मुंबई में प्रदूषण पर BMC की बड़ी कार्रवाई, 69.55 किमी सड़कें साफ; 115 टन मलबा हटाया

mumbai-bmc-road-cleaning-air-pollution-drive-2026

मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए BMC का विशेष अभियान जारी है। 69.55 किमी सड़कें साफ कर 39.75 टन धूल और 115 टन निर्माण मलबा हटाया गया।

मुंबई: बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई में सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। 29 अक्टूबर को शहर की 69.55 किलोमीटर लंबी सड़कों की सफाई की गई। इस दौरान 39.75 टन धूल और 115 टन निर्माण एवं तोड़फोड़ का मलबा हटाया गया। यह विशेष अभियान 26 प्रशासनिक वार्डों की 146 सड़कों पर चलाया जा रहा है।

मुंबई में सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए यह अभियान 28 अक्टूबर से शुरू किया गया है। इसके तहत प्रमुख यातायात मार्गों के साथ उन इलाकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जहां सड़कों पर अधिक धूल और मिट्टी जमा होती है।

मुंबई के 13 निगरानी केंद्रों पर पीएम-10 का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक

मुंबई में प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के 14 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 13 केंद्रों पर पीएम-10 का वार्षिक औसत राष्ट्रीय निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज किया गया है।

बीएमसी की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, चेंबूर और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में पीएम-10 का वार्षिक औसत 125 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी राष्ट्रीय वार्षिक सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। कांदिवली एकमात्र ऐसा निगरानी केंद्र रहा, जहां यह सीमा पार नहीं हुई।

पीएम-10 हवा में मौजूद ऐसे छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर के श्वसन तंत्र में पहुंच सकते हैं। वहीं पीएम-2.5 इससे भी छोटे कण होते हैं, जो फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं।

किन सड़कों पर चल रहा है सफाई अभियान?

BMC ने मुंबई के 26 प्रशासनिक वार्डों की 146 सड़कों को इस विशेष अभियान में शामिल किया है। इनमें प्रमुख यातायात मार्गों को प्राथमिकता दी गई है।

इनमें बांद्रा-कुर्ला संपर्क मार्ग, सांताक्रूज-चेंबूर संपर्क मार्ग, पूर्वी और पश्चिमी द्रुतगति मार्ग, जोगेश्वरी-विक्रोली संपर्क मार्ग, घाटकोपर-मानखुर्द मार्ग, एसवी रोड, लिंक रोड, कार्टर रोड और सायन-मानखुर्द मार्ग शामिल हैं।

29 अक्टूबर को कुल 29 मार्गों पर सफाई की गई। इस दौरान सड़कों के किनारों, फुटपाथ, सड़क विभाजकों और किनारे बने पत्थर के हिस्सों पर जमा धूल और मिट्टी हटाई गई। इसके साथ ही धूल वाले स्थानों पर पानी का छिड़काव और बारीक फुहारों का इस्तेमाल किया गया, ताकि सफाई के दौरान धूल हवा में न फैले।

541 कर्मचारी और 471 स्वयंसेवक अभियान में तैनात

इस अभियान को पूरा करने के लिए BMC ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों और मशीनों को लगाया है। 29 अक्टूबर को 541 सफाई कर्मचारी और 471 स्वयंसेवक काम कर रहे थे।

सफाई के लिए 18 जेसीबी मशीनें, 20 डंपर, 21 धुंध छिड़काव मशीनें, 21 यांत्रिक सड़क सफाई मशीनें, 6 छोटी विद्युत सफाई मशीनें और 6 सड़क विभाजक सफाई मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

हटाई गई धूल और निर्माण मलबे को एकत्र कर उसके उचित निपटारे की व्यवस्था भी की गई।

निर्माण स्थलों पर भी BMC की सख्ती, 299 नोटिस जारी

सड़क की सफाई के साथ BMC निर्माण और तोड़फोड़ के कामों से होने वाले प्रदूषण पर भी कार्रवाई कर रही है।

अक्टूबर 2026 में 22 तारीख तक प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन नहीं करने वाले निर्माण स्थलों को 29 काम बंद करने के नोटिस और 270 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

वार्डवार कार्रवाई में एन वार्ड में सबसे अधिक 105 कारण बताओ नोटिस जारी हुए। इसके अलावा टी वार्ड में 52 और आर-दक्षिण वार्ड में 42 नोटिस दिए गए। शेष 71 नोटिस दूसरे वार्डों में जारी किए गए।

निर्माण स्थलों के आकार के अनुसार आसपास की सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी भी तय की गई है। 4,000 वर्ग मीटर तक के निर्माण स्थलों को दोनों ओर 100 मीटर, 4,000 से 10,000 वर्ग मीटर तक के स्थलों को 200 मीटर और 10,000 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों को दोनों ओर 500 मीटर तक सड़क की सफाई करनी है।

हर वार्ड को 15 लाख रुपये, सफाई की निगरानी भी होगी

इस विशेष अभियान के लिए प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड को 15 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है। यदि सभी 26 वार्डों के लिए यह राशि समान रूप से निर्धारित है, तो कुल प्रावधान 3.90 करोड़ रुपये बैठता है।

अभियान के दौरान अधिकारियों को सफाई से पहले और बाद के स्थान-आधारित फोटो और वीडियो जमा करने, प्रतिदिन साफ किए गए मार्गों का विवरण देने तथा हटाई गई धूल और मलबे की मात्रा का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे सफाई कार्य की निगरानी और वार्डवार प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

प्रदूषण से बच्चों और सांस के मरीजों को अधिक खतरा

सड़कों पर जमा धूल और हवा में मौजूद बारीक कणों का असर आम लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से खांसी, आंखों और गले में जलन तथा सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अस्थमा के मरीजों की समस्या भी बढ़ सकती है।

बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों को वायु प्रदूषण से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

हालांकि, केवल सड़कों की सफाई से मुंबई का पूरा वायु प्रदूषण खत्म नहीं हो सकता। वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य, कचरा जलाना और मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को प्रभावित करती हैं। इसलिए सड़क की धूल हटाने के साथ इन दूसरे स्रोतों पर नियंत्रण भी जरूरी है।

मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाने की मांग

मुंबई के पालक मंत्री आशीष शेलार ने भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर अतिरिक्त उपाय करने का सुझाव दिया है।

उनके सुझावों में सप्ताह में एक दिन निर्माण और तोड़फोड़ का काम बंद रखने पर विचार, प्रदूषण वाले इलाकों में पानी का छिड़काव, रात के समय मशीनों से सड़कों की सफाई बढ़ाना और कचरा जलाने तथा अवैध रूप से निर्माण मलबा फेंकने की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करना शामिल है।

इसके अलावा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और निर्माण स्थलों पर वायु गुणवत्ता मापने वाले उपकरणों की व्यवस्था पूरी करने पर भी जोर दिया गया है।

सप्ताह में एक दिन निर्माण कार्य बंद रखने का सुझाव है, इसे लागू सरकारी आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा के मार्गदर्शन और उप आयुक्त (घनकचरा व्यवस्थापन) किरण दिघावकर के नेतृत्व में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अभियान की घोषित अवधि 6 नवंबर 2026 तक है।

अब इस अभियान की प्रभावशीलता का आकलन केवल साफ की गई सड़कों और हटाए गए मलबे से नहीं, बल्कि संबंधित इलाकों में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में आने वाले बदलाव से भी होगा।

Ismail Shaikh Avatar
Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading