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  • Mumbai: ओशिवारा पुलिस स्टेशन में हंगामा — 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 पर जांच शुरू

    Mumbai: ओशिवारा पुलिस स्टेशन में हंगामा — 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 पर जांच शुरू

    मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में 4 नवंबर को बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड कर दिए गए हैं, जबकि पांच पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू की गई है। मामला अब जांच के घेरे में है।

    मुंबई: जोगेश्वरी पश्चिम के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों के कथित “अशोभनीय व्यवहार” के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि पांच अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई है। यह कार्रवाई 4 नवंबर को बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद की गई है।

    ⚖️ ओशिवारा थाने में तनाव: क्या हुआ था उस दिन

    4 नवंबर की शाम को बजरंग दल के जिला अधिकारी शंकर उर्फ़ वृशभ जाधव करीब 10–15 कार्यकर्ताओं के साथ ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।
    उन्होंने आरोप लगाया कि जोगेश्वरी (पश्चिम) के गुप्ता किराना स्टोर के पास एक परिवार पर दूसरे परिवार ने हमला किया है।
    उसी वक्त एक नाबालिग लड़की और उसकी मां भी छेड़छाड़ की शिकायत लेकर थाने पहुंचीं।

    पुलिस अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन माहौल अचानक गरम हो गया।
    इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों पर “गलत व्यवहार” और “कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने” के आरोप लगे।

    🚨 दो पुलिस अधिकारी सस्पेंड, पांच पर जांच आदेश

    घटना के बाद डीसीपी (ज़ोन 9) दिक्षित गेडाम ने इसकी पुष्टि की।
    उन्होंने बताया कि दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है, हालांकि उनके नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
    साथ ही, पांच अन्य पुलिसकर्मियों —
    एपीआई रमेश केंगर, एपीआई गणेश गायके, पीएसआई बाबू तोत्रे, पीएसआई दीपक बारवे और कॉन्स्टेबल अज़ीम ज़री — पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

    🕵️ सात दिन में स्पष्टीकरण रिपोर्ट देनी होगी

    सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे सात दिनों के अंदर स्पष्टीकरण रिपोर्ट (Self-Explanatory Report) जमा करें।
    अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
    आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ अशोभनीय व्यवहार किया और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई।

    📢 प्रशासन सख्त, जांच जारी

    घटना के बाद से ही ओशिवारा पुलिस स्टेशन में माहौल तनावपूर्ण है।
    वरिष्ठ अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं।
    सूत्रों के मुताबिक, यह जांच केवल व्यवहारिक नहीं बल्कि प्रक्रियात्मक लापरवाही पर भी केंद्रित है — यानी क्या पुलिस ने शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई करने में देरी की थी या नहीं।


    FAQ सेक्शन:

    Q1. ओशिवारा पुलिस स्टेशन में क्या हुआ था?
    👉 4 नवंबर की शाम बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पुलिस पर अशोभनीय व्यवहार का आरोप लगा।
    Q2. कितने पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए हैं?
    👉 दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया है और पांच पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू है।
    Q3. जांच की निगरानी कौन कर रहा है?
    👉 डीसीपी (ज़ोन 9) दिक्षित गेडाम पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
    Q4. क्या पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं?
    👉 हां, पांच पुलिसकर्मियों के नाम जांच आदेश में दर्ज हैं — रमेश केंगर, गणेश गायके, बाबू तोत्रे, दीपक बारवे और अज़ीम ज़री।

  • Mumbai: कांदिवली की नशेमन कॉलोनी मस्जिद में नमाज़ बंद, ट्रस्टी बोले – 11 नवंबर को वक्फ़ ट्रिब्यूनल से न्याय की उम्मीद

    Mumbai: कांदिवली की नशेमन कॉलोनी मस्जिद में नमाज़ बंद, ट्रस्टी बोले – 11 नवंबर को वक्फ़ ट्रिब्यूनल से न्याय की उम्मीद

    कांदिवली (पश्चिम) की नशेमन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में स्थित मस्जिद अबू बकर सिद्दीक़ महीनों से बंद है। ट्रस्टी लगातार कानूनी प्रयासों में जुटे हैं और 11 नवंबर को वक्फ़ ट्रिब्यूनल में अगली सुनवाई होगी।

    मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) में चारकोप सेक्टर-1, नशेमन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी स्थित मदरसा और मस्जिद अबू बकर सिद्दीक़ में पिछले कई महीनों से नमाज़ अदा नहीं की जा रही है।
    मस्जिद के ट्रस्टी लगातार प्रशासन और पुलिस से संपर्क कर रहे हैं, ताकि नमाज़ दोबारा शुरू की जा सके।
    अब यह मामला 11 नवंबर को वक्फ़ ट्रिब्यूनल में सुनवाई के लिए तय हुआ है, जिस पर पूरे इलाके की निगाहें हैं।

    🕌 सोसायटी में बंद मस्जिद को लेकर विवाद जारी

    मस्जिद के ट्रस्टी हाजी उस्मान ने बताया कि वे लगातार कानूनी और प्रशासनिक रास्तों से मस्जिद को खोलने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने कहा —

    “हमने पुलिस कमिश्नर, डीसीपी और चारकोप पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक को पत्र लिखकर नमाज़ की अनुमति मांगी है।
    जैसे अन्य समुदायों के त्यौहारों की अनुमति दी जाती है, वैसे ही हमें भी अपना धर्म पालन करने का अधिकार है।”

    ट्रस्टी ने कहा कि सोसायटी के नियमों का हमेशा पालन किया गया है, फिर भी नमाज़ जबरन बंद कराई गई। उन्होंने दुख जताते हुए कहा,

    “भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार जीने का अधिकार है।
    मगर हमें यह अधिकार नहीं दिया जा रहा।”

    🏢 MAHADA नियमों के तहत बनी थी मस्जिद

    ट्रस्टियों का कहना है कि मस्जिद पूरी तरह कानूनी रूप से रजिस्टर्ड और MHADA नियमों के अनुरूप बनाई गई थी।
    कई वर्षों तक वहाँ पाँचों वक्त की नमाज़ और ईद की जमातें शांतिपूर्वक होती रहीं।
    लेकिन कुछ स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद “उपद्रवी तत्वों” के दबाव में मस्जिद बंद कर दी गई

    एक निवासी ने बताया,

    “पहले कुछ शर्तों के साथ नमाज़ पढ़ने की अनुमति थी, जिसे हमने सौहार्द के लिए मान लिया था।
    अब वो भी रोक दी गई है।”

    ⚖️ 11 नवंबर को होगी अहम सुनवाई

    वक्फ़ ट्रिब्यूनल में पहले भी कई सुनवाई हो चुकी हैं।
    अब 11 नवंबर को अगली सुनवाई में ट्रस्टी मस्जिद से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेज़,
    पुलिस के साथ हुई चिट्ठियाँ और पहले मिली अनुमति के सबूत पेश करने वाले हैं।

    हाजी उस्मान ने कहा —

    “हम किसी से लड़ाई नहीं कर रहे। बस अपनी इबादत का हक़ मांग रहे हैं।
    हमें उम्मीद है कि वक्फ़ ट्रिब्यूनल में न्याय मिलेगा।”

    🚪 ‘दोहरे मापदंड’ पर सवाल उठे

    मुस्लिम निवासियों का कहना है कि सोसायटी में अन्य समुदायों को अपने त्योहार मनाने की पूरी आज़ादी है,
    मगर मुसलमानों को नमाज़ की इजाज़त नहीं दी जा रही।
    एक स्थानीय निवासी ने कहा —

    “क्या यही बराबरी है? हम सिर्फ़ समान अधिकार चाहते हैं, कोई विशेष सुविधा नहीं।”

    🙏 खामोश मस्जिद अब न्याय की राह देख रही

    जो मस्जिद कभी अज़ान और नमाज़ की आवाज़ों से गूंजती थी,
    आज वो खामोश है।
    रहवासी कहते हैं कि मस्जिद उनके लिए सिर्फ़ इबादत की जगह नहीं, बल्कि एकता और भाईचारे का प्रतीक थी।
    अब सभी की निगाहें 11 नवंबर की सुनवाई पर हैं।

    💬 मुख्य बिंदु एक नज़र में

    • मस्जिद: मदरसा और मस्जिद अबू बकर सिद्दीक़, नशेमन सोसायटी, चारकोप, कांदिवली (पश्चिम)
    • मुद्दा: नमाज़ बंद, ट्रस्टी ने अनुमति के लिए वक्फ़ ट्रिब्यूनल का रुख किया
    • अगली सुनवाई: 11 नवंबर
    • प्रमुख व्यक्ति: हाजी उस्मान (ट्रस्टी)
    • शिकायत: सोसायटी में “दोहरे मापदंड” और धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक

    FAQ सेक्शन

    Q1. मस्जिद में नमाज़ क्यों रोकी गई?
    → सोसायटी के कुछ सदस्यों के विरोध के कारण नमाज़ बंद कराई गई थी।
    Q2. मस्जिद की स्थिति क्या है?
    → मस्जिद कानूनी रूप से पंजीकृत है और MHADA के नियमों के अनुसार बनी है।
    Q3. मामला अब कहाँ चल रहा है?
    → वक्फ़ ट्रिब्यूनल में 11 नवंबर को अगली सुनवाई तय की गई है।
    Q4. ट्रस्टी क्या चाहते हैं?
    → वे सिर्फ़ नमाज़ दोबारा शुरू करने और समान धार्मिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

  • Mumbai: नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार पिता बरी — गवाही और सबूतों में मेल नहीं

    Mumbai: नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार पिता बरी — गवाही और सबूतों में मेल नहीं

    मुंबई की पॉक्सो कोर्ट ने 35 वर्षीय व्यक्ति को नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप से बरी किया। अदालत ने कहा कि न तो पीड़िता और न ही उसकी मां ने कोई पुख्ता बयान दिया, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में भी शोषण के निशान नहीं मिले।

    मुंबई: एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने 35 वर्षीय पिता को नाबालिग बेटी के यौन शोषण के आरोप से बरी कर दिया, जिसे 2022 में गिरफ्तार किया गया था।
    अदालत ने साफ कहा कि गवाही और सबूतों में कोई मेल नहीं मिला, इसलिए आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

    🔹 क्या था मामला

    मामला कांदिवली पुलिस स्टेशन का है, जहाँ पीड़िता ने अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
    शिकायत में कहा गया था कि लड़की की मां घरों में नौकरानी का काम करती है, जबकि पिता शराब के नशे में घर आते हैं।
    घटना के समय पीड़िता छठी कक्षा में पढ़ती थी

    लड़की का आरोप था कि गणपति उत्सव से कुछ दिन पहले, पिता शराब पीकर घर आए, दरवाज़ा बंद कर दिया और उसे कपड़े उतारने को कहा।
    वहां उन्होंने कथित तौर पर यौन शोषण किया और धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो जान से मार देंगे।
    उसने आगे कहा कि कुछ दिन बाद फिर उसने साथ सोने के लिए कहा और जब मां ने उसकी रोने की आवाज सुनी, तो मामला खुला।
    इसके बाद मां-बेटी ने जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    🔹 अदालत में पलटी गवाही

    मामला जब अदालत पहुंचा, तो पीड़िता ने अपने बयान में कहानी बदल दी
    उसने कहा कि पिता ने सिर्फ मोबाइल चलाने और पढ़ाई न करने पर उसे और भाइयों को पीटा था
    यौन शोषण की कोई बात उसने अपने बयान में नहीं कही।
    यहां तक कि उसकी मां ने भी कहा कि पति ने कोई गलत काम नहीं किया

    🔹 डिफेंस की दलील और कोर्ट का निर्णय

    बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट सुवर्णा अवध वास्ट और राहुल डिंगणकर ने दलील दी कि
    पीड़िता और मां दोनों के बयानों में कोई पुख्तापन नहीं है और
    मेडिकल रिपोर्ट में भी किसी प्रकार की चोट या शोषण के निशान नहीं मिले

    कोर्ट ने माना कि कोई भी सबूत या गवाही आरोपों की पुष्टि नहीं करती
    इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया

    🔹 अदालत का अवलोकन

    न्यायाधीश ने कहा —

    “मां और बेटी दोनों ने बयान में शोषण का जिक्र नहीं किया।
    मेडिकल रिपोर्ट में भी किसी प्रकार की अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं पाई गई।
    ऐसे में अदालत आरोपी को दोषी नहीं ठहरा सकती।”

    ⚖️ POCSO कोर्ट का रुख साफ: सबूत के बिना सज़ा नहीं

    पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत नाबालिगों से जुड़ी यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर
    तेज़ कार्रवाई और सख्त सज़ा का प्रावधान है।
    लेकिन अदालतों का यह भी मानना है कि
    यदि गवाहों और मेडिकल साक्ष्य में मेल नहीं बैठता,
    तो किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

    🟨 मुख्य बिंदु एक नजर में

    • आरोपी पिता की उम्र: 35 वर्ष
    • मामला दर्ज: कांदिवली पुलिस स्टेशन, 2022
    • कोर्ट: स्पेशल POCSO कोर्ट, मुंबई
    • नतीजा: गवाही और सबूतों में विरोधाभास के कारण बरी
    • मेडिकल रिपोर्ट: किसी भी प्रकार की चोट नहीं पाई गई

    FAQ सेक्शन

    Q1. आरोपी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
    → अपनी नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप में।
    Q2. कोर्ट ने उसे क्यों बरी किया?
    → क्योंकि पीड़िता और उसकी मां के बयान आरोपों से मेल नहीं खाते थे और कोई मेडिकल सबूत नहीं मिला।
    Q3. मामला किस पुलिस स्टेशन में दर्ज था?
    → कांदिवली पुलिस स्टेशन, मुंबई।
    Q4. पॉक्सो कानून क्या है?
    → यह कानून नाबालिगों के साथ यौन अपराधों पर कड़ी सज़ा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

  • दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दहिसर टोल प्लाजा का निरीक्षण कर अधिकारियों को 13 नवंबर तक टोल हटाने की अंतिम चेतावनी दी। कहा – “समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल उखाड़ दूंगा।”

    मुंबई: दहिसर टोल प्लाजा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
    परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शनिवार को टोल प्लाजा का निरीक्षण करते हुए 13 नवंबर तक इसे हटाने की डेडलाइन दी।
    उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी —

    “अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं खुद जाकर टोल प्लाजा उखाड़ दूंगा।”

    इस बीच भाजपा ने टोल को हाईवे पर शिफ्ट करने का विरोध किया है, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    🔹 टोल प्लाजा हटाने पर विवाद क्यों?

    दहिसर टोल प्लाजा पर लगातार ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है।
    इसी वजह से टोल को स्थानांतरित करने की मांग उठ रही थी।
    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अधिकारियों को यह टोल हटाने और इसे वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज पार शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।

    लेकिन इस प्रस्ताव का भाजपा और मंत्री गणेश नाईक ने खुलकर विरोध किया।
    इससे सरकार के अंदर ही मतभेद उभर आए हैं।

    🔹 निरीक्षण में भड़के सरनाईक

    शनिवार सुबह प्रताप सरनाईक दहिसर टोल प्लाजा पहुंचे।
    निरीक्षण के दौरान मुंबई पुलिस, MSRDC, मनपा, टोल कंपनी और परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
    लेकिन सरनाईक ने देखा कि एक तरफ से फ्रेम हटाने के अलावा कोई ठोस काम नहीं हुआ।
    जब अधिकारियों ने और वक्त मांगा, तो मंत्री नाराज़ हो गए और कहा —

    “13 नवंबर को मैं फिर आऊंगा। अगर तब भी यही हाल रहा, तो खुद टोल बूथ तोड़ दूंगा।”

    🔹 निरीक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन

    सरनाईक जब टोल को वर्सोवा क्रीक ब्रिज के पार स्थानांतरित करने का निरीक्षण करने पहुंचे,
    तो कांग्रेस नेता विजय पाटिल और उनके समर्थकों ने विरोध जताया।
    विरोधियों ने कहा —

    “मुंबई का टोल प्लाजा वसई क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता। यहां पहले से सड़कों की हालत खराब है, ट्रैफिक भी है। यह स्वीकार्य नहीं होगा।”

    🔹 सड़क साफ करने और डिवाइडर हटाने के आदेश

    निरीक्षण के बाद मंत्री सरनाईक ने मुंबई की ओर आने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर हटाने और
    वाहनों के लिए रास्ता खोलने का आदेश दिया।
    उन्होंने कहा कि

    • क्रेन, बेंच और अन्य बाधाएं हटाई जाएं।
    • अनावश्यक होर्डिंग, लोहे के खंभे और अतिरिक्त बूथ तोड़े जाएं।
    • केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए जरूरी बूथ ही रहें।

    साथ ही, मीरा-भायंदर की ओर आने वाले टोल बूथ को भी शिफ्ट करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।


    FAQ सेक्शन

    1. दहिसर टोल हटाने की आखिरी तारीख क्या है?
    → परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 13 नवंबर तक की डेडलाइन दी है।
    2. उन्होंने क्या चेतावनी दी?
    → सरनाईक ने कहा, “अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल तोड़ दूंगा।”
    3. टोल को कहां शिफ्ट करने का प्रस्ताव है?
    → वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज के पार स्थानांतरित करने की बात चल रही है।
    4. किसने विरोध किया है?
    → भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने प्रस्तावित शिफ्टिंग का विरोध किया है।

  • मालाड आर्मी कैंप में चोरी: क्राइम ब्रांच ने तीन चोरों को पकड़ा, बंदूक और 9 जिंदा कारतूस बरामद

    मालाड आर्मी कैंप में चोरी: क्राइम ब्रांच ने तीन चोरों को पकड़ा, बंदूक और 9 जिंदा कारतूस बरामद

    मालाड के आर्मी कैंप में चोरी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने तीन चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक बंदूक, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने और नकद रकम बरामद हुई है। एक नाबालिग भी शामिल है।

    मुंबई: मालाड पूर्व इलाके में स्थित सीओडी (Central Ordnance Depot) आर्मी कैंप में हुई चोरी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने तीन चोरों को गिरफ्तार किया है।
    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस ने इनके पास से एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने बरामद किए हैं। हालांकि नगदी भी चोरी हुआ था लेकिन पुलिस को गिरफ्तारी में नगद बरामद नहीं हुए हैं।

    🔹 कैसे हुई थी चोरी

    यह वारदात 1 नवंबर की दोपहर की है, जब मालाड पूर्व के आर्मी कैंप में स्थित एक बंद क्वार्टर की कुंडी तोड़कर चोरी की गई।
    कमरा कुछ समय से बंद था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने अंदर घुसकर गहने, नकद और हथियार उड़ा लिए।
    घटना सामने आने के बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

    🔹 पुलिस ने ऐसे पकड़ा गिरोह

    मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस के नेतृत्व में जांच शुरू की गई।
    पुलिस टीम ने घटनास्थल की जांच, CCTV कैमरों की पड़ताल, और तकनीकी विश्लेषण (technical analysis) की मदद से संदिग्धों की पहचान की।
    मुखबिरों की जानकारी के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।

    🔹 बरामदगी और आगे की जांच

    पुलिस की पूछताछ में आरोपियों से एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस और लगभग 450 ग्राम चांदी के गहने बरामद हुए हैं।
    दोनों वयस्क आरोपियों को दिंडोशी पुलिस के हवाले किया गया है, जबकि नाबालिग को उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया है।
    फिलहाल दिंडोशी पुलिस आगे की जांच कर रही है कि क्या ये गिरोह किसी और चोरी में भी शामिल था।

    🔹 वरिष्ठ अधिकारी का बयान

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस ने बताया —

    “यह मामला संवेदनशील था क्योंकि चोरी आर्मी कैंप क्षेत्र में हुई थी। हमारी टीम ने तेजी और प्रोफेशनल अंदाज़ में काम करते हुए आरोपी पकड़ लिए।”

    🔹 कानूनी कार्रवाई

    इस मामले में दिंडोशी पुलिस ने गुनाह रजिस्टर क्रमांक 699/2025 के तहत
    भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(अ) और 331(3) के तहत अपराध दर्ज किया है।


    FAQ सेक्शन

    1. चोरी कब और कहां हुई थी?
    → चोरी 1 नवंबर को मालाड पूर्व के सीओडी आर्मी कैंप के बंद कमरे में हुई थी।
    2. पुलिस ने क्या बरामद किया?
    → पुलिस ने एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने और नकद रकम बरामद की है।
    3. कितने आरोपी पकड़े गए हैं?
    → तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
    4. आगे की जांच कौन कर रहा है?
    → आगे की जांच दिंडोशी पुलिस कर रही है।

  • मुंबई-गोवा हाईवे पर गड्ढों ने मचाई तबाही: तीन कारों की टक्कर, एयरबैग खुले तो बचीं जान

    मुंबई-गोवा हाईवे पर गड्ढों ने मचाई तबाही: तीन कारों की टक्कर, एयरबैग खुले तो बचीं जान

    मुंबई-गोवा हाईवे पर इंदापुर के पास गड्ढों की वजह से तीन कारों की आपसी टक्कर हुई। हादसे में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं, मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और हिंगोली में भी अलग-अलग हादसों ने सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।

    मुंबई: गड्ढों के कारण मुंबई-गोवा हाईवे पर तीन कारें आपस में टकरा गईं। हादसा इंदापुर शहर के पास हुआ, जहां अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से आ रही दो गाड़ियों ने सामने की कार को जोरदार टक्कर मार दी। एयरबैग खुलने से सभी यात्री बाल-बाल बच गए। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, हालांकि वाहनों को भारी नुकसान हुआ।

    🚗 इंदापुर के पास गड्ढों ने मचाया हड़कंप

    मुंबई-गोवा हाईवे पर इंदापुर के पास काशेने गांव के नज़दीक रविवार शाम यह भीषण हादसा हुआ।
    कोंकण से मुंबई की ओर आ रही एक कार चालक ने सड़क पर पड़े गहरे गड्ढे देखकर अचानक ब्रेक लगा दिए।
    पीछे से तेज रफ्तार में आ रही दो अन्य गाड़ियां समय पर ब्रेक नहीं लगा सकीं और जोरदार टक्कर हो गई।

    तीनों वाहनों के एयरबैग खुल गए, जिससे यात्रियों की जान बच गई। हादसे के बाद लोगों ने संबंधित विभाग पर नाराज़गी जताई और कहा कि अगर गड्ढे नहीं भरे गए तो वे “कार्यालय तोड़फोड़” जैसे आंदोलन करेंगे।

    🛣️ वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी हादसा, एक की मौत

    इसी बीच, मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी एक दर्दनाक हादसा हुआ।
    रात करीब 1:30 बजे मलाड के पास एक तेज़ रफ़्तार डंपर ने बाइक को टक्कर मार दी
    इस हादसे में बाइक सवार एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है।
    घायल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और उसका इलाज जारी है।

    हादसे के बाद बोरीवली से अंधेरी की ओर जाने वाला मार्ग कुछ समय के लिए जाम हो गया।
    पुलिस ने डंपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की है।
    रात में भारी वाहनों की तेज़ रफ़्तार एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

    🔥 हिंगोली में कंटेनर में आग, 40 फ्रिज जलकर खाक

    हिंगोली जिले के कलमनुरी-नांदेड़ हाईवे पर दातिपति गांव के पास एक कंटेनर में अचानक आग लग गई।
    दिल्ली से चेन्नई की ओर जा रहे इस कंटेनर में 40 रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) लदे हुए थे।
    ड्राइवर ने चलते वाहन से धुआँ उठता देखा और समझदारी दिखाते हुए तुरंत ट्रक से कूद गया।

    कुछ ही मिनटों में कंटेनर पूरी तरह आग की लपटों में घिर गया और सभी रेफ्रिजरेटर जलकर राख हो गए।
    आग लगने के कारणों की जांच जारी है, लेकिन प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट का मामला हो सकता है।

    🚨 सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

    तीनों हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, भारी वाहनों की निगरानी और हाईवे रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    खासतौर पर मुंबई-गोवा हाईवे पर गड्ढों की हालत को लेकर यात्रियों में भारी नाराज़गी है।
    स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर मरम्मत का काम जल्द नहीं हुआ, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।


    FAQ सेक्शन

    Q1: मुंबई-गोवा हाईवे पर हादसा कैसे हुआ?
    ➡️ एक कार चालक ने गड्ढे देखकर अचानक ब्रेक लगाया, जिससे पीछे से आ रही दो गाड़ियां टकरा गईं।
    Q2: क्या हादसे में कोई घायल हुआ?
    ➡️ एयरबैग खुलने से सभी यात्री सुरक्षित रहे, केवल गाड़ियों को भारी नुकसान हुआ।
    Q3: क्या पुलिस ने किसी पर कार्रवाई की?
    ➡️ फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सड़क की मरम्मत के लिए विभाग को सूचित किया गया है।
    Q4: वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर हुई मौत का कारण क्या था?
    ➡️ एक तेज़ रफ़्तार डंपर ने बाइक को टक्कर मारी, जिससे एक व्यक्ति की मौके पर मौत हो गई।
    Q5: हिंगोली में कंटेनर आग में कितना नुकसान हुआ?
    ➡️ करीब 40 रेफ्रिजरेटर और पूरा कंटेनर जलकर राख हो गया, ड्राइवर सुरक्षित बच गया।

  • मुंबई में बैठने की जगह को लेकर विवाद, युवक ने दो बुजुर्गों की की बेरहमी से पिटाई

    मुंबई में बैठने की जगह को लेकर विवाद, युवक ने दो बुजुर्गों की की बेरहमी से पिटाई

    मुंबई के मालाड इलाके में बैठने की छोटी सी बात पर विवाद इतना बढ़ गया कि एक युवक ने दो बुजुर्गों को बेरहमी से पीट दिया। घटना में दोनों बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हुए और आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    मुंबई: मालाड पश्चिम में रविवार शाम एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां बैठने की छोटी सी बात पर एक युवक ने दो बुजुर्गों को बुरी तरह पीट दिया
    घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है।
    पीड़ित बुजुर्गों की पहचान बहरजी बलीहारी कनोजिया (66) और राजनाथ यादव (67) के रूप में हुई है।

    🔹 मामूली बात पर बिगड़ा मामला

    घटना रविवार शाम करीब 7 बजे की है। दोनों बुजुर्ग अपनी सोसायटी के पास बने एक बेंच पर बैठकर बातचीत कर रहे थे, तभी इलाके का एक युवक वहां आया और उन्हें वहां से हटने को कहा।
    बुजुर्गों ने विरोध किया तो विवाद बढ़ गया, और अचानक युवक ने गुस्से में दोनों पर हमला कर दिया
    आरोपी ने दोनों को घूंसों और लातों से पीटते हुए गंभीर रूप से घायल कर दिया।

    घटना के बाद युवक वहां से फरार हो गया, जबकि घायल बुजुर्गों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    🔹 पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    मालाड पुलिस ने बुजुर्गों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है।
    पुलिस ने उस पर हत्या का प्रयास, शारीरिक हानि पहुंचाना और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

    मालाड़ पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दुष्यंत चौहान ने बताया, कि

    “यह मामला बेहद शर्मनाक है। किसी बुजुर्ग के साथ इस तरह का बर्ताव अस्वीकार्य है। जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ की जा रही है।”

    🔹 इलाके में तनाव, नागरिकों में आक्रोश

    घटना के बाद इलाके में लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह की हिंसा से सोसायटी में डर का माहौल बन गया है और पुलिस को गश्त बढ़ानी चाहिए।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. घटना कहां की है?
    यह घटना मुंबई के मालाड इलाके की है।
    Q2. विवाद किस बात को लेकर हुआ था?
    विवाद बैठने की जगह को लेकर हुआ था।
    Q3. घटना में कौन घायल हुआ?
    दो बुजुर्ग — बहरजी कनोजिया (66) और राजनाथ यादव (67) गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
    Q4. क्या आरोपी गिरफ्तार हुआ है?
    हाँ, पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है और मामला दर्ज कर लिया गया है।
    Q5. पुलिस ने कौन-कौन सी धाराएं लगाई हैं?
    पुलिस ने आरोपी पर हत्या का प्रयास, शारीरिक हानि पहुंचाना और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।

  • महिला हत्या केस सुलझाने पर मालवनी पुलिस टीम को मुंबई पुलिस आयुक्त ने सम्मानित किया

    महिला हत्या केस सुलझाने पर मालवनी पुलिस टीम को मुंबई पुलिस आयुक्त ने सम्मानित किया

    मालाड-मालवनी में पूर्व बार डांसर की हत्या के सनसनीखेज मामले को सुलझाने पर मुंबई पुलिस विशेष आयुक्त देवेंद्र भारती ने मालवनी पुलिस टीम को सम्मानित किया। जानिए पूरा मामला और पुलिस की तफ्तीश कैसे पहुंची हत्यारे तक।

    मुंबई: मालाड पश्चिम मालवनी इलाके में हुए महिला हत्या केस को सुलझाने वाली मालवनी पुलिस टीम को मुंबई पुलिस के विशेष आयुक्त देवेंद्र भारती ने सम्मानित किया।
    उन्होंने पुलिस निरीक्षक जीवन भातकुले, सहायक पुलिस निरीक्षक प्रथमेश विचारे और उनकी टीम को सम्मान पत्र देकर सराहा
    आयुक्त भारती ने कहा,

    “इस तरह की तत्परता और पेशेवर जांच से पुलिस विभाग की छवि और जनता का भरोसा दोनों मजबूत होते हैं।”

    🔹 किस मामले में दिया गया सम्मान?

    यह सम्मान पूर्व बार डांसर रानी शुक्ला हत्या केस को सुलझाने के लिए दिया गया।
    पुलिस के मुताबिक, 40 वर्षीय रानी शुक्ला का शव मालाड-मालवनी इलाके के पुराने चर्च के पास झाड़ियों में अर्धनग्न अवस्था में मिला था।
    स्थानीय लोगों ने शव देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

    संबंधित क्राईम रिपोर्ट

    🔹 पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला हत्या का राज

    शुरुआत में पुलिस ने मामले को अपमृत्यु (Accidental Death) समझा, क्योंकि शव पर गहरी चोटों के निशान नहीं थे।
    लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हुआ कि महिला की गला दबाकर हत्या की गई थी
    इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    सूत्रों के अनुसार, महिला का कुछ लोगों से विवाद चल रहा था, जिसके बाद यह हत्या हुई।
    मालवनी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की मदद से संदिग्धों को तलाशा और मामले को कुछ ही दिनों में सुलझा लिया।

    🔹 पेशेवर जांच पर देवेंद्र भारती की सराहना

    सम्मान समारोह में विशेष आयुक्त देवेंद्र भारती ने मालवनी पुलिस की टीम की तारीफ करते हुए कहा कि

    “ऐसे अपराधिक मामलो में तुरंत कार्रवाई और पेशेवर जांच से जनता का पुलिस पर भरोसा कायम रहता है। मालवनी टीम ने साबित किया है कि तेज़ और सटीक जांच से न्याय दिलाया जा सकता है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान पूरी मुंबई पुलिस के लिए प्रेरणा है।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. मालवनी पुलिस को किस मामले में सम्मान मिला?
    मालाड-मालवनी में पूर्व बार डांसर रानी शुक्ला की हत्या का मामला सुलझाने पर पुलिस टीम को सम्मानित किया गया।
    Q2. सम्मान किसने दिया?
    मुंबई पुलिस के विशेष आयुक्त देवेंद्र भारती ने टीम को सम्मान पत्र देकर सराहा।
    Q3. रानी शुक्ला की मौत कैसे हुई थी?
    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि उनकी गला दबाकर हत्या की गई थी।
    Q4. जांच में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
    पुलिस निरीक्षक जीवन भातकुले और सहायक पुलिस निरीक्षक प्रथमेश विचारे की टीम ने केस सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
    Q5. क्या मामला पूरी तरह सुलझ गया है?
    हाँ, पुलिस ने केस सुलझाने का दावा किया है और संबंधित आरोपी की पहचान कर ली गई है।

  • HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    मुंबई के कांदिवली स्थित BMC के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को अपेंडिक्स की सर्जरी से मना कर दिया गया। मरीज को दो बार रेफर किया गया और बाद में नायर अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। जानिए क्या कहती है सरकार और कानून।

    मुंबई: कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को सर्जरी से इनकार किए जाने का मामला सामने आया है।
    37 वर्षीय यह व्यक्ति, जो मलवणी इलाके का रहने वाला है, गंभीर पेट दर्द और अपेंडिक्स की शिकायत के चलते 31 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था।
    अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में 7.5 mm का अपेंडिक्स और किडनी स्टोन की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने शुरू में आपातकालीन अपेंडिक्स सर्जरी की तैयारी की, लेकिन HIV रिपोर्ट आने के बाद सर्जरी रोक दी गई।

    मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर कुपर अस्पताल रेफर कर दिया गया — और रेफरल नोट में यह स्पष्ट लिखा गया कि वजह मरीज का HIV पॉज़िटिव होना है।

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    🔹 एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक — मरीज का दर्द बढ़ा

    कुपर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने रेफरल पर सवाल उठाए और मरीज को वापस लौटा दिया।
    इसके बाद शताब्दी अस्पताल ने फिर से मरीज को नायर अस्पताल रेफर किया, जहाँ अब उसका इलाज चल रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल जूनियर डॉक्टरों की गलती नहीं थी — क्योंकि मरीज को भर्ती करने और डिस्चार्ज करने दोनों में सीनियर डॉक्टरों की जानकारी शामिल थी।
    वर्तमान में मरीज नायर अस्पताल में ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।

    🔹 अस्पताल की सफाई में फंसी जान? शताब्दी अस्पताल ने दी सफाई

    शताब्दी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने भेदभाव के आरोपों से इनकार किया।
    उन्होंने बताया कि मरीज शुक्रवार को आया था, जबकि शनिवार को ऑपरेशन थिएटर (OT) की मासिक डीप क्लीनिंग निर्धारित थी।

    उनके अनुसार,

    “शनिवार को वार्ड के मरीजों की सर्जरी तय थी। HIV पॉज़िटिव मरीज की सर्जरी करने के बाद OT की पूरी स्टरलाइज़ेशन प्रक्रिया करनी होती है, जिससे बाकी 5 सर्जरी रद्द करनी पड़तीं। इसलिए हमने मरीज को नायर अस्पताल भेजा।”

    हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV पॉज़िटिव मरीज को इलाज से इनकार करना कानूनन अपराध है, और अस्पताल को यूनिवर्सल प्रिकॉशन के तहत इलाज करना चाहिए था।

    🔹 कानून क्या कहता है — HIV Act, 2017

    HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी HIV स्थिति के कारण इलाज से वंचित करना गैरकानूनी है।
    यह कानून मरीज की गोपनीयता की रक्षा करता है और

    • स्वास्थ्य सेवा,
    • रोजगार,
    • शिक्षा,
    • और आवास में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है।

    सभी अस्पतालों को ‘यूनिवर्सल प्रिकॉशन’ (universal precautions) का पालन करना अनिवार्य है, ताकि HIV-संक्रमित मरीजों को भी सामान्य मरीजों की तरह ही इलाज मिल सके।

    🔹 प्रशासनिक और नैतिक सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने BMC के अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    • क्या OT क्लीनिंग का बहाना वास्तव में देरी का कारण था या भेदभाव का मामला?
    • क्या BMC के अस्पताल HIV-पॉज़िटिव मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हैं?
    • और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी?

    स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं ने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच की मांग की है।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. क्या अस्पताल HIV मरीज का इलाज मना कर सकता है?
    नहीं, HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत इलाज से इनकार करना अवैध है।
    Q2. मरीज की हालत अभी कैसी है?
    वह फिलहाल नायर अस्पताल में भर्ती है और ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।
    Q3. क्या शताब्दी अस्पताल ने भेदभाव स्वीकार किया?
    अस्पताल प्रशासन ने इनकार किया, उन्होंने कहा कि OT की डीप क्लीनिंग के कारण सर्जरी संभव नहीं थी।
    Q4. क्या सरकार इस मामले की जांच करेगी?
    संभावना है कि BMC और राज्य स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की जाएगी, क्योंकि यह कानून का उल्लंघन है।
    Q5. क्या HIV मरीजों को विशेष सुरक्षा दी जाती है?
    हाँ, कानून के तहत मरीज की पहचान गोपनीय रखनी होती है, और सभी डॉक्टरों को यूनिवर्सल सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है।

  • कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड में प्रभारी अभियंता अभय जगताप पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और विधायक के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने से लोग नाराज़ हैं। सवाल उठ रहा है — क्या कानून से ऊपर हैं कार्यकारी अभियंता एवं डी. ओ. अभय जगताप?

    मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) में स्थित मनपा आर/दक्षिण वार्ड कार्यालय में तैनात (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
    निवासियों का आरोप है कि वार्ड के अंतर्गत आने वाले सागवाडी आदिवासी पाड़ा, समाज मंदिर के पास अवैध निर्माण होने के बावजूद, जगताप कार्रवाई से बच रहे हैं।

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    लोगों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक शौचालय और बोरिंग के लिए मांग की थी, जिसको लेकर 10 लाख रुपये सरकारी फंड भी पास किया गया। लेकिन उस पर कुछ लोगों ने तीन अवैध कमरे बना लिए। विधायक और सहाय्यक आयुक्त के आदेश के बाद भी तोड़क कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नागरिकों में नाराज़गी है।

    सार्वजनिक शौचालय के लिए दी गई भूमि पर हुआ कब्ज़ा

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है।
    इसी वजह से गुरुचरण की भूमि पर शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया गया था।
    लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर वहाँ तीन अवैध रूम बना लिए।

    नागरिकों ने इस संबंध में तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे को पत्र लिखा और अवैध निर्माण हटाने की मांग की।
    इसके साथ ही, विधायक योगेश सागर ने भी मनपा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया।

    अभय जगताप पर मिलीभगत के आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।
    आरोप है कि उन्होंने अवैध निर्माणकर्ताओं से पैसे लेकर कार्रवाई रोक दी है।
    स्थानीयों के अनुसार, जगताप का रवैया मनमाना है और वे कहते हैं —

    “मेरी मर्जी है, कोई काम करूं या न करूं। मेरा क्या बिगाड़ लेंगे अधिकारी या विधायक?”

    यह बात न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाती है बल्कि मनपा की साख पर भी सवाल उठाती है।

    सहाय्यक आयुक्त और विधायक के आदेशों की अनदेखी

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    सूत्रों के मुताबिक, विधायक योगेश सागर ने खुद सहाय्यक आयुक्त से फोन पर बात कर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
    अभय जगताप का कहना है कि यह मामला अब वर्तमान सहाय्यक अभियंता शिशिर खोखले या पूर्व अभियंता ब्रह्मणकार को देखना चाहिए। जबकि ब्रह्मणकर का तबादला हो चुका है।
    हालांकि जगताप का यह बयान जिम्मेदारी से बचने की कोशिश मानी जा रही है।

    स्थानीय समाज का विरोध — कार्रवाई की मांग

    इस पूरे मामले में आदिवासी समाज और स्थानीय महिलाएं खुलकर विरोध में उतर आई हैं।
    चंदू बंजारा, गोपाल, अजय, कमल काली, दिनेश और कई अन्य लोगों ने पत्रकार को बुलाकर आदिवासी समाज मंदिर के पास बने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी बात रखी।
    उनका कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो वे मनपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
    इसी सिलसिले में अखिल भारतीय मानवाधिकार नागरिक विकल्प के मुंबई उपाध्यक्ष राजेश किसन मंजाळ से मुलाकात की तो उन्होंने और भी चौकाने वाला खुलासा किया मनपा आर/ दक्षिण विभाग के इमारत व कारखाना विभाग की ओर से शिकायत क्रमांक RS/022/14- 12 – 2024/333 से संबंधित राजेश पवार के खिलाफ नोटिस क्रमांक RS/DO1RS/022/351-MMC ACT/RS333NO1/16-12-2024 जारी किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने यहां रिश्वतखोरी की हुई है।

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    निवासियों ने मांग की है कि

    “सबसे पहले भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और फिर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चले।”

    कनिष्ठ अभियंता पर भी सवाल — ‘जगताप से क्यों डरते हैं अधिकारी?’

    सूत्र बताते हैं कि जब से अभय जगताप प्रभारी डी.ओ. बने हैं, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को धमकाते और दबाव डालते हैं।
    कई अधिकारी उनके खिलाफ बोलने से डरते हैं।
    स्थानीयों का कहना है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता नितिन ठाकुर ही इस मामले की सच्चाई बता सकते हैं कि आखिर “जगताप का डर” इतना क्यों है? लेकिन उनका भी तबादला हो गया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    A1. कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड, पटेल नगर रोड नंबर 4 का मामला है।
    Q2. विवाद किस बात को लेकर है?
    A2. नागरिकों द्वारा दी गई भूमि पर अवैध निर्माण हुआ है, जिस पर कार्रवाई नहीं की गई।
    Q3. किस अधिकारी पर आरोप लगे हैं?
    A3. प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर।
    Q4. क्या विधायक और मनपा अधिकारी इस मामले में शामिल हुए?
    A4. हाँ, विधायक योगेश सागर और तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे दोनों ने कार्रवाई का आदेश दिया था।
    Q5. नागरिकों की क्या मांग है?
    A5. अभय जगताप के खिलाफ जांच और दंडात्मक कार्रवाई, साथ ही अवैध निर्माण का तुरंत तोड़फोड़ अभियान।