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  • कांदिवली की बिल्डिंग में आग, एक ही परिवार के 8 लोग झुलसे

    कांदिवली की बिल्डिंग में आग, एक ही परिवार के 8 लोग झुलसे

    मुंबई के कांदिवली में रविवार सुबह एक बिल्डिंग में लगी आग से एक ही परिवार के 8 लोग घायल हो गए। दमकल ने सभी को बचाया, तीन ICU में भर्ती।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम, शंकर गली इलाके में रविवार सुबह अग्रवाल रेसिडेंसी की एक रिहायशी बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसे में एक ही परिवार के 8 लोग घायल हो गए, जिनमें एक बुजुर्ग और तीन बच्चे भी शामिल हैं। आग बिल्डिंग की दूसरी मंज़िल के एक फ्लैट में लगी थी। हादसा सुबह करीब 7 बजकर 45 मिनट पर हुआ।

    दमकल विभाग की फुर्ती से आग पर करीब 30 मिनट में काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक पूरा फ्लैट धुएं से भर चुका था। सभी लोग धुएं में फंस गए थे और दमकल कर्मियों ने उन्हें बाहर निकाला।

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    कैसे लगी आग

    बीएमसी डिजास्टर मैनेजमेंट सेल के मुताबिक, आग फ्लैट के इलेक्ट्रिकल वायरिंग सिस्टम से शुरू हुई और वहीं तक सीमित रही। पर फ्लैट में मौजूद लकड़ी के फर्नीचर ने आग को भड़का दिया। इससे गाढ़ा काला धुआं पूरे फ्लोर में फैल गया।

    एक फायर अधिकारी ने बताया —

    “फ्लैट में स्मोक बहुत ज्यादा हो गया था, बिजली सप्लाई भी बंद थी, जिससे विज़िबिलिटी नहीं थी। दमकलकर्मियों ने स्टेयरकेस के रास्ते से एक-एक कर परिवार को बाहर निकाला।”

    घायलों की पहचान

    घायल सभी कोठारी परिवार के सदस्य हैं —

    1. चिंतन अभय कोठारी (45)
    2. ख्याति चिंतन कोठारी (42)
    3. ज्योति अभय कोठारी (66)
    4. पार्थ कोठारी (39)
    5. ऋद्धि पार्थ कोठारी (36)
    6. आयरा पार्थ कोठारी (6)
    7. प्रांज पार्थ कोठारी (3)
    8. महावीर चिंतन कोठारी (7)

    इनमें से तीन — चिंतन, ख्याति और ज्योति — की हालत गंभीर बताई गई थी और उन्हें मालाड के टुंगा हॉस्पिटल के ICU में भर्ती किया गया है। बाकी सदस्यों को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है।

    दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई

    मुंबई फायर ब्रिगेड की तीन फायर टेंडर और एक एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। चूंकि आग दूसरी मंज़िल पर लगी थी, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन जल्दी पूरा हो गया
    अधिकारियों ने बताया कि अगर आग ऊपरी मंज़िलों तक पहुंच जाती, तो हालात और मुश्किल हो सकते थे।

    आग से सीख और सुरक्षा अपील

    फायर अधिकारियों ने निवासियों से अपील की है कि वे घरों में इलेक्ट्रिकल वायरिंग की समय-समय पर जांच कराते रहें, और लकड़ी या ज्वलनशील वस्तुएं वायरिंग के पास न रखें।


    FAQ Section

    Q1. कांदिवली की बिल्डिंग में आग कब लगी?
    A. आग रविवार सुबह करीब 7:45 बजे दूसरी मंज़िल के एक फ्लैट में लगी।

    Q2. कितने लोग घायल हुए हैं?
    A. एक ही परिवार के 8 लोग घायल हुए, जिनमें तीन बच्चे और एक बुजुर्ग शामिल हैं।

    Q3. आग लगने की वजह क्या बताई जा रही है?
    A. फायर डिपार्टमेंट के अनुसार, आग इलेक्ट्रिकल वायरिंग सिस्टम से शुरू हुई थी।

    Q4. घायलों की हालत कैसी है?
    A. तीन लोग ICU में भर्ती हैं और बाकी को डिस्चार्ज कर दिया गया है। सभी फिलहाल स्थिर हैं।

    Q5. आग पर कितनी देर में काबू पाया गया?
    A. दमकल विभाग ने करीब 30 मिनट में आग पर काबू पा लिया।

  • मुंबई में 27 अक्टूबर से India Maritime Week 2025 का आगाज़ — Amit Shah करेंगे उद्घाटन

    मुंबई में 27 अक्टूबर से India Maritime Week 2025 का आगाज़ — Amit Shah करेंगे उद्घाटन

    मुंबई के गोरेगाँव स्थित NESCO Exhibition Centre में 27 अक्टूबर से 5 दिन चलेगा India Maritime Week 2025, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करेंगे। जानें कार्यक्रम, वक्तव्य, उद्देश्य और मुख्य बातें।

    मुंबई: 27 अक्टूबर से मुंबई में होने वाला India Maritime Week 2025 (IMW 2025) कार्यक्रम कल सोमवार से शुरू हो रहा है, जहाँ गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करेंगे। इस ग्लोबल मरीटाइम इवेंट में देश-विदेश के पर्टनर, निवेशक, और समुद्री क्षेत्र के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

    उद्घाटन समारोह का कार्यक्रम

    • समय एवं स्थल: 27 अक्टूबर, सुबह 10:30 बजे, NESCO Exhibition Centre, गोरेगाँव, मुंबई।
    • मुख्य अतिथि: अमित शाह
    • अन्य वक्ता:
    • Vijay Kumar (सेक्रेटरी, पोर्ट्स, शिपिंग & वॉटरवे)
    • Shantanu Thakur (राज्यमंत्री, पोर्ट्स, शिपिंग & वॉटरवे)
    • Pramod Sawant (मुख्यमंत्री, गोवा)
    • Mohan Charan Majhi (मुख्यमंत्री, ओडिशा)
    • Bhupendra Patel (मुख्यमंत्री, गुजरात)
    • Sarbananda Sonowal (केंद्रीय मंत्री – पोर्ट्स, शिपिंग & वॉटरवे)
    • Devendra Fadnavis (मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र)
    • समय-रोस्टर:
    • 10:30 → अमित शाह का आगमन
    • 10:30-10:40 → उद्घाटन एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ
    • 10:40-10:42 → दीप ज्योति
    • 10:42-10:44 → विजय कुमार का संबोधन
    • 10:44-10:48 → शांतनु ठाकुर का संबोधन
    • 10:48-10:52 → गोवा के मुख्यमंत्री का संबोधन
    • 10:52-10:56 → ओडिशा के मुख्यमंत्री का संबोधन
    • 10:56-11:00 → गुजरात के मुख्यमंत्री का संबोधन
    • 11:00-11:04 → सारबनंदा सोनोवाल का संबोधन
    • 11:04-11:10 → महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का संबोधन
    • 11:15-11:40 → अमित शाह का मुख्य भाषण
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    IMW 2025: मुख्य उद्देश्य और जानकारी

    • IMW 2025 एक प्रमुख समुद्री उद्योग-मंच है जहाँ वैश्विक समुद्री विशेषज्ञ, नवप्रवर्तनकर्ता और लीडर एक साथ होंगे।
    • इस आयोजन में 100 से अधिक देशों से प्रतिनिधि, 500 से ज्यादा प्रदर्शक, और 1,00,000 से अधिक प्रतिभागी भाग लेने की उम्मीद है।
    • लगभग 200 ग्लोबल स्पीकर्स होंगे और अनुमानित निवेश ₹10 लाख करोड़ से ऊपर होगा।
    • मुख्य विषय होंगे: समुद्री प्रौद्योगिकी में नवीनता, सतत विकास, रणनीतिक साझेदारियाँ, वैश्विक समुद्री कनेक्टिविटी।
    • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मुंबई को इस तरह के वैश्विक कार्यक्रमों के लिए स्थायी स्थल घोषित करने की पैरवी की है।

    मुंबई व महाराष्ट्र का महत्व

    मुंबई और महाराष्ट्र का समुद्री एवं पोर्ट-क्षेत्र में विशेष स्थान है। IMW 2025 के साथ यहाँ निवेश के नए अवसर खुलेंगे, और राज्य का वैश्विक समुद्री मंच पर योगदान बढ़ेगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि मुंबई में इस कार्यक्रम का स्थायी आयोजन होने से राज्य को भारी लाभ मिलेगा।

    क्या उम्मीद करें?

    • वैश्विक कंपनियों, पोर्ट प्राधिकरणों, नवप्रवर्तन स्टार्ट-अप्स, अकादमिक संस्थान और विचार-टैंक्स मिलकर रणनीति बनाएँगे कि कैसे भारत का समुद्री क्षेत्र अगले दशक में आगे बढ़े।
    • नई प्रौद्योगिकियाँ, डिजिटल समाधानों, हरित पोर्ट मॉडल और निवेश साझेदारियों पर बल दिया जाएगा।
    • इवेंट के दौरान नेटवर्किंग, B2B मीटिंग्स, प्रदर्शनियों और पैनल चर्चाएँ होंगी।
    • स्थानीय अर्थव्यवस्था, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट विकास एवं समुद्री-शिपिंग क्षेत्र में ठोस घोषणाएँ हो सकती हैं।

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. IMW 2025 कब और कहाँ आयोजित हो रहा है?
    A. IMW 2025 27 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक मुंबई के NESCO Exhibition Centre, गोरेगाँव में होगा।

    Q2. उद्घाटन में कौन-कौन मुख्य अतिथि होंगे?
    A. गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करेंगे। साथ में विजय कुमार, शांतनु ठाकुर, गोवा, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री सारबनंदा सोनोवाल वक्तव्य देंगे।

    Q3. IMW 2025 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    A. समुद्री उद्योग में नवप्रवर्तन, सहयोग, निवेश एवं वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

    Q4. इसमें कितने देश, प्रदर्शक और प्रतिभागी भाग लेंगे?
    A. 100 से अधिक देश, 500 से अधिक प्रदर्शक और लगभग 1 लाख प्रतिभागियों की अपेक्षा है।

    Q5. महाराष्ट्र और मुंबई का क्या महत्व है इस कार्यक्रम में?
    A. महाराष्ट्र सरकार इसे राज्य के लिए एक बड़ा अवसर मान रही है और मुंबई को स्थायी रूप से इस तरह के समुद्री सम्मेलनों का होस्ट बनाने के पक्ष में है।

  • मुंबई डेवलपर्स ने BMC से मांगी राहत, प्रीमियम पेमेंट के लिए 10:10:80 फार्मूला पेश

    मुंबई डेवलपर्स ने BMC से मांगी राहत, प्रीमियम पेमेंट के लिए 10:10:80 फार्मूला पेश

    मुंबई के रियल एस्टेट डेवलपर्स ने BMC कमिश्नर भूषण गगरानी से मुलाकात कर प्रीमियम पेमेंट को 10:10:80 स्ट्रक्चर में करने का प्रस्ताव दिया। इस बैठक में CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA जैसी प्रमुख संस्थाओं ने हिस्सा लिया।

    मुंबई: रियल एस्टेट डेवलपर्स की प्रमुख संस्थाओं — CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA — ने 24 अक्टूबर को BMC प्रमुख भूषण गगरानी से मुलाकात की। इस दौरान डेवलपर्स ने मौजूदा प्रीमियम भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने के लिए 10:10:80 पेमेंट स्ट्रक्चर का सुझाव दिया। इस बैठक में डेवलपर्स ने कहा कि यह फार्मूला प्रोजेक्ट के कैश फ्लो के अनुसार पेमेंट को बैलेंस करेगा और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देगा।

    🏗️ क्या है 10:10:80 प्रीमियम पेमेंट स्ट्रक्चर?

    • डेवलपर्स ने प्रस्ताव रखा कि कुल प्रीमियम का 10% पेमेंट प्रोजेक्ट अप्रूवल के समय,
      10% कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) पर,
      और बाकी 80% ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) मिलने पर किया जाए।
    • इस मॉडल का उद्देश्य है कि डेवलपर्स पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो और पेमेंट्स प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति के साथ जोड़े जाएँ।

    💰 वर्तमान प्रीमियम सिस्टम से क्यों हैं परेशान डेवलपर्स

    • फिलहाल डेवलपर्स को फंजिबल FSI, ओपन स्पेस डेफिशियेंसी, फायर सर्विस चार्ज, डेवलपमेंट सेस, और स्क्रूटनी फीस जैसी करीब 20 अलग-अलग प्रीमियम फीस देनी पड़ती हैं।
    • इनका भुगतान शुरुआती चरण में करना पड़ता है, जबकि तब तक प्रोजेक्ट से कोई राजस्व नहीं आता।
    • कई बार ये फीस 12% ब्याज दर पर डिफर्ड स्कीम के तहत दी जाती है, जिससे लागत और बढ़ जाती है।
    • डेवलपर्स का कहना है कि 10:10:80 फार्मूला न सिर्फ कैश फ्लो को मैच करेगा बल्कि BMC के लिए भी रेवेन्यू न्यूट्रल रहेगा।

    🏢 BMC की पहल: रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बनेगी स्टीयरिंग कमेटी

    • बैठक में BMC कमिश्नर भूषण गगरानी ने घोषणा की कि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाई जाएगी।
    • इसमें CREDAI-MCHI, NAREDCO, PEATA, BDA के प्रतिनिधि और BMC के विभिन्न विभागों के अधिकारी, जैसे फायर ऑफिस, शामिल होंगे।
    • कमेटी हर दो हफ्ते में बैठक करेगी, ताकि नीति संबंधी मुद्दों, डेवलपमेंट अड़चनों और प्रक्रियाओं पर चर्चा हो सके।
    • उप मुख्य अभियंता चंद्रशेखर उंडगे इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे, जबकि BMC प्रमुख भी महीने में एक बार बैठक में शामिल होंगे।

    🧩 डेवलपर्स की राय क्या है?

    CREDAI-MCHI अध्यक्ष सुखराज नाहर ने कहा,

    “10:10:80 प्रीमियम पेमेंट मॉडल एक फेयर और प्रैक्टिकल अप्रोच है, जिससे प्रोजेक्ट प्रोग्रेस के साथ पेमेंट्स को जोड़ा जा सकता है। इससे पारदर्शिता और संतुलन दोनों बढ़ेंगे।”

    CREDAI-MCHI सचिव ऋषि मेहता ने कहा,

    “रियल एस्टेट इंडस्ट्री मुंबई के विकास की रीढ़ है। BMC के साथ नियमित संवाद से नीति में सुधार और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।”

    📘 क्या है ‘प्रीमियम’? (Premium Explained)

    • प्रीमियम वो चार्जेज हैं जो डेवलपर्स सिविक अथॉरिटी को अतिरिक्त निर्माण अधिकार या प्रोजेक्ट अप्रूवल के लिए देते हैं।
    • इनमें शामिल हैं:
    • फंजिबल FSI (Floor Space Index)
    • ओपन स्पेस डेफिशियेंसी फीस
    • फायर सर्विस चार्ज
    • कॉमन एरिया चार्ज (लॉबी, लिफ्ट, सीढ़ियाँ आदि के लिए)
    • मुंबई में प्रीमियम कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का लगभग 20–30% तक हिस्सा होता है।

    📈 रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए इसका मतलब क्या है?

    • यह प्रस्ताव लागू होने पर प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत कम होगी।
    • डेवलपर्स को वर्किंग कैपिटल मैनेज करने में मदद मिलेगी।
    • इससे नए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने की गति बढ़ सकती है, जिससे मकान खरीदारों को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा।

    FAQ सेक्शन

    Q1. 10:10:80 प्रीमियम स्ट्रक्चर क्यों ज़रूरी है?
    ➡️ यह मॉडल डेवलपर्स को प्रोजेक्ट के कैश फ्लो के अनुसार भुगतान करने की सुविधा देता है, जिससे आर्थिक दबाव घटता है।

    Q2. क्या इससे BMC का राजस्व प्रभावित होगा?
    ➡️ नहीं। CREDAI-MCHI के अनुसार यह रेवेन्यू न्यूट्रल है — यानी BMC को कोई नुकसान नहीं होगा।

    Q3. क्या स्टीयरिंग कमेटी के फैसले बाध्यकारी होंगे?
    ➡️ यह एक सलाहकार निकाय होगी, जो नीति सुधार और अड़चनों को हल करने के लिए सुझाव देगी।

    Q4. क्या इस प्रस्ताव को तुरंत लागू किया जाएगा?
    ➡️ फिलहाल यह प्रस्ताव स्तर पर है। BMC इसे समीक्षा के बाद नीतिगत रूप से लागू कर सकती है।

  • मुंबई में ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड पर हमला कर, कर ली खुदकुशी

    मुंबई में ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड पर हमला कर, कर ली खुदकुशी

    मुंबई के काला चौकी इलाके से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। ब्रेकअप से परेशान युवक ने शक के चलते अपनी गर्लफ्रेंड पर हमला किया और फिर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: परेल के काला चौकी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को चौंका दिया है।
    यहां एक युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड पर चाकू से हमला किया और फिर खुद आत्महत्या कर ली
    जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच कुछ दिन पहले ब्रेकअप हुआ था और युवक को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से रिश्ता है।

    पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घायल लड़की की हालत गंभीर बताई जा रही है जबकि युवक की मौत हो चुकी है।

    😔 ब्रेकअप के बाद बढ़ा शक, बना हत्या और सुसाइड का कारण

    पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसकी गर्लफ्रेंड का करीब आठ दिन पहले ही ब्रेकअप हुआ था
    ब्रेकअप के बाद से युवक मानसिक रूप से परेशान था और इस पूरे मामले के लिए वह अपनी गर्लफ्रेंड को दोष दे रहा था।
    उसे लगता था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी दूसरे शख्स से अफेयर चल रहा है।

    इसी शक में शुक्रवार सुबह वह लड़की से मिलने गया, लेकिन अपने साथ किचन का चाकू भी ले गया।
    दोनों के बीच बहस बढ़ी और आरोपी ने गुस्से में आकर गर्लफ्रेंड पर कई वार कर दिए

    🏥 अस्पताल में भर्ती, एक की मौत — एक की हालत नाजुक

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    इलाज के दौरान आरोपी युवक की मौत हो गई, जबकि उसकी गर्लफ्रेंड गंभीर रूप से घायल है और डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से खून से सना चाकू बरामद किया गया है और मामला आत्महत्या व हत्या के प्रयास के रूप में दर्ज किया गया है।

    🧠 रिश्तों में बढ़ती हिंसा पर उठे सवाल

    यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि रिश्तों में असहिष्णुता और मानसिक असंतुलन का भी संकेत है।
    पिछले कुछ महीनों में मुंबई, पुणे और ठाणे से ब्रेकअप के बाद आत्महत्या या हिंसा के कई केस सामने आए हैं।
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता बेहद जरूरी है।

    ⚖️ पुलिस जांच जारी

    काला चौकी पुलिस ने बताया कि दोनों के मोबाइल और सोशल मीडिया चैट की जांच की जा रही है ताकि विवाद का असली कारण पता लगाया जा सके।
    फिलहाल लड़की का बयान नहीं लिया जा सका है क्योंकि वह अभी ICU में भर्ती है।


    ❓ FAQs

    Q1. यह घटना कहां की है?
    यह घटना मुंबई के काला चौकी इलाके की है।

    Q2. आरोपी ने हमला क्यों किया?
    आरोपी को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से रिश्ता है, और ब्रेकअप के बाद वह मानसिक रूप से परेशान था।

    Q3. क्या दोनों की मौत हो गई?
    नहीं, आरोपी की मौत हो गई है, लेकिन लड़की गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज जारी है।

    Q4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी साक्ष्य जुटा रही है।

    Q5. क्या यह मामला मानसिक तनाव से जुड़ा है?
    हाँ, शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी डिप्रेशन और शक के कारण यह कदम उठाया।

  • मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि कार्बाइड आधारित खतरनाक पटाखों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ये पटाखे लोगों की सेहत, पर्यावरण और जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

    मुंबई: जाने-माने वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने कार्बाइड बेस्ड (Carbide-Based) खतरनाक पटाखों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    उनका कहना है कि ये पटाखे न सिर्फ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं, बल्कि जानवरों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

    गांधी ने NHRC से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्ययन कराया जाए, सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की जाए, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़े कदम उठाए जाएं — ताकि दिवाली की धार्मिक भावना बनी रहे, पर सेहत और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

    🌫️ दिवाली के बाद बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

    वकील की याचिका में कहा गया है कि सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशन और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर साल दिवाली के बाद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों में तेज़ उछाल दिखाते हैं।
    कई शहरों में दिवाली की रातों के बाद हवा की स्थिति “Very Poor” से “Severe” कैटेगरी तक पहुंच जाती है।

    हालांकि ग्रीन क्रैकर्स को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पहले से मौजूद है, लेकिन वकील का कहना है कि अभी भी गैर-प्रमाणित और जहरीले पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं

    🚫 “ग्रीन पटाखे” के बावजूद नहीं थमा जहरीले धुएं का असर

    हितेंद्र गांधी का कहना है कि “ग्रीन पटाखे” के नियमों के बावजूद गैर-लाइसेंसशुदा फायरवर्क्स और कार्बाइड बेस्ड पटाखों की बिक्री जारी है।
    इनसे निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों के लिए सांस संबंधी खतरे पैदा करता है बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों पर भी सीधा असर डालता है।

    🐶 जानवरों पर भी गहरा असर

    याचिका में बताया गया है कि पशु कल्याण संस्थाएं और वेटरनरी क्लीनिक दिवाली के बाद घायल और डरे हुए जानवरों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज करते हैं।
    कई शहरों में सैकड़ों पालतू और आवारा जानवर धमाकों और धुएं के कारण घायल या भाग जाते हैं।
    यह स्थिति हर साल मानवता और करुणा की भावना को ठेस पहुंचाती है।

    💣 कार्बाइड गन — नया खतरा बनते “घरेलू बम”

    हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में “कार्बाइड गन” या घरेलू विस्फोटक उपकरणों की भी चर्चा की है।
    इन गैरकानूनी और असुरक्षित पटाखों के कारण भोपाल से बेंगलुरु तक 130 से ज्यादा लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    इन “कार्बाइड गनों” के वीडियो सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं और कोई भी इन्हें घर पर बना सकता है।
    यह चलन अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट (Public Safety Crisis) बन चुका है।

    ⚖️ “मानवाधिकार का उल्लंघन” – याचिका में गंभीर आरोप

    वकील ने कहा,

    “ये घटनाएं सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा हनन हैं — खासकर जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का।”

    उन्होंने आयोग से अपील की है कि NHRC सरकार को सिफारिश करे कि

    • कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाए,
    • Explosives Act और अन्य नियमों को सख्ती से लागू किया जाए,
    • और इस मामले पर जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि उत्सव का असली प्रकाश जीवन और करुणा के साथ जुड़ा रहे।

    ❓FAQs

    Q1. किसने NHRC में याचिका दाखिल की है?
    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने यह याचिका दाखिल की है।

    Q2. याचिका में क्या मांग की गई है?
    कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध, और सुरक्षा नियमों की सख्त पालना की मांग की गई है।

    Q3. क्या “ग्रीन क्रैकर्स” से प्रदूषण कम हुआ है?
    नहीं, वकील का कहना है कि ग्रीन क्रैकर्स के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया।

    Q4. जानवरों पर क्या असर पड़ता है?
    तेज धमाकों और धुएं से जानवर डर जाते हैं, कई घायल या भाग जाते हैं।

    Q5. “कार्बाइड गन” क्या है?
    यह एक असुरक्षित घरेलू विस्फोटक उपकरण है जो दिवाली में धमाके के लिए बनाया जाता है, और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

  • दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्त लोगों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये का चेक सौंपा। अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वर्षा निवास पर मुलाकात की।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: मालाड़ पूर्व स्थित दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए मराठवाड़ा और विदर्भ में आए हालिया बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है। भाजपा के पूर्व नगरसेवक एवं बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने बैंक की ओर से मुख्यमंत्री सहायता निधि (Chief Minister Relief Fund) में ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) का चेक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा।

    🙏 मुख्यमंत्री से वर्षा निवास पर मुलाकात

    इस अवसर पर भाजपा के मुंबई महानगरपालिका नेता और पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने वर्षा निवास पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को दीवाली की शुभकामनाएं भी दीं। मुलाकात के दौरान भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी मौजूद थे।

    🌊 मराठवाड़ा और विदर्भ में बाढ़ से नुकसान

    हाल ही में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में हुई भारी बारिश और बाढ़ से कई परिवारों को नुकसान झेलना पड़ा। किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, घर क्षतिग्रस्त हुए और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ऐसे में मालाड सहकारी बैंक का यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है कि निजी संस्थाएं भी आपदा के समय सरकार के साथ खड़ी हैं।

    🏦 बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड मुंबई की एक पुरानी और भरोसेमंद वित्तीय संस्था है, जो समाजसेवा में भी सक्रिय रहती है। बैंक ने पहले भी शिक्षा सहायता, चिकित्सा सहायता और सामाजिक अभियानों में सहयोग दिया है। इस बार बैंक ने पूरग्रस्तों की मदद कर सामाजिक दायित्व निभाने का एक और उदाहरण पेश किया है।

    🌟 सीएम फडणवीस ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी मालाड सहकारी बैंक और अध्यक्ष विनोद मिश्रा का धन्यवाद किया और कहा कि समाज के सभी घटक यदि ऐसे ही एकजुट होकर योगदान दें, तो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद तेज़ी से संभव हो सकेगी।


    ❓FAQs

    Q1. दी मालाड सहकारी बैंक ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में कितनी राशि दी?
    बैंक ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्तों की मदद के लिए 5 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री सहायता निधि में सौंपा।

    Q2. चेक किसे सौंपा गया?
    बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को वर्षा निवास पर चेक सौंपा।

    Q3. इस अवसर पर और कौन मौजूद थे?
    इस मौके पर भाजपा युवा मोर्चा के माजी जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी उपस्थित थे।

    Q4. पूरग्रस्त क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
    मुख्य रूप से मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।

  • विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या को देखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के 13.4 मीटर चौड़े DP रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग की है।

    मुंबई: मालाड़ पूर्व के दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले आप्पापाडा इलाके में सड़कों की चौड़ाई बहुत कम होने से रोज़ाना ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है। नागरिकों को ऑफिस या काम के स्थान तक पहुँचने में काफी देरी होती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के प्रस्तावित 13.4 मीटर चौड़े विकास नियोजन (DP) रोड को “वाइटल प्रोजेक्ट (Vital Project)” घोषित करने की मांग की है।

    🏙️ आप्पापाडा क्षेत्र में सड़कें संकरी, ट्रैफिक जाम आम

    दिंडोशी के आप्पापाडा, गोकुलनगर और आसपास के इलाकों में सड़कें बेहद संकरी हैं। पश्चिम द्रुतगती महामार्ग (Western Express Highway) से इन इलाकों की दूरी ज्यादा होने के कारण यहां ट्रैफिक जाम रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। इस कारण लोगों को समय पर ऑफिस या स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    🏗️ समानांतर रोड से पश्चिम उपनगरों को मिलेगी राहत

    प्रभु ने कहा है कि बोरीवली और लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों से जोड़ने वाला पश्चिम द्रुतगती महामार्ग के समानांतर रोड बेहद ज़रूरी है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक लोड कम होगा बल्कि नागरिकों को वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा।

    🌊 पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प भी इससे जुड़ा

    आप्पापाडा क्षेत्र में पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प (Poisar River Rejuvenation Project) पहले से ही चल रहा है और इसे पहले से ही “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया गया है। लेकिन इस प्रकल्प के तहत बनने वाले सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP) और मलनिस्सारण वाहिनियां (Drainage pipelines) जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं, क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए सड़क (access road) उपलब्ध नहीं है।

    प्रभु का कहना है कि अगर 13.4 मीटर चौड़ा डीपी रोड तत्काल बनाया गया और उसे वाइटल प्रोजेक्ट घोषित किया गया, तो बीएमसी के इन अधूरे कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

    🏛️ बीएमसी और सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

    प्रभु ने मांग की है कि इस सड़क को प्राथमिकता (priority) पर लेकर इसे “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया जाए। इससे न केवल बीएमसी के कामों को गति मिलेगी, बल्कि आप्पापाडा और आसपास के क्षेत्रों में नागरिकों को लंबे समय से मिल रही ट्रैफिक की समस्या से भी राहत मिलेगी।


    ❓FAQs

    Q1. आप्पापाडा से पोयसर नदी तक की सड़क क्यों जरूरी है?
    इस क्षेत्र में सड़कें संकरी होने से भारी ट्रैफिक जाम लगता है। नया डीपी रोड बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को सुगम आवागमन मिलेगा।

    Q2. इस रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग किसने की है?
    दिंडोशी विधानसभा के आमदार सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर यह मांग की है।

    Q3. इससे बीएमसी के कौन-कौन से प्रोजेक्ट पूरे होंगे?
    पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प, सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP), इंटरसेप्टर और ड्रेनेज पाइपलाइन जैसे कई अधूरे काम पूरे हो पाएंगे।

    Q4. यह रोड किस चौड़ाई का प्रस्तावित है?
    यह विकास नियोजन सड़क 13.4 मीटर चौड़ी प्रस्तावित है।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

  • गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव पश्चिम में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और BMC को चेतावनी दी कि अगर पानी की समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

    मुंबई: गोरगांव (पश्चिम) में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत को लेकर उद्धव ठाकरे गट की शिवसेना (UBT) ने रविवार को एक ज़ोरदार ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 52 में पानी की कमी के विरोध में संदीप गाढवे की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस दौरान नागरिकों ने खाली बाल्टियां लेकर BMC के खिलाफ नारे लगाए और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और उग्र होगा।

    💧 ‘पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा’ — नारों से गूंजा इलाका

    मोर्चे में शामिल नागरिकों ने “पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा!” और “आमच्या मागण्या पूर्ण करा!” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया।
    आंदोलन के दौरान दीपक परब नामक नागरिक ने BMC के गेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से नहा कर प्रशासन पर तंज कसा।

    मोर्चा खत्म होने के बाद संदीप गाढवे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और इलाके में चल रही पानी की समस्या पर चर्चा की।

    🏘️ नागरिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    1. बंगाली कंपाउंड इलाके में कम दबाव से आने वाले पानी की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
    2. पानी छोड़ने का समय घटाने का निर्णय वापस लिया जाए और पुरानी टाइमिंग बहाल की जाए।
    3. कन्यापाड़ा इलाके में दलालों के ज़रिए नल कनेक्शन के लिए वसूली की जा रही है — उसकी जांच की जाए।
    4. इलाके के बिल्डरों को कैसे और कितना पानी दिया जा रहा है, इसकी गहराई से जांच हो।
    5. आरे कॉलोनी यूनिट 32 का पंप शुरू किया जाए ताकि यूनिट 31 और 32 के नागरिकों को राहत मिल सके।
    6. साईबाबा कॉम्प्लेक्स की साई सदन इमारत में चल रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

    👥 मोर्चे में किसने लिया हिस्सा?

    इस आंदोलन में कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें—
    पूर्व नगरसेविका सुगंधा शेट्टी, दीपक परब, निलाक्षी भाबळ, विनायक ताटे, स्वाती शिर्के, सचिन सावंत, सुभाष जाधव, विजय मांजळकर, कुबेर लाड, शांताराम सावंत, विरेंद्र सोनावने और वर्षा पवार समेत बड़ी संख्या में शिवसैनिक, युवासेना और महिला सेना की कार्यकर्ता मौजूद थीं।

    गोकुलधाम, बंगाली कंपाउंड, कन्यापाड़ा, साईबाबा कॉम्प्लेक्स, आरे कॉलोनी और बंजारी पाड़ा जैसे इलाकों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    🏛️ शिवसेना (UBT) का संदेश प्रशासन को

    संदीप गाढवे ने मीडिया से बातचीत में बताया

    “अब BMC को भी समझना चाहिए कि पानी कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिकों का हक है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शिवसेना (UBT) सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।”


    FAQ सेक्शन

    Q1. गोरगांव में उद्धव सेना का बाल्टी मोर्चा क्यों निकाला गया?
    👉 पानी की किल्लत और कम दबाव से पानी आने की समस्या के विरोध में यह मोर्चा आयोजित किया गया।

    Q2. इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
    👉 प्रभाग 52 के शाखा प्रमुख संदीप गाढवे ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

    Q3. नागरिकों की मुख्य मांग क्या है?
    👉 नियमित और पर्याप्त पानी आपूर्ति शुरू करना और दलालों द्वारा नल कनेक्शन में की जा रही वसूली की जांच करना।

    Q4. प्रशासन से कौन मिला?
    👉 एक शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और समस्या पर चर्चा की।

  • मालाड में फुटपाथ पर मिली नवजात बच्ची, राहगीर ने बचाई जान

    मालाड में फुटपाथ पर मिली नवजात बच्ची, राहगीर ने बचाई जान

    मुंबई के मालाड में दिवाली की रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब एक नवजात बच्ची को फुटपाथ पर छोड़ दिया गया। राहगीर ने उसकी रोने की आवाज़ सुनकर पुलिस को खबर दी। बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वह फिलहाल सुरक्षित है।

    मुंबई: दिवाली की रात जब पूरा मुंबई शहर रौशनी से जगमगा रहा था, तब मालाड में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। एक नवजात बच्ची को फुटपाथ पर एक पार्क की बगल में बस के पास छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि एक राहगीर ने उसकी हल्की सी रोने की आवाज़ सुन ली और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे सुरक्षित बताया।

    👶 फुटपाथ पर छोड़ी गई नवजात बच्ची

    मालाड वेस्ट के बैक रोड, बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के पास ये घटना शनिवार देर रात करीब 11 बजे की है। पुलिस के मुताबिक बच्ची महज एक या दो दिन की लग रही थी और कपड़े में लिपटी हुई थी। उसके शरीर पर चींटियों के काटने के निशान थे, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसे कुछ घंटों पहले ही वहां छोड़ा गया था।

    🚓 राहगीर ने दिखाई इंसानियत, पुलिस ने दी त्वरित मदद

    पुलिस के अनुसार, पास से गुजर रहे एक शख्स ने जब मासूम की रोने की आवाज़ सुनी, तो तुरंत बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित थाने लेकर आई। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे साफ कपड़ों में लपेटकर अस्पताल पहुंचाया।

    बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया, “अगर उस राहगीर ने कुछ मिनट देर कर दी होती, तो शायद बच्ची की जान बचाना मुश्किल हो जाता। यह एक चमत्कार जैसा था कि उसकी आवाज़ किसी इंसान तक पहुंच गई।”

    🏥 शताब्दी अस्पताल में इलाज, बच्ची फिलहाल सुरक्षित

    बच्ची को तत्काल शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची फिलहाल स्वस्थ है और अस्पताल के बच्चों के वार्ड में उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची में किसी गंभीर चोट के निशान नहीं हैं, और उसका स्वास्थ्य सामान्य हो रहा है।

    📹 CCTV से होगी आरोपी की पहचान

    पुलिस ने इस मामले में अज्ञात महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक रविंद्र अव्हाड ने बताया, “हमने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है और इलाके के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि बच्ची को वहां कौन लेकर आया था।”

    💓 लोगों ने दिखाई अपनापन, कई ने अपनाने की जताई इच्छा

    घटना के बाद कई लोगों ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है। सोशल मीडिया पर भी राहगीर और पुलिस की इस इंसानियत की जमकर सराहना हो रही है। एक यूज़र ने लिखा, “दिवाली की रात अगर किसी ने सच्ची रौशनी फैलाई है, तो वो इस मासूम को बचाने वाले हैं।”

    🙏 मानवता की मिसाल बनी मुंबई

    मुंबई अक्सर अपनी तेज़ रफ्तार ज़िंदगी के लिए जानी जाती है, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि इस शहर में इंसानियत अब भी जिंदा है। इस राहगीर और पुलिस टीम की सूझबूझ ने एक मासूम को नया जीवन दिया।


    FAQ सेक्शन:

    Q1. मालाड में नवजात बच्ची कहां मिली?
    ➡ बच्ची मालाड वेस्ट के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के पास फुटपाथ पर एक पार्क की बगल में मिली।

    Q2. क्या बच्ची सुरक्षित है?
    ➡ हां, बच्ची को शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वह पूरी तरह सुरक्षित है।

    Q3. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
    ➡ पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

    Q4. क्या बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है?
    ➡ कई लोग बच्ची को गोद लेने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन फिलहाल वह अस्पताल की निगरानी में है।