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मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।
मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।
जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।
₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी
इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।
APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।
साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।
YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक
पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।
इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।
Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?
पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।
सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।
Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।
1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।
पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।
Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।
जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।
अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।
यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।
सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।
अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मोहन भागवत के US दौरे के बीच 90 अमेरिकी नेताओं ने RSS-linked राजनीतिक चंदे से दूरी बनाई। Ro Khanna के $6,600 और Canada की 21 charities पर सवाल उठे।
नई दिल्ली: मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के खत्म होते-होते RSS को लेकर अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। करीब 90 अमेरिकी राजनीतिक नेताओं ने ऐसा pledge लिया है जिसमें RSS और उससे जुड़े संगठनों से जुड़े राजनीतिक चंदे को स्वीकार नहीं करने, और पहले से मिले ऐसे पैसे को वापस करने या pro-democracy संगठनों को redirect करने की बात कही गई है। सबसे ज्यादा चर्चा California के Democratic Congressman Ro Khanna के उस फैसले की है, जिसमें उन्होंने $6,600 का एक contribution वापस करने की बात कही है।
यह मामला सिर्फ मोहन भागवत के New York कार्यक्रम के विरोध तक सीमित नहीं है। इसके साथ अमेरिका में political funding, RSS-linked organisations के network और भारत से जुड़े diaspora groups के राजनीतिक प्रभाव पर भी बहस तेज हो गई है। वहीं Canada में RSS से जुड़े होने के आरोपों वाली 21 registered charities को लेकर Canada Revenue Agency (CRA) में शिकायत भी दाखिल की गई है।
सबसे अहम सवाल फिलहाल यही है कि यह $6,600 किसने दिया था।
Ro Khanna ने कहा है कि उन्हें हाल में पता चला कि यह contribution एक “pro-MAGA, billionaire with ties to the RSS” से आया था और वह इस रकम को वापस करने के बजाय किसी दूसरे उद्देश्य के लिए दे देंगे। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में उस billionaire का नाम नहीं बताया गया है। इसलिए इस donor की पहचान को लेकर किसी नाम का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
प्रदर्शन की तस्वीर
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण financial question भी है—किस donor ने पैसा दिया, किस campaign या political entity को दिया गया, contribution कब दिया गया और donor का RSS से संबंध किस आधार पर तय किया गया। अभी pledge की घोषणा में इन सभी सवालों का पूरा जवाब सार्वजनिक नहीं है।
90 नेताओं का pledge क्या कहता है?
Hindus for Human Rights Action और SACRED Acts की ओर से घोषित Nonviolence Pledge में तीन प्रमुख commitments हैं।
पहला, राजनीतिक हिंसा और intimidation को reject करना।
दूसरा, RSS और उसके affiliates से linked political donations को स्वीकार नहीं करना।
तीसरा, अगर ऐसा contribution पहले मिल चुका है तो उसे वापस करना या pro-democracy organisations को redirect करना।
इस pledge की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ Congress के सदस्य ही नहीं हैं। इसमें federal, state और local/municipal level के elected officials और candidates शामिल हैं। signatories Democratic और Republican—दोनों political circles से बताए गए हैं और आठ राज्यों में फैले हुए हैं।
यानी इसे “90 Congress MPs का RSS के खिलाफ फैसला” कहना गलत होगा। यह federal से लेकर local politics तक फैला हुआ एक broader political pledge है।
इस अभियान की शुरुआत 2026 में नहीं हुई। SACRED Acts ने Illinois में 2023 से Nonviolence Pledge को बढ़ावा दिया था। अब उसी campaign को Bhagwat के US दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा visibility मिली है।
आयोजकों का कहना है कि मुद्दा सिर्फ RSS नाम से सीधे आने वाले पैसे का नहीं, बल्कि उन donors, affiliates और organisations का भी है जिन्हें वे RSS network से जुड़ा मानते हैं।
SACRED Acts के executive director Pushkar Sharma ने दावा किया है कि सिर्फ Illinois में पिछले एक दशक के दौरान RSS से जुड़े बताए गए individuals ने दोनों major parties के political campaigns में कम से कम $2.5 million funnel किया। यह आयोजकों का दावा है, independent government finding नहीं।
Sciences Po research ने क्या जोड़ा?
इस debate को एक और आधार Sciences Po Paris से जुड़े “Seeing the Sangh” research/database से मिलता है। Hindus for Human Rights Action ने इसी research के हवाले से अमेरिका में RSS से जुड़े 113 organisations का उल्लेख किया है।
हालांकि यहां एक जरूरी distinction है: किसी organisation या individual को “RSS-linked” बताना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसकी हर political donation सीधे RSS से आई है। इसी वजह से Ro Khanna के $6,600 वाले मामले में donor की पहचान और connection का independent verification अहम है।
यह दावा करना कि अमेरिका ने RSS को ban या sanction कर दिया है, अभी गलत होगा।
26 अगस्त को U.S. Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से RSS members और religious-freedom violations में allegedly involved Indian officials पर targeted sanctions पर विचार करने को कहा था। आयोग ने Mohan Bhagwat का US visa revoke करने और future entry पर रोक लगाने की recommendation भी दी थी। लेकिन USCIRF की recommendations non-binding हैं और अमेरिकी सरकार ने इन recommendations पर कोई ऐसा action नहीं लिया है जिससे RSS पर US government ban या sanction लागू हो गया हो।
भारत सरकार ने USCIRF की आलोचना को biased बताया है, जबकि RSS अपने ऊपर intolerance के आरोपों को खारिज करता है और खुद को Hindu cultural organisation के रूप में पेश करता है।
New York में Bhagwat का कार्यक्रम हुआ, विरोध भी हुआ
यह पूरा विवाद 29 अगस्त को New York के Madison Square Garden में हुए “Universal Oneness Celebration” के आसपास तेज हुआ।
कार्यक्रम में हजारों लोग पहुंचे और Bhagwat ने unity, pluralism और humanity पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह Hindu नहीं रह सकता। उन्होंने अलग-अलग धर्मों को एक ही सत्य की ओर जाने वाले रास्तों के रूप में पेश किया।
दूसरी तरफ, कार्यक्रम से पहले civil-rights और interfaith organisations के एक समूह ने इसका विरोध किया। New York के Mayor Zohran Mamdani ने भी RSS की ideology की आलोचना की थी, हालांकि शहर के mayor के पास किसी private event को रोकने की सीधी authority नहीं थी।
इसी माहौल के बीच Brad Lander ने भी Nonviolence Pledge sign किया और RSS-linked political contributions को reject करने की बात कही।
अब विवाद Canada तक पहुंच गया
अमेरिका में political funding का विवाद चल ही रहा था कि Canada में RSS से जुड़े organisations को लेकर अलग regulatory सवाल सामने आया।
शिकायत में Sciences Po के data का हवाला देते हुए लगभग $46 million के funds के Canada में RSS-affiliated organisations के बीच movement और करीब $21.5 million के RSS-linked organisations abroad को जाने का दावा किया गया है। ये figures complaint करने वाले organisation के analysis/claims हैं; इन्हें Canada government की confirmed finding के रूप में नहीं पेश किया जा सकता।
CRA ने इन 21 charities को दोषी ठहराया है या उनकी charitable status रद्द कर दी है—ऐसी कोई official finding अभी सामने नहीं है। इसलिए फिलहाल मामला complaint और जांच की मांग के स्तर पर है।
दिलचस्प बात यह है कि US में funding और ideology को लेकर विवाद के बीच Bhagwat ने Canada में भी outreach जारी रखी।
31 अगस्त को Toronto में “Hindu Vishwa Bandhu – Embrace the World in Friendship” कार्यक्रम हुआ, जिसमें RSS के मुताबिक 10 provinces की 175 host organisations से 2,000 से ज्यादा delegates शामिल हुए। Bhagwat ने India की global role को service, friendship और diversity के सम्मान से जोड़कर पेश किया।
इससे तस्वीर का दूसरा पक्ष भी सामने आता है। RSS अपने overseas outreach को diaspora dialogue, Hindu society के हितों और “Vasudhaiva Kutumbakam” यानी universal oneness की सोच से जोड़ रहा है। वहीं उसके आलोचक इसी international network को political और ideological influence के नजरिए से देख रहे हैं।
अब असली सवाल क्या है?
इस पूरे विवाद का अगला बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने नेताओं ने pledge sign किया।
असली सवाल यह है कि “RSS-linked political money” की definition क्या होगी और इसे campaign-finance records में किस तरह track किया जाएगा।
Ro Khanna के $6,600 contribution का donor कौन है? उसका RSS connection किस documented evidence पर आधारित है? अमेरिका में ऐसे कितने contributions हैं? और क्या campaign-finance records इस alleged network को independently verify करते हैं?
फिलहाल करीब 90 नेताओं का pledge एक राजनीतिक संदेश जरूर देता है, लेकिन इसके वास्तविक financial impact का आकलन इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही हो पाएगा।
एक तरफ RSS अपने global outreach को unity, service और Hindu diaspora engagement के रूप में पेश कर रहा है, दूसरी तरफ उसके आलोचक political funding और ideological influence पर सवाल उठा रहे हैं। Bhagwat का US-Canada दौरा खत्म होने के साथ विवाद खत्म होने के बजाय अब ज्यादा स्पष्ट रूप से एक नए मुद्दे—diaspora politics और political money—की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है।
नेपाल बाढ़ से Mumbai लौटे 37 यात्रियों ने खौफनाक आपबीती सुनाई। महाराष्ट्र के 404 लोगों में 338 सुरक्षित, लेकिन 60 अब भी लापता हैं। जानिए पूरा अपडेट।
मुंबई: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद फंसे महाराष्ट्र के यात्रियों की घर वापसी शुरू हो गई है, लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है। Mumbai के 37 यात्री शनिवार शाम सुरक्षित लौट आए और एयरपोर्ट पर परिवार से मिलते ही कई लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। यात्रियों ने कहा कि उन्हें लगा जैसे भगवान ने उनकी जान बचा ली।
लेकिन दूसरी तरफ महाराष्ट्र के 60 यात्री और तीर्थयात्री अब भी trace नहीं हो पाए हैं।
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक Nepal-Tibet इलाके में फंसे राज्य के 404 लोगों में से 338 से संपर्क हो चुका है और उनकी safety confirm की गई है। 60 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे में 37 यात्रियों की वापसी के साथ राहत जरूर मिली है, लेकिन परिवारों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
Mumbai लौटे 37 यात्रियों ने सुनाई खौफनाक आपबीती
शनिवार शाम Mumbai एयरपोर्ट पहुंचे यात्रियों ने बताया कि Nepal-Tibet इलाके में हालात कितनी तेजी से बदले थे। इनमें कई लोग Kailash Mansarovar यात्रा पर गए थे।
एक यात्री ने बताया कि उनका group 26 अगस्त को Saga इलाके में था। इसी दौरान उन्हें flash flood से हुई तबाही का अंदाजा हुआ। लौटने में तय schedule से करीब एक दिन की देरी हुई, लेकिन मुश्किल हालात के बावजूद China और Nepal के बीच coordination से उनकी वापसी का रास्ता आगे बढ़ा।
यात्रियों ने कहा कि वे सुरक्षित Mumbai पहुंच पाए, यह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। परिवार से मिलने के बाद कई यात्री भावुक हो गए।
एक दिन और रुकते तो हालात और बिगड़ सकते थे
लौटे यात्रियों की बातों में सबसे ज्यादा डर उस समय का था, जब उन्हें flood की असली तबाही का पता चला।
कुछ यात्रियों के मुताबिक अगर उनका group एक दिन और उस इलाके में रुक जाता तो वे भी बेहद खतरनाक स्थिति में फंस सकते थे। यही वजह है कि Mumbai पहुंचने के बाद यात्रियों ने अपनी सुरक्षित वापसी को भगवान की कृपा बताया।
यात्रा का रास्ता आसान नहीं था। खराब मौसम, damaged roads और border इलाके की मुश्किल स्थिति के बीच यात्रियों को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ना पड़ा।
Nagpur के 102 यात्रियों की भी घर वापसी
Mumbai के 37 यात्रियों के साथ महाराष्ट्र के दूसरे groups की भी वापसी हुई है। करीब 102 Nagpur pilgrims Kathmandu में फंसने के बाद वापस लौटे। चार अन्य लोग इससे पहले Nagpur पहुंच चुके थे। इस तरह 143 से ज्यादा stranded Maharashtra residents के सुरक्षित भारत पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
इन यात्रियों की वापसी से परिवारों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन इससे 60 untraceable लोगों को लेकर सवाल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
State government के latest आंकड़े के मुताबिक 404 Maharashtra residents में से 338 लोगों से संपर्क हो चुका है, जबकि 60 अभी untraceable हैं। इनमें Mumbai-based Richa Tours के जरिए Nepal जाने वाला group भी शामिल है।
शुरुआती reports में 66 लोगों के contact से बाहर होने की बात सामने आई थी। बाद के verification में संख्या 60 बताई गई। इसलिए फिलहाल latest state-level figure 60 है।
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है—60 लोगों को अभी “लापता” कहा जा रहा है, लेकिन उनकी मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई है। Official स्थिति यही है कि authorities अभी उनकी location या safety confirm नहीं कर पाई हैं।
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर उस दिन आखिर हुआ क्या था?
26 अगस्त को Rasuwa इलाके में अचानक तेज flood और debris flow आया। Bhote Koshi नदी के आसपास पानी और मलबे का सैलाब इतनी तेजी से बढ़ा कि सड़कें, bridges और border infrastructure बुरी तरह प्रभावित हो गए।
Rasuwagadhi और Timure जैसे इलाके इस disaster की चपेट में आए। यही corridor Nepal को Tibet से जोड़ता है और Kailash Mansarovar जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
बाढ़ का असर इतना बड़ा था कि सामान्य road connectivity टूट गई और कई tourist तथा pilgrimage groups रास्ते में फंस गए।
Tibet side पर भी बड़ा संकट
यह disaster सिर्फ Nepal तक सीमित नहीं रहा। China के Tibet क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है।
30 अगस्त तक China की तरफ 16 मौतों और 546 लोगों के missing होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 261 foreign nationals भी शामिल हैं। इसलिए Nepal में लौटे कुछ यात्रियों की राहत भरी कहानी के बावजूद Tibet side पर rescue operation अभी भी जारी है।
नेपाल में तबाही का scale भी लगातार बढ़ रहा है। 30 अगस्त के latest आंकड़ों के मुताबिक Nepal में 734 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 2,498 लोग अब भी missing हैं।
Nepal और Tibet के आंकड़े मिलाने पर मौतों का आंकड़ा 750 से ज्यादा और missing लोगों की संख्या 3,000 से ज्यादा हो चुकी है। आंकड़े लगातार update हो रहे हैं क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक rescue teams को पहुंचने में अभी भी मुश्किल आ रही है।
Rescue operation अभी खत्म नहीं हुआ
बाढ़ के बाद search और rescue operation लगातार चल रहा है। हालात इतने मुश्किल हैं कि India, China और दूसरे देशों की specialised teams भी मदद के लिए पहुंची हैं।
India ने tunnel rescue के लिए 11-member specialised reconnaissance team भेजी है। Nepal में hydropower projects के tunnels में भी workers के फंसे होने की आशंका के चलते rescue operation चल रहा है।
यानी यह सिर्फ tourists को वापस लाने की कोशिश नहीं है। कई प्रभावित इलाकों में लोगों, workers और infrastructure को बचाने का बड़ा operation चल रहा है।
खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है
सबसे बड़ी चिंता यह है कि flood के कई दिन बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ है।
Bhotekoshi नदी में पानी का level फिर बढ़ने की warning जारी की गई है। प्रभावित इलाकों में पहले से damaged roads और bridges के बीच नए flood और landslide का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से rescue teams को भी बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।
Kailash Mansarovar Yatra पर क्या असर पड़ेगा?
इस disaster का सीधा असर Kailash Mansarovar यात्रा पर पड़ सकता है।
Rasuwagadhi-Kerung corridor इस यात्रा के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है और flood में इस इलाके का infrastructure बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसलिए इस route से यात्रा करने वालों के लिए पुराने schedule को final मानना सही नहीं होगा।
जिन यात्रियों ने Nepal के रास्ते Kailash Mansarovar की booking कर रखी है, उन्हें यात्रा से पहले अपने operator से current route status, border crossing और road connectivity की पुष्टि करनी चाहिए।
पूरे Nepal को unsafe कहना सही नहीं होगा। लेकिन Rasuwa, Rasuwagadhi, Timure और Tibet border की तरफ के flood-affected इलाकों को सामान्य tourist route मानकर यात्रा करना फिलहाल जोखिम भरा हो सकता है।
Road damage, landslide, अचानक बढ़ता पानी और कमजोर infrastructure की वजह से ground situation तेजी से बदल सकती है।
इसलिए अगर किसी की Nepal या Kailash यात्रा आने वाले दिनों में है, तो booking के पुराने itinerary के बजाय latest official clearance और route status देखकर ही आगे बढ़ना बेहतर होगा।
अगर आपका अपना Nepal में फंसा है तो ये नंबर रखें
अगर परिवार का कोई सदस्य Nepal-Tibet क्षेत्र में है और उससे संपर्क नहीं हो रहा है, तो Indian Embassy Kathmandu की emergency helplines पर संपर्क किया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि Maharashtra के बाकी 60 untraceable लोगों की location कब confirm होती है, Tibet side में safe बताए गए भारतीयों की वापसी कब पूरी होती है और Nepal-Tibet का damaged route कब सामान्य होता है।
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, Mumbai एयरपोर्ट पर लौटे यात्रियों की राहत भरी तस्वीर के पीछे कई परिवारों की चिंता बनी रहेगी।
Poonch में suspected पाकिस्तानी ड्रोन दिखने के बाद search operation शुरू हुआ। Rajouri में 3 drones की हलचल और suspicious movement से LoC पर alert बढ़ा।
ताजा अपडेट:
Poonch और Rajouri के LoC क्षेत्रों में suspected drone activity के बाद security forces का search operation जारी है। Poonch में यह जांच की जा रही है कि drone ने जमीन पर कोई suspicious material तो नहीं गिराया। फिलहाल किसी weapon, narcotics या दूसरे payload की recovery की official confirmation नहीं हुई है।
जम्मू-कश्मीर: Poonch और Rajouri में सामने आई drone activity ने LoC पर security alert बढ़ा दिया है। Poonch के Mendhar सेक्टर में 28 अगस्त की रात suspected Pakistan-origin drone दिखाई दिया, जबकि इसी दौरान Rajouri के Nowshera सेक्टर से तीन suspected Pakistani drones की movement की जानकारी सामने आई।
लेकिन इस पूरे मामले में सिर्फ आसमान में दिखाई दिए drones ही चिंता की वजह नहीं हैं। Rajouri में suspicious ground movement की खबरों के बाद security forces ने जमीन पर भी search operation शुरू किया है।
28 अगस्त की रात करीब 8:05 बजे Poonch के Mendhar सेक्टर के Balakote इलाके में Behrooti गांव के ऊपर एक suspected drone देखा गया।
बताया गया कि drone Mangalnar-Dabrote की दिशा में आगे बढ़ा और बाद में Pakistan की तरफ वापस चला गया।
Drone के वापस जाने के बाद भी security forces ने इलाके की तलाश शुरू कर दी। वजह साफ है—drone वापस चला गया, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उसने जमीन पर कुछ छोड़ा ही नहीं।
इसीलिए आसपास के इलाके में search operation के जरिए संभावित suspicious material की तलाश की जा रही है।
Rajouri में एक नहीं, तीन drones की हलचल
Poonch की घटना के बीच Rajouri से सामने आई जानकारी ने security concern और बढ़ा दिया।
Nowshera सेक्टर के Rumlidhara इलाके में तीन suspected Pakistani drones की movement की रिपोर्ट सामने आई। Security forces ने counter-drone measures activate किए और drones को वापस जाने पर मजबूर किया गया।
इसके बाद आसपास के इलाके में search operation शुरू किया गया।
यानी एक ही समय में Poonch और Rajouri के LoC belt में suspected drone activity की दो अलग घटनाएं सामने आईं।
सिर्फ drone नहीं, जमीन पर भी suspicious movement
Rajouri के Nowshera इलाके में border fence के पास backpack लिए एक संदिग्ध व्यक्ति की movement देखे जाने की रिपोर्ट है। इसके बाद security forces ने आसपास तलाश शुरू की।
इसके अलावा Rajouri के Gaibas, Mithiyani, Mogla और Narla इलाकों में दो suspected armed persons देखे जाने की सूचना के बाद भी search operation चलाया गया।
इस वजह से security agencies को aerial surveillance के साथ ground-level search भी बढ़ाना पड़ा।
एक नजर में पूरा मामला
इलाका
क्या हुआ
Poonch-Mendhar
Suspected Pakistani drone दिखाई दिया
Balakote-Behrooti
रात करीब 8:05 बजे drone movement
Rajouri-Nowshera
3 suspected drones की movement
Rumlidhara
Counter-drone measures के बाद search
Rajouri के कुछ इलाके
Suspicious ground movement की reports
Poonch
संभावित material की तलाश
फिलहाल
Search और security surveillance जारी
क्या Poonch वाले drone ने हथियार या drugs गिराए?
यह इस समय सबसे बड़ा सवाल है, लेकिन इसका जवाब अभी साफ नहीं है।
Poonch की मौजूदा घटना में weapon, heroin, narcotics या किसी दूसरे payload की recovery की official confirmation सामने नहीं आई है।
Security forces की search का एक मकसद यही पता करना है कि drone ने जमीन पर कोई suspicious material छोड़ा था या नहीं।
Drone को लेकर इतनी चिंता क्यों?
Border areas में drone का इस्तेमाल केवल surveillance के लिए नहीं होता। पिछले मामलों में drones के जरिए weapons और narcotics की cross-border delivery की जांच सामने आ चुकी है।
इसी वजह से LoC के पास किसी suspected drone की sighting के बाद security forces केवल आसमान पर नजर नहीं रखतीं, बल्कि जमीन पर भी संभावित drop locations की तलाश करती हैं।
हालांकि Poonch की मौजूदा घटना में यह कहना जल्दबाजी होगी कि drone किसी weapon या drug delivery के लिए आया था। अभी ऐसी कोई पुष्टि नहीं है।
क्या यह पहली घटना है? नहीं
Poonch और Rajouri की मौजूदा घटनाओं को समझने के लिए पिछले कुछ हफ्तों की घटनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
23 अगस्त को Kathua के Hiranagar के Bobiyan इलाके में suspected Pakistan-origin drone देखा गया था। इसके बाद search operation चलाया गया और यह जांच की गई कि कहीं drone से weapons या narcotics तो नहीं गिराए गए। उस search में कुछ suspicious मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी।
16 अगस्त को Hiranagar सेक्टर के Katli गांव के पास भी एक suspected drone मिलने की खबर सामने आई थी, जिसे security team ने कब्जे में लिया था।
4 अगस्त को Kathua में suspected Pakistani drone activity के बाद search operation शुरू किया गया था। इसी दौरान Poonch में suspected terrorist movement की information के आधार पर security forces ने searches की थीं।
इससे पहले 27 जुलाई को Samba के Nandpur और Rajouri के Nowshera सेक्टर में suspected Pakistani drone activity के बाद भी search operations शुरू किए गए थे।
यानी हाल के मामलों में Poonch, Rajouri, Samba और Kathua के border areas से drone alerts और उसके बाद security searches की घटनाएं सामने आई हैं।
क्या drone surveillance कर रहा था?
हर drone sighting को हमला या smuggling attempt मानना सही नहीं होगा।
Security agencies को ऐसे मामलों में कई possibilities देखनी पड़ती हैं—क्या drone सिर्फ surveillance कर रहा था, क्या किसी location की जानकारी जुटाई जा रही थी, क्या कोई material पहुंचाने की कोशिश हुई या क्या इसकी activity किसी ground movement से जुड़ी थी।
मौजूदा Poonch घटना में इनमें से किसी भी possibility की अभी official confirmation नहीं हुई है।
Amritsar के मामलों से क्यों जुड़ता है यह angle?
Drone-based smuggling का खतरा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि Punjab में हाल के मामलों में Pakistan-based handlers से allegedly जुड़े arms और heroin networks की जांच सामने आई है।
एक मामले में weapons और drone की recovery की जानकारी दी गई थी। NIA की जांच में Pakistan और Australia links को भी खंगालने की बात सामने आई।
इसका मतलब यह नहीं कि Poonch वाला drone भी हथियार या drugs लेकर आया था। दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ने की अभी कोई official confirmation नहीं है।
लेकिन पुराने मामलों की वजह से border पर drone activity को security agencies गंभीरता से लेती हैं।
Bayraktar TB2 वाला angle कितना सही है?
Pakistan की drone capability को लेकर भी हाल में चर्चा रही है। कुछ reports में LoC के पास Turkish-made Bayraktar TB2 drones की deployment के claims सामने आए हैं। ऐसे drones surveillance और reconnaissance के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
लेकिन Poonch में 28 अगस्त को दिखाई दिए suspected drone को Bayraktar TB2 बताने की कोई verified confirmation अभी सामने नहीं आई है।
LoC पर इसका असर क्या होगा?
लगातार drone alerts के बाद border areas में aerial surveillance और counter-drone preparedness बढ़ानी पड़ सकती है।
अगर drone activity के साथ जमीन पर suspicious movement भी सामने आए, तो security forces को forest और village areas में cordon-and-search operation चलाना पड़ता है।
इससे security deployment और निगरानी दोनों बढ़ते हैं। Poonch और Rajouri में मौजूदा घटनाओं में यही broader security concern दिखाई दे रहा है।
अब आगे क्या होगा?
इस पूरे मामले में अगला बड़ा update Poonch और Rajouri में चल रहे search operations से मिल सकता है।
अगर search के दौरान कोई suspicious object, weapon, narcotics या दूसरा material मिलता है, तो मामले का security angle और गंभीर हो सकता है।
अगर कुछ नहीं मिलता, तो फिलहाल मामला suspected drone intrusion और security alert तक सीमित रह सकता है।
फिलहाल Poonch में drone sighting, Rajouri में तीन drones की reported movement और suspicious ground movement की खबरों के बाद LoC के इस हिस्से में security agencies की निगरानी बढ़ी हुई है।
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि search operation में क्या सामने आता है और security agencies की तरफ से अगला official update क्या आता है।
नेपाल में फ्लैश बाढ़ के बाद 320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर हैं। करीब 3 हजार लोग लापता हैं। जानिए rescue operation, मौतों और नए खतरे का ताजा अपडेट आज यहां भी।
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनसे हादसे के बाद संपर्क नहीं हो पाया। इनमें कम से कम 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। दूसरी तरफ नेपाल और Tibet को मिलाकर करीब 3 हजार लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में rescue operation तेज होने के बावजूद कई परिवारों को अपने लोगों की खबर का इंतजार है।
नेपाल बाढ़ में 320 भारतीयों का क्या हुआ?
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में आई बाढ़ के बाद करीब 320 Indian nationals अब भी contact में नहीं हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा Indian-origin लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
इसमें कई लोग Kailash Mansarovar Yatra पर गए भारतीय यात्री हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और landslide के बाद कई यात्रियों से संपर्क टूट गया। परिवार अब हेल्पलाइन, अस्पतालों और स्थानीय authorities के जरिए अपने लोगों की जानकारी तलाश रहे हैं।
एक जरूरी बात यह है कि 320 भारतीयों का मतलब 320 मौतें नहीं है। ये वे लोग हैं जिनसे फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। Rescue और identification operation आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बदल सकता है।
चीन की तरफ फंसे भारतीयों का क्या हुआ?
नेपाल के साथ China side पर भी कई भारतीय यात्री फंसे हुए थे। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 400 भारतीय वहां सुरक्षित और संपर्क में थे। इनमें से 96 लोग जमीन के रास्ते Nepal पहुंच चुके थे, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित Delhi लाया गया।
इसके अलावा Nepal में एक hydropower project से जुड़े भारतीयों को भी rescue किया गया है। अलग-अलग rescue operations में भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकलने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
करीब 3 हजार लोग अब भी Missing
यह disaster सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है। Nepal और Tibet में करीब 3 हजार लोग अब भी missing बताए जा रहे हैं। Reuters के मुताबिक Nepal में 669 और Tibet में 7 लोगों की मौत दर्ज की गई है, यानी कुल मौतों का आंकड़ा 676 तक पहुंच गया है।
ताजा जानकारी के मुताबिक 3,700 से ज्यादा लोगों को Nepal में rescue किया जा चुका है। लेकिन पहाड़ी इलाकों में मलबा, टूटे रास्ते और संकरी घाटियां search operation को मुश्किल बना रही हैं।
सबसे मुश्किल तलाश hydropower projects के आसपास चल रही है
बाढ़ ने Trishuli River corridor में मौजूद hydropower projects को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। Upper Trishuli-1 project के आसपास mud और debris से भरे इलाकों में workers की तलाश की जा रही है। कुछ लोगों के tunnel में फंसे होने की आशंका के चलते rescue teams का फोकस इन जगहों पर भी है।
इसी वजह से Nepal में rescue operation अब सिर्फ सड़क और गांवों तक सीमित नहीं है। नदी किनारे, मलबे में दबे इलाकों और hydropower tunnels तक search operation बढ़ाया गया है।
26 अगस्त को Nepal-Tibet border के पास अचानक आई flash flood ने कुछ ही समय में बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तेज पानी के साथ भारी मात्रा में rock, ice और debris नीचे आया, जिससे bridges, roads, buildings और infrastructure को भारी नुकसान हुआ।
खबर के मुताबिक glacier collapse से शुरू हुए debris flow ने इस disaster को और खतरनाक बना दिया। बाढ़ का असर Bhote Koshi और Trishuli river corridor तक पहुंचा और कई settlements तथा infrastructure इसकी चपेट में आए।
Kailash Mansarovar यात्रियों पर क्यों पड़ा बड़ा असर?
इस पूरी घटना में Kailash Mansarovar Yatra का angle सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है। Nepal और Tibet के रास्ते इस समय बड़ी संख्या में भारतीय यात्री यात्रा कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ ने कई border routes और access points को प्रभावित कर दिया।
इसी वजह से कई परिवारों को अपने रिश्तेदारों की आखिरी location तक पता लगाने में भी मुश्किल हुई। कुछ परिवार Nepal पहुंचकर खुद अपने लोगों की तलाश कर रहे हैं।
खराब मौसम की वजह से rescue operation में रुकावट आई थी, लेकिन अब search and rescue activities फिर से शुरू हो गई हैं। Nepal की तरफ से remote और मुश्किल इलाकों में technical assistance की जरूरत भी बताई गई है।
India समेत कई देशों से relief material और rescue support पहुंचाया जा रहा है। Helicopters के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी चल रहा है।
लेकिन एक और खतरा सामने है
बाढ़ के बाद Himalayan region में एक नई lake बनने से भी authorities की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल इसके water level में कमी आने की बात सामने आई है, लेकिन इसे लगातार monitor किया जा रहा है।
अगर पानी का दबाव फिर बढ़ता है तो आसपास के इलाकों में दोबारा flood risk पैदा हो सकता है। इसलिए rescue operation के साथ-साथ secondary flood threat पर भी नजर रखी जा रही है।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल उन करीब 320 भारतीयों को लेकर है जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इनके अलावा Nepal और Tibet में हजारों दूसरे लोग भी missing हैं।
Rescue teams मलबे, नदी किनारे, remote villages और hydropower sites पर लगातार search कर रही हैं। जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक पहुंच बढ़ेगी, missing लोगों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
मुंबई में ₹17.67 लाख की केमिकल ठगी का खुलासा, MHB कॉलोनी पुलिस ने राजस्थान से दो आरोपियों को पकड़ा। फर्जी कंपनी, SIM, Aadhaar-PAN और नकली UTR से ठगी का प्लान।
मुंबई: बोरीवली पश्चिम के MHB कॉलोनी पुलिस ने Chemical कारोबार से जुड़ी ₹17.67 लाख की ठगी के मामले में राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी Aadhaar-PAN, SIM, कंपनी के कागजात और नकली Payment Screenshot/UTR के जरिए कारोबारियों को भरोसे में लेने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि आरोपी सिर्फ एक कंपनी के संपर्क में नहीं थे, बल्कि करीब 38 Chemical कंपनियों से इसी तरह संपर्क किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है।
WhatsApp पर Chemical का ऑर्डर, फिर शुरू हुआ पूरा खेल
मामला MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता निर्मित संजय अजमेरा, उम्र 32 वर्ष, Chemical कारोबार से जुड़े हैं। उनके मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए “प्रीमियर सॉल्व्हेंट्स” कंपनी के नाम से Chemical का ऑर्डर दिया गया।
बोरीवली एम एच बी कॉलोनी पुलिस टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
शुरुआत में सब कुछ एक सामान्य कारोबारी डील जैसा दिखाई दिया, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि ऑर्डर देने वाले लोगों ने अपनी असली पहचान छिपाकर पूरा फर्जी सेटअप तैयार किया था।
Shyam Industries के नाम से बनाई फर्जी कंपनी
आरोपियों ने “Shyam Industries” नाम से फर्जी कंपनी तैयार की। इसके लिए फर्जी Aadhaar Card और PAN Card का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी को असली दिखाने के लिए विजिटिंग कार्ड और लेटरहेड भी तैयार किए गए।
इसके बाद Chemical कारोबारियों से संपर्क कर ऑर्डर देने और पेमेंट करने का भरोसा दिलाया गया।
मामला तब संदिग्ध हुआ जब आरोपियों ने पेमेंट किए जाने का दावा करते हुए WhatsApp पर Payment Screenshot और UTR नंबर भेजा। स्क्रीनशॉट से ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि रकम ट्रांसफर हो चुकी है, जबकि वास्तव में ₹17,67,375 का भुगतान नहीं हुआ था।
इसके बाद Chemical को Transporter के जरिए मंगाने की कोशिश की गई। पुलिस की जांच में यही पूरा तरीका ठगी के मुख्य पैटर्न के तौर पर सामने आया।
पुलिस को 38 और Chemical कंपनियों से संपर्क का पता चला
जांच आगे बढ़ी तो मामला एक कारोबारी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने इसी तरह करीब 38 अलग-अलग Chemical कंपनियों से संपर्क किया था और Chemical मंगाने के लिए बातचीत की थी।
इससे पुलिस को शक हुआ कि फर्जी कंपनी और पहचान तैयार करने के पीछे एक बड़ा ठगी का प्लान था और दूसरे कारोबारियों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया जा सकता था।
Fake SIM से लेकर Fake Identity तक
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर एक और फर्जी SIM हासिल की थी। इस दौरान सोनूकुमार प्रजापत के नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पहचान तैयार की गई।
इसी पहचान के आधार पर Aadhaar और PAN तैयार किए गए और फिर Shyam Industries के नाम से कारोबार करने का दिखावा किया गया।
यानी इस पूरे मामले में सिर्फ नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट ही नहीं, बल्कि पहचान से लेकर कंपनी के दस्तावेज तक कई स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।
आरोपी बार-बार बदल रहा था Location
मामला दर्ज होने के बाद MHB कॉलोनी पुलिस की Crime Detection टीम ने मोबाइल नंबर और दूसरी तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।
जांच के दौरान आरोपी लगातार अपनी Location बदल रहा था। पुलिस ने उसके इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की जानकारी निकाली और तकनीकी जांच के जरिए उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया।
जांच में आरोपी का संपर्क राजस्थान से सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को ट्रेस किया।
तकनीकी जांच के आधार पर मुख्य आरोपी ललितकुमार भगवानराम बिश्नोई, उम्र 36 वर्ष, को राजस्थान के Jodhpur क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान उसके खिलाफ सामने आए आरोपों और मामले में उसकी भूमिका की जांच की गई।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में अपराध से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया।
मामले में उसके साथी विकास बिश्नोई, उम्र 19 वर्ष, को भी सहभागी पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया है।
दोनों की भूमिका सामने आने के बाद केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) भी जोड़ी गई है।
MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन में CR No. 960/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 38 अन्य Chemical कंपनियों से संपर्क करने के पीछे आरोपियों का मकसद क्या था और इस नेटवर्क से कितने कारोबारियों को नुकसान पहुंचा सकता था।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई
इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा। पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख और पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।
गोराई विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हूंबे की निगरानी में MHB कॉलोनी पुलिस की टीम ने कार्रवाई की।
MHB कॉलोनी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) मिलिंद नागपुरे के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक तथा अपराध प्रकटीकरण अधिकारी श्रीकांत मगर और उनकी टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई।
कार्रवाई में पुलिस हवलदार संदीप पाटील, सतीश देवकर, अर्जुन आहेर, पुलिस नाईक सचिन मंजुळे और सिद्धेश पाटील भी शामिल रहे।
अब 38 कंपनियों वाले कनेक्शन की जांच
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगला बड़ा सवाल यह है कि Shyam Industries नाम की फर्जी कंपनी बनाकर कितने कारोबारियों को इसी तरीके से संपर्क किया गया था और कितनी जगह Chemical मंगाने की कोशिश की गई।
₹17.67 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच में करीब 38 Chemical कंपनियों से संपर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
ISRO Recruitment 2026 में Scientist Engineer के 175 पदों पर आवेदन शुरू हो गया है। ₹56,100 बेसिक सैलरी, eligibility, exam और fee की पूरी जानकारी।
नई दिल्ली/मुंबई: Engineering करने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर है। ISRO ने Scientist/Engineer ‘SC’ के 175 पदों पर भर्ती के लिए online application शुरू कर दिया है। आवेदन की प्रक्रिया 27 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और eligible candidates 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे तक form भर सकते हैं।
इस recruitment में Electronics, Mechanical और Computer Science Engineering से जुड़े candidates को मौका मिलेगा। Selected candidates को Level-10 Pay Matrix में नौकरी मिलेगी, जहां minimum basic salary ₹56,100 प्रति माह से शुरू होगी।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात vacancy या salary नहीं, बल्कि eligibility के rules हैं। 65% marks होने के बावजूद कुछ candidates eligible नहीं होंगे। Degree का नाम, CGPA, backlog, course duration, MCA/M.Tech और AMIE से जुड़े rules application से पहले समझना जरूरी है।
इस recruitment के लिए relevant BE/B.Tech या equivalent qualification जरूरी है।
Post
Qualification
Electronics
BE/B.Tech या accepted allied discipline
Mechanical
BE/B.Tech या accepted allied discipline
Computer Science
BE/B.Tech या accepted allied discipline
तीनों disciplines में graduation में minimum 65% marks या 6.84 CGPA जरूरी है।
Age की बात करें तो 16 सितंबर 2026 को maximum age 28 साल होनी चाहिए।
लेकिन यहीं से कुछ important rules शुरू होते हैं।
आपकी Degree का नाम अलग है तो भी मौका हो सकता है
अगर आपकी degree का नाम exactly Electronics, Mechanical या Computer Science नहीं है तो तुरंत खुद को ineligible न मानें।
Electronics category में Applied Electronics, Electrical & Electronics, Electronics & Communication, Electronics & Instrumentation, Electronics & Telecommunication, Industrial Electronics, Power Electronics, Telecommunication, Instrumentation & Control, Avionics जैसी कई allied disciplines स्वीकार की गई हैं।
Mechanical में Aeronautical, Aerospace, Industrial & Production, Manufacturing, Mechanical & Automation, Mechatronics, Production Engineering, Metallurgical & Materials और Mechanical Engineering Design जैसी disciplines शामिल हैं।
Computer Science category में Computer Engineering, Computer Science & Technology, CS & IT, Information Technology, Information Science, AI & ML, AI & Data Science, Cyber Security, Software Engineering, Big Data Analytics, Cloud Computing और Computer Networking जैसी disciplines भी शामिल हैं।
इसलिए degree का नाम अलग होने पर official discipline list से match करना जरूरी है।
65% है फिर भी Form Reject हो सकता है!
ISRO का 65% rule जितना simple दिखता है, उतना है नहीं।
अगर आपकी marksheet में सिर्फ CGPA है तो वही CGPA 6.84 या उससे ज्यादा होना चाहिए। University की conversion formula लगाकर कम CGPA को percentage में बदलकर eligibility हासिल नहीं की जा सकती।
अगर marksheet में percentage और CGPA दोनों दिए हैं तो दोनों में से कम से कम एक ISRO के required benchmark को पूरा करना चाहिए।
सबसे बड़ा trap course duration का है।
अगर आपकी B.Tech चार साल की थी लेकिन backlog के कारण आपने पांच साल में graduation पूरी की, तो आप eligible नहीं होंगे।
इसलिए apply करने से पहले यह check करें:
Eligibility Check
Rule
Percentage
65% या ज्यादा
CGPA
6.84 या ज्यादा
Course duration
निर्धारित अवधि में graduation complete
Qualification
Relevant BE/B.Tech/equivalent
MCA या M.Tech किया है तो क्या Apply कर सकते हैं?
सिर्फ MCA के आधार पर Scientist/Engineer ‘SC’ के लिए eligibility नहीं बनती।
सिर्फ M.Tech होने से भी BE/B.Tech की essential qualification replace नहीं होती। अगर आपकी BE/B.Tech required marks पूरा नहीं करती तो M.Tech के अच्छे marks से यह कमी पूरी नहीं होगी।
Interview में online application में दी गई details को prove करने वाले original documents भी दिखाने होंगे।
Exam Centre कहां मिलेगा?
ISRO ने Written Test के लिए 37 cities दी हैं।
इनमें Mumbai, Pune, Bengaluru, Ahmedabad, Chennai, Hyderabad, Delhi, Kolkata, Jaipur, Nagpur, Lucknow, Patna, Varanasi, Thiruvananthapuram, Vijayawada और Visakhapatnam समेत कई शहर शामिल हैं।
लेकिन exam city और job posting को एक न समझें।
Mumbai चुनने का मतलब यह नहीं कि selection के बाद posting Mumbai में ही होगी।
Application submit होने के बाद exam centre बदलने का provision भी नहीं है।
ISRO की तैयारी के लिए Previous Papers भी उपलब्ध
इस recruitment की तैयारी करने वाले candidates के लिए ISRO ने official recruitment page पर Electronics, Mechanical और Computer Science के 2023 और 2025 के previous papers उपलब्ध कराए हैं।
पहले इन papers से question level समझना और फिर technical तथा aptitude preparation करना ज्यादा useful रहेगा।
PwBD Candidates के लिए जरूरी Rule
PwBD reservation के लिए minimum 40% relevant benchmark disability जरूरी है।
Disability categories में blindness/low vision, deaf/hard of hearing, locomotor disability, autism/intellectual disability/specific learning disability/mental illness और multiple disabilities शामिल हैं।
Backlog PwBD vacancies को applicable rules के अनुसार categories के बीच interchange किया जा सकता है। इसलिए किसी category में zero दिखने पर भी eligible PwBD candidate को apply करने से पहले पूरी notification check करनी चाहिए।
कौन-सी गलती candidature खत्म कर सकती है?
Incomplete application, गलत information, missing documents, unclear uploads, false NOC claim या recruitment procedure से deviation candidature cancel करा सकता है।
अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो ISRO Scientist/Engineer ‘SC’ Recruitment 2026 में आपके लिए आवेदन का रास्ता खुला है।
आवेदन की आखिरी तारीख 16 सितंबर 2026 रात 11:55 बजे है। Last day का इंतजार करने के बजाय form पहले complete करना बेहतर रहेगा, क्योंकि गलत marks, degree details, bank information या uploaded document की वजह से बाद में correction का मौका नहीं मिलेगा।
Official Notification, Apply Online, FAQ और Previous Year Papers ISRO की official recruitment website पर उपलब्ध हैं।
🔗 Official FAQ Allied branches, CGPA, MCA/M.Tech, AMIE, backlog, payment, application और eligibility से जुड़े सवालों के जवाब के लिए Official ISRO Recruitment FAQ 2026
18 साल के मजदूर को खुदाई में ₹98 करोड़ का सोना मिला। 5 लोगों ने मालिक होने का दावा किया, एक ने कहा- पिछले जन्म में मैंने इसे छिपाया था।
खुदाई के दौरान अचानक चमकती चीज दिखी तो 18 साल के मजदूर को लगा कि शायद कोई मामूली सिक्का है। लेकिन जब मिट्टी हटाई गई तो सामने सोने की ईंट निकली। इसके बाद जो मिला, उसकी अनुमानित कीमत करीब ₹98 करोड़ बताई गई। खजाने में दर्जनों Gold Bars और करीब 4,000 सोने के सिक्के शामिल बताए गए हैं। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा Twist इसके मिलने के बाद आया।
खजाने की खबर फैलते ही लगभग पांच लोग इसके मालिक होने का दावा लेकर सामने आ गए। इनमें एक शख्स ने तो दावा कर दिया कि उसने यह खजाना पिछले जन्म में खुद छिपाया था। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने Latvia से दावा किया कि उसके दादा कभी इसी इलाके में काम करते थे और उन्होंने परिवार को बताया था कि उन्होंने अपना पैसा एक दीवार में छिपाया है।
मामला अब सिर्फ करोड़ों के सोने की खोज नहीं, बल्कि मालिकाना हक, पुलिस जांच और एक पुराने रहस्य में बदल गया है।
18 साल के मजदूर ने कैसे खोजा ₹98 करोड़ का खजाना?
यह पूरा मामला Sint-Gillis-Dendermonde इलाके का है, जो बेल्जियम में Brussels से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित है।
An 18 year old construction worker thought he'd found a bucket of one-Euro coins. He was actually looking at $10.4 MILLION in gold, bricked into a wall by someone whose identity nobody has ever figured out.
18 वर्षीय Kobe गर्मियों की छुट्टियों में मजदूरी कर रहा था। पुरानी इमारत में renovation और sewer/drainage का काम चल रहा था। इसी दौरान मजदूर जमीन और पुरानी दीवारों के आसपास खुदाई कर रहे थे।
Kobe की नजर मिट्टी में चमक रही एक चीज पर पड़ी। उसे पहले लगा कि शायद कोई सामान्य 1 यूरो का सिक्का है। लेकिन जब उसने उसे ध्यान से देखा तो पता चला कि वह सोने की ईंट थी।
इसके बाद जब आसपास की जगह को और खोदा गया तो एक के बाद एक सोने की चीजें मिलने लगीं।
मजदूरों ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी और पूरा खजाना पुलिस के हवाले कर दिया।
आज यह ऐतिहासिक इमारत CAW Oost-Vlaanderen से जुड़ी है, जहां renovation के जरिए office और housing facilities तैयार की जा रही हैं।
यानी जिस पुराने building को renovate करने के लिए काम शुरू हुआ था, उसकी दीवार के अंदर दशकों से करोड़ों रुपये का Gold छिपा हुआ था।
आखिर किसने छिपाया था इतना सारा Gold?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा रहस्य है।
स्थानीय इतिहास के मुताबिक Van Assche परिवार काफी संपन्न था। परिवार का संबंध brewery business के साथ-साथ दूसरे कारोबार और संपत्तियों से भी था।
स्थानीय इतिहासकारों ने यह संभावना जताई है कि खजाना पुराने परिवार की संपत्ति हो सकता है। लेकिन अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि Gold Van Assche परिवार का ही था।
संभावित दावेदारों में पुराने Van Assche परिवार से जुड़े वैध उत्तराधिकारी, property से संबंधित organisation और Gold खोजने वाले workers/contractors जैसे पक्षों के अधिकारों पर विचार हो सकता है।
लेकिन फिलहाल किसी को भी Gold का मालिक घोषित नहीं किया गया है।
सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि:
Gold असल में किसका था?
इसे किसने छिपाया था?
इसे वहां कब रखा गया?
क्या इसका किसी चोरी या अपराध से संबंध है?
क्या कोई वैध उत्तराधिकारी मौजूद है?
और Belgian treasure laws के तहत finder तथा property owner के क्या अधिकार बनते हैं?
इन सवालों के जवाब के बाद ही ownership का फैसला हो सकेगा।
क्या 18 साल के Kobe को मिलेगा ₹98 करोड़ का हिस्सा?
अभी इसका जवाब हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता।
Kobe ने खजाना मिलने के बाद उसे अधिकारियों को सौंप दिया। उसने उम्मीद जताई है कि इस खोज के लिए उसे भविष्य में कोई finder’s reward मिल सकता है।
Belgian legal process के तहत संभावित असली मालिक को सामने आने का अवसर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार original owner के claim के लिए पांच साल की अवधि महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर इस दौरान कोई वैध मालिक सामने नहीं आता और Gold का criminal origin भी साबित नहीं होता, तो finder और property owner के अधिकारों का सवाल सामने आ सकता है।
इसलिए फिलहाल Kobe के हाथ में ₹98 करोड़ का Gold नहीं है। उसे सिर्फ यह उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे अपनी खोज के लिए कोई हिस्सा या reward मिल सकता है।
अगर Gold CAW को मिला तो जरूरतमंदों के काम आ सकता है पैसा
इस कहानी का एक दिलचस्प human-interest angle भी है।
जिस organisation से यह property जुड़ी है, CAW Oost-Vlaanderen, उसका काम social welfare से संबंधित है।
जानकारी के अनुसार अगर कानूनी प्रक्रिया के बाद organisation को Gold या उससे मिलने वाली रकम का अधिकार मिलता है, तो इसे housing और बेघर लोगों के लिए accommodation बढ़ाने जैसे सामाजिक कामों में इस्तेमाल करने की संभावना है।
यानी करोड़ों रुपये का यह खजाना आखिरकार किसी पुराने परिवार के पास जाता है, 18 साल के finder को हिस्सा मिलता है या जरूरतमंद लोगों के लिए इस्तेमाल होता है—इसका फैसला अभी बाकी है।
100 साल से ज्यादा पुराना रहस्य, जिसका जवाब अब भी नहीं मिला
एक तरफ 18 साल के युवक को अपने काम के दौरान जिंदगी की सबसे बड़ी खोज मिल गई।
दूसरी तरफ एक पुरानी Villa की दीवार से निकला यह Gold अब कई सवाल खड़े कर रहा है।
किसने इसे छिपाया था?
इतने सालों तक किसी को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
क्या यह Van Assche परिवार की संपत्ति थी या किसी पुराने Crime से जुड़ा Gold?
और सबसे बड़ा सवाल—
₹98 करोड़ के इस खजाने का आखिर असली मालिक कौन निकलेगा?
फिलहाल Gold सुरक्षित vault में है, पुलिस और अभियोजक मामले की जांच कर रहे हैं और ownership claims की पड़ताल जारी है। यानी 18 साल के Kobe की एक छोटी-सी खोज ने एक ऐसा रहस्य खोल दिया है, जिसका असली जवाब अभी सामने आना बाकी है।
मुंबई लोकल यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट! पश्चिम रेलवे 37 स्टैबलिंग लाइन हटाकर नायगांव-भायंदर में नई व्यवस्था बनाएगा। जानिए लोकल पर क्या असर होगा।
मुंबई: मुंबई की लोकल ट्रेन से रोज सफर करने वाले यात्रियों के लिए पश्चिम रेलवे की योजना से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। पांचवीं-छठी रेल लाइन और गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार के लिए मौजूदा स्टैबलिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत 37 मौजूदा स्टैबलिंग लाइनें हटाई जाएंगी और इनके बदले नायगांव-भायंदर के बीच नई स्टैबलिंग व्यवस्था तैयार की जाएगी।
पहली नजर में यह सिर्फ रेलवे की ट्रेन पार्किंग व्यवस्था बदलने की खबर लग सकती है, लेकिन इसके पीछे पश्चिमी उपनगरों में रेल क्षमता बढ़ाने की बड़ी योजना जुड़ी है। इसलिए इसका असर आने वाले समय में भायंदर, नायगांव, वसई, नालासोपारा और विरार की लोकल सेवाओं पर भी देखने को मिल सकता है।
37 स्टैबलिंग लाइनें आखिर क्यों हटाई जा रही हैं?
स्टैबलिंग लाइन उन जगहों को कहा जाता है जहां सेवा में नहीं रहने वाली लोकल ट्रेनों के रेक खड़े किए जाते हैं। नई मुख्य रेल लाइन बनाने के लिए जहां जगह चाहिए, वहीं इन रेक को खड़ा करने की सुविधा भी बनाए रखना जरूरी है।
इसी वजह से रेलवे पुरानी स्टैबलिंग लाइनों को हटाकर उनकी जगह दूसरी जगह नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। यानी पुरानी जगह का इस्तेमाल नई रेल परियोजनाओं के लिए होगा और लोकल रेक के लिए वैकल्पिक सुविधा नायगांव-भायंदर के बीच तैयार की जाएगी।
सबसे ज्यादा 22 लाइनें भायंदर से हटेंगी
प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत कुल 37 मौजूदा स्टैबलिंग लाइन हटाने की योजना है।
इसमें गोरेगांव उत्तर की 5, बोरीवली की 8, भायंदर की 22 और भायंदर दक्षिण की 2 लाइनें शामिल हैं।
गोरेगांव उत्तर की 5 और बोरीवली की 4 स्टैबलिंग लाइनें गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार के लिए हटाई जाएंगी। वहीं बोरीवली-विरार पांचवीं-छठी रेल लाइन के लिए बोरीवली की बाकी 4, भायंदर की 22 और भायंदर दक्षिण की 2 लाइनें हटाने का प्रस्ताव है।
इसमें सबसे बड़ा बदलाव भायंदर में होगा, जहां 22 स्टैबलिंग लाइनें हटाई जाएंगी।
फिर लोकल ट्रेनें कहां खड़ी होंगी?
यही इस योजना का अहम हिस्सा है।
रेलवे नायगांव-भायंदर के बीच रेल कॉरिडोर के पश्चिमी हिस्से में नई स्टैबलिंग सुविधा तैयार करने की योजना बना रहा है। यहां 31 नई स्टैबलिंग लाइनें बनाने का प्रस्ताव है।
इससे पुरानी लाइनें हटने के बाद भी सेवा से बाहर लोकल रेक को खड़ा करने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक जगह उपलब्ध रहेगी।
नई सुविधा के लिए करीब 6,961.53 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी। इसमें निजी, सरकारी और नमक की खेती वाली जमीन शामिल है।
स्टैबलिंग लाइन का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन लोकल रेक को खड़ा करने के लिए होता है जो उस समय सेवा में नहीं होते। इसलिए 31 नई स्टैबलिंग लाइन बनने का सीधा मतलब 31 नई लोकल ट्रेनें शुरू होना नहीं है।
लेकिन नई स्टैबलिंग सुविधा भविष्य में अतिरिक्त रेक और ट्रेन सेवाओं को संभालने के लिए जरूरी ढांचा जरूर तैयार करेगी।
मुंबई की उपनगरीय रेल क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे 12 डिब्बों वाले 238 नए रेक की खरीद की दिशा में भी काम कर रहा है। इनकी स्वीकृत लागत 19,293 करोड़ रुपये बताई गई है। मुंबई क्षेत्र में रोज करीब 3,200 उपनगरीय ट्रेन सेवाएं चलती हैं। ऐसे में रेक को खड़ा करने और रखरखाव के लिए पर्याप्त जगह भी उतनी ही जरूरी है।
असली बड़ा बदलाव बोरीवली-विरार की पांचवीं-छठी लाइन से आएगा
स्टैबलिंग लाइन का यह पूरा बदलाव बोरीवली-विरार के बीच बनने वाली पांचवीं-छठी रेल लाइन से जुड़ा है।
यह परियोजना करीब 26 किलोमीटर लंबी है और इसकी स्वीकृत लागत 2,184 करोड़ रुपये है। जुलाई 2026 के अंत तक इस परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 30 प्रतिशत बताई गई थी।
इस नई रेल क्षमता से उपनगरीय लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों को संभालने में रेलवे को ज्यादा जगह मिलेगी। अभी इस व्यस्त हिस्से में सीमित रेल क्षमता के कारण अलग-अलग सेवाओं का परिचालन एक-दूसरे पर असर डाल सकता है।
नई लाइनें तैयार होने के बाद लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को ज्यादा व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
इसी योजना का दूसरा बड़ा हिस्सा गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार है।
करीब 7 किलोमीटर के इस विस्तार के बाद हार्बर लाइन को बोरीवली तक ले जाने की योजना है। परियोजना की स्वीकृत लागत 826 करोड़ रुपये है।
इसका फायदा पश्चिमी उपनगरों के उन यात्रियों को हो सकता है जिन्हें हार्बर लाइन की तरफ जाने के लिए अभी दूसरी जगह जाकर ट्रेन बदलनी पड़ती है।
बोरीवली तक हार्बर सेवा पहुंचने के बाद पश्चिमी उपनगरों और हार्बर नेटवर्क के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकती है।
लोकल यात्रियों को असली फायदा क्या मिलेगा?
सबसे बड़ा फायदा तुरंत टिकट या किराये में नहीं, बल्कि भविष्य की रेल क्षमता में दिखाई देगा।
अगर पांचवीं-छठी लाइन, हार्बर विस्तार और नई स्टैबलिंग व्यवस्था तय योजना के मुताबिक पूरी होती है तो रेलवे के पास अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं के लिए ज्यादा परिचालन क्षमता होगी।
इससे आगे चलकर ज्यादा लोकल चलाने, सेवाओं को व्यवस्थित करने और लंबी दूरी की ट्रेनों तथा उपनगरीय ट्रेनों के बीच बेहतर संचालन की गुंजाइश बढ़ सकती है।
हालांकि सिर्फ 31 नई स्टैबलिंग लाइन के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि लोकल की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी या भीड़ तुरंत कम हो जाएगी। इसके लिए नए रेक, पटरियां, प्लेटफॉर्म, रखरखाव और समय-सारिणी में अतिरिक्त सेवाओं की जगह भी जरूरी होगी।
6,961.53 वर्ग मीटर जमीन के अधिग्रहण का सवाल
नई स्टैबलिंग व्यवस्था के लिए जमीन अधिग्रहण इस परियोजना का एक अहम हिस्सा है।
प्रस्तावित जमीन में निजी और सरकारी जमीन के साथ नमक की खेती वाली जमीन भी शामिल है। इसलिए स्थानीय स्तर पर जमीन के इस्तेमाल और प्रभावित भूखंडों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे।
हालांकि अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर बड़े पैमाने पर घरों के टूटने या लोगों के विस्थापन का दावा करना सही नहीं होगा। इसका वास्तविक असर जमीन अधिग्रहण की अंतिम प्रक्रिया और प्रभावित भूखंडों के विवरण से ही साफ होगा।
पर्यावरण पर भी रहेगी नजर
मुंबई में रेल विस्तार के साथ पर्यावरण का मुद्दा भी लगातार महत्वपूर्ण रहा है।
बोरीवली-विरार पांचवीं-छठी लाइन परियोजना में मैंग्रोव से जुड़ा पर्यावरणीय मामला पहले सामने आ चुका है। परियोजना से जुड़े दस्तावेजों में मैंग्रोव हटाने की अनुमति और उसके बदले प्रतिपूरक पौधारोपण की व्यवस्था का उल्लेख है।
इसलिए नई रेल क्षमता का फायदा महत्वपूर्ण है, लेकिन जमीन और पर्यावरण से जुड़े प्रभावों की निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी।
क्या इससे मुंबई की लोकल की भीड़ कम होगी?
यह सवाल सबसे ज्यादा यात्रियों के मन में होगा।
सीधा जवाब है—इस परियोजना से भविष्य में क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन अकेले इसी वजह से भीड़ तुरंत कम होने की गारंटी नहीं है।
रेलवे की योजना में नई पटरियों के साथ नए रेक और अतिरिक्त सेवाओं की क्षमता बढ़ाना भी शामिल है। 238 नए 12 डिब्बों वाले रेक इसी बड़े क्षमता विस्तार का हिस्सा हैं।
इसलिए आने वाले समय में अगर नई रेल लाइनें और अतिरिक्त रेक दोनों समय पर उपलब्ध होते हैं, तो पश्चिमी उपनगरों में लोकल सेवाओं को बढ़ाने की ज्यादा गुंजाइश बन सकती है।
एक आंकड़ा जो इस पूरी कहानी को समझाता है
मुंबई क्षेत्र में रोज करीब 3,200 उपनगरीय ट्रेन सेवाओं के अलावा करीब 120 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का भी परिचालन होता है।
इतने व्यस्त नेटवर्क में नई रेल लाइन का मतलब सिर्फ एक और पटरी जोड़ना नहीं है। इसके साथ ट्रेनें कहां खड़ी होंगी, कहां से चलेंगी और किस लाइन पर किस तरह का परिचालन होगा—इन सभी चीजों की योजना बनानी पड़ती है।
यही वजह है कि 37 पुरानी स्टैबलिंग लाइन हटाकर नायगांव-भायंदर में नई व्यवस्था तैयार करने का फैसला पांचवीं-छठी लाइन और हार्बर विस्तार के साथ जोड़कर देखना होगा।
31 नई लाइन का आंकड़ा क्यों अहम है?
रेलवे के पुराने सरकारी विवरण में नायगांव क्षेत्र में 30 स्टैबलिंग लाइनें दर्ज थीं, जबकि मौजूदा योजना में 31 नई स्टैबलिंग लाइन तैयार करने की बात सामने आई है।
यह अंतर अलग-अलग समय की योजना या स्टैबलिंग व्यवस्था के पुनर्गठन से जुड़ा हो सकता है। इसलिए अंतिम इंजीनियरिंग योजना के आधार पर इसकी स्थिति साफ होगी।
लेकिन इतना तय है कि रेलवे मौजूदा रेक-स्टैबलिंग व्यवस्था को नई रेल परियोजनाओं के हिसाब से दोबारा व्यवस्थित कर रहा है।
मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
बोरीवली-विरार पांचवीं-छठी रेल लाइन और गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अगर दोनों परियोजनाएं और उनसे जुड़ी स्टैबलिंग व्यवस्था तय समय पर तैयार हो जाती है, तो पश्चिमी उपनगरों में रेल नेटवर्क की तस्वीर काफी बदल सकती है।
भायंदर और नायगांव में स्टैबलिंग व्यवस्था का पुनर्गठन, बोरीवली-विरार के बीच नई रेल लाइन और बोरीवली तक हार्बर लाइन का विस्तार—ये तीनों बदलाव मिलकर पश्चिम रेलवे को भविष्य की ज्यादा ट्रेन सेवाओं के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम होंगे।
यानी 37 स्टैबलिंग लाइन हटने की यह खबर सिर्फ पुरानी ट्रेन पार्किंग जगह बदलने की कहानी नहीं है। इसके पीछे मुंबई की बढ़ती लोकल जरूरत के लिए नई रेल क्षमता तैयार करने की पूरी योजना जुड़ी हुई है।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा नियम को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऑटो-टैक्सी और ऐप कैब ड्राइवरों को बड़ी राहत दी है। ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए अब एक साल का समय मिलेगा और इस दौरान भाषा ज्ञान की कमी को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मुंबई: मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-टैक्सी और ऐप कैब ड्राइवरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को ऐलान किया कि ड्राइवरों को मराठी का कामकाजी ज्ञान हासिल करने के लिए एक साल की मोहलत दी जाएगी।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस एक साल के दौरान सिर्फ मराठी न आने के आधार पर ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पिछले कुछ दिनों में जांच, नोटिस, हड़ताल और कोर्ट में चुनौती तक मामला पहुंच चुका है। अब सवाल यह है कि पहले जिन ड्राइवरों को नोटिस मिल चुके हैं उनका क्या होगा और एक साल बाद सरकार क्या करेगी?
BREAKING UPDATE: फडणवीस ने ड्राइवरों को दी एक साल की राहत
मुख्यमंत्री ने ऑटो और कैब ड्राइवरों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया।
खबर के मुताबिक ड्राइवरों का कहना था कि वे मराठी सीखने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस पेशे में अलग-अलग उम्र और शिक्षा वाले लोग हैं। उनके लिए तुरंत भाषा सीखना आसान नहीं है।
ड्राइवरों ने एक साल का समय मांगा और सरकार ने उनकी मांग मान ली।
फडणवीस ने साफ कहा कि इस अवधि में मराठी के कामकाजी ज्ञान को लेकर ड्राइवरों पर कार्रवाई नहीं होगी।
आखिर मराठी का कितना ज्ञान जरूरी है?
यहां सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन था।
नियम का मतलब यह नहीं है कि ऑटो या कैब ड्राइवर को फर्राटेदार मराठी बोलनी होगी या मराठी साहित्य पढ़ना होगा।
फोकस कामकाजी मराठी पर है।
यानी यात्री से सामान्य बातचीत, गंतव्य समझना, किराये और रास्ते जैसी रोजमर्रा की बातें समझने-बोलने की क्षमता।
सरकार की तरफ से भी पहले कहा गया था कि ड्राइवरों से बुनियादी मराठी ज्ञान की अपेक्षा है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि अगर कोई ड्राइवर मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं दिखा पाता है तो उसके ऑथराइजेशन बैज को पहले एक महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।
इसके बाद भी भाषा नहीं सीखने पर बैज रद्द करने से पहले तीन महीने का अतिरिक्त समय देने की बात कही गई थी।
यानी ड्राइवरों को डर था कि भाषा जांच सीधे उनके रोजगार को प्रभावित कर सकती है।
अब मुख्यमंत्री ने एक साल की राहत देकर तत्काल कार्रवाई का दबाव हटा दिया है।
जांच शुरू हुई तो सामने आया बड़ा आंकड़ा
20 अगस्त से महाराष्ट्र में मराठी भाषा के कामकाजी ज्ञान की जांच शुरू हुई थी।
पहले ही दिन 8,217 ऑटो और कैब ड्राइवरों की जांच की गई और 1,268 ड्राइवरों को नोटिस दिया गया।
मुंबई महानगर क्षेत्र में 3,995 ड्राइवरों की जांच हुई थी, जिनमें 604 को नोटिस मिला।
यानी विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं था। जमीन पर जांच और नोटिस की कार्रवाई शुरू हो चुकी थी।
अब सबसे बड़ा सवाल: जिनको नोटिस मिल चुका है उनका क्या?
यही इस समय सबसे अहम सवाल है।
सरकार ने आगे एक साल तक मराठी की कमी के आधार पर कार्रवाई नहीं करने की बात कही है, लेकिन पहले से जारी नोटिसों का प्रशासनिक तौर पर क्या होगा, इस पर स्पष्ट आदेश का इंतजार रहेगा।
इसके लिए 161 मराठी प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। ड्राइवरों की शिकायतों और समस्याओं के लिए हेल्पलाइन की व्यवस्था की बात भी कही गई है।
अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि एक साल की इस राहत को सिर्फ समय देने तक सीमित न रखकर वास्तव में प्रशिक्षण तक पहुंचाया जाए।
इसी विवाद में मुंबई में हड़ताल भी हुई थी
मराठी नियम के खिलाफ मुंबई में ऑटो चालकों ने तीन दिन की हड़ताल की थी।
कांदिवली समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और रास्ता रोको भी हुआ। हड़ताल का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा और कई जगह ऑटो की उपलब्धता प्रभावित हुई।
ड्राइवरों की सबसे बड़ी चिंता रोजगार को लेकर थी।
उनका कहना था कि भाषा सीखने में समय लग सकता है, लेकिन अगर इसी दौरान बैज या काम करने की अनुमति पर कार्रवाई हुई तो परिवार की कमाई पर असर पड़ेगा।
चार ऐप आधारित कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर 12 अगस्त के नियम को चुनौती दी है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 समेत कई कानूनी आधारों का हवाला दिया गया है।
इसलिए फडणवीस का आज का फैसला अदालत में चल रही चुनौती को खत्म नहीं करता।
सरकार की एक साल की प्रशासनिक राहत अलग मामला है और नियम की कानूनी वैधता का सवाल अलग।
2017 का पुराना विवाद फिर क्यों चर्चा में?
इस कहानी का एक पुराना कनेक्शन भी है।
2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऑटो परमिट के लिए मराठी भाषा को शर्त बनाने वाले सरकारी परिपत्र को अवैध माना था।
2026 में स्थिति यह है कि मराठी के कामकाजी ज्ञान को मोटर वाहन नियमों में संशोधन के जरिए शामिल किया गया है।
यही वजह है कि पुराने फैसले को मौजूदा विवाद में फिर से देखा जा रहा है।
मुंबई के यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले का सबसे सीधा असर ड्राइवरों के साथ-साथ यात्रियों पर भी पड़ सकता है।
पिछली हड़ताल में कई मुंबईकरों को स्टेशन, ऑफिस और रोजमर्रा के काम पर जाने के लिए परेशानी हुई थी। ऑटो की उपलब्धता प्रभावित होने से यात्रियों को दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ा।
एक साल की राहत से फिलहाल भाषा जांच को लेकर तत्काल टकराव और विरोध का दबाव कम हो सकता है।
हालांकि इससे किराया या ऑटो की उपलब्धता में कोई तत्काल बदलाव होगा, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।
समाज पर क्या असर पड़ेगा?
मराठी का बुनियादी ज्ञान ड्राइवर और यात्री के बीच संवाद को आसान बना सकता है। खासकर उन यात्रियों के लिए जिन्हें हिंदी या अंग्रेजी में बातचीत करने में परेशानी होती है।
लेकिन मुंबई सिर्फ एक भाषा वाला शहर नहीं है।
यहां अलग-अलग राज्यों से आए ड्राइवर काम करते हैं और कई ड्राइवर यात्रियों से हिंदी के अलावा गुजराती, तमिल, बंगाली, मलयालम जैसी भाषाओं में भी बातचीत करते हैं।
इसलिए असली चुनौती यह है कि स्थानीय भाषा के सम्मान और ड्राइवरों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
आज का फैसला ड्राइवरों के लिए बड़ी राहत है, लेकिन मराठी भाषा वाला नियम खत्म नहीं हुआ है।
एक साल का समय ड्राइवरों को तैयारी का मौका देता है। सरकार को इस दौरान प्रशिक्षण और नियमों की प्रक्रिया स्पष्ट करनी होगी।
और सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि एक साल पूरा होने के बाद भाषा जांच किस तरीके से होगी और मराठी का कामकाजी ज्ञान साबित करने के लिए क्या मानक रखा जाएगा।
फिलहाल इतना साफ है कि जिस नियम को लेकर कुछ दिन पहले मुंबई की सड़कों पर विरोध और हड़ताल की स्थिति बन गई थी, उसमें सरकार ने अब सख्ती के बजाय एक साल की मोहलत का रास्ता चुना है।
मुंबई के ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए फिलहाल राहत की खबर है, लेकिन इस विवाद का आखिरी अध्याय अभी बाकी है।