मुंबई में नया ऑटो-टैक्सी किराया लागू है, लेकिन मीटर चिप की कमी से रिकैलिब्रेशन धीमा है। 30 नवंबर की डेडलाइन और जुर्माने का पूरा अपडेट जानें।
मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा और काली-पीली टैक्सियों का नया किराया 1 सितंबर से लागू हो चुका है, लेकिन डिजिटल मीटरों में नई दरें अपडेट करने की प्रक्रिया अब चिप की कमी के कारण धीमी पड़ गई है। परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। ऐसे में बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर तय समय में अपडेट कराने को लेकर चालकों की चिंता बढ़ गई है।
नए नियम के तहत ऑटो का पहले 1.5 किलोमीटर का न्यूनतम किराया 26 रुपये से बढ़कर 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का 31 रुपये से बढ़कर 33 रुपये हो गया है। इसके बाद ऑटो का किराया 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर और टैक्सी का 21.90 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है।
मीटर में चिप नहीं तो नया किराया कैसे लिया जा रहा है?
मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा होने तक चालकों को RTO की ओर से स्वीकृत संशोधित टैरिफ कार्ड के आधार पर नया किराया लेने की अनुमति है। यानी सिर्फ इसलिए कि इलेक्ट्रॉनिक मीटर में अभी पुरानी दर दिखाई दे रही है, यात्री को अनिवार्य रूप से पुराना किराया देना जरूरी नहीं है। संशोधित टैरिफ कार्ड मीटर अपडेट होने तक लागू रहेगा।
यही व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी। इसके बाद वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक मीटरों में संशोधित दरें अपडेट होना जरूरी होगा।
चिप की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
नए किराए के लिए डिजिटल मीटर में संशोधित दरों वाली विशेष चिप लगानी पड़ती है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार चिप की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से रिकैलिब्रेशन की गति प्रभावित हो रही है। परिवहन विभाग ने मीटर कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर चिप का उत्पादन और प्रोग्रामिंग शुरू की है, लेकिन अभी आपूर्ति जरूरत के मुताबिक नहीं पहुंच पाई है।
रिकैलिब्रेशन की प्रक्रिया में अधिकृत केंद्र पर पुरानी सील हटाकर नई किराया दर वाली चिप लगाई जाती है। इसके बाद मीटर की जांच होती है और फिर RTO की मौजूदगी में सड़क पर टेस्ट किया जाता है। प्रक्रिया सही पाए जाने पर मीटर को सील कर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
लाखों वाहनों के मीटर अपडेट करने की चुनौती
MMR में ऑटो और काली-पीली टैक्सियों की संख्या लाखों में है। करीब 5 लाख ऑटो और 45 हजार काली-पीली टैक्सियों का उल्लेख है।
इसके मुकाबले क्षेत्र में मीटर टेस्टिंग और रिकैलिब्रेशन के लिए करीब 15 से 20 अधिकृत केंद्र होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और सीमित केंद्रों के बीच 30 नवंबर की समय-सीमा पूरी करना परिवहन विभाग के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
एक वाहन का रिकैलिब्रेशन पूरा होने में लग सकते हैं 2-3 दिन
रिकैलिब्रेशन सिर्फ चिप लगाने तक सीमित नहीं है। एक बार वाहन अधिकृत केंद्र पर पहुंचने के बाद पूरी प्रक्रिया में दो से तीन दिन लग सकते हैं। इसमें मीटर अपडेट, परीक्षण, RTO प्रक्रिया और सीलिंग शामिल है।
यही वजह है कि चालकों के लिए केवल चिप की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि अधिकृत केंद्रों की क्षमता और वहां मिलने वाली तारीख भी महत्वपूर्ण हो गई है।
रिकैलिब्रेशन शुल्क कितना है?
परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 700 रुपये प्रति वाहन की राशि तय किए जाने की जानकारी 6 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आई थी। इसके साथ मीटर निर्माताओं और अधिकृत एजेंसियों को GST सहित रसीद जारी करने तथा वसूली का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि 13 और 15 सितंबर की कुछ रिपोर्टों में 600 रुपये का शुल्क और उसका अलग-अलग मदों में ब्योरा दिया गया है। इसलिए चालकों को किसी भी अतिरिक्त राशि का भुगतान करने से पहले अधिकृत केंद्र पर प्रदर्शित सरकारी शुल्क सूची और कंप्यूटर जनरेटेड रसीद जरूर लेनी चाहिए। परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार केंद्रों पर CCTV निगरानी और मीटर की सील संख्या का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है।
30 नवंबर के बाद क्या होगा?
30 नवंबर 2026 तक मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा करना है। इसके बाद बिना अपडेट वाले वाहनों पर विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। RTO अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में 50 रुपये प्रतिदिन के संभावित दंड, अधिकतम 5,000 रुपये तक, का उल्लेख किया गया है।
हालांकि यह राशि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रस्तावित/संभावित दंड के रूप में सामने आई है। इसलिए अंतिम कार्रवाई और दंड की शर्तें संबंधित परिवहन विभाग के आदेश के अनुसार ही लागू होंगी।
इस स्थिति में चालकों के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि यदि कोई चालक समय रहते अधिकृत केंद्र पर पहुंचता है, लेकिन चिप उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका मीटर अपडेट नहीं हो पाता, तो क्या उसे भी deadline के बाद दंड का सामना करना पड़ेगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इस स्थिति पर स्पष्ट छूट का उल्लेख नहीं है।
यात्रियों के लिए नया किराया कितना?
नई दरों के अनुसार:
| वाहन | पहले 1.5 किमी | उसके बाद |
|---|---|---|
| ऑटो रिक्शा | ₹27 | ₹18.22 प्रति किमी |
| काली-पीली टैक्सी | ₹33 | ₹21.90 प्रति किमी |
10 किलोमीटर की यात्रा का उदाहरण लें तो ऑटो का किराया करीब 182 रुपये और काली-पीली टैक्सी का करीब 219 रुपये बैठता है। पहले यही दूरी लगभग 171 रुपये और 207 रुपये थी।
रात 12 बजे से सुबह 5 बजे के बीच 25 प्रतिशत अतिरिक्त किराया लागू है। संशोधित न्यूनतम दर के आधार पर यह ऑटो के लिए 33.75 रुपये और टैक्सी के लिए 41.25 रुपये के आसपास बैठता है।
वसई और मीरा-भायंदर के चालकों को अलग सुविधा
वसई और मीरा-भायंदर क्षेत्र में चलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों को ठाणे RTO के अंतर्गत आने वाले अधिकृत केंद्रों पर मीटर रिकैलिब्रेशन कराने की सुविधा दी गई है। अन्य क्षेत्रों के वाहनों को संबंधित RTO क्षेत्र के अधिकृत केंद्रों के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अब सबसे बड़ी चिंता 30 नवंबर की समय-सीमा
नई दरें लागू हो चुकी हैं, लेकिन मीटरों को अपडेट करने वाली चिप की उपलब्धता और सीमित रिकैलिब्रेशन केंद्रों के कारण प्रक्रिया की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, चालकों के पास 30 नवंबर तक मीटर अपडेट कराने की समय-सीमा है और उसके बाद कार्रवाई तथा संभावित दैनिक दंड का प्रावधान बताया गया है।
फिलहाल परिवहन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—चिप की आपूर्ति को पर्याप्त करना और उपलब्ध अधिकृत केंद्रों की क्षमता के जरिए बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर समय पर अपडेट कराना। वहीं, यात्रियों के लिए इस अवधि में RTO-approved tariff card ही संशोधित किराए का प्रमुख आधार बना रहेगा।
