मुंबई में बीएमसी ने 50 आदर्श शिक्षकों को सम्मानित किया। महापौर रितू तावडे ने अगले साल से पुरस्कार राशि 11 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की घोषणा की।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 50 शिक्षकों को आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार से सम्मानित किया। 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित समारोह में मुंबई की महापौर रितू तावडे ने घोषणा की कि अगले साल से पुरस्कार की राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये की जाएगी। इस फैसले से प्रत्येक पुरस्कार विजेता शिक्षक को 14 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।
भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और चिड़ियाघर के पेंगुइन सभागार में वर्ष 2025-26 के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इसमें महानगरपालिका और संबंधित निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के विकास के लिए नए शैक्षणिक प्रयोग करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
पुरस्कार राशि में 14 हजार रुपये की बढ़ोतरी
फिलहाल आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार के तहत प्रत्येक शिक्षक को 11 हजार रुपये दिए जाते हैं। महापौर की घोषणा के बाद अगले वर्ष से यह राशि 25 हजार रुपये हो जाएगी। इस तरह पुरस्कार राशि में लगभग 127 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
समारोह के दौरान शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने पुरस्कार की राशि बढ़ाने की मांग की थी। इस पर महापौर रितू तावडे ने अगले साल से नई राशि देने की घोषणा की।
शिक्षकों को केवल पढ़ाई नहीं, बच्चों के व्यक्तित्व पर भी ध्यान देना चाहिए
महापौर रितू तावडे ने कहा कि शिक्षक देश की भावी पीढ़ी का निर्माण करते हैं। वे विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उनमें नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और इंसानियत की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि 50 शिक्षकों का सम्मान करना उन लोगों का सम्मान है, जो देश को मजबूत, स्वाभिमानी और जिम्मेदार नागरिक देने में योगदान कर रहे हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षक की जगह नहीं ले सकती
महापौर ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कंप्यूटर और सामाजिक माध्यमों के जरिए बच्चों को एक क्लिक पर बहुत सारी जानकारी मिल सकती है। लेकिन किसी निराश बच्चे की परेशानी समझना, उसे हिम्मत देना और आगे बढ़ने का भरोसा दिलाना शिक्षक ही कर सकते हैं।
तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन विवेक और मानवीय मूल्यों का विकास करने में शिक्षक की भूमिका अहम है।
विकसित भारत 2047 के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम
महापौर ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने में आज के शिक्षकों का योगदान महत्वपूर्ण होगा। शिक्षकों को विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और नई चीजें सीखने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के शिक्षक केवल परीक्षा की तैयारी कराने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों को नए विचारों और रचनात्मक कामों के लिए भी प्रोत्साहित करें।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की अपील
महापौर ने कहा कि शिक्षा को केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और खुशी का ध्यान रखना भी जरूरी है।
उन्होंने शिक्षकों से अपील की है, कि महानगरपालिका स्कूलों से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छा होने के साथ तनावमुक्त, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बने। इसके लिए शिक्षकों को बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए।
121 आवेदकों में से 50 शिक्षकों का चयन
वर्ष 2025-26 के आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार के लिए 121 शिक्षकों के आवेदन आए थे। इनमें से 50 शिक्षकों को चुना गया। चयन प्रक्रिया में महानगरपालिका के प्राथमिक और विशेष शिक्षक, माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक तथा निजी अनुदानित और गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षक शामिल थे।
शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, विद्यार्थियों के विकास के लिए किए गए प्रयासों और अध्यापन में अपनाए गए नए तरीकों को चयन में महत्व दिया गया।
तीन दिनों तक आयोजित किए गए साक्षात्कार
चयन प्रक्रिया के तहत अगस्त में तीन दिनों तक शिक्षकों के साक्षात्कार आयोजित किए गए थे। विद्यार्थियों की उपलब्धियों, स्कूल के विकास और पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयासों को भी महत्व दिया गया।
इस तरह पुरस्कार के लिए शिक्षकों के अनुभव के साथ उनके काम और शैक्षणिक प्रयोगों को भी ध्यान में रखा गया।
मराठी माध्यम के 20 शिक्षकों को मिला सम्मान
पुरस्कार के लिए चुने गए 50 शिक्षकों में मराठी माध्यम के 20 शिक्षक शामिल थे। हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के 10-10 शिक्षकों को भी पुरस्कार के लिए चुना गया।
इसके अलावा उर्दू माध्यम के आठ और गुजराती तथा कन्नड़ माध्यम के एक-एक शिक्षक को सम्मानित किया गया। इस तरह अलग-अलग भाषा माध्यमों में शिक्षा देने वाले शिक्षकों को पुरस्कार सूची में जगह मिली।
वर्ष 1971 से दिया जा रहा है आदर्श शिक्षक पुरस्कार
आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार की परंपरा वर्ष 1971 से चली आ रही है। इसके जरिए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।
पुरस्कार में नकद राशि के अलावा पदक, प्रमाणपत्र और अन्य सम्मान सामग्री भी शामिल रही है। इस बार इन दूसरी सुविधाओं में बदलाव की कोई घोषणा नहीं की गई है।
उप महापौर संजय घाड़ी ने शिक्षकों को दी बधाई
उप महापौर संजय घाड़ी ने कहा कि शिक्षा और शिक्षकों के योगदान से गांव, शहर और देश का विकास होता है। मुंबई महानगर के विकास में भी महानगरपालिका स्कूलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों और उनके परिवारों को बधाई दी।
शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने की सराहना
शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के गुरु होने के साथ-साथ अभिभावक की भूमिका भी निभाते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता कितनी भी विकसित हो जाए, वह शिक्षक की जगह नहीं ले सकती।

उन्होंने पुरस्कार के लिए साक्षात्कार के दौरान शिक्षकों की ओर से प्रस्तुत शैक्षणिक प्रयोगों और विद्यार्थियों के विकास के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।
यामिनी जाधव ने महानगरपालिका स्कूलों के योगदान को बताया अहम
स्थापत्य समिति (शहर) की अध्यक्ष यामिनी जाधव ने कहा कि महानगरपालिका स्कूलों के शिक्षक विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत करते हैं। इसी का परिणाम है कि इन स्कूलों के विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में ऊंचे पदों तक पहुंच रहे हैं।
डॉ. प्राची जांभेकर ने दूसरे शिक्षकों से प्रेरणा लेने की अपील की
शिक्षा विभाग की उप आयुक्त डॉ. प्राची जांभेकर ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्कूलों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे शैक्षणिक प्रयोग दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।
उन्होंने महानगरपालिका स्कूलों में विद्यार्थियों की शिक्षा और विकास के लिए शिक्षकों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
समारोह में ये जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में सी और डी विभाग समिति के अध्यक्ष आकाश पुरोहित, नगरसेविका उर्मिला पांचाल, नगरसेविका राजेश्री भाटणकर, नगरसेविका मेहजाबीन अतीक अहमद खान और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक दत्तात्रेय वारे उपस्थित थे।
इसके अलावा शिक्षा अधिकारी सुजाता खरे, शिक्षा अधिकारी कीर्तिवर्धन किरीतकुडवे सहित अन्य गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए।
महानगरपालिका की घोषणा के अनुसार, अगले साल से आदर्श शिक्षक महापौर पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपये होगी। नई राशि लागू होने की निश्चित तारीख और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट होने के बाद शिक्षकों को बढ़ी हुई पुरस्कार राशि मिलने की जानकारी सामने आएगी।
