मुंबई में मानव तस्करी के कथित प्रयास में मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा गिरफ्तार। जेजू द्वीप, फर्जी पासपोर्ट, ₹7.5 लाख के कथित भुगतान पर मुंबई पुलिस कर रही है जांच।
मुंबई: मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा (47) को एक महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप ले जाने की कथित योजना के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की। इससे एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोक लिया था। मामले में फर्जी पासपोर्ट, विदेश भेजने वाले कथित एजेंटों और ब्रिटेन तथा फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की जांच की जा रही है।
इस मामले में कथित भुगतान की रकम भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 50,000 रुपये अग्रिम और महिला के जेजू द्वीप पहुंचने के बाद 7 लाख रुपये मिलने का वादा किया गया था। हालांकि, इस रकम के वास्तविक भुगतान और पूरे नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच जारी है।
मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट स्कैन करते ही आया अलर्ट
इमिग्रेशन अधिकारी विजया सोनावणे (51) के अनुसार, विल्सन सुनील डिसिल्वा का पासपोर्ट सिस्टम में स्कैन किए जाने पर मानव तस्करी से संबंधित अलर्ट दिखाई दिया था। अलर्ट में संकेत था कि वह पहले भी महिलाओं को फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश ले जा चुका है।

इसके बाद अधिकारियों ने उससे पूछताछ की और मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि आर्थिक परेशानियों के कारण उसने पांच लोगों के लिए फर्जी पासपोर्ट हासिल किए थे। आरोप है कि वह इन लोगों को विदेश ले जाने के दौरान कभी उनका पति तो कभी पिता बनकर पेश आता था। इस कथित बयान के आधार पर पुलिस पुराने मामलों और विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है।
महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया ले जाने की कथित योजना
इस मामले में प्रस्तावित यात्रा मार्ग मुंबई से मलेशिया होते हुए दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप तक बताया गया है। पुलिस के सामने यह जांचना महत्वपूर्ण है कि महिला को किस उद्देश्य से विदेश ले जाया जा रहा था, यात्रा की व्यवस्था किसने की थी और आरोपी को भुगतान करने का प्रस्ताव किस व्यक्ति या एजेंट ने दिया था।
जेजू दक्षिण कोरिया का एक द्वीप है। इस मामले में उसका नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित योजना में महिला को वहीं पहुंचाने की बात सामने आई है। हालांकि, महिला की यात्रा का उद्देश्य, उसे दिए गए प्रस्ताव और उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने मामलों की भी जांच
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने पहले महिलाओं और बच्चों को फर्जी पासपोर्ट के जरिए ब्रिटेन और फ्रांस पहुंचाने में क्या भूमिका निभाई थी। इन पुराने मामलों में कथित रूप से विदेश ले जाए गए लोगों की पहचान, उनकी यात्रा के दस्तावेज और दूसरे संभावित आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस उन एजेंटों की तलाश में भी है जिन्होंने कथित तौर पर डिसिल्वा से संपर्क किया था। जांच का एक अन्य पहलू यह पता लगाना है कि पासपोर्ट तैयार कराने, यात्रा की व्यवस्था करने और विदेश पहुंचाने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
सरकारी या इमिग्रेशन अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित होने या इस मामले में किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
मुंबई एयरपोर्ट पर फर्जी पासपोर्ट के अन्य मामले भी सामने आए
मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले इससे पहले भी सामने आए हैं। 5 अक्टूबर 2026 को तीन विदेशी नागरिकों को कथित फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में भी एजेंटों की भूमिका जांच के दायरे में थी।
इसके अलावा, सहार पुलिस ने मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामलों में 20 एजेंटों को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 10 अगस्त 2026 तक सहार पुलिस के कुल 4,229 अपराध संबंधी FIR में से 1,459 पासपोर्ट फर्जीवाड़े से जुड़े थे।
मानव तस्करी के मामलों में क्या है सबसे अहम सवाल?
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला को विदेश ले जाने की वास्तविक योजना क्या थी और क्या इस कथित प्रयास के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसके साथ ही, पुलिस को ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करनी होगी और उन लोगों की पहचान करनी होगी जिन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश ले जाया गया था।
