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Mumbai: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जीशान सिद्दीकी को धमकी देने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुंबई पुलिस और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है।
कहां है त्रिनिदाद और टोबैगो ?
पूरे वेस्टइंडीज में त्रिनिदाद छठे स्थान का सबसे बड़ा आईलैंड है। त्रिनिदाद और टोबैगो जो कैरिबियन सागर में स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्व में वेनेजुएला के तट के पास है। यहीं से मुंबई पुलिस ने इंटरपोल की मदद से बिहार के दरभंगा का रहने वाला आरोपी को डिटेंड कर गिरफ्तार किया है।
ईमेल से मिली थी धमकी
पुलिस के अनुसार, धमकी देने वाला बिहार के दरभंगा का रहने वाले आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद नावेद खुद को डी-कंपनी का सदस्य बताते हुए अप्रैल में जीशान को जान से मारने की धमकी दी थी और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी भरे ईमेल 19, 20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे।
बांद्रा पुलिस का एक्शन
इस मामले में जीशान सिद्दीकी ने बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया, कि आरोपी ने कई ईमेल भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी, जैसा कि उनके पिता बाबा सिद्दीकी के साथ करने की बात कही गई थी।
इंटरपोल की मदद से आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो में गिरफ्तार किया गया और फिर बुधवार को भारत डिपोर्ट कर मुंबई लाया गया है। अब आरोपी से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने धमकी देकर फिरौती वसूलने की मंशा से यह साजिश रची थी।
11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में पिछले 19 सालों से जिन 12 मुसलमानों को दोषी ठहरा कर जेल में कैद कर लिया गया था। हाईकोर्ट ने सभी को एक साथ बरी कर दिया। लेकिन इन सब के पीछे कौन हो सकता है यह अभ भी सवाल का विषय बना हुआ है।
मुंबई:2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इन धमाकों में 187 लोगों की जान गई, 800 से ज़्यादा घायल हुए। इस भयानक घटना के 19 साल बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 लोगों को बरी कर दिया, जिन्हें इन धमाकों का दोषी ठहराया गया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि बरी किए गए लोगों को वापस जेल नहीं भेजा जाएगा। अब सवाल है, कि इन 12 मुसलमानों को फंसाने का काम किसने किया था। जिसकी वजह से एक विशेष समुदाय को टार्गेट किया गया। ये सवाल हैं उन 12 लोगों में से एक मोहम्मद अली का, जिन्हें इसी मामले में बरी कर दिया गया है।
हाईकोर्ट के फैसले पर लगा रोक
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने साफ कर दिया, कि सभी आरोपी जेल से रिहा हो चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा जेल भेजने का सवाल ही नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलों पर विचार करते हुए कहा, कि हाई कोर्ट के फैसले को कानूनी मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा और उस फैसले पर रोक लगाई जाती है।
गिरफ्तार 12 लोगों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी बेगुनाही की अपील की थी। हाईकोर्ट में 10 साल केस चला फिर फैसला आया कि ये सब बेकसूर हैं। इस पूरे मामले में एक ऐसा शख्स भी था जिसने अपनी बेगुनाही की खबर सुनने से पहले ही दुनिया छोड़ दिया। बिहार के मधुबनी जिले के बसोपट्टी के रहने वाले कमाल अहमद मोहम्मद वकील अंसारी की 2021 में कोविड के दौरान जेल में ही मौत हो गई थी।
मजदूर को किया था गिरफ्तार
जब कमाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया तब उनके बेटे अब्दुल्ला अंसारी सिर्फ छह साल के थे। अब्दुल्ला कहा, ATS ने कमाल अंसारी पर पाकिस्तान में हथियारों का ट्रेनिंग लेने, भारत-नेपाल बॉर्डर के रास्ते आतंकवादियों को लाने और मुंबई के माटुंगा स्टेशन पर विस्फोटक रखने का इल्जाम लगाया था। लेकिन अब्दुल्ला बताते हैं कि उनके पिता एक मजदूर थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?
क्या अब सरकारें, पुलिस, मीडिया कमाल के परिवार से माफी मांगेगे? उसकी बदनामी के दाग को कौन धोएगा?
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को फंसाने के लिए कई हथकंडे अपनाए, जिनकी पोल RTI ने खोल दी।
गवाह नंबर 74 की झूठी गवाही: अभियोजन पक्ष के गवाह नंबर 74 ने विशेष मकोका अदालत में बताया था कि उसने एहतेशाम सिद्दीकी को चर्चगेट रेलवे स्टेशन पर एक काले बैग के साथ देखा था। इसी गवाही के आधार पर एहतेशाम को बम लगाने वाला बताया गया। लेकिन RTI से मिली जानकारी ने इस गवाह की पोल खोल दी। गवाह ने जिस अस्पताल में किसी से मिलने की बात कही थी, वहां उस नाम का कोई व्यक्ति था ही नहीं और जिस बैंक में मिलने का दावा किया था, वह व्यक्ति भी वहां नहीं था। अदालत ने इस गवाह को पुलिस का ‘स्टॉक गवाह’ करार दिया, यानी एक ऐसा गवाह जिसे पुलिस हर केस में इस्तेमाल करती है। RTI से यह भी सामने आया कि यही गवाह पुलिस के लिए चार और मामलों में भी पेश हुआ था।
पहचान में देरी पर सवाल: पुलिस ने कुछ ऐसे गवाह भी पेश किए जिन्होंने ब्लास्ट के 100 दिनों बाद आरोपियों को पहचानने की बात कही। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि कोई इतने लंबे समय बाद किसी व्यक्ति का चेहरा कैसे याद रख सकता है? यह दर्शाता है कि पुलिस असली गुनहगारों को ढूंढने के बजाय आम लोगों को बलि का बकरा बना रही थी।
स्केच गवाह का अनुपस्थित होना: आरोपी के स्केच बनाने में मदद करने वाले गवाह को ट्रायल के लिए नहीं बुलाया गया और न ही उसे अदालत में आरोपी की पहचान करने के लिए कहा गया। मामले का यह एक सबसे बड़ा लूप-होल था।
कॉपी-पेस्ट के कबूलनामे: पुलिस का केस ज़्यादातर कबूलनामों पर आधारित था, जो पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिए थे। MCOCA की धारा 18 के तहत पुलिस के सामने दिए गए कबूलनामों को कोर्ट में मान्यता देता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन कबूलनामों के आधार पर सजा देने से इंकार कर दिया, क्योंकि कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने यह भी पाया कि कई आरोपियों ने दो अलग-अलग अधिकारियों के सामने जुर्म कबूल किया था, लेकिन दोनों कबूलनामों में घटना का विवरण, यहां तक कि फुल स्टॉप और कॉमा भी हूबहू कॉपी-पेस्ट थे। कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय माना।
2015 में इसी केस में बरी हुएम अब्दुल वाहिद शेख बताते हैं कि उन्होंने “हर दिन 20-25 आरटीआई एप्लीकेशन” दायर किए, जिनमें पुलिस स्टेशनों की लॉगबुक से लेकर अस्पताल के रिकॉर्ड और हर जरूरी जानकारी मांगी गई।
19 सालों बाद सामने आया पीड़ितों का दर्द
मोहम्मद साजिद अंसारी, जो इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से थे, बताते हैं, “मेरा इलेक्ट्रॉनिक्स का बैकग्राउंड था, इसलिए इन लोगों के लिए आसान था कहना कि ये टाइमर बम बनाने के लायक है। इसी वजह से मुझे टारगेट किया गया, इन्होंने रिकवरी के तौर पर मेरे मोबाइल रिपेयरिंग इंस्टीट्यूट के जो सामान थे और जो रिपेयरिंग की इलेक्ट्रॉनिक्स की चीजें थी उसे रिकवरी में दिखाया गया। हालांकि एफएसएल रिपोर्ट के अंदर क्लियर हुआ कि कुछ भी एक्सप्लोसिव मेरे पास नहीं मिला।”
19 सालों तक इन लोगों के परिवार के साथ पुलिस, समाज, मीडिया, सरकारें, अदालत नाइंसाफी करती रहीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि इन 12 लोगों और इनके परिवार के 19 साल के दर्द का जिम्मेदार कौन है? क्या उन लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने इन 12 लोगों को फंसाया था?
एक सवाल और है, 2006 के ब्लास्ट में 187 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? उन परिवारों से क्या कहा जाएगा जिन्होंने अपनों को खोया था? वो लोग लौटकर नहीं आएंगे लेकिन उनके कातिल को हमारा प्रशासन आज तक नहीं ढूंढ पाया और ना ही कटघरे में खड़ा कर पाया, सजा तो दूर की बात हो गई।
बिना किसी आई डी और बिना किसी मतदाता से मिले ही blo द्वारा कार्यालय में बैठकर खुद ही वोटर फॉर्म भरने का कार्य कराया जाना कत्तई उचित नहीं। वेरिफिकेशन के लिए blo को हर घर जाकर वोटरों से मिलने और उनसे भारत में रहने, उनके पिता की जन्मतिथि मांगने की बात चुनाव आयोग ने की थी। जब blo किसी मतदाता से मिलेगा ही नहीं तो सत्यापन किस बात का करेगा? बहुत ही सीनियर पत्रकार अजीत अंजुम को पता था, कि किसी भी कार्यालय में बिना अनुमति लिए कैमरामैन और माइक लेकर जाने पर उन पर सरकारी कार्यवाही में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। इसीलिए वे बिना कैमरामैन और बिना माइक लिए उस कमरे में गए, जहां तमाम blo बैठे हुए मतदाताओं के सिंगल फॉर्म भर रहे थे। मजेदार बात यह हुई, कि blo फॉर्म पर सिर्फ नाम लिख रहे थे। मतदाता के पिता या पति का नाम नहीं लिख रहे थे। फिर कैसे पहचान होगी कि वोट देने वाला सही है या नही? इससे भी बड़ी मजेदार बात यह, कि जेडीएस के बड़े नेता और नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके लालू यादव के बेटे की पत्नी का नाम काट दिया गया है। एक महिला के नाम पर बने वोटर आईडी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो लगा दी है। पत्नी शादी होने के बाद जब ससुराल आती है तो ससुराल की सदस्य बन जाती है। नाम इसलिए काटा गया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली भारत की राजधानी और लालू यादव का पूरा परिवार बिहार के पटना में रहता है। बात वोटर लिस्ट बनाने की तो blo बिना किसी आई डी के सिंगल फॉर्म भरे और उसमें केवल मतदाता का नाम हो पिता या पति का नाम नहीं हो तो वह व्यक्ति वोट कैसे देगा? अब यही सच पुराने ख्यात पत्रकार अजीत अंजुम ने अपनी मोबाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दी। जिस पर देश भर से प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक है। चुनाव आयोग की तरह बिहार पुलिस भी सरकारी दबाव में है जिसने बेवजह पत्रकार अजीत अंजुम द्वारा मतदाता सूची को ऑफिस में भरे जाने का सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। यानी सरकार कुछ भी कराए उसे अधिकार है। लेकिन अगर पत्रकार गलतियों को देश की जनता के सामने लाए तो गुनहगार हो गया। चुनाव आयुक्त बदल देने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरकार यदि जिसे आयुक्त बनाएगी तो इसी शर्त के साथ कि वह सरकार के कहे अनुसार कार्य करे। पिछले दस साल से चुनाव आयोग के द्वारा पक्षपाती रवैया अपनाए जाने का विरोध देश भर में हो रहा है। क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद प्रसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17 भरता है जिसमें कुल मतदाता स्त्री पुरुष और कुल पड़े हुए मत की गिनती स्त्री पुरुष अलग अलग बताना पड़ता है। बैलेट बॉक्स था या अब ई वी एम दोनों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसी शाम या रात जिला मुख्यालय पर बॉक्स और फॉर्म के साथ तीनों वोटर लिस्ट लिफाफे में भरकर जमा करना होता है। दूसरे दिन ही केंद्रीय चुनाव आयोग पड़े हुए मतों का प्रतिशत बता सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत तीन अन्य चरण के मतदान होने के बाद बताने में तेरह दिन लगाए। फिर दस दिनों में क्या क्या करता रहा चुनाव आयोग? आयोग की गड़बड़ी छुपाने के लिए जल्द ही सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट करने का नियम मनमाने ढंग से बना दिया गया ताकि कोर्ट में सबूत पेश करना नहीं पड़े । बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए चुनाव आयोग बेशक बेइमानी करता है। एक ही वोटर आईडी का यूनिक नंबर कई कई राज्यों में वोटर कैसे बनाया जाता है यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है। चुनाव के दिन शाम पांच बजे मेन गेट बंद कर पीछे से शुरू करके कूपन नंबर एक से दिए जाने का नियम है मगर महाराष्ट्र चुनावों में इस नियम का पालन नहीं किया गया और ‘अंतिम घंटे में बीस प्रतिशत वोट पड़े’ ऐसा बता दिया गया। लाखों वोट अंतिम घंटे में पढ़ने के टोकन नंबर ही सुरक्षित नहीं किए गए। जहां तक ई वी एम हैक होने की बात है वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के सीएम थे बार बार हैकिंग और बेइमानी की बातें कहते थे। यह भी कहा कि विदेशों में जहां पढ़े लिखे लोग होते है बैलेट पेपर पर नाम पढ़कर वोट देते हैं। ईवीएम हैक करने का सच चिप बनाने वाला जापान और ईवीएम बनाने वाला अमेरिका ई वीं एम से चुनाव नहीं करता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी कहा है ईवीएम सरलता से हैक किया जा सकता है। चिप लगे होने से मोबाइल फीचर्स खत्म होते ही नेट प्रोवाइडर कंपनिया ऑफिस में बैठे बैठे सिम बैन कर देते हैं जिससे नेट तो क्या आउट गोइंग और इन कमिंग कॉल बंद कर दी जाती है। चिप लगे होने से ही इसरो अपने चंद्रयान को धरती पर बैठे कंट्रोल करता है। चिप के कारण हीं अभी हाल में अंतरिक्ष में यान भेजा और सकुशल धरती पर उतारा गया। अहम प्रश्न है कि विपक्षी सवाल चुनाव आयोग से पूछते हैं तो जवाब केंद्र सरकार क्यों देने लगती है जैसे चैनल पर ज्यों हि विपक्षी नेता किसी विषय पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो एंकर तमतमा जाते हैं और सरकार की तरफ से वकालत करने लगते हैं। अरे भाई लोकतंत्र में हर किसी सरकारी विभाग की जवाबदेही होती है तो दूसरा विभाग उत्तर कैसे दे सकता है। बिहार की जनता भले नीतीश कुमार और बीजेपी को वोट नहीं दे लेकिन इतनी गारंटी ली ही जा सकती है जब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती रहेगी चुनाव में पक्षपात कर आयोग सत्ता के पक्ष में करता रहेगा।गुलामी बजाता रहेगा। ऐसे में सरकार द्वारा चुने गए चुनाव आयुक्तों और ईवीएम के रहते बीजेपी को हरा पाना जनता के लिए असंभव है। वोट मत दे जनता भले ही जीतेगी तो बीजेपी ही।
मुंबई: राह चलती बुजुर्ग महिलाओं को अपने बातों में फंसा कर उनके कीमती गहने उड़ा ले जाने वाले 50 वर्षीय मनव्वर उर्फ अब्दुल हमीद शेख को आखिरकार अंधेरी पुलिस ने इगतपुरी रेलवे स्टेशन पर नाशिक पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया है। जैसे ही आरोपी को पता चला कि पुलिस उसे ढूंढ रही है वह पश्चिम बंगाल के लिए फरार हो चुका था। खास बात यह रही कि आरोपी अपने पास कोई मोबाइल फोन भी इस्तेमाल नही करता। लेकिन मुंबई पुलिस की तकनीकी टीम एक बार फिर अनसुलझे केस को सुलझाने में कामयाब हो गई।
कैसे बनता था शिकार ?
अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उमेश मचिंदर ने बताया, कि आए दिन राह चलते बुजुर्गों को टार्गेट करते हुए, उन्हें बातों में उलझा कर उनके किमती सामानों को लेकर फरार होने की कई शिकायतें मिल रही थी। आखरी घटना 15 जुलाई 2025 की है। बुजुर्ग महिला की शिकायत के मुताबिक लगभग 11:50 को वह अंधेरी पूर्व के तेली गली क्रॉस रोड़ पर पैदल चल रही थी, कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे बातों में फंसाकर उसके 28 ग्राम वजनी सोने की चैन उसके गले से निकलवा लिया और जांच का बहाना बनाते हुए उसे बातों में उलझा कर वहां से फरार हो गया। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो वह व्यक्ति बरसात की छतरी लिए हुए था। जिसके कारण उसका चेहरा नजर नही आ रहा था।
कैसे हुई आरोपी की पहचान ?
क्राईम डिटेक्शन के जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक किशोर परकाळे ने बताया, कि छतरी के पीछे आरोपी वहां से खिसकने में कामयाब हो गया। लेकिन अगले 5 दिनों तक हमारी टीम आरोपी की शिनाख्त करते हुए बहोत सारे सीसीटीवी कैमरों की जांच की, तो पता चला कि आरोपी पुराना शातिर है। जिसके खिलाफ पहले से लगभग 40 मामले दर्ज हैं। कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है। जब उसके पते पर गए तो पता चला कि वह एक जगह नही कुर्ला पूर्व के कुरेशी नगर के सोनाजी चाल, नेहरू नगर के साहेबा बिल्डिंग और संगम सोसायटी इन तीनों कुर्ला पूर्व के इलाके में रहता है लेकिन जब पुलिस इसकी तलाश कर रही थी तो उसे भनक लग गई और वो फरार हो गया।
क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक विनोद पाटील ने बताया, कि आरोपी के खिलाफ पहले से बोरीवली, घाटकोपर, दिंडोशी, जोगेश्वरी, गांवदेवी, बांद्रा, मालाड़, समता नगर, मुंबई सेंट्रल, पंतनगर, भोइवाडा, सांताक्रूज़, दहिसर, नया नगर, ख़ार, नागपाडा और अंधेरी इलाके के पुलिस स्टेशनों और रेलवे पुलिस थानों मे 36 मामले दर्ज हैं। जिसमें मुंबई सेन्ट्रल और बांद्रा कोर्ट से कई मामलों मे गिरफ्तारी के वारंट जारी हो चुके हैं। ऐसे में इसका पता लगाना बहुत जरूरी हो गया था। पुलिस की टीम लगातार मुखबिरों और सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल कर रही थी। हमें पता चला कि आरोपी पश्चिम बंगाल के लिए ट्रेन पकड़ चुका है। जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और उनकी निगरानी मे नाशिक पुलिस से मदद ली गई।
नासिका पुलिस ने ट्रेन का पता लगाकर इगतपुरी से आरोपी को हिरासत में लिया और फिर अंधेरी पुलिस को सौंप दिया गया। अंधेरी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ने बताया कि चोरी के जेवरात हस्तगत कर लिए गए हैं और उसके साथ ही कुल 6 अपराध का खुलासा हुआ है। जो अंधेरी, वाकोला, सायन, बोरीवली पूर्व के कस्तूरबा पुलिस स्टेशन, वसई रेलवे स्टेशन और दादर रेलवे स्टेशन पर इसने घटना को अंजाम देकर फरार हो गया था। Mumbai: Andheri police caught a rogue who used to target elderly women walking on the road.
भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।
मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।
देश में शिक्षा का भगवाकरण
विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।
शिक्षा और परीक्षा का सौदा
सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।
विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा
इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education
शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
धर्म की राजनीति
हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education
जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।
मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार
तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।
एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।
दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।
मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला
दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।
न्यूज़ डेस्क महाराष्ट्र/पालघर: मुंबई से सटे विरार पश्चिम की एक रेसिडेंटल बिल्डिंग में ब्लिंकिट कंपनी के एक डिलीवरी एजेंट द्वारा लिफ्ट में पेशाब करने की शर्मनाक घटना सामने आई है। यह घटना पालघर जिले के विरार पश्चिम में सीडी गुरुदेव बिल्डिंग की है, जहां पूरी वारदात की घटना सोसायटी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
सीसीटीवी कैमरे मे क्या देखा?
सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि डिलीवरी बॉय बाएं हाथ में एक पार्सल लेकर लिफ्ट के अंदर गया। इसके बाद वह कैमरे से बचने की कोशिश करते हुए पैंट की चेन खोला और लिफ्ट के सामने के गेट पर ही पेशाब करने लगा। दोपहर का समय होने के कारण सोसायटी में सन्नाटा छाया हुआ था। मौका पाकर डिलीवरी बॉय ने पार्सल दिया और वहां से निकल गया।
विरार पश्चिम स्थित तुलिंज पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की और आगे की जांच शुरू कर दी। फिलहाल इस मामले में ब्लिंकिट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग इस असभ्य व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।
मुंबई से सटे नालासोपारा में एक पत्नी ने अपने प्रेमी संग मिलकर अपने ही पति को मौत के घाट उतार दिया है। और तो और पुलिस को चकमा देने के लिए पति को दफना कर उसके उपर टाइल्स लगवा दिया था। आरोपी फरार .. Husband murdered with lover, buried and covered with tiles
न्यूज़ डेस्क महाराष्ट्र/ पालघर: मुंबई से सटे नालासोपारा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की मदद से अपने ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव को घर में ही दफना दिया। यह चौंकाने वाली वारदात नालासोपारा पूर्व के गंगड़ीपाड़ा इलाके में स्थित साई वेल्फेयर सोसायटी के एक चॉल में हुई है। हत्या के बाद, महिला ने अपने देवर से ही उस जगह पर टाइल्स लगवाकर शव को छिपा दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
बताया जा रहा है कि मृतक विजय की पत्नी गुड़िया का मोनू से अफेयर चल रहा था और विजय, उन दोनों के अवैध रिश्ते में रुकावट बन रहा था, इसलिए दोनों ने मिलकर प्लान बनाया और बेरहमी से विजय की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने वारदात को छुपाने के लिए लाश को घर में ही गाड़ दिया। हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए महिला ने अपने देवर से उस जगह पर टाइल्स लगवाई, ताकि वे किसी की नजरों में न आए।
वहीं, इस घटना के बाद जब परिवार वालों ने विजय के बारे में पूछा तो गुड़िया ने अपने पति के बारे में उन्हें लगातार गुमराह किया। कई दिन गुजर जाने के बाद परिवार के लोगों ने विजय के घर का दरवाजा तोड़ा तो उन्हें घर से बदबू आने लगी। इसके बाद उन्होंने जमीन की खुदाई की तो विजय का शव बरामद किया गया।
मोबाइल के मैसेज ने खोला राज़
यह घटना करीब 15 दिन पहले घटी थी लेकिन दो दिन पहले महिला के मोबाइल में कुछ संदिग्ध मैसेज मिलने के बाद पुलिस को शक हुआ। पूछताछ के दौरान इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ। लेकिन महिला फरार होने में कामयाब हो गई। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने शव को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल आरोपी महिला और उसका प्रेमी फरार है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही गिरफ्तारी की उम्मीद है।
मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवनी पुलिस थाने में एक चौंकाने वाली घटना हुई है। एक मजदूर ने अपने दोस्त की मदद से 15 साल की एक लड़की और उसकी दो छोटी बहनों का अपहरण कर लिया, क्योंकि नाबालिग ने उसके साथ भागने से इनकार कर दिया था। अपहरण के मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरपफ्तार कर लिया है और लड़कियों को 12 घंटे के भीतर तीनों बच्चियों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया है। मालवनी पुलिस मामले की और अधिक पड़ताल कर रही है।
बिहर के हैं दोनो मजबूर
गिरपत्तार आरोपियों की पहचान 18 वर्षीय हसनत रजा जमशेद आलम और 18 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल कलाम रहसूद्दीन शेख के रूप में हुई है। दोनों किशोर लड़के मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। मुंबई के मलाड़ पश्चिम, मालवनी इलाके में मज़दूरी करते हैं। अपहरण बच्चियों की उम्र क्रमशः 15 साल, 7 साल और 11 महीने की है। तीनों बच्चियाँ अपनी मँ के साथ मार्वे रोड के खारोड़ी इलाके में रहती हैं। उनकी माँ परिवार का पालन-पोषण करने के लिए एक बार में काम करती हैं।
आरोपी को हो गया प्यार
वहीं पास की एक कंस्ट्रव्शन साइट पर काम करने वाले आलम को एक 15 साल की लड़की से प्यार हो गया। आलम ने उसे अपना फोन दे दिया और दोनों व्हाद्सएप पर चैट करने लगे। लड़की की माँ को इसकी भनक तक नहीं लगी। बुधवार को माँ रोज़ की तरह घर बंद कर काम पर चली गई। लेकिन आधी रात के आसपास जब वह घर लौटी, तो उसने घर के ताले टूटे हुए और अपनी तीनों बेटियों को गायब पाया। घबराई हुई माँ ने अपने पड़ोसियों को सारी बात बताई। पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को सुचना दी। Mumbai: Malvani Police rescued three minor girls from kidnappers in 12 hours.
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत लापता लड़कियों की तलाश शुरू कर दी। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि बड़ी लड़की आलम के संपर्क में थी, जो खुद भी लापता है। इसके बाद पुलिस ने आलम के दोस्त मोहम्मद को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी को आज अदालत में पेश किया जाएगा। Mumbai: Malvani Police rescued three minor girls from kidnappers in 12 hours.
वसई रेलवे पुलिस ने पहचाना
गुरुवार सुबह लड़कियों की तस्वीरें वायरल होने के बाद उन्हें वसई सटेशन पर पाया गया। वसई रेलवे पुलिस ने इसकी सूचना मालवनी पुलिस को दी इसके बाद उन्हें मालवनी पुलिस को सौप दिया। पूछताछ के दौरान, आलम ने कबूल किया कि वह 15 साल की लड़की से प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था। आलम ने उसे अपने साथ भाग कर शादी करने के लिए कहा था। हालॉकि, लड़की ने यह कहते हुए भागने से इनकार कर दिया कि वह अपनी दो छोटी बहनों को घर में अकेला नहीं छोड़ सकती। पुलिस ने बताया कि इसके बाद आलम ने तीनों को अपने साथ ले जाने का फैसला किया।
महाराष्ट्र/पालघर: वसई-विरार इलाके में ट्रैफिक पुलिस पर हमलों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं नालासोपारा में हुई एक चौंकाने वाली घटना इन दिनों सुर्खियाँ बटोर रही है। प्रगति नगर इलाके के एक व्यस्त चौराहे पर पिता और पुत्र दोनों ने मिलकर दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना का रोमांचक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और हर जगह हलचल मचा दिया है।
दिनदहाड़े सड़क पर हमला
जब ट्रैफ़िक पुलिस प्रगति नगर के पास एक गोलचक्कर पर अपनी नियमित ड्यूटी कर रही थे, तभी मंगेश नारकर और उसके बेटे पार्थ नारकर ने अचानक दो ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मी हनुमंत सांगले और शेष नारायण अत्रे को बीच सड़क पर पीट-पीटकर मारा गया। पिता ने पुलिसकर्मी को पकड़कर सड़क पर लिटा दिया, जिसके बाद बेटे ने उसके पेट और सीने पर लात-घूंसों से वार करना शुरू कर दिया। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection
जैसे ही यह आम लोगों के लिए रोमांचक घटना घटी, कई नागरिक घटनास्थल पर जमा हो गए। कुछ ने पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया, जबकि कुछ ने बीच-बचाव करके स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। आखिरकार, एक अन्य पुलिस अधिकारी के दौड़कर आने पर आरोपियों को रोका गया। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection
हालाँकि घटना के पीछे का असली कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि वाहन निरीक्षण के दौरान हुई बहस ने हमले का रूप ले लिया होगा। हालाँकि, पुलिस आगे की जाँच कर रही है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई शुरू
इस घटना के बाद, नालासोपारा के तुलिंज पुलिस स्टेशन में मंगेश नारकर और पार्थ नारकर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दोनों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट समेत अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों का आक्रोशित, सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना से स्थानीय नागरिकों में रोष व्याप्त है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद लोग पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यह सवाल भी उठाया है कि, “यदि यातायात पुलिस के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों के बारे में क्या?”
मुंबई: Bigg Boss रियलिटी शो से फेमस हुई टेलीविजन एक्ट्रेस कशिश कपूर के घर पर चोरी की वारदात हुई है। कशिश ने अपने घर के नौकर पर 4.5 लाख रुपये नकद चोरी करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद से आरोपी नौकर फरार बताया जा रहा है। अंधेरी पश्चिम की घटना में मुंबई पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। Servant absconded after stealing lakhs from Bigg Boss fame actress’ house
पुलिस ने क्या कहा?
अंबोली पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद कोकाटे ने बताया कि अंधेरी के आज़ाद नगर में वीरा देसाई रोड स्थित न्यू अंबिवली सोसाइटी में रहने वाली एक्ट्रेस कशिश कपूर के घर चोरी हुई है। उन्होंने सचिन कुमार चौधरी नामक अपने नौकर पर चोरी का आरोप लगाया है। कशिश का कहना है कि चौधरी वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर लिया है और जांच हो रही है। उन्होंने कहा, कि लोकल पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की एक स्पेशल टीम भी फरार नौकर की तलाश में जुटी है। Servant absconded after stealing lakhs from Bigg Boss fame actress’ house
नौकर ने पूरे पैसे नहीं चुराए
शिकायत के मुताबिक कशिश कपूर ने अपनी अलमारी के एक दराज में 7 लाख रुपये नकद रखे थे। 9 जुलाई को जब उन्होंने बिहार में अपनी माँ को भेजने के लिए कुछ पैसे निकालने के लिए अलमारी खोली तो उन्हें पता चला कि अलमारी में केवल 2.5 लाख रुपये ही बचे थे। बाकी 4.5 लाख रुपये गायब थे। Servant absconded after stealing lakhs from Bigg Boss fame actress’ house
घर में पूछताछ करने पर नौकर सचिन कुमार घबरा गया। जब कशिश कपूर ने उसकी जेब चेक करने की कोशिश की तो उसने मना कर दिया और जल्द ही 50,000 रुपये नकद लेकर घर से भाग गया। इस घटना के बाद एक्ट्रेस को शक हुआ कि बाकी पैसे भी उसी ने चुराए हैं। कशिश कपूर ने तुरंत अंबोली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। Servant absconded after stealing lakhs from Bigg Boss fame actress’ house
कौन हैं कशिश कपूर ?
कशिश कपूर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया की रहने वाली हैं। उन्होंने कई टेलीविजन शो में काम किया है और सुपरस्टार सलमान खान की रियलिटी शो बिग बॉस की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं। वहीं आरोपी सचिन कुमार पिछले पांच महीनों से कशिश कपूर के यहां काम कर रहा था। वह रोज़ाना सुबह 11:30 बजे ड्यूटी पर आता और अपना काम पूरा करने के बाद दोपहर 1 बजे तक चला जाता था। Servant absconded after stealing lakhs from Bigg Boss fame actress’ house