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  • ड्रग्स फैक्ट्री का भांडाफोड़, डी-कंपनी से लिंक होने का अनुमान

    ड्रग्स फैक्ट्री का भांडाफोड़, डी-कंपनी से लिंक होने का अनुमान

    कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपये की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। इसमें डी-कंपनी की फंडिग सोर्स का अनुमान लगाया जा रहा है। मैसूर से बेंगलूर और फिर मुंबई होती थी ड्रग्स की तस्करी। मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया कि ड्रग्स की तस्करी के लिए ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    मुंबई: कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपए की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। यह ड्रग तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। केस की जांच शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुंबई की साकीनाका पुलिस ने जांच के दौरान खुलासा किया कि किस तरह ड्रग्स की तस्करी का रैकेट काम करता था। कर्नाटक से महाराष्ट्र तक ड्रग्स की तस्करी और इंटरनेशनल स्तर तक इसकी सप्लाई होती थी। ड्रग्स सप्लायर इसके लिए अनोखा और बेहद गुप्त तरीका अपनाते थे। इस मामले को लेकर जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के डी-कंपनी का पैसा लगा हो सकता है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    कौन है मास्टरमाइंड?

    मुंबई पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जांच में सामने आया कि ड्रग्स की सप्लाई और प्रोडक्शन की प्रक्रिया दो अलग-अलग गिरोह करते थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों ही गैंग के सदस्यों को एक-दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं होता था। मुंबई पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    पुलिस के लिए मुश्किलें

    यह ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री और इसके सप्लाई की चैन पूरे ऑपरेशन की सबसे खतरनाक और शातिर ‘मॉडस ओपेरेंडी’ अपनाती थी। पुलिस ने बताया कि इस तरह की व्यवस्था से नेटवर्क की परतें खोलना बेहद मुश्किल हो गया था। हालांकि मुंबई पुलिस की हाईटेक टीम ने इसकी पर्तें खोल ही लीं। लेकिन अब भी बहोत सारे राज खुलने की आशंका जताई जा रही है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    बेंगलुरु में क्या होता था?

    अंधेरी पूर्व की साकीनाका पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मैसूर की फैक्ट्री में एमडी नामक ड्रग्स तैयार होती थी। यहां काम करने वालों को नहीं पता होता था कि गाड़ी में लोड करने के बाद ड्रग्स को कहां लेकर जाया जाएगा। खेप को एक दूसरे गैंग के जरिए सबसे पहले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुंचाया जाता था। बेंगलुरु में मुंबई के गैंग का एक मेंबर पहले से मौजूद होता था। ड्रग्स सप्लाई करने और उसे लेने आने वालों को एक दूसरे को एक कोड दिखाना होता था।

    कैसे होती थी ड्रग्स की डिलीवरी?

    पुलिस ने बताया यह कोड एक टीशर्ट होती थी। जो हर बार सप्लाई के लिए अलग-अलग यूज की जाती थी। दोनों के पास सेम टीशर्ट का फोटो वॉट्सऐप किया जाता था। फिर वे एक दूसरे को वह दिखाकर खेप की सप्लाई करते थे। इस तरह खेप को बेंगलुरु से मुंबई तक लाया जाता था। मुंबई लाने के बाद इसे मुंबई के विभिन्न इलाकों में स्थानीय सप्लायर्स के जरिए सप्लाई होती थी। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    कैसे होता था ट्रांसपोर्टेशन?

    पुलिस ने बताया कि ड्रग्स का पूरा ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम सड़क मार्ग पर आधारित था। तस्कर हवाई या ट्रेन मार्गों में होने वाली जांच से बचने के लिए रोड का इस्तेमाल करते थे। पुलिस जांच में सामने आया, कि यह नेटवर्क ड्रग्स को बसों और निजी वाहनों के माध्यम से ट्रांसपोर्ट करता था। मैसूर से बेंगलुरु और फिर मुंबई तक का सफर तय कर ड्रग्स को लगेज के भीतर छिपाकर पहुंचाया जाता था। इस तरह की रणनीति से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में तस्वीरों को काफी हद तक सफलता भी मिली।

    आईबी के अधिकारी कर रहे हैं पूछताछ

    इस मामले में अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की भी एंट्री कर चुकी है। सोमवार को आईबी अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसियों को शक है कि यह ड्रग्स फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि इसका लिंक अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से भी हो सकता है। साकीनाका पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

  • 12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

    बेसिक से एडवांस

    इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें।

    किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?

    फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए।

    कोर्स में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

    इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?

    इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।

    योजना के प्रमुख लाभ

    योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें।

    किन राज्यों में शुरू हुई यह योजना?

    यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।

    युवाओं को रोजगार में लाभ

    इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास

    कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है।

  • Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी भरे ई- मेल भेजकर फिरौती मांगने वाले मुख्य आरोपी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई इंटरपोल की मदद से सफल हो पाई है। आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार किया गया है।

    Mumbai: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जीशान सिद्दीकी को धमकी देने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुंबई पुलिस और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है।

    कहां है त्रिनिदाद और टोबैगो ?

    पूरे वेस्टइंडीज में त्रिनिदाद छठे स्थान का सबसे बड़ा आईलैंड है। त्रिनिदाद और टोबैगो जो कैरिबियन सागर में स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्व में वेनेजुएला के तट के पास है। यहीं से मुंबई पुलिस ने इंटरपोल की मदद से बिहार के दरभंगा का रहने वाला आरोपी को डिटेंड कर गिरफ्तार किया है।

    ईमेल से मिली थी धमकी

    पुलिस के अनुसार, धमकी देने वाला बिहार के दरभंगा का रहने वाले आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद नावेद खुद को डी-कंपनी का सदस्य बताते हुए अप्रैल में जीशान को जान से मारने की धमकी दी थी और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी भरे ईमेल 19, 20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे।

    बांद्रा पुलिस का एक्शन

    इस मामले में जीशान सिद्दीकी ने बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया, कि आरोपी ने कई ईमेल भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी, जैसा कि उनके पिता बाबा सिद्दीकी के साथ करने की बात कही गई थी।

    भारत के बाहर से मिली थी धमकी

    पुलिस ने शिकायत के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी थी और अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 23 अप्रैल को यह केस मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी भारत से बाहर है, जिसके बाद 28 अप्रैल को उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और फिर इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।

    फिरौती का था मामला

    इंटरपोल की मदद से आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो में गिरफ्तार किया गया और फिर बुधवार को भारत डिपोर्ट कर मुंबई लाया गया है। अब आरोपी से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने धमकी देकर फिरौती वसूलने की मंशा से यह साजिश रची थी।

    हो सकते हैं कई खुलासे

    क्राइम ब्रांच का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद देश में दहशत का माहौल बन गया था। उसी वक्त उनके बेटे को मिली धमकी में उनके पिता की हत्या का जिक्र किया गया था। फिलहाल, जांच जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पीछे कोई और गिरोह या नेटवर्क तो नहीं है।

  • झूठे गवाहों का इस्तेमाल कर 19 साल की जेल, मुंबई लोकल ब्लास्ट में 12 मुसल्मानों को किसने फंसाया?

    झूठे गवाहों का इस्तेमाल कर 19 साल की जेल, मुंबई लोकल ब्लास्ट में 12 मुसल्मानों को किसने फंसाया?

    11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में पिछले 19 सालों से जिन 12 मुसलमानों को दोषी ठहरा कर जेल में कैद कर लिया गया था। हाईकोर्ट ने सभी को एक साथ बरी कर दिया। लेकिन इन सब के पीछे कौन हो सकता है यह अभ भी सवाल का विषय बना हुआ है।

    मुंबई: 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इन धमाकों में 187 लोगों की जान गई, 800 से ज़्यादा घायल हुए। इस भयानक घटना के 19 साल बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 लोगों को बरी कर दिया, जिन्हें इन धमाकों का दोषी ठहराया गया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि बरी किए गए लोगों को वापस जेल नहीं भेजा जाएगा। अब सवाल है, कि इन 12 मुसलमानों को फंसाने का काम किसने किया था। जिसकी वजह से एक विशेष समुदाय को टार्गेट किया गया। ये सवाल हैं उन 12 लोगों में से एक मोहम्मद अली का, जिन्हें इसी मामले में बरी कर दिया गया है।

    हाईकोर्ट के फैसले पर लगा रोक

    सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने साफ कर दिया, कि सभी आरोपी जेल से रिहा हो चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा जेल भेजने का सवाल ही नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलों पर विचार करते हुए कहा, कि हाई कोर्ट के फैसले को कानूनी मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा और उस फैसले पर रोक लगाई जाती है।

    वो 13 लोग कौन थे?

    2006 के धमाकों के बाद मुंबई पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें कमाल अहमद, मोहम्मद साजिद मरगूब अंसारी, मोहम्मद माजिद, नवीद हुसैन खान, मोहम्मद फ़ैसल अतउर रहमान शेख, सुहैल महमूद शेख, आसिफ खान, एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी, शेख मोहम्मद अली, जमीर अहमद, मुजम्मिल अतउर रहमान शेख, तनवीर अहमद और अब्दुल वहीद शेख शामिल थे। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?

    एक की हो गयी मौत

    गिरफ्तार 12 लोगों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी बेगुनाही की अपील की थी। हाईकोर्ट में 10 साल केस चला फिर फैसला आया कि ये सब बेकसूर हैं। इस पूरे मामले में एक ऐसा शख्स भी था जिसने अपनी बेगुनाही की खबर सुनने से पहले ही दुनिया छोड़ दिया। बिहार के मधुबनी जिले के बसोपट्टी के रहने वाले कमाल अहमद मोहम्मद वकील अंसारी की 2021 में कोविड के दौरान जेल में ही मौत हो गई थी।

    मजदूर को किया था गिरफ्तार

    जब कमाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया तब उनके बेटे अब्दुल्ला अंसारी सिर्फ छह साल के थे। अब्दुल्ला कहा, ATS ने कमाल अंसारी पर पाकिस्तान में हथियारों का ट्रेनिंग लेने, भारत-नेपाल बॉर्डर के रास्ते आतंकवादियों को लाने और मुंबई के माटुंगा स्टेशन पर विस्फोटक रखने का इल्जाम लगाया था। लेकिन अब्दुल्ला बताते हैं कि उनके पिता एक मजदूर थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?

    क्या अब सरकारें, पुलिस, मीडिया कमाल के परिवार से माफी मांगेगे? उसकी बदनामी के दाग को कौन धोएगा?

    झूठे गवाह और मनगढ़ंत कबूलनामे का खुलासा

    इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को फंसाने के लिए कई हथकंडे अपनाए, जिनकी पोल RTI ने खोल दी।

    • गवाह नंबर 74 की झूठी गवाही: अभियोजन पक्ष के गवाह नंबर 74 ने विशेष मकोका अदालत में बताया था कि उसने एहतेशाम सिद्दीकी को चर्चगेट रेलवे स्टेशन पर एक काले बैग के साथ देखा था। इसी गवाही के आधार पर एहतेशाम को बम लगाने वाला बताया गया। लेकिन RTI से मिली जानकारी ने इस गवाह की पोल खोल दी। गवाह ने जिस अस्पताल में किसी से मिलने की बात कही थी, वहां उस नाम का कोई व्यक्ति था ही नहीं और जिस बैंक में मिलने का दावा किया था, वह व्यक्ति भी वहां नहीं था। अदालत ने इस गवाह को पुलिस का ‘स्टॉक गवाह’ करार दिया, यानी एक ऐसा गवाह जिसे पुलिस हर केस में इस्तेमाल करती है। RTI से यह भी सामने आया कि यही गवाह पुलिस के लिए चार और मामलों में भी पेश हुआ था।
    • पहचान में देरी पर सवाल: पुलिस ने कुछ ऐसे गवाह भी पेश किए जिन्होंने ब्लास्ट के 100 दिनों बाद आरोपियों को पहचानने की बात कही। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि कोई इतने लंबे समय बाद किसी व्यक्ति का चेहरा कैसे याद रख सकता है? यह दर्शाता है कि पुलिस असली गुनहगारों को ढूंढने के बजाय आम लोगों को बलि का बकरा बना रही थी।
    • स्केच गवाह का अनुपस्थित होना: आरोपी के स्केच बनाने में मदद करने वाले गवाह को ट्रायल के लिए नहीं बुलाया गया और न ही उसे अदालत में आरोपी की पहचान करने के लिए कहा गया। मामले का यह एक सबसे बड़ा लूप-होल था।
    • कॉपी-पेस्ट के कबूलनामे: पुलिस का केस ज़्यादातर कबूलनामों पर आधारित था, जो पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिए थे। MCOCA की धारा 18 के तहत पुलिस के सामने दिए गए कबूलनामों को कोर्ट में मान्यता देता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन कबूलनामों के आधार पर सजा देने से इंकार कर दिया, क्योंकि कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने यह भी पाया कि कई आरोपियों ने दो अलग-अलग अधिकारियों के सामने जुर्म कबूल किया था, लेकिन दोनों कबूलनामों में घटना का विवरण, यहां तक कि फुल स्टॉप और कॉमा भी हूबहू कॉपी-पेस्ट थे। कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय माना।

    2015 में इसी केस में बरी हुएम अब्दुल वाहिद शेख बताते हैं कि उन्होंने “हर दिन 20-25 आरटीआई एप्लीकेशन” दायर किए, जिनमें पुलिस स्टेशनों की लॉगबुक से लेकर अस्पताल के रिकॉर्ड और हर जरूरी जानकारी मांगी गई।

    19 सालों बाद सामने आया पीड़ितों का दर्द

    मोहम्मद साजिद अंसारी, जो इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से थे, बताते हैं, “मेरा इलेक्ट्रॉनिक्स का बैकग्राउंड था, इसलिए इन लोगों के लिए आसान था कहना कि ये टाइमर बम बनाने के लायक है। इसी वजह से मुझे टारगेट किया गया, इन्होंने रिकवरी के तौर पर मेरे मोबाइल रिपेयरिंग इंस्टीट्यूट के जो सामान थे और जो रिपेयरिंग की इलेक्ट्रॉनिक्स की चीजें थी उसे रिकवरी में दिखाया गया। हालांकि एफएसएल रिपोर्ट के अंदर क्लियर हुआ कि कुछ भी एक्सप्लोसिव मेरे पास नहीं मिला।”

    187 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है?

    19 सालों तक इन लोगों के परिवार के साथ पुलिस, समाज, मीडिया, सरकारें, अदालत नाइंसाफी करती रहीं।

    ऐसे में सवाल उठता है कि इन 12 लोगों और इनके परिवार के 19 साल के दर्द का जिम्मेदार कौन है? क्या उन लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने इन 12 लोगों को फंसाया था?

    एक सवाल और है, 2006 के ब्लास्ट में 187 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? उन परिवारों से क्या कहा जाएगा जिन्होंने अपनों को खोया था? वो लोग लौटकर नहीं आएंगे लेकिन उनके कातिल को हमारा प्रशासन आज तक नहीं ढूंढ पाया और ना ही कटघरे में खड़ा कर पाया, सजा तो दूर की बात हो गई।

  • बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन का खेल। वोट मत दें जनता लेकिन जीतेगी तो BJP ही..

    बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन का खेल। वोट मत दें जनता लेकिन जीतेगी तो BJP ही..

    बिना किसी आई डी और बिना किसी मतदाता से मिले ही blo द्वारा कार्यालय में बैठकर खुद ही वोटर फॉर्म भरने का कार्य कराया जाना कत्तई उचित नहीं। वेरिफिकेशन के लिए blo को हर घर जाकर वोटरों से मिलने और उनसे भारत में रहने, उनके पिता की जन्मतिथि मांगने की बात चुनाव आयोग ने की थी। जब blo किसी मतदाता से मिलेगा ही नहीं तो सत्यापन किस बात का करेगा? बहुत ही सीनियर पत्रकार अजीत अंजुम को पता था, कि किसी भी कार्यालय में बिना अनुमति लिए कैमरामैन और माइक लेकर जाने पर उन पर सरकारी कार्यवाही में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। इसीलिए वे बिना कैमरामैन और बिना माइक लिए उस कमरे में गए, जहां तमाम blo बैठे हुए मतदाताओं के सिंगल फॉर्म भर रहे थे।
    मजेदार बात यह हुई, कि blo फॉर्म पर सिर्फ नाम लिख रहे थे। मतदाता के पिता या पति का नाम नहीं लिख रहे थे। फिर कैसे पहचान होगी कि वोट देने वाला सही है या नही? इससे भी बड़ी मजेदार बात यह, कि जेडीएस के बड़े नेता और नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके लालू यादव के बेटे की पत्नी का नाम काट दिया गया है। एक महिला के नाम पर बने वोटर आईडी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो लगा दी है। पत्नी शादी होने के बाद जब ससुराल आती है तो ससुराल की सदस्य बन जाती है। नाम इसलिए काटा गया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली भारत की राजधानी और लालू यादव का पूरा परिवार बिहार के पटना में रहता है।
    बात वोटर लिस्ट बनाने की तो blo बिना किसी आई डी के सिंगल फॉर्म भरे और उसमें केवल मतदाता का नाम हो पिता या पति का नाम नहीं हो तो वह व्यक्ति वोट कैसे देगा? अब यही सच पुराने ख्यात पत्रकार अजीत अंजुम ने अपनी मोबाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दी। जिस पर देश भर से प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक है। चुनाव आयोग की तरह बिहार पुलिस भी सरकारी दबाव में है जिसने बेवजह पत्रकार अजीत अंजुम द्वारा मतदाता सूची को ऑफिस में भरे जाने का सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। यानी सरकार कुछ भी कराए उसे अधिकार है। लेकिन अगर पत्रकार गलतियों को देश की जनता के सामने लाए तो गुनहगार हो गया।
    चुनाव आयुक्त बदल देने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरकार यदि जिसे आयुक्त बनाएगी तो इसी शर्त के साथ कि वह सरकार के कहे अनुसार कार्य करे। पिछले दस साल से चुनाव आयोग के द्वारा पक्षपाती रवैया अपनाए जाने का विरोध देश भर में हो रहा है। क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद प्रसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17 भरता है जिसमें कुल मतदाता स्त्री पुरुष और कुल पड़े हुए मत की गिनती स्त्री पुरुष अलग अलग बताना पड़ता है।
    बैलेट बॉक्स था या अब ई वी एम दोनों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसी शाम या रात जिला मुख्यालय पर बॉक्स और फॉर्म के साथ तीनों वोटर लिस्ट लिफाफे में भरकर जमा करना होता है। दूसरे दिन ही केंद्रीय चुनाव आयोग पड़े हुए मतों का प्रतिशत बता सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत तीन अन्य चरण के मतदान होने के बाद बताने में तेरह दिन लगाए। फिर दस दिनों में क्या क्या करता रहा चुनाव आयोग? आयोग की गड़बड़ी छुपाने के लिए जल्द ही सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट करने का नियम मनमाने ढंग से बना दिया गया ताकि कोर्ट में सबूत पेश करना नहीं पड़े ।
    बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए चुनाव आयोग बेशक बेइमानी करता है। एक ही वोटर आईडी का यूनिक नंबर कई कई राज्यों में वोटर कैसे बनाया जाता है यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है। चुनाव के दिन शाम पांच बजे मेन गेट बंद कर पीछे से शुरू करके कूपन नंबर एक से दिए जाने का नियम है मगर महाराष्ट्र चुनावों में इस नियम का पालन नहीं किया गया और ‘अंतिम घंटे में बीस प्रतिशत वोट पड़े’ ऐसा बता दिया गया।
    लाखों वोट अंतिम घंटे में पढ़ने के टोकन नंबर ही सुरक्षित नहीं किए गए। जहां तक ई वी एम हैक होने की बात है वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के सीएम थे बार बार हैकिंग और बेइमानी की बातें कहते थे। यह भी कहा कि विदेशों में जहां पढ़े लिखे लोग होते है बैलेट पेपर पर नाम पढ़कर वोट देते हैं। ईवीएम हैक करने का सच चिप बनाने वाला जापान और ईवीएम बनाने वाला अमेरिका ई वीं एम से चुनाव नहीं करता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी कहा है ईवीएम सरलता से हैक किया जा सकता है। चिप लगे होने से मोबाइल फीचर्स खत्म होते ही नेट प्रोवाइडर कंपनिया ऑफिस में बैठे बैठे सिम बैन कर देते हैं जिससे नेट तो क्या आउट गोइंग और इन कमिंग कॉल बंद कर दी जाती है। चिप लगे होने से ही इसरो अपने चंद्रयान को धरती पर बैठे कंट्रोल करता है। चिप के कारण हीं अभी हाल में अंतरिक्ष में यान भेजा और सकुशल धरती पर उतारा गया।
    अहम प्रश्न है कि विपक्षी सवाल चुनाव आयोग से पूछते हैं तो जवाब केंद्र सरकार क्यों देने लगती है जैसे चैनल पर ज्यों हि विपक्षी नेता किसी विषय पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो एंकर तमतमा जाते हैं और सरकार की तरफ से वकालत करने लगते हैं। अरे भाई लोकतंत्र में हर किसी सरकारी विभाग की जवाबदेही होती है तो दूसरा विभाग उत्तर कैसे दे सकता है।
    बिहार की जनता भले नीतीश कुमार और बीजेपी को वोट नहीं दे लेकिन इतनी गारंटी ली ही जा सकती है जब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती रहेगी चुनाव में पक्षपात कर आयोग सत्ता के पक्ष में करता रहेगा।गुलामी बजाता रहेगा। ऐसे में सरकार द्वारा चुने गए चुनाव आयुक्तों और ईवीएम के रहते बीजेपी को हरा पाना जनता के लिए असंभव है। वोट मत दे जनता भले ही जीतेगी तो बीजेपी ही।

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  • Mumbai: अंधेरी पुलिस के हत्थे चढ़ा बदमाश, जो राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को करता था टार्गेट

    Mumbai: अंधेरी पुलिस के हत्थे चढ़ा बदमाश, जो राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को करता था टार्गेट

    अंधेरी पुलिस ने एक ऐसे 50 वर्षीय बदमाश को गिरफ्तार किया है जो राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को टार्गेट कर उनके कीमती गहने उड़ा कर रफूचक्कर हो जाया करता था। पश्चिम बंगाल भागते हुए पुलिस ने इगतपुरी से किया गिरफ्तार। कुल 42 घटनाओं का आरोपी हुआ गिरफ्तार .. Mumbai: Andheri police caught a rogue who used to target elderly women walking on the road.

    मुंबई: राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को अपने बातों में फंसा कर उनके कीमती गहने उड़ा ले जाने वाले 50 वर्षीय मनव्वर उर्फ अब्दुल हमीद शेख को आखिरकार अंधेरी पुलिस ने इगतपुरी रेलवे स्टेशन पर नाशिक पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया है। जैसे ही आरोपी को पता चला कि पुलिस उसे ढूंढ रही है वह पश्चिम बंगाल के लिए फरार हो चुका था। खास बात यह रही कि आरोपी अपने पास कोई मोबाइल फोन भी इस्तेमाल नही करता। लेकिन मुंबई पुलिस की तकनीकी टीम एक बार फिर अनसुलझे केस को सुलझाने में कामयाब हो गई।

    कैसे बनता था शिकार ?

    अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उमेश मचिंदर ने बताया, कि आए दिन राह चलते बुजुर्गों को टार्गेट करते हुए, उन्हें बातों में उलझा कर उनके किमती सामानों को लेकर फरार होने की कई शिकायतें मिल रही थी। आखरी घटना 15 जुलाई 2025 की है। बुजुर्ग महिला की शिकायत के मुताबिक लगभग 11:50 को वह अंधेरी पूर्व के तेली गली क्रॉस रोड़ पर पैदल चल रही थी, कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे बातों में फंसाकर उसके 28 ग्राम वजनी सोने की चैन उसके गले से निकलवा लिया और जांच का बहाना बनाते हुए उसे बातों में उलझा कर वहां से फरार हो गया। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो वह व्यक्ति बरसात की छतरी लिए हुए था। जिसके कारण उसका चेहरा नजर नही आ रहा था।

    कैसे हुई आरोपी की पहचान ?

    क्राईम डिटेक्शन के जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक किशोर परकाळे ने बताया, कि छतरी के पीछे आरोपी वहां से खिसकने में कामयाब हो गया। लेकिन अगले 5 दिनों तक हमारी टीम आरोपी की शिनाख्त करते हुए बहोत सारे सीसीटीवी कैमरों की जांच की, तो पता चला कि आरोपी पुराना शातिर है। जिसके खिलाफ पहले से लगभग 40 मामले दर्ज हैं। कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है। जब उसके पते पर गए तो पता चला कि वह एक जगह नही कुर्ला पूर्व के कुरेशी नगर के सोनाजी चाल, नेहरू नगर के साहेबा बिल्डिंग और संगम सोसायटी इन तीनों कुर्ला पूर्व के इलाके में रहता है लेकिन जब पुलिस इसकी तलाश कर रही थी तो उसे भनक लग गई और वो फरार हो गया।

    आरोपी के खिलाफ पहले से 36 मामले दर्ज

    क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक विनोद पाटील ने बताया, कि आरोपी के खिलाफ पहले से बोरीवली, घाटकोपर, दिंडोशी, जोगेश्वरी, गांवदेवी, बांद्रा, मालाड़, समता नगर, मुंबई सेंट्रल, पंतनगर, भोइवाडा, सांताक्रूज़, दहिसर, नया नगर, ख़ार, नागपाडा और अंधेरी इलाके के पुलिस स्टेशनों और रेलवे पुलिस थानों मे 36 मामले दर्ज हैं। जिसमें मुंबई सेन्ट्रल और बांद्रा कोर्ट से कई मामलों मे गिरफ्तारी के वारंट जारी हो चुके हैं। ऐसे में इसका पता लगाना बहुत जरूरी हो गया था। पुलिस की टीम लगातार मुखबिरों और सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल कर रही थी। हमें पता चला कि आरोपी पश्चिम बंगाल के लिए ट्रेन पकड़ चुका है। जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और उनकी निगरानी मे नाशिक पुलिस से मदद ली गई।

    नासिका पुलिस ने ट्रेन का पता लगाकर इगतपुरी से आरोपी को हिरासत में लिया और फिर अंधेरी पुलिस को सौंप दिया गया। अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ने बताया कि चोरी के जेवरात हस्तगत कर लिए गए हैं और उसके साथ ही कुल 6 अपराध का खुलासा हुआ है। जो अंधेरी, वाकोला, सायन, बोरीवली पूर्व के कस्तूरबा पुलिस स्टेशन, वसई रेलवे स्टेशन और दादर रेलवे स्टेशन पर इसने घटना को अंजाम देकर फरार हो गया था। Mumbai: Andheri police caught a rogue who used to target elderly women walking on the road.

  • शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।

    मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।

    देश में शिक्षा का भगवाकरण

    विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।

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    शिक्षा और परीक्षा का सौदा

    सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।

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    शिक्षा पर 18% की जीएसटी

    उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।

    विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा

    इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।

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    दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education

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    शिक्षा क्षेत्र मे भेदभाव

    शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

    धर्म की राजनीति

    हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

    मानसिक गुलामी

    सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education

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    मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं

    जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।

    मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार

    तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।

    कितनी सरकारी स्कूलें हुई बंद ?

    एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।

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    स्कूलें बंद मधुशालाओं का उद्घाटन

    राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।

    सरकारी स्कूलें बंद कराने का सरकारी फरमान

    दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।

    मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला

    दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।

  • डिलीवरी बॉय ने कर दिया लिफ्ट में पेशाब, लोगों ने पिटकर किया पुलिस के हवाले

    डिलीवरी बॉय ने कर दिया लिफ्ट में पेशाब, लोगों ने पिटकर किया पुलिस के हवाले

    पार्सल लेकर आये एक ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय ने लिफ्ट में ही पेशाब कर दिया। बदबू आई तो कई निवासियों ने आरोपी को पकड़ा पिटा और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया। Delivery boy urinated in the lift, people beat him up and handed him over to the police

    न्यूज़ डेस्क
    महाराष्ट्र/पालघर:
    मुंबई से सटे विरार पश्चिम की एक रेसिडेंटल बिल्डिंग में ब्लिंकिट कंपनी के एक डिलीवरी एजेंट द्वारा लिफ्ट में पेशाब करने की शर्मनाक घटना सामने आई है। यह घटना पालघर जिले के विरार पश्चिम में सीडी गुरुदेव बिल्डिंग की है, जहां पूरी वारदात की घटना सोसायटी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।

    सीसीटीवी कैमरे मे क्या देखा?

    सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि डिलीवरी बॉय बाएं हाथ में एक पार्सल लेकर लिफ्ट के अंदर गया। इसके बाद वह कैमरे से बचने की कोशिश करते हुए पैंट की चेन खोला और लिफ्ट के सामने के गेट पर ही पेशाब करने लगा। दोपहर का समय होने के कारण सोसायटी में सन्नाटा छाया हुआ था। मौका पाकर डिलीवरी बॉय ने पार्सल दिया और वहां से निकल गया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब लिफ्ट में बदबू और गंदगी की शिकायत पर निवासियों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की। वीडियो में डिलीवरी एजेंट ब्लिंकिट की आधिकारिक जैकेट पहने हुए साफ नजर आ रहा था, तो आरोपी के खिलाफ लोगों का गुस्सा फुट पड़ा। Delivery boy urinated in the lift, people beat him up and handed him over to the police

    ब्लिंकिट के कार्यालय में हंगामा

    जैसे ही घटना की जानकारी सोसायटी के निवासियों को हुई, सब लोग मिलकर ब्लिंकिट के स्थानीय कार्यालय पहुंचे आरोपी डिलीवरी ब्वॉय को पकड़ा। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों ने उसकी पिटाई भी की, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। Delivery boy urinated in the lift, people beat him up and handed him over to the police

    सोशल मीडिया पर वायरल

    विरार पश्चिम स्थित तुलिंज पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की और आगे की जांच शुरू कर दी। फिलहाल इस मामले में ब्लिंकिट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग इस असभ्य व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

  • प्रेमीसंग पति की हत्या कर दफनाया और उपर से लगा दी टाइल्स

    प्रेमीसंग पति की हत्या कर दफनाया और उपर से लगा दी टाइल्स

    मुंबई से सटे नालासोपारा में एक पत्नी ने अपने प्रेमी संग मिलकर अपने ही पति को मौत के घाट उतार दिया है। और तो और पुलिस को चकमा देने के लिए पति को दफना कर उसके उपर टाइल्स लगवा दिया था। आरोपी फरार .. Husband murdered with lover, buried and covered with tiles

    न्यूज़ डेस्क
    महाराष्ट्र/ पालघर:
    मुंबई से सटे नालासोपारा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की मदद से अपने ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव को घर में ही दफना दिया। यह चौंकाने वाली वारदात नालासोपारा पूर्व के गंगड़ीपाड़ा इलाके में स्थित साई वेल्फेयर सोसायटी के एक चॉल में हुई है। हत्या के बाद, महिला ने अपने देवर से ही उस जगह पर टाइल्स लगवाकर शव को छिपा दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    मृतक शख्स का नाम विजय चौहान है। हत्या की आरोपी महिला का नाम गुड़िया चमन चौहान और उसके प्रेमी का नाम मोनू विश्वकर्मा बताया गया है। इस दंपती का एक 8 साल का बेटा भी है। Husband murdered with lover, buried and covered with tiles

    क्या है पूरा मामला?

    बताया जा रहा है कि मृतक विजय की पत्नी गुड़िया का मोनू से अफेयर चल रहा था और विजय, उन दोनों के अवैध रिश्ते में रुकावट बन रहा था, इसलिए दोनों ने मिलकर प्लान बनाया और बेरहमी से विजय की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने वारदात को छुपाने के लिए लाश को घर में ही गाड़ दिया। हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए महिला ने अपने देवर से उस जगह पर टाइल्स लगवाई, ताकि वे किसी की नजरों में न आए।

    जमीन की खुदाई में मिला शव

    वहीं, इस घटना के बाद जब परिवार वालों ने विजय के बारे में पूछा तो गुड़िया ने अपने पति के बारे में उन्हें लगातार गुमराह किया। कई दिन गुजर जाने के बाद परिवार के लोगों ने विजय के घर का दरवाजा तोड़ा तो उन्हें घर से बदबू आने लगी। इसके बाद उन्होंने जमीन की खुदाई की तो विजय का शव बरामद किया गया।

    मोबाइल के मैसेज ने खोला राज़

    यह घटना करीब 15 दिन पहले घटी थी लेकिन दो दिन पहले महिला के मोबाइल में कुछ संदिग्ध मैसेज मिलने के बाद पुलिस को शक हुआ। पूछताछ के दौरान इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ। लेकिन महिला फरार होने में कामयाब हो गई। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने शव को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल आरोपी महिला और उसका प्रेमी फरार है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही गिरफ्तारी की उम्मीद है।

  • व्यस्त चौराहे पर पिता-पुत्र ने ट्रैफिक पुलिस को पीटा

    व्यस्त चौराहे पर पिता-पुत्र ने ट्रैफिक पुलिस को पीटा

    नालासोपारा में एक पिता और पुत्र ने एक व्यस्त चौराहे पर दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection

    महाराष्ट्र/पालघर: वसई-विरार इलाके में ट्रैफिक पुलिस पर हमलों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं नालासोपारा में हुई एक चौंकाने वाली घटना इन दिनों सुर्खियाँ बटोर रही है। प्रगति नगर इलाके के एक व्यस्त चौराहे पर पिता और पुत्र दोनों ने मिलकर दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना का रोमांचक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और हर जगह हलचल मचा दिया है।

    दिनदहाड़े सड़क पर हमला

    जब ट्रैफ़िक पुलिस प्रगति नगर के पास एक गोलचक्कर पर अपनी नियमित ड्यूटी कर रही थे, तभी मंगेश नारकर और उसके बेटे पार्थ नारकर ने अचानक दो ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मी हनुमंत सांगले और शेष नारायण अत्रे को बीच सड़क पर पीट-पीटकर मारा गया। पिता ने पुलिसकर्मी को पकड़कर सड़क पर लिटा दिया, जिसके बाद बेटे ने उसके पेट और सीने पर लात-घूंसों से वार करना शुरू कर दिया। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection

    जैसे ही यह आम लोगों के लिए रोमांचक घटना घटी, कई नागरिक घटनास्थल पर जमा हो गए। कुछ ने पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया, जबकि कुछ ने बीच-बचाव करके स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। आखिरकार, एक अन्य पुलिस अधिकारी के दौड़कर आने पर आरोपियों को रोका गया। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection

    वजह क्या थी?

    हालाँकि घटना के पीछे का असली कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि वाहन निरीक्षण के दौरान हुई बहस ने हमले का रूप ले लिया होगा। हालाँकि, पुलिस आगे की जाँच कर रही है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।

    कानूनी कार्रवाई शुरू

    इस घटना के बाद, नालासोपारा के तुलिंज पुलिस स्टेशन में मंगेश नारकर और पार्थ नारकर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दोनों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट समेत अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

    नागरिकों का आक्रोशित, सख्त कार्रवाई की मांग

    इस घटना से स्थानीय नागरिकों में रोष व्याप्त है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद लोग पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यह सवाल भी उठाया है कि, “यदि यातायात पुलिस के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों के बारे में क्या?”