कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा मुम्बई के कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है।
इस्माईल शेख मुम्बई- सुप्रीम कोर्ट ने मुम्बई कॉलेज बुर्का मामले में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को कक्षा में बुर्का पहनने और परिसर में कोई भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
मामले में मुम्बई कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुम्बई के एक कॉलेज के उस आदेश पर आंशिक रोक लगाई जिसमें परिसर में ‘हिजाब, बुर्का, टोपी और नकाब’ पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके साथ ही कॉलेज में ‘हिजाब’, ‘बुर्का’ पहनने पर प्रतिबंध संबंधी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुम्बई की ‘एजुकेशनल सोसाइटी’ से जवाब मांगा।
क्या है मामला?
बता दें कि मुम्बई के एक निजी कॉलेज में छात्रों के कैंपस में हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी आदि पहनने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई।
यह मामला मुम्बई के एन. जी. आचार्य और डी. के. मराठे. कॉलेज का है, जहां के कॉलेज प्रशासन ने “हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल और टोपी” पहनने पर बैन लगाया हुआ था। इसके खिलाफ 9 लड़कियों ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।
कॉलेज प्रशासन का भेदभाव ..
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कॉलेज प्रशासन से कहा, “छात्रों को यह चुनने की आजादी होनी चाहिए कि वे क्या पहन सकती हैं। कॉलेज उन पर दबाव नहीं डाल सकता… यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको अचानक पता चलता है कि देश में कई धर्म हैं।” कोर्ट ने पूछा, कि “क्या आप यह कह सकते हैं कि किसी शख्स को तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी?”
जंगल बचाने केवल आदिवासी ही क्यों? पुरा देश क्यों नहीं?
Global Warming पर सरकारों में सकारात्मक दृष्टिकोण कहाँ ?
अवैध निर्माण के लिए शासन प्रशासन ही है जिम्मेदार..
क्या हर बात के लिए न्यायालयों पर ही आश्रित रहें?
शासन प्रशासन का कोई दायित्व नहीं ?
सुरेंद्र राजभर मुंबई- Global Warming आज धरती, पर्यावरण खतरे में है।ग्लोबल वार्मिंग के खतरे वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद जंगल काटे जा रहे हैं। हसदेव जंगल बचाने केवल आदिवासी ही क्यों आंदोलित हैं। पूरा देश क्यों नहीं? हसदेव के लाखों पेड़ मात्र एक व्यक्ति के लिए काटे जा रहे हैं, जो पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है। मुंबई में समुद्र तट से 500 मीटर दूर ही निर्माण का कानून बना है, लेकिन महानगर पालिका के भ्रष्ट अधिकारियों को मुंबई और मुंबईकरों की तनिक भी चिंता नहीं है। बीएमसी के उच्च जिम्मेदार अधिकारी और राज्य सरकार आंखें मूंदे हुए हैं।
मुंबई में मनपा की खाली जमीनों का अधिकारी और नेता सौदा कर अपनी जेबें भर रहे हैं। चुनाव का पर्व भूमाफियाओं और बीएमसी अधिकारियों के लिए अवैध निर्माण का सुनहरा मौका देता है कालाधन अर्जित करने का। पत्रकार अपनी भूमिका निभाते हैं। फोटो सहित गैरकानूनी निर्माण की घटना प्रकाशित करते हैं। बीएमसी आयुक्त, शहरी विकास मंत्री सहित सभी जिम्मेदार चुप रहते हैं। कोई कार्रवाई नहीं होती। अवैध निर्माण में पुलिस, विधायक, सांसद और कार्पोरेटरों का भी सहयोग होता है। सभी अपने हिस्से का कमीशन लेकर अनदेखा अनसुना कर देते हैं। Global Warming
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अहमदाबाद से लेकर सुदूर साउथ में भी अवैध रूप से जंगल, सरकारी जमीन, चारागाह, तालाब सब पर कब्जा किया जाता है। कुछ समय पूर्व रामटेक की घटना का स्मरण होगा ही। उत्तराखंड में खुद सरकार प्रकृति के विरुद्ध निर्माण कर रही है, जिससे जोशी मठ को खतरा हो गया है। उसका अस्तित्व मिटने की कगार पर है। उत्तराखंड की त्रासदी याद होगी जब नदी की सीमा में चार चार महल के होटल ताश के पत्तों की तरह ढहकर नदी की धार में बह गए थे। Global Warming
अवैध निर्माण मात्र ग्रामप्रधानों, विधायकों, सांसदों और पुलिस जवाबदेह होती है। उत्तर प्रदेश में जिन माफियाओं के होटल रेस्टोरेंट भव्य अट्टालिकाएं योगी ने बुलडोज कराई उसके गैर कानूनी तरीके से निर्माण के समय कौन कौन अधिकारी, विधायक, सांसद थे उनका पता लगाकर साथ में उनके घर भी बुलडोजर से गिराना चाहिए था लेकिन सरकारें ऐसा नहीं करेंगी। जब कोई संपत्ति ढहाई या तोड़ी जाती है तो देश की संपत्ति का नुकसान होता है। Global Warming
गैरकानूनी निर्माण ढहाने या तोड़ने की जगह गरीबों का आशियाना और सरकारी दफ्तर बैंक को दे देना चाहिए। सारे बैंक की अपनी बिल्डिंग नहीं है। उनसे भाड़ा सरकार ले सकती थी। यह सकारात्मकता होती लेकिन हमारी सरकारों में सकारात्मक दृष्टिकोण कहां? अवैध निर्माण के लिए शासन प्रशासन ही जिम्मेदार होता है। अवैध निर्माण न गिराकर अधिकारियों विधायकों सांसदों के शीश महल जब्त कर सरकारी उपक्रमों और निर्धन बिना पक्की छत वाले गरीबों को दे देना ही सकारात्मक कदम होगा। Global Warming
धरती के पर्यावरण की रक्षा वृक्ष ही करते हैं।अब अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए वहां झोपड़ियां बनाकर सदियों से रहने और जंगल से ही अपनी रोजी रोटी कमाने वाले गरीबों को क्यों उजाड़ा जाए, एक धनवान के लिए जैसा कि हसदेव जंगल के लाखों पेड़ों को काटकर खत्म किया जा रहा है। याद रहे सुप्रीमकोर्ट ने सही कहा, धरती सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं हैं। यहां विभिन्न तरह के पशु पक्षी और अन्य जीव भी रहते हैं। वे जंगल और खाली जमीन पर ही आश्रित रहते हैं। पहले लोग अपने धोर लेकर सुबह जंगल जाते थे। पशुओं को जंगल में चारा मिलता है। चारागाह खत्म पशुओं का चारा खत्म। Global Warming
क्या हर बात के लिए हम न्यायालयों पर ही आश्रित रहें? शासन प्रशासन का कोई दायित्व नहीं है। अवैध निर्माण के लिए राजनीति का वोट बैंक प्रमुख होता है। इसीलिए जासंबिखकार अवैध निर्माण कराए जाते हैं।जैसे लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही बीएमसी के जिम्मेदार भूमाफियाओं से साठ गांठ कर उनसे करोड़ों रुपए वसूली कर अपने सरकारी आकाओं तक पहुंचाते रहते हैं जिससे कभी अवैध बांधकाम नहीं टूटते। Global Warming
कांदीवली पुलिस ने मुंबई शहर के साथ-साथ गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से कुल 10 लाख 17 हज़ार एक सौ रुपये के 54 मोबाइल फोन जब्त कर फरियादियों को चोरी का सामना वापस किया है।
इस्माईल शेख मुंबई- कांदीवली पुलिस ने चोरी के मोबाइल फोन मामले में मुंबई शहर के साथ साथ गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे विभिन्न राज्यों से जानकारी इकट्ठा कर चोरी के मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहें लोगों पड़ताल कर कुल 54 मोबाइल फोन जब्त किया है। साथ ही उच्च अधिकारियों द्वारा संबंधित मोबाइल फोन के फरियादियों को बुला कर उनका सामना वापस किया गया है। (Crime story of mobile phones seized by Kandivali Police of Mumbai city along with various states like Gujarat, Uttar Pradesh, Jharkhand, Bihar and West Bengal)
कुल 10 लाख 17 हज़ार एक सौ रुपये के बराबर मोबाइल फोन की जानकारी देते हुए कांदीवली पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ज्ञानेश्वर गणोरे ने बताया, कि क्राईम डिटेक्शन टीम के पुलिस उपनिरीक्षक नितीन साटम की निगरानी में पुलिस सिपाही परमेश्वर चव्हाण, महिला पुलिस निरीक्षक अंजना यादव ने गुमशुदा मोबाइल फोन के सीईआईआर (CEIR) पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर निरंतर तफतिश कर उक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे लोगों का पता लगाया और उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में मुंबई शहर और अन्य राज्यों से चोरी के मोबाइल फोन जब्त किया है। (Crime story of mobile phones seized by Kandivali Police of Mumbai city along with various states like Gujarat, Uttar Pradesh, Jharkhand, Bihar and West Bengal)
कांदीवली पुलिस द्वारा जब्त चोरी के मोबाइल फोन फरियादियों को वापस करते हुए तस्वीर
कांदीवली पुलिस का सराहनीय कार्य ..
बता दें कि कांदीवली पुलिस ने सराहनीय कार्य परिमंडल-11 के पुलिस उपायुक्त आनंद भोईटे, मालवनी डिविजन के सहायक पुलिस आयुक्त शैलेंद्र धिवार के मार्गदर्शन में कांदीवली पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ज्ञानेश्वर गणोरे, क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक आनंद कांबळे की देखरेख में पुलिस उपनिरीक्षक नितीन साटम, पुलिस सिपाही परमेश्वर चव्हाण एवं महिला पुलिस निरीक्षक अंजना यादव ने पार किया है। मुंबई पुलिस महकमे में इनकी प्रशंसा की जा रही है। गुम हो चुके मोबाइल फोन को वापस पाकर फरियादियों ने कांदीवली पुलिस को धन्यवाद दिया। (Crime story of mobile phones seized by Kandivali Police of Mumbai city along with various states like Gujarat, Uttar Pradesh, Jharkhand, Bihar and West Bengal)
चार सौ का नारा केवल कार्यकर्ताओं को बचाने का सहारा।
सुरेंद्र राय मुंबई– आरएसएस बीजेपी की मदर संगठन है। लेकिन आज मोदी के सामने बौना हो गया। कारण मोदी ने अपना कद इतना बढ़ा लिया जो लोकतंत्र के दायरे में फिट नहीं बैठता। वैसे आरएसएस भी लोकतंत्र और भारतीय संविधान को नहीं मानता। मनुस्मृति और एक पार्टी का शासन के लिए मोदी कृतसंकल्प हैं। लेकिन आरएसएस को लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथ से बाजी जाती दिखती है।आरएसएस की नज़र में मोदी का करिश्मा व ख्याति खत्म हो चुकी है। (RSS And Modi Government BJP Political News)
आरएसएस की सरकार में स्थिति क्या है?
आरएसएस एक बार कांग्रेस का पहले समर्थन कर चुकी है। बीजेपी की सत्ता में आरएसएस को सुविधाएं तो मिलीं। सत्रसूख भी मिला मगर अस्तित्वहीन हो चुका है आरएसएस। सरकार पर कोई प्रभाव नहीं रहा। हिंदू कार्ड भी राम मंदिर बन जाने से फेल हो गया है। आरएसएस का हिंदुत्व अंतिम स्वांस गिन रहा। महाराष्ट्र में एम एन एस से गठजोड़ होने की स्थिति में उत्तर भारतीय संगठन बीजेपी का साथ छोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। (RSS And Modi Government BJP Political News)
एम एन एस से गठबंधन के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ लाखों वोटर्स बीजेपी से किनारा करेंगे। गुजरात के कच्छ में तेईस गांव के लोग चुनाव का बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ने दिल्ली के लोगों को नाराज़ कर दिया है। गिरफ्तारी का प्रभाव पंजाब और हरियाणा में भी पड़ेगा। (RSS And Modi Government BJP Political News)
आरएसएस संगठन की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर
पूर्वोत्तर के मणीपुर, मिजोरम जैसे प्रदेशों में जाने की हिम्मत मोदी नहीं दिखा रहे। महिला खिलाडियों को जिस तरह दिल्ली पुलिस द्वारा सड़क पर घसीटा गया। बलात्कारी को बचाया गया। किसान आंदोलन दो के समय ड्रोन से आंसू गैस के गोले गिराए गए। दुनिया में बैन पेयलेट गन चलाकर किसानों की आंखें फिफी गई। एम एस पी लागू करने के वादे से मोदी पीछे हटे, सड़क पर नुकीले कीलें जड़ी गई।किसान नाराज हैं। (RSS And Modi Government BJP Political News)
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बीजेपी को भी हार का भय सता रहा है। लोग टिकट मिलने पर भी चुनाव से कतरा रहे है। और भी नेता बीजेपी छोड़कर भाग रहे है। ए बी पी सर्वे में दो सौ सीटें भी बीजेपी पाने की स्थिति में नहीं है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में देश भर से मिले समर्थन ने बीजेपी और आरएसएस की नींद उड़ा दी हैं।इंडिया गठबंधन और भी मज़बूत हुआ है। छोटे छोटे दलों को जिस तरह बीजेपी से जोड़ा जा रहा है उसकी हताशा ही झलकती है। चार सौ का नारा केवल कार्यकर्ताओं को ढाढस बंधाने के लिए दिया जा रहा है। तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर मोदी ने संदेश दिया है कि वे आयोग द्वारा अपनी मर्ज़ी का चुनाव कराएंगे। (RSS And Modi Government BJP Political News)
इन नेताओं से पूछिए की लोकतंत्र की परिभाषा क्या है?
एक दूसरे के घोर विरोधी सब एक हो गए हैं।
INDIA गठबंधन के 28 दलों के नेताओं का मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
वी बी माणिक नई दिल्ली- कल पूरा विपक्षी पार्टियों के कुल 28 दलों के नेताओ ने मोदी के विरुद्ध लोकसभा चुनाव में इज्जत और परिवार बचाओ रैली निकाल कर सभी से चुनाव में मतदान करने के लिए आह्वान किया है। जिसमें मुख्य आकर्षण सुनीता केजरीवाल, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, फारूक अब्दुल्ला, लालू प्रसाद यादव, सीताराम येचुरी, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती, अखिलेश यादव एवं अन्य नेता उपस्थित हुए सभी ने एक स्वर में अरविंद केजरीवाल को जेल से छुड़ाने के लिए आवाज उठाया। (india political news)
आप को बता दें, कि इसी रामलीला मैदान में 2012 में केजरीवाल ने अन्ना हजारे के साथ मिलकर राजनीति नहीं करने की शपथ ली थी। पर हजारे को धोखा देकर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा कर लिया और घोटाले में जेल की यात्रा पर चले गए। वही राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि मोदी ने क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की तरह ईडी, सीबीआई और इनकमटैक्स डिपार्टमेंट जैसे सरकारी विभागों को लगाकर चुनाव जीतने की तैयारी में लगे है। (india political news)
राहुल क्या क्या बोलते है ये किसी भी जनता के समझ मे नही आता है। ईवीएम तो कांग्रेस ही लायी थी। आज उसका विरोध कर रहे हैं। संविधान समाप्त हो जाएगा बीजेपी से जनता को छुटकारा पाने का चुनाव है। सुनीता ने कहा कि केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे। इस इंडिया गठबंधन में आधे से ज्यादा नेता बेल पर है और कुछ जेल में है। क्या सत्ता धारी पार्टी के नेता ही भ्रष्टाचार में लिप्त है। यहां तो हर छोटे से बड़ा नेता किसी न किसी घोटाले में लिप्त है। (india political news)
दिल्ली के रामलीला मैदान से विरोध प्रदर्शन की तस्वीर
भाजपा नेताओं ने कहा इस गठबंधन में भ्रष्टाचारी सब एक हो गए है जो कभी एक दूसरे के घोर विरोधी थे। आज सब एक दूसरे की गोद मे बैठे है क्या केवल चुनाव जीतकर जनता को लूटने का संकल्प ले रखा है? अभी तक सीट बंटवारा नही हो सका है बात एकता की कर रहे है। जनता इनको जिताने वाली नही है। क्या करेंगे ? (india political news)
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अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि उत्तरप्रदेश में जो जंगल राज की सरकार चला रहे थे इनके कार्यकर्ता पुलिस थानों, सरकारी कार्यालयों में दलाली करते थे। महिलाएं अपने को असुरक्षित महसूस करती थी। पुलिस शिकायत नही सुनती थी। पुलिस कर्मी थानों में बैठकर खुलेआम शराब पीते थे। इस पर कितना कंट्रोल किया था। वही मानसिकता पुलिस वालों की आज भी है। भले योगी की सरकार हो। क्योंकि अखिलेश वाली मानसिकता अभी तक गयी नही है। सारे नेता लोकतंत्र की बात करते है इन नेताओं से पूछिए की लोकतंत्र की परिभाषा क्या है? (india political news)
इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल सामने आते शुरू हुआ देश में राजनैतिक भूचाल।
कौन से दल ने कितना किया झोल?
रिपोर्ट अभी और बाकी है..
Electoral Bond Indian Government Political News
सुरेन्द्र राय मुंबई- हम भारतीय अपने जहन में कई वर्षो से लगातार एक जटिल समस्या का हल ढूंढ रहे है और वह जटिल समस्या यह है, कि इंसान अंततः भ्रस्ट क्यों हो रहा है? जबकि हमारे भारतीय समाज में भ्रस्टाचार के वर्चस्व का एक नया स्तंभ स्थापित हो चुका है और हमने इसमें ज्ञान, दौलत और हिंसा की एक ऐसी मिसाल इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे को खड़ी कर दी है, जो भ्रस्टाचार और सत्ता के मध्य अटुट और अतरंग संबंध स्थापित करती नजर आ रही है। (Electoral Bond Indian Government Political News)
हालांकि यह सत्ता विमर्श एक गंभीर जिरह की मांग करता है, जो सामाजिक विकास कार्य में अवरुद्ध करने वाला घटक के रूप में साबित हो रहा है, जो एक भ्रस्ट आचरण की पहचान है। जिसकी हमें घोर निंदा की जानी चाहिए। अब ऐसे में पिछले पांच वर्षों में कंपनियों ने अपने फ़ायदे के लिए सरकार को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए कितना पैसा दिया यह पूरी तरह से अभी खुला नहीं है। घाघ लोगों का खुलासा एस बी आई ने नहीं किया। पांच वर्षों में किस कंपनी ने कितना चंदा दिया? (Electoral Bond Indian Government Political News)
‘बिजनेस टाइम्स’ मैगज़ीन में छपी खबर के अनुसार भारती एयरटेल में 241 करोड़, तता स्टील ने 175 करोड़, एल एन्ड टी ने 85 करोड़, महेंद्रा एन्ड महिंद्रा ने 39 करोड़, अल्ट्राटेक सीमेंट ने 23 करोड़, बजाज फाईनैंस ने 20 करोड़, मारुति सुज़ुकी ने 20 करोड़, टेक एम ने 15 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। बीजेपी को पिछले दो वर्षों में यानी 2019 में 216.9 करोड़, 2023/24 में 296.12 करोड़ मिले। जबकि कांग्रेस को 2019 में मात्र 15.85 करोड़ और 2023/24 में 81.1 करोड़ मिले। इसके साथ ही दूसरे दलों को 2019 में 4.55 करोड़ और 2023/24 में 33 करोड़ मिले। (Electoral Bond Indian Government Political News)
पिछले पांच साल इलेक्टोरल बॉन्ड में कितने पैसे मिले हैं इसपर नज़र डालें तो पता चलता है, कि 2019 में 237 करोड़ , 2020 में 46 करोड़, 2021 में 40 करोड़ रुपए मिले। जबकि 2022 में 563 करोड़ और 2023 में 347 करोड़ के साथ दो वर्षों का भारी उछाल देखने को मिला। 2024 में सिर्फ 65 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए। (Electoral Bond Indian Government Political News)
कांग्रेस के चारों एकाउंट आई टी ने फ्रीज किए हैं। इसलिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गैरकानूनी गैरसंवैधानिक बताए जाने पर बीजेपी के भी खाते सीज करने की मांग की ज़ा रही है। यही न्याय का तकाज़ा भी है। प्रकाशित खबर के मुताबिक, फ्यूचर जेमिंग कंपनी द्वारा 149 करोड़ 2020 में, 324 करोड़ 2021 में, 440 करोड़ 2022 में, 321 करोड़ 2023 में और 2024 में 63 करोड़ क्षेत्रीय दलो जिसमें डी एम के, टी एम सी, वाई एस आर कांग्रेस और अन्य को दिए। (Electoral Bond Indian Government Political News)
जबकि 2019 में बीजेपी को 125 करोड़ 2021 में, 33 करोड़ 2022 में, 129 करोड़ और 2023 में, 297 करोड़ रुपये मेघा इंजीनियरिंग ने दिए। क्विक ने भाजपा को 325 करोड़ 2022 में, शिवसेना को 25 करोड़, 2023 में बीजेपी को 50 करोड़ दिए। इसके साथ ही लिस्टेड कंपनियों से बीजेपी को 2019 और 2023/24 में 216.9 करोड़ और 298.12 करोड़ रुपए मिले, जबकि कांग्रेस को 15.85 और 81.1 करोड़, अन्य दलों को 4.55 और 33 करोड़ मिले। (Electoral Bond Indian Government Political News)
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टॉप 10 डोनर्स के 9.6 करोड़ मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गए। जिनमे फ्यूचर जेमिंग के 3, ई सी एल के 2, पैसिफिया इंडिया के 1.25, सिलवेनस बिल्डर के 1, सी मेकर्तिच के 0.4, वेदांता लिमिटेड के 0.3, सुधा कमर्शियल के 0.3, जुपिटर के 0.25, उत्कल अलमुनियम के 0.2 करोड़ रुपए का इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गया। अकेले जालान ग्रुप की कंपनी केवेंटर फूडपार्क ने बीजेपी को 144.5, कांग्रेस को 20, अकाली दल को 0.5, यस पी को 10, टी एम सी को 20 करोड़ रुपये दिए। (Electoral Bond Indian Government Political News)
जबकि मदनलाल लिमिटेड ने बीजेपी को एकमुश्त 175 करोड़, कांग्रेस को 10 करोड़ और एम के जे ने कांग्रेस को 69.35, आप को 7, टी एम सी को 18.5, बी आर एस को 10, बीजेपी को 12.5, और बी जे डी को 10 करोड़ रुपए दिए। इसके साथ ही एम के जे ने कांग्रेस को 22.25, टी एम सी को 27.4, बीजेपी को 14.07 करोड़ दिए। सस्मल इंफ्रास्ट्रक्चर ने कांग्रेस को 39 करोड़ और बीजेपी को 5 करोड़ दिए। (Electoral Bond Indian Government Political News)
भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनावी समर भूमि में ठंडे पड़ गए हैं..
बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पार्टी की नीतियों का हो रहा है खामियाजा..
सुरेंद्र राय मुंबई- बड़ा शोर है भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार का लेकिन मोदी को छोड़कर एक भी चुनावी समर भूमि में सक्रिय नेता नहीं है। सबसे बड़ी 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव प्रचार में दूर दूर तक नजर नहीं आते। सबसे बड़ा हिंदुत्व चेहरा हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जिनकी देश में बड़ी मांग है, लेकिन मोदी की तरह वे कहीं भी चुनावी मूड में नहीं दिखते।
भारतीय जनता पार्टी का युपी में चुनाव प्रचार
दो दो डिप्टी सीएम हैं जो अपनी खोल से अभी बाहर ही नहीं निकल सके हैं। प्रांतीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी भी कहीं नमूदार नहीं हो रहे। बड़े जोर शोर से ढिंढोरा पिटा गया था, चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी का। उन्हें गाजे बाजे के साथ भारतीय जनता पार्टी में लाया गया। यह सोचकर कि उनके दादा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर पश्चिमी यूपी की सारी सीटें बिना प्रचार किए भारतीय जनता पार्टी की झोली में आ गिरेंगी। परंतु अभी भी जयंत चौधरी पशोपेश में हैं। किसान बिरादरी उनके बीजेपी में जाने पर उनसे दूरी बना ली है। अब वे किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की तरह किसानों के नेता नहीं रह गए हैं। बिना संख्या बल के वे भारतीय जनता पार्टी को कितनी सीटें दिलाएंगे खुद समझ नहीं पा रहे। चुनाव प्रचार तो बड़ी दूर की कौड़ी है उनके लिए। हालत यह हो गई है, “आधी छोड़ सारी को धावे। आधी मिले न सारी पावे।”
भारतीय जनता पार्टी के साथी अनुप्रिया पटेल और बड़बोले अस्तित्वहीन ओमप्रकाश राजभर जिनकी अमित शाह ने उत्तर प्रदेश सरकार में ताजपोशी कराई है। छवि बेहद खराब होने से जनता उनसे कन्नी काटने लगी है। मेनका गांधी और संतोष गंगवार यूपी के आठ आठ बार सांसद रहे हैं। लेकिन उनके टिकट ही पक्के नहीं हुए हैं। करें भी तो क्या? टिकट मिलेगा या नहीं? कहा भी नहीं जा सकता। तुरूप का इक्का होने से रहे।
बिहार की संसदीय गठबंधन ..
सांसदों के लिहाज से बिहार में 40 सीटें होने से बिहार का बड़ा महत्त्व है। वहां गठबंधन तुड़ाकर नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी अपने पाले में भले ले आई है लेकिन जनता में उनकी पलटू चाचा की छवि बनने से उनकी खुद की छवि को बड़ा धक्का लगा है। जनता में उनकी पूछ नहीं रही। सुशील मोदी ज़रूर बड़ा चेहरा बने थे, लेकिन वे कहीं चुनाव प्रचार करते नहीं दिखते। राजीव प्रसाद रूडी का कहीं अता पता नहीं है। हरदम मोदी नाम की माला जपने और विपक्षी दलों को बुरा भला कहने वाले रवि शंकर प्रसाद नदारत हैं। उनके अलावा सम्राट चौधरी, गिरिराज सिंह और चौबे सांसद रहे हैं। बड़बोले भी लेकिन चुनाव प्रचार में वे दोनो दूर दूर तक नजर नहीं आते। गिरिराज सिंह का हाल यह है, कि उनकी भारतीय जनता पार्टी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाकर उन्हें क्षेत्र में आने ही नहीं दिया।
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महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार ..
सीट के लिहाज से महाराष्ट्र 48 सीटों वाला बड़ा महत्त्वपूर्ण राज्य है। यहां के सबसे बड़े नेता हैं नितिन गडकरी जो भारतीय जनता पार्टी की नीतियों के धुर विरोधी रहे हैं। मुमकिन नहीं कि वे चुनाव प्रचार करेंगे। शिवसेना और राकांपा तोड़कर शिंदे और अजीत पवार के साथी छगन भुजबल, पटेल आदि पर खुद भारतीय जनता पार्टी ने हजारों करोड़ के घोटाले का मामला उठाकर उन्हें अपने साथ लाकर सरकार तो बना ली लेकिन महाराष्ट्र की जनता उन्हें गद्दार कहकर नफरत करती है। कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। उस चुनाव को याद कर ही सिहरने वाले ये नेता चुनाव प्रचार की हिम्मत भला कैसे दिखाएंगे? अपने ही बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री का कद छोटा कर डिप्टी सी एम बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी उनसे चुनाव में कोई उम्मीद कैसे कर सकती है।
वसई के तीन मंजिला जुगार के अड्डे पर क्राईम ब्रांच पुलिस ने रेड में कैश पैसों के साथ 53 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन इसके बाद से पत्रकार को झूठे मुकदमे में फंसाने का शुरू हो गया है षडयंत। Vasai Gambling News impact
विशेष संवाददाता पालघर- वसई (पश्चिम), एसटी बस डिपो के सामने, ऋषिकेश वेज होटल के पीछे, राजीव गांधी स्कूल और अंजलि बार के पास, हरिओम चेंबर नामक तीन मंजिला इमारत पूरा जुगार का अड्डा बना कर विवेक कुबल लोगों को लत लगाकर जुगार के साथ पैसों की लूट करने का कारोबार कर रहा था। इसकी लिखित शिकायत और “इंडियन फास्ट्रैक न्यूज़” द्वारा खबर प्रकाशित करने के बाद मिरा भाईंदर वसई विरार पुलिस कमिश्नर के आदेश पर क्राईम ब्रांच के अधिकारियों ने रेड कर कुल 53 लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन पत्रकार के इस सराहनीय कार्य के बाद से उन्हीं आरोपियों द्वारा पैसों की लालच देकर कॉल किया जा रहा है। शिकायतकर्ता को झूठे मुकदमे में फंसाने का भय सताने लगा है। इसको लेकर पुलिस कमिश्नर से शिकायत पर स्थानीय पुलिस उपायुक्त को जांच के आदेश दिए गए है। (Vasai Gambling News Impact)
क्राईम ब्रांच की रेड .. News Impact…
महाराष्ट्र जुगार प्रतिबंध क़ानून 1887 में दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान होने के बावजूद माणिकपूर पुलिस का तीन मंजिला इस जुगार के अड्डे पर कार्यवाही का नहीं करना। पुलिस की नाकामी का सबूत पेश करती है। लेकिन “इंडियन फास्ट्रैक न्यूज़” की रिपोर्ट प्रकाशित होते ही कानून व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए मिरा भाईंदर वसई विरार पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे ने क्राईम ब्रांच को आदेश देकर रेड करवा दिया है।
क्राईम ब्रांच के पुलिस अधिकारियों ने 19 मार्च 2024 को रेड कर स्थानीय माणिकपूर पुलिस थाने में गु.र.क्र. 0198/2024 में महाराष्ट्र जुगार प्रातिबंध अधिनियम 1887 अंतर्गत धारा 4(a) 5 के तहत आरोपी सत्तार पठाण, रमेश माहाडीक, मुसानंद चौहान, महेंद्र शाहु के साथ कुल 53 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जब कि जुगार माफिया विवेक कुबल और सुसील चौहान मौके से फरार होने में कामयाब हो गए।
जुगार अड्डे के मालिक विवेक कुबल की फाइल तस्वीर
इस घटना में गिरफ्तारी और जमानत पर रिहा होने के बाद से ही आरोपियों द्वारा “इंडियन फास्ट्रैक न्यूज़” के रिपोर्ट आसिफ अंसारी को फोन पर कभी पैसों का प्रलोभन तो कभी धमकियां देने लगे हैं। इसको लेकर फिर एक बार पत्रकार ने पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे से शिकायत कर कार्यवाही के लिए मदद मांगी है। शिकायत को लेकर परिमंडल-2 के पुलिस उपायुक्त पूर्णिमा चौगले को जांच के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर आरोपियों को पुलिस द्वारा दिए जाने की जानकारी मिल रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस जुगार का अड्डा मालिक विवेक कुबल को क्राईम ब्रांच पुलिस की रेड से पहले ही सूचना मिल गई थी। कुबल ताबड़तोड़ अड्डे से फरार हो गया। सूचना देने वाला माणिकपुर पुलिस से जुड़ा होने की भी जानकारियां प्राप्त हो रही है। बताया जाता है कि पुलिस विभाग को हफ्ता देकर कुबल जुगार का अड्डा चलाया करता था। जो पुलिस की रेड के बाद कुबल के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में मोबाइल टावर रेडियो रिमोट यूनिट चोरी के 63 मामलों का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की टीमों ने अलग-अलग ऑपरेशन में दिल्ली और युपी से कुल 15 लोगों को किया गिरफ्तार।
मोबाइल टावर के साथ ये गिरोह जो करता था, उससे इमरजेंसी सेवाएं ही हो जाती थी बंद।
मोबाइल टावर टेक्नीशियन ही निकले चोर।
कम समय में आसानी से मोटी रकम कमाने का लालच।
विशेष संवाददाता नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मोबाइल टावर से महंगे उपकरणों को चुराने वाले बड़े गैंग का भांडाफोड़ किया है। मामले से जुड़े दो गैंग के लीडर और उनके 13 साथियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में नामी टेली कम्युनिकेशन कंपनी में काम करने वाले मोबाइल टॉवर टेक्नीशियन और स्क्रैप डीलर शामिल हैं। ये गैंग अब तक 250 से ज्यादा चोरियां कर चुके हैं। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने 33 आरआरयू, 20 बीबीयू, 15 जियो की पावर बैटरी, 20 बंडल केबल, 2 आरएसपी, रेडियो यूनिट समेत डेढ़ करोड़ से ज्यादा के मोबाइल टावर उपकरण बरामद किए हैं।
मोबाइल टावर से महंगे उपकरणों की चोरी ..
टावरों के इन महत्वपूर्ण पार्ट्स के चोरी होने के बाद इमरजेंसी सेवाओं को कॉल नहीं जाती थी, जिसकी वजह से टावर के आसपास के लोगों को परेशानी होती थी। क्राइम ब्रांच के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में मोबाइल टावर उपकरणों की चोरी के 63 मामलों का खुलासा किया गया। क्राइम ब्रांच की टीमों ने अलग-अलग ऑपरेशन में कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों की गिरफ़्तारी से कुल 33 RRU (बहुत महंगी कीमत की रेडियो रिमोट यूनिट), 20 BBU, 15 JIO बैटरी, दो RSP कार्ड, 12 हाई-टेक हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर उपकरण और 20 बंडल टावर केबल बरामद हुए हैं। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में दर्ज चोरी के 17 मामलों का भी खुलासा हुआ है। अपराध में शामिल एक फोर्ड फिगो कार और एक स्कूटी भी बरामद की गई है।
एयरटेल ने की थी शिकायत
दरअसल एयरटेल के राष्ट्रीय नोडल अधिकारी ने देश के अलग अलग हिस्सों में स्थापित मोबाइल टावरों से बड़ी संख्या में आरआरयू, बीबीयू और उससे संबंधित सामान चोरी होने की सूचना दी थी। इन महंगे पार्ट्स की चोरी से ग्राहकों को कॉल करने और इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करने में परेशानी हो रही थी। क्राइम ब्रांच के मुताबिक इस केस में 2 लोग नाजिम और सलमान इस गैंग को ऑपरेट कर रहे थे।
पता चला कि वे अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग लोगों से चोरी की गई आरआरयू/बीबीयू खरीदत कर उन्हें दिल्ली के रोहिणी स्थित अपने गोदाम में छिपा देते थे। इसके बाद वे इन सामानों को ऊंचे दामों पर दूसरे लोगों को बेच देते थे।
क्राइम ब्रांच टीम के इंस्पेक्टर शिवराज बिष्ट को सूचना मिली थी, कि सनी राजपूत नाम का एक शख्स मोबाइल टावर से चुराए गए RRU पार्ट्स लेकर उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन पर आने वाला है। जिसके बाद डीसीपी अमित गोयल और एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में टीम बनाकर पुलिस का जाल बिछाया गया। इस धरपकड़ में सनी और सलमान को हिरासत में लिया गया। उनसे पूछताछ के बाद सलमान की रोहिणी स्थित दुकान पर छापा मारा गया, जहां से चोरी के कई महंगे मोबाईल टावर के पार्ट्स बरामद हुए।
यूपी से भी हुई गिरफ्तारी
फिर सलमान से पूछताछ में नाजिम नाम के युवक को यूपी के मुजफ्फरनगर से हिरासत में लिया गया, जो एक भंगार खरीदने और बेचने वालि डीलर था। जांच के दौरान आरोपी नाजिम ने खुलासा किया कि वह चोरी की गई आरआरयू/बीबीयू नदीम और इजहार और उसके भाई मोहम्मद नईम को बेचता था। इसके अलावा नाजिम की गवाही पर मोहम्मद नईम को मुस्तफाबाद से गिरफ्तार किया गया और आरोपी मोहम्मद नईम की गवाही पर 6 आरआरयू और 12 बीबीयू और JIO कंपनी की 5 बैटरियां बरामद की गईं।
पूछताछ के दौरान आरोपी सनी राजपूत ने खुलासा किया कि वह एयरटेल कंपनी का कर्मचारी है और आरआरयू और बीबीयू को इंस्टॉल और अनइंस्टॉल करने में माहिर है। वह अपने अन्य कर्मचारियों महेंद्र, मोरपाल, इरफान के साथ मिलकर दिल्ली में अलग अलग मोबाइल नेटवर्क टावरों पर लगे लाइन केबल के साथ-साथ आरआरयू/बीबीयू की चोरी करता था, ताकि आसानी से और मोटी रकम कमा सके।
कुख्यात नशे का सौदागर विवेक कुबल पिछले 7 साल जेल में सजा काटने के बाद। अपना कारोबार बदल लिया है। इसने वसई विरार को बर्बाद करने के लिए एक तीन मंजिला जुगार का अड्डा खोल दिया है।
आसिफ अंसारी पालघर– वसई (पश्चिम), एसटी बस डिपो के सामने, ऋषिकेश वेज होटल के पीछे, अंजलि बार के पास, एक तीन मंजिला इमारत पूरा जुगार का अड्डा बना कर विवेक कुबल लोगों को ड्रग्स की लत और जुगार के साथ पैसों की लूट करने का कारोबार कर रहा है। लिखत शिकायत के बाद माणिकपूर पुलिस ने तातपूर्ता जुगार के अड्डे को बंद करा दिया है।
महाराष्ट्र जुगार प्रतिबंध क़ानून 1887 में दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान होने के बावजूद माणिकपूर पुलिस का इस जुगार के अड्डे पर कार्यवाही का नहीं करना। पुलिस की नाकामी का सबूत पेश करती है। जुगार के चलते, ना जाने कितने ही घर बर्बाद हो गए, बच्चे अनाथ हो गए। इसकी रोकथाम के लिए सरकार ने पुलिस को कार्रवाई का अधिकार दिया है। लेकिन मानिकपुर पुलिस ने यहां पर जुगार के अड्डे को चलता हुआ देख अपने आंख मूंद लिया था। जो पत्रकार के शिकायत पर परिमंडल-2 के पुलिस उपायुक्त पूर्णिमा चौगले के आदेश पर खाना पूर्ति करते हुए तत्पूर्ता जुगार के अड्डे को बंद करा दिया गया है।
जुगार के अड्डे पर दिखावे का एक्शन..
मानिकपुर पुलिस थाने और जुगार के अड्डे की बाहर से तस्वीरजुगार खेलते हुए जुगारियों की तस्वीर
बताया जाता है, कि तीन मंजिला जुगार के इस अड्डे को कारोबार के मालिक विवेक कुबल ने दो लोगों को पार्टनरशिप के तौर पर रखा हुआ है। जो दूसरे राज्य के जुगारियों को आमंत्रित कर उनके रहने खाने की व्यवस्था करते हैं। सत्तार खान और सुशील चौहान कलब चलाने के लिए गुजरात तथा और राज्यों से जुगारियों को पैसों का प्रलोभन देकर बुलाने का काम करते है। कहां तो यह भी जाता है कि यहां बाहर के बदमाश और वांछित अपराधी पुलिस से बचने के लिए इस जुगार के अड्डे में पनाह लिया करते हैं।
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पत्रकार ने विडियो ग्राफी निकाल कर पुलिस आयुक्त मधुकर पांडे से शिकायत कर दी। तब जाकर पुलिस उपायुक्त पूर्णिमा चौगले को इसकी जानकारी मिली। आनन फानन में माणिकपूर पुलिस ने जुगार के अड्डे को बंद करा दिया। जबकि कुछ बाहर से आए वांछित अपराधी इस जुगार के अड्डे में शरण लिए हुए थे। पुलिस ने अगर जांच किया तो शातिर चोर उचक्कों की गैंग यहा बंद कमरों में जरूर मिलेंगी।