डिजिटल डेस्क महाराष्ट्र/पालघर: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे पालघर जिले के विरार से एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आ रहा है। यहां 17 वर्षीय किशोरी के साथ दो आरोपियों ने भूत-प्रेत उतारने के नाम पर कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने शनिवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। 22 वर्षीय गिरफ्तार आरोपी खुद को तांत्रिक बताकर मंदिरों में शिकार ढूंढता था। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
पुलिस ने क्या कहा?
विरार पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह कुछ महीने पहले विरार के एक मंदिर में 22 वर्षीय आरोपी प्रेम पाटिल से मिली थी, वह खुद को तांत्रिक बताकर अपने आप को भूत प्रेत भगाने मे सक्षम बताता था। प्रेम ने उसके साथ दावा करते हुए कहा, कि वह जादू-टोना कर भूत प्रेत भगाता है। उसने किशोरी के बारे में बताया कि उस पर बुरी आत्मा सवार है। उसने कहा कि उसे ठीक करने के लिए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ेगा। इससे बुरी आत्मा भाग जाएगी। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
लॉज में ले जाकर दोनों ने किया दुष्कर्म
पीड़िता ने शिकायत में पुलिस को बताया, कि 30 जुलाई को प्रेम पाटिल और उसका साथी करण पाटिल ने उसे विरार के राजोडी बीच के पास एक लॉज में ले गया, जहां उन्होंने कथित तौर पर एक-एक कर दोनों ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बात को बाद में पीड़िता ने अपने दोस्त को बताई। इसके बाद उसी दोस्त ने पुलिस में शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित किया। जिसके बाद उसने पुलिस स्टेशन में दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
पीड़िता की शिकायत के बाद विरार पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम (POCSO) और महाराष्ट्र मानव बलिदान, अमानवीय आचरण, अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार फिलहाल मामले में आगे की जांच चल रही है। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहें लोगों दर्द आखिरकार एक महिला को अपनी जान गवां कर प्रकाश में लाना पड़ा है। जबकि लगातार हो रही जनता की मांगों पर सरकार को ध्यान देने की जरुरत है।
डिजिटल डेस्क मुंबई: पालघर से मुंबई के बीच एक महिला की मौत ने पूरे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और यहां की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। एक साधारण सी दुर्घटना और अस्पताल तक पहुचने में 49 वर्षीय छाया पुरव की मौत हो गई। कारण 3 घंटो तक एम्बुलेंस ट्रैफिक मे फंसा रहा और अस्पताल तक पहुंच ही नही पाया कि छाया ने दम तोड़ दिया। पति लगातार एम्बुलेंस में बैठे बैठे डॉक्टरों के संपर्क में था। पर ट्रैफिक मे फंसे होने की वजह से बेबस और लाचार अपनी पत्नी को निहारता और दिलासा देता रहा और छाया ने दम तोड़ दिया। Traffic jam took the life of a woman, ambulance was stuck for 3 hours
पेड़ की टहनी गिरने से हुआ हादसा
31 जुलाई को पालघर के अपने घर के पास खड़ी छाया पूरव के सिर पर अचानक एक भारी पेड़ की टहनी गिर गई। इस हादसे में उनके सिर, कंधे और रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोटें आई। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि इतनी गंभीर चोटों के लिए यहां जरूरी सेवाएं नही है, पूरे पालघर जिले में इस तरह के अपघात पर इलाज हो पाना मुश्किल है। मजबूरी में पीड़ित के परिजनों को उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल रेफर करना पड़ा।
2 अगस्त की दोपहर करीब 3 बजे छाया पूरव को एम्बुलेंस के जरिए मुंबई के लिए रवाना किया गया। सामान्य परिस्थितियों में पालघर से मुंबई 100 किलोमीटर का सफर लगभग 2 घंटे में तय हो सकता था। लेकिन जैसे ही NH-48 Mumbai-Ahmedabad Highwayपर एम्बुलेंस पहुंची, वहां लंबा और भारी ट्रैफिक जाम लगा हुआ था, गाड़ियां रेंग-रेंगकर चल रही थीं। एम्बुलेंस के ड्राइवर ने कई बार हॉर्न और सायरन बजाकर रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन जाम इतना था कि गाड़ियां किनारे नहीं हो पा रहीं थी। मरीज की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही थी, लेकिन जाम के आगे सब बेबस थे।
3 घंटो तक जाम में फंसे रहे
शाम 6 बजे तक एम्बुलेंस सिर्फ 70 किलोमीटर का ही सफर तय कर पाई। यानी तीन घंटे बाद भी मरीज मुंबई के अस्पताल से काफी दूर थी। इस बीच छाया पूरव की हालत गंभीर होती चली गई। उनके पति, जो एम्बुलेंस में साथ थे, डॉक्टरों से लगातार फोन पर बात कर रहे थे, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण उन्हें मीरा रोड के ऑर्बिट अस्पताल में भर्ती करने का फैसला किया गया। Traffic jam took the life of a woman, ambulance was stuck for 3 hours
हिंदुजा अस्पताल से सिर्फ 30 किलोमीटर पहले ऑर्बिट अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत जांचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत ने परिवार को गहरा सदमा दे दिया और यह सवाल छोड़ दिया कि अगर ट्रैफिक जाम न होता या पालघर में बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं होतीं, तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
महाराष्ट्र में ट्रैफिक और स्वास्थ्य समस्याओं पर सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़ा कर गई – क्यों पालघर जैसे बड़े जिले में ट्रॉमा सेंटर की सुविधा नहीं है? क्यों हाईवे पर आपातकालीन वाहन के लिए अलग ग्रीन कॉरिडोर नहीं बनाया जाता? क्यों हमारी यातायात प्रबंधन प्रणाली इतनी कमजोर है कि जान बचाने वाली गाड़ियां भी जाम में फंस जाती हैं? आपातकालीन चिकित्सा सहायता में समय की कीमत जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं हो सकती। यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी है कि तुरंत ट्रैफिक और हेल्थकेयर व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
जल विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुकान मालिक पर मेहरबानी कर भ्रष्टाचार पूर्वक जोड़ा नल कनेक्शन।
क्या उच्चअधिकारी करेंगे पानी पुरवठा विभाग की गैर कानूनी जल जोड़नी की जाँच?
मुंबई: भ्रष्टाचार का घुन मनपा को खाने लगा है। लापरवाह अफसर अपने कर्तव्य निर्वहन के स्थान पर गैरकानूनी तरीके से जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन दिया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अछूता नहीं बचा, जिसने टी एंड कोल्ड्रिंक के नाम पर चल रहे शॉप को 394 का लाइसेंस देकर अपने भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण पेश कर दिया। जबकि टी की टपरी का स्टॉल फुटपाथ पर है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 394 का लाइसेंस किसकी अथॉरिटी पर दिया गया? मनपा आयुक्त या आर/ दक्षिण विभाग के डीएमसी या फिर MOH, वैद्यकीय आरोग्य अधिकारी की अथॉरिटी का इस्तेमाल हुआ है कुछ पता नही। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices
मनपा ने खोया अपना लक्ष्य
यह सवाल आम जनता के बीच यक्ष प्रश्न की तरह मुहं बाये खड़ा है। जिस मनपा का गठन मुंबईकरों की सुविधा बढ़ाने के लिए लिए हुआ था। वहीं “असुविधा के लिए खेद है ” कि तर्ज पर मनपा अपना लक्ष्य खो चुकी है। एक ऐसा ही भ्रष्टाचार का मामला शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग त्रिकम दास रोड पर 14 अगस्त 1993 में मालिक अब्दुल रहमान द्वारा 15/10 के झोपड़े को 90000 में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को रजिस्ट्री की गई। 1976 के सेंसस में भी 15गुने दस फीट दर्ज किया गया।
यहां जल विभाग द्वारा पानी के कनेक्शन की अनुमति 25/09/2017 को उसी पते पर दी गई है। इसकी जानकारी RTI के माध्यम से उजागर हुआ। जबकि उपर्युक्त व्यक्ति को बिजली का कनेक्शन नियर आकांक्षा आर्केड के पते पर दिया गया। जो आकांक्षा आर्केड सीएचएस वडा पाव त्रिकम दास रोड के पते का है। फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसायटी द्वारा मौर्या फास्ट-फूड टी एंड कोल्ड्रिंक्स का प्रीमाइस में होने का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वार्ड को 12/03/2018 को लिखित दिया गया। बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/04/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया है।
लायसेंस विभाग की अनदेखी
यह पत्र बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक को चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दो वर्षों के लिए दिया गया लेकिन शॉप आकांक्षा आर्केड का कैसे लिखा गया? जबकि शॉप आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग से अलग है। गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम पर वड़ा पाव दर्ज है। सवाल यह है कि एक ही व्यक्ति को वड़ा पाव का लाइट आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड कैसे लिखा जा सकता है? वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक शॉप को कैसे सहमति दी गयी?
वहीं नेचर ऑफ बिजनेस में सिर्फ चाय की दुकान है तो वड़ा पाव कैसे बिक रहा है? जब सेंसस में 150 वर्गफुट है तो गुमास्ता में 120 फूट कैसे है? जबकि झोपड़े की रजिस्ट्री में 150 फिट है। फार्म p आकांक्षा आर्केड लिखा है तो B/F विभाग की NOC जो केवल चाल में लिया जाता है तो बिल्डिंग में कैसे NOC जारी किया गया? आकांक्षा बिल्डिंग सेक्रेटरी का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण को 12/03/2018 में लिखा। लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 6.5 मीटर फूट लेंथ ऑफ फ्रेंच बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ टी एंड कोल्ड्रिंक बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दिया गया।
एंटी करप्शन से जांच का अनुरोध
यहां पर कागजात में घपलेबाजी की गई है। लेकिन शिकायत पत्र पर कोई जांच नहीं की गई क्यों? स्पष्ट है बीएमसी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया गया है। ज्ञात हो कि बीएमसी ने चंद सिक्के घूस लेकर कॉमर्शियल वाटर कनेक्शन पास कर दिया जिसका संज्ञान बीएमसी नही ले रही। डीएमसी और वार्ड ऑफिसर की मिलीभगत से धोख़ाधड़ी की गई है। बीएमसी स्वास्थ विभाग के द्वारा 394 एवं जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन की अनियमितताओं के भ्रष्टाचार की जांच एंटी curruption विभाग से किये जाने का अनुरोध है। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices
मुंबई में एक महिला ने अपने बैंक कर्मचारी दोस्तों के साथ मिलकर अपने एक्स-ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। इसमें निजी डेटा की चोरी कर धमकाया गया, नौकरी छीन ली गई और बदनाम करने की कोशिश से परेशान पीड़ित जब कोर्ट पहुंचा। तब जाकर पुलिस ने किया 6 लोगों पर केस दर्ज.. Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
मुंबई: कांदीवली पश्चिम के चारकोप इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने उसके एक्स ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। आरोपी महिला ने धमकी दी कि अगर पैसा नहीं दिए तो वह उसे जेल भिजवा देगी। पीड़ित ने डर के साये में कई दिनों तक यह सब झेला, लेकिन आखिरकार हिम्मत जुटाकर पुलिस को आप बीती सुनाई। लेकिन पुलिस ने भी जब फरियाद नहीं सूनी तब उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार पुलिस ने भरोरे को तार तार कर मानसिक प्रताड़ित कर रही ब्लैकमेलर एक्स गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
बदनाम कर जेल में सड़ाने की धमकी
दरअसल, चारकोप पुलिस ने डॉली कोटक नाम की एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली महिला को गिरफ्तार किया है। उस पर अपने एक्स-बॉयफ्रेंड से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का आरोप है। पीड़ित एक आईटी सेक्टर में काम करता था। लेकिन वह पहले से ही एक झूठे केस में फंसा हुआ था और हाल ही में जमानत पर बाहर आया। तभी कोर्ट के बाहर डॉली ने उसकी बहन को पकड़ लिया और कहा, “भाई को बचाना है तो 1 करोड़ रुपये दो, वरना मैं मीडिया में उसका नाम खराब कर दूंगी और जेल में सड़ने दूंगी।” Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
डिजिटल डाटा की चोरी
खबरों के मुताबिक, डॉली कोटक यहीं नहीं रुकी, उसने तीन अन्य बैंक कर्मचारियों की मदद से पीड़ित के निजी और डिजिटल डाटा तक अपनी पहुंच बनाई। इसमें एचडीएफसी बैंक के हर्ष श्रीवास्तव और अनंत रुइया तथा आईसीआईसीआई बैंक के जयेश गायकवाड़ का नाम भी शामिल है। जिन लोगों ने डॉली की मदद की। इनकी मदद से डॉली ने पीड़ित के ईमेल से लेकर बैंक खाते, लोकेशन और निजी फोटोज तक एक्सेस पा लिया। यहां तक कि पीड़ित के ईमेल से अपना नंबर भी लिंक करा लिया गया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
नौकरी से निकालवा दिया
मई 2024 में पीड़ित को डॉली के नंबर से एक धमकी भरा मैसेज आया कि “पैसे दे दो या जेल में मरो, तुम कभी नहीं जीत पाओगे।” इसके कुछ दिन बाद उसने पीड़ित के ईमेल आईडी से कंपनी के एचआर को कई बदनाम करने वाले मेल भेज दिए, जिससे उसकी नौकरी चली गई। पुलिस में शिकायत के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने आखिरकार बोरिवली मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर चारकोप पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 175(3) के तहत मामला दर्ज किया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
एफआईआर में डॉली कोटक, उसके भाई सागर कोटक, दोस्त प्रमिला वाज़ और तीन बैंक कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर आईटी एक्ट, आइपीसी की कई धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह और डॉली पहले रिलेशनशिप में थे। यह मामला न केवल ब्लैकमेलिंग और निजी रिश्तों के खतरनाक मोड़ की तरफ इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग कितना घातक हो सकता है। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
एक नाबालिग बच्ची के शोषण के आरोप में जब फरार 55 वर्षीय आरोपी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपी दरवाजा बंद कर आत्महत्या की धमकी देता रहा। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तबतक आरोपी फंदे से लटक चुका था।
मुंबई: मंगलवार की रात को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस समय दरवाजा बंद कर आत्महत्या करने का प्रयास किया जब मुंबई पुलिस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गई थी। पुलिस उसे एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी। लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति के देखभाल के लिए उसे नियुक्त किया गया था। उसी दौरान पीड़ित की नाबालिग बच्ची पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
पुलिस ने क्या कहा?
नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि “व्यक्ति को तुरंत पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग 36 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में उसे होश आया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।” Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
नाबालिग बच्ची का यौन शोषण
नाबालिग लड़की के पिता को पिछले साल लकवा का दौरा पड़ा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी जिसे मई महीने में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नाबालिग लड़की के पिता की देखभाल के लिए रखा गया था। शिकायत के मुताबिक नाबालिग की मां जब काम पर चले जाती थी तब हर रोज बच्ची का यौन शोषण और अश्लील टिप्पणियां करता था। यहां तक कि लड़की की शिकायत पर उसकी मां ने आरोपी को चेतावनी भी दी उसके बावजूद आरोपी उसे परेशान करता रहा।
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को आरोपी ने लड़की के बेडरूम में घुसकर कथित तौर पर परेशान किया। जिसके बाद लड़की की मां ने पुलिस मे शिकायत करने का फैसला लिया। पुलिस ने 29 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही, आरोपी मुंबई से फरार हो गया। पहले उत्तर प्रदेश और बाद में कर्नाटक भाग गया। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
आत्महत्या की कोशिश
मंगलवार को पुलिस को जब पता चला कि आरोपी बदलापुर में है तो दो सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन से चार कांस्टेबल की एक टीम वहां पहुंची। रात करीब 10 बजे, आरोपी ने अपने घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। हालांकि, पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
मुंबईः गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी में एक ऐसा दर्दनाक वाक्या पेश आया है। जिसमें कथित तौर से 35 वर्षीय तीन बच्चों की मां ने अपने ही पति को अपने प्रेमी की मदद से मौत के घाट उतार दिया। हालांकि पति इलाज के दौरान तडपते हुए भी पत्नी की खोफ से हकीकत छुपाता रहा। लेकिन जब पिता की मौत ही हो गई तो नाबालिग बेटी ने पुलिस को सारी कहानी बयां कर दी। इस पुरे केस में आरे पुलिस की मुख्य भुमिका रही। जवाबों पर संदेह जताते हुए उसने पूछताछ करना जारी रखा। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
पुलिस ने क्या कहा?
आरे पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रवींद्र पाटील ने बताया, कि आरे मिल्क कॉलोनी में एक मेकअप आर्टिस्ट भरत लक्षमण अहिरे की इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है। मामले में मृतक की 35 वर्षीय पत्नी राजश्री अहिरे को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि राजश्री ने षडयंत्र रचकर अपने प्रेमी चंद्रशेखर पडायाची और उसका साथी रंगा के हाथों अपने ही पति की हत्या करवा दी। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
गिरफ्तार राजश्री और मृतक भरत अहिरे की फाइल तस्वीर
पत्नी ने खेला पति के साथ खेल
पुलिस के मुताबिक, पत्नी के अवैध संबंध के चलते भरत की हत्या हुई है। पिछले महीने जब भरत ने अपनी पत्नी से इस बारे में पूछा, तो उसने भोली बनते हुए चंद्रशेखर द्वारा उस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके बाद भरत ने चंद्रशेखर को फोन किया, जिसने उसे गोरेगांव पूर्व के आरे मिल्क कॉलोनी स्थित एकतानगर, यूनिट नंबर 31 में एक सार्वजनिक शौचालय के पास मिलने के लिए बुलाया। इस दौरान राजश्री भी अपने पति के साथ मिलने वाली जगह पर भी गई। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
15 जुलाई की रात जब चंद्रशेखर और रंगा भरत से मिले तो उन्होंने उसके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। चंद्रशेखर ने उसकी छाती, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर बेतहाशा मुक्का मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखर का साथी रंगा हमले के दौरान भरत को पीछे से पकड़ रखा था। हमले के वक्त राजश्री बगल में खड़े होकर तमाशा देखती रही। न तो उसने हस्तक्षेप किया और न ही आवाज़ लगा कर मदद मांगी। इसके बाद जैसे ही स्थानीय लोग घटनास्थल पर इकट्ठा होने लगे, दोनों हमलावर भाग गए। यहां राजश्री का और एक गुनाह सामने आया। राजश्री अपने पति को अस्पताल ले जाने के बजाय, अपने घर ले गई और तीन दिनों तक बिना किसी इलाज के उसे तड़पता हुआ छोड़ दिया।
नाबालिग बेटियों ने मांगी मदद
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक भरत के दो बेटियां 13 और 5 साल की हैं और एक 3 साल का बेटा है। 13 वर्षीय नाबालिग अपने पिता की बिगड़ती हालत देख सहमी हुई थी। लेकिन जब उसने देखा कि पिता को खून की उल्टियां होने लगीं तो उसने ने रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी। सूचना पाकर भरत की भाभी घर आईं, जहां राजश्री ने दावा किया कि भरत एक बाइक दुर्घटना में घायल हो गया है। आखिरकार उसे मलाड पूर्व के पठानवाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में राजश्री ने वही एक्सिडेंट वाली झूठी कहानी दोहराई, इसपर भरत भी पत्नी के दबाव और डर के कारण उसी के हां में हां मिलाया। जबकि इसकी जानकारी डॉक्टरों ने मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के तहत पुलिस को रिपोर्ट भेजी। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
हालांकि पुलिस को बयान में बहुत सी गड़बड़ियां नजर आ रही थी। इसलिए उन्होंने डिटेल में पूछताछ की और भरत के दिए गए बयान के आधार पर बेटी से भी बात की। क्यों कि रिशतेदारों को पहली सूचना बेटी ने दी थी। इसलिए पुलिस को शक हुआ और पूछताछ में बेटी ने बताया कि उसने मार पीट के समय छुपकर सारी घटना देख ली थी। पुलिस ने बताया कि बेटी के बयान के वक्त उसकी मां चुपचाप खड़ी देख रही थी। राजश्री अपने पति को अस्पताल ले जाने के बजाय घर ले आई और उसका इलाज भी नहीं कराया आखिरकार 5 अगस्त को इलाज के दौरान भरत की मृत्यु हो गई। बेटी के दिए गए बयान के आधार पर यह पूरा मामला सामने आया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य दो फरार आरोपियों की तलाश चल रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सन्नी नरेशकुमार, रवि अंग्रेज, राहुल पृथ्वीसिंह, अनुज कुलदीप कुमार और आदित्य योगेश कौशिक के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच को मिली खूफिया जानकारी के आधार पर हुई धरपकड़..
मुंबई: कॉटन ग्रीन रेलवे स्टेशन के पास से मुंबई क्राइम ब्रांच की हफ्ता वसूली विरोधी सेल ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार सभी आरोपी शूटर बताए जा रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि ये सभी लोग हरियाणा से मुंबई आए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के पुलिस अधिकारी आरोपियों के पास से 50 जिंदा कारतूस और 4 पिस्तौल भी बरामद कर इस बात का पता लगाने में जुटी है कि ये लोग क्या किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए थे? 5 sharp shooters from Haryana arrested in Mumbai and many weapons recovered
किसने भेजा हत्यारों को मुंबई?
घटना स्थल कालाचौकी पुलिस स्टेशन अंतर्गत होने की वजह से मुंबई क्राईम ब्रांच की टीम ने उन्हें पुलिस स्टेशन लेजाकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सन्नी नरेशकुमार, रवि अंग्रेज, राहुल पृथ्वीसिंह, अनुज कुलदीप कुमार और आदित्य योगेश कौशिक के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच को मिली खूफिया जानकारी के आधार पर यह धरपकड़ हुई। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है, कि आखिर इन्हें मुंबई में हथियार लेकर किसने भेजा था और उनका इरादा क्या था?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने जब इन्हें मौके से पकड़ा तब अधिकारी ने पूछा, “क्या तुम्हारे पास जो पिस्तौल और कारतूस बरामद किया गया उसका लाइसेंस है?” तब गिरफ्तार आरोपियों ने कहा, “नहीं।” पूछा गया, कि “अगर लाइसेंस नहीं है, तो तुम हथियार किस काम से और कहां से लाए हो?” पूछने पर एक आरोपी ने बताया कि वह इसे बेचने के लिए लाया था।हालांकि, किसको बेचने के लिए लाया गया था? वो बता नही रहे हैं। इनके बयान तो सुन रहे हैं लेकिन अपने स्तर पर मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी जांच पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि कहीं किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए हों?
पुलिस के अनुसार, मोतियाबिंद से पीड़ित एक 67 साल के शख्स ने अस्पताल से संपर्क किया था और दो नेत्र रोग विशेषज्ञों ने मार्च में उसकी सर्जरी की थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि उनके अलावा, दिसंबर 2024 से वहां सर्जरी कराने वाले चार अन्य लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। मामला सिविल सर्जन के ध्यान में लाया गया, जिनकी हालिया रिपोर्ट ने शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि की गई। रिपोर्ट हाल ही में वाशी पुलिस को भेजी गई और मामला दर्ज किया गया।
वाशी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय धूमल ने कहा, “हम जांच कर रहे हैं कि क्या डॉक्टरों को 87 साल की उम्र में सर्जरी करने की अनुमति है।” वरिष्ठ निरीक्षक ने कहा कि पुलिस ने यह भी पाया कि डॉक्टरों ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के साथ अपने लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं कराया था।
मुकदमा हुआ दर्ज
डॉक्टर्स पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125 (ए), 125 (बी) (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य) और 3 (5) (सामान्य इरादा) के साथ-साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। A father-son duo of eye doctors together took away the eyesight of 5 people. Case registered…
हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार सलमान खान ने 2017 में जिस सार्वजनिक शौचालय का उद्घाटन किया था उसे एक परिवार ने कब्जा कर लिया है। घटना मुंबई के गोरेगांव (पूर्व) आरे मिल्क कॉलोनी की है।
मुंबई: गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी के यूनिट क्रमांक 30 का सार्वजनिक शौचालय कब्जा हो चुका है। साल 2017 में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने यहां दो सार्वजानिक शौचालयों का उद्घाटन किया था। जिसमें से एक जो फिल्म सिटी के पिछले गेट के पास यूनिट क्रमांक 30 में स्थित है उसकी हालत खस्ता हो गई है। इस सार्वजनिक शौचालय के एक हिस्से पर एक परिवार ने अतिक्रमण कर लिया है, जिसका दावा है कि उसे शौचालय की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
जमीनी हकीकत
जब पत्रकार ने घटनास्थल का दौरा किया, तो ललिता राणे नामक एक महिला यहां कपड़े धोती हुई दिखाई दीं, जबकि उनकी एक और रिश्तेदार जानकी नामक वृद्ध महिला शौचालय के महिला खंड में सो रही थीं, जिसे रहने के लिए जगह और सामान रखने के लिए स्टोरेज रुम में बदल दिया गया है। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
कब्ज़ेदारों ने क्या कहा?
ललिता ने पत्रकार से बात करते हुए बताया, कि “मेरा जन्म यहीं आरे मिल्क कॉलोनी में हुआ है, और मेरी सास, कमलदेवी राणे, जो पहले शौचालय का रखरखाव संभालती थीं, वह भी इसी इलाके में जन्मी और पली-बढ़ी थीं। दो साल पहले उनका निधन हो गया। बीएमसी ने सालों पहले इस शौचालय का निर्माण कराया था, उसे तोड़ दिया और फिर से बनवाया। सलमान खान भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। अब सालों से बीएमसी ने इसका रखरखाव नहीं किया है। इसलिए इसकी हालत खस्ता हो गई है।
उसने ये भी कहा, कि इसमें पानी का कनेक्शन नहीं है और इसे चालू रखने के लिए कोई धनराशि भी नहीं दी गई है। इस इलाके में अक्सर नशेड़ी देखे जाते हैं, जो हमारी जान के लिए खतरा बने रहते हैं। हमने पास में ही एक छोटा सा कुआँ खोदा है, जिसका इस्तेमाल हम नहाने और बर्तन धोने के लिए करते हैं। अगर बीएमसी पानी और रखरखाव के लिए धनराशि उपलब्ध करा दे, तो यह शौचालय फिर से लोगों की सेवा के लिए चालू किया जा सकता है।”
टूट गये हैं सभी दरवाजे
उनकी मौसी ने आगे कहा, “हम शौचालय के इस हिस्से का इस्तेमाल सोने और सामान रखने के लिए करते हैं। यहाँ बिजली या पानी का कनेक्शन नहीं है। महिलाओं का सेक्शन असुरक्षित है – सभी दरवाजे टूटे हुए हैं, इसलिए हमें इसे हमेशा के लिए बंद करना पड़ा। हम बीएमसी और सलमान खान से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को देखें और हमारी मदद करें।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
शौचालय ब्लॉक का वह हिस्सा, जिस पर अतिक्रमण नहीं हुआ था, बेहद खराब हालत में था, जहाँ बुनियादी स्वच्छता, पानी की आपूर्ति और यहाँ तक कि दरवाज़े भी नहीं थे। परिसर में गुटखे के पैकेट, शराब की बोतलें और सिगरेट के टुकड़ों से भरा पड़ा था। इसके अलावा, उद्घाटन और उसमें शामिल लोगों का विवरण देने वाली स्मारक टाइल भी गायब था।
प्रशासन से मरम्मत की मांग
आरे मिल्क कॉलोनी के शिवसेना (यूबीटी) शाखा प्रमुख संदीप गढ़वे ने कहा, “सलमान खान ने छह रूमों वाले दो सार्वजनिक शौचालयों का उद्घाटन किया था – एक मद्रासपाड़ा में और दूसरा यूनिट 30 में। दुर्भाग्य से, अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यूनिट 30 की हालत बेहद खराब हो गई है। एक तरफ एक परिवार ने अतिक्रमण कर उसे घर बना लिया है। पानी, दरवाज़ों और रखरखाव की कमी के कारण दूसरा आधा हिस्सा अनुपयोगी है, जिससे लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आरे के सीईओ और बीएमसी को तत्काल इस शौचालय की मरम्मत करानी चाहिए।”
रहिवासियों ने क्या कहा ?
एक निवासी ने कहा, “रात में, फिल्म सिटी गेट के पास के इलाके में नशेड़ी और असामाजिक तत्व अक्सर आते हैं। कोई भी वहाँ जाना नहीं चाहता। एक परिवार ने शौचालय के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है। लेकिन बीएमसी, आरे के सीईओ और पुलिस इसपर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करती।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
एक स्थानीय निवासी विनोद एकनाथ कांबले ने कहा, “शौचालय की सुविधा न होने के कारण हमें सड़क पर या जंगल में पेशाब करने को मजबूर होना पड़ता है। नशेड़ी रात में घूमते रहते हैं। यह हमारे परिवारों के लिए जोखिम भरा है, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम लाचार हैं और अपने घरों से दूर स्थित शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं।”
बीएमसी अधिकारी ने क्या कहा?
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) उपआयुक्त किरण दिघावकर ने कहा, “आरे मिल्क कॉलोनी और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के अंतर्गत आते हैं और इसका प्रशासन आरे के सीईओ द्वारा किया जाता है। मरम्मत या रखरखाव के लिए, सीईओ कार्यालय और ईएसजेड निगरानी समिति से अनुमति लेना आवश्यक होता है। 2017 में जब हमने सार्वजनिक उपयोग के लिए शौचालय ब्लॉक का विकास किया था, तब हमने आरे मिल्क कॉलोनी के सीईओ से अनुमति ली थी। सीईओ की स्वीकृति मिलने के बाद हम सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत और रखरखाव कर पाएंगे।”
शौचालय के बाहर ट्यूबवेल की व्यवस्था
इस बीच, आई लव मुंबई फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सदस्य राहुल कनाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान देंगे और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगे। आरे सीईओ कार्यालय और वन विभाग से अनुमति संबंधी समस्याओं के कारण, बीएमसी पानी का कनेक्शन नहीं दे पा रही है। इस पर हमने सार्वजनिक शौचालय के बाहर एक ट्यूबवेल की व्यवस्था की थी।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
अब मुंबई पुलिस से जुड़ी कोई भी शिकायत और सुझाव आम जनता खुद पुलिस कमिश्नर से मिल कर दे सकते हैं। मुंबई पुलिस कमिश्नर हर मंगलवार मिलने का फैसला किया है। पीड़ितों के लिए खुशखबरी!
मुंबई: अब शहर में पुलिस नहीं कर रही है आपकी शिकायत पर कार्रवाई, तो बिना अपॉइंटमेंट आप मुंबई पुलिस कमिश्नर से मिल सकेंगे। हर मंगलवार को दोपहर 3:30 बजे, मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती खुद आम नागरिकों से मिलकर उनकी परेशानी और समस्याओं को सुनने का फैसला किया है ताकि आम नागरिकों और पुलिस प्रशासन के बीच सीधा संवाद हो सके। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
Every Tuesday at 3:30 PM, I look forward to hearing your grievances at the Mumbai Police Headquarters.
— Commissioner of Police, Greater Mumbai (@CPMumbaiPolice) August 5, 2025
बिना अपॉइंटमेंट मुंबई पुलिस कमिश्नर से मुलाकात
इस अनोखी पहल की सबसे खास बात यह है कि आम नागरिकों को किसी भी अपॉइंटमेंट की आवश्यकता नहीं है। कोई भी नागरिक, जिसकी कोई शिकायत या सुझाव है, वो सीधे मुंबई पुलिस मुख्यालय पहुंचकर पुलिस कमिश्नर से मिल सकता है। इसका उद्देश्य लोगों की समस्याएं प्राथमिकता के आधार पर सुनना और उनका त्वरित समाधान निकालना है। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
मुंबई पुलिस कमिश्नर की अनोखा पहल
मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा, “हर मंगलवार दोपहर 3:30 बजे, मैं मुंबई पुलिस मुख्यालय में आपके साथ सीधे संवाद के लिए मौजूद रहता हूं। किसी अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं। बस आइए और अपनी बात कहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक, महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम या अन्य किसी विषय पर वे खुलकर अपनी बात रख सकते हैं।
इस अभियान को सोशल मीडिया पर #MeetCPonTuesday नाम से प्रचारित किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ें और इसका लाभ उठा सकें। मुंबई जैसे महानगर में, जहां दिन-प्रतिदिन शिकायतों का ढेर लगता है, वहां इस तरह की पहल जनता के विश्वास को मजबूत कर रही है। इस पहल को लेकर लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई नागरिकों ने कहा कि अब उन्हें यह भरोसा है कि उनकी आवाज़ Mumbai Police Higher Authority तक पहुंचेगी और समाधान भी मिलेगा। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public
पुलिस और जनता के बीच बढ़ा भरोसा
विशेषज्ञों की माने तो यह पहल पुलिस और जनता के बीच भरोसे की खाई को पाटने में मदद करेगी। इससे न केवल शिकायतों का निपटारा होगा, बल्कि लोगों को यह भी महसूस होगा कि पुलिस उनके साथ है और उनकी बात सुनी जा रही है। मुंबई पुलिस की यह पहल ‘Meet CP on Tuesday’ न केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था है, बल्कि जनता के साथ संवाद का एक नया मंच भी है। जब कोई उच्च अधिकारी खुद जनता से मिलने को तैयार हो, तो यह प्रशासन की संवेदनशीलता और पारदर्शिता का परिचायक है। अगर आपके पास कोई शिकायत है, तो अगला मंगलवार आपका हो सकता है – मुंबई पुलिस मुख्यालय, दोपहर 3:30 बजे, बिना किसी अपॉइंटमेंट के। Now Mumbai Police Commissioner will directly communicate with the general public