घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र का काम तेज किया गया है। 33.7 करोड़ लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले केंद्र को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मुंबई: घाटकोपर पूर्व में बन रहे मलजल शोधन केंद्र का काम तय समय में पूरा करने के लिए महानगरपालिका ने निर्माण की रफ्तार बढ़ा दी है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने गुरुवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण, मशीनरी और बिजली से जुड़े कामों की समीक्षा की। परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और 1 अक्टूबर से करीब 1,000 कर्मचारी यहां काम कर रहे हैं।
33.7 करोड़ लीटर प्रतिदिन मलजल का होगा शोधन
घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र की क्षमता प्रतिदिन 337 मिलियन लीटर यानी 33.7 करोड़ लीटर मलजल के शोधन की होगी। यहां क्रमिक जैविक शोधन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मलजल को बेहतर तरीके से साफ करने के साथ समुद्र और खाड़ी में जाने वाले उपचारित पानी की गुणवत्ता में सुधार करना है।
नई व्यवस्था में पूरे 337 मिलियन लीटर मलजल का द्वितीय स्तर पर शोधन किया जाएगा। इसके अलावा करीब 170 मिलियन लीटर यानी 17 करोड़ लीटर पानी को तृतीय स्तर तक शोधन करने की योजना है। इस पानी का उपयोग पीने के अलावा अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
पुरानी व्यवस्था से क्या बदलेगा
घाटकोपर क्षेत्र की मौजूदा मलजल व्यवस्था में पानी को मुख्य रूप से शुरुआती स्तर पर साफ करने के बाद खाड़ी की ओर छोड़ा जाता है। नई परियोजना के पूरा होने पर शोधन की प्रक्रिया अधिक उन्नत होगी। इससे उपचारित पानी की गुणवत्ता बेहतर होने और खाड़ी तथा समुद्री पर्यावरण पर मलजल के प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परियोजना का लाभ घाटकोपर के साथ मानखुर्द, गोवंडी और चेंबूर क्षेत्र को भी मिलेगा। हालांकि इसका सीधा उद्देश्य पेयजल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मलजल के बेहतर शोधन और उपचारित पानी के गैर-पेय उपयोग को बढ़ाना है।

दिसंबर तक जलवाहिनी, मार्च में पूरी परियोजना
परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जलवाहिनी का काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद पूरी मलजल शोधन परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने की समयसीमा रखी गई है।
परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। 1 अक्टूबर 2026 से करीब 1,000 कर्मचारी निर्माण स्थल पर काम कर रहे हैं। अभिजीत बांगर ने निर्देश दिया कि परियोजना पूरी होने तक अतिरिक्त कार्यबल की व्यवस्था जारी रखी जाए।
पंपिंग केंद्र भी महत्वपूर्ण कड़ी
मलजल शोधन केंद्र के साथ घाटकोपर मलजल आगमन पंपिंग केंद्र के उन्नयन का काम भी जुड़ा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मलजल को शोधन केंद्र तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है। पंपिंग व्यवस्था और शोधन केंद्र के काम समय पर पूरे होना पूरी परियोजना के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निर्माण से लेकर बिजली व्यवस्था तक समीक्षा
निरीक्षण के दौरान अभिजीत बांगर ने शोधन प्रक्रिया के लिए बनाई जा रही टंकियों, पानी के आने-जाने की व्यवस्था, पंप गृह, गाद शोधन इकाई और आंतरिक पाइपलाइन के काम की समीक्षा की। उन्होंने पंप, वायु आपूर्ति यंत्र, छनाई व्यवस्था, गाद शोधन उपकरण और अन्य मशीनरी की स्थापना का भी जायजा लिया।
बिजली से जुड़े कामों में विद्युत पट्ट, तार व्यवस्था, मोटरों को बिजली आपूर्ति, नियंत्रण एवं स्वचालन व्यवस्था, निगरानी और नियंत्रण प्रणाली तथा वैकल्पिक बिजली व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
बांगर ने अधिकारियों को सभी काम समानांतर रूप से तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, कर्मचारियों की सुरक्षा और काम की कार्यक्षमता को प्राथमिकता देने को कहा।
मुंबई की बड़ी मलजल योजना का हिस्सा
घाटकोपर केंद्र मुंबई में बनाए जा रहे सात बड़े मलजल शोधन केंद्रों की व्यापक योजना का हिस्सा है। इन परियोजनाओं की कुल प्रस्तावित शोधन क्षमता 2,464 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इसका उद्देश्य शहर से निकलने वाले मलजल को निर्धारित मानकों के अनुसार उपचारित करना, समुद्री जल की गुणवत्ता सुधारना और उपचारित पानी के पुन: उपयोग की संभावनाएं बढ़ाना है।

घाटकोपर परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन 33.7 करोड़ लीटर मलजल के शोधन की क्षमता विकसित होगी। फिलहाल महानगरपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण, जलवाहिनी, मशीनरी और विद्युत प्रणालियों के सभी काम पूरे कर केंद्र को संचालन के लिए तैयार करना है।
निरीक्षण के दौरान उप आयुक्त (अभियांत्रिकी) शशांक भोरे, प्रमुख अभियंता (मुंबई मलनि:सारण परियोजना) राजेंद्र परब और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
