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  • Maharashtra: 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द, हाई कोर्ट में चुनौती

    Maharashtra: 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द, हाई कोर्ट में चुनौती

    महाराष्ट्र सरकार ने 5% मुस्लिम आरक्षण खत्म करने का GR जारी किया। फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में सिविल रिट पिटिशन 5063/2026 दायर। जानिए पूरा कानूनी और राजनीतिक अपडेट।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दिया जा रहा 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले ने सियासी और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है। 17 फरवरी 2026 को जारी एक Government Resolution (GR 181) के जरिए यह निर्णय लागू किया गया। अब इस फैसले को Bombay High Court में चुनौती दी गई है।

    📜 क्या है पूरा मामला?

    मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक एवं विशेष न्याय विभाग ने एक GR जारी कर 5% मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने की घोषणा की।

    यह आरक्षण 2014 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार के दौरान लागू किया गया था, जिसमें मराठा समुदाय को 16% और मुस्लिम समुदाय को 5% आरक्षण “Special Backward Class” कैटेगरी में दिया गया था।

    बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां मराठा आरक्षण रद्द कर दिया गया, लेकिन मुस्लिम आरक्षण को शिक्षा क्षेत्र में आंशिक राहत मिली थी।

    🏛️ हाई कोर्ट में कानूनी चुनौती

    सरकार के इस ताजा फैसले के खिलाफ Civil Writ Petition No. 5063/2026 दायर की गई है।

    याचिकाकर्ता हैं Syed Ejaz Abbas Naqvi, जिन्होंने इस GR को “असंवैधानिक और सामुदायिक विभाजन बढ़ाने वाला कदम” बताया है।

    यह याचिका 23 फरवरी 2026 को जस्टिस Riyaz I. Chagla की बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना है।

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता Nitin Satpute और Ejaj Naqvi पेश होंगे।

    🗳️ सियासी प्रतिक्रिया

    विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध किया है।

    • कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र के लिए हानिकारक” बताया।
    • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) ने भी इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ कदम कहा।

    सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार का तर्क है कि यह फैसला “कानूनी और संवैधानिक समीक्षा” के आधार पर लिया गया है।

    📚 2014 का इतिहास क्या कहता है?

    2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने अध्यादेश जारी कर मराठा और मुस्लिम समुदाय को आरक्षण दिया था।

    मामला अदालत में गया और बॉम्बे हाई कोर्ट ने:

    • मराठा आरक्षण को निरस्त किया
    • मुस्लिम आरक्षण को शिक्षा क्षेत्र तक सीमित राहत दी

    बाद में सत्ता में आई बीजेपी-शिवसेना सरकार ने मुस्लिम आरक्षण का विरोध किया था।

    🔎 अब आगे क्या?

    23 फरवरी की सुनवाई में यह तय होगा कि:

    • क्या GR 181 पर अंतरिम रोक लगेगी?
    • क्या सरकार से जवाब तलब किया जाएगा?
    • क्या आरक्षण फिलहाल बहाल रहेगा या रद्द ही रहेगा?

    इस मामले का असर हजारों छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ सकता है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: मुस्लिम आरक्षण कब रद्द किया गया?
    17 फरवरी 2026 को जारी GR 181 के जरिए।

    Q2: किसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की?
    एडवोकेट सैयद एजाज़ अब्बास नक़वी ने सिविल रिट पिटिशन 5063/2026 दायर की।

    Q3: सुनवाई कब है?
    23 फरवरी 2026 को जस्टिस रियाज़ चागला की बेंच के सामने संभावित सुनवाई।

    Q4: क्या आरक्षण फिलहाल लागू है?
    यह कोर्ट के अंतरिम आदेश पर निर्भर करेगा।

  • Aligarh Muslim University में 27 नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती 2026, सैलरी ₹2.18 लाख तक – ऐसे करें अप्लाई

    Aligarh Muslim University में 27 नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती 2026, सैलरी ₹2.18 लाख तक – ऐसे करें अप्लाई

    AMU Non Teaching Vacancy 2026 के तहत Librarian, Registrar, Principal समेत 27 पदों पर भर्ती निकली है। सैलरी ₹56,100 से ₹2,18,200 तक। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 04 मार्च 2026। जानें योग्यता, फीस, चयन प्रक्रिया और पूरा आवेदन तरीका।

    नई दिल्ली: देश की प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) ने नॉन-टीचिंग स्टाफ के 27 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर आपके पास मास्टर्स डिग्री और संबंधित अनुभव है तो यह मौका हाथ से न जाने दें। यहां सैलरी ₹56,100 से लेकर ₹2,18,200 प्रति माह तक मिलेगी। ऑनलाइन आवेदन 04 मार्च 2026 तक और हार्ड कॉपी 19 मार्च 2026 तक भेजनी होगी।

    📌 AMU Non Teaching Recruitment 2026: मुख्य हाइलाइट्स

    • संस्थान: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (NAAC A+ ग्रेड)
    • कुल पद: 27
    • पोस्ट नाम: Librarian, Deputy Registrar, Assistant Registrar, Principal, Medical Superintendent आदि
    • जॉब लोकेशन: अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
    • सैलरी: ₹56,100 – ₹2,18,200 (7th Pay Commission के अनुसार)
    • ऑनलाइन लास्ट डेट: 04 मार्च 2026
    • हार्ड कॉपी लास्ट डेट: 19 मार्च 2026

    📝 कौन-कौन से पदों पर निकली है भर्ती?

    पद का नामकुल वैकेंसीपे लेवल
    Librarian1AL-14 (₹1,44,200 – ₹2,18,200)
    Deputy Librarian1AL-12
    Assistant Librarian7AL-10
    Deputy Registrar4Level 12
    Deputy Finance Officer2Level 12
    Internal Audit Officer1Level 12
    Assistant Registrar3Level 10
    School Principal5Level 12
    Director Physical Education2AL-10
    Medical Superintendent1Level 12

    नोट: 1 Assistant Librarian पद PwBD (Hearing Handicapped) के लिए आरक्षित है।

    🎓 योग्यता क्या चाहिए?

    ✔ Librarian

    • Library Science में 55% के साथ मास्टर्स
    • Ph.D अनिवार्य
    • 10 साल का अनुभव

    ✔ Assistant / Deputy Registrar

    • 55% के साथ मास्टर्स डिग्री
    • 5 से 9 साल का प्रशासनिक अनुभव
    • CA/CS/ICWA भी मान्य

    ✔ Principal (स्कूल)

    • मास्टर्स + B.Ed
    • 12 साल का शिक्षण अनुभव
    • उम्र 35 से 50 वर्ष

    ✔ Medical Superintendent

    • PG Medical Degree
    • 10 साल का प्रोफेसर लेवल अनुभव

    💰 कितनी मिलेगी सैलरी? (In-Hand Salary Details)

    AMU में 7th Pay Commission के अनुसार वेतन दिया जाएगा।

    • Level 10: लगभग ₹75,000 इन-हैंड
    • Level 12: लगभग ₹1,10,000 इन-हैंड
    • AL-14: ₹2 लाख+ सैलरी

    साथ में मिलेगा:

    • DA (महंगाई भत्ता)
    • HRA
    • NPS पेंशन
    • LTC सुविधा
    • मेडिकल बेनिफिट
    • कैंपस में आवास सुविधा

    🧾 चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

    1️⃣ लिखित परीक्षा (जरूरत पड़ने पर)

    अगर आवेदन ज्यादा आए तो 100 नंबर की स्क्रीनिंग टेस्ट होगी।

    2️⃣ इंटरव्यू

    शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

    3️⃣ डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

    मूल प्रमाण पत्र दिखाना जरूरी।

    🖥️ ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन – Step by Step

    1. AMU Careers Portal पर जाएं
    2. नया अकाउंट बनाएं
    3. अलग-अलग पोस्ट के लिए अलग फॉर्म भरें
    4. ₹500 आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करें (PwBD मुक्त)
    5. सभी डॉक्यूमेंट अपलोड करें
    6. 04 मार्च 2026 से पहले सबमिट करें
    7. प्रिंट निकालकर 19 मार्च 2026 तक स्पीड पोस्ट से भेजें

    पता: Selection Committee Section (Non-Teaching), Registrar’s Office, AMU, Aligarh – 202001

    📅 महत्वपूर्ण तिथियां

    इवेंटतारीख
    नोटिफिकेशन जारी19 जनवरी 2026
    ऑनलाइन अंतिम तिथि04 मार्च 2026
    हार्ड कॉपी अंतिम तिथि19 मार्च 2026

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. AMU Non Teaching Vacancy 2026 की आखिरी तारीख क्या है?
    👉 ऑनलाइन आवेदन 04 मार्च 2026 तक और हार्ड कॉपी 19 मार्च 2026 तक।

    Q2. आवेदन फीस कितनी है?
    👉 ₹500 प्रति आवेदन (PwBD उम्मीदवारों के लिए निशुल्क)।

    Q3. क्या इंटरव्यू होगा?
    👉 हां, शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों का इंटरव्यू होगा।

    Q4. क्या यह सेंट्रल गवर्नमेंट जॉब है?
    👉 हां, AMU एक Central University है, इसलिए वेतन और सुविधाएं केंद्र सरकार के अनुसार मिलेंगी।

  • RTE 25% Admission 2026: मुंबई में 17 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन शुरू, 5,939 सीटें उपलब्ध

    RTE 25% Admission 2026: मुंबई में 17 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन शुरू, 5,939 सीटें उपलब्ध

    BMC RTE Admission 2026-27 प्रक्रिया 17 फरवरी से शुरू। मुंबई की 323 स्कूलों में 5,939 सीटें। RTE 25% ऑनलाइन फॉर्म, eligibility, last date 10 मार्च, जरूरी दस्तावेज और पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (bmc) ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए RTE 25% एडमिशन प्रक्रिया 17 फरवरी 2026 से शुरू करने का ऐलान किया है। इस बार मुंबई क्षेत्र की 323 स्कूलों में कुल 5,939 सीटें उपलब्ध हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आखिरी तारीख 10 मार्च 2026 रखी गई है।

    क्या है RTE 25% एडमिशन स्कीम?

    RTE यानी “बालकांचा मोफत व सक्तीच्या शिक्षणाचा अधिकार अधिनियम 2009” के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी और बिना अनुदानित स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित दी जाती हैं। इन बच्चों को आठवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा दी जाती है।

    यह योजना खास तौर पर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आती है जो महंगे प्राइवेट स्कूलों की फीस नहीं भर सकते।

    मुंबई में कितनी स्कूलों में कितनी सीटें?

    BMC क्षेत्र में इस साल:

    • महाराष्ट्र राज्य बोर्ड की 252 स्कूलों में – 4,558 सीटें
    • अन्य बोर्ड (CBSE/ICSE आदि) की 71 स्कूलों में – 1,381 सीटें
    • कुल स्कूल – 323
    • कुल उपलब्ध सीटें – 5,939

    यह आंकड़ा मुंबई के पैरेंट्स के लिए बड़ा मौका है।

    आवेदन की तारीख और वेबसाइट

    RTE 25% ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया:

    • शुरूआत: 17 फरवरी 2026
    • आखिरी तारीख: 10 मार्च 2026
    • ऑफिशियल वेबसाइट: https://student.maharashtra.gov.in

    माता-पिता को तय समय सीमा के अंदर फॉर्म भरना अनिवार्य है।

    किन क्लास में मिलेगा एडमिशन?

    RTE के तहत एडमिशन:

    • पहली कक्षा (Class 1)
    • पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary)

    इच्छुक पालकों को पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।

    जरूरी दस्तावेज क्या-क्या लगेंगे?

    ऑनलाइन आवेदन करते समय जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करना अनिवार्य है। साथ ही प्रवेश के समय मूल और सत्यापित कॉपी तैयार रखनी होगी।

    संभावित जरूरी दस्तावेज:

    • जन्म प्रमाण पत्र
    • निवास प्रमाण पत्र
    • आय प्रमाण पत्र
    • आधार कार्ड
    • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
    • पासपोर्ट साइज फोटो

    1 किलोमीटर के दायरे में ही दिखेंगी स्कूलें

    RTE पोर्टल पर पालकों को उनके घर से 1 किलोमीटर या उससे कम दूरी वाली स्कूलें दिखाई देंगी। इसलिए आवेदन करते समय सही पता भरना बेहद जरूरी है।

    10 स्कूलों का चयन सोच-समझकर करें

    ऑनलाइन फॉर्म भरते समय:

    • अधिकतम 10 स्कूलों का विकल्प चुन सकते हैं
    • पहले से RTE के तहत एडमिशन ले चुके बच्चे दोबारा आवेदन नहीं कर सकते
    • आवेदन प्रक्रिया के बाद ऑनलाइन लॉटरी (सोडत) की तारीख घोषित की जाएगी

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. RTE 25% एडमिशन 2026 की आखिरी तारीख क्या है?

    10 मार्च 2026 आवेदन की अंतिम तारीख है।

    Q2. आवेदन कहां करना होगा?

    ऑफिशियल वेबसाइट https://student.maharashtra.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

    Q3. कितनी सीटें उपलब्ध हैं?

    मुंबई में कुल 5,939 सीटें उपलब्ध हैं।

    Q4. क्या सभी निजी स्कूल इसमें शामिल हैं?

    केवल स्वयं अर्थसहाय्यित और बिना अनुदानित (अल्पसंख्यक स्कूल छोड़कर) स्कूल शामिल हैं।

    Q5. क्या दोबारा RTE से एडमिशन मिल सकता है?

    नहीं। पहले से RTE के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चे दोबारा आवेदन नहीं कर सकते।

  • मालाड वेस्ट स्कूल यौन शोषण मामला: 5 साल की बच्ची से छेड़छाड़ के आरोप में स्कूल कर्मचारी गिरफ्तार

    मालाड वेस्ट स्कूल यौन शोषण मामला: 5 साल की बच्ची से छेड़छाड़ के आरोप में स्कूल कर्मचारी गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड वेस्ट में स्कूल के पास 5 साल की बच्ची से कथित यौन शोषण का मामला सामने आया है। पुलिस ने स्कूल के चपरासी को गिरफ्तार किया है, जबकि कार्रवाई में देरी के आरोप में स्कूल के CEO पर भी केस दर्ज किया गया है।

    मुंबई: मालाड वेस्ट इलाके में एक स्कूल के पास 5 साल की मासूम बच्ची से कथित यौन दुर्व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। मालाड पुलिस ने इस मामले में स्कूल के 30 वर्षीय चपरासी अनिल पांचाळ को गिरफ्तार किया है। बच्ची की मां का आरोप है कि आरोपी ने बच्ची को धमकाया और गलत तरीके से छुआ। शिकायत स्कूल प्रशासन तक पहुंचने के बावजूद कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने स्कूल के 65 वर्षीय CEO अनंत यज्ञीक के खिलाफ भी लापरवाही का केस दर्ज किया है।

    📍 कहां और कैसे हुआ मामला

    यह कथित घटना मालाड वेस्ट के एसवी रोड स्थित एक शैक्षणिक संस्थान के पास हुई। पीड़ित बच्ची रोज़ की तरह स्कूल जा रही थी, तभी आरोपी कर्मचारी ने उसे डरा-धमकाकर उसके साथ आपत्तिजनक हरकत की, ऐसा मां का आरोप है।

    🚨 स्कूल कर्मचारी गिरफ्तार

    मालाड पुलिस की डिटेक्शन टीम ने शुक्रवार को 30 साल के आरोपी स्कूल चपरासी को उसके रिहायशी इलाके से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपी स्कूल में निचले स्तर पर काम करता था और बच्चों की आवाजाही से अच्छी तरह वाकिफ था।

    🏫 स्कूल प्रशासन पर भी सवाल

    पीड़िता की मां का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले स्कूल प्रशासन को इस घटना की जानकारी दी थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी आधार पर पुलिस ने स्कूल के 65 वर्षीय CEO के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, उन पर समय पर कार्रवाई न करने और लापरवाही बरतने का आरोप है।

    👮 पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए और कहां-कहां लापरवाही हुई। पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के लिए जांच जारी है।

    ⚖️ कानूनी धाराएं और बच्चों की सुरक्षा

    इस मामले में POCSO Act की धारा 10, 17 और 21(2) एवं भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 74, 351(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. यह घटना कहां हुई है?
    मालाड वेस्ट, एसवी रोड के पास एक स्कूल के नजदीक।

    Q2. आरोपी कौन है?
    आरोपी 30 वर्षीय स्कूल का चपरासी है।

    Q3. क्या स्कूल प्रशासन पर भी केस दर्ज हुआ है?
    हां, स्कूल के 65 वर्षीय CEO के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है।

    Q4. मामला किस कानून के तहत दर्ज है?
    POCSO Act और IPC की संबंधित धाराओं के तहत।

    Q5. पुलिस आगे क्या कार्रवाई कर रही है?
    पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदारी तय की जा रही है।

  • गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    मुंबई में फेरीवालों के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। नो-फेरीवाला जोन बनाने की योजना, बुलडोजर कार्रवाई और लाइसेंस के सवाल पर गरीब फेरीवालों का भविष्य फिर संकट में है।

    मुंबई: एक बार फिर गरीब फेरीवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाने की तैयारी चल रही है। रेलवे स्टेशन इलाकों से अभियान की शुरुआत होगी। सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री से लेकर सरकारें फेरीवालों को सुरक्षा देने की बात करती हैं, तो ज़मीन पर बुलडोजर ही क्यों गरजता है?

    🏙️ मुंबई में फेरीवालों की समस्या: पुरानी, लेकिन अनसुलझी

    मुंबई में फेरीवालों की समस्या कोई नई नहीं है। दशकों से लाखों लोग फल, सब्ज़ी, कपड़े और रोजमर्रा का सामान बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।
    हकीकत यह है कि फेरीवाले शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा मार भी इन्हीं पर पड़ती है।

    BMC-takes-strict-action-on-Andheri-Irla-Road-removes-200-illegal-hawkers
    अंधेरी पश्चिम बीएमसी तोडफोड की ताजा तस्वीर

    🧨 बुलडोजर, तोड़-फोड़ और डर का माहौल

    जहां देखो वहीं BMC के तोड़क दस्ते, ट्रॉली तोड़ना, रेहड़ी जब्त करना और सामान फेंक देना—ये सब अब आम बात हो चुकी है।
    चुनाव से पहले कार्रवाई रोक दी जाती है और चुनाव खत्म होते ही फिर से अभियान शुरू हो जाता है। गरीब फेरीवालों के लिए यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।

    🗳️ चुनाव से पहले राहत, बाद में कार्रवाई

    महानगरपालिका चुनाव से पहले फेरीवालों को हटाने के लिए विशेष दस्ते तैनात किए गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रोक दी गई।
    अब चुनाव खत्म होते ही फिर से फेरीवालों को शहर से हटाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

    🚉 रेलवे स्टेशन पहले निशाने पर

    सूत्रों के अनुसार, अभियान के पहले चरण में

    • रेलवे स्टेशन परिसर
    • स्टेशन रोड
    • प्रमुख जंक्शन

    से फेरीवालों को हटाया जाएगा। इसके लिए मनपा की अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी जा रही है।

    🏢 गुप्त आदेश, गुप्त कार्रवाई

    बताया जा रहा है कि

    • कार्रवाई की योजना सहायक आयुक्त स्तर तक ही सीमित रहेगी
    • किस इलाके में कब कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी बाहर नहीं जाएगी
    • हर विभाग को अपने स्तर पर प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं

    इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि फेरीवालों को पहले से भनक न लगे

    💸 हफ्ता, राजनीति और दोहरा मापदंड

    हकीकत यह भी है कि

    • कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग फेरीवालों से हफ्ता वसूलते हैं
    • कई जगह मनपा कर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर मुफ्त फल-सब्ज़ी लेते हैं
    • प्रांतीयता और भाषा के आधार पर भी भेदभाव होता है

    इस सिस्टम में सबसे आसान शिकार हमेशा गरीब फेरीवाले ही बनते हैं।

    ❓ लाइसेंस क्यों नहीं?

    सबसे बड़ा सवाल यही है—
    अगर सरकार और मनपा चाहें तो फेरीवालों को लाइसेंस देकर “अवैध” शब्द खत्म किया जा सकता है।
    लेकिन ऐसा नहीं किया जाता, क्योंकि अवैध रहेंगे तो

    • हफ्ता वसूली चलेगी
    • दबाव बनाना आसान रहेगा
    • तोड़क कार्रवाई का डर बना रहेगा

    🏗️ अवैध इमारतें सुरक्षित, गरीब असुरक्षित

    मुंबई में हजारों इमारतें ऐसी हैं

    • जिनका नक्शा पास नहीं
    • जिनके पास NOC नहीं
    • जो सरकारी ज़मीन पर बनी हैं

    लेकिन उन पर बुलडोजर चलाने की हिम्मत कोई नहीं करता।
    वहीं गरीब फेरीवाले पर कार्रवाई सबसे आसान मानी जाती है।

    🏚️ झोपड़ी मुक्त आदेश की खुलेआम अवहेलना

    आरोप यह भी है कि

    • झोपड़ी मुक्त आदेश के बावजूद
    • लाखों रुपये के लेन-देन से
    • झोपड़ियां और कमर्शियल गाले बनवाए जाते हैं
    • और उन्हें संरक्षण दिया जाता है

    यह दोहरा रवैया गरीबों के खिलाफ व्यवस्था की सोच को उजागर करता है।

    ⚖️ नागरिक अधिकारों का सवाल

    गरीब फेरीवाले भी भारत के नागरिक हैं।
    राज्य का दायित्व लोगों को रुलाना नहीं, बल्कि रोजगार और आय के साधन देना है।
    संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर भी दिखने चाहिए।


    ❓ FAQ

    Q1. क्या पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाया जाएगा?
    सूत्रों के अनुसार, ऐसी योजना पर काम चल रहा है, हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है।

    Q2. कार्रवाई की शुरुआत कहां से होगी?
    पहले चरण में रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों से फेरीवालों को हटाया जाएगा।

    Q3. फेरीवालों को लाइसेंस क्यों नहीं दिया जाता?
    आरोप है कि सिस्टम में अवैध स्थिति बनाए रखना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद है।

    Q4. क्या यह कार्रवाई सभी अवैध निर्माणों पर होगी?
    जमीनी हकीकत में कार्रवाई ज़्यादातर गरीब फेरीवालों तक ही सीमित रहती है।

  • BMC ने साफ किया: मुंबई की किसी भी स्कूल का निजीकरण नहीं हुआ

    BMC ने साफ किया: मुंबई की किसी भी स्कूल का निजीकरण नहीं हुआ

    BMC ने स्पष्ट किया है कि मुंबई में मराठी या किसी भी माध्यम की महानगरपालिका स्कूलों का निजीकरण नहीं किया गया है। छात्रों की संख्या और शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई योजनाएं जारी हैं।

    मुंबई: मराठी माध्यम की स्कूलों को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। महानगरपालिका प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी माध्यम की स्कूलों का निजीकरण नहीं किया गया है। उल्टे, BMC छात्रों की संख्या बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे—इस उद्देश्य से लगातार योजनाएं और उपक्रम चला रही है।

    🏫 मराठी स्कूलों को लेकर BMC का स्पष्ट रुख

    BMC प्रशासन का कहना है कि:

    • मुंबई की मराठी माध्यम की स्कूलों के मुद्दे पर वह पूरी तरह संवेदनशील है
    • मराठी के साथ-साथ अन्य माध्यमों की स्कूलों को भी मजबूत किया जा रहा है
    • छात्रों की घटती संख्या को रोकने और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं

    📈 छात्र संख्या बढ़ाने के लिए लगातार पहल

    महानगरपालिका का साफ लक्ष्य है कि:

    • एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे
    • इसके लिए पालकों की काउंसलिंग की जाती है
    • स्कूलों में एडमिशन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं

    पिछले 10–15 वर्षों से BMC इस दिशा में निरंतर काम कर रही है।

    🏆 शानदार रिजल्ट: मराठी स्कूलों का 95% पास प्रतिशत

    शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों का नतीजा भी सामने आया है:

    • मार्च 2025 की 10वीं परीक्षा
    • BMC मराठी स्कूलों का 95% रिजल्ट
    • कई छात्रों ने 97% तक अंक हासिल किए

    इसके लिए:

    • नियमित सराव परीक्षाएं
    • गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम
    • शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण
      जैसे कदम उठाए गए।

    🎒 बिना फीस, 27 तरह की मुफ्त शैक्षणिक सामग्री

    BMC स्कूलों की बड़ी खासियत:

    • किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती
    • छात्रों को 27 प्रकार की शैक्षणिक सामग्री मुफ्त
    • किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी जैसी सुविधाएं

    साथ ही:

    • उपलब्ध जगहों में खेल प्रशिक्षण
    • खेलों में प्रावीण्य हासिल करने के अवसर

    📚 Khan Academy और डिजिटल लर्निंग का सहारा

    छात्रों को और मजबूत बनाने के लिए:

    • Khan Academy के जरिए गणित और विज्ञान का मुफ्त अभ्यास
    • डिजिटल कंटेंट से पढ़ाई आसान
    • छात्रों की प्रगति में बेहतर परिणाम सामने आए

    BMC का उद्देश्य है कि:

    “महानगरपालिका का छात्र निजी स्कूल से भी ज्यादा सक्षम बने।”

    🧠 FLN निपुण भारत से मजबूत बुनियाद

    Foundational Literacy & Numeracy (FLN) – निपुण भारत अभियान के तहत:

    • तीसरी कक्षा तक हर माध्यम का छात्र
    • सही से पढ़ने में सक्षम
    • गणित की बुनियादी समझ में निपुण

    इसके लिए विशेष शैक्षणिक रणनीतियां अपनाई गईं, जिनके अच्छे नतीजे अब दिख रहे हैं।

    निजीकरण का दावा पूरी तरह गलत

    BMC ने स्पष्ट किया है कि:

    • मराठी या किसी भी माध्यम की स्कूलों का
      निजीकरण नहीं किया गया
    • सोशल मीडिया या कुछ हलकों में जो
      “गलत तस्वीर” पेश की जा रही है
      वह पूरी तरह भ्रामक है

    🤝 मराठी अभ्यास केंद्र के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा

    हाल ही में:

    • मराठी अभ्यास केंद्र के शिष्टमंडल के साथ
    • BMC प्रशासन की विस्तृत बैठक हुई
    • हर मुद्दे पर बिंदुवार चर्चा की गई

    बैठक के बाद:

    • समिति के सदस्यों ने
      👉 संतोष व्यक्त किया

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. क्या BMC ने मराठी स्कूलों का निजीकरण किया है?
    ➡️ नहीं, BMC ने साफ किया है कि किसी भी माध्यम की स्कूलों का निजीकरण नहीं हुआ है।

    Q2. BMC स्कूलों में फीस लगती है क्या?
    ➡️ नहीं, छात्रों से किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती।

    Q3. छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
    ➡️ 27 प्रकार की मुफ्त शैक्षणिक सामग्री, खेल प्रशिक्षण और डिजिटल लर्निंग।

    Q4. 10वीं का रिजल्ट कैसा रहा?
    ➡️ मार्च 2025 में मराठी स्कूलों का 95% रिजल्ट रहा।

    Q5. FLN निपुण भारत का क्या फायदा हुआ?
    ➡️ तीसरी कक्षा तक के छात्र पढ़ने और गणित में ज्यादा सक्षम बने हैं।

  • UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का विरोध तेज़। शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, सरकार की नीयत और राजनीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    मुंबई: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन के बजाय टकराव और भेदभाव को बढ़ावा देगा। देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।

    UGC नियमों पर क्यों भड़का विरोध

    नए यूजीसी नियमों को लेकर आरोप है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रशासनिक निर्णयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
    सवर्ण संगठनों का दावा है कि नियमों की भाषा और संरचना ऐसी है, जिससे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है।

    हिंदू एकता बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण

    आलोचकों का कहना है कि “हिंदू एकता” जैसे नारों का इस्तेमाल सामाजिक एकजुटता के बजाय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य—से ध्यान हटाकर समाज को आपस में बांटा जा रहा है।

    शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण का आरोप

    लेखक सुरेंद्र राजभर का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और नीतियों के जरिए शिक्षा पर वैचारिक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले पाएगा या फिर हर फैसले में सरकारी दखल बढ़ेगा।

    कानूनों के दुरुपयोग की आशंका

    विरोध करने वालों ने यह भी चिंता जताई कि यदि शिकायतों की जांच और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हुई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और शिक्षा का माहौल डर का बन सकता है।

    सरकार से जवाबदेही की मांग

    यूजीसी नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें अब केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं हैं। कई शिक्षाविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से पारदर्शिता और संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है।


    FAQ

    Q1. यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
    नियमों से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    Q2. विरोध कौन कर रहा है?
    मुख्य रूप से सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षाविद और कुछ सामाजिक संगठन।

    Q3. सरकार पर क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

    Q4. आगे क्या मांग की जा रही है?
    नियमों पर पुनर्विचार, सभी वर्गों से संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।

  • RIICO भर्ती 2026: राजस्थान में 98 सरकारी पदों पर बंपर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन शुरू

    RIICO भर्ती 2026: राजस्थान में 98 सरकारी पदों पर बंपर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन शुरू

    RIICO भर्ती 2026 के तहत राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 98 पदों पर भर्ती निकली है। 12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट उम्मीदवार 20 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    राजस्थान: राजस्थान सरकार के प्रतिष्ठित उपक्रम Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation Limited (RIICO) ने भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत कुल 98 स्थायी पदों पर नियुक्ति की जाएगी। जूनियर असिस्टेंट, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर, प्रोग्रामर, ड्राफ्ट्समैन, जूनियर लीगल ऑफिसर सहित कई पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और 20 फरवरी 2026 अंतिम तारीख है। चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-5 से लेवल-16 तक वेतन मिलेगा।

    RIICO भर्ती 2026: संगठन और जॉब हाइलाइट्स

    RIICO राजस्थान में औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी सरकारी संस्था है। यहां नौकरी का मतलब है स्थिर करियर, अच्छा वेतन और सरकारी सुविधाएं।

    • भर्ती संस्था: राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (RIICO)
    • कुल पद: 98
    • नौकरी स्थान: राजस्थान
    • आवेदन मोड: ऑनलाइन
    • वेतनमान: 7वां वेतन आयोग (Pay Level 5 से 16)

    RIICO Vacancy 2026: पदों का पूरा विवरण

    पद का नामकुल पद
    जूनियर असिस्टेंट54
    असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर ग्रेड-II21
    पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II08
    ड्राफ्ट्समैन-कम-ट्रेसर (सिविल)08
    जूनियर लीगल ऑफिसर (JLO)04
    प्रोग्रामर01
    असिस्टेंट टाउन प्लानर01
    कंपनी सेक्रेटरी01
    कुल98

    शैक्षणिक योग्यता (Eligibility Criteria)

    जूनियर असिस्टेंट:
    12वीं पास + O Level / COPA / RSCIT / कंप्यूटर डिग्री या डिप्लोमा

    AAO ग्रेड-II:
    B.Com (60% अंक) + RSCIT / O Level / COPA / कंप्यूटर डिप्लोमा

    पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II:
    12वीं पास + कंप्यूटर योग्यता (शॉर्टहैंड/टाइपिंग स्किल टेस्ट अनिवार्य)

    ड्राफ्ट्समैन:
    डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर + AutoCAD या NCVT सर्टिफिकेट (सिविल)

    प्रोग्रामर:
    BE/B.Tech/MCA/M.Sc (IT/CS) / M.Tech

    JLO:
    लॉ ग्रेजुएट (55% अंक) या LLM

    असिस्टेंट टाउन प्लानर:
    B.Arch (60%) + PG इन टाउन प्लानिंग

    कंपनी सेक्रेटरी:
    ICSI फाइनल + मेंबरशिप + 5 साल का अनुभव

    आयु सीमा (20 फरवरी 2026 तक)

    • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
    • अधिकतम आयु: 40 वर्ष

    आयु में छूट:

    • राजस्थान के SC/ST/OBC/MBC/EWS पुरुष: 5 वर्ष
    • राजस्थान की महिला उम्मीदवार: 10 वर्ष

    वेतन और सरकारी सुविधाएं

    पदप्रोबेशन वेतनरेगुलर पे लेवल
    कंपनी सेक्रेटरी₹47,200लेवल-16
    असिस्टेंट टाउन प्लानर₹39,300लेवल-14
    प्रोग्रामर₹31,100लेवल-12
    AAO ग्रेड-II₹26,500लेवल-11
    JLO / PA₹23,700लेवल-10
    ड्राफ्ट्समैन₹18,500लेवल-8
    जूनियर असिस्टेंट₹14,600लेवल-5

    प्रोबेशन के बाद: DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, मेडिकल सुविधा सहित अन्य सरकारी लाभ।

    चयन प्रक्रिया (Selection Process)

    • लिखित परीक्षा (Part-I और Part-II)
    • स्किल / प्रोफिशिएंसी टेस्ट (पद के अनुसार)
    • इंटरव्यू (कंपनी सेक्रेटरी और टाउन प्लानर)
    • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

    ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

    1. RIICO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
    2. “Recruitment 2026 – Apply Online” पर क्लिक करें
    3. रजिस्ट्रेशन करें
    4. फॉर्म भरें और दस्तावेज अपलोड करें
    5. फीस जमा करें
    6. आवेदन फॉर्म का प्रिंट लें

    महत्वपूर्ण तिथियां

    • नोटिफिकेशन जारी: 20 जनवरी 2026
    • आवेदन शुरू: 21 जनवरी 2026
    • अंतिम तारीख: 20 फरवरी 2026
    • परीक्षा तिथि: जल्द घोषित होगी

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. RIICO भर्ती 2026 में कौन आवेदन कर सकता है?
    👉 12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट और प्रोफेशनल डिग्री वाले उम्मीदवार।

    Q2. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
    👉 20 फरवरी 2026।

    Q3. क्या ये पद स्थायी हैं?
    👉 हां, प्रोबेशन के बाद स्थायी नियुक्ति होगी।

  • BMC: CBSC स्कूलों से 366 छात्र पहली बार देंगे दसवीं की परीक्षा

    BMC: CBSC स्कूलों से 366 छात्र पहली बार देंगे दसवीं की परीक्षा

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका के सीबीएसई बोर्ड से जुड़े 10 स्कूलों के 366 छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगे। परीक्षा से पहले छात्रों के लिए विशेष अभ्यास और विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के शिक्षा विभाग से संचालित सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के लिए यह साल ऐतिहासिक होने जा रहा है। बीएमसी की 10 सीबीएसई स्कूलों के कुल 366 छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा की तैयारी को लेकर महानगरपालिका की ओर से विशेष अभ्यास कक्षाएं, सराव प्रश्नपत्रिकाएं और निजी स्कूलों के विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी।

    BMC की 18 सीबीएसई स्कूलें, 10 स्कूल पहली बार परीक्षा में

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग के अंतर्गत फिलहाल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कुल 18 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से 10 स्कूल ऐसे हैं, जिनके छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने जा रहे हैं। इन स्कूलों के 366 छात्रों के लिए परीक्षा से पहले विशेष तैयारी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हो सकें।

    परीक्षा से पहले विशेष अभ्यास और मार्गदर्शन

    बीएमसी शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों से नियमित रूप से सराव प्रश्नपत्रिकाएं हल करवाई जा रही हैं। इसके साथ ही गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेज़ी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    छात्रों की बेहतर तैयारी के लिए कुछ नामी निजी सीबीएसई स्कूलों के अनुभवी शिक्षकों का भी सहयोग लिया गया है, जो ऑनलाइन माध्यम से उत्तर लिखने की तकनीक और समय प्रबंधन पर मार्गदर्शन दे रहे हैं।

    आयुक्तों के मार्गदर्शन में चल रही तैयारी

    यह पूरा शैक्षणिक उपक्रम महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी तथा अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि बीएमसी के छात्र भी निजी स्कूलों के छात्रों की तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

    आठ भाषाओं और चार बोर्ड में शिक्षा

    बीएमसी का शिक्षा विभाग मराठी, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी, गुजराती, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ – इन आठ भाषाओं में शिक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही एसएससी, सीबीएसई, आईसीएसई और आईबी जैसे चार अलग-अलग बोर्ड के पाठ्यक्रम भी महानगरपालिका की शालाओं में उपलब्ध हैं।

    SSC में 93% तक पहुंचा रिजल्ट, अब सीबीएसई पर नजर

    बीते कई वर्षों से बीएमसी के एसएससी बोर्ड के छात्रों के लिए विशेष मार्गदर्शन और अभ्यास योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक असर परीक्षा परिणामों पर भी दिखा है। एसएससी बोर्ड का परिणाम 93 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब इसी तर्ज पर सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए भी विशेष तैयारी करवाई जा रही है।

    परीक्षा की तारीखें तय

    सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से शुरू होकर 11 मार्च 2026 तक चलेगी। इस दौरान छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने की रणनीति, उत्तर लेखन कौशल और परीक्षा के तनाव से निपटने के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी की कितनी सीबीएसई स्कूलों के छात्र परीक्षा दे रहे हैं?
    👉 10 सीबीएसई स्कूलों के कुल 366 छात्र पहली बार दसवीं की परीक्षा देंगे।

    Q2. परीक्षा कब से कब तक होगी?
    👉 परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक चलेगी।

    Q3. छात्रों के लिए क्या विशेष तैयारी करवाई जा रही है?
    👉 सराव प्रश्नपत्र, विशेष कक्षाएं और निजी स्कूलों के विशेषज्ञ शिक्षकों का ऑनलाइन मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

  • Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, लेकिन शहर को मेयर मिलने में वक्त लगेगा। जानिए मेयर पद का आरक्षण लॉटरी से कैसे तय होता है, कानून क्या कहता है और इसमें एक हफ्ता क्यों लग सकता है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव खत्म हो चुके हैं और नई जनरल बॉडी भी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद मुंबई को तुरंत नया मेयर नहीं मिलेगा। इसकी वजह सिर्फ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान नहीं है, बल्कि मेयर के चुनाव से जुड़ी एक कानूनी प्रक्रिया भी है। कानून के मुताबिक, मेयर पद का आरक्षण लॉटरी सिस्टम से तय होता है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मेयर का चुनाव संभव नहीं है। इसी कारण मुंबई को नया मेयर मिलने में कम से कम एक हफ्ते का वक्त लग सकता है।

    🏛️ Mumbai का मेयर तुरंत क्यों नहीं चुना जा सकता?

    बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के बाद आमतौर पर लोगों को लगता है कि मेयर का नाम भी तुरंत सामने आ जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और उससे पहले कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।
    सबसे अहम प्रक्रिया है मेयर पद का आरक्षण तय होना, जो सीधे चुनाव से नहीं बल्कि लॉटरी यानी ड्रॉ ऑफ लॉट्स से तय किया जाता है।

    🎟️ क्या है मेयर पद का आरक्षण सिस्टम?

    देशभर की शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
    इस व्यवस्था के तहत मेयर का पद अलग-अलग वर्गों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है, जैसे:

    • अनुसूचित जाति (SC)
    • अनुसूचित जनजाति (ST)
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
    • महिलाएं
    • सामान्य (ओपन) वर्ग

    यह आरक्षण पहले से तय नहीं होता, बल्कि हर कार्यकाल में लॉटरी के ज़रिए तय किया जाता है।

    📜 आरक्षण रोटेशन क्यों जरूरी है?

    मेयर पद पर आरक्षण की व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन से जुड़ी है। इस संशोधन के तहत शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और यह तय किया गया कि SC, ST और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें।
    महाराष्ट्र में यह व्यवस्था नगरपालिका अधिनियम (Municipal Corporations Act) के तहत लागू होती है, जिसमें OBC आरक्षण भी शामिल है।
    रोटेशन सिस्टम का मकसद यह है कि हर वर्ग को समय-समय पर मेयर बनने का मौका मिले और कोई एक वर्ग लगातार फायदे में न रहे।

    🎲 मेयर पद का फैसला लॉटरी से ही क्यों?

    लॉटरी सिस्टम इसलिए अपनाया गया है ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
    अगर सरकार या राजनीतिक दल तय करें कि किस वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा, तो उस पर पक्षपात और राजनीतिक दखल के आरोप लग सकते हैं।
    ड्रॉ ऑफ लॉट्स से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आरक्षण पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय हो।

    🗂️ लॉटरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

    1. शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) लॉटरी कराने का नोटिफिकेशन जारी करता है
    2. पिछले कार्यकालों के आधार पर आरक्षण रोटेशन की सूची तैयार की जाती है
    3. सार्वजनिक रूप से लॉटरी (ड्रॉ) निकाली जाती है
    4. जिस वर्ग का नाम निकलता है, वही मेयर पद के लिए आरक्षित माना जाता है
    5. इसके बाद आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होता है

    जब तक यह पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती, कोई भी पार्टी अपने मेयर उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सकती।

    🗳️ मेयर का चुनाव कैसे होता है?

    आरक्षण तय होने के बाद बीएमसी की विशेष बैठक बुलाई जाती है।
    मेयर का चुनाव पार्षदों के बीच से ही किया जाता है।
    मुंबई की 227 सदस्यीय जनरल बॉडी में मेयर बनने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है।
    पिछले दो कार्यकालों में लॉटरी के ज़रिए मेयर पद ओपन जनरल कैटेगरी में गया था।

    👑 मुंबई मेयर के पास कितनी ताकत होती है?

    कानून के मुताबिक, मुंबई का मेयर बीएमसी का औपचारिक (Ceremonial) प्रमुख होता है।
    मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है और उनकी मुख्य जिम्मेदारियां हैं:

    • जनरल बॉडी की बैठकों की अध्यक्षता
    • सदन में व्यवस्था बनाए रखना
    • बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देना
    • शहर के “First Citizen” के तौर पर आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व करना

    हालांकि, बीएमसी का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होता है, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त IAS अधिकारी होते हैं।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. क्या चुनाव नतीजों के तुरंत बाद मेयर चुना जा सकता है?
    👉 नहीं, पहले मेयर पद का आरक्षण तय होना जरूरी है।

    Q2. मेयर पद का आरक्षण कौन तय करता है?
    👉 शहरी विकास विभाग लॉटरी के ज़रिए आरक्षण तय करता है।

    Q3. मुंबई को नया मेयर मिलने में कितना वक्त लग सकता है?
    👉 कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक हफ्ता लग सकता है।