मुंबई से दिल्ली जाने वाली Vistara Airlines की फ्लाइट मे एक यात्री ने फोन पर Hijack से संबंधित बात की। शिकायत पर सहार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस्माईल शेख मुंबई- विस्तार एयरलाइन (Vistara Airlines) के विमान (Flight) में चालक दल के एक सदस्य ने एक यात्री को फोन पर ‘हाईजैक’ (Hijack) के बारे में बात करते हुए सुना जिसके बाद मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घटना गुरुवार रात को यहां छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई।
पुलिस अधिकारी ने बताया, कि “दिल्ली जाने वाली विस्तार एयरलाइन की उड़ान के चालक दल के एक सदस्य ने यात्री को अपने फोन पर विमान ‘हाईजैक’ के बारे में बात करते सुना था। चालक दल के सदस्य ने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया और पुलिस को भी इसकी सूचना मिली।”
गिरफ्तार आरोपी की पहचान रितेश संजयकुकर जुनेजा के रूप में हुई है। यह व्यक्ति विस्तारा एयरलाइंस (Vistara Airlines) की फ्लाइट में सवार था। सहार पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय गोविलकर ने जानकारी देते हुए बताया, कि “यात्री मानसिक रूप से अस्थिर है और 2021 से उसका उपचार चल रहा है।”
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उन्होंने कहा, कि यात्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 336 (लापरवाही या गलत इरादे से लोगों के जीवन या व्यक्ति अथवा अन्य की सुरक्षा को खतरे में डालना) और 505(2) (जो अफवाहें फैलाने या चिंताजनक समाचार फैलाने जैसे अपराधों से संबंधित) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मामले की अभी और अधिक तहकीकात सहार पुलिस कर रही है।
दंगो से बचने के लिए तमाम समुदाय के लोगों ने पड़ोसी राज्यों में शरण ली।
गृहमंत्री के पास सामुदायिक दंगे खत्म करने का कोई उपाय नहीं।
अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी?
चीन ने भारतीय भूभाग में सैकड़ों गांव बसा लिए।
देश के भीतर हिंसा को रोकना सरकार का दायित्व।
बीजेपी नेताओं को खुद, अब केंद्र की डबल इंजन की सरकार पर भरोसा नहीं।
पीएम मोदी का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा एकदम खोखला।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- बड़ी गजब की खबर है। जैसे रोम जल रहा था, तो वहां का राजा नीरो बंशी बजाने में तल्लीन था। कुछ हालत ठीक वैसे ही हमारे देश में है। मणिपुर महीने भर से सांप्रदायिक हिंसा से ग्रस्त है। लगभग तीन सौ गांव अग्नि की भेंट चढ़ चुके हैं। सैकड़ों निरपराध लोगों की हत्या की जा चुकी है। हजारों घायल हैं। तमाम समुदाय दंगों से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में शरण ली है। मणिपुर सरकार के हाथ पांव फूल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री के पास सामुदायिक दंगे खत्म करने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। आर्मी और पुलिस पर हमले हो रहे हैं।
अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी?
आर्मी के एक अधिकारी ने केंद्र सरकार को चेताया है। लेकिन मणिपुर को जलता छोड़ मोदी अमेरिका राजभोज में शामिल होने पहुंच गए हैं। अमेरिका जाने से पहले ही दो बिलियन अमेरिकी डॉलर्स के ड्रोन खरीदने का सौदा पक्का कर चुके हैं। कारण बताया जाता है, देश की सुरक्षा के लिए हथियार खरीदना ज़रूरी है। देश पर 155 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज है। यानी हर भारतीय एक लाख के कर्ज में है। 140 करोड़ में गिरवी रख दी गई है जनता।
आजादी के बाद से 2014 तक भारत पर कुल विदेशी कर्ज मात्र 55 लाख डॉलर्स था। मोदी सीएम थे तब मन मोहन सिंह द्वारा लिए गए विदेशी कर्ज की बड़ी आलोचना की थी। उनके पीएम बनने से पूर्व 65 साल में 55 लाख डॉलर्स का कर्ज था। जिसकी आलोचना ही नहीं खिल्ली उड़ाने वाले मोदी ने मात्र 9 वर्षो में 100 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज ले लिए जिसे कथित रूप से मुफ्त अनाज बांटने, किसान सम्मान निधि देने, पीएम आवास योजना और उज्वला योजना में मुफ्त सिलेंडर बांटने जिन्हे फिर कभी रीफिल कराया ही नहीं जाता।
ऋण लेकर घी पीना शायद इसे ही कहते हैं।विदेशी ऋण केवल ऐसे उपयोग के लिए लिये जाते हैं जिनसे राष्ट्र को आय हो लेकिन जब सवाल अपनी छवि बनाने की हो तो क्या कहा जाए? अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी? चीन ने भारतीय भूभाग में सैकड़ों गांव बसा लिए है। पाकिस्तान आंखें तरेर रहा है। चीन के खिलाफ एक शब्द बोल नहीं सकते।
मणिपुर भाजपा ने लगाए ‘लापता मोदी’ के पोस्टर्स..
सरकार का दायित्व है कि देश के भीतर हिंसा को रोकना जरूरी है। यहां तो हिंसाग्रस्त मणिपुर छोड़कर पीएम दावत खाने पहुंच गए। मणिपुर की चिंता नहीं। वहां की सरकार में शामिल मंत्रियों की फिक्र नहीं। हिंसाग्रस्त मणिपुर का तीन गुट मोदी से मिलने आया।चिट्ठी भी लिखी गई। मणिपुर भाजपा में भगदड़ मची हुई है। मंत्री के घर फूंके गए हैं। बीजेपी के नेताओं को खुद अब केंद्र की डबल इंजिन सरकार पर भरोसा नहीं है। मणिपुर के बीजेपी नेताओं ने राज्यभर में मोदी मिसिंग के पोस्टर चिपकाए हैं।
स्थानीय पुलिस और आर्मी में झड़प की खबर है। अरुणाचल प्रदेश जिसका भूभाग कब्जे में लेकर चीन ने सौ गांव बसा लिए हैं। उसके बाद भी मणिपुर दंगाग्रस्त राज्य बेहद ज़रूरी है शांति स्थापना के लिए। लेकिन पीएम लापता, गृहमंत्री मौन। मौन तो मोदी भी हैं। एक शब्द तक नहीं बोले। मणिपुर का नाम लेने से उसी तरह बचते रहे हैं जैसे महिला पहलवानों के यौन शोषण के खिलाफ धरना देने से उपजी स्थिति के संदर्भ में भी एक शब्द नहीं बोले जिससे यह संदेश विश्व भर में गया, कि मोदी का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा एकदम खोखला है।
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देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। मंहगाई चरम सीमा पार कर गई है। टैक्स मनमाना, पेनाल्टी मनमानी लगाई जा रही। सच तो यह है कि देश चलाना, हिंसा रोकना मोदी सरकार के बूते का नहीं। अब मणिपुर वाले पूछ रहे हैं कि हम देश के नागरिक हैं या नहीं? वोटर हैं या नहीं? जिसका जवाब बीजेपी के किसी भी नेता के पास नहीं है।
कुकी, नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति होगी अत्यंत भयंकर।
गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के सांसद, मंत्री चुप।
आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- मणिपुर की हिंसा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ पांव फूला देने के लिए काफी है। पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर जलता छोड़ विदेश चले गए। जो उन्हें देश की नहीं अपनी छवि बनाने की चिंता है। लेकिन छवि बनाते-बनाते कब मटिया मेट हो गई पता नहीं चला। दरअसल झूठ की भी हद होती है। महिला पहलवान अब उनकी और देश की बेटियां नहीं रही। वे अपने बाहुबली आरोपी सांसद को बचाने में लगे रहे इसी बीच विदेशों में भी उनकी छवि धूमिल हो गई।
ये राहुल गांधी हैं कि अमेरिका में जाकर मोदी की यात्रा के पहले सारा गुड गोबर कर दिए। बीजेपी की ऐसी तैसी कर दी। दूसरी तरफ गुजरात लॉबी द्वारा महिला पहलवानों की उपेक्षा से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और माफियाओं बलात्कारियों को मटियामेट करने का एलान करने वाले यूपी से सीएम योगी आदित्यनाथ की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उन्हे लगता है गुजरात लॉबी बीजेपी का सत्यानाश कर देगी।
बाहुबली को पीएम, गृहमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस द्वारा नाबालिग पहलवान के यौनशोषण मामले में क्लीन चिट देकर पॉक्सो कानून से हटाने का असर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं पर पड़ेगा। यदि उन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया तो बीजेपी को खत्म होने से कोई रोक नहीं पाएगा।
मणिपुर हिंसा बीजेपी की ही बोई गई है। मैती समुदाय को आरक्षण देने का वादा गुजरात लॉबी का था। तो मणिपुर हिंसा आगजनी का श्रेय भी इन्ही के माथे जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर दौरा कर चुके हैं। लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। बीजेपी मंत्री एवं बीजेपी सचिव के घर की आगजनी बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा है। आरक्षण का पेच कुछ इस तरह फंस गया है, कि अमित शाह के सम्मुख एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। अगर बीजेपी मैती समुदाय को आरक्षण देती है तो यह कुकी, नगा और अन्य आदिवासियों के लिए निर्धारित कोटे में से दिया जाएगा जिसे ये अपने हक पर डाका डालना समझेंगे।
मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।
अभी तो मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में है। कल कुकी नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति अत्यंत भयंकर होगी। गृहयुद्ध भीषण रूप से फैलेगा। अमित शाह को शायद इसी बात की चिंता हो। उनकी समझ में नहीं आ रहा, कि करें तो क्या करें? मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। जिसमे खुद अब बीजेपी के घर भी जद में आ गए हैं। अमित शाह के बूते का नहीं रहा मणिपुर। पीएम तो विदेश यात्रा के द्वारा अपनी नष्ट हो चुकी छवि को सुधारने में लगे हैं।
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आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।
आश्चर्य नहीं होगा कि आज गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के जो सांसद, मंत्री चुप हैं। मूक दर्शक बने हुए हैं कल सारे के सारे गुजरात लॉबी के विरुद्ध उठ खड़े हों। आसार तो यही नजर आते है, कि बीजेपी आत्मघात के रास्ते पर बहुत आगे निकल गई है जहां से लौटना असंभव है। आरएसएस के सामने अब नहीं तो कभी नहीं की विकट स्थिति आ खड़ी हुई है। देखना मजेदार होगा कि क्या आरएसएस गुजरात लॉबी को बीजेपी से अलग-थलग करेगी या बीजेपी को नष्ट होने देती है।
2024 के चुनाव में सेंट्रल जांच एजेंसियों पर रोक का होगा कितना असर?
नितिन तोरस्कर ( मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई- विपक्ष शासित राज्यों में सीबीआई-ईडी जैसी सेंट्रल जांच एजेंसियों की एंट्री और एक्शन पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार के इशारे पर सीबीआई और ईडी विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। विपक्ष शासित 10 राज्य ऐसे हैं, जहां सीबीआई बिना राज्य सरकार के परमिशन के कोई जांच या धर-पकड़ नहीं कर सकती। ताजा मामला तमिलनाडु का है। एमके स्टालिन सरकार के गृह मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर कहा है, कि किसी भी तरह की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।
तमिलनाडु सरकार का यह फैसला तब आया है, जब ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद एक्साइज मिनिस्टर बालाजी सेंदिल को गिरफ्तार कर लिया। तमिलनाडु सरकार ने यह आदेश दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट एक्ट 1946 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किया है। बिहार में लालू यादव के परिवार के लोग भी यही आरोप लगाते हैं, कि केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) का इस्तेमाल केंद्र सरकार अपने मतलब के लिए करती है। इसे एकतरफा कार्रवाई या बदले के भावना बताया जाता रहा है। चुनाव के संदर्भ में यह दलील दी जाती है, कि सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच हो रही है। क्या इसका चनावों पर असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।
भारत के कुल 10 राज्यों में सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर बैन लगा दिया गया है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, केरल, मिजोरम, मेघालय और राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु भी केंद्रीय जांच एजेंसियों पर बैन लगाने वाले राज्यों में शुमार हैं। इन राज्यों में सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां किसी भी शिकायत पर बिना राज्य सरकार की सहमति के कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं। हां, इसमें एक छूट जरूर शामिल है। अगर जांच किसी न्यायालयी आदेश या राज्य सरकार की संस्तुति पर हो रही हो, तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। हकीकत यह है कि जब भी किसी मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की जरूरत महसूस होती है तो लोग हाईकोर्ट की शरण में जाते हैं। कोर्ट अगर इजाजत देता है तो जांच होती है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल तस्वीर
बंगाल और झारखंड में बैन का कोई असर नहीं।
बैन के बावजूद सेंट्रल एजेंसियां कुछ राज्यों में आराम से अपने काम को कर रही है। पड़ोस की बात करें तो बंगाल और झारखंड में भी केंद्रीय एजेंसियों (CBI) की जांच पर रोक है। बंगाल में शिक्षक नियुक्ति घोटाला की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रहे हैं। यह जांच भी राज्य सरकार की मर्जी के खिलाफ है। लेकिन बाध्यता यह है कि इसकी जांच का आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया है। जांच का परिणाम यह है कि सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कई नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है तो कुछ अन्य की गिरफ्तारियां कभी भी हो सकती हैं। यहां राज्य सरकार की बंदिश का कोई रोड़ा सेंट्रल एजेंसियों की जांच या गिरफ्तारी में अटक नहीं रहा है।
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सेंट्रल एजेंसियों के खिलाफ 14 दल..
सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) के एक्शन से नाराज 14 राजनीतिक दलों के नेतों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसमें बिहार से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव, झारखंड से सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि सेंट्रल एजेंसियों की जांच नहीं रोकी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट जाने वालों में अधिकतर वैसे दल शामिल थे, जिसके नेता या कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ अदालतों ने सेंट्रल एजेंसियों से जांच की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट से निराश होकर ये नेता जांच से बचने की नयी तरकीब तलाश रहे हैं।
एजेंसियों की जांच का, चुनाव पर असर…
केंद्रीय जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन्हें जांच के लिए कोर्ट या राज्य सरकारों ने ही कहा है। आम आदमी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जांच के लपेटे में उनके पसंदीदा नेता रहे हैं या विरोधी। सामान्य भाव यही है कि चोर या भ्रष्टाचारी पकड़ा जाना चाहिए। लालू यादव के परिवार की बात करें तो उनके मामले में भी स्वजातीय को छोड़ कर किसी को इसकी परवाह नहीं है कि जांच एजेंसियां उनके परिवार के खिलाफ जांच कर रही हैं।
हां, थोड़ा-बहुत संदेह तब तक बरकरार रहता है, जब तक दोष न सिद्ध हो जाए। सुखद पहलू यह है कि ईडी ने जितने मामलों की अब तक जांच की है, उनमें अधिकतर के खिलाफ दोष सिद्ध हुए हैं और सजा भी हुई हैं। सामाजिक न्याय के मसीहा, समाज के वंचित लोगों को स्वर्ग नहीं, स्वर देने का दावा करने वाले लालू प्रसाद के बारे में भी जब चारा घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हुई थी तो यही कहा जाता था कि उन्हें फंसाया गया है। दोष सिद्ध होने और सजा के बाद सबकी बोलती बंद हो गई थी।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- केंद्र की बीजेपी सरकार में पीएम मोदी की कृपा पाने के लिए मंत्री तक हमेशा मोदी के बचाव में अनर्गल प्रलाप करते देखे सुने जाते हैं। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं। जिन पर कभी कोई लांछन नहीं लगा। सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते हैं। इसी कारण वे यदा-कदा अपनी ही सरकार की नीतियों का प्रेस के सामने मुखर विरोध करते हैं। तभी उनके पास भारी और खास मंत्रालयों की भरमार है। उनका कद छोटा करने के लिए उनसे अन्य मंत्रालय छीन लिए गए लेकिन परिवहन मंत्रालय का भारी भरकम मंत्रालय आज भी उनके हाथ में है।
अन्य मंत्रालय छीन लिए जाने का कारण है। उनकी साफ गोई का स्वभाव। वे अपनी ही सरकार के प्रबल आलोचक हैं। जिस कारण गुजरात लॉबी को वे फूटी आंखों में सुझाते हैं। अगर बस चलता तो कभी का उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता। केंद्र सरकार में एकमात्र मंत्री नितिन गडकरी हैं। जो कार्य करने में नंबर वन बन कर आज भी स्थिर हैं। पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पहले थोड़ा मनमौजी स्वभाव के थे। लेकिन मंत्रालय में जगह नहीं मिलने से अब बेवजह प्रेस के सामने आकर बेवजह विलाप करते हुए विपक्षियों पर आरोप मढ़ते रहते हैं। उन्हे याद रखना होगा कि कितनी भी चाटुकारिता कर लें मंत्री पद नही मिलेगी।
indian fasttrack newsभाजपा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की फाइल तस्वीर
नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है।
गडकरी महाराष्ट्र के निर्विवाद सबसे बड़े नेता हैं। पक्ष-विपक्ष का कोई भी नेता इनसे किसी भी समय मिल सकता है। वे दूसरे नेताओं को आगे बढ़ाते रहते हैं। इसी कारण वे जहां जनता के लाडले हैं वहीं नेताओं द्वारा समापुजित भी हैं। जब मोदी और शाह आरोपी बाहुबली से भयभीत हैं जो मुश्किल से चार या पांच सीटों पर प्रभाव रखता है तो नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है। महाराष्ट्र के सभी नेता इनकी प्रशंसा करते हैं। जिसके उलट फड़नवीस विदेशी शिक्षा लेकर एलिट बने हुए हैं। उनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। सभी से तो मिलते भी नहीं। उनकी शिवसेना पार्टी को तोड़ने में बड़ा हाथ रहा। केंद्र की नजदीकियां इन पर भारी पड़ी।
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सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते है।
शाह नहीं चाहते कि महाराष्ट्र या किसी राज्य में कोई नेता ऐसा हो पाए जो उनकी पीएम पद की राह में रोड़ा बनें। मोदी के बाद अमित शाह खुद को नंबर दो बनाने पर लगे हुए हैं। यूपी के सीएम योगी की राह में कांटे उनके बिछाए हुए हैं। लेकिन योगी आज भी मोदी के लिए चैलेंज बने हुए है। लगभग बीस लोकसभा सीटों पर उनकी मजबूत पकड़ है। इसलिए अमित शाह उन्हे अपने जाल में कैद नहीं कर पाए हैं। इन सबसे अलग नितिन गडकरी सुयोग्य शासक बनने के गुणों से भरपुर हैं। भाजपा में यदि पीएम पोस्ट के लिए कोई योग्य व्यक्ति है तो नितिन गडकरी हैं। इसीलिए अमित शाह के लिए उनका पत्ता साफ कर पाना बूते से बाहर है। हर नेता गडकरी नहीं बन पाएगा।
चाणक्य भूल जाते हैं कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था।
महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र सरकार में यहां भूचाल मचा हुआ है। दो पक्षों की साझेदारी में धीरे-धीरे तनाव उत्पन्न हो रहा है। शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। यह साझेदारी कब तक चलेगी यह कहा नहीं जा सकता।
दिल्ली बड़ी बेरहम है। जो कोई सत्ता में आता है, खुद को सम्राट समझने लगता है। वहां का सत्ताधारी कभी भी बर्दास्त नहीं करता, कि उसके साम्राज्य में किसी प्रांत का नेता शक्तिशाली बनकर उसे चुनौती देने की स्थिति में आए। इसीलिए यूपी में भाजपा के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ के पर कतर दिए गए। बिना दांत और नाखून के सीएम बना दिए गए। मजबूरी थी केंद्र की क्योंकि योगी आरएसएस के बेहद करीब हैं। सरकार में उनके दाहिने बाएं तो महावत के रूप में उपमुख्यमंत्री रख दिए गए। संगठन में प्रांतीय अध्यक्ष और प्रभारी दिल्ली ने नियुक्त कर योगी को रोक दिया। लेकिन योगी के बगावती तेवर ने उन्हें शक्तिशाली सीएम बना दिया।
Indian fasttrack newsमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फाइल तस्वीर
महाराष्ट्र सरकार की राजनीति ..
महाराष्ट्र में बकौल पूर्व सीएम फड़णवीस ने ही शिवसेना तोड़ने, शिंदे के साथ अपनी मित्रता निभाने और खुद मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब पाले थे। किंतु चाणक्य ने सस्पेंस रखते हुए एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया। फड़नवीस को बेइज्जत करने के लिए उन्हें डिप्टी सीएम बनने को मजबूर कर दिया। अब शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते। जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। शिंदे के प्रभाव के कारण एफआईआर भी नहीं लिखी गई। कितने असहज हो चुके हैं फडणवीस?
बिल्डर लॉबी,कॉरपोरेट भी दो घड़े में बंट गए हैं। कुछ को शिंदे तो कुछ को फडणवीस का वरद हस्त प्राप्त है। बीजेपी के कार्यकर्ता पीटे जाय। फडणवीस उसके पक्ष में खड़े भी हो जाएं लेकिन शिंदे द्वारा यह कहा जाए कि ठाणे जिले के किसी पुलिस अधिकारी का फडणवीस ट्रांसफर या पोस्टिंग, प्रमोशन नहीं कर सकते। क्योंकि बॉस शिंदे हैं और फडणवीस उनके अधीन हैं। उन्हे शिंदे का आदेश मानना ही पड़ेगा। बेचारे शिंदे करते भी तो क्या ? क्योंकि निरंतर उनका अपमान चाणक्य के फोन आने के बाद किया जाता है।
आज हालत ऐसे हैं कि कभी अभिन्न मित्र आज आंख में आंख मिलाकर बात तक नहीं करते। जिसका खामियाजा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ही भुगतना पड़ेगा। यूपी में लोकसभा की 64 सीटें 2019 में बीजेपी जीती थी। वहां योगी को नीचा दिखाया जा रहा और महाराष्ट्र में कुल 41 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा आगामी चुनाव में दहाई तक का आंकड़ा भी नहीं छूने की स्थिति में रह गई है। जिस बालासाहेब ठाकरे ने 2001 के गुजरात दंगे में सीएम मोदी का साथ दिया था। उन्हीं के बेटे उद्धव ठाकरे को चाणक्य ने लहूलुहान कर मोदी के विजय रथ को रोक दिया है। संभव है चाणक्य खुद पीएम की कुर्सी पाना चाहते हों और मोदी को डोमिनेट करने की महत्त्वाकांक्षा रखते हों।
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महाराष्ट्र के मामले में चाणक्य भूल जाते हैं, कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था और यह भी भूल गए कि महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी। शिवसेना के प्रभुत्व का लाभ बीजेपी को मिलता रहा है। लेकिन उद्धव ठाकरे को चोटिल कर चाणक्य ने भाजपा का महाराष्ट्र में सर्वनाश करने का जुगाड कर लिया है। इससे, सबसे बड़ा नुकसान पीएम मोदी का ही होगा और विधानसभा चुनाव में आने वाले समय में बीजेपी को 288 सीटों में बमुश्किल 20 सीटें ही मिलेंगी। शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की ही आगामी सरकार बनेगी। उसी तरह जैसे यूपी की लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर पेंच फसने से आरएसएस चिंतित है।
मणिपुर में लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर को फूंका दिया।
संविधान और लोकतंत्र को कुचलना स्वभाव बन गया है।
यह कमाल केवल कमल कर सकता है।
सुरेंद्र राजभर वाराणसी- मणिपुर में लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर को फूंका है। मंत्री उस वक्त घर में नहीं थे। बीजेपी चाहे जितने दावे करे लेकिन सच तो यह है, कि शासन करना इसके बूते का नहीं है। झूठ पर खड़ी ताश की इमारत कभी न तो ठोस धरातल बना पाती है न ठोस इमारत। फितरत जिसकी रग-रग में भरा हो। ईर्ष्या जिसका भाव हो। बदला जिसकी प्रकृति हो। दंभ जिसका स्वभाव हो। ऐसा व्यक्ति गांव के मुखिया का भी पदभार सम्हाल नहीं सकता तो देश कैसे सम्हालेगा?
झूठ सिर्फ झूठ, वादे कोरे, जिन्हें पूरे नहीं किए जाएं। लोकलुभावन नारे,विज्ञापन पर अरबों खरबों अपव्यय कर अपनी सफलता का झूठा प्रचार करना। पांच ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था जिसका फितूर हो। समस्या का समाधान नहीं कर सके। समस्या पर चुप्पी साध ले। शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में छिपा ले। प्रश्न पूछने पर चुप रहे क्योंकि जवाब नहीं और फिर प्रश्न कर्ता को जेल भेज दे। विपक्षी नेताओं के घर कभी सीबीआई तो कभी ईडी भेजकर डराए।
किसान आंदोलन चलता रहे कुछ न बोले अंत में माफी मांग ले।महिला पहलवानों की यौनशोषण आरोप पर चुप्पी साध ले फिर दिल्ली पुलिस पर दबाव डालकर आरोपी को क्लीन चिट दिला दे। कभी देश की बेटियां कहे तो कभी पुलिस द्वारा जबरन उन्हें उठाकर फेंकवा दे। पीड़िताओं से पुलिस कितनी बेहयाई के साथ सबूत मांगे और धमकी देकर, परिवार को खत्म करने का भय दिखाकर बयान बदलवाए। बस यही तो किया है। कभी नोट बंदी कर आम जनता को परेशान करे तो कानून बनाकर जनता को दंडित करे। अच्छे दिन के ख्वाब दिखाए। इसी का नाम है बीजेपी।
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मंत्री का घर फूंका..
संविधान और लोकतंत्र को कुचलना स्वभाव बन गया हो। मणिपुर में मैती को आरक्षण का वादा करे दूसरी तरफ विरोधियों को विरोध के लिए उकसाए। जिस तरह रोम को जलते देख अनदेखा कर नीरो बंसी बजाता रहा वैसे ही अपने मंत्री का घर फूंके जाने पर छवि निर्माण हेतु, विदेश पलायन कर जाए। यह कमाल केवल कमल ही कर सकता है। मत भूले कि हमेशा के लिये सत्ता नही मिली है। राज्यों की तरह सिमटता साम्राज्य खत्म होते देख भी सम्राट समझने की भ्रांति पालने वाले का हश्र अगले चुनाव में मालूम पड़ेगा।
भगवान जगन्नाथ को गर्मी से बचाने के नाम पर 108 घड़ों से स्नान कराकर शीत पैदा करते हैं पंडे पुजारी।
क्या कोविड 19 महामारी में समूची दुनिया पीड़ित रही तो पंडे पुजारी और कर्मकांडी पंडितों ने भगवान जगन्नाथ को काढ़ा पिलाया था?
सुरेंद्र राजभर मुंबई- कण कण में भगवान मिलते हैं। ब्रह्म ही विस्तारित होकर ब्राह्मण बने हैं। परमात्मा ही आत्मा रूप में हर जीवित प्राणियों में अवस्थित हैं। त्रिगुणी माया ब्रह्मा के रूप में रचना करते हैं। विष्णु के रूप में पालन और शंकर या शिव रूप में संहार करते हैं। ये मंदिर के पंडे पुजारी और कर्मकांडी पंडितों ने मिलकर सनातन धर्म का सत्यानाश कर दिया है। आज भी इनके ढकोसले यथावत जारी हैं।अतुलित है इनकी माया।
भगवान जगन्नाथ जिन्हें श्री कृष्ण परमब्रह्म कहा गया है जिसके विग्रह हैं जगन्नाथ।कितना क्रूर मजाक है जो जगत का नाथ है,नियंता है उसे ये पंडे पुजारी बीमार बता देते हैं। बकायदा बीमार पड़ने की तिथि भी इन लोगों ने तय कर दी है। ये पंडे पुजारी भगवान के नियंता बन बैठे हैं। जब हाहते हैं उन्हें बीमार बना देते हैं और पथ्य देने लगते हैं। वाह री इन पंडे पुजारियों और कर्मकांडियों की माया! इनका वश चले तो ये खुद सृष्टि के निर्माता पालन कर्ता और संहारक बन जाएं।
लानत है इनके ढकोसलों पर। गुमराह करते हैं ये भोले भाले भक्तों को एवं उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाने से भी नहीं चूकते हैं। ग्रीष्म काल में गर्मी से बचाने के नाम पर 108 घड़ों से स्नान कराकर शीत पैदा करते हैं। फिर शीत लगने से भगवान जगन्नाथ को बीमार बता देते हैं और उन्हें चंगा करने के नाम पर ये धूर्त 15 दिनों तक अपने खुद डॉक्टर बनकर इलाज करते हुए उन्हें तुलसी, काली मिर्च, सोंठ, लौंग और अन्य कथित औषधियों के काढ़ा पिलाने का स्वांग रचते हैं।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ कर देते हैं। है न कमाल! ये पंडे पुजारी जब चाहें भगवान को बीमार कर दें और फिर धनवंतरी वैद्य बनकर उन्हें काढ़ा पिलाकर स्वस्थ कर दें। पता नहीं जब कोविड 19 महामारी में समूची दुनिया पीड़ित रही तो क्या इन्होंने भगवान जगन्नाथ को काढ़ा पिलाया था या नहीं? शायद भगवान जगन्नाथ इनके गुलाम हो गए हैं। जो इनके निर्देश पर बीमार होते हैं फिर स्वस्थ हो जाते हैं।
मजेदार बात यह है, कि इन पंद्रह दिनों यानी आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को भगवान जगन्नाथ बीमार होकर पूरे पंद्रह दिनों तक सोते रहते हैं और फिर काढ़ा पीकर स्वस्थ हो जाते हैं। क्यों नहीं सरकार इन्हें भगवान जगन्नाथ के मंदिरों से हटाकर मेडिकल प्रेक्टिस कराती जो बीमारों को अस्पताल में नहीं जाने देंगे और काढ़ा पिलाकर स्वस्थ कर देंगे। देश का अरबों रुपया जो चिकित्सा पर व्यय होता है उसे बचाया जा सकता है। सच तो यह है कि पंद्रह दिनों तक भक्तों को। भगवान के दर्शन पूजन से वंचित रखने वाले सत्य से भागे हुए हैं।
भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।
चुनावी सर्वे में मोदी मैजिक खत्म होने के संकेत।
गुजरात लॉबी केवल दो उद्योगपतियों के लिए कर रही है काम।
पूर्व राज्यपाल ने चालीस जवानों के हत्या की कथित साजिश का किया खुलासा।
आगामी विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में बीजेपी की करारी हार की संभावना।
कांग्रेस का दामन थाम रहे बीजेपी की लेफ्ट वाहिनी बजरंग दल के लोग।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- आसार तो यही नजर आ रहे हैं, कि अब मोदी मैजिक खत्म हो रहा है। जिस तरह मोदी के चेहरे पर दो बार लोकसभा और अन्य कई राज्यों में विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में दो बार मोदी चेहरे ने प्रचंड जीत दिलाई थी। उसके आसार खत्म होने के संकेत चुनावी सर्वे में मिलने लगे हैं। मोदी का चेहरा, हिंदुत्व कार्ड, हिंदू-मुस्लिम और पाकिस्तान की बार-बार रट अब नहीं चलने वाली है। अहम बात यह कि ऐसा क्यों हो रहा?कारण अनेक हैं जिनमें एक कारण है गुजरात लॉबी द्वारा खुद को बीजेपी, सरकार और देश समझने की भ्रांति।
पूरे देश को लगने लगा है कि जिस तरह देश की विरासतें जिन्हें पिछले सत्तर वर्षों में अथक श्रम से निर्मित किया गया था उसे एक झटके में खत्म करने के लिए औने-पौने दाम पर केवल दो गुजराती व्यापारियों को बेचने के कारण जनता समझने लगी है कि गुजरात लॉबी केवल उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। पिछले समय में अडानी पर हिडेनबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार फेक कंपनी द्वारा अडानी डिफेंस में बीस हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट शंकाएं पैदा करने लगा है।
Indian fasttrack newsबजरंग दल हुई कांग्रेस के साथ ..
गुजरात लॉबी..
चालीस जवानों की हत्या की कथित साजिश जिसको लेकर पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने खुलासे किए हैं, जो बेहद शर्मनाक हैं। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश ने दो बार 80 लोकसभा सीटों में अधिकतम सीटें दिलाने वाले राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ के उपर जिस तरह से गुजरात लॉबी ने दूसरे दलों के लोगों को डिप्टी सीएम बनाकर योगी को बांध दिया गया और गुजरात लॉबी ने योगी को अपंग बनाने के लिए संगठन में प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी नियुक्त किए उससे योगी समर्थकों में मायूसी होने से यूपी की चालीस सीटों पर पेंच फंस गया है।
भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।
कर्नाटक में बुरी तरह हार हुई है। सर्वे बताते हैं, कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में बीजेपी की करारी हार संभावित है। जिस तरह बीजेपी की लेफ्ट वाहिनी बजरंग दल के लोग कांग्रेस का दामन थाम रहे, जिस तरह बीजेपी से मोह भंग होने के कारण बीजेपी छोड़ रहे है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार सुनिश्चित लगने के बाद आरएसएस को चिंता में डाल दिया है।
आरएसएस समझ चुका है कि मोदी अब रेस जीतने वाले नहीं रहे इसलिए वह मोदी के स्थान पर दूसरा चेहरा आगे लाने पर विचार कर रहा है। जिसे देखकर स्पष्ट है कि अब गुजरात लॉबी के दिन खत्म होने वाले हैं। यद्यपि नरेंद्र मोदी और अमित शाह मुस्लिमों को साधने में लगे हैं लेकिन इतना तय है कि भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।
सरकार ने समय बढ़ाते हुए पैन और आधार को लिंक करना अनिवार्य बताते हुए इसकों लेकर ऐलान कर दिया है। जोड़ने की प्रक्रिया भी आज हम आप को बता दे..
सुरेंद्र राजभर मुंबई- सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (Central Board Of Direct Taxes, Government Of India) यानी सीबीडीटी ने एक बार फिर पैन नंबर (Pan Card Number) को ‘आधार’ (Aadhar Card) से लिंक करने की डेडलाइन बढ़ा दी गई है। अब इस समय सीमा को 30 जून 2023 तक बढ़ा दिया गया है। करदाताओं को आधार कार्ड को पैन कार्ड से जोड़ने के लिए थोड़ा और समय दिया है। अभी तक जिन लोगों ने पैन को आधार से लिंक (Aadhar Pan link) नहीं कराया है, वे 30 जून तक लिंक करा सकते हैं। सीबीडीटी ने पैन को आधार से लिंक करने की समय सीमा पांचवीं बार बढ़ा दी है।
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139AA के अनुसार, जिनके पास आधार कार्ड और पैन कार्ड दोनों हैं, उनके लिए दो कार्डों को लिंक करना अनिवार्य है। अब इसकी अंतिम तारीख को बदलकर 30 जून कर दिया गया है। सीबीडीटी के मुताबिक आखिरी तारीख के बाद भी अगर आप ने पैन और आधार को लिंक नहीं किया, तो आपका पैन कार्ड काम नहीं करेगा और आप फाइनेंस से जुड़ा कोई भी काम नहीं कर पाएंगे। बैंक खाते से संबंधित लेन-देन भी नहीं हो पाएंगे। ऐसे में इस एक्सटेंशन से उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्होंने अभी तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं करवाया है।
Pan Aadhar link
ऑनलाइन कैसे जांचें?
इनकम टैक्स विभाग की ऑफिशल वेबसाइट पर जाएं। आप यहां से भी क्लीक कर के वेबसाइट पर जा सकते हैं। (income tax India) यहां क्लीक करने के बाद लिंक आधार (link Aadhar) पर क्लीक करें। इसके बाद वैलिडेट बटन को क्लीक करें। अब आप का आधार कार्ड पैन कार्ड से लिंक हो गया है। इसके अलावा आप को बता दें, कि यदि दोनों कार्ड पहले से लिंक हैं, तो संदेश में “आपका पैन पहले से ही दिए गए आधार से जुड़ा हुआ है” दिखाई देगा। यदि आपका पैन और आधार कार्ड लिंक नहीं हैं, तो आपको एक संदेश दिखाई देगा कि पैन आधार से लिंक नहीं है। यदि लिंक प्रक्रिया में है, तो करदाता अपनी विंडो पर देखेगा कि आपका आधार-पैन लिंकिंग अनुरोध सत्यापन के लिए UIDAI को भेज दिया गया है। कृपया होम पेज पर ‘लिंक आधार स्थिति’ लिंक पर क्लिक करें और फिर स्थिति की जांच करें।
एसएमएस के जरिए से लिंक कैसे करें ?
आप को अधिक जानकारी के मुताबिक, बताते चलें, कि पैन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने के लिए आप मोबाइल की एसएमएस सेवा का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए अपने आधार कार्ड से पंजीकृत (Registered Mobile Number) से UIDPAN<12 अंको का आधार कार्ड नंबर><10 अंकों का पैन कार्ड नंबर> 567678 या 56161 पर एसएमएस (SMS) भेज दें। इसके साथ ही आप को मोबाइल पर पुष्टिकरण एसएमएस प्राप्त हो जाएगा, कि आप का पैन आधार से लिंक हो गया है।