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मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे समय रहते उन्होंने राज ठाकरे की हत्या की साजिश का पर्दाफाश किया और उनकी जान बचाई।
डिजिटल डेस्क मुंबई:मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की हत्या की साजिश को नाकाम किया था।
🎯 ‘कोंकण टूर’ के दौरान थी प्लानिंग
शर्मा ने बताया कि रूटीन सर्विलांस के दौरान उन्हें यह जानकारी मिली कि राज ठाकरे को उनके आगामी कोंकण दौरे के दौरान निशाना बनाया जा सकता है। मामला बेहद गंभीर था, इसलिए उन्होंने तुरंत तत्कालीन जॉइंट पुलिस कमिश्नर मीरा बोरवणकर को अलर्ट किया।
सूचना मिलते ही पुलिस ने राज ठाकरे को ब्रीफ किया और उन्हें दौरा रद्द करने की सलाह दी। 👉 नतीजा यह रहा कि पूरा टूर कैंसिल हो गया और हत्या की साजिश नाकाम हो गई।
प्रदीप शर्मा ने यह भी याद किया कि साल 2003 में मुलुंड ट्रेन ब्लास्ट केस की जांच के दौरान पाकिस्तानी और कश्मीरी आतंकियों ने बालासाहेब ठाकरे के मातोश्री निवास पर हमला करने की प्लानिंग की थी। शर्मा खुद उस एनकाउंटर का हिस्सा थे जिसमें तीन आतंकी ढेर हुए।
👮♂️ पुलिस अधिकारियों की चुनौतियाँ
प्रदीप शर्मा के मुताबिक, ऐसे मामलों में
विजिलेंस (निगरानी)
टाइमली इंटेलिजेंस
और सीनियर अफसरों के साथ कॉर्डिनेशन सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. राज ठाकरे पर हमला कब प्लान किया गया था? 👉 प्रदीप शर्मा के मुताबिक, यह प्लानिंग उनके कोंकण दौरे के दौरान की गई थी।
Q2. किसने साजिश का खुलासा किया? 👉 मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने सर्विलांस के दौरान यह जानकारी जुटाई।
Q3. क्या पहले भी ठाकरे परिवार को धमकी मिली थी? 👉 हाँ, 2003 में आतंकी संगठन ने बालासाहेब ठाकरे के मातोश्री निवास को टारगेट करने की साजिश रची थी।
Q4. इस खुलासे का ज़िक्र कहाँ हुआ? 👉 प्रदीप शर्मा ने यह खुलासा NDTV मराठी के इंटरव्यू में किया।
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक सुनील प्रभु ने कपात सुझाव दिए थे, जिनका समय पर जवाब न मिलने पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर प्रशासन की उदासीनता पर नाराज़गी जताई।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के पावसाली (मानसून) अधिवेशन में शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने नियम 256 के तहत नगरविकास विभाग से जुड़े कुल 8 कटौती सुझाव पेश किए थे। ये सुझाव मालाड पूर्व दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर आधारित थे और सार्वजनिक जनहित के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे थे।
संसदीय प्रथा के अनुसार, ऐसे सुझावों पर एक महीने के भीतर सरकार की तरफ से लिखित जवाब मिलना ज़रूरी होता है। लेकिन अधिवेशन खत्म हुए पूरे दो महीने बीत जाने के बाद भी नगरविकास विभाग ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी
सुनील प्रभु ने इस लापरवाही पर विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि अगर समय पर जवाब मिलता, तो सदस्य संबंधित मुद्दों पर फॉलो-अप कर जनता को न्याय दिला सकते।
विधानसभा अध्यक्ष ने पहले भी कई बार इस पर निर्देश दिए हैं कि कटौती सुझावों के जवाब समय पर दिए जाएं, लेकिन प्रशासन की तरफ से इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
कटौती सुझावों का महत्व
ये सुझाव नगरविकास विभाग की योजनाओं और कामों से सीधे जुड़े हुए हैं।
दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दे इसमें शामिल हैं।
समय पर कार्रवाई होती तो स्थानीय जनता को राहत और पारदर्शिता मिल सकती थी।
प्रभु का कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और इससे जनता का विश्वास भी कमजोर होता है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि संबंधित विभाग को सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
❓ FAQ सेक्शन
Q1. कटौती सुझाव क्या होते हैं? 👉 विधानसभा में विपक्षी सदस्यों को बजट की विभिन्न मांगों में कटौती सुझाने का अधिकार होता है, जिन्हें कटौती सुझाव कहा जाता है।
Q2. इन सुझावों पर सरकार को जवाब कब देना होता है? 👉 संसदीय प्रथा के अनुसार, एक महीने के भीतर संबंधित विभाग की ओर से लिखित जवाब मिलना अनिवार्य है।
Q3. सुनील प्रभु ने कितने कटौती सुझाव पेश किए थे? 👉 कुल 8 कटौती सुझाव, जो नगरविकास विभाग और दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े थे।
Q4. अब तक प्रशासन का रुख कैसा रहा है? 👉 दो महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई लिखित जवाब नहीं दिया गया है।
सलमान खान अपनी अपकमिंग फिल्म Battle of Galwan की शूटिंग लद्दाख में कर रहे थे, जहां ठंड और ऑक्सीजन की कमी के बीच उन्हें हल्की चोट लग गई। अब वह मुंबई लौट आए हैं और आराम करने के बाद फिल्म के अगले शेड्यूल में हिस्सा लेंगे।
मुंबई: बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खानइन दिनों अपनी बहुचर्चित फिल्म बैटल ऑफ गलवान की शूटिंग कर रहे हैं। यह फिल्म 2020 के भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित है और इसका निर्देशन अपूर्व लखिया कर रहे हैं।
फिल्म का पहला शेड्यूल लद्दाख की बर्फीली वादियों में रखा गया था, जहां मौसम बेहद सख्त और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियां थीं।
एक्शन सीन के दौरान लगी चोट
शूटिंग के दौरान सलमान खान को हल्की चोट आई। हालांकि, उन्होंने शूटिंग बीच में छोड़ी नहीं और पूरा शेड्यूल पूरा किया। एक टीम मेंबर ने बताया – “सलमान भाई ने हर सीन पूरे जोश और समर्पण के साथ किया। मौसम कितना भी खराब रहा हो, उन्होंने कभी बहाना नहीं बनाया।”
45 दिन का शेड्यूल, सलमान रहे 15 दिन मौजूद
इस लद्दाख शेड्यूल को 45 दिनों तक चलाया गया। इसमें सलमान लगभग 15 दिन सेट पर मौजूद रहे। उन्होंने ज़्यादातर एक्शन सीन खुद किए, जिससे बाकी टीम भी मोटिवेट हुई।
मुंबई लौटे सलमान, अगला शेड्यूल जल्द
अब सलमान खान मुंबई लौट आए हैं और यहां थोड़ी देर आराम करेंगे। अगले हफ्ते से फिल्म का दूसरा शेड्यूल शुरू होगा, जिसमें मुख्य रूप से इमोशनल और ड्रामेटिक सीन शूट किए जाएंगे।
फिल्म का मोशन पोस्टर पहले ही रिलीज़ हो चुका है, जिसमें सलमान खान का खून से सना चेहरा और तेज़ नज़रें काफी चर्चा में हैं। हालांकि, फिल्म की रिलीज़ डेट अब तक अनाउंस नहीं की गई है।
फिल्मों के साथ-साथ सलमान खान टीवी शो बिग बॉस 19 भी होस्ट कर रहे हैं। लद्दाख शेड्यूल के दौरान उन्होंने कुछ एपिसोड मिस किए, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी वह फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स में अच्छा बैलेंस बना रहे हैं।
फैंस की उम्मीदें
सलमान खान के डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को देखते हुए कहा जा रहा है कि बैटल ऑफ गलवान उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में से एक साबित हो सकती है। फैंस बेसब्री से इसके अगले शेड्यूल और रिलीज़ डेट का इंतजार कर रहे हैं।
❓ FAQ Section
Q1. सलमान खान को चोट कैसे लगी? 👉 लद्दाख में बैटल ऑफ गलवान की शूटिंग के दौरान एक्शन सीन करते वक्त उन्हें हल्की चोट लगी।
Q2. क्या शूटिंग रोकी गई थी? 👉 नहीं, सलमान खान ने चोट लगने के बाद भी पूरा शेड्यूल पूरा किया।
Q3. अगला शेड्यूल कब होगा? 👉 फिल्म का दूसरा शेड्यूल मुंबई में अगले हफ्ते शुरू होगा।
Q4. फिल्म का निर्देशन कौन कर रहा है? 👉 बैटल ऑफ गलवान का निर्देशन अपूर्व लखिया कर रहे हैं।
Q5. फिल्म की रिलीज़ डेट क्या है? 👉 अभी तक फिल्म की रिलीज़ डेट आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है।
मुंबई सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में फेरीवालों पर हो रही पुलिस कार्रवाई और भारी जुर्माने के खिलाफ सामाजिक संगठनों ने मंत्रालय में अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों ने इस मुद्दे को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठाने का भरोसा दिलाया।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में फुटपाथ पर रोज़ी-रोटी कमाने वाले फेरीवालों पर बार-बार की जा रही कार्रवाई को लेकर सामाजिक संगठनों ने आवाज़ बुलंद की है। फेरीवालों का कहना है कि मुंबई पुलिस अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग कर उनसे हजारों रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। इसी मुद्दे पर 18 सितंबर 2025 को मंत्रालय में कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
🚶♂️ फेरीवालों का संघर्ष और परेशानी
मुंबई महानगर और उपनगरों में हज़ारों लोग फेरी लगाकर अपना पेट पालते हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा रोज़ाना किए जाने वाले छापों और कार्रवाई के कारण इनकी ज़िंदगी मुश्किल हो गई है।
एक ही फेरीवाले पर ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है।
कई बार दिन में दो-दो बार भी जुर्माना वसूला जाता है।
कई पुलिस कर्मियों पर धारा 102, 115 और 117 का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।
🏢 मंत्रालय में हुआ प्रतिनिधिमंडल
इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने के लिए महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन सहित कई संगठन एक साथ आए। बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख लोग:
कर्नल प्रकाश रेड्डी
श्री मिलिंद ताम्बड़े
कर्नल सुरेश सावंत
शांताराम जाधव
कर्नल अखिलेश गौड़
इन सभी ने मिलकर फेरीवालों पर हो रहे अन्याय की विस्तृत जानकारी दी और अधिकारियों को ठोस सबूत भी दिखाए।
संगठनों ने मंत्रालयीन अधिकारियों को जो ज्ञापन सौंपा, उसमें मुख्य रूप से यह मुद्दे उठाए गए:
पुलिस द्वारा धारा 102, 115 और 117 का दुरुपयोग।
अनुचित और भारी जुर्माना, जिससे फेरीवालों की रोज़ी-रोटी पर असर।
पुलिसकर्मियों द्वारा एक ही दिन में बार-बार जुर्माना लगाने की घटनाएँ।
गरीब और मेहनतकश तबके पर आर्थिक बोझ।
स्थायी समाधान की ज़रूरत ताकि फेरीवाले सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
⚖️ अधिकारियों की प्रतिक्रिया
मंत्रालय के उप सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुना।
उन्होंने आश्वासन दिया कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा।
अधिकारियों ने माना कि जुर्माना लगाने की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियाँ हो सकती हैं।
आगे की कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है।
🗣️ संगठनों की मांग
संगठनों ने साफ कहा कि:
फेरीवालों को रोज़ परेशान करने का सिलसिला बंद होना चाहिए।
मुंबई पुलिस अधिनियम में बदलाव कर फेरीवालों के लिए अलग गाइडलाइन बने।
पुलिस और स्थानीय निकायों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर निगरानी समिति बने।
📊 फेरीवालों की संख्या और अहमियत
सिर्फ मुंबई में अनुमानित 2.5 से 3 लाख फेरीवाले रोज़ाना काम करते हैं।
ये छोटे कारोबार शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।
आम जनता को सस्ता सामान और रोज़मर्रा की ज़रूरतें उपलब्ध कराते हैं।
फेरीवालों का कहना है कि अगर उनकी सुरक्षा और कामकाज सुनिश्चित हो तो वे भी टैक्स और रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार हैं।
🛑 लगातार कार्रवाई का असर
फेरीवालों के परिवारों पर आर्थिक संकट।
बच्चों की पढ़ाई पर असर।
छोटे-छोटे कर्ज़ चुकाना मुश्किल।
रोज़ कमाने-खाने वालों की रोज़ी-रोटी खतरे में।
🚨 नतीजा और आगे की राह
यह मुलाकात फेरीवालों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है। अगर विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा होती है और ठोस कदम उठाए जाते हैं तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।
❓ FAQ – मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई और मंत्रालय को सौंपा गया ज्ञापन
Q1. फेरीवालों पर बार-बार कार्रवाई क्यों की जा रही है? 👉 स्थानीय निकाय और पुलिस प्रशासन मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 का हवाला देकर कार्रवाई करते हैं। इन धाराओं के तहत फुटपाथ अतिक्रमण और असुविधा को रोकने के लिए प्रावधान है, लेकिन सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इन धाराओं का दुरुपयोग हो रहा है।
Q2. एक फेरीवाले पर कितना जुर्माना लगाया जाता है? 👉 फेरीवालों पर नियमित रूप से ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है। कुछ मामलों में तो एक ही दिन में दो-दो बार चालान काटा जाता है।
Q3. इस मुद्दे पर मंत्रालय में किन-किन संगठनों ने ज्ञापन सौंपा? 👉 महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन समेत कई संगठन शामिल रहे।
Q4. सरकार की ओर से क्या आश्वासन मिला है? 👉 मंत्रालयीन अधिकारियों और उप सचिव ने कहा है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में इसे उठाने का प्रयास किया जाएगा।
Q5. फेरीवालों की मुख्य मांगें क्या हैं? 👉
अनुचित और बार-बार किए जा रहे जुर्माने को रोका जाए।
मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 के दुरुपयोग पर रोक लगे।
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत फेरीवालों को कानूनी सुरक्षा मिले।
नगर पालिका और पुलिस की ओर से पारदर्शी और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाई जाए।
IMA महाराष्ट्र ने 18 सितंबर को 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की इजाज़त देने के सरकार के फैसले पर एलोपैथिक डॉक्टर भड़क उठे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
डिजिटल डेस्क मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में मेडिकल सेक्टर में बवाल मचा हुआ है। IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से जुड़े लगभग 1.8 लाख एलोपैथिक डॉक्टरों ने 18 सितंबर को 24 घंटे की हड़ताल करने का ऐलान किया है। वजह? सरकार का वो फैसला जिससे होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाज़त दी जा रही है।
📚 क्या है CCMP कोर्स और इसका मतलब?
प्रदर्शन की तस्वीर
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को निर्देश दिया है कि वो उन होम्योपैथिक डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करे जिन्होंने CCMP यानी Certificate Course in Modern Pharmacology को पूरा किया है। ये एक 1 साल का कोर्स है, जिसके बाद होम्योपैथिक डॉक्टर कुछ चुने हुए केसों में एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे।
😠 एलोपैथिक डॉक्टर क्यों हैं नाराज़?
IMA महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम के मुताबिक, ये फैसला न सिर्फ मेडिकल फील्ड की क्वालिटी को गिराएगा बल्कि मरीजों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ है। उनका कहना है कि “हमने सीएम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि सरकार 5 सितंबर को जारी GR (Government Resolution) को तुरंत वापस ले।”
BMC और राज्य सरकार से जुड़े डॉक्टर संगठन जैसे MARDA, BMC MARDA
Federation of All India Medical Association (FAIMA)
हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी, ताकि मरीजों को ज़रूरी इलाज मिलता रहे।
⚠️ आगे क्या होगा? देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
FAIMA के अध्यक्ष डॉ. अक्षय डोंगरदिवे ने साफ किया है कि अगर सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो देशभर में आंदोलन शुरू होगा। “हम जनता को इसके जोखिम समझाएंगे और ज़रूरत पड़ी तो सड़कों पर भी उतरेंगे।”
मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में मीनाताई ठाकरे की मूर्ति पर रेड पेंट फेंका गया। राज ठाकरे ने मौके पर पहुंचकर पुलिस को निर्देश दिया कि 24 घंटे में आरोपी को ट्रेस किया जाए। CCTV फुटेज की जांच शुरू।
मुंबई: दादर इलाके में स्थित शिवाजी पार्क के पास लगी मीनाताई ठाकरे की मूर्ति पर बुधवार सुबह किसी अज्ञात शख्स ने रेड पेंट फेंक दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया।
राज ठाकरे का सख्त रुख – “24 घंटे में चाहिए आरोपी”
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे दोपहर को खुद शिवाजी पार्क पहुंचे और घटना स्थल का मुआयना किया। उन्होंने मौके पर मौजूद मुंबई पुलिस अधिकारियों को साफ कहा, “हर एक CCTV चेक करो और 24 घंटे के अंदर आरोपी को पकड़ो।”
राज ठाकरे के साथ पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद थे और उन्होंने साफ कर दिया कि ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिवसेना (UBT) भी हुई एक्टिव, मूर्ति की साफ-सफाई कर पहनाया माला
घटना की खबर मिलते ही शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ता भी तुरंत वहां पहुंचे। उन्होंने मूर्ति को साफ किया और नई माला पहनाई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी शाम को स्थल पर जाकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
शिवाजी पार्क का महत्व – सिर्फ एक पार्क नहीं, राजनीति का केंद्र
शिवाजी पार्क सिर्फ एक सार्वजनिक स्थान नहीं है, बल्कि ये महाराष्ट्र की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। यहीं पर बाला साहेब ठाकरे की याद में मेमोरियल भी है और मीनाताई ठाकरे की मूर्ति भी उसी क्षेत्र में है। मूर्ति पर हुए इस हमले को राजनीतिक और भावनात्मक रूप से गंभीर माना जा रहा है।
पुलिस ने दर्ज किया केस, CCTV फुटेज खंगालने का काम शुरू
शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ IPC की धारा 298 के तहत केस दर्ज किया गया है, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या धार्मिक स्थान को अपवित्र करने से जुड़ी है। पुलिस अब आसपास के सभी CCTV कैमरों की फुटेज चेक कर रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।
लोगों में गुस्सा, बोले – वहां तो हमेशा गार्ड होता है!
स्थानीय लोगों ने बताया कि पार्क में हमेशा एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहता है, फिर भी ये हरकत हो जाना हैरान करने वाली बात है। सभी ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के दहिसर में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत की। जानिए कैसे यह योजना महिलाओं को सेहतमंद और परिवारों को सशक्त बनाएगी।
मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के खास मौके पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के दहिसर ईस्ट स्थित रावलपाड़ा पॉलिक्लिनिक में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुंबई में महिला स्वास्थ्य और पोषण पर जोर देते हुए एक नई दिशा में कदम बढ़ाया गया।
🎯 मुख्य उद्देश्य: महिला स्वास्थ्य और परिवार का सशक्तिकरण
इस अभियान का मुख्य फोकस महिलाओं की सेहत सुधारने और परिवार को मजबूत बनाने पर है। इस मौके पर पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्यप्रदेश के धार जिले से इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्घाटन किया और महिलाओं से अपील की कि वो स्वास्थ्य जांच शिविरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
🏥 मुंबई में खास आयोजन और सेवाएं
इस खास अवसर पर मुंबई में बीजेपी विधायक मनीषा चौधरी, बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी, और कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों ने हिस्सा लिया।
👉 मेडिकल कैंप और पोषण किट वितरण:
गर्भवती महिलाओं को लगभग 20 किलो की पोषण किट दी गई।
यह योजना पूरे मुंबई नगर निगम स्कूलों में चलाई जा रही है।
🗣️ क्या बोले पीयूष गोयल?
“प्रधानमंत्री जी ने पिछले 50 सालों से देश की सेवा की है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य मिले। इस अवसर पर पूरे उत्तर मुंबई में 100 से ज्यादा सेवा कार्य चल रहे हैं – सफाई, हेल्थ कैंप्स, शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम और बहुत कुछ।“
उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों और कॉलेजों में ‘स्टैंडर्ड क्लब’ शुरू किया जा रहा है जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलेगी।
🗣️ विधायक मनीषा चौधरी का बयान:
“यह सिर्फ हेल्थ कैंप नहीं है, बल्कि महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। जो महिलाएं गर्भावस्था में कुपोषित हैं, उन्हें विशेष पोषण किट दी जा रही है।“
मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी। MMRDA ने बताया कि CBTC सिग्नलिंग सिस्टम, नए ट्रेन रेक्स और फ्लेट ओवरहॉल के लिए यह कदम जरूरी है। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
मुंबई: माया नगरी मुंबई के शहर वासियों के लिए बड़ी खबर है। मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से पूरी तरह बंद रहेगी। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने बताया कि यह बंदी इसलिए जरूरी है ताकि नए ट्रेन रेक्स, एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग और फ्लेट रिफर्बिशमेंट का काम बिना रुकावट पूरा किया जा सके।
❓ क्यों बंद की जा रही है मोनोरेल?
यह बंदी पूरा 19.74 किमी रूट (चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक) पर लागू होगी।
अभी तक अपग्रेड और टेस्टिंग का काम सिर्फ रात में 3.5 घंटे की विंडो में हो रहा था, लेकिन यह टाइम बहुत कम है।
अब लगातार 24×7 अपग्रेड वर्क चलेगा ताकि सिस्टम जल्दी से चालू हो सके।
🔧 कौन-कौन से अपग्रेड होंगे?
नए ट्रेन रेक्स (Rolling Stock)
कुल 10 नए ट्रेन रेक्स Make in India प्रोजेक्ट के तहत लाए जा रहे हैं।
8 रेक्स मुंबई पहुँच चुके हैं, 9वां टेस्टिंग में है और 10वां असेंबली में है।
एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग सिस्टम
यह पहली बार मुंबई मोनोरेल में लगेगा।
सिस्टम हैदराबाद में डिवेलप हुआ है और इसका वर्किंग टेस्ट लगभग पूरा है।
फ्लेट रिफर्बिशमेंट और स्टाफ ट्रेनिंग
पुराने रेक्स की पूरी मरम्मत और अपग्रेड होगी।
ट्रेनिंग सेफ्टी और ऑपरेशन के हिसाब से होगी ताकि आने वाले मेट्रो प्रोजेक्ट्स में भी फायदा मिले।
मलाड वेस्ट के Aksa Beach पर महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) द्वारा बनाया गया 600 मीटर लंबा प्रोमेनेड एनजीटी ने अवैध ठहराया। CRZ नियमों के उल्लंघन पर इसे 2 महीने में गिराने का आदेश। जानिए पूरी रिपोर्ट।
मुंबई: मलाड वेस्ट में मशहूर Aksa Beach पर महाराष्ट्र सागरी मंडल (MMB) ने 2023 में करीब ₹11.83 करोड़ खर्च करके 600 मीटर लंबा प्रोमेनेड और 4 मीटर चौड़ा रास्ता बना दिया था। लेकिन अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इसे पूरी तरह अवैध मानते हुए 2 महीने के अंदर तोड़ने का आदेश दे दिया है।
📜 कैसे हुआ विवाद?
2017 में MMB ने बीच पर सीफ्रंट डेवलपमेंट का प्रस्ताव रखा।
लेकिन Maharashtra Coastal Zone Management Authority (MCZMA) ने यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि यह एरिया Coastal Regulation Zone (CRZ) में आता है।
2019 में MCZMA ने केवल एंटी-इरोशन बंड (Anti-Erosion Bund) बनाने की अनुमति दी, पर शर्त रखी कि बीच पर कॉन्क्रीट या पक्का स्ट्रक्चर नहीं बनेगा।
इसके बावजूद 2023 में UCR वॉल और कॉबल स्टोन पाथवे बना दिया गया।
⚠️ क्यों पड़ा मुद्दा गम्भीर?
यह प्रोमेनेड इंटर-टाइडल ज़ोन (High Tide और Low Tide के बीच का इलाका) में बना है, जो इकोलॉजिकल एरिया माना जाता है।
एक्टिविस्ट बांदा कुमार और ज़ोरु बाथेना ने NGT में शिकायत करते हुए कहा कि:
प्रोमेनेड बीच को सेडिमेंटेशन से रोक देगा।
बीच का नैचुरल सैंड डिपॉज़िशन बंद हो जाएगा।
लगातार बीच इरोशन (कटाव) बढ़ेगा।
सबूत यह भी है कि पिछले साल और इस साल प्रोमेनेड का बड़ा हिस्सा ज्वार से टूटकर बह गया।
NGT ने माना कि MMB का इरादा लैंड को बाढ़ और कटाव से बचाने का था, लेकिन इसके लिए जो काम हुआ वह CRZ नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसलिए, 2 महीने के भीतर प्रोमेनेड तोड़ने का आदेश दिया गया है।
ICMR-NIRRCH ने पुरुषों में पाई जाने वाली दुर्लभ इंफर्टिलिटी CBAVD से जुड़ा एक नया X-लिंक्ड जीन ADGRG2 खोजा है, जो मां से बेटे में आता है। इससे इलाज और IVF प्रक्रिया से पहले जेनेटिक स्क्रीनिंग में मिलेगी नई दिशा।
🔍 क्या है CBAVD और क्यों है ये चर्चा में?
मुंबई के Parel स्थित ICMR-National Institute for Research in Reproductive Health (ICMR-NIRRCH) के वैज्ञानिकों ने पुरुषों की एक दुर्लभ इंफर्टिलिटी बीमारी Congenital Bilateral Absence of the Vas Deferens (CBAVD) से जुड़े नए जीन ADGRG2 की खोज की है।
ये बीमारी तब होती है जब पुरुष के शरीर में स्पर्म ले जाने वाली दोनों नलियाँ (vas deferens) जन्म से ही नहीं होतीं। इसका इलाज संभव नहीं है और IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) ही एकमात्र उपाय माना जाता है।
🔬 रिसर्च में क्या मिला?
इस रिसर्च की शुरुआत 2011 में हुई थी, लेकिन असली गति 2019 से मिली। अब 2025 में प्रकाशित इस पेपर में बताया गया कि:
93 पुरुषों की स्टडी में से 19 में पहले से ज्ञात CFTR जीन की कोई म्युटेशन नहीं मिली।
इन 19 मरीजों पर Whole Exome Sequencing तकनीक से जांच की गई।
इसमें 2 पुरुषों में एक नया जीन ADGRG2 की म्युटेशन पाई गई। यह जीन X-क्रोमोज़ोम से जुड़ा है और मां से बेटे को ट्रांसफर होता है।
👉 ये भारत में पहली बार है जब इस जीन की CBAVD से कनेक्शन की पुष्टि हुई है।