया था कि यह भी जल्द बंद हो जाएगा। लेकिन आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि ₹500 के नोट को बंद करने की कोई योजना नहीं है।
🏦 बैंक से नोट बदलने का नियम
आरबीआई ने यह भी कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को एटीएम से या लेन-देन के दौरान फटा हुआ, गंदा या कट हुआ ₹500 का नोट मिलता है, तो वह इसे सीधे अपने बैंक में जाकर बदल सकता है। बैंक की जिम्मेदारी होगी कि ग्राहक को खराब नोट के बदले सही और फिट नोट उपलब्ध कराए। RBI’s big update on ₹ 500 note, know the new rule
🔍 ₹500 नोट की पहचान कैसे करें?
बाजार में नकली नोट की घटनाओं को देखते हुए आरबीआई ने ₹500 नोट पहचानने के लिए कुछ गाइडलाइंस भी जारी की हैं।
दाहिनी तरफ अशोक स्तंभ का प्रतीक साफ नजर आना चाहिए।
नोट पर स्वच्छ भारत अभियान का लोगो और स्लोगन मौजूद होता है।
पीछे की तरफ लाल किले की आकृति और छपाई का साल लिखा होता है।
आरबीआई के अनुसार कुछ नोट ऐसे होते हैं जिन्हें “अनफिट” माना जाता है और जिन्हें बदलवाना जरूरी है:
अगर नोट बहुत ज्यादा गंदा है या उस पर मिट्टी जम गई है।
अगर नोट का रंग फीका पड़ गया है।
अगर नोट किनारे से 20% तक फटा हुआ है।
अगर नोट पर इंक फैल गई है और पहचान मुश्किल है।
ऐसे नोट बैंक में आसानी से बदलवाए जा सकते हैं।
🤔 लोग क्यों कर रहे थे अफवाहों पर भरोसा?
दरअसल, ₹2000 का नोट बंद होने के बाद से ही लोग आशंकित हो गए थे कि ₹500 का नोट भी जल्द बंद हो जाएगा। खासकर मुंबई और आसपास के इलाकों में कई दुकानदार ग्राहकों से ₹500 का नोट लेने से बचने लगे। इसका असर यह हुआ कि आम जनता में डर और भ्रम की स्थिति बन गई। इसी वजह से आरबीआई को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा। RBI’s big update on ₹ 500 note, know the new rule
✅ निष्कर्ष
₹500 के नोट बंद नहीं होंगे।
खराब या फटे नोट बैंक में बदल सकते हैं।
नकली नोट की पहचान के लिए आरबीआई की गाइडलाइन को समझना जरूरी है।
अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर ध्यान दें।
मुंबई जैसे बड़े शहर में जहां रोज़ाना करोड़ों का लेन-देन होता है, वहां ₹500 का नोट सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में आरबीआई का यह बयान आम जनता और व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। RBI’s big update on ₹ 500 note, know the new rule
“केंद्र सरकार ने ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर रोक लगाने के लिए ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025 को मंजूरी दी। जानिए उद्योग, खिलाड़ियों और निवेश पर असर।”
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग (RMG) को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को कैबिनेट ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 को मंज़ूरी दे दी। इस बिल का मक़सद असली पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स को प्रभावी तरीके से रोकना है। इसका सीधा असर ड्रीम11 जैसे फ़ैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप और पोकरबाज़ी जैसे कार्ड गेम प्लेटफ़ॉर्म्स पर पड़ेगा। अगर यह बिल संसद में पास हो गया तो भारत का अरबों डॉलर का यह उद्योग बड़ी मुश्किल में फँस सकता है।
उद्योग की चुप्पी और पुराने विवाद
फिलहाल RMG कंपनियों और उनके संगठन ने इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उन्होंने साफ कहा है कि वे संसद में बिल पेश होने के बाद ही आधिकारिक बयान देंगे। पहले भी इन कंपनियों ने सरकार के टैक्स और रेगुलेशन से जुड़े फैसलों का विरोध किया था। जीएसटी बढ़ने पर भी इन फर्मों ने कई मंचों पर अपना विरोध दर्ज कराया था।
अदालतों में कानूनी लड़ाई
कई राज्यों में जब सरकारों ने इन गेमिंग ऐप्स पर रोक लगाई, तब कंपनियों ने अदालत का रुख किया और उन्हें राहत भी मिली। अदालतों ने साफ कहा कि “कौशल के खेल” और “भाग्य के खेल” में फर्क है। केवल किस्मत पर आधारित खेल को ही जुआ माना जाएगा। इसी तर्क के दम पर कंपनियाँ अब तक अपना बिज़नेस चला रही थीं।
इस बार हालात अलग हैं। ऑनलाइन गेमिंग अब सीधे आईटी मंत्रालय के तहत आ चुका है और वही प्रतिबंध लागू करेगा। पहले सरकार ने 2023 में IT नियमों के तहत इन कंपनियों के लिए स्व-नियमन (Self Regulation) का ढांचा बनाने की कोशिश की थी। लेकिन किसी भी स्व-नियामक निकाय को मंज़ूरी नहीं दी गई क्योंकि सवाल उठा कि ये निकाय कंपनियों से स्वतंत्र कैसे रहेंगे।
ई-स्पोर्ट्स को राहत
बिल में ई-स्पोर्ट्स को छूट दी गई है। यानी वीडियो गेम टूर्नामेंट और ई-स्पोर्ट्स इवेंट में एंट्री फ़ीस ली जा सकेगी, बशर्ते उसमें असली पैसों वाले गेम शामिल न हों। इसका सीधा फायदा ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ियों और आयोजकों को मिलेगा।
बड़ा नीति बदलाव
सरकार का कहना है कि यह बिल एक बड़ा नीति परिवर्तन है। अब तक कंपनियाँ “कौशल बनाम भाग्य” की दलील देकर अपने गेम को वैध ठहराती रही हैं। मगर इस बिल के आने के बाद उनके बिज़नेस मॉडल पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे।
संभावित असर
अगर यह बिल कानून बन गया तो लाखों यूज़र्स जो फैंटेसी स्पोर्ट्स या कार्ड गेम्स खेलते हैं, उनके पास सीमित विकल्प बचेंगे। विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा भी हिल सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे ई-स्पोर्ट्स और मनोरंजन आधारित गेम्स को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन रियल मनी गेमिंग सेक्टर में रोज़गार और निवेश पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बुधवार को चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) को कंटीन्यूअस क्लिरिंग एंड सेटलमेंट ऑन रियलाइजेशन में परिवर्तित करने का ऐलान कर दिया है। इसके पहले चेक क्लियरिंग को लेकर लगभग 2 दिनों का समय लगता था पर अब कुछ ही घंटों में चेक क्लियर हो जाएगा।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बुधवार को चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) को कंटीन्यूअस क्लिरिंग एंड सेटलमेंट ऑन रियलाइजेशन में परिवर्तित करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद से बैंक में चेक क्लियर होने की अवधि अब दो दिन से घटकर केवल कुछ ही घंटे रह जाएंगे।
दो चरणों में होगा लागू
केंद्रीय बैंक आरबीआई की ओर से यह कदम चेक क्लियरिंग सिस्टम को तेज करने के लिए किया जा रहा है। आरबीआई की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि नए सिस्टम को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला फेस 4 अक्टूबर, 2025 से 3 जनवरी, 2026 तक के लिए लागू होगा, जबकि दूसरा फेस 3 जनवरी के बाद से लागू होगा। Now there is no need to wait for check clearing in the bank, RBI introduced a new system
सुबह 10 से 4 तक का होगा समय
आरबीआई ने नए सिस्टम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, कि इसमें एक सिंगल प्रेजेंटेशन सेशन होगा, जिसमें चेक को सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक पेश करना होगा। इसके तहत चेक प्राप्त करने वाली बैंक को चेक को स्कैन करके क्लिरिंग हाउस को भेजना होगा। इसके बाद क्लिरिंग हाउस की उस चेक की इमेज को राशि अदा करने वाले बैंक के पास भेजे दिया जाएगा। Now there is no need to wait for check clearing in the bank, RBI introduced a new system
10 से 7 तक होगा कंफर्मेशन
कंफर्मेशन सेशन सुबह 10 बजे से लेक शाम के 7 बज तक होगा। इसमें पैसे अदा करने वाले बैंक को उस चेक पर सकारात्मक या नकारात्मक कंफर्मेशन देना होगा। इसमें खास बात यह है कि हर चेक का एक ‘आइटम एक्सपायरी टाइम’ होगा, इसी समय के बीच पैसा अदा करनेवाली बैंक को कंफर्मेशन देनी आवश्यक है। Now there is no need to wait for check clearing in the bank, RBI introduced a new system
इसका मतलब यह है कि बैंक को चेक पेश होने के तीन घंटे के अंदर क्लियर करना होगा। सीटीएस के आने के बाद चेक के प्रेजेंटेशन की कोई एंट्री नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, आरबीआई ने वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार और नैतिक सक्षमता के लिए एक ढांचा (फ्रीएआई) विकसित करने के लिए एक समिति की रिपोर्ट पेश की। Now there is no need to wait for check clearing in the bank, RBI introduced a new system
रिपोर्ट मे क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में वित्तीय क्षेत्र में एआई के उपयोग का मार्गदर्शन करने के लिए एक रूपरेखा तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य संबंधित जोखिमों से सुरक्षा करते हुए इसकी क्षमता का दोहन करना है। इसमें समिति ने एआई के इस्तेमाल के लिए 7 सूत्रीय विकसित किया है, जिसमें 6 रणनीतिक स्तंभों के तहत 26 सुझाव दिए गए हैं। Now there is no need to wait for check clearing in the bank, RBI introduced a new syste
उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर हुए बलात्कार की घटना में पालघर जिले के विरार पुलिस ने 21 वर्षीय युवक के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है, कि पीड़िता को तस्वीरें वायरल करने की धमकी भी दी। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
डिजिटल डेस्क पालघर: विरार पुलिस ने उत्तर प्रदेश की एक घटना में 21 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। 16 वर्षीय लड़की के परिवार ने इसके खिलाफ शिकायत की थी। युवक पर आरोप है कि उसने 16 वर्षीय लड़की पर उत्तर प्रदेश के अमेठी में कथित तौर पर बलात्कार किया। इसमें विरार पुलिस ने बलात्कार और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम पोक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया है। घटना तब हुईं जब पीड़िता उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित पैतृक गाँव कुड़वा देहरा गाँव गई हुई थी। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
कब हुई थी घटना?
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक नाबालिग के साथ उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के कुड़वा देहरा गाँव के 21 वर्षीय निवासी ने नाबालिग लड़की से दोस्ती की। लड़की का पैतृक गांव होने के कारण वह मुंबई से गई हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि 17 मई, 2025 की रात, आरोपी ने अपने पुराने घर पर पीड़िता के साथ कथित तौर पर जबरन शारीरिक संबंध बनाया। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने पहले लड़की इच्छा के विरुद्ध कथित तौर पर उसकी छाती और कमर को दबाया। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो, कथित कृत्य के बाद, आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने विरोध किया और उसे रोका तो वह उसके साथ ली गई लड़की की तस्वीरें उसके रिश्तेदारों को दिखाकर उसे बदनाम कर देगा। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।
लोकतंत्र का हिस्सा
संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?
संसद में होती है गुंडो की भाषा
पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।
मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।
कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा
अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।
यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?
सरकार ने दिया सेना को धोखा
इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”
आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।
टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार
दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।
सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।
विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?
दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?
ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?
दुनिया की निगाहों में भारत?
भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।
एक नाबालिग बच्ची के शोषण के आरोप में जब फरार 55 वर्षीय आरोपी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपी दरवाजा बंद कर आत्महत्या की धमकी देता रहा। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तबतक आरोपी फंदे से लटक चुका था।
मुंबई: मंगलवार की रात को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस समय दरवाजा बंद कर आत्महत्या करने का प्रयास किया जब मुंबई पुलिस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गई थी। पुलिस उसे एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी। लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति के देखभाल के लिए उसे नियुक्त किया गया था। उसी दौरान पीड़ित की नाबालिग बच्ची पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
पुलिस ने क्या कहा?
नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि “व्यक्ति को तुरंत पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग 36 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में उसे होश आया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।” Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
नाबालिग बच्ची का यौन शोषण
नाबालिग लड़की के पिता को पिछले साल लकवा का दौरा पड़ा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी जिसे मई महीने में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नाबालिग लड़की के पिता की देखभाल के लिए रखा गया था। शिकायत के मुताबिक नाबालिग की मां जब काम पर चले जाती थी तब हर रोज बच्ची का यौन शोषण और अश्लील टिप्पणियां करता था। यहां तक कि लड़की की शिकायत पर उसकी मां ने आरोपी को चेतावनी भी दी उसके बावजूद आरोपी उसे परेशान करता रहा।
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को आरोपी ने लड़की के बेडरूम में घुसकर कथित तौर पर परेशान किया। जिसके बाद लड़की की मां ने पुलिस मे शिकायत करने का फैसला लिया। पुलिस ने 29 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही, आरोपी मुंबई से फरार हो गया। पहले उत्तर प्रदेश और बाद में कर्नाटक भाग गया। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
आत्महत्या की कोशिश
मंगलवार को पुलिस को जब पता चला कि आरोपी बदलापुर में है तो दो सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन से चार कांस्टेबल की एक टीम वहां पहुंची। रात करीब 10 बजे, आरोपी ने अपने घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। हालांकि, पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
मुंबई: कॉटन ग्रीन रेलवे स्टेशन के पास से मुंबई क्राइम ब्रांच की हफ्ता वसूली विरोधी सेल ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार सभी आरोपी शूटर बताए जा रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि ये सभी लोग हरियाणा से मुंबई आए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के पुलिस अधिकारी आरोपियों के पास से 50 जिंदा कारतूस और 4 पिस्तौल भी बरामद कर इस बात का पता लगाने में जुटी है कि ये लोग क्या किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए थे? 5 sharp shooters from Haryana arrested in Mumbai and many weapons recovered
किसने भेजा हत्यारों को मुंबई?
घटना स्थल कालाचौकी पुलिस स्टेशन अंतर्गत होने की वजह से मुंबई क्राईम ब्रांच की टीम ने उन्हें पुलिस स्टेशन लेजाकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सन्नी नरेशकुमार, रवि अंग्रेज, राहुल पृथ्वीसिंह, अनुज कुलदीप कुमार और आदित्य योगेश कौशिक के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच को मिली खूफिया जानकारी के आधार पर यह धरपकड़ हुई। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है, कि आखिर इन्हें मुंबई में हथियार लेकर किसने भेजा था और उनका इरादा क्या था?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने जब इन्हें मौके से पकड़ा तब अधिकारी ने पूछा, “क्या तुम्हारे पास जो पिस्तौल और कारतूस बरामद किया गया उसका लाइसेंस है?” तब गिरफ्तार आरोपियों ने कहा, “नहीं।” पूछा गया, कि “अगर लाइसेंस नहीं है, तो तुम हथियार किस काम से और कहां से लाए हो?” पूछने पर एक आरोपी ने बताया कि वह इसे बेचने के लिए लाया था।हालांकि, किसको बेचने के लिए लाया गया था? वो बता नही रहे हैं। इनके बयान तो सुन रहे हैं लेकिन अपने स्तर पर मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी जांच पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि कहीं किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए हों?
एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी एटीएस ने यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज को गिरफ्तार किया है। दोनों ‘Reviving Islam’ नामक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे इस ग्रुप के 3 एडमिन सहित 400 पाकिस्तानी सदस्य बताए जा रहे हैं।
न्यूज़ डेस्क मुंबई: एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी ATS ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये दोनों ‘Reviving Islam‘ नामक एक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे, जिसमें 400 से ज्यादा पाकिस्तानी मेंबरों में 3 एडमिन शामिल हैं। इस ग्रुप के जरिए दोनों युवक राष्ट्र विरोधी बातें और गैर-मुस्लिमों के खिलाफ कट्टरपंथी सोच फैलाते थे।
एटीएस कर रही है जांच
एटीएस की जांच में पता चला है कि ये युवक पाकिस्तान के नागरिकों से सोशल मीडिया के जरिए लगातार कॉन्टैक्ट में थे। इस ग्रुप में चुनी हुई सरकार को गिराने और देश में शरिया कानून लागू करने जैसी बातें होती थीं। फिलहाल, एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। 2 terrorists arrested in Pakistani connection
इससे पहले एटीएस ने 2 जून को ठाणे के पडघा और बोरीवली में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। ATS ने मुंबई, ठाणे, भिवंडी और अन्य जिलों में 15 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन सिमी (SIMI) के पूर्व पदाधिकारी और ISIS महाराष्ट्र मॉड्यूल केस के मेन एक्यूज्ड साकिब नाचन के ठिकानों समेत उसके कॉन्टैक्ट में रहे कई अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। छापेमारी सिर्फ साकिब नाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कॉन्टैक्ट में रहे या उससे जुड़े अन्य संदिग्धों पर भी एजेंसी की नजर है।
तिहाड़ जेल में कैद
नाचन कुख्यात आतंकी अबू सुलेमान, अबू सुल्तान और मोहम्मद भाई जैसे दहशतगर्दों के सीधे कॉन्टैक्ट में था। रिपोर्ट के मुताबिक, नाचन ने ही अन्य सदस्यों को बाकी आतंकियों को शपथ दिलाई और साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई थी। फिलहाल, साकिब नाचन तिहाड़ जेल में कैद है। 2 terrorists arrested in Pakistani connection
मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।
अगर हेमंत करकरे होते तो, ..
शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।” How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
आरोपी बन गई सांसद
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”
29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।
मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।
इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
सबूतों के साथ छेड़छाड़
अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies
जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद
उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies