Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा होगा। 400 MLD परियोजना, brine discharge, मछली कारोबार और पर्यावरणीय शर्तों पर जानिए पूरा मामला।
मुंबई: मनोरी में प्रस्तावित समुद्री जल शुद्धिकरण परियोजना को लेकर मछुआरा समुदाय और तटीय गांवों के लोगों का विरोध अब तेज हो गया है। गोरेई में 26 सितंबर को हुई बैठक में 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक मोर्चा निकालने का फैसला लिया गया। प्रदर्शनकारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका की मनोरी-गोरेई Desalination Plant परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल समुद्र से बड़े पैमाने पर पानी खींचने, अत्यधिक नमक वाले brine को वापस समुद्र में छोड़ने और इसके संभावित असर को लेकर है।
बैठक में गोरेई, मनोरी, पाली, मालवणी, उत्तन और उरण से जुड़े मछुआरा, किसान और तटीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में गोरेई विलेजर्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष स्विटी हेन्रिक्स, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के कार्याध्यक्ष और उत्तन निवासी बर्नार्ड डी’मेलो, गोरेई मच्छीमार सोसायटी के अध्यक्ष ओल्डिन वसाईकर, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के अध्यक्ष देवेंद्र तांडेल, नगरसेविका शर्मिला बागाजी, राजाराम पाटील, मनोज माशेलकर, हेमंत कोली, पाली-उत्तन मच्छिमार सहकारी सोसायटी के सचिव आल्सन निग्रेल लिंटन मुनीस, डेनिस डिसोजा और धारावी बेट के स्थानीय नागरिक मौजूद थे।
19 अक्टूबर के मोर्चे में क्या मांग होगी?
मछुआरा समुदाय की मुख्य मांग परियोजना को रद्द करने की है। समुदाय का कहना है कि मनोरी-गोरेई तट के समुद्री क्षेत्र पर उनकी आजीविका निर्भर है और परियोजना के कारण समुद्र से पानी लेने तथा प्रक्रिया के बाद अधिक नमक वाले पानी को वापस समुद्र में छोड़ने से मछली पकड़ने के क्षेत्र, समुद्री जैव विविधता और पारंपरिक रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।
स्विटी हेन्रिक्स ने कहा कि स्थानीय लोगों से पर्याप्त चर्चा किए बिना पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और परियोजना का मछली पकड़ने, नौवहन तथा मछुआरों की आजीविका पर क्या असर होगा, इस पर स्पष्टता नहीं है। सितंबर में हुए विरोध के बाद अधिकारियों की ओर से बातचीत की पहल होने की बात भी सामने आई है।
बर्नार्ड डी’मेलो ने कहा कि कोली समुदाय के लिए समुद्र केवल आय का साधन नहीं बल्कि उनकी परंपरा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने परियोजना से मछली पकड़ने के क्षेत्रों पर खतरे की आशंका जताई है।
400 MLD की परियोजना में पहले कितना पानी बनेगा?
मनोरी परियोजना को Sea Water Reverse Osmosis यानी SWRO तकनीक पर विकसित किया जा रहा है। इसकी पहली चरण की क्षमता 200 MLD रखी गई है और आगे इसे 400 MLD तक बढ़ाया जा सकता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 200 MLD Phase-I और भविष्य में 400 MLD क्षमता का उल्लेख है।
परियोजना के लिए मनोरी गांव में लगभग 20 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार यह महाराष्ट्र सरकार की जमीन है, जो महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में थी। इसमें सर्वे नंबर 257 (भाग), 263, 289/1, 290 और 291 शामिल हैं। जमीन को पथरीली और बंजर प्रकृति की बताया गया है।
समुद्र से पानी लेने के बाद क्या समुद्र में वापस जाएगा?
यही विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू है।
RO प्रक्रिया में समुद्री पानी से कम लवणता वाला पानी अलग किया जाता है और बचा हुआ ज्यादा लवणता वाला पानी brine के रूप में निकलता है। मनोरी परियोजना में इस brine को समुद्र में छोड़े जाने का प्रस्ताव है।
पर्यावरणीय आकलन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार Phase-I में brine reject करीब 300 MLD और Phase-II में करीब 600 MLD तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित brine की औसत लवणता लगभग 56.8 PSU बताई गई है, जबकि intake क्षेत्र के समुद्री पानी की लवणता करीब 35.5 PSU बताई गई है।
मछुआरा संगठनों को आशंका है कि इस तरह के concentrated brine discharge से मछलियों के प्रजनन क्षेत्र, plankton और समुद्री food chain पर असर पड़ सकता है। हालांकि उपलब्ध पर्यावरणीय दस्तावेजों में इसे संभावित प्रभाव के रूप में जांचने और नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल किए गए हैं; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि परियोजना से निश्चित रूप से समुद्री नुकसान होगा।
सरकारी दस्तावेजों में भी brine के असर पर सवाल उठा
25 मार्च 2026 की महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में परियोजना पर चर्चा के दौरान concentrated brine discharge और मछलियों पर संभावित असर से जुड़ा सवाल सामने आया था। परियोजना के सलाहकार पक्ष ने discharge location और उससे जुड़े नियंत्रण उपायों की जानकारी दी थी।
इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली, लेकिन मंजूरी के साथ marine ecology की निगरानी और brine के दीर्घकालीन प्रभाव का अध्ययन करने की शर्तें भी रखी गईं। पर्यावरणीय असर पर शोध के लिए शुरुआती तौर पर 10 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की शर्त सामने आई है। इसमें brine के पुन: उपयोग, बेहतर desalination technology और marine pollution कम करने के उपायों पर भी शोध शामिल है।
मनोरी क्रीक और मैंग्रोव को लेकर क्या शर्तें हैं?
परियोजना से जुड़े CRZ दस्तावेजों में साइट को CRZ-I(B), CRZ-III और CRZ-IV क्षेत्रों से संबंधित बताया गया है। मनोरी क्रीक में स्थानीय मछुआरों की गतिविधियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
CRZ मंजूरी में मनोरी क्रीक में गतिविधियों पर प्रतिबंध, आसपास के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और समुद्र की सतह तथा समुद्री तल पर असर कम करने के उपाय शामिल किए गए हैं। पाइपलाइन बिछाने में tunnelling का इस्तेमाल करने की शर्त भी रखी गई है ताकि seabed disturbance कम किया जा सके।
इसका मतलब यह है कि परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन मंजूरी बिना शर्त नहीं है। Marine ecology, brine discharge, मैंग्रोव और समुद्री क्षेत्र की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी परियोजना का हिस्सा हैं।
मछुआरों की आजीविका का सवाल कितना बड़ा है?
मनोरी और आसपास के तटीय इलाकों में विवाद केवल समुद्र में मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। पर्यावरणीय आकलन से जुड़ी जानकारी के अनुसार परियोजना क्षेत्र की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से fishing और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर बताई गई है। मनोरी में करीब 200 motorised और 150 non-motorised boats तथा उत्तन में लगभग 400 fishing boats का उल्लेख किया गया है।
मछली कारोबार से जुड़े रोजगार में मछली पकड़ने के अलावा fish-seed collection, sorting, झींगा छीलना, मछली सुखाना, बिक्री, जाल बनाना, नावों की मरम्मत और अन्य shore-based activities भी शामिल हैं। महिलाओं की भूमिका भी इस पूरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बताई गई है।
मछली पकड़ने का सामान्य मौसम 15 अगस्त से 31 मई तक बताया गया है। ऐसे में अक्टूबर में प्रस्तावित मोर्चा उस समय हो रहा है जब स्थानीय fishing season चल रहा होगा।
BMC को इस परियोजना की जरूरत क्यों लगती है?
मुंबई की बढ़ती जल जरूरत को देखते हुए BMC desalination को अतिरिक्त और climate-resilient water source के रूप में विकसित करना चाहता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में मनोरी परियोजना को शहर की जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। 2041 के लिए मुंबई की projected water demand 6,424 MLD बताई गई है।
इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा जल स्रोतों पर निर्भरता के साथ एक अतिरिक्त समुद्री जल स्रोत तैयार करना है। Phase-I में 200 MLD और आगे 400 MLD तक क्षमता बढ़ाने की योजना इसी दीर्घकालीन जरूरत से जुड़ी है।
मनोरी से मुंबई तक पानी कैसे पहुंचेगा?
Desalination plant से तैयार पानी को शहर के वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए अलग underground conveyance system तैयार किया जा रहा है। मनोरी से चर्कोप और आगे महावीर नगर, कांदिवली तक लगभग 7.2 किलोमीटर का underground tunnel प्रस्तावित है।
इस tunnel और संबंधित infrastructure के लिए लगभग 2,241.3 करोड़ रुपये का contract Afcons Infrastructure Ltd से जुड़ा है। परियोजना को पूरा करने की अवधि 45 महीने और commissioning का लक्ष्य दिसंबर 2029 बताया गया है।
11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा सिर्फ plant की निर्माण लागत नहीं
मनोरी परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग आंकड़ों के कारण भ्रम की स्थिति रही है। BMC से जुड़े दस्तावेजों और tender information के अनुसार 11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा केवल plant बनाने की लागत नहीं बल्कि लंबे समय के operation, maintenance, electricity और अन्य खर्चों को भी शामिल करता है। GVPR Engineers Limited को परियोजना के लिए चुना गया था।
परियोजना की मूल construction cost करीब 4,077 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 20 साल के maintenance और electricity समेत अन्य lifecycle expenses जुड़े हैं। दूसरी ओर, 2,241.3 करोड़ रुपये का आंकड़ा अलग underground water-conveyance tunnel package से संबंधित है।
परियोजना की शुरुआत से अब तक क्या हुआ?
मनोरी desalination project को BMC के Standing Committee और Municipal Corporation से फरवरी 2021 में मंजूरी मिली थी। शुरुआत में 200 MLD plant को भविष्य में 400 MLD तक विस्तार योग्य बनाने की योजना रखी गई थी। शुरुआती tender प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद BMC ने 28 मई 2025 को Design-Build-Operate आधार पर नया tender जारी किया।
मार्च 2026 में पुराने baseline environmental data की validity समाप्त होने के बाद जनवरी-फरवरी 2026 में environmental baseline monitoring दोबारा की गई और updated EIA पेश किया गया।
इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली। मंजूरी के साथ marine research, brine monitoring, मैंग्रोव सुरक्षा, मनोरी क्रीक की सुरक्षा, tunnelling और renewable-energy से जुड़ी शर्तें लागू की गईं।
अब आगे क्या होगा?
26 सितंबर की बैठक के बाद 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक प्रस्तावित मोर्चा इस विवाद का अगला बड़ा घटनाक्रम होगा। मछुआरा और तटीय समुदाय परियोजना को रद्द करने की मांग पर कायम हैं।
दूसरी ओर, परियोजना को CRZ मंजूरी मिल चुकी है और BMC इसे मुंबई की दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए विकसित कर रहा है। अब विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहेगा कि पर्यावरणीय मंजूरी में रखी गई marine monitoring, brine management, मैंग्रोव संरक्षण और मनोरी क्रीक से जुड़ी शर्तों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और स्थानीय मछुआरा समुदाय के साथ आगे कितनी प्रभावी बातचीत होती है।
19 अक्टूबर का मोर्चा इसी टकराव का अगला चरण होगा—एक तरफ मुंबई की बढ़ती पानी की जरूरत और दूसरी तरफ मनोरी-गोरेई के समुद्र पर निर्भर समुदाय की पर्यावरण और आजीविका संबंधी चिंताएं।
