मुंबई के मलाड में ऑनलाइन ऐप से बुक किए गए सफाईकर्मियों ने घर से 12 लाख के गहने उड़ाए। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 3 को दबोचा। जानिए सुरक्षा नियम।
मुंबई: त्योहारों के सीजन में अगर आप भी घर की ‘दिवाली सफाई’ के लिए किसी ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रोफेशनल क्लीनर्स बुक कर रहे हैं, तो बेहद सतर्क हो जाइए। मुंबई में इस समय ‘प्रोफेशनल दिवाली क्लीनर्स स्कैम’ का एक बेहद खतरनाक और संगठित नेटवर्क एक्टिव हो गया है।
मलाड वेस्ट के पॉश ‘फाल्कन टावर’ में रहने वाले एक परिवार को ऑनलाइन ऐप से सफाईकर्मी बुलाना भारी पड़ गया। यहां सफाई के बहाने आए शातिर गिरोह ने घर की अलमारी साफ कर ₹12 लाख के सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर लिया। मलाड पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
केमिकल स्प्रे और ‘वड़ा पाव’ की आड़ में वारदात
यह सनसनीखेज घटना 26 अक्टूबर की है, जब 52 वर्षीय महिला ने एक दिन पहले ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए होम-क्लीनिंग सर्विस बुक की थी। अगली सुबह करीब 10 बजे चार सफाईकर्मी फ्लैट पर पहुंचे। उन्होंने मास्टर बेडरूम में केमिकल स्प्रे करने की बात कही और घरवालों को सांस फूलने व बदबू के डर से दूर रहने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने खुद को कमरे के अंदर लॉक कर लिया और अलमारी का लॉकर तोड़कर 50 ग्राम का सोने का नेकलेस, 10 ग्राम का मंगलसूत्र, 50 ग्राम का गोल्ड बिस्कुट और 500 ग्राम चांदी के सिक्के निकाल लिए।
चोरी के माल को तुरंत ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने एक शातिर चाल चली। करीब 11:30 बजे, एक सफाईकर्मी ‘वड़ा पाव’ खरीदने के बहाने बाहर गया और चोरी के सारे आभूषण बाहर खड़े अपने तीसरे साथी को पास कर दिए। इसके बाद बाकी आरोपी काम अधूरा छोड़कर अगले दिन आने का वादा करते हुए दोपहर 1:30 बजे वहां से निकल गए। 28 अक्टूबर को जब परिवार ने अलमारी खोली, तब चोरी का खुलासा हुआ।
मास्टरमाइंड का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पीड़ित परिवार की शिकायत पर मलाड पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर फौरन जांच शुरू की। पुलिस की डिटेक्शन टीम ने जाल बिछाकर मुख्य साजिशकर्ता पवन धीवर (26), सत्यम शुक्ला (18) और अनीश चौरसिया (19) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी पवन धीवर का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और यह पूरा गैंग जून 2026 से इस ऑनलाइन सफाई कंपनी में एक्टिव था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 11 तोला सोना (लगभग 8 से 9 लाख रुपये मूल्य) बरामद कर लिया है। बाकी की चांदी और बचे हुए आभूषणों की तलाश के लिए पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
ऑनलाइन कंपनियों की लापरवाही और उपभोक्ता के अधिकार
इस घटना ने गिग-इकोनॉमी और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। मुंबई पुलिस के नियमों के मुताबिक, किसी भी सर्विस एग्रीगेटर ऐप या एजेंसी के लिए अपने सभी फील्ड स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification Certificate) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कंपनियां बिना बैकग्राउंड चेक किए किसी अपराधी को आपके बेडरूम तक भेज रही हैं, तो उपभोक्ता लापरवाही के तहत कंपनियों के खिलाफ भी पुलिस में आपराधिक मामला और कंज्यूमर कोर्ट में भारी मुआवजे का केस दर्ज कराया जा सकता है।
सुरक्षा के लिए इन 4 बातों का रखें ध्यान
- प्रोफाइल और आईडी का मिलान: घर में प्रवेश देने से पहले सफाईकर्मियों के आधार कार्ड और ऐप पर दिख रही प्रोफाइल फोटो को जरूर चेक करें।
- कर्मचारियों पर सीधी नजर: जब कर्मचारी घर के अंदर काम कर रहे हों, तो परिवार का कम से कम एक सदस्य निगरानी के लिए वहां जरूर मौजूद रहे। केमिकल स्प्रे के बहाने उन्हें कमरे में अकेला न छोड़ें।
- सोसाइटी गेट पर सख्त एंट्री: सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड्स को निर्देश दें कि वे आने वाले हर सर्विस प्रोवाइडर की तस्वीर और उनके बैग्स की चेकिंग एंट्री बुक में दर्ज करें।
- कीमती सामान पहले करें सुरक्षित: सफाई शुरू होने से पहले ही अपने सोने, चांदी और कैश को ऐसे कमरों या लॉकर में शिफ्ट कर दें, जहां सफाई नहीं होनी है।
मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी फिलहाल पुलिस कस्टडी में हैं और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गैंग ने मुंबई के अन्य किन इलाकों में सफाई के बहाने चोरियां की हैं।
