महाराष्ट्र सरकार के नए परिपत्र में साझा 7/12 जमीन की रजिस्ट्री के नियम स्पष्ट किए गए हैं। जानें मोजणी की ‘क’ प्रत और सहहिस्सेदारों की NOC कब जरूरी होगी।
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने साझा नाम वाले 7/12 उतारे की जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री को लेकर नया परिपत्र जारी किया है। 19 अक्टूबर 2026 के इस परिपत्र के अनुसार, जमीन बेचने वाले सहहिस्सेदार के पास भूमि अभिलेख विभाग की मोजणी की ‘क’ प्रत है और उसे बिक्री के दस्त के साथ जोड़ा गया है, तो अन्य सहहिस्सेदारों की लिखित सहमति या NOC के बिना भी रजिस्ट्री की जा सकती है। लेकिन यह प्रत उपलब्ध नहीं होने या दस्त के साथ नहीं लगाने पर दूसरे सहहिस्सेदारों की सहमति अथवा NOC जरूरी होगी।
महसूल विभाग के इस निर्देश में सभी दुय्यम निबंधकों को नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य साझा जमीन की बिक्री के बाद होने वाले विवादों और पंजीकरण कार्यालयों में आने वाली शिकायतों को कम करना है।
मोजणी की ‘क’ प्रत होने पर NOC की जरूरत नहीं
परिपत्र के पहले बिंदु के अनुसार, अगर 7/12 उतारे पर कई सहहिस्सेदारों के नाम दर्ज हैं और उनमें से कोई अपने हिस्से का निर्धारित भाग बेचना चाहता है, तो उसे भूमि अभिलेख विभाग से प्राप्त मोजणी की ‘क’ प्रत दस्त के साथ संलग्न करनी होगी।
ऐसी स्थिति में दुय्यम निबंधक दूसरे सहहिस्सेदारों की लिखित सहमति या ना-हरकत प्रमाणपत्र (NOC) मांगे बिना दस्त का पंजीकरण कर सकते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मोजणी की ‘क’ प्रत का इस्तेमाल जमीन के संबंधित भाग की पहचान और सीमा से जुड़ी जानकारी के लिए किया जाता है। हालांकि, सिर्फ मोजणी का नक्शा होने से स्वामित्व, कानूनी विभाजन या जमीन पर लागू दूसरे प्रतिबंधों की जांच खत्म नहीं होती।
मोजणी की ‘क’ प्रत नहीं है तो क्या करना होगा?
परिपत्र के दूसरे बिंदु में स्पष्ट किया गया है कि अगर जमीन बेचने वाला सहहिस्सेदार मोजणी की ‘क’ प्रत उपलब्ध नहीं कराता या उसे दस्त के साथ संलग्न नहीं करता, तो अन्य सहहिस्सेदारों की लिखित सहमति या NOC के बिना दस्त का पंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
इसलिए जमीन बेचने से पहले संबंधित दस्तावेज तैयार रखना महत्वपूर्ण होगा। जिन लोगों के पास मोजणी की प्रत नहीं है, उन्हें अपनी स्थिति के अनुसार भूमि अभिलेख विभाग और संबंधित दुय्यम निबंधक कार्यालय से आवश्यक प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।
सरकार ने नया परिपत्र क्यों जारी किया?
परिपत्र की प्रस्तावना में बताया गया है कि साझा जमीन के किसी हिस्से की बिक्री के समय दूसरे सहहिस्सेदारों की अनुमति या NOC नहीं लेने से पक्षकारों के बीच विवाद पैदा होते हैं। ऐसे विवादों के कारण न्यायालयों में याचिकाओं की संख्या बढ़ने और पंजीकरण विभाग को शिकायतें मिलने की समस्या का उल्लेख किया गया है।
इसी वजह से सहहिस्सेदारों की लिखित सहमति को दस्त का हिस्सा बनाने और सभी दुय्यम निबंधकों को मानक कार्यप्रणाली (SOP) के माध्यम से निर्देश देने का प्रस्ताव रखा गया था।
परिपत्र में महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश से अवर सचिव विनायक लवटे के हस्ताक्षर का उल्लेख है। इसकी प्रत नोंदणी महानिरीक्षक व मुद्रांक नियंत्रक, महाराष्ट्र राज्य, पुणे; अपर मुद्रांक नियंत्रक, प्रधान मुद्रांक कार्यालय, मुंबई; सभी विभागों के नोंदणी उपमहानिरीक्षक व मुद्रांक उपनियंत्रक; सभी सह जिला निबंधक व मुद्रांक जिलाधिकारी और सभी दुय्यम निबंधकों को भेजे जाने की बात कही गई है।
संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 44 का क्या है महत्व?
परिपत्र में संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 44 का उल्लेख है। सामान्य रूप से यह धारा किसी सह-मालिक को अचल संपत्ति में अपना कानूनी हिस्सा हस्तांतरित करने से संबंधित है।


इसका मतलब यह नहीं है कि साझा 7/12 पर नाम दर्ज होने के कारण कोई भी सहहिस्सेदार अपना कानूनी हिस्सा हर परिस्थिति में नहीं बेच सकता। लेकिन किसी अविभक्त हिस्से की बिक्री और जमीन के निश्चित भूभाग को अलग करके बेचने की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।
खरीदारों को यह भी समझना चाहिए कि दस्त का पंजीकरण होना और जमीन पर निर्विवाद, अलग स्वामित्व मिलना दो अलग बातें हैं। इसलिए जमीन खरीदने से पहले विक्रेता के स्वामित्व दस्तावेज, मोजणी नक्शा, फेरफार रिकॉर्ड, बंधक और लंबित मुकदमों की जांच करना जरूरी है।
मोजणी की ‘क’ प्रत के लिए कहां आवेदन करें?
महाराष्ट्र भूमि अभिलेख विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर जमीन की मोजणी के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन में जिला, तालुका, गांव, सर्वे नंबर या गट नंबर और हिस्सा नंबर जैसी जानकारी की जरूरत पड़ सकती है।
भूमि अभिलेख विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर मोजणी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है:
https://landrecord.mahaonline.gov.in/MeasurementOrdinaryApplication/MeasurementOrdinaryApplication
आवेदन करने से पहले संबंधित कार्यालय से यह पता कर लेना चाहिए कि जमीन के प्रस्तावित व्यवहार के लिए कौन-सी मोजणी आवश्यक है, ‘क’ प्रत किस रूप में मिलेगी और उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है।
जमीन खरीदने और बेचने वालों के लिए जरूरी बातें
जमीन बेचने वाले सहहिस्सेदार को सबसे पहले अपने कानूनी हिस्से और बिक्री के लिए प्रस्तावित क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसके बाद मोजणी की ‘क’ प्रत की उपलब्धता और पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी संबंधित दुय्यम निबंधक कार्यालय से लेनी चाहिए।
खरीदार को केवल 7/12 उतारे पर नाम देखकर सौदा अंतिम नहीं करना चाहिए। स्वामित्व दस्तावेज, मोजणी, फेरफार, बंधक और जमीन पर किसी कानूनी विवाद की स्थिति की जांच भी जरूरी है। अगर दूसरे सहहिस्सेदारों के साथ मतभेद हैं, तो दस्त तैयार करने से पहले संपत्ति कानून के जानकार से सलाह लेना उचित होगा।
महाराष्ट्र सरकार के इस परिपत्र का मुख्य प्रावधान मोजणी की ‘क’ प्रत की उपलब्धता के आधार पर सहहिस्सेदारों की सहमति से जुड़ा है। हालांकि, 19 अक्टूबर 2026 के परिपत्र की मूल आधिकारिक प्रति संलग्न है। जमीन की रजिस्ट्री से पहले संबंधित पंजीकरण कार्यालय से वर्तमान निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है।
