डेढ़ किलोमीटर पैदल पानी लाने की मजबूरी खत्म, पालघर के 250 परिवारों को मिली बड़ी राहत

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पालघर के जव्हार तहसील स्थित साखरशेत गांव में वर्षों पुरानी पेयजल समस्या खत्म हो गई है। ‘जलसेतु’ पहल के तहत 250 से अधिक परिवारों को अब गांव में ही सुरक्षित पेयजल मिल रहा है।

महाराष्ट्र/ पालघर: पालघर जिले के जव्हार तहसील के साखरशेत (उंबरखेड) गांव में रहने वाले 250 से अधिक परिवारों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो गया है। जिन ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को रोज़ाना करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था, उन्हें अब गांव में ही सुरक्षित पेयजल मिलने लगा है। इस पहल से ग्रामीणों की दैनिक परेशानी कम होने के साथ स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

यह सुविधा खावडा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड की ‘जलसेतु’ पहल के तहत शुरू की गई है। परियोजना का उद्घाटन 13 जुलाई को स्थानीय आदिवासी संस्कृति के प्रतीक पारंपरिक तारपा नृत्य के साथ किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और कंपनी के अधिकारियों ने भाग लिया।

1.5 किलोमीटर दूर से लाई गई पानी की पाइपलाइन

परियोजना के तहत गांव से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर स्थित एक विश्वसनीय जलस्रोत से साखरशेत तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके साथ ही पूरे गांव में 24 जल वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि सभी परिवारों तक आसानी से सुरक्षित पेयजल पहुंच सके।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले पानी लाने में हर दिन काफी समय और मेहनत लगती थी। अब घर के नजदीक पानी मिलने से महिलाओं और परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

ग्रामीणों की दिनचर्या में आया बड़ा बदलाव

नई जलापूर्ति व्यवस्था शुरू होने के बाद अब महिलाओं को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है। इससे समय की बचत होने के साथ बच्चों और परिवार की देखभाल के लिए अधिक समय मिल सकेगा। स्वच्छ पेयजल मिलने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों ने इसे गांव के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा बताते हुए स्वागत किया है।

कंपनी ने क्या कहा?

खावडा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के उपाध्यक्ष निनाद पितळे ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य केवल बिजली प्रसारण तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन क्षेत्रों में वह काम कर रही है वहां के स्थानीय समुदायों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि ‘जलसेतु’ जैसी पहल ग्रामीणों के साथ दीर्घकालिक विश्वास और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास है।

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ग्राम पंचायत ने जताया संतोष

कार्यक्रम में साखरशेत ग्राम पंचायत की सरपंच अनीता चौधरी, उपसरपंच रुकेश जयराम काव्हा तथा कंपनी के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

उपसरपंच रुकेश काव्हा ने बताया कि पहले गांव की महिलाओं को रोज़ाना लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था। नई पाइपलाइन शुरू होने के बाद अब गांव को नियमित और विश्वसनीय जलापूर्ति मिल रही है, जिससे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हुआ है।

ग्रामीणों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

सुरक्षित पेयजल किसी भी गांव के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। साखरशेत में शुरू हुई यह परियोजना केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के समय, श्रम और दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

FAQ

प्रश्न 1: यह परियोजना किस गांव में शुरू हुई है?

पालघर जिले के जव्हार तहसील स्थित साखरशेत (उंबरखेड) गांव में।

प्रश्न 2: इस परियोजना से कितने परिवारों को लाभ मिलेगा?

250 से अधिक परिवारों को सुरक्षित पेयजल की सुविधा मिलेगी।

प्रश्न 3: पहले ग्रामीणों को कितनी दूरी तय करनी पड़ती थी?

लगभग 1.5 किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था।

प्रश्न 4: परियोजना के तहत क्या-क्या बनाया गया है?

भूमिगत पाइपलाइन और गांव में 24 जल वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं।


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