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शिवसेना शिंदे गुट के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया और लोगों से इसे अपने जीवन में उतारने की अपील की।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: 21 जून 2025 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 110 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि भी शामिल थे।
योग का महत्व
डॉ. वर्मा, श्रीमती अंका वर्मा, राजकुमारी निकोल वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा सहित वर्मा परिवार के सभी सदस्यों ने पारंपरिक सनातनी विधि से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। प्रतिष्ठित योगाचार्यों ने उपस्थितजनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता बताई।
योग की आवश्यकता
अपने संबोधन में डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “योग भारत की सनातन परंपरा की वैज्ञानिक देन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व पटल पर स्थापित किया है। शिवसेना (NDA) के लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का कार्य कर रही है।” उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि “योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज के युग की आवश्यकता है।”
श्रीमती अंका वर्मा ने कहा, “योग ने मुझे मातृत्व, व्यवसाय और अध्यात्म में संतुलन बनाना सिखाया—यह मेरे जीवन का आंतरिक मार्गदर्शक बन गया है।”
राजकुमारी निकोल वर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में योग मुझे मानसिक शांति और स्थिरता देता है—यह मेरा आत्मबल है।”
कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, प्रसाद वितरण और योग को जीवन में अपनाने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम साबित हुआ।
वकालत का मौका बहुत ही कम मिलता है सुप्रीम कोर्ट में..!
गठबंधन करने वाले दल को ही खत्म कर देना बीजेपी की खासियत
नितीश कुमार की पार्टी को खत्म करने की चाल..
मोदी और शाह के अत्यंत करीबी संजय झा की दोनो बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
झा ने स्वयं सोशल मिडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए किया पोस्ट
सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन
मुंबई: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट बनने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वकालत का अनुभव या किसी सीनियर के अंडर में वर्षों तपस्या करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में वकालत का मौका बहुत कम ही मिलता है लेकिन मोदी सरकार जिस पर मेहरबां हो जाए। जिस पर कृपा दृष्टि पड़ जाए तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। जेडीयू के सांसद ही नहीं कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं संजय झा और मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री भी।
कौन है संजय झा?
मोदी शाह के अत्यंत विश्वसनीय भी हैं, इसलिए उन पर विशेष कृपा दृष्टि बरस रही है क्यों कि संजय झा और अन्य मंत्री जो जेडीयू के हैं मोदी को तीसरी बार बहुमत नहीं मिलने के बावजूद जेडीयू का समर्थन मिला, लेकिन मंत्रियों को तोड़ने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी को ही खत्म करने की चाल चली गई है। सबको अपने कर्म का फल भोग मिलना निश्चित है।
सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
नीतीश कुमार की पार्टी के सांसद बगावत पर उतर कर बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं।बीजेपी की यही खासियत है। जिस दल के साथ गठबंधन करती है, उसे ही खत्म कर देती है। अकाली दल और शिवसेना का हश्र सभी को याद होगा। अब बारी नीतीश कुमार के जेडीयू पार्टी की है। इसीलिए सारी मान मर्यादा तोड़कर संजय झा की दो बेटियों जिनमें से एक ने 2023 में और दूसरी ने 2025 में एलएमएम किया है। जिन्हें वकालत का अनुभव भी नहीं है इनको सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति मिल चुकी है।
जिसका जिक्र स्वयं झा ने सोशल मीडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए पोस्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन है यह। इसी मुद्दे पर जेडीएस नेता ने पूछा है, कि कितने ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सुप्रीमकोर्ट में सरकार की सेवा का अवसर दिया गया है? इसके पहले भी आरएसएस विचारधारा के लोगों को बिना आई ए एस परीक्षा उत्तीर्ण हुए ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष नियुक्त कर मोदी सरकार ने जता दिया था कि उसे संविधान की मर्यादा या कोर्ट और कानून व्यवस्था की कोई चिन्ता नहीं है।
नई दिल्ली मे अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ की ओर से “योग महाकुंभ” कार्यक्रम का आयोजन कर ‘योग’ को जन-जन तक पहुंचाने का एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रयास किया गया।
नई दिल्ली: 15 जून 2025 को आयोजित “योग महाकुंभ” कार्यक्रम ने योग साधकों शिक्षकों एवं समाजसेवियों का विशाल संगम प्रस्तुत किया। यह ऐतिहासिक आयोजन अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ (ABYOGASMS Foundation) के तत्वावधान में लाजपत भवन ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे डॉ. अभिषेक वर्मा और उनकी सुपुत्री निकोल वर्मा आई। जो एक सनातनी राजनीतिज्ञ और उद्योगपति के रूप में विख्यात हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ और पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर अभिषेक वर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि ‘योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं है, यह हमारी सनातन संस्कृति का मूल है।’
उन्होंने वेद पुराणों से जानकारी देते हुए कहा, “भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, “योगः कर्मसु कौशलम्”, यानि कर्म में कुशलता ही योग है। वेदों में योग को आत्मा की शुद्धि और चित्त की स्थिरता का माध्यम बताया गया है।”
योग का हमारे जीवन में महत्व को लेकर उन्होंने और भी जानकारियां दी, जिसमें उन्होंने कहा, “आज जब दुनिया तनाव और भौतिकता से जूझ रही है, तब योग ही वह साधन है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। स्वस्थ भारत, संस्कारवान समाज, और आत्मनिर्भर राष्ट्र की कल्पना बिना योग के अधूरी है।”
देश की राजनीति पर बोलते हुए डॉ. अभिषेक वर्मा ने यह भी बताया, कि “शिवसेना (NDA) और हमारे पथप्रदर्शक बाला साहेब ठाकरे जी हमेशा इस विचार के पक्षधर रहे हैं कि राष्ट्र निर्माण आत्मनियंत्रण और संयम से ही संभव है, और योग उसका आधार है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक मंच पर स्थापित किया, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसका प्रमाण है। शिवसेना के पोर्टफोलियो में आयुष मंत्रालय, फिट इंडिया मूवमेंट, और डिजिटल योग अभियान, योग को हर घर तक पहुँचा रहे हैं। आइए, संकल्प लें: योग अपनाएँ, जीवन सजाएँ, और भारत को फिर से विश्वगुरु बनाएँ।” उन्होंने अपने वक्तव्यों की समाप्ति पर “जय सनातन”, “जय हिंद” की घोषणा भी की।
कार्यक्रम के मौके पर विशिष्ट अतिथियों में राजर्षि वेदमूर्ति आचार्य पवन दत्त मिश्रा महाराज, स्वामी अमित देव, डॉ. ईश्वर तथा योग गुरु मंगेश त्रिवेदी शामिल रहे। योग गुरु मंगेश त्रिवेदी जो ABYOGASMS के संस्थापक हैं, उन्होंने कहा, यह आयोजन योग को जन-जन तक पहुंचाने का एक बड़ा प्रयास है।
कार्यक्रम में विभिन्न योग संगठनों, विद्यालयों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और इसे एक महाकुंभ की भांति मनाया गया।
आगरा में एक प्राइवेट अस्पताल ही नहीं समूचे देश में आग लगने की साजिश बेनकाब हो गई। मामला आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल का है। जहां एक दलित अपने रोगी का इलाज कराने आता है। जैसे ही गेट के भीतर पहुंचता है, उस व्यक्ति ने राष्ट्र के दो महान पुरुषों की फोटो फर्श पर चिपकी देखी। एक फोटो गौतम बुद्ध की तो दूसरी बाबा साहेब आंबेडकर की थी। दलित जब इन तस्वीरों को फर्श पर चिपकी देखता है तो उसके मन में ख्याल आता है कि अस्पताल में आने वाले लोगों के पैरों तले इन महापुरुषों की तस्वीर कुचले जाएंगे। इससे उनका अपमान होगा उक्त संबंध में वह व्यक्ति जब गार्ड से कहता है तो गार्ड अत्यंत बेरुखी से जवाब देता है, तुम जिस काम से आए हो, अपना काम करो, फालतू चक्कर में मत पड़ो। लेकिन व्यक्ति रुक जाता है और वह अपने नेता रावण उर्फ चंद्रशेखर को इसकी सूचना देता है। फिर क्या था? चंद्रशेखर सदल बल आ धमकते हैं। अपने अनुयायियों को बाहर रोककर वे अंदर जाते और वास्तविकता देखकर मैनेजर को बुलवाते हैं। मैनेजर इस घटना की जानकारी नहीं होने की बात कहता है तब अस्पताल मालिक को बुलाया जाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल मालिक चंद्रशेखर के साथ cctv देखने लगते हैं। सुबह के फुटेज में कुछ नहीं मिलता तो गत रात का वीडियो देखने लगते हैं जिसमें काला कपड़ा पहने और मुंह ढके दो लोग दिखते हैं। फोटो फर्श पर चिपकाकर जब लौटकर गेट पर पहुंचते हैं तो एक अपना चेहरा खोल देता है। यह वॉचमैन का चेहरा है। पुलिस आ जाती है वॉचमैन से कड़ी पूछ ताछ करने पर दूसरा व्यक्ति आजाद की पार्टी का पदाधिकारी निकलता है। रावण उसे पार्टी से निकलकर पुलिस को सौप देते हैं। बता दे कि दलित आंबेडकर और महात्मा बुद्ध को भगवान मानते हैं। शुक्र है कि सीसीटीवी में खुलासा हो गया। अगर सीसीटीवी बंद रहता तो निश्चित ही अस्पताल में तोड़ फोड़ के साथ एक बार फिर आगरा में अराजकता का नग्न तांडव शुरू हो जाता। तोड़ फोड़ आगजनी और शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो जाता।
मुंबई सत्र न्यायालय ने वकील विनय कुमार खातू की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिन पर 74 वर्षीय क्लाइंट से 2.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इसके पहले भी एड्वोकेट पर IAS अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देने के मामले दर्ज हैं।
मुंबई: सत्र न्यायालय ने वकील विनय कुमार खातू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। खातू पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की रहने वाली 74 वर्षीय महिला क्लाइंट के साथ धोखाधड़ी की है। आरोप है कि विनय कुमार खातू ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जाली आदेश दिखाकर महिला से 2.57 करोड़ रुपये की ठगी की। न्यायालय ने कहा, कि अगर इस मामले में विनय कुमार खातू को जमानत दी जाती है, तो समाज में गलत संदेश जाएगा। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested
एड्वोकेट के खिलाफ कई मामले दर्ज
सत्र न्यायाधीश वीजी रघुवंशी ने कहा कि यह अदालत खातू के पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं कर सकता। पहले भी विनय कुमार खातू पर IAS अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देने के दो मामले दर्ज हैं। अगर अदालत खातू के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह समाज के लिए गलत संदेश होगा। उन्होंने कहा, “आरोपों की गंभीरता और खातू के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए, मैं उन्हें जमानत नहीं दे सकता।
जज ने यह भी कहा कि अगर कोई WhatsApp चैट पर भरोसा करता है, तो उसे यह भी देखना होगा कि आरोपी ने अकाउंटेंट के साथ चैट में हाईकोर्ट से स्टे मिलने की बात कही थी। यह भी साफ है कि जाली आदेशों की तारीख के बाद बड़ी रकम उसके दोस्तों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी पर आपराधिक विश्वासघात और जाली दस्तावेज बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested
जज ने कहा कि सिविल कोर्ट के फैसले को भी एक मूल्यवान सुरक्षा माना जा सकता है। अदालती फैसले अक्सर कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों को बनाते या बदलते हैं। इसलिए, ये फैसले मूल्यवान सुरक्षा की परिभाषा में आते हैं।
पीड़ित महिला, उर्मिला ताल्यार खान, अलीबाग में एक जमीन के विवाद में फंसी हुई थीं। निचली अदालत ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसके बाद ताल्यार खान ने जिला अदालत में अपील की थी। उनके वकील सुनवाई के लिए नहीं आए, जिसके कारण 13 मार्च, 2018 को उनकी अपील खारिज हो गई। उस समय दिल्ली में रहने के कारण, उन्हें इस बारे में 2022 तक पता ही नहीं चला, क्योंकि उनके वकील ने उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं दी थी। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested
दो करोड़ रुपये किया ट्रांसफर
आरोप है कि ताल्यार खान की मुलाकात एक व्यापारी के जानकार के जरिए विनय कुमार खातू से हुई थी। उन्होंने खातू को छह मामलों के लिए वकील रखा, जिसमें जमीन विवाद की अपील और उनके पति के खिलाफ मुकदमा भी शामिल था। खातू ने कथित तौर पर प्रति मामले 10 लाख रुपये की भारी फीस ली। आरोप है कि उन्होंने अपने दोस्त के खाते से आरोपी से जुड़े लोगों के खातों में 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested
एड्वोकेट विनय कुमार खातू की सलाह पर, उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में दूसरी अपील दायर की, जिसमें चार साल की देरी को माफ करने और स्टे ऑर्डर के लिए आवेदन किया गया था। फिलहाल आरोपों को नकारते हुए, आरोपी ने कहा कि उन्हें 19 अक्टूबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। वकील ने कहा कि उनसे कुछ भी बरामद करने की जरूरत नहीं है। सबूतों से छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested
राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल
वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिंदू मतों को लुभाने की कोशिश
मुंबई: अभी दो साल भी नहीं बैठे कि एन डी ए सरकार में बीजेपी को समर्थन देने वाली पार्टी जे डी यू के नेता सुशासन बाबू उर्फ पलटू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के वोटरों ने जबरदस्त नाराजगी जताकर नीतीश कुमार को केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बनाने लगे हैं।
बीजेपी के समर्थन से बिखरने लगे लोग
वैसे बीजेपी सरकार ने जे डी यू में से कुछ लोगों को केंद्र में मंत्री बनाकर तोड़ फोड़ पहले ही चालू कर दी थी। नीतीश पशोपेश में चाहे जितना भी रहें उनकी पार्टी का टूटना सुनिश्चित है। बचे हुए लोग पार्टी को कितने दिनों तक बचा पाएंगे कहना मुश्किल है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू के वोटर्स जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से आते हैं बीजेपी को समर्थन देने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
केंद्र द्वारा नायडू के समर्थन से वक्फ कानून संशोधन ने आग में घी डालने का काम किया है। जहां नीतीश कुमार अपना अस्तित्व बचाने में लगे हैं वहीं नायडू भी काफी परेशान नजर आते हैं। दोनों के फॉलोवर और मतदाता नाराज़ चल रहे हैं। यह नाराजगी दोनों के अस्तित्व पर भारी पड़ने वाली है।
ऐसे में जबकि दिसंबर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले है उससे पहले ही नीतीश कुमार और नायडू को फिर से विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है। एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई नजर आने लगी है। नीतीश कुमार और नायडू के लिए अपनी अपनी पार्टी बचाने का अंतिम मौका है। अतः संभव है कि दोनों केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेकर शहीद हो जाएं।
उसके पूर्व मानसून सेशन के बाद केंद्र की बीजेपी सरकार राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव करने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दें। दोनों ही स्थितियों में मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल हैं। जिसमें बीजेपी वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिन्दू मतों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। अतः देश को जनता के द्वारा दिए गए अरबों टैक्स की बर्बादी देखने को मिल सकती है।
RBI की नई गाइडलाइन में लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिया गया है। यदि कोई बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार करता है तो ग्राहक पुलिस में शिकायत कर सकता है और बैंक से पेनल्टी की मांग भी कर सकता है। ग्राहकों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से बचाने के लिए RBI ने नई गाइडलाइन जारी किया है।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: वर्तमान के आर्थिक दौर में कई लोग अपने जरूरी खर्चों के लिए लोन लेते हैं। चाहे घर खरीदना हो या नया व्यवसाय शुरू करना हो, लोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। लेकिन कई बार नौकरी छूटना, व्यापार में घाटा या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लोन की ईएमआई भरना लोगों को मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में लोग न केवल आर्थिक दबाव में आते हैं, बल्कि बैंकों और रिकवरी एजेंटों के दबाव से भी परेशान हो जाते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोनधारकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इन नियमों का मकसद लोन न चुका पाने वाले लोगों को अनुचित परेशानियों से बचाना और वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार करने लिए सिखाना है।
RBI की नई गाइडलाइन्स
RBI के नए नियमों के तहत अब बैंक और रिकवरी एजेंट मनमाने तरीके से लोनधारकों को परेशान नहीं कर सकेंगे। पहले रिकवरी एजेंट कभी भी अनुचित समय पर फोन करते थे, धमकी देते थे या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे। अब ऐसी हरकतें पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। RBI के नए नियम न केवल लोनधारकों की गरिमा की रक्षा करते हैं, बल्कि बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ाते हैं। यह पहल बैंक और ग्राहक के बीच विश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होगी। ऐसा माना जा रहा है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स लोनधारकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार देती हैं। यदि कोई बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार करता है तो ग्राहक पुलिस में शिकायत कर सकता है और बैंक से पेनल्टी की मांग भी कर सकता है। यह नियम मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से बचाने के लिए बनाए गए हैं। लोन प्रकृया से जूझ रहे लोगों को यह समझना जरूरी है कि वित्तीय मुश्किलें सामान्य हैं और वे सम्मान के साथ व्यवहार पाने के हकदार हैं। अगर कोई धमकी या अपमान करता है तो वे तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।
कैसे कर सकते हैं शिकायत ?
RBI की नई गाइडलाइन के मुताबिक, ग्राहक अपनी शिकायत बैंक की शिकायत निवारण सेल में या RBI के ग्राहक सेवा विभाग में दर्ज करा सकते हैं। गंभीर मामलों में पुलिस में भी FIR दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत करते समय फोन कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज के स्क्रीनशॉट और गवाहों के बयान जैसे सबूत जुटाना जरूरी है। बैंक भी अपने रिकवरी एजेंटों के व्यवहार की जिम्मेदारी उठाने के लिए बाध्य है।
RBI ने रिकवरी एजेंटों के लिए सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कॉल या मिलने का समय तय किया है। इस समय के बाहर वसूली करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। रात में या छुट्टियों के दिन परेशान करना सख्त मना है। अगर कोई एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो तुरंत शिकायत करें। यह नियम ग्राहकों की निजता और पारिवारिक शांति की रक्षा करते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
बैंक की किश्त अगर बाउंस हो जाए तो क्या करें?
जब कोई लोनधारक लगातार तीन EMI बाउंस करता है, तो बैंक पहला नोटिस भेजती है। इसके साथ ही अपनी स्थिति सुधारने के लिए 90 दिन का समय देती है। चौथी-पांचवी EMI न भरने पर बैंक दूसरा नोटिस भेजती है, जिसमें नीलामी की चेतावनी होती है। नए नियम के अनुसार इस दौरान भी बैंक या रिकवरी एजेंट अनुचित व्यवहार नहीं कर सकते। लोनधारक इस अवधि में बैंक से बात करके समाधान खोज सकते हैं। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI ने रिकवरी एजेंटों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे धमकी, अपमानजनक भाषा या शारीरिक प्रताड़ना नहीं कर सकते। वे परिवारजनों या दोस्तों को परेशान नहीं कर सकते और जबरन घर में प्रवेश भी नहीं कर सकते। अगर कोई एजेंट नियम तोड़ता है तो उसकी रिपोर्ट तुरंत करें। बैंक को अपने एजेंटों के व्यवहार की जिम्मेदारी लेनी होती है और उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करनी होती है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
नीलामी प्रक्रिया पर कानूनी सुरक्षा
जब लोनधारक पूरी तरह EMI नहीं चुका पाता तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति की नीलामी कर सकती है। यह प्रक्रिया न्यायालय के अधीन होती है और इसमें पारदर्शी होनी चाहिए। बैंक अपनी मर्जी से संपत्ति जब्त नहीं कर सकती। नीलामी से पहले लोनधारक के पास अपनी बात कहने और न्यायालय से सुरक्षा मांगने का अधिकार होता है। अगर नीलामी राशि लोन से अधिक होती है तो बची हुई राशि वापस की जाती है। Now the bank or its agency cannot harass you for not paying EMI, new RBI guideline
RBI की नई गाइडलाइन्स लोनधारकों को कानूनी सुरक्षा और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। ये नियम वित्तीय संस्थानों और ग्राहकों के बीच बेहतर तालमेल और पारदर्शिता लाने में मदद करेगी। इसलिए लोनधारकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना और जरूरत पड़ने पर सही कदम उठाना चाहिए।
Disclaimer यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय या कानूनी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। RBI के नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेते रहें।
नई दिल्ली: जब सरकारें निशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भागेगी और शिक्षा माफियाओं को आजाद कर देगी तो लूटने के लिए, तो क्या होगा? शिक्षा माफियाओं को न तो सरकार से डर लगता है और न ही शिक्षा विभाग से और न किसी कोर्ट से। बेलगाम घोड़े बन गए हैं। खासकर दिल्ली में सरकारी जमीन पर खुले हुए प्राइवेट स्कूल जो किसी की परवाह किए बिना ही हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन से अनुमति लेने की भी जहमत नहीं उठाते।
माता-पिता नौकरी करने पर मजबूर
आज कल दिल्ली का D.P.S द्वारका स्कूल सुर्खियों में है जो गेट पर बाउंसर तैनात करके बढ़ाई गई मनमानी फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों के बच्चों को गेट पर ही रोककर जबरन बस में उनके घर पहुंचा रहे हैं। चाहे घर में ताला ही क्यों न लगा हो। कारण माता पिता दोनों ही मंहगाई बढ़ाए जाने के कारण नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल गेट पर तैनात बाउंसर कितने बदतमीज और बेहूदे होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लड़कियों की बांह तक पकड़कर स्कूल के भीतर जाने से रोकते है।
कब-कितना फीस बढ़ाया गया?
D.P.S द्वारका स्कूल की मनमानी देखिए। पिछले पांच वर्षों में बच्चों की फीस को 139630 रुपए से बढ़ाकर 190000 रुपए कर दिया गया है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पैसे कमाने की मशीन और बच्चों के साथ बाउंसरों और स्कूल संचालकों द्वारा पर यातना तक बताया जा रहा है। D.P.S स्कूल द्वारका के द्वारा पिछले पांच वर्षों में फीस मनमाने तरीके से कैसे बढ़ाया गया? इसका नमूना वर्ष 2020/21 में फीस थी 139630 रुपए , 2021/22 में उतनी ही रही, लेकिन 2022/23 में 152510 रुपए कर दी गई। फिर वर्ष 2023/24 में 164844 रूपये, 2024/25 में 176340 रुपए और 2025/26 में पूरे 190000 रुपए कर दी गई है। इसमें विवरण देखा जाए तो ट्यूशन फीस 142800 रुपए, इन्यूअल चार्ज 32016 रुपए और डेवलपमेंट फीस 14280 रुपए जो पैरेंट टीचर मीटिंग की फीस केवल एक बार होने की है।
इतना ही नहीं, फीस बढ़ाने की सूचना नहीं देने के कारण फीस जमा नहीं कर पाने वाले 32 बच्चों के नाम काट दिए गए। नाम काट देना किस एज्युकेशन मैनुएल में लिखा है? नियमानुसार सरकारी जमीन पर बने स्कूल हॉस्पिटल में 15% लोगों को निःशुल्क सुविधा देनी चाहिए। विवाद डेवलपमेंट फीस को लेकर है। डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन के अनुसार दस प्रतिशत फीस बढ़ाई जा सकती है वह भी अनुमति लेकर, लेकिन शिक्षा माफिया कब मानते हैं? जिन बच्चों के नाम काटे गए, उनके मित्र फोन कर पूछते हैं, कि क्यों नाम काटा गया? बच्चों को अकेले घर जबरन छोड़ने के कारण बच्चों के मन में भय उत्पन्न होता है। मानसिक उत्पीड़न होती है और बच्चों को भारी सदमा पहुंचता हैं। इंफ्रियोरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दबाव से बच्चों के मानसिक संतुलन बिगड़ने का डर रहता है। लेकिन दौलत कमाने की हवस प्राइवेट स्कूल संचालकों में इस कदर हावी है कि उनके बच्चों पर पढ़ने वाले कॉम्प्लेक्स से कोई मतलब नहीं।
जनता को ही दंडित किया जा रहा है।
जब सैकड़ों अभिभावक कोर्ट गए तो स्कूल में छुट्टी घोषित कर संचालक फरार हो गए। अभिभावकों ने पुलिस बुलाई तो बिना नेम प्लेट वाली पुलिस पहुंची लेकिन वह खुद बच्चों और उनके अभिभावकों को टॉर्चर करने लगी। पुलिस और स्कूल संस्थापकों द्वारा लगाए गए गुंडों के द्वारा दुर्व्यवहार को अलग अलग नहीं किया जा सकता। दोनों ने ही अमानवीयता का परिचय दिया है। पुलिस जो जनता की रक्षा के लिए होती है उसे जनता के विरुद्ध कर दिया गया। सरकार की तरह उसका प्रशासन भी जनता को ही दंडित करने में लगा है।
आम आदमी पार्टी का शासन था तब, केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली आप सरकार से संसद में कानून बनाकर सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिए और मुख्यमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री सहित झूठे शराब मामले में ई डी द्वारा जेल भेजवाया गया था। इसलिए मनमानी फीस बढ़ाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का दोष नहीं दिया जा सकता। सारा प्रशासन एल जी के हाथ में दे दिया गया। इसलिए एल जी को संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन नहीं लिया। दुनिया ने देखा किस प्रकार आम आदमी सरकार को बदनाम करने के लिए यमुना नदी की सफाई के लिए एल जी ने कुछ भी नहीं किया और सारा दोष अरविंद केजरीवाल पर मढ़ते रहे।
सरकार का दायित्व
जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तब कितनी जल्दी मशीनें लगाकर यमुना को साफ करने का ढिंढोरा पीटा गया, जबकि आज भी दिल्ली के गंदे नाले लगातार कई घाटों के पास नाले का गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं। शुक्र है बीजेपी की दिल्ली सरकार कम से कम प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट करने लगी है। लेकिन यह भी अपर्याप्त है। शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा निःशुल्क देना सरकार का दायित्व है।
लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दायित्व निभाने के स्थान पर शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौप कर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया। जिसके कारण समूचे देश में शिक्षा माफिया स्कूल कॉलेज को लूट का धंधा बना लिए हैं। इन माफियाओं पर लगाम लगाने का दायित्व सरकार का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं समूचे देश के मुख्यमंत्रियों का दायित्व बनता है कि वह समान शिक्षा नीति अपनाए और सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिग्रहीत कर लें ताकि जनता का शोषण नहीं हो।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे पर खुल्लम-खुल्ला सेक्स कांड मामले में वीडियो वायरल करने के ज़ुर्म मे 8 लेन कंट्रोल रुम के तीन कंप्यूटर ऑपरेटर्स को सस्पेंड कर दिया गया है। जिसमें पैसों की डिमांड पूरी नही होने के 8 दिनों बाद वीडियो वायरल करने का खुलासा हो रहा है। 28 लाख रुपये की डिमांड ..
नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी के नेता मनोहरलाल धाकड़ के एक्सप्रेस हाईवे सेक्स कांड मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कर्मचारियों ने धाकड़ को वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई। रुपए की मांग पूरी नहीं होने पर वीडियो लीक कर दिया गया। इस मामले में पुलिस बाकि कर्मचारियों की भी जांच कर रही है। फिलहाल 3 कंप्यूटर ऑपरेटर्स को सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि उन लोगों ने नेता का डांस वाला दूसरा वीडियो लिक नही किया। Three control room employees suspended in the expressway sex scandal viral video
क्या हुआ था उस रात ?
मध्यप्रदेश की मंदसौर पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। 13 मई को भानपुरा के नीमथूर वाले पॉइंट पर सफेद कलर की बलेनो कार क्रमांक: MP-14-CC-4782 से उतरने के बाद 8 मिनट तक धाकड़ व महिला बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दिए थे। इससे पहले की दोनों कार से वापस निकल जाते, मौके पर एनएचएआई के 10 से 15 कर्मचारी पहुंच गए। दोनों से कहा कि तुम्हारी करतूत रोड पर लगे कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। रिकॉर्डिंग के कुछ अंश भी बताए। वीडियो वायरल न करने के लिए रुपए मांगे।
उस समय सौदा नहीं हुआ तो धाकड़ से मोबाइल नंबर ले लिए। 8 दिन तक रुपए को लेकर बात होती रही। धाकड़ रिकॉर्डिंग मिटाने की शर्त पर रुपए देने को तैयार था। एनएचएआई का सेंट्रल सर्वर होने से वीडियो डिलीट नहीं किया जा सकता। ऐसे में कर्मचारी सिर्फ उसे वायरल नहीं करने का कहते रहे। यह उलझन पूरे 8 दिन (13 से 20 मई) तक चली। जब बात नहीं बनी तो कर्मचारियों ने 9वें दिन पहले स्क्रीन शॉट और कुछ घंटे बाद वीडियो वायरल कर दिया।
ब्लैकमेल
28 लाख रुपये की मांग की गई थी सूत्रों के मुताबिक नही देने पर वीडियो वायरल कर दिया। इसी मामले मे युवा नेता जो कि बहुचर्चित है उनके कई कारनामे हुवे है पर उनका नाम अभी तक ओपन नही हुवा। इसपर सवाल उठ रहे हैं, कि क्या उनके नाम गुप्त रखने में भी रिश्वतखोरी की गई है? जाहिर है कि यह सत्य ही होगा तभी तो डांस वाला वीडियो वायरल नही हुवा। सूत्रों के हवाले से, पहले 5 लाख, फिर दो और आखिर में एक, नहीं देने पर वीडियो वायरल हुए हैं। कहा जा रहा है कि ब्लेकमैलिंग हुई, बात नहीं बनी तो वीडियो वायरल कर दिया गया।
इस बीच शनिवार को वीडियो का पार्ट-2 भी सामने आया है। 28 सेकंड के इस वीडियो में मनोहरलाल धाकड़ व महिला 8 लेन के बीच आपत्तिजनक स्थिति में डांस करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। संदीप पाटीदार, एरिया प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई का कहना है की मंदसौर पुलिस ने हमसे संपर्क किया है और हमने जानकारी भी दी है। कंट्रोल रूम के ऑपरेटरों वाली स्टाफ की सूची, शिफ्ट का डिटेल भी भेज दी है। जो वीडियो सामने आया है वो मोबाइल के जरिए कम्प्यूटर स्क्रीन से रिकॉर्डिंग कर बनाया गया है। उसमें जो आवाज सुनाई दे रही है उस आधार पर 3 लड़कों को सेवा से टर्मिनेट भी कर दिया गया है। पुलिस को भी यह जानकारी सौंप दी गई है। जांच में पुलिस को पूरा सहयोग करेंगे।
पुलिस ने क्या कहा?
अभिषेक आनंद, एसपी, मंदसौर का कहना है की 8 लेन वीडियो के आधार पर धाकड़ के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद कार जब्त कर ली गई है। वह मौके पर नहीं मिला। महिला की शिनाख्त भी कर रहे हैं। मामले में एनएचएआई के सीसीटीवी कंट्रोल रूम इंचार्ज को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि वहां से वीडियो कैसे वायरल हुआ। ड्यूटी रजिस्टर भी मांगा है कि कब-किस समय कितने कर्मचारी वहां मौजूद थे। मामले में जानकारियां एकत्र कर रहे हैं और जांच जारी है।Three control room employees suspended in the expressway sex scandal viral video
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जेपीसी ने बताया कि ट्राइबल एरिया में रहने वाले मुस्लिम बाकी हिस्सों में रहने वाले मुसलमानों की तरह इस्लाम का पालन नहीं करते।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: वक्फ संशोधन कानून, 2025 के विरोध में दाखिल याचिकाओं पर गुरुवार (22 मई, 2025) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ने बेहद अहम टिप्पणी की है। जस्टिस मसीह ने कहा कि कोई कहीं भी रहे इस्लाम तो इस्लाम ही रहेगा। जज ने केंद्र की उस दलील पर यह बात कही, जिसमें कहा गया कि ट्राइबल एरिया में रहने वाला अनुसूचित जनजाति का मुस्लिम समुदाय इस्लाम का उस तरह पालन नहीं करता है, जैसे देश के बाकी हिस्सों में पालन किया जाता है। ‘Islam will remain Islam, no matter who…’ – Supreme Court
लगातार हो रही है सुनवाई
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच लगातार तीन दिन से वक्फ कानून मामले की सुनवाई कर रही है। तीसरे दिन की सुनवाई में केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नए कानून के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के मुस्लिम समुदाय के लोगों की जमीनों को संरक्षण देना सही है। उन्होंने कहा कि ट्राइबल एरिया में रहने वाले अनुसूचित वर्ग के लोगों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, जो वैध कारणों से उन्हें मिला है। ‘Islam will remain Islam, no matter who…’ – Supreme Court
एसजी तुषार मेहता ने कहा, “वक्फ का मतलब होता है खुदा के लिए स्थाई समर्पण। मान लीजिए मैंने अपनी जमीन बेची और पाया गया कि अनुसूचित जनजाति (ST) के शख्स के साथ धोखा हुआ है तो इस मामले में जमीन वापस की जा सकती है, लेकिन वक्फ अपरिवर्तनीय है।” उन्होंने बताया कि “जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) का कहना है कि इन ट्राइबल एरिया में रहने वाले मुस्लिम, देश के बाकी हिस्सों में रह रहे मुसलमानों की तरह इस्लाम का पालन नहीं करते हैं, उनकी अपनी सांस्कृतिक पहचान है।” ‘Islam will remain Islam, no matter who…’ – Supreme Court
इस्लाम पर अहम टिप्पणी
एसजी तुषार मेहता की इस दलील पर जस्टिस एजी मसीह ने कहा, “इस्लाम तो इस्लाम ही रहेगा। कोई कहीं भी रहे धर्म एक ही है। अलग-अलग हिस्सों में रहने वालों की सांस्कृतिक प्रथाओं में अंतर हो सकता है।” इस पर एसजी मेहता ने कहा, “मैं बस पूछ रहा हूं कि क्या कानून पर रोक लगाने का यह कोई आधार हो सकता है?” ‘Islam will remain Islam, no matter who…’ – Supreme Court
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि ट्राइबल संगठनों ने दलील दी है कि उनको प्रताड़ित किया जा रहा है और उनकी जमीन वक्फ के नाम पर हड़पी जा रही हैं। तुषार मेहता ने कोर्ट से सवाल करते हुए कहा, कि “क्या यह पूरी तरह से असंवैधानिक नहीं है?” ‘Islam will remain Islam, no matter who…’ – Supreme Court
मंगलवार से नए सीजेआई बी आर गवई की बेंच ने वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है। इससे पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना इस मामले को देख रहे थे, लेकिन रिटायरमेंट से पहले उन्होंने मामला जस्टिस बी आर गवई की बेंच को ट्रांसफर कर दिया। ‘Islam will remain Islam, no matter who…’ – Supreme Court