मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन कर रहे 1,700 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों पर महापौर रितू तावड़े ने हस्तक्षेप किया। नियमितीकरण समेत कई मांगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुंबई: आजाद मैदान में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य अभियान के तहत कार्यरत 1,700 से अधिक बाह्यस्रोत स्वास्थ्य कर्मियों के मामले में बड़ा प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ है। महापौर रितू तावड़े ने सोमवार शाम आंदोलन स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) को पत्र भेजकर मांगों पर तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए।
दस साल की सेवा वालों के लिए विशेष नीति की पहल
सबसे अहम पहल उन अनुभवी बाह्यस्रोत कर्मचारियों को लेकर है, जिन्होंने सेवा में दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। महापौर ने ऐसे कर्मचारियों को नियमित सेवा में शामिल करने के लिए एक बार की विशेष नीति तैयार करने को कहा है।

इसके तहत रिक्त पदों पर पात्र कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए व्यापक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इस प्रस्ताव को महानगरपालिका और राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर पहले से तैयार प्रस्तावों को भी गति देने को कहा गया है।
हालांकि, इस पहल को अभी सभी 1,700 से अधिक कर्मचारियों के नियमितीकरण का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। फिलहाल दस वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अनुभवी कर्मचारियों के लिए नीति और प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वेतन से लेकर प्रसूति अवकाश तक मांगें
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की मांगें केवल नियमितीकरण तक सीमित नहीं हैं। संशोधित न्यूनतम वेतन लागू कर उसका सीधा लाभ देने का मुद्दा भी इसमें शामिल है।
महिला कर्मचारियों को अधिकार के अनुसार सवेतन प्रसूति अवकाश देने, दीपावली का सानुग्रह अनुदान दिलाने और सेवा से जुड़े अन्य लाभ सुनिश्चित करने के लिए भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
भविष्य निधि और बीमा का लाभ समय पर देने पर जोर
कर्मचारियों को भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा के कानूनी लाभ निर्धारित समय पर मिलें, इस पर भी महापौर ने विशेष जोर दिया है। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।
वेतन में देरी की शिकायत को लेकर संबंधित ठेकेदार संस्था मेसर्स डी. एस. एंटरप्राइजेज को कड़ी समझ देने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायतों के लिए समिति बनाने का निर्देश
कर्मचारियों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी की अध्यक्षता में शिकायत निवारण समिति सक्रिय करने को भी कहा गया है। इससे वेतन, भविष्य निधि, बीमा और सेवा संबंधी शिकायतों को एक निर्धारित व्यवस्था के जरिए उठाने और उनके समाधान की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है।
कोविड के दौरान सेवा का भी उल्लेख
आंदोलन स्थल पर कर्मचारियों से बातचीत के दौरान महापौर रितू तावड़े ने कोविड-19 महामारी के दौरान उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में इन स्वास्थ्य कर्मियों ने मुंबईकरों के लिए दिन-रात काम किया और महानगरपालिका उनके योगदान से अवगत है।
महापौर ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इनके समाधान के लिए वह महानगरपालिका प्रशासन और राज्य सरकार के स्तर पर स्वयं भी लगातार प्रयास करेंगी।
इस दौरान नगरसेवक रोहिदास लोखंडे भी मौजूद थे।
अब इस मामले में सबसे अहम अगला चरण प्रशासन की ओर से विशेष नीति और नियमितीकरण का प्रस्ताव तैयार करना तथा उसे आवश्यक मंजूरियों के लिए आगे भेजना होगा। इसके साथ ही वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सेवा संबंधी मांगों पर कार्रवाई की प्रगति भी कर्मचारियों के आंदोलन की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
