मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि कार्बाइड आधारित खतरनाक पटाखों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ये पटाखे लोगों की सेहत, पर्यावरण और जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

मुंबई: जाने-माने वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने कार्बाइड बेस्ड (Carbide-Based) खतरनाक पटाखों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि ये पटाखे न सिर्फ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं, बल्कि जानवरों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

गांधी ने NHRC से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्ययन कराया जाए, सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की जाए, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़े कदम उठाए जाएं — ताकि दिवाली की धार्मिक भावना बनी रहे, पर सेहत और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

🌫️ दिवाली के बाद बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

वकील की याचिका में कहा गया है कि सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशन और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर साल दिवाली के बाद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों में तेज़ उछाल दिखाते हैं।
कई शहरों में दिवाली की रातों के बाद हवा की स्थिति “Very Poor” से “Severe” कैटेगरी तक पहुंच जाती है।

हालांकि ग्रीन क्रैकर्स को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पहले से मौजूद है, लेकिन वकील का कहना है कि अभी भी गैर-प्रमाणित और जहरीले पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं

🚫 “ग्रीन पटाखे” के बावजूद नहीं थमा जहरीले धुएं का असर

हितेंद्र गांधी का कहना है कि “ग्रीन पटाखे” के नियमों के बावजूद गैर-लाइसेंसशुदा फायरवर्क्स और कार्बाइड बेस्ड पटाखों की बिक्री जारी है।
इनसे निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों के लिए सांस संबंधी खतरे पैदा करता है बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों पर भी सीधा असर डालता है।

🐶 जानवरों पर भी गहरा असर

याचिका में बताया गया है कि पशु कल्याण संस्थाएं और वेटरनरी क्लीनिक दिवाली के बाद घायल और डरे हुए जानवरों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज करते हैं।
कई शहरों में सैकड़ों पालतू और आवारा जानवर धमाकों और धुएं के कारण घायल या भाग जाते हैं।
यह स्थिति हर साल मानवता और करुणा की भावना को ठेस पहुंचाती है।

💣 कार्बाइड गन — नया खतरा बनते “घरेलू बम”

हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में “कार्बाइड गन” या घरेलू विस्फोटक उपकरणों की भी चर्चा की है।
इन गैरकानूनी और असुरक्षित पटाखों के कारण भोपाल से बेंगलुरु तक 130 से ज्यादा लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

इन “कार्बाइड गनों” के वीडियो सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं और कोई भी इन्हें घर पर बना सकता है।
यह चलन अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट (Public Safety Crisis) बन चुका है।

⚖️ “मानवाधिकार का उल्लंघन” – याचिका में गंभीर आरोप

वकील ने कहा,

“ये घटनाएं सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा हनन हैं — खासकर जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का।”

उन्होंने आयोग से अपील की है कि NHRC सरकार को सिफारिश करे कि

  • कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाए,
  • Explosives Act और अन्य नियमों को सख्ती से लागू किया जाए,
  • और इस मामले पर जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि उत्सव का असली प्रकाश जीवन और करुणा के साथ जुड़ा रहे।

❓FAQs

Q1. किसने NHRC में याचिका दाखिल की है?
मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने यह याचिका दाखिल की है।

Q2. याचिका में क्या मांग की गई है?
कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध, और सुरक्षा नियमों की सख्त पालना की मांग की गई है।

Q3. क्या “ग्रीन क्रैकर्स” से प्रदूषण कम हुआ है?
नहीं, वकील का कहना है कि ग्रीन क्रैकर्स के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया।

Q4. जानवरों पर क्या असर पड़ता है?
तेज धमाकों और धुएं से जानवर डर जाते हैं, कई घायल या भाग जाते हैं।

Q5. “कार्बाइड गन” क्या है?
यह एक असुरक्षित घरेलू विस्फोटक उपकरण है जो दिवाली में धमाके के लिए बनाया जाता है, और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।


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