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  • भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, US टैरिफ का असर

    भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, US टैरिफ का असर

    भारतीय शेयर बाजार US के 50% टैरिफ के दबाव में लुढ़के। निफ्टी 24,500 पर, सेंसेक्स 80,080 पर बंद। IT, बैंकिंग और रियल्टी शेयर सबसे कमजोर।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखा जा रहा है। गुरुवार को बाजार में जबरदस्त बिकवाली हुई। निफ्टी 50 211 अंक गिरकर 24,500.9 पर बंद हुआ, वहीं सेंसेक्स 706 अंक टूटकर 80,080.6 पर आ गया।

    यह लगातार दूसरा दिन रहा जब बाजार में भारी गिरावट आई। बीते चार सत्रों में से तीन दिन इंडेक्स गिरा है। केवल दो दिनों में निफ्टी 50 करीब 1.9% कमजोर हो चुका है।

    निफ्टी 50 में बेरिश सेंटीमेंट

    शेयर बाजार में ऑप्शंस एक्सपायरी के दिन निफ्टी 50 तीन महीने के निचले स्तर तक लुढ़क गया। बाजार बंद होने पर Stocktwits पर निवेशकों का सेंटीमेंट “बेयरिश” रहा, जबकि हफ्ते की शुरुआत में “बुलिश” था।

    सेक्टोरल इंडेक्स का हाल

    गुरुवार को सिर्फ कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स हरे निशान पर रहा, बाकी सभी सेक्टरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए।

    निफ्टी IT इंडेक्स 1.6% टूटा।
    रियल्टी इंडेक्स 1.5% गिरा।
    बैंकिंग इंडेक्स लगभग 1% फिसले।
    फार्मा इंडेक्स 0.83% कमजोर रहा।

    निफ्टी 50 के 50 में से 36 स्टॉक्स में गिरावट दर्ज की गई। श्रीराम फाइनेंस (-3.94%), HCL टेक्नोलॉजीज (-2.85%) और पावर ग्रिड (-2.04%) सबसे बड़े लूज़र्स रहे।

    इंटरग्लोब एविएशन में बड़ी गिरावट

    इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में 5.2% की गिरावट आई। रिपोर्ट्स के अनुसार राकेश गंगवाल के परिवार ने कंपनी में अपनी 3.1% हिस्सेदारी (₹7,027 करोड़) ब्लॉक डील्स के जरिए बेच दी।

    टेक्सटाइल सेक्टर को राहत

    भारत सरकार ने कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। इससे अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहे टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को राहत मिलेगी।

    हालांकि गुरुवार को टेक्सटाइल शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

    गिरे: वेलस्पन लिविंग (-1.31%), रेमंड (-2.05%), किटेक्स गारमेंट्स (-4%)
    चढ़े: वर्धमान टेक्सटाइल्स (+11.5%), अरविंद (+0.37%), गोकलदास एक्सपोर्ट्स (+0.3%), नितिन स्पिनर्स (+1.65%)

    एनालिस्ट्स का नजरिया

    SEBI रजिस्टर्ड एनालिस्ट आशीष कयाल ने कहा कि निफ्टी 24,630 तक उछलने के बाद 24,550 के नीचे फिसला, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को “स्कैल्पिंग” का मौका मिला।

    https://stocktwits.com/kyalashish/message/626826309

    मार्केट एक्सपर्ट सुनील कोटक ने कहा कि निफ्टी अब “बेयरिश” ट्रेंड में आ चुका है, क्योंकि RSI 40 के नीचे टूट चुका है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है।

    https://stocktwits.com/Technofunda24/message/626826694

    मुख्य सपोर्ट लेवल अब 24,200 है, जो अगले 6–7 सत्रों में टेस्ट हो सकता है।

    भारतीय निर्यातकों पर टैरिफ की चोट

    अमेरिका का यह 50% टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है। ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, ज्वेलरी और सीफूड सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर पर बड़ा असर नहीं दिख रहा।

    https://stocktwits.com/PCRAnalyst/message/626824276

    विश्लेषक प्रदीप कारपेंटर का कहना है कि भारत को इस झटके से बचने के लिए नए बाजार तलाशने, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को तेज़ करने और छूट के लिए बातचीत करनी होगी।

  • रूसी तेल से भारत को सिर्फ 2.5 अरब डॉलर का फायदा

    रूसी तेल से भारत को सिर्फ 2.5 अरब डॉलर का फायदा

    CLSA रिपोर्ट के अनुसार भारत को रूसी तेल से केवल 2.5 अरब डॉलर का वार्षिक लाभ हुआ। आयात बंद करने पर तेल \$100 तक जा सकता है।

    नई दिल्ली: रूस से आयातित सस्ते तेल को लेकर भारत की “बड़ी कमाई” की जो बातें कही जा रही थीं, वो अब गलत साबित हो रही हैं। ब्रोकरेज हाउस CLSA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को रूसी तेल आयात से सालाना फायदा सिर्फ 2.5 अरब डॉलर (लगभग 0.6% GDP) का हुआ है, जबकि मीडिया में अनुमान 10 से 25 अरब डॉलर तक लगाए जा रहे थे।

    आयात बंद हुआ तो तेल \$100 तक जा सकता है

    रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर भारत रूसी तेल का आयात बंद करता है, तो वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और यहाँ की मांग को पूरा करने के लिए सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं।

    रूस से आयात 1% से बढ़कर 40%

    यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने तेल पर भारी डिस्काउंट देना शुरू किया। पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया तो भारत और चीन ने आयात तेजी से बढ़ा दिया। भारत का रूसी तेल आयात 2021 से पहले 1% से भी कम था, जो अब कुल आयात का लगभग 36–40% हो गया है।

    भारत हर दिन लगभग 5.4 मिलियन बैरल तेल आयात करता है, जिसमें से 1.8 मिलियन बैरल रूस से आता है। इसके बाद इराक (20%), सऊदी अरब (14%), यूएई (9%) और अमेरिका (4%) भारत के बड़े सप्लायर हैं।

    असली डिस्काउंट कम हो गया

    CLSA का कहना है कि भले ही रूस का “हेडलाइन डिस्काउंट” बहुत बड़ा लगता है, लेकिन असल में भारत को मिला फायदा बेहद सीमित है।

    • FY24 में औसत डिस्काउंट \$8.5 प्रति बैरल था।
    • FY25 में यह घटकर \$3-5 प्रति बैरल रह गया।
    • हाल के महीनों में तो डिस्काउंट और घटकर सिर्फ \$1.5 प्रति बैरल तक आ गया है।

    यानी कुल मिलाकर वार्षिक फायदा अब 1 अरब डॉलर तक सीमित हो सकता है।

    रिफाइनिंग और गुणवत्ता की चुनौती

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूसी तेल की गुणवत्ता कम होती है। इसलिए रिफाइनरियों को इसके साथ उच्च गुणवत्ता वाला महंगा तेल भी मिलाना पड़ता है। यही वजह है कि भारत के आयात डेटा में कोई बड़ा लाभ साफ तौर पर नहीं दिख रहा।

    राजनीतिक मुद्दा भी बना रूसी तेल

    भारत ने साफ किया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं कर रहा क्योंकि रूसी तेल पर सीधे प्रतिबंध नहीं हैं। अमेरिका और यूरोप ने केवल कुछ शर्तों के साथ मूल्य सीमा तय की है। भारत ने हमेशा कहा है कि ऊर्जा सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वह अपनी जरूरतों के हिसाब से निर्णय लेगा।

    वैश्विक महंगाई पर असर

    CLSA ने माना कि भारत का रूसी तेल आयात न केवल उसकी अर्थव्यवस्था को सस्ते ऊर्जा विकल्प देता है बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करता है। अगर भारत आयात रोक दे, तो आपूर्ति में कमी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई और भी बढ़ सकती है।

  • HC का झटका: मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे अब मुंबई में बिना परमिशन प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे

    HC का झटका: मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे अब मुंबई में बिना परमिशन प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने गणेशोत्सव को देखते हुए मनोज जरांगे को बिना अनुमति प्रदर्शन से रोका। अब सिर्फ तय जगह पर ही हो सकेगा आंदोलन।

    मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने साफ कहा कि अब जरांगे बिना परमिशन के मुंबई में आंदोलन या प्रदर्शन नहीं कर सकते। कोर्ट ने ये आदेश इसलिए दिया क्योंकि गणेशोत्सव के दौरान पुलिस पहले से ही शहर की सुरक्षा और भीड़ कंट्रोल में व्यस्त रहेगी।

    हाईकोर्ट की बेंच ने ये भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना सबका हक है, लेकिन ये सिर्फ निर्धारित जगहों पर और सरकार की इजाजत लेकर ही किया जा सकता है। जरांगे और उनके समर्थकों को सरकार चाहे तो नवी मुंबई के खारघर में वैकल्पिक जगह भी दे सकती है, ताकि मुंबई की लाइफ और ट्रैफिक पर असर न पड़े।

    जरांगे ने हाल ही में सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर मराठा समाज को OBC कोटे में 10% आरक्षण नहीं मिला, तो वह 29 अगस्त से मुंबई में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे। इसी को लेकर अदालत में एमी फाउंडेशन ने जनहित याचिका दायर की थी।

    राज्य सरकार ने भी कोर्ट में कहा कि वे शांतिपूर्ण आंदोलन का विरोध नहीं करते, लेकिन गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहार में भीड़ और ट्रैफिक की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसी कारण कोर्ट ने परमिशन की शर्त रखी।

    अब अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी और जरांगे को इस मामले में जवाब दाखिल करना होगा।

  • मुंबई के ट्रेन टॉयलेट में मिला 3 साल के मासूम का शव, सूरत से अपहरण कर की हत्या

    मुंबई के ट्रेन टॉयलेट में मिला 3 साल के मासूम का शव, सूरत से अपहरण कर की हत्या

    सूरत से अपहरण कर 3 साल के बच्चे की हत्या, शव मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर ट्रेन टॉयलेट में मिला। आरोपी विकाश शाह गिरफ्तार, पुलिस जांच जारी।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    एक दिल दहला देने वाली घटना ने सूरत और मुंबई दोनों शहरों को हिला कर रख दिया है। सूरत से अपने तीन साल के कज़िन का अपहरण कर हत्या करने वाले युवक ने बच्चे का शव मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) पर खड़ी ट्रेन के टॉयलेट में छोड़ दिया। यह मामला सामने आया जब ट्रेन के सफाईकर्मी ने शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। The body of a 3-year-old innocent was found in a train toilet in Mumbai, he was kidnapped from Surat and murdered

    आरोपी विकाश शाह गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान विकास शाह (25 वर्ष) के रूप में हुई है।

    • उसे मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) से गिरफ्तार किया गया।
    • आरोपी मूल रूप से सूरत का रहने वाला है और वह पिछले हफ्ते अपनी मां के साथ रिश्तेदार के घर आया था।
    • बच्चे की मां से झगड़े के बाद उसने 22 अगस्त को मासूम को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले लिया।

    सूरत क्राइम ब्रांच के DCP बी. राजिया ने पुष्टि की कि आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार कर सूरत ले जाया गया है और जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा। The body of a 3-year-old innocent was found in a train toilet in Mumbai, he was kidnapped from Surat and murdered

    कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?

    • आरोपी ने बच्चे को सूरत रेलवे स्टेशन से उठाया और उसे लेकर ट्रेन में बैठ गया।
    • वह सौराष्ट्र एक्सप्रेस से मुंबई आया।
    • इसके बाद उसने बच्चे की हत्या की और शव को कुशीनगर एक्सप्रेस की एसी कोच B2 के टॉयलेट में छोड़ दिया।
    • फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि हत्या कहां और कैसे हुई।

    GRP अधिकारी ने बताया –
    “बच्चे की मां ने उसी दिन शाम को अमरोली पुलिस स्टेशन, सूरत में शिकायत दर्ज कराई थी। हमें सूचना मिली कि आरोपी मुंबई भाग आया है। बाद में लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर शव बरामद हुआ।”

    बच्चे की मां और परिवार

    बच्चे की मां बिहार की रहने वाली हैं और सूरत में अपने परिवार के साथ रहती हैं।

    • पति दुबई में नौकरी करते हैं।
    • परिवार में आठ साल की बेटी और पांच साल का बेटा भी है।
    • आरोपी विकास शाह रिश्तेदार के घर ठहरा हुआ था और वारदात से पहले वह शिकायतकर्ता का मोबाइल भी ले गया था।

    पुलिस जांच जारी

    • सूरत पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर हत्या की असल वजह और घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।
    • पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने बच्चे की हत्या किस परिस्थिति में और कहां की।
    • मुंबई और सूरत पुलिस इस मामले में संयुक्त रूप से काम कर रही हैं।
  • मुंबई बिजनेसमैन को पाकिस्तान से धमकी: ’80 करोड़ दो वरना बाबा सिद्दीकी जैसा हाल होगा’, छोटा शकील गैंग पर शक

    मुंबई बिजनेसमैन को पाकिस्तान से धमकी: ’80 करोड़ दो वरना बाबा सिद्दीकी जैसा हाल होगा’, छोटा शकील गैंग पर शक

    मुंबई के 51 वर्षीय बिजनेसमैन ने दावा किया कि उन्हें पाकिस्तान से छोटा शकील गैंग के नाम पर फिरौती और जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी 80 करोड़ रुपये की उगाही से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में संगठित अपराध से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक 51 वर्षीय बिजनेसमैन ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें पाकिस्तान से फोन पर जान से मारने और 80 करोड़ रुपये की उगाही की धमकी दी गई है। शिकायत में कहा गया है कि धमकी देने वाले ने खुद को गैंगस्टर छोटा शकील के नेटवर्क से जुड़ा बताया।

    ईरानी कंपनी से बिजनेस विवाद का कनेक्शन

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ता का कारोबार केमिकल और पेट्रोकेमिकल इंपोर्ट से जुड़ा है।

    • साल 2015 में उन्होंने ईरान से तेल आयात किया था।
    • अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भुगतान दुबई के जरिए किया गया।
    • लेकिन ईरानी कंपनी ने आरोप लगाया कि भुगतान पूरा नहीं हुआ और उन्होंने ईरान में आर्बिट्रेशन शुरू किया।
    • व्यापारी की गैरहाजिरी में एकतरफा फैसला कंपनी के पक्ष में आया।
    • इसके बाद ईरानी कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में संपत्ति अटैच करने की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। हालांकि सिविल केस अब भी लंबित है।

    धमकियां और फिरौती की बढ़ती रकम

    बिजनेसमैन ने पुलिस को बताया कि जून 2025 से उन्हें लगातार धमकी भरे कॉल पाकिस्तान से आ रहे हैं।

    • शुरुआत में 2 करोड़ रुपये मांगे गए।
    • इसके बाद रकम बढ़कर 80 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
    • कॉलर ने धमकाते हुए कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो उनका भी हाल “बाबा सिद्दीकी” जैसा होगा।
    •  इस नाम का जिक्र होते ही व्यापारी और उनका परिवार गंभीर दहशत में आ गया है।

    मुंबई पुलिस ने शुरू की जांच

    व्यापारी के मुंबई के फोर्ट एरिया और दुबई में ऑफिस हैं। उन्होंने औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दी जिसके बाद केस को एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने अपने हाथ में ले लिया है।
    मुंबई क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा –
    “हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हुए इस उगाही रैकेट की जांच कर रहे हैं। विदेशी ट्रेड डिस्प्यूट का फायदा उठाकर संगठित अपराध सिंडिकेट धमकी और जबरन वसूली कर सकते हैं। हर एंगल की जांच की जा रही है, जिसमें विदेशी नेटवर्क की भूमिका भी शामिल है।”

    चिंता का माहौल

    इस मामले ने व्यापारी वर्ग और पुलिस दोनों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    • क्या यह सिर्फ एक बिजनेस विवाद को लेकर विदेशी कंपनी की साजिश है?
    • या वाकई संगठित अपराध सिंडिकेट ट्रेड कॉन्ट्रैक्ट्स के नाम पर धमकी देकर करोड़ों की उगाही कर रहे हैं?

    पुलिस की जांच से आने वाले दिनों में यह साफ हो पाएगा कि मामला ट्रेड कॉन्फ्लिक्ट का है या इंटरनेशनल माफिया का।

  • मुंबई बिजनेसमैन कंगाल: ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप में 12 करोड़ गंवाए, परिवार और कारोबार तबाह

    मुंबई बिजनेसमैन कंगाल: ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप में 12 करोड़ गंवाए, परिवार और कारोबार तबाह

    मुंबई के एक बिजनेसमैन ने ऑनलाइन सट्टेबाजी गेमिंग ऐप में 12 करोड़ रुपये गंवाए। लॉकडाउन में शुरू हुई लत ने कारोबार और परिवार दोनों बर्बाद कर दिए। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    लॉकडाउन में शुरू हुई ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत ने एक बिजनेसमैन की जिंदगी तबाह कर दी। चार साल में उसने करीब 12 करोड़ रुपये एक गेमिंग ऐप पर गँवा दिए। परिवार और कारोबार दोनों बर्बाद हो गए और अब वह चाहता है कि सरकार ऐसे फर्जी गेमिंग ऐप्स पर कड़ा एक्शन ले। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    लॉकडाउन में मिली बर्बादी की शुरुआत

    2020 के कोविड लॉकडाउन में बिजनेसमैन ने एक सेलेब्रिटी द्वारा प्रमोट किए गए गेमिंग ऐप पर छोटे दांव लगाना शुरू किया। शुरुआत में लाखों की जीत ने उन्हें लुभाया, लेकिन धीरे-धीरे हार का सिलसिला बढ़ता गया। लत इतनी गहरी हो गई कि सालों की मेहनत से कमाया हुआ पैसा कुछ ही सालों में डूब गया। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    परिवार और कारोबार पर असर

    ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से उनके माता-पिता को गंभीर स्वास्थ्य झटके लगे और कारोबार में भी नुकसान हुआ। जो बिजनेस पहले विदेश यात्राएं और मुनाफा देता था, वह अब घाटे में चला गया। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    “गेमिंग की लत नशे जैसी” – मनोचिकित्सक

    मनोचिकित्सक डॉ. अविनाश देसूसा का कहना है कि ऑनलाइन जुआ लत उतनी ही खतरनाक है जितनी ड्रग्स की। जीत का लालच खिलाड़ियों को बार-बार पैसे लगाने पर मजबूर करता है और बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    पुलिस शिकायत और विदेशी ऐप का जाल

    2024 में पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि जिस गेमिंग ऐप ठगी में उन्होंने करोड़ों गंवाए, उसका भारत में कोई ठिकाना नहीं। यह अवैध रूप से चलाया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह ऐप ब्लॉक है, लेकिन भारत में अब तक कार्रवाई नहीं हुई। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    जीत के लालच से हुआ धोखा

    शुरुआत में उन्होंने लाखों जीते, लेकिन रकम निकालने पर KYC का बहाना बनाया गया। बाद में अलग-अलग बैंक खातों और UPI आईडी में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया। इसी तरह उन्होंने करोड़ों रुपये फर्जी खातों में भेज दिए। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    बैंक और संदिग्ध कॉल्स का खेल

    जब उन्होंने एक खाते में डाले गए 25 लाख रुपये को लेकर बैंक से सवाल किया, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्हें फर्जी कॉल आने लगे। एक शख्स ने गृह मंत्रालय का कर्मचारी बनकर 10 लाख रुपये के बदले पैसे वापस दिलाने का झांसा भी दिया। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

    “डिजिटल गिरफ्तारी” से सबक

    आखिरकार कारोबारी को एहसास हुआ कि वह डिजिटल गिरफ्तारी जैसी स्थिति में फँस चुका था। अब वह चाहता है कि सरकार सख्ती दिखाए और इन अवैध ऐप्स पर पूरी तरह बैन लगाया जाए ताकि कोई और उसकी तरह जिंदगी और कमाई दोनों न गंवाए। Mumbai businessman bankrupt: Lost 12 crores in online betting app, ruined family and business

  • ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025: भारत में रियल मनी गेम्स पर बैन

    ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025: भारत में रियल मनी गेम्स पर बैन

    “केंद्र सरकार ने ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर रोक लगाने के लिए ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025 को मंजूरी दी। जानिए उद्योग, खिलाड़ियों और निवेश पर असर।”

    केंद्र सरकार ने ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग (RMG) को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को कैबिनेट ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 को मंज़ूरी दे दी। इस बिल का मक़सद असली पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स को प्रभावी तरीके से रोकना है। इसका सीधा असर ड्रीम11 जैसे फ़ैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप और पोकरबाज़ी जैसे कार्ड गेम प्लेटफ़ॉर्म्स पर पड़ेगा। अगर यह बिल संसद में पास हो गया तो भारत का अरबों डॉलर का यह उद्योग बड़ी मुश्किल में फँस सकता है।

    उद्योग की चुप्पी और पुराने विवाद

    फिलहाल RMG कंपनियों और उनके संगठन ने इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उन्होंने साफ कहा है कि वे संसद में बिल पेश होने के बाद ही आधिकारिक बयान देंगे। पहले भी इन कंपनियों ने सरकार के टैक्स और रेगुलेशन से जुड़े फैसलों का विरोध किया था। जीएसटी बढ़ने पर भी इन फर्मों ने कई मंचों पर अपना विरोध दर्ज कराया था।

    अदालतों में कानूनी लड़ाई

    कई राज्यों में जब सरकारों ने इन गेमिंग ऐप्स पर रोक लगाई, तब कंपनियों ने अदालत का रुख किया और उन्हें राहत भी मिली। अदालतों ने साफ कहा कि “कौशल के खेल” और “भाग्य के खेल” में फर्क है। केवल किस्मत पर आधारित खेल को ही जुआ माना जाएगा। इसी तर्क के दम पर कंपनियाँ अब तक अपना बिज़नेस चला रही थीं।

    अब चुनौती क्यों बढ़ी?

    इस बार हालात अलग हैं। ऑनलाइन गेमिंग अब सीधे आईटी मंत्रालय के तहत आ चुका है और वही प्रतिबंध लागू करेगा। पहले सरकार ने 2023 में IT नियमों के तहत इन कंपनियों के लिए स्व-नियमन (Self Regulation) का ढांचा बनाने की कोशिश की थी। लेकिन किसी भी स्व-नियामक निकाय को मंज़ूरी नहीं दी गई क्योंकि सवाल उठा कि ये निकाय कंपनियों से स्वतंत्र कैसे रहेंगे।

    ई-स्पोर्ट्स को राहत

    बिल में ई-स्पोर्ट्स को छूट दी गई है। यानी वीडियो गेम टूर्नामेंट और ई-स्पोर्ट्स इवेंट में एंट्री फ़ीस ली जा सकेगी, बशर्ते उसमें असली पैसों वाले गेम शामिल न हों। इसका सीधा फायदा ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ियों और आयोजकों को मिलेगा।

    बड़ा नीति बदलाव

    सरकार का कहना है कि यह बिल एक बड़ा नीति परिवर्तन है। अब तक कंपनियाँ “कौशल बनाम भाग्य” की दलील देकर अपने गेम को वैध ठहराती रही हैं। मगर इस बिल के आने के बाद उनके बिज़नेस मॉडल पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे।

    संभावित असर

    अगर यह बिल कानून बन गया तो लाखों यूज़र्स जो फैंटेसी स्पोर्ट्स या कार्ड गेम्स खेलते हैं, उनके पास सीमित विकल्प बचेंगे। विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा भी हिल सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे ई-स्पोर्ट्स और मनोरंजन आधारित गेम्स को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन रियल मनी गेमिंग सेक्टर में रोज़गार और निवेश पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ेगा।

  • महाराष्ट्र के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा

    महाराष्ट्र के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा

    महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक दूरदराज उदाड्या नामक आदिवासी गांव में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है। जहां बिजली, सड़क और सरकारी स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंच पाई है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया, कि इस कार्यक्रम का मकसद ग्रामीणों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

    डिजिटल डेस्क
    महाराष्ट्र/ नंदुरबार:
    सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसे एक सुदूर आदिवासी गांव उदाड्या में इस बार देश की 79वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। गांव में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा फहराया गया, इस कार्यक्रम के दौरान यहां के निवासियों में गर्व और देशभक्ति की भावना की लहर दौड़ गई। इस गांव में न अब तक बिजली की सुविधा प्राप्त हो पाई है, न सड़क और न ही सरकारी स्कूल या ग्राम पंचायत जैसी आधारभूत व्यवस्थाएं यहां को लोगों को मिली है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    आजादी के बाद पहली बार फहरा तिरंगा

    गांव में तैनात शिक्षक गणेश पावरा ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इंटरनेट से वीडियो डाउनलोड कर तिरंगा फहराने की विधि सीखी और फिर गांव के 30 बच्चों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तिरंगा फहराया। यह पहल वाईयूएनजी फाउंडेशन की ओर से की गई, यह संस्था इस क्षेत्र के चार अनौपचारिक स्कूलों का संचालन करती है। संस्था के संस्थापक संदीप देओरे ने बताया कि पहली बार झंडा फहराने के साथ-साथ लोगों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना इस कार्यक्रम का मकसद था।

    200 से अधिक बच्चों ने लिया भाग

    करीब 250 बच्चों और उदाड्या, खपरमाल, सदरी और मंझनीपड़ा जैसे चार गांवों के लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। इन गांवों में संचार, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक प्राप्त नही हो पाई हैं। यहां के लोग पावरी बोली बोलते हैं, जो हिंदी या मराठी से काफी अलग है, इस वजह से संवाद में भी इनको चुनौतियों का सामना करना पडता है।

    संस्था के अध्यक्ष देओरे ने बताया, कि इन गांवों में शिक्षा की बेहद कमी है और इस वजह से लोग अक्सर अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी सेवाएं भी ठीक से नहीं पहुंची है, हालांकि खपरमाल जैसे गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आजमीबाई अपने गांव में ही रहकर ईमानदारी से बच्चों को सेवा प्रदान कर रही है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

  • मुंबई पुलिस को चकमा देकर महिला कैदी फरार, जेजे अस्पताल की घटना

    मुंबई पुलिस को चकमा देकर महिला कैदी फरार, जेजे अस्पताल की घटना

    मुंबई के जेजे अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला कैदी ने पुलिस को धक्का देकर फरार हो गई है। इस घटना के बाद से कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। शहर भर में तलाशी अभियान जारी..

    मुंबई: भायखला के जे.जे. अस्पताल से एक महिला कैदी पुलिस कांस्टेबल को धक्का देकर फरार हो गई। इस घटना के बाद से मुंबई पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जबकि महिला गर्भवती थी जिसे भारत में घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज बनवाने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया था। खबर के मुताबिक गुरुवार दोपहर की इस घटना के बाद से मुंबई पुलिस ने शहर भर में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इसके साथ ही पुलिस अभिरक्षा से इस तरह कैदी के भाग जाने से कैदियों के लिए लागू सुरक्षा प्रोटोकॉल की कड़ी जांच हो रही है।

    मुंबई पुलिस की महिला कारावास में थी ज़ेरबंद

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    फरार बांगलादेशी महिला रुबीना इरशाद शेख की फाइल तस्वीर

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय बांगलादेशी रुबीना इरशाद शेख को नवी मुंबई की वाशी पुलिस ने 7 अगस्त को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर उसे भायखला के महिला कारावास में ज़ेरबंद कर दिया गया था।

    जेल से लाया गया था अस्पताल

    रुबीना को 11 अगस्त को बुखार, सर्दी और त्वचा संक्रमण की शिकायत के साथ-साथ उसकी पांच महीने की गर्भावस्था से संबंधित मेडिकल जांच के लिए जेजे अस्पताल ले जाया गया। 14 अगस्त को दोपहर के समय वह अपने साथ आई पुलिस को चकमा देने में कामयाब हो गई। उसने एक कांस्टेबल को धक्का दिया और अस्पताल की भीड़ का फायदा उठाकर भाग गई।

    अस्पताल में डर का माहौल

    मुंबई पुलिस के सूत्रों के मुताबिक लापता कैदी की तलाशी अभियान तेज कर दी गई है। जगह-जगह टीम बनाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, रुबीना को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इस घटना ने जेल से अस्पताल लाए जाने वाले कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। वहीं अस्पताल के मरीजों में भी डर का माहौल उत्पन्न कर दिया है।

  • सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    महाराष्ट्र के साथ-साथ तेलंगाना के नगरपालिकाओं ने 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मांस की दुकानें और बूचड़खानों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। इसको लेकर देशभर में विपक्षी नेता हंगामा कर रहे हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट ने तो नगर पालिका प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    15 अगस्त को सरकार द्वारा मांस की दुकानों को बंद करने को लेकर जारी फैसले के खिलाफ देशभर में हंगामा हो रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और कल्याण-डोंबिवली के साथ-साथ तेलंगाना के नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के बूचड़खानों और मांस की दुकानों को 15 अगस्त के दिन बंद रखने का निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं के हंगामे के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद आश्चर्य जता रहे हैं। राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया, कि सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। हम देश की स्वतंत्रता का पर्व मना रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    मनसे का विरोध

    गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कुछ नगर पालिका द्वारा मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों का खान-पान नहीं निर्धारित करना चाहिए। राज ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि नगर पालिकाओं को इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।

    स्वतंत्रता दिवस पर लगा प्रतिबंध

    उन्होंने कहा, “सरकार और महानगर पालिका को यह तय नहीं करना चाहिए कि किसको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिये। एक तरफ हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और हमें क्या खाना चाहिए, यह चुनने की कोई आजादी नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाना सरकार का आम जनता के खिलाफ एक विरोधाभास है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    इसके साथ ही महाराष्ट्र से सटे तेलंगाना राज्य के ओल्ड हैदराबाद सिटी की नगरपालिका ने भी 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस पर मीट की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने के आदेश जारी किया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा, कि “यह धर्म का मामला नहीं है और न ही यह राष्ट्रीय हित का मामला है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादूल मुस्लिमिन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को ओल्ड हैदराबाद सिटी के आदेश को असंवैधानिक बताया। कहा कि गोश्त खाने से 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस का क्या लेना-देना है। इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र में हंगामे के बीच शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे और राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने फैसले को गलत बताया है। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    ओवैसी ने क्या कहा?

    सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘गोश्त खाने और स्वतंत्रता दिवस में क्या रिश्ता है। तेलंगाना में 99 प्रतिशत लोग गोश्त खाते हैं। ओवैसी ने इस फैसले को लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकारों का उल्लंघन करने वाला फैसला बताया है।’

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    तेलंगाना में यह मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने ग्रेटर हैदराबाद महानगर पालिका (जीएचएमसी) से स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के उसके आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। तेलंगाना सरकार के इस आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश मनमाना है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजयसेन रेड्डी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

    महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “मैंने टीवी पर खबर देखी, श्रद्धा का प्रश्न होता है तो इस तरह बंदी लगाई जाती है। आषाढ़ी एकादशी, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर यह निर्णय लिया जा सकता है। अगर हम कोकण में जाएं तो वहां हर सब्जी में सूखी मछली डालकर पकाया जाता है। ऐसी बिना कारण के खाने पीने की चीजों पर रोक लगाना ठीक नहीं है। अगर भावनात्मक मुद्दा हो तो उस समय के लिए बंदी लगाई जाए तो लोग समझ सकते हैं। लेकिन, 15 अगस्त को महाराष्ट्र में बंदी लगाना उचित नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा।

    खस्ताहाल सड़कों पर ध्यान दें।

    आदित्य ठाकरे ने मांस बिक्री बंदी के फैसले पर कहा, “ये हमारी च्वाइस है कि स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाएं और क्या नहीं खाएं।कल्याण-डोंबिवली महापालिका कमिश्नर को इस मामले में दखल देने का अधिकार नहीं है। नागरिकों पर शाकाहार का फैसला थोपने के बजाय, खस्ताहाल सड़कों और बदहाल नागरिक सेवाओं को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August