किराए के मकान में कथित देह व्यापार का खुलासा, नाबालिग समेत चार महिलाएं मुक्त। प्रियंका केंद्रे और गोविंद केंद्रे गिरफ्तार, जांच जारी।
महाराष्ट्र: मराठवाड़ा के लातूर से किराए के मकान में कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद मानव तस्करी विरोधी इकाई ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग समेत चार महिलाओं को देहव्यापार के दलदल से मुक्त कराया है। मामले में प्रियंका बालासाहेब केंद्रे और गोविंद हनुमान केंद्रे को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, किराए के मकान का इस्तेमाल महिलाओं को बुलाकर ग्राहकों के लिए कथित देह व्यापार कराने में किया जा रहा था।
मामले में एफआईआर क्रमांक 678/2026 दर्ज की गई है। पुलिस कार्रवाई 30 सितंबर 2026 को की गई थी। जांच में सामने आया है कि मुक्त कराई गई चार महिलाओं में एक 17 साल 9 महीने की नाबालिग लड़की भी शामिल है।
किराए के मकान में चल रहा था कथित धंधा
पुलिस के अनुसार, प्रियंका बालासाहेब केंद्रे ने मकान किराए पर लिया था। आरोप है कि वहां महिलाओं और लड़कियों को बुलाया जाता था और ग्राहकों को लाकर देह व्यापार कराया जाता था। गोविंद हनुमान केंद्रे पर इस गतिविधि में सहयोग करने का आरोप है। दोनों को मामले में गिरफ्तार किया गया है।
मानव तस्करी विरोधी इकाई को मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने परिसर में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान चार महिलाएं मिलीं, जिन्हें वहां से मुक्त कराया गया। इनमें नाबालिग लड़की भी शामिल थी।
नकद, मोबाइल और कंडोम के पैकेट जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 2,000 रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और कंडोम के पैकेट समेत करीब 7,000 रुपये का सामान जब्त किया है।
एफआईआर में मानव तस्करी और पॉक्सो की धाराएं
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 143, 144 और 3(5), पॉक्सो अधिनियम की धारा 16, 17 और 18 तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 6 के तहत कार्रवाई दर्ज की गई है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 मानव तस्करी से संबंधित है, जबकि धारा 144 तस्करी किए गए व्यक्ति के शोषण से संबंधित प्रावधान है। पॉक्सो की धारा 16 उकसावे या सहायता, धारा 17 उसकी सजा और धारा 18 अपराध के प्रयास से संबंधित है।
हालांकि, एफआईआर में दर्ज धाराएं आरोपों और जांच की कानूनी दिशा बताती हैं। इससे आरोप अदालत में सिद्ध हो जाना नहीं माना जा सकता।
नाबालिग के मामले में विशेष कार्रवाई
नाबालिग लड़की मिलने के बाद उसके मामले में पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई की गई है। उसकी पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मामले में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 भी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस धारा की कानूनी व्याख्या अलग से करने के बजाय यहां एफआईआर में दर्ज प्रावधान के रूप में ही इसे देखा जाना उचित है, क्योंकि वास्तविक आरोपों और परिस्थितियों का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
पुलिस खंगाल रही महिलाओं को वहां लाने का तरीका
कार्रवाई के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि महिलाओं को इस मकान तक कैसे लाया गया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गतिविधि में गिरफ्तार दोनों आरोपियों के अलावा कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं।
किराए के मकान का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था, महिलाओं से संपर्क किस माध्यम से किया गया और इस गतिविधि से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी, इन पहलुओं पर भी जांच आगे बढ़ सकती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
इस साल लातूर में मानव तस्करी विरोधी इकाई इससे पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई कर चुकी है। जनवरी 2026 में आदर्श कॉलोनी के एक किराए के फ्लैट में कार्रवाई के दौरान चार महिलाओं को मुक्त कराया गया था। उस मामले में पुलिस ने सूचना की पुष्टि के लिए पहले बनावटी ग्राहक भेजने के बाद छापेमारी की थी।
इससे पहले लातूर में लॉज और स्पा से जुड़े कथित देह व्यापार के मामलों में भी पुलिस कार्रवाई सामने आ चुकी है।
आगे क्या होगा?
मामले की जांच एमआईडीसी पुलिस निरीक्षक समाधान चौरे के नेतृत्व में की जा रही है। कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक डॉ. भागीरथी पवार के मार्गदर्शन में हुई, जबकि सहायक पुलिस निरीक्षक अजिनाथ पाटील और मानव तस्करी विरोधी इकाई की टीम ने छापेमारी में हिस्सा लिया।
अब जांच में कथित नेटवर्क, महिलाओं को वहां लाने की प्रक्रिया, किराए के मकान के इस्तेमाल की अवधि और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका सामने आने का इंतजार है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दर्ज आरोपों पर आगे की कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
