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  • Kandivali West में BJP MLA Yogesh Sagar का सरप्राइज चेक, गांजा-हुक्का मटेरियल बिक्री पर 5 केस दर्ज

    Kandivali West में BJP MLA Yogesh Sagar का सरप्राइज चेक, गांजा-हुक्का मटेरियल बिक्री पर 5 केस दर्ज

    कांदिवली वेस्ट के महावीर नगर में BJP विधायक योगेश सागर ने अचानक निरीक्षण किया। गांजा, हुक्का मटेरियल और बैन तंबाकू की खुलेआम बिक्री के आरोप। पुलिस ने 5 मामले दर्ज किए, पहले 99 पान स्टॉल्स पर भी कार्रवाई।

    मुंबई: शहर के पश्चिमी उपनगर कांदिवली वेस्ट में बैन तंबाकू, गांजा और हुक्का मटेरियल की खुलेआम बिक्री की शिकायतों के बीच BJP विधायक Yogesh Sagar ने गुरुवार को अचानक निरीक्षण किया। महावीर नगर इलाके में तीन पान दुकानों की जांच के दौरान कई प्रतिबंधित सामान मिलने का दावा किया गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने पांच अपराध दर्ज किए हैं।

    🔎 जांच के दौरान क्या मिला?

    विधायक योगेश सागर ने आरोप लगाया कि:

    • बैन तंबाकू उत्पाद (गुटखा, लूज तंबाकू)
    • हुक्का से जुड़ा मटेरियल
    • संदिग्ध नशीला पाउडर
    • अवैध गांजा सप्लाई

    खुलेआम बेचे जा रहे थे। उनका कहना है कि कुछ दुकानदार पड़ोसी दुकानों में प्रतिबंधित सामान छिपा रहे थे।

    🚔 पुलिस का बयान

    स्थानीय पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जनवरी से फरवरी के बीच, गुरुवार की कार्रवाई को छोड़कर, 99 पान स्टॉल्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनमें से 18 अवैध स्टॉल्स को तोड़ दिया गया।

    गुरुवार की कार्रवाई में 5 केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पहले इन दुकानों से मादक पदार्थ नहीं मिले थे, अधिकतर कार्रवाई गुटखा और प्रतिबंधित तंबाकू पर हुई थी।

    🏛️ राजनीतिक दबाव और नाराजगी

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में इलाके के ही एक अन्य विधायक Sanjay Upadhyay ने भी:

    • अवैध हुक्का पार्लर
    • खुले में शराबखोरी
    • देर रात तक चलने वाले कैफे
    • ट्रैफिक नियम तोड़ते शेयर ऑटो

    को लेकर शिकायत उठाई थी।

    लगातार आ रही शिकायतों से साफ है कि सत्ताधारी दल के विधायकों में जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

    🗣️ MLA Yogesh Sagar का आरोप

    योगेश सागर ने कहा, “लोकल लेवल पर सबको पता है क्या चल रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। कानून तोड़ने वालों में डर नहीं है। पुलिस को सख्त कदम उठाने चाहिए।”

    उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आसपास की दुकानें भी प्रतिबंधित सामान छिपाने में मदद करती पाई गईं, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।

    📌 सरकार की नीति बनाम जमीनी हकीकत

    मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis पहले ही अवैध हुक्का, तंबाकू और ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं।

    लेकिन लगातार हो रही विधायकों की शिकायतें इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि नीति और जमीनी अमल के बीच अंतर है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: यह कार्रवाई कहां हुई?
    महावीर नगर, कांदिवली वेस्ट में तीन पान दुकानों पर।

    Q2: कितने केस दर्ज हुए?
    पुलिस ने पांच मामले दर्ज किए हैं।

    Q3: पहले भी कार्रवाई हुई थी?
    जनवरी-फरवरी में 99 पान स्टॉल्स पर कार्रवाई और 18 को हटाया गया।

    Q4: क्या मादक पदार्थ मिले?
    पुलिस के अनुसार पहले इन दुकानों से मादक पदार्थ नहीं मिले थे, अधिकतर कार्रवाई बैन तंबाकू पर थी।

  • BMC चुनाव 2025: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, पुराने कार्यकर्ता फिर पीछे

    BMC चुनाव 2025: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, पुराने कार्यकर्ता फिर पीछे

    BMC चुनाव 2025-26 के नामांकन में बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी में परिवारवाद हावी नजर आ रहा है। नेताओं के बेटे-बेटी, पत्नी और रिश्तेदारों को टिकट, पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 के लिए नामांकन की आखाे-सीमा खत्म होने से ठीक पहले राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूचियां जारी करना शुरू कर दिया है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में एक बार फिर परिवारवाद छाया हुआ है। बीजेपी, शिवसेना (UBT), कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी ने सांसदों, विधायकों और पूर्व नगरसेवकों के बेटे-बेटी, पत्नी, भाई-बहन और रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

    नामांकन में ‘परिवार पहले’ की राजनीति

    बीएमसी के 227 वार्डों के लिए जैसे-जैसे नाम सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस चुनाव में भी राजनीतिक विरासत को प्राथमिकता दी गई है।
    कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने सालों तक पार्टी के लिए काम किया, लेकिन टिकट ऐन मौके पर नेताओं के परिजनों को दे दिया गया।

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    बीजेपी की सूची में रिश्तेदारों की भरमार

    बीजेपी ने भी इस बार कई चर्चित नामों को दोहराया है—

    • आकाश पुरोहित, पूर्व विधायक राज पुरोहित के बेटे
    • नील सोमैया, पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बेटे
    • संगीता शर्मा, पूर्व नगरसेवक द्यानमूर्ति शर्मा की पत्नी
    • मकरंद नरवेकर, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर के भाई (वार्ड 226, कोलाबा)
    • हर्षिता नरवेकर, राहुल नरवेकर की बहन (वार्ड 227)

    दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी सांसद धनंजय महाडिक ने हाल ही में बयान दिया था कि पार्टी सांसदों और विधायकों के बच्चों या जीवनसाथियों को टिकट नहीं देगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

    शिवसेना (UBT) में भी परिवारवाद जारी

    उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) भी इस ट्रेंड से अछूती नहीं रही—

    • अंकित प्रभु, विधायक सुनील प्रभु के बेटे (गोरेगांव, वार्ड 54)
    • सुप्रदा फातरपेकर, पूर्व विधायक प्रकाश फातरपेकर की बेटी (चेंबूर, वार्ड 150)
    • सोनम जमसुतकर, विधायक मनोज जमसुतकर की पत्नी (वार्ड 210)
    • विठ्ठल लोकरें और उनकी पत्नी सुनंदा लोकरें (मानखुर्द-शिवाजीनगर)
    • जिशान मुल्तानी, पूर्व नगरसेवक चेंजेज मुल्तानी के बेटे
    • सबा हारून खान, विधायक हारून खान की बेटी
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    अजित पवार गुट की NCP और कांग्रेस भी पीछे नहीं

    • एनसीपी (अजित पवार गुट) ने विधायक नवाब मलिक के परिवार से उनके भाई कैप्टन मलिक, बहन डॉ. सईदा खान और बुशरा परवीन मलिक को टिकट दिया है।
    • कांग्रेस ने मालाड पश्चिम के वार्ड 34 से विधायक असलम शेख के बेटे हैदर अली शेख को मैदान में उतारा है।

    BMC चुनावी टिकट न मिलने से पार्टी छोड़ने की होड़

    टिकट बंटवारे से नाराज कई पुराने नगरसेवक अब पार्टी बदलने लगे हैं—

    • एमएनएस नेता स्नेहल जाधव ने दादर से टिकट न मिलने पर इस्तीफा दे दिया, उनके शिंदे गुट में जाने की चर्चा है।
    • शरद पवार गुट की मुंबई अध्यक्ष राखी जाधव बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं और घाटकोपर से टिकट मिलने की संभावना है।

    बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) का सीट शेयरिंग फॉर्मूला

    बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना इस बार साथ मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ेंगी—

    • बीजेपी: लगभग 128 सीटें
    • शिवसेना (शिंदे): लगभग 79 सीटें
    • बाकी सीटों पर स्थानीय समीकरणों के आधार पर फैसला होगा

    हालांकि दोनों दल अपनी-अपनी सूची अलग-अलग जारी कर सकते हैं।

    ये पूर्व नगरसेवक भी मैदान में

    • किशोरी पेडणेकर, पूर्व मेयर (शिवसेना UBT) – वार्ड 199
    • तेजस्वी गोसालकर, अब बीजेपी से – वार्ड 2 (दहिसर)
    • विनोद मिश्रा, पूर्व बीजेपी नगरसेवक – मालाड
    • रवि राजा, पूर्व कांग्रेस नेता, अब बीजेपी से – वार्ड 185

    बीएमसी चुनाव में परिवारवाद क्यों बना मुद्दा?

    मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी सिर्फ नगर निगम नहीं, बल्कि देश की सबसे अमीर नगरपालिका है। ऐसे में टिकट वितरण में पारदर्शिता और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इस बार भी वही सवाल उठ रहा है—क्या जनता नाम देखकर वोट देगी या काम देखकर?


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी चुनाव 2025 में परिवारवाद क्यों चर्चा में है?
    क्योंकि लगभग सभी प्रमुख दलों ने नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है।

    Q2. सबसे ज्यादा परिवारवाद किस पार्टी में दिखा?
    बीजेपी, शिवसेना (UBT), एनसीपी (अजित पवार) और कांग्रेस—चारों में यह ट्रेंड देखने को मिला।

    Q3. टिकट न मिलने से किसे नुकसान हो सकता है?
    पुराने जमीनी कार्यकर्ताओं को, जो अब पार्टी छोड़ने या बगावत की राह पर हैं।

    Q4. क्या इससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ेगा?
    संभावना है, क्योंकि मुंबई के कई इलाकों में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की पकड़ अहम होती है।

  • BMC चुनाव से पहले भाजपा में तकरार? किरीट सोमैया ने मंत्री लोढा को लगाई फटकार

    BMC चुनाव से पहले भाजपा में तकरार? किरीट सोमैया ने मंत्री लोढा को लगाई फटकार

    मुंबई महापौर पद को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद उभरते दिख रहे हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढा के “भाजपा का महापौर” बयान पर पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“कसली कॉलर टाइट? भाजपा महापौर की रेस में नहीं है।”

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नज़दीक आते ही राजनीति गर्माती जा रही है। एक तरफ भाजपा नेता जहां BMC में सत्ता स्थापित करने की बात कर रहे हैं, वहीं भाजपा के भीतर ही इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढा द्वारा “मुंबई में भाजपा का महापौर बनेगा” इस दावे के बाद पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने उन्हें कड़े शब्दों में फटकार लगाई और कहा कि “भाजपा महापौर पद की लड़ाई नहीं लड़ रही है।” सोमैया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस बयान पर ध्यान देने की बात कही।

    मुंबई में महापौर पद पर सियासी बयानबाज़ी तेज़

    राज्य के 29 नगर निगम चुनावों की घोषणा से पहले ही मुंबई में राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। महायुती के नेताओं का दावा है कि इस बार मुंबई में उनका महापौर बनेगा।
    वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) भी लगातार यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि “मुंबई में फिर से शिवसेना का महापौर आएगा।”

    इसी माहौल में मंत्री मंगलप्रभात लोढा के बयान ने राजनीतिक हलचलों को और हवा दे दी।

    मंगलप्रभात लोढा का बयान: “भाजपा का महापौर बनेगा, कॉलर टाइट होगा!”

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री लोढा ने कहा था—

    “मुंबई महानगरपालिका में जब भाजपा का महापौर चुना जाएगा, तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उसके शपथ ग्रहण समारोह में आएंगे, और उस वक्त आपकी और मेरी कॉलर टाइट होगी!”

    उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में कई दल फडणवीस के संकेतों पर चलते हैं।

    उनके इस बयान के बाद से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा अकेले महापौर पद का दावा कर रही है।

    सैय्या—”किस तरह का कॉलर टाइट? बीजेपी मेयर पद का चुनाव नहीं लड़ रही है!”

    मंगलप्रभात लोढा के बयान पर भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने नाराज़गी जताई।
    मीडिया से बातचीत में सोमैया ने कहा—

    “भाजपा महापौर पद के लिए लड़ ही नहीं रही। जो नेता महापौर पद की बात कर रहे हैं, उन्हें मैंने भी बताया है और फडणवीस जी को भी कहा है कि उन्हें रोको। कैसा कॉलर टाइट? कैसा महापौर पद?”

    सोमैया ने स्पष्ट किया कि भाजपा का ध्यान महापालिका में “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” और विकास पर है, न कि महापौर की कुर्सी पर।

    महा विकास अघाड़ी और ठाकरे गुट पर भी हमला

    मीडिया से बातचीत के दौरान सोमैया ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को भी आड़े हाथों लिया।
    उन्होंने कहा—

    • “कोविड के दौरान ठाकरे सेना कमाई कर रही थी।”
    • “खिचड़ी घोटाला, रेमडेसिविर घोटाला—ये सब मुंबई को लूटने की कहानी है।”
    • “हमारा लक्ष्य BMC को भ्रष्टाचार से मुक्त कराकर मुंबई का विकास करना है।”

    उनके अनुसार भाजपा—चाहे फडणवीस हों या मोदी—पिछले 25 वर्षों से “लूट” का आरोप झेल रही मुंबई को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुंबई में क्या भाजपा एकजुट नहीं? उठने लगे सवाल

    लोढा का “भाजपा का महापौर” वाला दावा और सोमैया की “भाजपा महापौर पद की लड़ाई नहीं लड़ रही” वाली प्रतिक्रिया—दोनों ने मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—

    क्या BMC चुनाव में भाजपा की रणनीति स्पष्ट नहीं है?

    या फिर पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी है?

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि BMC चुनाव 2025 महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
    इसलिए भाजपा चाहती है कि हर बयान बेहद सोच–समझकर दिया जाए।


    FAQ सेक्शन

    1. महापौर पद को लेकर भाजपा में विवाद क्यों दिख रहा है?

    मंत्री लोढा ने कहा कि “भाजपा का महापौर बनेगा”, जबकि सोमैया ने कहा कि भाजपा महापौर की रेस में नहीं है। इसी वजह से मतभेद की चर्चा शुरू हुई।

    2. भाजपा की आधिकारिक रणनीति क्या है?

    सोमैया के मुताबिक, भाजपा का मुख्य फोकस महापालिका को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और विकास तेज़ करना है।

    3. BMC चुनाव कब होने की उम्मीद है?

    राज्य चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा कर सकता है। 29 नगर निगमों के चुनाव एक साथ होने की संभावना है।

    4. शिवसेना (उद्धव गुट) का दावा क्या है?

    ठाकरे गुट का दावा है कि वे फिर से मुंबई में महापौर बनाएंगे।

  • BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस की अकेले लड़ने की घोषणा से महाविकास आघाड़ी (MVA) में असहजता बढ़ गई है। शिवसेना (UBT) की मनसे से नज़दीकी को लेकर कांग्रेस की असहमति सामने आई, जबकि एनसीपी (SP) गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव को लेकर कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले ने महाविकास आघाड़ी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना (UBT) की मनसे के साथ बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियां उनके उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) कांग्रेस से पुनर्विचार की अपील कर रही है, जबकि एनसीपी (शरद पवार) मनसे को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की पक्षधर है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी मनपा चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

    कांग्रेस के फैसले से MVA में हलचल

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साफ कहा है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। इससे MVA में असहजता बढ़ी है, क्योंकि गठबंधन का मकसद भाजपा को रोकना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले लड़ने से वोटों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को सीधी बढ़त मिल सकती है।

    मनसे को लेकर कांग्रेस की बड़ी चिंता

    कांग्रेस की असहमति की सबसे बड़ी वजह है—
    🔹 शिवसेना (UBT) और मनसे की बढ़ती समीपता
    🔹 उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक का संभावित नुकसान

    कांग्रेस का मानना है कि मनसे के साथ जुड़ाव उसकी विचारधारा के विपरीत है, क्योंकि मनसे पहले उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जानी जाती रही है।

    कांग्रेस में भी दो धड़े, राय में मतभेद

    कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है।
    एक धड़ा — स्थानीय समीकरण के आधार पर मनसे के साथ गठबंधन का समर्थक
    दूसरा धड़ा — मनसे के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन के खिलाफ

    मुंबई के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को जल्द स्पष्ट रुख लेना होगा, वरना गैर-मराठी और गैर-हिंदू वोटों का विभाजन भाजपा के लिए रास्ता आसान बना देगा।

    एनसीपी (SP) एकता के पक्ष में

    एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन की मजबूती के लिए MNS को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की वकालत कर रही है। इसी संदर्भ में वर्षा गायकवाड़ की टीम ने शरद पवार से मुलाकात भी की है, लेकिन कांग्रेस अपने निर्णय पर कायम है।

    शिवसेना (UBT) ने किया पुनर्विचार का आग्रह

    उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना कांग्रेस को साथ रखने की कोशिश जारी रखे हुए है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा—
    🔹 “मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की नाराज़गी व्यक्तिगत मामला हो सकता है।”
    🔹 “जनता चाहती है कि शिवसेना और मनसे साथ आएं।”

    दूसरी ओर, मनसे ने MVA में शामिल होने से इनकार करते हुए कांग्रेस को “अमीबा” कहा, जिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए “गिरगिट” जैसी टिप्पणी की।

    बीएमसी चुनाव — बड़ा राजनीतिक समीकरण

    • राज्य की 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को
    • बीएमसी के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना
    • वर्तमान हालात में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है
    • कांग्रेस के अकेले उतरने से विपक्ष का वोट बैंक टूट सकता है

    FAQ

    प्रश्नउत्तर
    क्या कांग्रेस MVA से अलग हो रही है?नहीं, गठबंधन बरकरार है, लेकिन बीएमसी चुनाव कांग्रेस स्वतंत्र रूप से लड़ना चाहती है।
    कांग्रेस मनसे के साथ क्यों नहीं है?कांग्रेस का कहना है कि मनसे के पुराने रुख से उसके परंपरागत वोटरों को नुकसान हो सकता है।
    क्या विपक्षी वोट बंटेंगे?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
    क्या अंतिम निर्णय बदल सकता है?शिवसेना (UBT) लगातार आग्रह कर रही है, लेकिन इस समय कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग है।
  • मुंबई बीएमसी चुनाव की तारीख़ों का आज ऐलान संभव! महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव पर दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस

    मुंबई बीएमसी चुनाव की तारीख़ों का आज ऐलान संभव! महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव पर दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस

    महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद बीएमसी समेत सभी स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा आज होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें चुनाव की तारीख़ें घोषित की जा सकती हैं।

    मुंबई: 4 नवंबर महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद बीएमसी (BMC) समेत राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा आज होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission – SEC) ने आज दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे औपचारिक रूप से चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर सकते हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, घोषणा के तुरंत बाद आचार संहिता (Model Code of Conduct) पूरे राज्य में लागू हो जाएगी।

    🏙️ तीन चरणों में होंगे महाराष्ट्र के निकाय चुनाव

    राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस बार स्थानीय निकाय चुनाव तीन चरणों में कराए जाने की संभावना है।

    1️⃣ पहला चरण: 246 नगरपालिका परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनाव होंगे।
    2️⃣ दूसरा चरण: जिल्हा परिषद (Zilla Parishad) और पंचायत समितियों के लिए मतदान होगा।
    3️⃣ अंतिम चरण: बड़े नगर निगमों — मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे और नासिक के चुनाव होंगे।

    संभावना है कि पहले चरण का मतदान नवंबर के अंत तक कराया जाएगा, यानी चुनावी प्रक्रिया इसी हफ्ते शुरू हो सकती है।

    🏛️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार समयसीमा तय

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, जिन निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनके चुनाव 31 जनवरी 2026 से पहले संपन्न कराना अनिवार्य है।
    इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग पर समय पर चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है।

    इस चुनावी प्रक्रिया में शामिल होंगे —

    • 289 नगरपालिका परिषदें
    • 32 जिल्हा परिषदें
    • 331 पंचायत समितियाँ
    • 29 नगर निगम (Municipal Corporations)

    यह हाल के वर्षों में महाराष्ट्र का सबसे बड़ा नागरिक चुनाव होगा।

    ⚡ राजनीतिक दलों के लिए लिटमस टेस्ट

    बीएमसी चुनाव हमेशा से महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रहे हैं।
    इस बार का नतीजा 2026 विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
    राज्य के प्रमुख दल —
    भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (शिंदे गट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गट), कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गट) — सभी इस चुनाव को अपनी साख से जोड़कर देख रहे हैं।

    बीएमसी पर फिलहाल प्रशासक का शासन है, और अब चुनावी बिगुल बजते ही मुंबई की सियासत में गर्मी तेज़ होना तय है।

    🕓 चुनाव कार्यक्रम का ऐलान आज शाम

    राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे आज शाम 4 बजे प्रेस से बातचीत करेंगे।
    सूत्रों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही चुनावी अधिसूचना जारी की जाएगी और पूरे महाराष्ट्र में चुनावी माहौल बन जाएगा।


    FAQ सेक्शन

    प्रश्न 1: बीएमसी और महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव कब होंगे?
    👉 राज्य निर्वाचन आयोग आज शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारीख़ों का ऐलान करेगा।
    प्रश्न 2: कितने चरणों में होंगे चुनाव?
    👉 तीन चरणों में — नगरपालिका परिषद, पंचायत समितियाँ और बड़े नगर निगम (जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर)।
    प्रश्न 3: क्या आज से आचार संहिता लागू होगी?
    👉 हाँ, घोषणा के तुरंत बाद आचार संहिता लागू होने की संभावना है।
    प्रश्न 4: कौन से शहर अंतिम चरण में रहेंगे?
    👉 मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे और नासिक।
    प्रश्न 5: यह चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
    👉 क्योंकि यह 2026 विधानसभा चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों के लिए बड़ा टेस्ट साबित होगा।

  • उत्तर प्रदेश बना अपराधों का प्रदेश।कहीं नहीं है कानून का शासन।

    उत्तर प्रदेश बना अपराधों का प्रदेश।कहीं नहीं है कानून का शासन।

    क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में अपराधियों का खात्मा हो गया है? या अपराधों का राज्य स्थापित हो गया है? या हंटर सिर्फ विरोधियों पर चला?

    न्यूज़ डेस्क
    नई दिल्ली:
    सत्ता जब मदान्ध हो जाती है तो वह जनसरोकार से दूर हो जाती है। भले ही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार लाख दावे करती रहे कि उसने माफिया राज खत्म कर दिया है। अब अपराधी गुंडे गले में तख्ती लगाए कि वे सरेंडर करने आ रहे। गोली मत मारिए कहा जाए लेकिन सच तो यह है कि जाति विशेष के माफियाओं के ऊपर हाथ ही नहीं डाला गया कभी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.

    जनता के पैसों की बर्बादी

    हां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरुद्ध सारे आपराधिक मामले वापस जरूर ले लिए। शासन का हंटर केवल विरोधियों पर चला। घर बुलडोजर से केवल विरोधियों के गिराए गए। उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन का अपराधियों में तनिक भी भय नहीं है, क्योंकि सत्ता चुनावी फायदे के लिए कांवड़ यात्रियों पर जनता के पैसे बर्बाद करके हेलीकॉप्टर से फूल बरसा रही है। जिसमे प्रशासन भी शामिल है।

    कांवडियों का उत्पात

    कांवड़ियों के द्वारा उत्पात मचाए गए। ऑटो तोड़े, कार तोड़े, ड्राइवरों को पीटा, ढाबे में खाना खाकर पैसे देने के बदले तोड़फोड़ की गई। पुलिस मूक दर्शक बनी रही। शायद ऊपर से आदेश आया था। यहां तक कि खाकी वर्दी में पुलिस अधिकारी कांवड़ उठाते देखे गए। आईएएस भी अपनी आस्था का प्रदर्शन करते दिखाई दिए ताकि मुख्यमंत्री की कृपा बनी रहे।

    महिलाओं के बाथरूम मे लगे कैमरे

    शासन प्रशासन की जन उपेक्षा का ही परिणाम हुआ कि यूपी में अपराधों में वृद्धि देखी गई।यहां तक कि योगी जी के चुनाव क्षेत्र गृह जिले गोरखपुर में ही तीन सौ की जगह छः सौ पुलिस ट्रेनी महिलाओं को नरकीय स्थिति में रहने को बाध्य किया गया। उनके बाथरूम में सीसीटीवी कैमरे लगाकर वीडियो बनाए जाते रहे जिस कारण ट्रेनी लड़कियों को विरोध करने को वाद्य होना पड़ा। नीचता की हद तो तब हो गई जब कुंवारी लड़कियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए गए। गोरखपुर में ही अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया कि पुलिस वाले को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया।

    अराजकता की हद

    इसी में चंद अपराधों की फेहरिस्त देखिए। लखनऊ में एक लाडले को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। मृत समझ कर मरने के लिए छोड़ दिया गया। तहसील के अंदर ही पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। संत कबीर नगर में सात साल की बेटी के सामने मां की हत्या हुई। महिला की अंतड़िया निकालने वाले का हाफ एनकाउंटर किया गया। दरोगा की पिस्टल छीनकर आरोपी ने फायरिंग की।

    पुलिस की निगरानी

    कानपुर पिटाई के डर से छठी के छात्र ने खुद को फांसी लगा ली। कानपुर के टीचर ने उसकी चेन छीन ली थी। धर्मपरिवर्तन करने वाले छांगुर ने कहा जब्त की गई संपत्ति उसकी नहीं नसरीन से पूछो। लखनऊ के अंटास मॉल में पुलिस के संरक्षण में रेस्टोरेंट के लाइसेंस पर चलाया जाता है हुक्का बार। पुलिस नीचे बैठी रहती है। सीसीटीवी से 24 घंटे होती रहती है निगरानी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.

    अराजकता की दूसरी तस्वीर

    बाराबंकी में 28 साल की महिला सिपाही की हत्या कर दी गई। चेहरा जलाया गया। कौवे नोच रहे थे शव। आधी रात को घर में घुसकर किसान की लखनऊ में ही गला रेत कर हत्या की गई। डिम्पल के ड्रेस पर बोलने वाले मौलाना को अखिलेश के योद्धाओं ने कूट दिया। बीजेपी पोस्टर लगवा कर पूछ चुकी थी कि जो अपनी पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका दूसरे की इज्जत कैसे बचाएगा?

    पुलिस का आम जनता में खौफ

    बीजेपी के संगीत सोम ने मंदिर का गेट तुड़वा दिया। अब दारोगा हेलीकॉप्टर में बैठकर की एंट्री पुलिस ने धड़पकड़ की शूटिंग की। देवरिया में नौ साल के बच्चे की तंत्र मंत्र के चक्कर में हत्या कर बगीचे में दफन किया गया इस मामले में पुलिस कांस्टेबल सहित तीन हुए गिरफ्तार। पति के साथ झगड़े के बाद पत्नी ने बुलाई पुलिस तो पति तीन मंजिले से कूद गया। पुलिस के हाथ पांव फूले। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने पैर पकड़ कर मांगी माफी

    बुलंदशहर हिंसा में बीजेपी विधायक सहित 38 लोगों को दोषी ठहराया गया। इंस्पेक्टर की हत्या कर चौकी फूंक दी गई थी। मुकदमा रामवीर पर सजा राजवीर को। मैनपुरी में दरोगा ने पैर पकड़कर मांगी माफी क्यों कि 17 साल बाद बेगुनाह छुटे थे राजवीर। यह है यूपी की पुलिस। बेकसूरों को भेजती है जेल और यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार कहतीं है अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.

  • Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    महाराष्ट्र की सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त कानून पास कर दिया है। इसके तहत नियम का पालन नही किए जाने पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों के तहत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने महाराष्ट्र के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम तय किए हैं। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    सोशल मीडिया पोस्ट पर लगी रोक

    महाराष्ट्र की महायुति सरकार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के जानकारी दायक सोशल मीडिया पोस्ट कभी कभार लोगों में भ्रम या गलत संदेश भी फैला सकता है। इसकी जिम्मेदारी को लेकर सरकार अब सख्त हो गई है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक नही लगाया गया है। सिर्फ पोस्ट करते समय ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    क्या करें क्या ना करें ?

    सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार को एक सरकारी आदेश जारी कर यह नियम सार्वजनिक रुप से प्रसारित कर दिया है। इसमें बताया गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट कर सकते हैं? और क्या नहीं? आदेश में यह भी कहा गया है कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1979 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    सोशल मीडिया से होगी समस्या

    आदेश में जानकारी देते हुए, कहा गया है, कि “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आसान उपयोग से पलक झपकते ही दुनिया के किसी भी कोने में जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इसकी अदभुत क्षमता और एक क्लिक में कई लोगों तक बात पहुंचा देने की सुविधा के साथ कुछ खतरे भी सामने आए हैं—जैसे गोपनीय जानकारी का लीक होना, झूठी या भ्रामक जानकारी फैलना और इसके साथ ही बड़ी दिक्कत वाली बात यह है कि एक बार पोस्ट की गई जानकारी को हटाने के लिए कई नियमों का पालन करना पडता है इसकी सीमाएं तय की गई है। सरकारी विभाग के लिए दिक्कत हो सकती है।”

    आदेश में आगे कहा गया, कि “यह भी देखा गया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकार की नीतियों, राजनीतिक घटनाओं या कुछ व्यक्तियों की आलोचना के लिए किया जा रहा है, जो सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।” Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    नए नियमों की जानकारी

    सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वे राज्य सरकार या देश से जुड़ी किसी भी नीति की आलोचना करने से बचें और सोशल मीडिया का उपयोग “सावधानी और जिम्मेदारी” के साथ करें। उन्हें कोई आपत्तिजनक या मानहानि करने वाली सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा गया है।

    खुद का प्रचार

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी यह ज़रूर बता सकते हैं, कि किसी योजना या प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने या उनके विभाग ने क्या प्रयास किए हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि वे खुद का प्रचार न करें। सरकार की किसी योजना या प्रोजेक्ट से जुड़ी पहले से स्वीकृत जानकारी केवल वही व्यक्ति साझा कर सकता है जिसे इसके लिए अधिकृत किया गया है। इसका मकसद आम जनता की भागीदारी को बढ़ाना है।

    सरकारी महकमों का इस्तेमाल

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारी अपने निजी और आधिकारिक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट बना सकते हैं। इसके अलावा, जब किसी अधिकारी का ट्रांसफर हो जाए, तो उन्हें अपने आधिकारिक अकाउंट को तुरंत संबंधित विभाग के प्रभारी को सौंप देना होगा। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है, कि अधिकारी और कर्मचारी अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी आधिकारिक पदनाम, सरकारी प्रतीक (लोगो), यूनिफॉर्म, सरकारी गाड़ी या निवास जैसी संपत्तियों से जुड़ी फोटो, वीडियो या रील न डालें।

    अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय समन्वय के लिए व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे सोशल मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें बिना अनुमति के कोई भी गोपनीय दस्तावेज़, चाहे वह पूरा हो या आंशिक, अपलोड, फॉरवर्ड या साझा करने से बचने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन ऐप्स या प्लेटफॉर्म्स को सरकार ने बैन किया है, उनका उपयोग बिल्कुल न किया जाए।

    यह आदेश सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा — चाहे वे स्थायी हों, अनुबंध पर हों या सरकार के बाहर से नियुक्त किए गए हों। यह नियम उन सभी कर्मचारियों पर भी लागू होंगे जो सरकारी कंपनियों, उपक्रमों, अतिथि सेवाओं या स्थानीय निकायों में काम कर रहे हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

  • मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रही सरकार

    मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रही सरकार

    • नितीश कुमार के वोटरों में नाराजगी
    • नायडू के वोटर्स में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय
    • दिसंबर में बिहार राज्य का विधानसभा चुनाव
    • राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल
    • वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिंदू मतों को लुभाने की कोशिश

    मुंबई: अभी दो साल भी नहीं बैठे कि एन डी ए सरकार में बीजेपी को समर्थन देने वाली पार्टी जे डी यू के नेता सुशासन बाबू उर्फ पलटू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के वोटरों ने जबरदस्त नाराजगी जताकर नीतीश कुमार को केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बनाने लगे हैं। government moving towards mid term elections

    बीजेपी के समर्थन से बिखरने लगे लोग

    वैसे बीजेपी सरकार ने जे डी यू में से कुछ लोगों को केंद्र में मंत्री बनाकर तोड़ फोड़ पहले ही चालू कर दी थी। नीतीश पशोपेश में चाहे जितना भी रहें उनकी पार्टी का टूटना सुनिश्चित है। बचे हुए लोग पार्टी को कितने दिनों तक बचा पाएंगे कहना मुश्किल है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू के वोटर्स जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से आते हैं बीजेपी को समर्थन देने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।

    वक्फ संशोधन कानून का असर

    केंद्र द्वारा नायडू के समर्थन से वक्फ कानून संशोधन ने आग में घी डालने का काम किया है। जहां नीतीश कुमार अपना अस्तित्व बचाने में लगे हैं वहीं नायडू भी काफी परेशान नजर आते हैं। दोनों के फॉलोवर और मतदाता नाराज़ चल रहे हैं। यह नाराजगी दोनों के अस्तित्व पर भारी पड़ने वाली है। government moving towards mid term elections

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    विधानसभा चुनाव

    ऐसे में जबकि दिसंबर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले है उससे पहले ही नीतीश कुमार और नायडू को फिर से विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है। एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई नजर आने लगी है। नीतीश कुमार और नायडू के लिए अपनी अपनी पार्टी बचाने का अंतिम मौका है। अतः संभव है कि दोनों केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेकर शहीद हो जाएं।

    राष्ट्रपति शासन की सिफारिश

    उसके पूर्व मानसून सेशन के बाद केंद्र की बीजेपी सरकार राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव करने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दें। दोनों ही स्थितियों में मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल हैं। जिसमें बीजेपी वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिन्दू मतों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। अतः देश को जनता के द्वारा दिए गए अरबों टैक्स की बर्बादी देखने को मिल सकती है। government moving towards mid term elections

  • बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा पर शक्ति प्रयोग क्यों?

    बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा पर शक्ति प्रयोग क्यों?

    • मंदिरों में बलि देने की परंपरा को बंद कर उदाहरण प्रस्तुत करे सरकार
    • सुप्रीम कोर्ट के आदेश स्वीकार कर मुसलमानों ने नजीर पेश की
    • भारतीय संविधान कानून और न्यायालय में विश्वास रखते हैं भारत के मुसलमान

    डिजिटल डेस्क
    हिंदू हिंदुत्व के ठेकेदार बनने वाले आरएसएस के उपांग बीजेपी, विश्वहिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे संगठन भारत के मुसलमानों द्वारा बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा बंद करने के लिए शक्ति प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हट रहे। उन्हें सबसे पहले हिंदुओं के जिन मंदिरों में जानवरों की बलि देकर उस मांस को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। उन मंदिरों में बलि देने की परंपरा को बंद कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। पहले सत्तर प्रतिशत हिंदुओं के मांस खाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। फिर मुसलमानों के बकरा बलि को कानून बनाकर रोका जा सकता है। निश्चित ही भारत के मुसलमान इसे स्वीकार करेंगे क्योंकि देश में समानता का व्यवहार माना जाएगा। बाबरी राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को स्वीकार कर मुसलमानों ने नजीर पेश की थी।
    अर्थ है
    भारत के मुसलमान भारतीय संविधान कानून और न्यायालय में विश्वास रखते हैं। अगर संसद ऐसा कानून बनाती है जिसमें किसी भी पशु की बलि यानी हत्या अपराध होगा जिसपर कानूनी अपराध मानकर कोर्ट दंडित करेगी तो निश्चित ही भारत के मुसलमान इससे सहमत होंगे। जहां तक देशप्रेम और देशभक्ति का सवाल है। उसमें भी मुसलमानों ने एकता का प्रदर्शन, पाकिस्तान के विरोध में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना और सरकार के साथ खड़े रहे हैं। यहां तक कि मुस्लिम महिला द्वारा ही भारतीय सेना ने सिंदूर ऑपरेशन का नायक बनाया था। प्रेस कांफ्रेंस में भी मुस्लिम और दलित चेहरा सामने लाकर बता दिया था कि भारतीय सेना जाति मजहब को नहीं मानती।वह भारत की रक्षा के लिए अपनी शहादत देती है।
    सेना ने प्रतीकात्मक रूप से संदेश दिया था कि मुसलमानों और दलितों पर अन्याय अत्याचार बंद कर देना होगा। भारत के जिन ग्रुपों को पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर का सच बताने विदेश भेजा गया था उसमें मुस्लिम चेहरा इस्लामिक राष्ट्रों में जबरदस्त संदेश देकर बता दिया कि पाकिस्तान बार बार अपने आतंकी भेजकर भारत में निर्दोष लोगों की हत्या करवाता है। जिससे साफ है कि देश का मुसलमान देश की हिफाजत के लिए पाकिस्तान हो या कोई अन्य राष्ट्र भारत का मुसलमान बलिदान देने को तैयार है। एकजुटता दिखने में मुसलमान पीछे नहीं हटे।
    पहले हिंदूधर्म और अब सनातनधर्म के ठेकेदारों को मालूम होना चाहिए कि सनातन धर्म में किसी भी जीव की हत्या का निषेध करता है।सत्य, प्रेम न्याय और पुण्य को धर्म जानना मानना ही सनातन धर्मी का संकेत है।
    गौ को माता मानने वाले क्यों नहीं उन चार हिंदू जिनके भारत में बड़े बड़े कत्लखाने हैं। जहां लाखों गाएं रोज काटकर उनका मांस विदेश भेजने वाले देशों में दूसरे नंबर पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिनसे हिंदुत्व और हिंदू की ठेकेदार बीजेपी सरकार चंदा लेने में संकोच नहीं करती, उन कारखानों को बंद कराने क्यों नहीं जाते? इसलिए कि मोदी सरकार उनके साथ खड़ी है।
    योगीजी क्यों नहीं उन कत्ल खानों में गौ का कटना बंद करा देते? हिम्मत नहीं पड़ती गौ भक्ति की आड में जो बजरंगदल खुद गौ काटकर पूजा स्थल में फेकने पर पकड़े जा चुके हैं। जो गौ मांस होने का शक केवल गरीब मुसलमानों पर कहर बनकर टूट पड़ते और उनकी हत्या का अपराध करने में नहीं झिझकते भला वे कैसे हिंदू और सनातनी होते हैं।
    सनातन धर्म तो समानता और न्याय का धर्म है फिर मॉब लांचिंग क्यों करते हैं? हत्या करना अपराध तो है ही पाप भी है। क्या उन्हें पाप करते शर्म आती है कभी? फिर किस मुंह से वे हिंदू और सनातनी कहते हैं। कभी खुद के हृदय में झांककर तो देखें। अगर उनकी आत्मा मरी नहीं होगी तो जवाब भीतर से ही मिल जायेगा।
    छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति मुसलमान, नौ सेना प्रमुख मुसलमान थे।महाराणा प्रताप के सेनापति मुसलमान थे।उन्होंने अपनी जान पर खेलकर महाराणा प्रताप के प्राण बचाए थे, जबकि मुगल सम्राट अकबर के सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह ने हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की हत्या करने की कोशिश की थी। जयपुर के ही जयसिंह ने औरंगज़ेब की गुलामी की थी और उसका सेनापति बनकर शिवाजी के ऊपर हमला किया और उन्हें बंदी बनाकर उनसे तीस किले मुगलों को सौंपने का समझौता करने को बाध्य किया। आगरा दरबार में लेजाकर शिवाजी की बेइज्जती कराई। मानसिंह और जयसिंह जैसे हिंदू और हिंदुत्व के शत्रुओं के परिजनों को सम्मान देने वाले कैसे किसी को गद्दार होने का सार्टिफिकेट दे सकते हैं?
    क्या जिन नेताओं की बहन बेटियों को मुगलों से शादी कराई गई और बाद में नेताओं ने अपनी बेटियां भतीजियां मुसलमानों से ब्याह दी वे किस मुंह से हिन्दू और सनातन शब्द बोलते हैं? जो लोग हत्या को अपराध और पाप मानते हैं खुद महात्मा गांधी के हत्यारे नाथु राम गोडसे को पूजते हैं। भारत बंटवारे के झूठे आरोप में महात्मा गांधी की हत्या करने वाला क्यों नहीं मोहम्मद अली जिन्ना जिसने अंग्रेजों से मिलकर देश को बांटा उसकी हत्या करने की मर्दानगी दिखाई?
    सच तो यह है कि जर्मन तानाशाह हिटलर के नाज़ीवाद और इटली के तानाशाह मुसोलिनी के फासीवाद को अपना आदर्श मानने वालों से शांति की उम्मीद कैसे रखी जा सकती है। वे भला सनातनधर्म की सहिष्णुता का पालन कैसे कर सकते हैं? सनातनधर्म में नफरत के लिए कोई भी स्थान नहीं है फिर हिंदू मुस्लिम करके वोट की राजनीति करने वालों से प्रेम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

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  • BMC चुनाव से पहले शिवसेना ने BJP को शर्तों में उलझाया

    BMC चुनाव से पहले शिवसेना ने BJP को शर्तों में उलझाया

    BMC चुनाव से पहले शिवसेना और बीजेपी में गठबंधन को लेकर नई खींचतान शुरू हो गई है। शिवसेना मुंबई में बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार है, लेकिन बदले में ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में भी बीजेपी का समर्थन चाहती है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    आगामी कुछ ही दिनों में चुनाव आयोग महाराष्ट्र में पार्षदों के चुनाव की अधिसूचना जारी करने वाला है। 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर चुनाव की तारीख जारी करने के आदेश दिए थे। चुनाव की तैयारियों के बीच महायुति गठबंधन में तोलमोल शुरू हो गए हैं। शिंदे की शिवसेना ने चुनाव से पहले बीजेपी के सामने अपनी शर्तों को रख दिया है। शिवसेना का कहना है कि अगर बीजेपी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव में गठबंधन चाहती है, तो उसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली (KDMC) में भी ऐसा ही करना होगा। शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दबाव बनाने के लिए उद्धव ठाकरे गुट के पार्षदों को शामिल करा रही है, ताकि गठबंधन नहीं होने की स्थिति में उन्हें चुनाव में उतारा जा सके। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    शिवसेना की शर्त क्या है?

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में गठबंधन को लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि बीजेपी पूरे प्रदेश में गठबंधन नहीं करेगी। इसके जवाब में शिवसेना ने भी अपनी चाल चल दी है और बीएमसी चुनाव के साथ अन्य नगर निगमों के चुनाव में भी गठबंधन का दबाव बना दिया है। शिवसेना के नेताओं ने कहा, कि बीजेपी मुंबई में गठबंधन करना चाहती है तो उसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में भी शिवसेना का साथ देना होगा। अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी बीएमसी की सत्ता में आ सकती है और शिवसेना ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में अपना दबदबा बनाए रख सकती है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    भाजपा को मुंबई में होगा नुकसान

    शिवसेना नेता ने कहा कि अगर बीजेपी अकेले बीएमसी चुनाव में उतरेगी तो उसे नुकसान होना तय है। मुंबई में बीजेपी उद्धव ठाकरे की सेना यूबीटी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी मगर उसे एकनाथ शिंदे की शिवसेना और मनसे के साथ भी दो-दो हाथ करना पड़ेगा। ऐसे में वोट बंट सकते हैं और बीजेपी को बीएमसी की सत्ता हासिल नही हो सकेगी। ऐसे में उसे शिवसेना का समर्थन लेना होगा। शिवसेना नेता ने साफ किया कि बीजेपी मुंबई में दबदबा बनाना चाहती है। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में मजबूत होना चाहती है। इन इलाकों में हमारी पार्टी वहां मजबूत है और हम चाहते हैं कि यह ऐसा ही बना रहे। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions

    उद्धव गुट के 45 पार्षद शिंदे गुट में शामिल

    जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई, तो मुंबई के ज्यादा पार्षद उनके साथ नहीं गए। अब बृहन्मुंबई महानगर पालिका का कार्यकाल खत्म हो गया है। एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के लगभग 45 पार्षदों को अपनी तरफ कर लिया है। शिवसेना की इस रणनीति से बीजेपी पर दबाव बढ़ रहा है। शिंदे बीजेपी को यह जताना चाहते हैं कि अगर वह ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में गठबंधन नहीं करती है, तो शिवसेना पुराने पार्षदों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव में उतार सकती है। इस वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions