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  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए BMC को 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए

    मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए BMC को 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए

    मुंबई की वेस्टर्न सबर्ब्स में कोस्टल रोड नॉर्थ, माध–वर्सोवा ब्रिज व अन्य लिंक रोड्स के लिए BMC ने 346 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया है — जानिए पूरी जानकारी, क्या बन रहा है, क्या चुनौतियाँ हैं।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महापालिका (BMC) वेस्टर्न उपनगरों में आने वाले बड़े पब्लिक-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 346 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित करने जा रही है। इस ज़मीन का इस्तेमाल 20 किमी लंबी Mumbai Coastal Road Project‑North (MCRP-North) (वर्सोवा–भायंदर लिंक रोड) के एलाइन्मेंट, इंटरचेंज, एक्सेस रोड्स, वर्क स्पेस और डेवलपमेंट प्लान रोड्स के लिए होगा। इसके साथ ही 2.06 किमी लंबी केबल-स्टे ब्रिज Madh–Versova Bridge और अन्य सबर्ब लिंक रोड्स पर भी काम चल रहा है।

    क्या बन रहा है / प्रोजेक्ट का विवरण

    MCRP-North (वर्सोवा–भायंदर लिंक)

    • पहली फेज पूरी होने के बाद अब MCRP-North में करीब 20 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है।
    • अनुमानित लागत लगभग ₹16,621 करोड़ है।
    • इसका उद्देश्य वर्तमान में 90-120 मिनट चलने वाली यात्रा को मात्र 15-20 मिनट में बदलना है।
    • इसके अलावा इस सड़क से 55% तक कार्बन उत्सर्जन कम होने का लक्ष्य है।

    अन्य लिंक ब्रिज व सबर्ब कनेक्शन

    • माध–वर्सोवा ब्रिज (लगभग 2.06 किमी) प्रस्तावित है, लागत करीब ₹3,990 करोड़
    • एक अन्य लिंक रोड, अंधेरी–मालाड कनेक्शन लगभग ₹2,200 करोड़ की लागत से 2028 तक पूरा होगा।
    • इसके अतिरिक्त मार्वे–मनोरी ब्रिज भी प्रस्तावित है, जिससे 29 किमी की दूरी सिर्फ 1.5 किमी में घट जाएगी।

    ज़मीन अधिग्रहण व क्लियरेंस की चुनौतियाँ

    • इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए BMC को कुल 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए, जिसमें सड़क एलाइन्मेंट, इंटरचेंज, एक्सेस रोड और विकास-रोड्स शामिल हैं।
    • सिर्फ MCRP-North के लिए ही करीब 200 हेक्टेयर ज़मीन आवश्यक है।
    • BMC ने ₹5.24 करोड़ के टेंडर के माध्यम से एक कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए निविदा आमंत्रित की है, जो ज़मीन अधिग्रहण और क्लियरेंस कार्य करेगा। सबमिशन की आखिरी तारीख 17 नवंबर है।
    • पर्यावरणीय व क्रूज़ जोन (CRZ) नियम, मैंग्रोव संरक्षण जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। उदाहरण के लिए MCRP-North के लिए मैंग्रोव व कुछ सरकारी ज़मीनों के हस्तांतरण संबंधी क्लियरेंस मिल चुकी है।

    क्यों महत्वपूर्ण है ये बदलाव?

    • मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में ट्रैफिक और यात्रा समय बड़ी समस्या है — ये प्रोजेक्ट्स उन बॉटलनेक्स को दूर करेंगे।
    • बेहतर कनेक्टिविटी से वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, मलाड, अंधेरी, वर्सोवा आदि इलाकों के लिए लाभदायक होगा।
    • भूमि विकास व सड़क नेटवर्क बेहतर होने से आसपास के रियल एस्टेट एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा।
    • पर्यावरण की दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन कम करना व सड़क-यात्रा सुरक्षित व तेज़ बनाना उद्देश्य है।

    क्या देखना है आगे?

    • ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा — सरकारी व गैर-सरकारी ज़मीन, मैंग्रोव ज़मीन व CRZ ज़ोन जैसी वरीयताएँ।
    • पर्यावरणीय क्लियरेंस व कोर्ट ऑर्डर समय-समय पर मुद्दा बने रह सकते हैं।
    • कार्यान्वयन की गति और समय-सीमा (2028 तक कई लिंक रोड्स की समयसीमा) चेक होगी।
    • स्थानीय समुदायों, मछुआरों, वर्सोवा-कोलीवाडा आदि पर असर का ध्यान देना जरूरत है।

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. 346 हेक्टेयर का ये आंकड़ा क्या पूरी परियोजना के लिए है?
    A1. हाँ — यह सभी प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स (MCRP-North + लिंक ब्रिज व एक्सेस रोड्स) के लिए कुल ज़मीन की आवश्यकता को दर्शाता है।
    Q2. इस प्रक्रिया में पर्यावरण को लेकर क्या सावधानी ली जा रही है?
    A2. मैंग्रोव व CRZ ज़ोन की क्लियरेंस मिल चुकी है — उदाहरण के लिए MCRP-North के लिए मदती लैंड व मैंग्रोव डायवर्शन के लिए इन-प्रिंसिपल ऑप्रूवल मिला है।
    Q3. इन कार्यों की समयसीमा क्या है?
    A3. कुछ लिंक रोड्स व ब्रिज्स की लक्ष्य समयसीमा 2028 तक रखी गयी है। MCRP-North के लिए भी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
    Q4. स्थानीय लोगों के लिए क्या फायदे होंगे?
    A4. ट्रैफिक कम होगा, यात्रा समय घटेगा, वेस्टर्न उपनगरों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी — साथ ही आसपास के इलाकों में विकास व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
    Q5. लागत कितनी अनुमानित है?
    A5. उदाहरण के लिए MCRP-North का अनुमानित बजट लगभग ₹16,621 करोड़ है, माध-वर्सोवा ब्रिज का अनुमान लगभग ₹3,990 करोड़ है।

  • दहिसर का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पासपोर्ट फर्जीवाड़े में गिरफ्तार

    दहिसर का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पासपोर्ट फर्जीवाड़े में गिरफ्तार

    मुंबई के दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामले में एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट की मंजूरी दी।

    मुंबई: दहिसर पुलिस ने एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी संजय जगताप को पासपोर्ट से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले मे गिरफ्तार आरोपी पर यह आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति से पासपोर्ट प्रक्रिया में मदद का झांसा देकर धोखाधड़ी की।

    शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बिना उचित दस्तावेजों की जांच किए पासपोर्ट आवेदन को स्वीकृत कर दिया। बाद में जब जांच हुई तो जमा किए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

    📜 एफआईआर में गंभीर धाराएं

    जांच के बाद 26 मार्च 2025 को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
    यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468, 471, 120(B) के तहत दर्ज हुआ है।
    इसके अलावा, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 भी इसमें जोड़ी गई है।

    👮‍♂️ रिटायर्ड पुलिसकर्मी का नाम आया सामने

    जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी हेड कॉन्स्टेबल संजय जगताप थे, जो उस समय दहिसर पुलिस स्टेशन में तैनात थे।
    बाद में उनकी मालाड पुलिस स्टेशन में बदली हो गई।
    महत्वपूर्ण बात यह है कि जगताप 31 अक्टूबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए, और सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    ⚖️ जमानत याचिका खारिज, पुलिस हिरासत में भेजा गया

    आरोपी ने गिरफ्तारी से पहले हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
    इसके बाद 4 नवंबर 2025 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया।
    कोर्ट ने आरोपी को पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

    📍 पुलिस कर रही है आगे की जांच

    मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और पासपोर्ट प्राधिकरण मिलकर यह जांच कर रहे हैं कि क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
    साथ ही, पासपोर्ट जारी करने में इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेजों की तकनीकी जांच भी की जा रही है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह मामला कब दर्ज किया गया था?
    👉 यह मामला 26 मार्च 2025 को दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया।
    Q2. आरोपी कौन है?
    👉 सेवानिवृत्त पुलिस हेड कॉन्स्टेबल संजय जगताप, जो पहले दहिसर थाने में तैनात थे।
    Q3. किस आधार पर गिरफ्तारी हुई?
    👉 आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट आवेदन मंजूर किया था।
    Q4. कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    👉 कोर्ट ने आरोपी को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है।
    Q5. क्या आरोपी को जमानत मिली?
    👉 नहीं, उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

  • शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 2018 के रेल रोको मामले में मुंबई की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने बरी कर दिया। अदालत ने कहा — सबूतों में संदेह है, CCTV फुटेज स्पष्ट नहीं है।

    मुंबई: विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी कर दिया है। यह मामला 10 सितंबर 2018 का है, जब निरुपम ने कांग्रेस मुंबई अध्यक्ष के रूप में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ देशव्यापी बंद का हिस्सा बनकर अंधेरी स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया था।

    🚉 क्या था मामला?

    पुलिस के अनुसार, संजय निरुपम सुबह 9:30 बजे अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। वे 50–60 पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे थे और विरोध के दौरान वे प्लेटफॉर्म 3 और 4 के बीच ट्रैक पर बैठ गए। रेलवे स्टाफ ने रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके चलते बोरीवली स्लो लोकल को 7 मिनट की देरी हुई।
    अंधेरी पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज कर ली और घटना की तस्वीरें व सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश किए।

    Shinde-Sena-leader-Sanjay-Nirupam-acquitted-in-7-year-old-rail-roko-case-news

    🧾 अदालत ने सबूतों पर उठाए सवाल

    न्यायाधीश वी.यू. मिसाल ने कहा कि पुलिस द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं और इनसे यह साबित नहीं होता कि निरुपम ने ही ट्रैक पर बैठकर ट्रेन रोकी थी।
    उन्होंने कहा —

    “केवल CCTV के प्रिंटआउट पेश करने से सबूत साबित नहीं होते। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के प्रावधान पूरे न होने तक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्य नहीं माना जा सकता।”

    इसके अलावा, अदालत ने कहा कि ट्रेन में देरी को लेकर पुलिस के दावे पर भी उचित सबूत नहीं दिए गए हैं।

    “यह साबित नहीं किया जा सका कि बोरीवली स्लो लोकल की देरी सीधे तौर पर संजय निरुपम की वजह से हुई थी,” न्यायाधीश ने कहा।

    🧩 ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाए जाने का संकेत

    अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब उस दिन विरोध प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेता, जिनमें अशोक चव्हाण (अब बीजेपी में) भी मौजूद थे, तो सिर्फ निरुपम के खिलाफ ही केस क्यों दर्ज किया गया?
    न्यायाधीश ने कहा —

    “ऐसा प्रतीत होता है कि निरुपम को इस मामले में एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाकर फंसाया गया था।”

    🗣️ संजय निरुपम ने दी प्रतिक्रिया

    फैसले के बाद संजय निरुपम ने कहा —

    “सात साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच्चाई की जीत हुई। मैंने जनता की आवाज़ उठाई थी, कोई अपराध नहीं किया था।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था।


    FAQ सेक्शन

    Q1. संजय निरुपम को किस मामले में बरी किया गया है?
    👉 उन्हें 2018 के रेल रोको आंदोलन के मामले में बरी किया गया है, जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुआ था।
    Q2. घटना कहां हुई थी?
    👉 यह घटना अंधेरी रेलवे स्टेशन, मुंबई पर हुई थी।
    Q3. पुलिस ने क्या आरोप लगाए थे?
    👉 पुलिस ने कहा था कि निरुपम ने ट्रैक पर बैठकर लोकल ट्रेन को सात मिनट रोका था।
    Q4. कोर्ट ने क्या कहा?
    👉 कोर्ट ने कहा कि सबूत अस्पष्ट हैं और CCTV फुटेज से निरुपम की उपस्थिति साबित नहीं होती।
    Q5. निरुपम ने क्या प्रतिक्रिया दी?
    👉 उन्होंने कहा कि यह फैसला न्याय की जीत है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया था।

  • लोकल ट्रेन में झगड़ा, यात्री को लगे 6 टांके; कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत ठुकराई

    लोकल ट्रेन में झगड़ा, यात्री को लगे 6 टांके; कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत ठुकराई

    मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में झगड़े के दौरान एक यात्री के सिर पर चोट लगने से उसे छह टांके लगे। सेशंस कोर्ट ने कहा — “चोटिल व्यक्ति का अस्पताल से डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं।

    मुंबई: लोकल ट्रेन मे मार पीट को लेकर एक मुकदमे में मुंबई की सेशंस कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिन्होंने लोकल ट्रेन में झगड़े के दौरान एक यात्री को घायल कर दिया।
    कोर्ट ने साफ कहा कि “घायल का अस्पताल से डिस्चार्ज होना, जमानत देने का आधार नहीं हो सकता।”

    यह मामला 4 अक्टूबर का है, जब शिकायतकर्ता ने दादर से गोरेगांव स्लो लोकल ट्रेन पकड़ी थी और उसे सांताक्रूज़ स्टेशन पर उतरना था। भीड़ के कारण जब यात्री उतर नहीं पाए, तो दो लोगों में झगड़ा हुआ, जिससे एक व्यक्ति के सिर पर गंभीर चोट लगी और उसे 6 टांके लगाने पड़े।

    🚨 कौन हैं आरोपी और क्या हैं आरोप

    पुलिस ने इस मामले में दो यात्रियों — नौशाद अहमद (20) और रामसूरत राय (35) — को गिरफ्तार किया है।
    दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा

    • 115 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और
    • 118 (खतरनाक हथियार या साधन से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना)
      के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    दोनों आरोपी पिछले एक महीने से जेल में बंद हैं।

    🧾 “हम निर्दोष हैं”, आरोपियों की दलील

    आरोपियों के वकील ने कोर्ट में कहा कि दोनों गरीब मजदूर हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है
    उनका कहना था कि शिकायतकर्ता को साधारण चोट लगी थी और वह पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है।

    लेकिन अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और शिकायतकर्ता को सिर पर गंभीर चोट आई थी।

    🧑‍⚖️ जज का सख्त रुख — ‘घायल का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं’

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत सी. काले ने 1 नवंबर को अपने आदेश में कहा:

    “आरोपियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। घायल व्यक्ति का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। पुलिस के कागज़ों के अनुसार, शिकायतकर्ता को लगी चोट सिर के अहम हिस्से पर गंभीर चोट है।”

    कोर्ट ने यह भी बताया कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद किया गया है।
    इसी वजह से अदालत ने कहा कि जांच अधूरी है, इसलिए इस चरण में जमानत नहीं दी जा सकती।

    🚉 मुंबई लोकल में बढ़ रहे विवाद

    मुंबई की लोकल ट्रेनें “शहर की लाइफ़लाइन” कही जाती हैं, लेकिन रोज़ाना की भीड़ और तनाव के बीच झगड़ों के मामले बढ़ रहे हैं।
    रेलवे पुलिस (GRP) के अनुसार, हर महीने दर्जनों झगड़ों और धक्कामुक्की की शिकायतें मिलती हैं, जिनमें कई बार यात्रियों को चोटें भी लगती हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह घटना कब और कहां हुई थी?
    👉 यह घटना 4 अक्टूबर को दादर-सांताक्रूज़ लोकल ट्रेन में हुई थी।
    Q2. कितने लोग गिरफ्तार किए गए हैं?
    👉 दो आरोपी — नौशाद अहमद और रामसूरत राय — को गिरफ्तार किया गया है।
    Q3. शिकायतकर्ता को क्या चोटें आईं?
    👉 शिकायतकर्ता के सिर पर चोट लगी और 6 टांके लगाने पड़े।
    Q4. कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?
    👉 कोर्ट ने कहा कि घायल का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं, क्योंकि मामला अभी शुरुआती जांच में है।
    Q5. आरोपियों पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
    👉 धारा 115 और 118 (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज हुआ है।

  • रियल एस्टेट मे लोगों से 100 करोड़ की ठगी! इमारत प्लिंथ पर रुकी

    रियल एस्टेट मे लोगों से 100 करोड़ की ठगी! इमारत प्लिंथ पर रुकी

    मुंबई के वडाला इलाके में बड़ा रियल एस्टेट घोटाला सामने आया है। बीपी गंगार कंस्ट्रक्शन कंपनी पर 102 फ्लैट खरीदारों से ₹100 करोड़ की ठगी का आरोप लगा है। इमारत का काम सिर्फ नींव तक पहुंचा, बाकी निर्माण ठप पड़ा है।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की आर्थिक गुन्हे शाखा (EOW) ने BP Gangar Constructions Pvt. Ltd. नामक डेवलपर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने वडाला में बन रही “Skye 31” इमारत के 102 फ्लैट खरीदारों से लगभग ₹100 करोड़ की ठगी की।

    पुलिस के अनुसार, बिल्डर को दिसंबर 2024 तक खरीदारों को फ्लैट का कब्जा देना था, लेकिन आज तक इमारत की सिर्फ प्लिंथ लेवल तक की ही कंस्ट्रक्शन हुई है।

    🏗️ 2018 से ले रहा था बुकिंग, लेकिन निर्माण नहीं बढ़ा

    पुलिस जांच में सामने आया है कि BP Gangar Constructions ने 2018 से फ्लैट बुकिंग शुरू की, और कई लोगों से बड़ी रकम ली।
    शिकायतकर्ता अनिल ड्रोन (62), जो एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, ने 2022 में 2-BHK फ्लैट खरीदा था। उन्होंने शिकायत में बताया कि बिल्डर ने एक ही फ्लैट दो लोगों को बेच दिया, यानी एक ही यूनिट से दो बार पैसा वसूला गया।

    🧾 RERA नियमों का उल्लंघन, पैसा निजी उपयोग में लगाया

    EOW के अधिकारियों ने बताया कि डेवलपर ने अब तक 159 में से 102 फ्लैट बेच दिए, लेकिन उस रकम को प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय दूसरी कंपनियों या व्यक्तिगत कामों में उपयोग किया गया।
    यह रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (RERA) का गंभीर उल्लंघन है।

    👮‍♂️ दो डायरेक्टरों पर FIR, IPC की कई धाराएं लागू

    पुलिस ने कंपनी के दो डायरेक्टरों — सुब्बारमन आनंद विलायनूर और उमा सुब्बारमन — और कुछ अन्य अज्ञात अधिकारियों पर IPC की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), और 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है।
    पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर ठगी की रकम करीब ₹100 करोड़ से अधिक हो सकती है।

    📉 खरीदारों में रोष, कहा, “हमारी जिंदगी की कमाई दांव पर”

    पीड़ित फ्लैट खरीदारों ने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी इस प्रोजेक्ट में लगाई थी।
    “हम हर महीने EMI दे रहे हैं, लेकिन घर सिर्फ नक्शे में है। बिल्डर जवाब नहीं दे रहा,” — एक खरीदार ने बताया।
    अब खरीदारों की मांग है कि सरकार RERA के तहत तुरंत हस्तक्षेप करे और इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरी विश्वसनीय कंपनी को सौंपा जाए।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह मामला किस डेवलपर के खिलाफ दर्ज हुआ है?
    👉 BP Gangar Constructions Pvt. Ltd. के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
    Q2. कितने खरीदार ठगी के शिकार हुए हैं?
    👉 कुल 102 फ्लैट खरीदारों ने शिकायत दर्ज कराई है।
    Q3. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    👉 पुलिस के अनुसार, रकम लगभग ₹100 करोड़ से अधिक है।
    Q4. पुलिस ने किन धाराओं में केस दर्ज किया है?
    👉 IPC की धारा 406, 420 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
    Q5. क्या इमारत का निर्माण पूरा हुआ है?
    👉 नहीं, अब तक केवल प्लिंथ लेवल तक ही काम हुआ है।

  • उपपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मालवणी के सरकारी जमीन अतिक्रमणमुक्त!

    उपपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मालवणी के सरकारी जमीन अतिक्रमणमुक्त!

    मुंबई के मालाड-मालवणी इलाके में बीएमसी और कलेक्टर विभाग ने मिलकर बड़ी कार्रवाई की। 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन से अवैध झोपड़ियां हटाई गईं। कार्रवाई पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के आदेश पर की गई।

    मुंबई: मालाड (पश्चिम) के मालवणी इलाके में बृहन्मुंबई महानगर पालिका और कलेक्टर विभाग की सरकारी यंत्रणाओं ने मिलकर बड़ी अतिक्रमणविरोधी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में करीब 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त किया गया। यह कार्रवाई बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के अतिक्रमण की शिकायतों के बाद की गई।

    इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उपपालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया, जिन्होंने इस पर तीन बार — 17 अक्टूबर, 27 अक्टूबर और 6 नवंबर को लगातार बैठकें लेकर स्थिति की समीक्षा की थी। लोढ़ा ने साफ शब्दों में कहा कि “सरकारी जमीन पर कोई भी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

    🏗️ पहले चरण में मिली बड़ी सफलता

    बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में मालवणी और मालाड के आसपास स्थित सरकारी जमीन से झोपड़पट्टियों को हटाया गया है। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बने घरों, झोपड़ियों और टीन के शेड को जेसीबी मशीन की मदद से तोड़ा गया। प्रशासन का कहना है कि आगे भी इस तरह की अतिक्रमणविरोधी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि किसी को भी दोबारा अवैध निर्माण करने का मौका न मिले।

    🧱 लोढ़ा ने दिए नए निर्देश: संरक्षक दिवार और अंगणवाड़ी के लिए निधी

    कार्रवाई के बाद पालक मंत्री लोढ़ा ने अधिकारियों को आदेश दिया कि जहाँ जमीन खाली कराई गई है, वहाँ तुरंत “संरक्षक दिवार” (बाउंड्री वॉल) का निर्माण किया जाए, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
    साथ ही, स्थानीय बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोढ़ा ने अंगणवाड़ी केंद्रों के लिए निधी जारी करने के निर्देश भी दिए।

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    सैकड़ों परिवार हुए बेघर

    इस तोड़क कार्रवाई से प्रभावित परिवारों पर अगर नजर डालें, तो अली तलाव गावदेवी मंदिर के पास, राठोडी और चिकूवाडी मे हुए तोड़क कार्रवाई से सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं। पीड़ितों का कहना है कि सरकार को अगर इस जमीन की इतनी ज्यादा जरूरत थी तो हमारे लिए भी पर्याय व्यवस्था की जानी चाहिए थी। ये रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर हमारे उपर ज़ुल्म किया गया है। बांगलादेशी और रोहिंग्या के नाम पर हमारी जांच तो करते, लेकिन इन्होंने जांच नही की। कुछ लोगों ने प्रशासन की सख्ती को लेकर बददुआएं भी दी।


    FAQ सेक्शन

    Q1. मालवणी में कितनी जमीन अतिक्रमणमुक्त की गई?
    👉 करीब 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन बीएमसी और कलेक्टर प्रशासन ने खाली कराई।
    Q2. यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?
    👉 कार्रवाई उपपालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के आदेशानुसार हुई।
    Q3. क्या कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी?
    👉 हाँ, अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
    Q4. खाली जमीन का क्या उपयोग होगा?
    👉 वहाँ संरक्षक दिवार और अंगणवाड़ी केंद्र बनाए जाने की योजना है।

  • ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल से सफर होगा आसान, डेढ़ घंटे की दूरी अब सिर्फ 15 मिनट में!

    ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल से सफर होगा आसान, डेढ़ घंटे की दूरी अब सिर्फ 15 मिनट में!

    मुंबईवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी! ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल परियोजना से यात्रा का समय घटकर सिर्फ 15 मिनट रह जाएगा। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे बन रही यह आधुनिक सुरंग तीन चरणों में पूरी होगी।

    मुंबई: सफर करने वाले मुंबई वासियों के लिए ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल प्रोजेक्ट उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। इस विशाल परियोजना के पूरा होने के बाद ठाणे से बोरीवली का सफर, जो अब तक एक से डेढ़ घंटे में तय होता था, वह मात्र 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

    मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) इस परियोजना पर तेज़ी से काम कर रहा है। घोड़बंदर रोड को वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ने वाला यह मार्ग शहर के दोनों प्रमुख उपनगरों को सीधा और तेज़ संपर्क प्रदान करेगा।

    घोड़बंदर रोड से वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक सीधा कनेक्शन

    ठाणे के घोड़बंदर रोड से शुरू होकर बोरीवली के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक 11.8 किलोमीटर लंबी यह ट्विन टनल संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) के नीचे से गुज़रेगी। यह मुंबई की सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत सुरंगों में से एक होगी।

    MMRDA अधिकारियों ने बताया कि ठाणे में भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि बोरीवली में पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है। परियोजना के पूरा होने के बाद ट्रैफिक जाम में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    हर सुरंग में तीन लेन और आधुनिक सुरक्षा सिस्टम

    प्रत्येक सुरंग में तीन लेन बनाई जा रही हैं — जिनमें एक आपातकालीन लेन भी होगी। सुरक्षा के लिहाज से हर 300 मीटर पर क्रॉस-पास बनाए जा रहे हैं ताकि किसी आपात स्थिति में वाहन या लोग सुरक्षित निकल सकें।

    सुरंगों में अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, फायर फाइटिंग उपकरण और डिजिटल एलईडी साइनबोर्ड जैसी सुविधाएँ होंगी। यह सब यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव दिलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    परियोजना तीन चरणों में पूरी होगी

    एमएमआरडीए ने इस ट्विन टनल को तीन चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

    • पैकेज 1: बोरीवली और ठाणे के बीच 5.75 किमी लंबी सुरंग।
    • पैकेज 2: ठाणे और बोरीवली के बीच 6.5 किमी की दूसरी सुरंग।
    • पैकेज 3: वेंटिलेशन सिस्टम, सुरक्षा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था का निर्माण।

    अधिकारियों का कहना है कि तीन वर्षों के भीतर इस परियोजना को पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है।

    कुल लागत 14,401 करोड़ रुपये

    इस दोहरी सुरंग परियोजना की कुल लागत ₹14,401 करोड़ आँकी गई है। इसमें से राज्य सरकार ₹1,144.60 करोड़ और केंद्र सरकार ₹572.30 करोड़ का निवेश करेगी। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण पर लगभग ₹700 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है।

    ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में मिलेगी राहत

    परियोजना विशेषज्ञों का कहना है कि ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और वाहनों के रुकने की वजह से होने वाले प्रदूषण में भी गिरावट दर्ज की जाएगी। यह सुरंग मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज़, हरित और सुरक्षित कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।


    FAQ सेक्शन

    Q1. ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल की लंबाई कितनी है?
    👉 कुल लंबाई लगभग 11.8 किलोमीटर है।
    Q2. यह परियोजना कब तक पूरी होगी?
    👉 MMRDA का लक्ष्य है कि यह प्रोजेक्ट अगले तीन वर्षों में पूरा कर लिया जाए।
    Q3. सुरंग में कितनी लेन होंगी?
    👉 प्रत्येक सुरंग में तीन लेन होंगी, जिनमें एक आपातकालीन लेन भी शामिल है।
    Q4. क्या यह सुरंग किसी राष्ट्रीय उद्यान से गुज़रेगी?
    👉 हां, यह सुरंग संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से गुज़रेगी।
    Q5. इस परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
    👉 लगभग ₹14,401 करोड़ रुपये।

  • दहिसर के नाले से मिली नवजात की पहचान, गरीबी में मजबूर माता-पिता ने छोड़ा

    दहिसर के नाले से मिली नवजात की पहचान, गरीबी में मजबूर माता-पिता ने छोड़ा

    मुंबई के दहिसर इलाके में नाले से मिली नवजात बच्ची के माता-पिता का पता पुलिस ने लगा लिया है। तीन बेटियों के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस दंपती ने मजबूरी में चौथी बेटी को छोड़ दिया था। पुलिस अब बच्चे की देखरेख को लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    मुंबई: दहिसर में कुछ दिन पहले नाले के पास एक नवजात बच्ची मिलने की घटना ने सभी को झकझोर दिया था। अब पुलिस ने उस मासूम के माता-पिता का पता लगा लिया है। जांच में सामने आया कि यह दंपती बेहद गरीब है और पहले से तीन बेटियां हैं। आर्थिक बोझ और सामाजिक दबाव के चलते उन्होंने चौथी बच्ची को नाले के पास छोड़ दिया।

    🩺 शताब्दी अस्पताल में सुरक्षित है बच्ची

    27 अक्टूबर को दहिसर पुलिस ने अशोकवन इलाके के नाले से इस नवजात को बचाया था। तुरंत शताब्दी अस्पताल, कांदिवली में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची अब पूरी तरह स्थिर है और जल्द डिस्चार्ज हो जाएगी।
    अस्पताल प्रशासन ने कहा — “हम पुलिस को बच्चे की स्थिति की जानकारी देंगे और उन्हें जिसे सौंपने का निर्देश मिलेगा, उसी को बच्ची दी जाएगी।”

    👮‍♀️ पुलिस ने माता-पिता को किया ट्रेस, अब तय होगी कानूनी दिशा

    दहिसर पुलिस ने इलाके के झुग्गी बस्तियों में खोजबीन के बाद बच्ची के माता-पिता को ढूंढ निकाला। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मां घरेलू कामगार है और पिता दिहाड़ी मजदूर। दोनों ने कबूल किया कि वे चौथे बच्चे की परवरिश का खर्च नहीं उठा सकते थे।
    अभी यह तय नहीं हुआ है कि पुलिस दोनों को गिरफ्तार करेगी या सिर्फ एक को। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण पुलिस सावधानीपूर्वक कदम उठा रही है।

    🧒 बाल कल्याण समिति (CWC) तय करेगी बच्ची का भविष्य

    अभी यह चर्चा जारी है कि बच्ची को माता-पिता को लौटाया जाए या किसी चाइल्ड वेलफेयर होम को सौंपा जाए।
    बाल कल्याण समिति (CWC), अस्पताल और पुलिस मिलकर यह तय करेंगे कि बच्चे के हित में सबसे बेहतर निर्णय क्या होगा।

    💔 गरीबी और समाजिक दबाव की त्रासदी

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह दंपती पिछले कुछ महीनों से आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। पति की मजदूरी से घर चलाना मुश्किल था और तीन बेटियों के पालन-पोषण का खर्च पहले से भारी था। चौथी बेटी के जन्म के बाद उन्हें लगा कि अब उनका गुज़ारा नहीं होगा, इसलिए उन्होंने यह गलत कदम उठाया।
    यह मामला न सिर्फ कानूनी, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील बन गया है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. नवजात बच्ची को कहां से बरामद किया गया था?
    👉 बच्ची दहिसर (पश्चिम) के अशोकवन इलाके के एक नाले से बरामद की गई थी।
    Q2. बच्ची की हालत अभी कैसी है?
    👉 शताब्दी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची अब स्थिर है और जल्द डिस्चार्ज होगी।
    Q3. क्या बच्ची को उसके माता-पिता को वापस सौंपा जाएगा?
    👉 इस पर फैसला बाल कल्याण समिति (CWC) और पुलिस मिलकर करेगी।
    Q4. क्या माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज किया गया है?
    👉 फिलहाल पुलिस विचार कर रही है कि दोनों को गिरफ्तार किया जाए या नहीं, मामला बेहद संवेदनशील है।

  • Malad Redevelopment Scam: कांदिवली के बिल्डर से ₹18.09 करोड़ की ठगी, तीन डेवलपर्स पर EOW की जांच

    Malad Redevelopment Scam: कांदिवली के बिल्डर से ₹18.09 करोड़ की ठगी, तीन डेवलपर्स पर EOW की जांच

    मुंबई के मालाड इलाके में एक बड़े रीडेवलपमेंट फ्रॉड का खुलासा हुआ है। कांदिवली के बिल्डर से तीन डेवलपर्स ने झूठे दस्तावेज़ दिखाकर ₹18.09 करोड़ की ठगी की। अब मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा गया है।

    मुंबई: करोड़ों रुपये की ठगी के मामले मे मुंबई पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने मालाड वेस्ट में हुए एक बड़े रीडेवलपमेंट फ्रॉड केस की जांच अपने हाथ में ले ली है। आरोप है कि तीन डेवलपर्स — अपूर्व शाह, शीतल शाह और विशेश शाह — ने कांदिवली के बिल्डर राकेश वीरेंद्र सिंह (51) को झूठे मालिकाना दस्तावेज़ दिखाकर ₹18.09 करोड़ की ठगी की है।

    राकेश सिंह ने बताया कि ये आरोपी खुद को मालाड (वेस्ट) स्थित राम निवास और कमल कुंज नामक दो संपत्तियों के एकमात्र मालिक बताते थे, जबकि असल में ये प्रॉपर्टीज पहले से ही कानूनी विवादों में उलझी हुई थीं।

    🔹 झूठे दस्तावेज़ और फर्जी डेवलपमेंट एग्रीमेंट

    एफआईआर के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने राकेश सिंह को लुभाकर Joint Development Agreement (JDA) किया और नकली दस्तावेज़ पेश कर खुद को वैध मालिक बताया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से भारी मुनाफा होगा।

    सिंह ने अनुमतियों, किरायेदारों के स्थानांतरण और निर्माण कार्यों के लिए ₹18.09 करोड़ का निवेश किया। मगर रकम मिलने के बाद न तो कोई काम शुरू हुआ, न पैसा वापस किया गया।

    🔹 पैसे गायब, प्रोजेक्ट ठप

    सिंह के मुताबिक, सभी दस्तावेज़ और वादे झूठे निकले। रकम को इधर-उधर कर दिया गया और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने जानबूझकर कानूनी विवाद छिपाकर निवेशक को भ्रमित किया और वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

    🔹 EOW ने संभाली जांच

    मालाड पुलिस ने पहले भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा के तहत धोखाधड़ी और विश्वासघात के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। अब यह मामला आगे की गहराई से जांच के लिए EOW यूनिट-12 को सौंपा गया है।

    EOW अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया, और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका रही है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह ठगी किस इलाके में हुई?
    मालाड (वेस्ट), मुंबई में दो संपत्तियों — राम निवास और कमल कुंज — के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में यह धोखाधड़ी हुई।
    Q2. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    कांदिवली के बिल्डर राकेश सिंह से ₹18.09 करोड़ की ठगी की गई है।
    Q3. अब इस केस की जांच कौन कर रहा है?
    मामले की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) यूनिट-12 कर रही है।
    Q4. आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
    BNS की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप दर्ज किए गए हैं।