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केंद्र के केस वापसी के आश्वासन के बावजूद CJP प्रदर्शनकारियों को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस मिलने पर विवाद बढ़ गया है। पुलिस ने जांच जारी रखने की वजह स्पष्ट की है।
मुंबई: दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए हुए समझौते के बाद उम्मीद थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों में राहत मिलेगी। लेकिन मुंबई में कई प्रदर्शनकारियों को अब भी पुलिस नोटिस मिलने और बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसे जांच रोकने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है।
आखिर नोटिस क्यों मिल रहे हैं?
मुंबई पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह CJP समर्थित प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR की जांच कानून के मुताबिक जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी की ओर से लिखित निर्देश नहीं मिलते, जांच बीच में नहीं रोकी जा सकती। इसलिए जिन लोगों के बयान दर्ज होने बाकी हैं, उन्हें प्रक्रिया के तहत बुलाया जा रहा है।
पुलिस ने क्या सफाई दी?
मुंबई पुलिस ने सोमवार को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि केस वापसी के आश्वासन के बाद भी नए नोटिस भेजे जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं हुआ और जिन नोटिसों की चर्चा हो रही है, वे पहले ही जारी किए जा चुके थे।
25 जुलाई को केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने घोषणा की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी घोषणा के बाद CJP ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था।
The bjp regime MUST withdraw all the notices, FIRs and stop intimidation of students.
For all those who have received these notices, we will stand with you, just like we did during the protests.
We have begun our legal work and will fight pro bono anyway, for all those who are…
CJP का आरोप है कि समझौते के बाद भी कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को नोटिस मिल रहे हैं और पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार अपने आश्वासन के अनुरूप जल्द लिखित कार्रवाई नहीं करती, तो वह दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।
कानूनी प्रक्रिया में कहां है अड़चन?
कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी FIR को वापस लेने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक घोषणा से पूरी नहीं होती। इसके लिए प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। कई मामलों में जांच पूरी होने, संबंधित प्राधिकरण की सिफारिश और अदालत की प्रक्रिया भी आवश्यक हो सकती है। इसी कारण घोषणा और वास्तविक केस वापसी के बीच समय लग सकता है।
जिन छात्रों और युवाओं को नोटिस मिले हैं, उनका कहना है कि सरकार के आश्वासन के बाद उन्हें लगा था कि पुलिस कार्रवाई रुक जाएगी। लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से उनके बीच असमंजस बना हुआ है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि यह नियमित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अंतिम निर्णय सरकार एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल दो बातें साफ हैं। पहली, केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का सार्वजनिक आश्वासन दिया था। दूसरी, मुंबई पुलिस का कहना है कि उसे जांच रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है और 26 जुलाई के बाद नए नोटिस भी जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में आगे की स्थिति सरकार की औपचारिक कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
IndiGo की दुबई से मुंबई आ रही फ्लाइट 6E1452 की राजकोट में इमरजेंसी लैंडिंग हुई। कार्गो होल्ड में धुआं मिलने के बाद विमान सुरक्षित उतरा।
मुंबई: दुबई से मुंबई आ रही IndiGo की फ्लाइट 6E1452 को सोमवार, 27 जुलाई 2026 को गुजरात के राजकोट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। विमान के कार्गो होल्ड एरिया में धुआं detect होने के बाद फ्लाइट को राजकोट डायवर्ट किया गया। विमान सुरक्षित लैंड हुआ और उसमें सवार सभी 194 लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
कार्गो होल्ड में धुआं मिलने के बाद लिया गया फैसला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, IndiGo की फ्लाइट दुबई से मुंबई के लिए उड़ान भर रही थी। उड़ान के दौरान विमान के कार्गो होल्ड क्षेत्र में धुएं का संकेत मिलने के बाद चालक दल ने एहतियाती कदम उठाया।
इसके बाद विमान को राजकोट इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, राजकोट एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क कर इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी गई।
194 यात्री और क्रू सुरक्षित
विमान के राजकोट एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरने के बाद सभी यात्रियों को विमान से उतार लिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फ्लाइट में कुल 194 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे।
राजकोट एयरपोर्ट के निदेशक दिगंत बोरा के अनुसार, विमान सुरक्षित रूप से लैंड हुआ और सभी यात्री सुरक्षित हैं। एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस सहित आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखा गया था।
फिलहाल विमान की तकनीकी जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में कार्गो होल्ड में धुआं detect होने की बात सामने आई है, लेकिन धुआं किस वजह से उठा, इसकी अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अधिकारियों की जांच के बाद ही घटना के वास्तविक कारण की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। अभी तक किसी बड़े नुकसान या यात्रियों के घायल होने की सूचना नहीं है।
मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए अहम अपडेट
यह फ्लाइट दुबई से मुंबई जा रही थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे राजकोट डायवर्ट किया गया। इसलिए मुंबई पहुंचने वाले यात्रियों की आगे की यात्रा और फ्लाइट ऑपरेशन को लेकर IndiGo तथा एयरपोर्ट अधिकारियों की ओर से आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
Cyber fraud में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों की जांच मुंबई के SIM retailers तक पहुंची। पुलिस KYC नियमों के कथित उल्लंघन और financial trail की जांच कर रही है।
मुंबई: साइबर फ्रॉड के मामलों की तकनीकी जांच करते हुए पुलिस एक ऐसे नेटवर्क तक पहुंची है, जिसमें मुंबई के कुछ SIM retailers की भूमिका जांच के दायरे में आई है। पुलिस के मुताबिक, इन retailers पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर अनिवार्य KYC प्रक्रिया का पालन किए बिना या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर SIM cards activate किए। जांच एजेंसियों को शक है कि इनमें से कुछ connections का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के cyber fraud में किया गया।
मामले में South Cyber Police ने Police Constable Santosh Amrutrao Galande की शिकायत पर FIR दर्ज की है। पुलिस ने cheating, forgery, forged documents के इस्तेमाल और criminal conspiracy से संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू की है।
Cyber fraud की जांच करते-करते SIM retailers तक पहुंची पुलिस
पुलिस के मुताबिक, 18 अप्रैल से 27 जून के बीच National Cyber Crime Reporting Portal और Samanvay Portal पर दर्ज शिकायतों की technical analysis के दौरान कई mobile numbers सामने आए।
जांच में इन numbers को track करने पर उनका connection मुंबई के अलग-अलग SIM retailers तक पहुंचा। पुलिस को शक है कि कुछ SIM cards में mandatory KYC verification का पालन नहीं किया गया या activation के लिए कथित तौर पर forged identity documents का इस्तेमाल हुआ।
जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि ऐसे connections बाद में cyber criminals तक पहुंचे, जिन्होंने उनका इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में लोगों को ठगने के लिए किया।
Bhandup, Kandivali और Andheri के retailers जांच के घेरे में
जांच के दौरान Bhandup, Kandivali और Andheri के कुछ retailers का नाम सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इन retailers से activate किए गए कुछ SIM cards अलग-अलग cybercrime मामलों की जांच में सामने आए।
इन numbers का संबंध महाराष्ट्र के Wakad, Mundhwa, Chikalthana, Satpur, Ambazari, Wagholi, RCF, Mhasrul और Versova में दर्ज cybercrime cases से भी जोड़ा जा रहा है।
हालांकि, जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संबंधित retailers ने जानबूझकर KYC नियमों को दरकिनार किया था या किसी अन्य व्यक्ति ने उनके credentials का गलत इस्तेमाल किया।
Police अब financial trail और call records खंगाल रही है
जांच अब केवल SIM activation तक सीमित नहीं है। पुलिस suspected retailers और intermediaries के bank accounts, financial transactions और Call Detail Records यानी CDR की जांच कर रही है।
इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि:
क्या SIM cards को अवैध तरीके से activate करने के बदले किसी तरह का financial benefit लिया गया?
क्या retailers और cyber fraud network के बीच सीधा connection था?
क्या इस network का विस्तार महाराष्ट्र से बाहर तक है?
जांच के दौरान Rahul Communication, Abhi Telecom, Mahakal Mobile और Aditya Telecom जैसे establishments के साथ-साथ Kandivali और Andheri के कुछ अन्य retailers भी जांच के दायरे में बताए गए हैं।
हालांकि, केवल जांच में नाम सामने आना किसी व्यक्ति या retailer को अपराध का दोषी साबित नहीं करता। प्रत्येक आरोपी की भूमिका जांच पूरी होने और अदालत में मामले के नतीजे के बाद ही स्पष्ट होगी।
Fake SIM cards से cybercrime investigation को क्यों होती है परेशानी?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गलत या फर्जी पहचान के आधार पर जारी किए गए SIM cards cybercrime investigations के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
Cyber fraud में इस्तेमाल होने वाला mobile number अगर किसी वास्तविक उपयोगकर्ता की सही पहचान से जुड़ा न हो, तो जांच एजेंसियों के लिए असली operator तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे connections का इस्तेमाल कथित तौर पर fake job offers, online trading scams और lottery fraud जैसे मामलों में किया जा सकता है।
पुलिस का मानना है कि SIM activation process में KYC नियमों का सख्ती से पालन cybercrime network को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Police ने नागरिकों से क्या अपील की?
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे SIM card activation के लिए अपने identity documents किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध माध्यम से साझा न करें।
इसके अलावा fake investment schemes, fraudulent job offers या suspicious calls के शिकार होने पर नागरिक National Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत कर सकते हैं या National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से online complaint दर्ज करा सकते हैं।
फिलहाल पुलिस financial transactions, call records और suspected SIM activation chain की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि SIM retailers की भूमिका क्या थी और क्या यह नेटवर्क किसी बड़े cyber fraud ecosystem से जुड़ा है।
Official Sources
इस Research Material में FIR, Police Press Release या Court Document का direct verified link उपलब्ध नहीं है। इसलिए बिना URL verification के कोई specific official link जोड़ना उचित नहीं होगा।
Fake SIM cards का इस्तेमाल cyber fraud में कैसे किया जाता है?
पुलिस जांच के मुताबिक, गलत या फर्जी KYC details पर activate किए गए SIM cards का इस्तेमाल fraudsters अपनी पहचान छिपाने और victims से संपर्क करने के लिए कर सकते हैं।
मुंबई में किन इलाकों के SIM retailers जांच के दायरे में हैं?
जांच में Bhandup, Kandivali और Andheri के कुछ retailers के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी वास्तविक भूमिका की जांच कर रही है।
क्या जांच में नाम आने से retailers दोषी साबित हो जाते हैं?
नहीं। जांच में नाम सामने आना या किसी connection का किसी case में इस्तेमाल होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
Cyber fraud की शिकायत कहां करें?
Cyber fraud की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। Online complaint National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज की जा सकती है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद NEET विवाद के साथ NTA, NCERT, UGC नियम, भाषा नीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा NEET-UG विवाद की हो रही है, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान परीक्षा व्यवस्था, NTA, पाठ्यक्रम, UGC के नियम और भाषा नीति से जुड़े कई मुद्दे भी लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे।
NEET विवाद बना सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर रही। NEET-UG से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ाई। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े आरोपों के बाद जांच, परीक्षा प्रक्रिया और राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
2024 में NEET-UG के परिणाम और ग्रेस मार्क्स को लेकर विवाद हुआ था। कुछ प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी NEET-UG 2024 के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए पुनः परीक्षा का उल्लेख है।
इसके बाद 2026 में NEET को लेकर विवाद और गंभीर हो गया। परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। मामले की जांच CBI को सौंपे जाने और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की चर्चा के बीच छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर भरोसे का सवाल बड़ा मुद्दा बन गया।
#WATCH | Delhi: Visuals from Jantar Mantar, where protesters celebrate after the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan
After holding the third round of talks with the government, Cockroach Janta Party withdrew its agitation and appealed to the protestors to… pic.twitter.com/rQ1gixr02X
यही विवाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तत्काल राजनीतिक संदर्भ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हालांकि उनके इस्तीफे को केवल उनके पूरे कार्यकाल के विवादों का सीधा परिणाम बताना उचित नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया और शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा।
NTA की कार्यप्रणाली पर लगातार उठते रहे सवाल
NEET के अलावा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली भी धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में लगातार चर्चा में रही। NEET, JEE, CUET और UGC-NET जैसी बड़ी परीक्षाओं का आयोजन करने वाली एजेंसी को परीक्षा प्रबंधन, तकनीकी समस्याओं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा।
UGC-NET जून 2024 की परीक्षा भी विवादों में आई। परीक्षा के बाद इसे रद्द कर दिया गया और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड में UGC-NET जून 2024 की पुनर्निर्धारित परीक्षा और बाद की प्रक्रिया दर्ज है।
The resignation of Dharmendra Pradhan reflects the strength of India’s democracy and the government’s willingness to listen, understand public sentiment, and act with accountability. For those who called this government a “dictatorship”, democracy has answered #DharmendraPradhanpic.twitter.com/p8tflcdZxJ
लगातार एक के बाद एक परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने यह सवाल खड़ा किया कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को संचालित करने वाली व्यवस्था में क्या बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है।
NCERT की किताबों में बदलाव पर भी हुआ विवाद
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम और NCERT की किताबों में बदलाव को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ।
NCERT ने पाठ्यक्रम के कुछ हिस्सों को कम करने के लिए ‘rationalisation’ की प्रक्रिया अपनाई। सरकार की ओर से इसे छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने और पाठ्यक्रम को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा गया। NCERT की वेबसाइट पर भी पाठ्यपुस्तकों में rationalised content की सूची उपलब्ध है।
हालांकि विपक्ष और कुछ शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम में बदलाव के दौरान इतिहास और राजनीति से जुड़े कुछ संवेदनशील विषयों को हटाने या कम करने का प्रभाव पड़ा। मुगल इतिहास, गुजरात दंगों और लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े हिस्सों को लेकर भी राजनीतिक बहस हुई।
यह विवाद केवल किताबों में बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा में पाठ्यक्रम और इतिहास की प्रस्तुति को लेकर व्यापक वैचारिक बहस में बदल गया।
#WATCH | Delhi: Visuals from Jantar Mantar, where protesters celebrate after the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan pic.twitter.com/WVNhFgjQG9
नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 भी धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के प्रमुख मुद्दों में रही। शिक्षा नीति को लागू करने के दौरान तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर केंद्र और कुछ राज्यों के बीच मतभेद सामने आए।
विशेष रूप से तमिलनाडु जैसे राज्यों ने हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की आशंका जताई। राज्य सरकारों का तर्क रहा कि भाषा नीति में राज्यों की भाषाई और सांस्कृतिक परिस्थितियों का पर्याप्त ध्यान रखा जाना चाहिए।
केंद्र की ओर से लगातार यह कहा गया कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य किसी एक भाषा को थोपना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसके बावजूद भाषा नीति का मुद्दा केंद्र-राज्य संबंधों में एक संवेदनशील राजनीतिक विषय बना रहा।
UGC के नियमों को लेकर विश्वविद्यालयों में बढ़ी बहस
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी UGC से जुड़े नियमों को लेकर विवाद सामने आए। विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति, उच्च शिक्षा के नियमन और केंद्र तथा राज्यों की भूमिका को लेकर कई बहस हुईं।
कुलपति नियुक्ति और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े नियमों में केंद्र, राज्यपाल और विश्वविद्यालयों की भूमिका को लेकर अलग-अलग राज्यों और शिक्षाविदों ने सवाल उठाए। UGC के मौजूदा नियामक ढांचे में कुलपति चयन और नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए Search-cum-Selection Committee जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
इन मुद्दों ने उच्च शिक्षा में स्वायत्तता, राज्य सरकारों की भूमिका और केंद्र के नियामक अधिकारों को लेकर बहस को तेज किया।
PM SHRI स्कूल योजना पर भी केंद्र-राज्य मतभेद
प्रधान के कार्यकाल में PM SHRI स्कूल योजना भी राजनीतिक बहस का विषय बनी। योजना के तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक और मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि कुछ राज्यों ने योजना से जुड़ी शर्तों और नई शिक्षा नीति के साथ इसके संबंध को लेकर आपत्ति जताई। इससे शिक्षा क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और अधिकारों को लेकर बहस सामने आई।
CBSE और परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था पर भी सवाल
शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े बदलाव भी पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहे। CBSE की डिजिटल और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सामने आईं।
तकनीक आधारित मूल्यांकन का उद्देश्य प्रक्रिया को तेज और अधिक व्यवस्थित बनाना था, लेकिन जब छात्रों को परिणाम या मूल्यांकन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा, तो व्यवस्था की पारदर्शिता और तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
क्या सिर्फ NEET विवाद बना इस्तीफे की वजह?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या केवल NEET विवाद इसके पीछे था।
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना अधिक सही होगा कि NEET-UG विवाद इस्तीफे का तत्काल और सबसे प्रमुख राजनीतिक संदर्भ बना, जबकि उनके कार्यकाल के दौरान NTA की कार्यप्रणाली, UGC-NET, पाठ्यक्रम में बदलाव, भाषा नीति और उच्च शिक्षा के नियमों से जुड़े विवादों ने शिक्षा मंत्रालय के सामने लगातार चुनौतियां पैदा कीं।
इसलिए धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा विवाद के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन व्यापक मुद्दों के संदर्भ में भी किया जाएगा।
Bottom Line: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब देश में परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के भरोसे को लेकर गंभीर बहस चल रही है। NEET विवाद तत्काल कारणों के केंद्र में रहा, लेकिन उनके कार्यकाल की राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां इससे कहीं व्यापक थीं।
क्या धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है?
हां। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
धर्मेंद्र प्रधान के बाद शिक्षा मंत्रालय किसे मिला है?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
क्या NEET विवाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुख्य कारण था?
NEET-UG विवाद इस्तीफे के तत्काल राजनीतिक संदर्भ का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। हालांकि उनके कार्यकाल में NTA, UGC-NET, NCERT पाठ्यक्रम, भाषा नीति और उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य विवाद भी चर्चा में रहे।
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कौन-कौन से शिक्षा विवाद चर्चा में रहे?
NEET-UG और NTA की कार्यप्रणाली, UGC-NET परीक्षा, NCERT पाठ्यक्रम में बदलाव, NEP के तीन भाषा फॉर्मूले, UGC नियम और केंद्र-राज्य शिक्षा विवाद प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।
मुंबई में NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन WhatsApp, Instagram और लाइव लोकेशन के जरिए बड़ा आंदोलन बन गया। जानिए कैसे युवाओं ने इसे आगे बढ़ाया।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब केवल एक जगह तक सीमित नहीं रहा। आजाद मैदान में छात्रों के बीच शुरू हुआ संपर्क WhatsApp ग्रुप, Instagram अपडेट और लाइव लोकेशन के जरिए तेजी से फैलता गया। पुलिस हिरासत, FIR और नोटिस के बावजूद छात्र, युवा कर्मचारी, अभिभावक और अन्य नागरिक अलग-अलग जगहों पर जुटते रहे। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि इसे किसी एक नेता या राजनीतिक बैनर ने नहीं चलाया।
आजाद मैदान से शुरू हुई पहल कैसे बढ़ती गई?
मुंबई में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत आजाद मैदान में हुई, जहां NEET से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर लोग जुटे थे। शुरुआत में प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं ने एक-दूसरे से फोन नंबर साझा किए।
इसके बाद एक छोटा WhatsApp ग्रुप बनाया गया। कुछ ही समय में यह ग्रुप बढ़ता गया और प्रदर्शन से जुड़े लोगों के बीच सूचना साझा करने का माध्यम बन गया। आगे चलकर ऐसे कई ग्रुप बनाए गए, जिनमें प्रदर्शन की जगह, पुलिस कार्रवाई और नई गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा की जाने लगी।
मुंबई में आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल लोगों को बुलाने के लिए नहीं किया, बल्कि बदलती परिस्थितियों की जानकारी देने के लिए भी किया। इसी वजह से प्रदर्शन का स्वरूप एक तय मंच से निकलकर अलग-अलग जगहों पर फैलता गया।
सोशल मीडिया ने प्रदर्शन का तरीका बदल दिया
मुंबई के इन प्रदर्शनों में डिजिटल नेटवर्किंग की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। WhatsApp ग्रुपों के जरिए लोग एक-दूसरे को अपडेट देते रहे, जबकि Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैलते रहे।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब किसी जगह पुलिस की कार्रवाई या हिरासत की जानकारी सामने आती थी, तो अन्य लोग अपने कार्यक्रम और पहुंचने के तरीके को उसी हिसाब से बदलते थे। लाइव लोकेशन साझा करने से अलग-अलग इलाकों में मौजूद लोग एक-दूसरे से जुड़ते रहे।
इसी डिजिटल नेटवर्क के कारण आंदोलन का कोई एक चेहरा या केंद्रीय नेतृत्व दिखाई नहीं दिया। एक जगह कार्रवाई होने के बाद भी दूसरे स्थानों पर लोग जुटते रहे। मुंबई में शिवाजी पार्क, चेंबूर, पवई, मानखुर्द और घाटकोपर समेत कई इलाकों में प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद भीड़ कम नहीं हुई
प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और अलग-अलग मामलों में FIR तथा नोटिस की कार्रवाई भी की। कुछ मामलों में पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं होने का हवाला दिया।
शिवाजी पार्क में हुए एक प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ कथित गैरकानूनी जमावड़े का मामला दर्ज किया था। इसके बाद कई प्रतिभागियों को पुलिस की ओर से नोटिस भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई।
हालांकि, कार्रवाई के बावजूद विरोध प्रदर्शन पूरी तरह रुका नहीं। कई युवाओं का कहना था कि वे केवल किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुए।
युवाओं के साथ अभिभावक और कामकाजी लोग भी जुड़े
मुंबई के प्रदर्शन में केवल NEET की तैयारी करने वाले छात्र ही शामिल नहीं थे। कई युवा कर्मचारी, अभिभावक और अन्य नागरिक भी प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचे।
कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें लगता है कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं हैं। उनका असर परिवारों और पूरे समाज पर पड़ता है।
इसी वजह से प्रदर्शन में ऐसे लोग भी दिखाई दिए, जिनका खुद NEET परीक्षा से सीधा संबंध नहीं था। उनका तर्क था कि किसी समस्या के खिलाफ आवाज उठाने के लिए यह जरूरी नहीं कि उसका सीधा असर पहले खुद पर पड़े।
22 जुलाई के प्रदर्शन की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई
मुंबई के एक प्रदर्शन के दौरान एक युवती का पुलिस वाहन के सामने खड़े होने का वीडियो और तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वह उस वाहन के सामने खड़ी हो गई जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों को ले जाया जा रहा था।
इस घटना ने आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर बहस को और तेज कर दिया। घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं और यह प्रदर्शन से जुड़ी सबसे चर्चित दृश्यात्मक घटनाओं में शामिल हो गई।
राजनीतिक दल जुड़े, लेकिन युवाओं का आंदोलन अलग बना रहा
बाद के चरण में शिवसेना (UBT), MNS और उनके नेताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को राजनीतिक ध्यान भी दिलाया। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत राजनीतिक नेताओं ने छात्रों के मुद्दे पर समर्थन जताया।
हालांकि, प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने यह स्पष्ट किया कि उनकी भागीदारी किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन से ज्यादा शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। कुछ प्रदर्शनों में राजनीतिक बैनर से दूर रहने की अपील भी की गई।
यही कारण है कि इस आंदोलन का एक हिस्सा राजनीतिक समर्थन मिलने के बावजूद खुद को किसी एक पार्टी से अलग रखता दिखाई दिया।
मुंबई में विरोध का नया डिजिटल मॉडल?
मुंबई के NEET विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि आज किसी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा एक केंद्रीय संगठन या बड़ा नेता जरूरी नहीं है।
एक छोटे समूह से शुरू हुई बातचीत, लगातार बढ़ते WhatsApp नेटवर्क, सोशल मीडिया अपडेट और मौके के हिसाब से लोगों के जुटने की क्षमता ने प्रदर्शन को तेजी से विस्तार दिया। इस मॉडल में सूचना का प्रसार पारंपरिक मंचों के बजाय मोबाइल फोन और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए हुआ।
हालांकि, ऐसे आंदोलनों में गलत जानकारी और अपुष्ट दावों के फैलने का जोखिम भी रहता है। इसलिए किसी भी प्रदर्शन की जगह, पुलिस कार्रवाई या कानूनी स्थिति से जुड़ी जानकारी को आधिकारिक पुष्टि के बाद ही विश्वसनीय माना जाना चाहिए।
मुंबई में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शन अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां छात्र मुद्दे के साथ-साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और नागरिक अधिकारों पर भी बहस तेज हो गई है। आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों की घटनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
प्रदर्शनकारी NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं।
मुंबई का NEET Protest कैसे बड़ा आंदोलन बना?
आजाद मैदान में छात्रों के बीच फोन नंबर साझा करने से शुरू हुई पहल WhatsApp ग्रुप, Instagram अपडेट और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए तेजी से फैलती गई।
क्या मुंबई के प्रदर्शन का कोई एक नेता था?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन का एक बड़ा हिस्सा किसी एक केंद्रीय नेता के नेतृत्व में नहीं चल रहा था। अलग-अलग समूह सोशल मीडिया और आपसी संपर्क के जरिए जुड़े रहे।
क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई?
हां। विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान हिरासत, FIR और पुलिस नोटिस की कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई है। कार्रवाई की प्रकृति अलग-अलग मामलों में अलग रही।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मुंबई में कांग्रेस नेताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। सचिन सावंत ने इसे छात्रों और युवाओं की जीत बताया।
(मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने इसे छात्रों और युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बताया। मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि यह युवाओं और लोकतंत्र की जीत है, जबकि पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। यह फैसला NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद, कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच आया। उनके इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव और छात्र आंदोलन की सफलता के रूप में पेश किया।
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई।
सचिन सावंत ने कहा कि देश के युवाओं ने लोकतंत्र और जवाबदेही की ताकत दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के संघर्ष और विपक्ष के दबाव के बाद सरकार को आखिरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के रूप में जवाब देना पड़ा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सावंत ने कहा कि युवाओं ने यह संदेश दिया है कि देश में लोकतंत्र है और सरकार को जनता तथा छात्रों के सवालों का जवाब देना होगा।
सचिन सावंत ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर भी साधा निशाना
सचिन सावंत ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और सरकार को परीक्षा व्यवस्था में सामने आए विवादों की व्यापक जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
मुंबई कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत की फाइल तस्वीर
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने युवाओं के बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बताया।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं के इन राजनीतिक आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन दावों के अलग-अलग हिस्सों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर की जानी होगी।
कांग्रेस ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस लंबे समय से शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठा रही थी। पार्टी ने NEET विवाद और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के समर्थन में अभियान चलाया था। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की भी मांग की थी।
अब इस्तीफे के बाद पार्टी इसे छात्रों, युवाओं और विपक्ष के दबाव का परिणाम बता रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
NEET विवाद के बीच आया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG 2026 से जुड़ी कथित अनियमितताओं और उसके बाद हुए छात्र आंदोलनों के बीच आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा विवाद के बाद जांच, परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने जैसे कदम उठाए गए। इसके बाद भी छात्रों और विपक्ष की ओर से जवाबदेही की मांग जारी रही।
अपने इस्तीफे के पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों का भविष्य और राष्ट्रीय हित उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने परीक्षा विवाद से निपटने के दौरान सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मामले की जिम्मेदारी से पीछे हटने की कोशिश नहीं की।
FAQ
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 से जुड़े विवाद, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।
कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या किया?
मुंबई में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। पार्टी ने इस्तीफे को छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताया।
सचिन सावंत ने क्या कहा?
सचिन सावंत ने इस्तीफे को युवाओं और लोकतंत्र की जीत बताया और केंद्र सरकार से परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की।
मुंबई में छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाला पुलिस ड्राइवर सस्पेंड, वायरल वीडियो पर जांच शुरू।
मुंबई: NEET धोखाधड़ी के खिलाफ मुंबई में प्रदर्शन कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाले पुलिस ड्राइवर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। वायरल वीडियो के बाद मुंबई पुलिस ने विभागीय जांच के आदेश दिए और संबंधित पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया है। वीडियो में छात्रों को दोबारा प्रदर्शन करने पर उनके बैग में ड्रग्स रखने की धमकी दिए जाने का आरोप है।
मुंबई में NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी छात्र प्रदर्शनों के बीच एक वायरल वीडियो ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर हिरासत में लिए गए छात्रों को दोबारा प्रदर्शन में शामिल होने पर उनकी जिंदगी बर्बाद करने और उन्हें ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देता सुनाई दे रहा है।
मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की और संबंधित पुलिस ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की। खबर के मुताबिक, पुलिसकर्मी की पहचान पवन सांगले के रूप में हुई है, जो मुंबई पुलिस के Motor Transport विभाग से जुड़े ड्राइवर हैं और सायन पुलिस स्टेशन से अटैच बताए गए हैं।
वायरल वीडियो में छात्रों को क्या कहते सुनाई दे रहा है?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस वाहन के अंदर मौजूद एक पुलिसकर्मी छात्रों को कथित तौर पर प्रदर्शन में दोबारा नहीं आने की चेतावनी देता सुनाई दे रहा है।
वीडियो में वह कथित रूप से कहता है कि अगर छात्र दोबारा प्रदर्शन में दिखाई दिए तो उनके बैग या जेब में “50 ग्राम पाउडर” रखकर उन्हें ड्रग्स केस में फंसाया जा सकता है। वह यह भी कहता सुनाई देता है कि ऐसी कार्रवाई से छात्रों की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी और उन्हें जमानत मिलने में परेशानी होगी।
हालांकि, वायरल वीडियो की परिस्थितियों और उसके पूरे संदर्भ की जांच आधिकारिक जांच का विषय है। इसलिए वीडियो में कही गई बातों को पुलिसकर्मी के खिलाफ अंतिम रूप से साबित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि वायरल वीडियो में दिखाई और सुनाई दे रहे कथित बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुंबई पुलिस ने जांच के आदेश दिए, पुलिस ड्राइवर सस्पेंड
वीडियो सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच पूरी होने तक संबंधित ड्राइवर को उसकी मौजूदा पोस्टिंग से हटाया गया है। बाद में उसके सस्पेंड किए जाने की जानकारी दी गई।
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मी का नाम पवन सांगले बताया गया है। वह मुंबई पुलिस के Motor Transport विभाग से जुड़े ड्राइवर हैं। वह प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ड्यूटी पर तैनात थे।
फिलहाल, विभागीय जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि वीडियो में कही गई धमकी किन परिस्थितियों में दी गई, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि क्या थी और क्या पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे कोई अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य राजनीतिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कांग्रेस की मुंबई इकाई ने आरोप लगाया कि अगर वीडियो में दिखाई दे रही घटना सही है, तो यह छात्रों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने का गंभीर मामला है।
एक वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि @MumbaiPolice प्रदर्शन कर रहे छात्रों को धमका रही है कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन करने लौटे, तो उन्हें झूठे ड्रग्स के मामले में फँसा दिया जाएगा और पूरी ज़िंदगी जेल में सड़ना पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी और Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े लोगों ने भी वीडियो को लेकर पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को संबंधित दलों के आरोप और बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुंबई में छात्र प्रदर्शनों के बीच बढ़ा विवाद
मुंबई में हाल के दिनों में छात्रों और समर्थकों ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर विवाद बढ़ा है।
मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक शहर में पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगाने वाला आदेश भी जारी किया था। आदेश में जुलूस और कुछ अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। यह आदेश DCP (Operations) अकबर पठान द्वारा जारी किया गया था।
इसी पृष्ठभूमि में वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर सार्वजनिक बहस और तेज हो गई है।
अब जांच के नतीजे पर नजर
मुंबई पुलिस की विभागीय जांच इस पूरे मामले में अहम होगी। जांच के दौरान वीडियो की प्रामाणिकता, घटना का पूरा संदर्भ और संबंधित पुलिसकर्मी के आचरण की जांच की जाएगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वायरल वीडियो के बाद संबंधित पुलिस ड्राइवर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है और उसे सस्पेंड किया गया है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
इस मामले ने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस व्यवहार और कानून के संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय विभागीय जांच के नतीजे का इंतजार करना जरूरी है। मुंबई पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले के सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित ने सरकार पर तीखा हमला बोला। भगत सिंह और लाला लाजपत राय का भी किया जिक्र।
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुंबई के समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में वह प्रदर्शन के दृश्यों पर सरकार और पुलिस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और बच्चों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं और कहा कि ऐसे आंदोलनों से देश की युवा पीढ़ी और ज्यादा जागरूक होती है।
लालसिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में जंतर-मंतर के प्रदर्शन की तुलना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के आंदोलनों से की। उन्होंने लाला लाजपत राय, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का जिक्र करते हुए कहा कि दमन के खिलाफ होने वाले आंदोलनों से क्रांतिकारी विचार पैदा होते हैं।
‘आज 56 इंच का सीना सिमट गया’
वीडियो में लालसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि जंतर-मंतर पर दिखाई दिया दृश्य झकझोर देने वाला था। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आज 56 इंच का सीना सिमट गया।”
उन्होंने आगे दावा किया कि छात्रों और बच्चों से निपटने के लिए सरकार को कथित रूप से षड्यंत्र करने पड़ रहे हैं। राजपुरोहित ने कहा कि देश की तरुणाई को दबाने की कोशिशों का उल्टा असर हो सकता है।
हालांकि, यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
‘अंग्रेजों से भी ज्यादा सख्त निकले’
लालसिंह राजपुरोहित ने प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “ये तो अंग्रेजों से भी ज्यादा सख्त निकले” और आरोप लगाया कि बच्चों और छात्रों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई गईं।
जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन पिछले कई दिनों से परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में है। खबर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का किया जिक्र
अपने बयान में मुंबई के सामाजिक नेता ने स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि ऐसे ही आंदोलनों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को जन्म दिया था।
उन्होंने साइमन कमीशन के खिलाफ हुए आंदोलन और लाला लाजपत राय का जिक्र किया। राजपुरोहित ने कहा कि उस दौर में भी अंग्रेजों की कार्रवाई के खिलाफ लोगों में आक्रोश पैदा हुआ था और उसी संघर्ष ने आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन को प्रभावित किया।
लाला लाजपत राय पर साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाठीचार्ज हुआ था और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी। भगत सिंह और उनके साथियों के क्रांतिकारी संघर्ष का यह ऐतिहासिक संदर्भ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है।
‘आज फिर देश की तरुणाई झकझोर दी’
मुंबई के उत्तर मुंबई जिला से समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई ने देश की युवा पीढ़ी को झकझोर दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं पर बातचीत करनी चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज करना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है।
जंतर-मंतर पर क्यों चल रहा है छात्र आंदोलन?
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का मुख्य फोकस परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दे हैं। प्रदर्शनकारी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों की समस्याओं को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।
हाल के दिनों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ा है और कई छात्र संगठनों, कार्यकर्ताओं तथा सार्वजनिक हस्तियों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। वहीं, प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो या राजनीतिक बयान को पूरे घटनाक्रम का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता।
प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं की ओर से कई आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग और आंसू गैस के इस्तेमाल का उल्लेख है।
हालांकि, हर वायरल वीडियो की घटना और उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। लालसिंह राजपुरोहित के बयान में लगाए गए आरोपों पर पुलिस या सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच लालसिंह राजपुरोहित का बयान सामने आया है। उन्होंने सरकार और पुलिस कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए छात्रों के दमन का आरोप लगाया और अपने बयान को स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़ा। हालांकि, उनके आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर देखे जाने चाहिए और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
FAQ
जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन किस मुद्दे को लेकर है?
आंदोलन परीक्षा व्यवस्था, NEET से जुड़ी कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा है।
लालसिंह राजपुरोहित ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर क्या कहा?
उन्होंने सरकार और पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों और बच्चों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और लाला लाजपत राय का भी जिक्र किया।
क्या लालसिंह राजपुरोहित का बयान आधिकारिक सरकारी बयान है?
नहीं। यह एक राजनीतिक नेता की सार्वजनिक प्रतिक्रिया है। उनके आरोपों पर संबंधित सरकार या पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष अलग से जरूरी है।
आयशा खान ने दावा किया कि मुंबई पुलिस ने उन्हें बिना वजह हिरासत में लिया और जबरदस्ती पुलिस वैन में खींचा। जानिए पूरा मामला।
मुंबई: एक्ट्रेस और धुरंधर फेम आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयशा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर कर दावा किया कि उन्हें, उनके भाई और कुछ दोस्तों को बिना किसी स्पष्ट वजह के हिरासत में लिया गया। एक्ट्रेस के मुताबिक, वे सड़क किनारे शांतिपूर्वक खड़ी थीं और किसी तरह का प्रदर्शन या हंगामा नहीं कर रही थीं।
आयशा खान ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में बैठाया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आयशा खान ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई वीडियो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने हिरासत में लिए जाने की पूरी घटना के बारे में बताया। एक वीडियो में एक्ट्रेस काफी परेशान और घबराई हुई नजर आ रही हैं।
आयशा का दावा है कि उनके हाथ डर और गुस्से की वजह से कांप रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कोई विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और न ही कोई हंगामा किया था। उनके मुताबिक, वे केवल सड़क किनारे खड़ी थीं।
एक्ट्रेस ने दावा किया कि उनके भाई और कुछ पुरुष दोस्तों को हिरासत में लिए जाने के बाद वह वहां मौजूद थीं। इसके बाद उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
एक्ट्रेस ने दावा किया कि वह, उनका भाई और उनके दोस्त शांतिपूर्वक खड़े थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो नारे लगाए और न ही कोई गैर-कानूनी गतिविधि की।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए आयशा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
पुलिस वैन में मौजूद छात्र ने भी बताई परेशानी
आयशा द्वारा शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में पुलिस वैन में मौजूद एक छात्र अपनी परेशानी बताते हुए नजर आया।
छात्र ने कहा कि उसका मैथ्स का प्रैक्टिकल एग्जाम था और उसे बिना किसी गलती के हिरासत में लिए जाने की चिंता थी। उसने आशंका जताई कि अगर वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, तो इसका असर उसकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।
वीडियो में छात्र की चिंता साफ नजर आ रही थी। हालांकि, छात्र की पहचान और हिरासत में लिए जाने की आधिकारिक वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
आयशा ने पुलिस से पूछा- हमें कहां ले जाया जा रहा है?
एक अन्य क्लिप में आयशा खान पुलिस वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछती दिखाई दीं कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।
आयशा का दावा है कि उनके सवालों का उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस वजह से उनकी चिंता और बढ़ गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पूरी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।
इस वीडियो के साथ एक्ट्रेस ने सवाल उठाया कि अगर उन्होंने कोई हंगामा या बहस नहीं की थी, तो उन्हें इस तरह अंदर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि केवल सड़क पर खड़े होने के लिए उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया।
आयशा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और दावा किया कि उन्होंने किसी तरह का विरोध या गैर-कानूनी काम नहीं किया था।
पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल इस मामले में आयशा खान की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मुख्य आधार हैं। मुंबई पुलिस की ओर से हिरासत की वजह, कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर बिना स्पष्ट वजह हिरासत में लेने और जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाने का आरोप लगाया है। एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर सवाल उठाए हैं। फिलहाल पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
FAQ
क्या आयशा खान को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था?
आयशा खान ने सोशल मीडिया वीडियो के जरिए दावा किया है कि उन्हें, उनके भाई और दोस्तों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस की ओर से इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं है।
आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
आयशा खान ने आरोप लगाया कि वह शांतिपूर्वक सड़क किनारे खड़ी थीं, फिर भी उन्हें हिरासत में लिया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाया।
आयशा खान को किस पुलिस स्टेशन ले जाया गया?
आयशा खान द्वारा शेयर किए गए वीडियो के अनुसार, उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
SBI PO Admit Card 2026 जारी हो गया है। 1500 पदों की भर्ती के लिए Prelims Call Letter डाउनलोड करने का तरीका, परीक्षा तारीख और जरूरी निर्देश जानें।
SBI PO Admit Card 2026: State Bank of India ने Probationary Officer भर्ती 2026 की Preliminary Examination के लिए Admit Card जारी कर दिया है। 1,500 PO पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार अपना Call Letter Registration Number और Password या Date of Birth की मदद से डाउनलोड कर सकते हैं। Prelims परीक्षा अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी।
State Bank of India यानी SBI PO Recruitment 2026 के लिए आवेदन करने वाले लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म हो गया है। बैंक ने 22 जुलाई 2026 को SBI PO Prelims Admit Card 2026 जारी किया है। जिन उम्मीदवारों ने Probationary Officer के 1,500 पदों के लिए आवेदन किया था, वे अब अपना Hall Ticket डाउनलोड कर सकते हैं।
Admit Card में उम्मीदवार का नाम, Roll Number, परीक्षा की तारीख, Reporting Time, Exam Centre का पता और जरूरी Exam Day Instructions दिए गए हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे Call Letter को समय रहते डाउनलोड करें और उसमें दी गई सभी जानकारी को ध्यान से जांच लें।
SBI PO Admit Card 2026 कैसे डाउनलोड करें?
उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान Steps को Follow करके अपना SBI PO Prelims Call Letter डाउनलोड कर सकते हैं:
SBI की Official Website पर जाएं।
Careers या Recruitment Section खोलें।
SBI PO Recruitment 2026 से संबंधित Admit Card Link पर Click करें।
अपना Registration Number या Roll Number दर्ज करें।
Password या Date of Birth दर्ज करें।
Captcha Code भरकर Login करें।
आपका SBI PO Prelims Admit Card स्क्रीन पर दिखाई देगा।
Call Letter डाउनलोड करें और भविष्य के लिए इसका Printout निकाल लें।
उम्मीदवारों को सलाह है कि Admit Card की कई Copies रखने के बजाय एक साफ और स्पष्ट Printout जरूर साथ रखें।
SBI PO Prelims Exam 2026 कब होगा?
SBI PO Preliminary Examination 2026 अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी। उपलब्ध परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा 1 और 2 अगस्त 2026 को आयोजित होने की जानकारी सामने आई है। उम्मीदवारों को अपनी सटीक परीक्षा तारीख, Shift और Reporting Time के लिए अपने Admit Card पर दी गई जानकारी को ही अंतिम मानना चाहिए।
SBI PO Prelims Exam Pattern 2026
Preliminary Examination Online Mode में आयोजित होगी और इसमें कुल 100 प्रश्न होंगे। परीक्षा की अवधि 1 घंटे की होगी।
Subject
Questions
Marks
Time
English Language
40
40
20 मिनट
Quantitative Aptitude
30
30
20 मिनट
Reasoning Ability
30
30
20 मिनट
Total
100
100
60 मिनट
Prelims परीक्षा में प्रत्येक Section के लिए अलग-अलग समय निर्धारित रहेगा। Preliminary Examination के Marks Final Merit List में शामिल नहीं किए जाएंगे। हालांकि, उम्मीदवारों को Mains Examination में पहुंचने के लिए Prelims में निर्धारित Selection Criteria को पूरा करना होगा।
Exam Centre पर कौन-कौन से Documents ले जाना जरूरी है?
उम्मीदवारों को परीक्षा केन्द्र पर बिना जरूरी Documents के प्रवेश में परेशानी हो सकती है। इसलिए निम्न Documents साथ लेकर जाएं:
SBI PO Prelims Admit Card का Printed Copy
Valid Photo Identity Proof
Admit Card में दिए गए अन्य जरूरी Documents
यदि निर्देश दिया गया हो तो Passport Size Photograph
उम्मीदवारों को अपने Admit Card पर दिए गए Exam Day Instructions को परीक्षा से पहले जरूर पढ़ लेना चाहिए।
SBI PO Recruitment 2026 में कितने पद हैं?
SBI ने Probationary Officer Recruitment 2026 के तहत कुल 1,500 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इनमें 1,446 Regular Vacancies और 54 Backlog Vacancies शामिल हैं। Category-wise कुल Vacancy इस प्रकार है:
Category
Vacancies
UR
588
OBC
390
SC
234
ST
144
EWS
144
Total
1,500
PwBD उम्मीदवारों के लिए Horizontal Reservation भी लागू है, जिसकी जानकारी SBI के आधिकारिक भर्ती विज्ञापन में दी गई है।
SBI PO 2026 Selection Process
SBI PO Recruitment में Selection तीन मुख्य चरणों में होगा:
Phase 1: Preliminary Examination
यह 100 Marks की Online Objective Examination होगी। Prelims में English Language, Quantitative Aptitude और Reasoning Ability से प्रश्न पूछे जाएंगे।
Phase 2: Main Examination
Prelims में सफल उम्मीदवारों को Main Examination के लिए बुलाया जाएगा। Mains में Objective Test के साथ Descriptive Test भी शामिल होगा।
Phase 3: Psychometric Test, Group Exercise और Interview
Main Examination के बाद चयनित उम्मीदवारों को Psychometric Test, Group Exercise और Personal Interview के लिए बुलाया जाएगा।
Final Selection में Mains और Phase-III के प्रदर्शन को महत्व दिया जाएगा। Prelims के Marks Final Merit में शामिल नहीं किए जाते।
SBI PO 2026 Salary कितनी है?
SBI PO पद पर नियुक्त उम्मीदवारों को Junior Management Grade Scale-I यानी JMGS-I के तहत Salary और अन्य Allowances मिलते हैं। भर्ती विज्ञापन के अनुसार Basic Pay ₹48,480 से शुरू होती है और Pay Scale ₹48,480–₹85,920 है। SBI PO का Approximate Annual CTC मुंबई Posting के आधार पर करीब ₹21.97 लाख बताया गया है।
इसके अलावा Officers को Dearness Allowance, House Rent Allowance, City Compensatory Allowance, Medical Benefits, NPS और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं।
SBI PO 2026 Recruitment की महत्वपूर्ण तारीखें
Event
Date
Notification जारी
18 June 2026
Online Application शुरू
18 June 2026
आवेदन की अंतिम तारीख
8 July 2026
Prelims Call Letter
22 July 2026 से
Prelims Examination
August 2026
Mains Examination
September 2026
Phase-III
October–November 2026
Final Result
November–December 2026
आवेदन और परीक्षा की विस्तृत तारीखों में किसी भी बदलाव के लिए उम्मीदवारों को SBI की Official Recruitment Information को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।
SBI PO Admit Card 2026: उम्मीदवार इन बातों का रखें ध्यान
Admit Card डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार अपना नाम, Roll Number, Photograph, Exam Date, Reporting Time और Exam Centre का Address ध्यान से जांच लें।
अगर किसी जानकारी में गलती दिखाई देती है, तो उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले संबंधित Recruitment Authority के Official Contact Channel से संपर्क करना चाहिए। परीक्षा के दिन देर से पहुंचने से बचने के लिए उम्मीदवार Exam Centre की Location पहले से जांच लें।
SBI PO 2026 Prelims Admit Card जारी होने के साथ ही 1,500 Probationary Officer पदों की भर्ती प्रक्रिया अब अगले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। उम्मीदवार अपना Call Letter जल्द डाउनलोड करें, उसमें दिए गए Exam Centre और Reporting Time को ध्यान से पढ़ें और परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें। परीक्षा केन्द्र पर Admit Card और जरूरी Photo ID साथ ले जाना न भूलें।